दीदी के देवर ने कुंवारी बुर गांड फाड़ी

Views: 1 Category: First Time Sex By surbharti071 Published: August 28, 2026 📖 9 min read
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कुवारी लड़की सेक्स कहानी में मैं सेक्सी माल अपनी चूत को बिनाचुदी सीलबंद लिए बैठी थी जबकि मेरी सहेलियों ने खूब लंड ले लिए थे. मुझे भी लंड का मजा लेना था.

दोस्तो, मैं जूली हूँ. गोरी, छरहरी, आकर्षक, अठारह वर्षीय बारहवीं क्लास की छात्रा.

यह कुवारी लड़की सेक्स कहानी रिश्तों में चुदाई पर आधारित है.

उस दिन मैं स्कूल से आकर सीधे बाथरूम में घुसी, दरवाजा बंद करके अपनी टी-शर्ट उतार दी.

आज रुचि और चंपा ने स्कूल में चुपके चुपके अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को दिखाकर मुझे बेहद बेचैन कर दिया था.
उन दोनों की तुलना में मेरी चूचियां कहीं नहीं टिकतीं.

मैंने अपनी चूचियों को हाथ लगाया तो मेरे बदन में एकदम सनसनी सी होने लगी.
पहले मैंने प्यार से अपनी चूची सहलाई, फिर अच्छा लगा तो मसलने लगी.
मुझे मजा आने लगा.
मेरी बुर में गुदगुदी होने लगी.

मैंने फटाफट से पैंटी भी निकाल दी और पूरी नंगी हो गई.
पहली बार मैंने अपने तन का निरीक्षण किया था.

नाभि के नीचे बुर के ऊपरी भाग को देखा तो माँ के बनाए तिकोने परांठे के आकार जैसा त्रिभुज लग रहा था.
मैंने अपने परांठे को सहलाना शुरू कर दिया.
ये मेरी बुर का गद्दीदार घर था.
मुझे बुर सहलाने में मजा आने लगा.

कुछ देर बाद मैंने जांघों को फैलाया और सर झुका कर बुर का दीदार किया.
मैं भौंचक्की हो कर अपनी बुर देखने लगी.

बुर के ऊपर एक उभरी और नुकीली सी आकृति दिखी.
मैंने उसे उंगली से उसे छेड़ा.
बाप रे … वह नुकीली सी आकृति तो चूचियों की भी नानी निकली.
उसे छूते ही मेरे पूरे बदन में 440 का करंट दौड़ गया.

मेरी उत्सुकता बढ़ी तो मैं बुर में उंगली घुसाने का प्रयास करने लगी लेकिन काफी दर्द महसूस हुआ.
तभी दिमाग की बत्ती जली और मैं साबुन लगाकर बुर से खेलने लगी.

खेल खेल में मैंने उंगली अन्दर पेल दी और अन्दर बाहर करने लगी.
कुछ ही देर में बुर में उंगली सटासट चलने लगी और अंगूठे से बुर के ऊपर का दाना मसलने लगी.
आह अब तो मैं जन्नत की सैर पर निकल चुकी थी.

बुर से खेलते खेलते न जाने कितना समय गुजर गया, मुझे पता ही नहीं चल सका था.
तभी मम्मी ने आवाज लगाई और मैं जन्नत से वापस आ गई.

मैं अपनी बुर में तीन इंच लंबी उंगली घुसेड़ कर उत्पात मचा चुकी थी.
उस रोज मैंने मम्मी की बड़ी बड़ी चूचियों को गौर से देखा और भविष्य में अपनी चूचियों की कल्पना में खो गई.

मैं कई बार बाथरूम गई और बुर में उंगली कर मजा उठाया.

अगले दिन मैं बेचैन मन से स्कूल पहुंची.

मेरी बेचैनी रुचि से छिपी नहीं रह सकी और वह पूछ बैठी- अरे जूली, बड़ी बेचैन लग रही हो … क्या बात है?
मैं- कुछ नहीं, कुछ नहीं.

मैंने टालने की कोशिश की.
परंतु रूचि ने मुझसे सब उगलवा ही लिया और मुस्कुराने लगी.

फिर उसने जब दिखने में शरीफ और चुदवाने में माहिर औरत बनी लड़कियों के कारनामे सुनाए तो मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा.
चुदी और बिन चुदी सभी लड़कियों की सूची थी रुचि के पास.

मुझे गुरू ज्ञानी मिला था.

जिन लड़कियों के होल में पोल गड़ चुका था, वे चुदक्कड़ औरत बन चुकी थीं.
लेकिन जिनके होल में पोल नहीं गड़ा था, वे पोल की तरह ही सीधी सपाट थीं मेरी तरह.

अब मेरी गुरू बनी रुचि ने मुझे जो ज्ञान दिया, मैंने उस पर फटाफट अमल करने का मन बना लिया.

रुचि ने ज्ञान दिया था कि लंड का रिश्ता केवल बुर से होता है … इसलिए लंड जिसका भी मिले, बुर से मिलवा देना चाहिए.
बस क्या था … मैं भी लंड खोज अभियान में लग गई.

खोज के साथ साथ खुजली मिटाओ अभियान भी चल रहा था तो चुत की मस्ती बढ़ने लगी थी.

इधर बारहवीं की वार्षिक परीक्षा शुरू हुई और साथ साथ बुर के भी बहार के दिन शुरू हो गए.
दीदी ने ग्रेजुएशन कर रहे अपने देवर को भेजा था मुझे परीक्षा की तैयारी करवाने के लिए.
लेकिन मैंने उसे पटा लिया चुदवाने के लिए.

जब मुझे मम्मी ने बताया कि दीदी का देवर यानि जीजा का भाई मुझे परीक्षा की तैयारी करवाने आ रहा है तो मैं चुत चुदवाने की तैयारी में लग गई.

मैंने फटाफट अपने गुरू से सम्पर्क किया और चुदाई संबंधी सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर लिया.

संयोग की बात यह थी कि मेरे गुरू रुचि की बुर की सील भी उसकी दीदी के देवर यानि जीजा के भाई ने ही खोली थी.
बस फिर क्या था … सील तोड़क सिद्धांत का प्रैक्टिकल ही करना बाकी रह गया था.

शुक्रवार का शुभ दिन था.
मैंने अपनी बुर के जंगल की साफ-सफाई करके अच्छे से नहा धोकर, सिर्फ हाफ मैक्सी पहनी और अपने पोल वाले का इंतजार करने लगी.

शाम हुई और वह आ पहुंचा.
आज उसे देखकर मन बल्लियों उछल रहा था.

रात का डिनर हुआ.
मम्मी पापा सोने गए.

मैं और वह गप्पें मारने लगे.
इसी सब में रात के ग्यारह बज गए.

वह बोला- बहुत रात हो गई, जाओ अब सो जाओ जूली.
मैं- अगर सोने का मन न हो तो?

वह- तो क्या करने का इरादा है? पढ़ोगी तो पढ़ाऊंगा. इसीलिए तो आया हूँ … तुम्हारा कैरियर अच्छा बनाने के लिए ही भाभी ने भेजा है.
मैं- तो बनाओ ना, रूके क्यों हो?

वह- ओके लाओ किताबें खोलो और बताओ कहां कहां दिक्कत है?
मैं- लो खोल दिया पूरा बैग!

यह कहते हुए मैंने मैक्सी को निकाल दिया और उसके सामने बेशर्म बनकर नंगी खड़ी हो गई.
वह- अरे रेरे! यह क्या किया तुमने?
मैं- माफ करो जैक! बस मुझे बंद किताब समझ कर खोल दो, पूरी खोल दो जैक. लो मेरे इन संतरों का रस पियो और अपने गन्ने का रस मुझे पिला दो!

न जाने क्या क्या बकती हुई मैं उससे लिपट गई.
सूखी घास में चिंगारी पड़ते ही आग भड़क गई.

जैक ने मुझे बांहों में भरकर चूमना चाटना शुरू कर दिया.
मैं तो पहले से तैयार बैठी थी इसलिए गर्म होकर पिघलने लगी.

मेरा रोम रोम रोमांच से भर गया.
बदन तवे की तरह तपने लगा.
मेरी बुर से झरना बहने लगा.

मैंने जैक के सारे कपड़े उतार दिए और उसका लंड मुँह में लेकर चूसने लगी.

उसका लंड अकड़ कर लोहे का सरिया बन गया.
मैं कुवारी लड़की सेक्स करने के लिए, चुदवाने के लिए बेचैन हो उठी- आह अब चोद दो मुझे जैक. खोल दो इस बंद किताब को, पास करा दो मुझे परीक्षा. जल्दी करो जैक!

मैं बिस्तर पर टांगें फैलाकर लेट गई.
मुझे लगा जैक अपना लंड बुर में घुसाएगा लेकिन उसने अपना मुँह बुर पर रखा और चाटने लगा.

मैं- बाप रे! मत तड़पाओ जैक, जल्दी कुछ करो.
मैं जोश में अपनी कमर उचकाने लगी और तड़पने लगी.

मुझे कई बार झड़ाने के बाद जैक ने मेरे चूतड़ के नीचे तकिया लगाकर बुर को ऊंचा कर दिया और मेरी टांगों को अपने कंधों पर रख कर लंड को बुर के मुँह से मिला दिया.
अपने हाथों से मेरे कंधों को पकड़ा, मेरी आंखों में अपनी आंखें डालकर मुस्कुराया.

वह बोला- जूली, अब तेरी बुर खुलेगी, चूचियां फूलेंगी … तू बचपन भूलेगी. लो … संभाल मेरे इस मूसल लंड को.
जैक ने लंड को बुर में सरका दिया.

पानीदार बुर में लंड जाने में परेशानी नहीं हुई.
बुर की झिल्ली ने लंड को अन्दर घुसने से रोकने का प्रयास किया, पर प्रयास असफल रहा.

मैंने होंठ भींचकर दर्द को सह लिया.
उसका सात इंच का लंड मानो मेरी नाभि तक पहुंच गया था, दर्द से मेरी आंखों में आंसू छलछला गए.

मेरी कुंवारी बुर को फाड़ कर उसमें मोटा सरिया घुस चुका था.

आगे क्या क्या होने वाला है, वह सब गुरू ज्ञान मेरे पास था.
इसलिए मैं न चीखी, न चिल्लाई न पैर पटके और न गाली दी.

मैं- थैंक्स जैक, गो एहेड. वेलकम, वेलकम. जूली की बुर तुम्हारे लंड का हार्दिक स्वागत करती है. अब इसे खुश करो जैक!
जैक जोश से भर चुका था.

उसका लंड मेरी कुंवारी चूत में अन्दर बाहर होने लगा.
मैं ‘आहह ओहो आह उई …’ करती गई, जैक में जोश भरती गई और गपागप लंड निगलती गई.

कुछ मिनट तक ताबड़तोड़ रेल चली और जैक चिल्लाया- आह जूली … अब मेरी मलाई छूटने वाली है … बताओ तुम निगलोगी या तेरी बुर?

मैं- पहली मलाई है जैक, बुर का ही हक बनता है. बहुत कष्ट झेल रही है बेचारी … दे दो उसे.

जैक ने अपने लंड की गर्म मलाई मेरी बुर में फच् फच् करके छोड़ दी, जिससे बुर को बहुत राहत मिल गई.

हम दोनों एक दूसरे से फेविकोल की तरह चिपक गए.
मैंने औरत बनने का आनन्द उठाया और इस पुण्यकर्म में सहयोग के लिए जैक को बहुत बहुत धन्यवाद दिया.

गुरू ज्ञान यह भी था कि लगे हाथों गांड भी मरा लेना चाहिए ताकि आगे फिर कोई झंझट न रहे.

फिर मैंने जैक को प्रस्ताव दिया और वह मान भी गया.
लेकिन पहली बार गांड मरवाने में सावधानी जरूरी होती है क्योंकि गांड से पानी नहीं निकलता है कि लंड पेलने से उसका छेद चिकना हो जाए.

इसलिए गांड को पहले गीला और चिकना करने का उपाय होना चाहिए.
मैंने तो उपाय करके रख ही लिया था.

गांड में पहले जैल या तेल डाल, तब गांड पेल डाल.
कहते हैं न कि जब बुर चुदवाने वाली और गांड मरवाने वाली खुद तैयार हो, तो कोई समस्या ही नहीं होती है.

जैक तो तैयार ही था.
कुंवारी बुर खोलने के बाद गांड खोलने का अवसर मिले तो किसका लंड तैयार नहीं होगा!

बस मैं गांड खोलकर तैयार हुई, जैक ने दर्द नाशक जैल से गांड को गीला किया, उंगली डाल कर ढीला किया, फिर धीरे धीरे लंड घुसा दिया.

दर्द होना था हुआ और मुझे दर्द सहना था, सहना पड़ा. गांड को फटना था फट गई.
जैक ने जमकर गांड चोदी.

मैंने भी खुशी खुशी चुदवाई और फिर गांड में ही मलाई भरवाई.
सुबह होते होते चार बार बुर चुदाई और दो बार गांड चुदाई हो चुकी थी.

बुर और गांड के साथ साथ पूरा बदन दर्द कर रहा था.

फिर भी उठना पड़ा क्योंकि खाना भी तो मुझे ही बनाना था और ट्यूटर की सेवा भी करनी थी.

मैं उठते ही बाथरूम गई; नंगी होकर बदन का नजारा लिया.
रात भर मसली कुचली गई चूचियां बैलून की तरह फूली हुई थीं.
सात इंच गहरी बनी बुर में तीन इंच की उंगली का पता ही नहीं चल रहा था.

बुर का सपाट घर, तीन मंजिला मकान जैसा ऊंचा हो चुका था.
एक ही रात की चुदाई में उसका लंड अपना चमत्कार दिखा चुका था.

आगे दो महीने तक लंड और चूत को परीक्षा के नाम पर खुली आजादी थी.
फिर तो आप समझ ही गए होंगे कि दो महीने बाद जूली का हुलिया कैसा होगा?

मौका मिले तो आप भी जरूर आइएगा.
आपके लंड के इंतजार में आपकी मनचली इस जूली की बुर और गांड दोनों खुले हैं.

खुली बुर और खुली गांड की जब चुदाई शुरू हुई तो पढ़ाई का तो जो होना था, सो हो ही गया.

जो पढ़ाने आया था, वह चोदने लगा और जिसको पढ़ना था, वह चुदवाने लगी.

पढ़ाई चैम्पियन बनने वाली देखते देखते चुदाई चैम्पियन बन गई.
चुदवाने से बड़ा कैरियर क्या होगा भला!

कैसी लगी मेरी गांड व बुर फाड़ सेक्स कहानी?
कुवारी लड़की सेक्स कहानी पर प्लीज कुछ न कुछ जरूर लिखें.
surbharti071@gmail.com

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