कॉलेज ट्रिप पर दो लड़कियों के साथ थ्रीसम चुदाई

Views: 112 Category: Group Sex By RaatKiBaat Published: July 16, 2026 📖 11 min read
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ट्रिपल सेक्स कहानी में कॉलेज ट्रिप पर मुझे और मैडम को सेक्स करते दो लड़कियों ने देख लिया था. वे भी मेरे लंड का मजा लेना चाहती थी. वे मेरे कमरे में आ गयी.

दोस्तो, मैं आकाश एक बार फिर से आपकी टांगों के बीच हलचल मचाने के लिए हाजिर हूँ.

मैंने पिछली बार आपको अपनी प्रिया मैडम की चुदाई की कहानी
कॉलेज ट्रिप पर मैडम को गर्म करके चोदा
सुनाई थी और यह भी बताया था कि उन्हें बालकनी में चोद रहा था तो स्वाति और राधिका ने देख लिया था.

अब आगे ट्रिपल सेक्स कहानी:

अगले दिन सुबह हम सब लोग तैयार होकर घूमने जाने के लिए बस में बैठे थे.

प्रिया मैडम मेरे पास ही बैठी थीं, पर बात नहीं करना चाह रही थीं.
तो मैंने उन्हें स्पेस देना ठीक समझा और वहां से उठकर अपने दोस्तों के साथ बैठ गया.

हमारी पास वाली सीट पर स्वाति और राधिका बैठी थीं.

वे दोनों मुझे देखते ही अजीब तरह से हंसने लगीं.
उस वक्त मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया.

वे दोनों पूरे दिन मुझे टेढ़ी नज़रों से देखती रही थीं और आपस में बात करती हुई मुस्कुरा रही थीं.
मैंने उनसे शाम तक कुछ नहीं कहा.

फिर जैसे ही हम सब होटल में वापस आए और नहाने के लिए पूल में उतरे.

मैंने दोनों को पूल के एक साइड में ले जाकर पूछा.
थोड़ी देर तक परेशान करने के बाद उन्होंने सच बोल दिया.
मैं सुनते ही सन्न रह गया और वे दोनों जोर-जोर से हंसने लगीं.

आधा घंटा विनती करने के बाद ये राज दबाने के लिए वे दोनों राजी हो गईं.
पर वह पूरी रात दोनों जब भी मौका मिलता, डबल मीनिंग बात करके मुझे सबके सामने परेशान कर रही थीं.

रात को दस बजे मैंने अपने रूम में आकर राहत की सांस ली और बेड पर बैठे हुए मोबाइल चलाने लगा.

तभी कुछ आधा घंटा के बाद दरवाजे की घंटी बजी.
दरवाजा खोलते ही सामने दोनों शैतान खड़ी थीं.

वे दोनों मुझे धक्का देकर रूम में घुस आईं और रूम को घूर-घूर कर देखने लगीं.
मैंने थोड़े पैसे मिलाकर अच्छा वाला रूम लिया था.
मेरे रूम को देखकर वे दोनों गुस्सा करने लगीं कि उनका रूम इतना अच्छा क्यों नहीं है.

तभी स्वाति ने कहा- ये रूम अब हमारा है हम अब इसी रूम में रहेंगे.

मैं भी थोड़ा मस्ती के मूड में था तो तुरंत बोल पड़ा- तुम दोनों इस रूम में सो सकती हो, पर इस रूम में एक ही बेड है और तुम्हें मेरे साथ सोना पड़ेगा. मंजूर है तो बोलो.

राधिका ने फट से ‘हां’ बोल दी पर स्वाति गुस्सा हो गई.

मैंने फटाफट टॉपिक चेंज किया और इधर-उधर की बातें करने लगा.

बातों-बातों में राधिका ने मुझसे कल रात के सीन के बारे में विस्तार से बताने को कहा.
मैं थोड़ा झिझक रहा था, पर दोनों के फ़ोर्स करने पर मैंने दोनों को डिटेल में सब बताना शुरू कर दिया.

मैं बताते-बताते गर्म होने लगा.
मेरा हाथ कब स्वाति की जांघों को सहलाने लगा, पता ही नहीं चला.

मेरे होश में आने पर पता चला कि वे दोनों भी गर्म हो रही थीं. वे दोनों भी एक-दूसरे की टांगें सहला रही थीं.

किस्सा खत्म होने के कुछ देर बाद दोनों को होश आया तो वे अचानक आंखें चुराने लगीं.
मैंने बात को संभालते हुए दोनों से दारू के लिए पूछा.
दोनों ने हां कर दी.

तो मैंने होटल में फोन करके एक व्हिस्की ऑर्डर कर दी.
तभी स्वाति ने ट्रुथ और डेयर खेलने के लिए बोल दिया.

हमारे बीच रूल ये बना कि जो ट्रुथ लेगा, उसे व्हिस्की का एक नीट शॉट झटके से लेना होगा.

पहले गेम सही चल रहा था.

थोड़ी देर में हम तीनों को थोड़ी-थोड़ी चढ़ने लगी.

मैं और राधिका डेयर ज्यादा लेने लगे, उधर स्वाति भी थोड़ी ज्यादा टल्ली हो गई और सेक्सी सवाल पूछने लगी.

थोड़ी देर में ये सिलसिला सेक्स गेम में बदल गया.
तीनों एक-दूसरे से सेक्स से जुड़े सवाल पूछते हुए गर्म हो रहे थे.

तभी राधिका ने डेयर लिया तो मैंने राधिका को स्वाति को लिप-किस करने के लिए बोल दिया.
अब वे दोनों लिप किस करने लगीं.

वे दोनों किस करती करती एक-दूसरे में इतनी ज्यादा गुम हो गईं कि वे एक-दूसरे के होंठ चूसने लगीं, एक-दूसरे की जीभ चाटने लगीं.

ये सिलसिला पांच मिनट तक चलता रहा.

मैं उन्हें देखते-देखते पूरा गर्म हो गया.
मेरा लंड जींस फाड़कर बाहर आने को तड़प रहा था.

मैंने दोनों को अलग किया और गेम आगे बढ़ाया.

अब मेरा टर्न था और राधिका ने मुझे स्वाति के बूब्स चूसने के लिए बोल दिया.

मैं हक्का-बक्का रह गया और नखरे करने लगा, पर स्वाति ने मदहोशी में हां बोल दी.
मैं अभी भी झिझक रहा था.

वैसे मैं बता दूँ कि राधिका की हाइट लगभग पांच फीट की ही रही होगी, उसका गोरा मखमली सा शरीर मस्त था.
उसके बूब्स थोड़े छोटे थे पर गांड एकदम लवाबदार थी.

उसकी गांड देखते ही पेलने का मन कर जाए, ऐसी गोल गांड है.

स्वाति की हाइट लगभग राधिका के बराबर है, रंग थोड़ा राधिका से कम गोरा है पर शरीर क्या कहना … परफेक्ट साइज के बड़े बूब्स, पतली कमर और उभरी हुई गांड.
कॉलेज के हर लड़के ने उसके नाम की मुट्ठ मारी होगी.

मैंने धीरे से अपने हाथ उसके बूब्स पर रख दिए और टी-शर्ट के ऊपर से उसके बूब्स हल्के हाथ से मसलने लगा.
वह हल्की-हल्की सिसकारियां लेने लगी.

तभी बीच में राधिका ने आकर मेरा हाथ हटाया, उसकी टी-शर्ट ऊपर कर दी और चिल्लाकर बोली- चूसने को बोला मैंने!

मैं स्वाति के बूब्स देखकर पागल हो गया.
उसके दूध पर्पल कलर की ब्रा में क्या कहर ढा रहे थे.

तभी राधिका ने स्वाति की ब्रा भी ऊपर कर दी.
मैंने अपना मुँह आगे बढ़ाया. मैं अब एक हाथ से उसके एक साइड के दूध को दबाने लगा और दूसरे साइड का दूध चूसने लगा.

मैं कभी उसके निप्पल चूसता, कभी बूब्स चाटता और बीच-बीच में अपनी उंगलियों से उसके निप्पल मसलने लगता.
वह अपनी आंखें बंद करके बस मदभरी सिसकारियां ले रही थी.

उसके दोनों बूब्स बारी-बारी से चूसते-चूसते कब मेरा हाथ उसकी चूत पर पहुंच गया, मुझे ध्यान ही नहीं रहा.
अब मैं बारी-बारी से उसके दोनों बूब्स चूस रहा था और एक हाथ से लोअर के ऊपर से उसकी चूत मसल रहा था.
उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी.

ये सब राधिका से देखा नहीं गया.
उसने मुझे धक्का देकर हम दोनों को अलग किया.

स्वाति अब शर्म से पानी-पानी हो चुकी थी.

अब नंबर आया राधिका का, तो मैंने उसे अपनी चूत स्वाति से चटवाने के लिए कह दिया.
स्वाति ने फट से मना कर दिया.

पर न.शे के गुमान में वह बहस हार गई और चूत चाटने को राजी हो गई.

बस इतना सुनते ही राधिका ने फट से अपना लोअर और पैंटी दोनों एक साथ उतार कर एक तरफ फेंक दिए.
वह स्वाति की तरफ खिसककर बैठ गई.

वह टांगें चौड़ी करके बैठी थी तो क्या मस्त नजारा था … उसकी चुत बिल्कुल सपनों के महल का छोटा सा दरवाजा लग रहा था.

स्वाति जैसे ही अपना मुँह राधिका की चूत की तरफ ले आई, राधिका ज्वालामुखी की तरह फटने लगी.
स्वाति धीरे-धीरे चूत चाट रही थी और राधिका हल्की-हल्की सिसकारियां लेने लगी थी.

थोड़ी देर में अचानक स्वाति ने रफ्तार बढ़ा दी.
इस अचानक हुए हमले से राधिका जल बिन मछली की तरह तड़प उठी और जोर-जोर से सिसकारियां लेने लगी.

राधिका जैसे ही अपने चरम सुख को पाने के करीब थी, मैंने स्वाति को पीछे खींच लिया.

मेरी इस हरकत से राधिका मुझे मार डालने वाली नजरों से देखने लगी और गालियां देने लगी.
पर मुझसे उसकी नंगी चूत देखकर रहा नहीं जा रहा था.

मैं फट से उसकी ओर देखते हुए ही उसके ऊपर टूट पड़ा और उसके होंठों को चूसने लगा.

वह मेरे इस वार से अचकचा सी गई और मुझसे अलग होने की चेष्टा करने लगी.
लेकिन बाद में वह मेरा साथ देने लगी.

थोड़ी देर बाद उसने मुझे खुद से अलग किया और मुस्कुराने लगी.

अब उन दोनों ने मिलकर मेरे सारे कपड़े उतारने शुरू कर दिए.
जल्दी ही मुझे नंगा करके दोनों एक-दूसरे के कपड़े भी उतारने लगीं.

उन दोनों को पूरी नंगी देखकर मेरा लंड बहुत जोर से उफान मार रहा था.
मैं उन दोनों के नंगे जिस्मों को निहार रहा था और उधर वे दोनों भी मेरे कड़क लंड को बड़ी ललचाई नजरों से देख रही थीं.

फिर हम तीनों एक-दूसरे से चिपक गए और चूमने चूसने में लग गए.

मैं उन दोनों के चेहरों को अपने मुँह के आजू बाजू किए हुए बारी बारी से उनके होंठ चूसने में लगा था.
मुँह से होंठ, एक हाथ से एक के दूध और दूसरे हाथ से दूसरी की चूत को बड़े प्यार से धीरे-धीरे मसल रहा था.

वे दोनों भी मस्त हो गई थीं और मेरे लौड़े को को दबाती हुई मसल रही थीं.

कुछ देर बाद हम तीनों बेड पर कुछ इस तरह की पोजीशन में लेटे हुए थे कि मैं राधिका की चूत चाट रहा था, राधिका स्वाति की चूत चाट रही थी और स्वाति राधिका के बूब्स चूसते हुए मेरा लंड सहला रही थी.

राधिका जल्दी ही झड़ गई.
उसने अपना सारा पानी मेरे मुँह पर छोड़ दिया.

थोड़ी देर में स्वाति भी राधिका के मुँह पर झड़ गई.

अब मैं बेड पर चित लेटा हुआ था.
स्वाति और राधिका दोनों मिलकर मेरा लंड चूसने में लग गईं.
राधिका लंड चूसने में एक्सपर्ट थी.

जहां स्वाति ऊपर-ऊपर से लंड को जीभ से चाट रही थी, वहीं राधिका लंड को मुँह में अन्दर तक निगल कर चूस रही थी.

मैं भी थोड़ी देर बाद स्वाति के मुँह के ऊपर झड़ गया और राधिका यह देख कर स्वाति के मुँह को चाटने लगी.
उसने सारा वीर्य चाटकर गटक लिया.

हम तीनों बिस्तर पर लेट गए और एक-दूसरे के शरीर के साथ खेलने में लग गए.

थोड़ी देर में ही मेरा लंड फिर से उफान मारने लगा.
अब मैंने स्वाति की टांगें अपने कंधों पर रखीं और अपना लंड उसकी चूत पर सैट कर दिया.

तभी राधिका भी आकर स्वाति के मुँह पर आकर बैठ गई.
वह स्वाति को अपनी चुत चटवाने लगी और मैं राधिका के दूध मसलने लगा.

मैंने एक हल्के से झटके के साथ अपना लंड का टोपा स्वाति की चूत के अन्दर डाल दिया.
स्वाति की चूत बहुत कसी हुई थी.

वह आह आह करने लगी लेकिन उसके मुँह में राधिका की चुत का ढक्कन लगा हुआ था तो वह ज्यादा आवाज नहीं कर पा रही थी,
तभी राधिका ने मुझे एक झटके में पूरा लंड डालने को कहा.

मैंने एक जोरदार झटके में अपना पूरा लंड स्वाति की चूत में उतार दिया.
स्वाति इस अचानक हुए झटके को सह नहीं पाई और जोर से चिल्ला दी, पर उसकी आवाज़ राधिका की चूत के नीचे दब गई.

मैं थोड़ी देर रुका और फिर धीरे-धीरे उसकी चूत में लंड आगे-पीछे करने लगा.
मैं नीचे स्वाति की चूत बजा रहा था, ऊपर से राधिका के होंठों को चूमे जा रहा था और स्वाति राधिका की चूत चाट रही थी.

थोड़ी देर बाद मैंने पोजीशन चेंज की और राधिका को घोड़ी बना दिया.
राधिका की चूत में भी मैं एक झटके में लंड डाल दिया.
वह बहुत जोर से चीख उठी.

वह भी कम चुदी हुई लौंडिया थी तो मेरे लौड़े के हमले को झेल नहीं पाई.
मैं धीरे-धीरे उसे चोद रहा था और वह ‘उम्म … आह … आह …’ की सिसकारियां ले रही थी.

मैंने धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाई और वह मजे से ‘आह … आह …’ की सिसकारियां निकालती हुई अपनी कमर हिलाती हुई मस्ती से चुद रही थी.
मैंने स्वाति को अपने बगल में बुलाया.

स्वाति मेरे पास आकर मेरे होंठों को चूसने लगी थी और मैं राधिका को चोदते हुए स्वाति के मम्मे दबाने लगा.
थोड़ी देर बाद मैं झड़ने को हुआ तो वे दोनों मेरे लंड के सामने आ गईं और अपने अपने दूध पकड़ कर मेरे लंड से रस टपकने का इंतजार करने लगीं.

मैं उन दोनों के बूब्स पर झड़ गया.

बाद में हम दोनों आराम करते हुए एक दूसरे से खेलने लगे और जल्द ही अलगे राउंड के लिए रेडी हो गए.
इस बार मैंने स्वाति को गोद में उठाया और खड़े-खड़े उसे अपने लंड पर बिठाकर चोदने लगा.

राधिका स्वाति की पीठ पर हाथ रखकर उसका बैलेंस बना रही थी.

इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत की दीवारों को भेदता हुआ पूरा अन्दर समा रहा था और वह जोर-जोर से चिल्ला-चिल्ला कर चुद रही थी ‘आह … और जोर से चोद दे मादरचोद … आह!’

उसकी गालियों से मुझे और ज्यादा मजा आ रहा था.

उस रात मैंने दोनों को डॉगी स्टाइल, काउगर्ल, रिवर्स काउगर्ल और अलग-अलग स्टाइल में चोदा.
कभी पलंग पर, कभी काउच पर, कभी जकूज़ी में.

सुबह तक ट्रिपल सेक्स करके हम तीनों इतना थक चुके थे कि हमसे उठा भी नहीं जा रहा था.

सुबह हम तीनों शॉवर में एक साथ नहाये और उसके बाद वे दोनों अपने रूम में चली गईं.

तो दोस्तो, आपको मेरी ये ट्रिपल सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
digitalmitraa001@gmail.com

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