छोटी बहन की वासना

Views: 1 Category: Office Sex By rajuchakole21 Published: September 21, 2026 📖 17 min read
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यंग सिस्टर फकिंग स्टोरी में मैंने अपनी छोटी बहन को पाला था. हम दोनों घर में अकेले थे. दोनों जवान हो चुके थे. उसको मासिक धर्म शुरू हुआ तो मैंने उसकी मदद की.

मेरा नाम राजा पटेल है।

यह यंग सिस्टर फकिंग स्टोरी है मेरे और मेरी बहन नूरी की, जब से वो मेरी गोद में सोती थी और अब भी मेरी गोद में सोती है।

बहन को जन्म देकर माँ मर गई।
बाप बेवड़ा था तो एक साल बाद वो भी मर गए।

बचपन में ही माँ-बाप मर जाने से नूरी को संभालना मुश्किल काम था।
लेकिन बाप के बीमे के पैसे काफी मिले थे तो दिक्कत नहीं थी.

मैं सुबह से लेकर शाम तक उसका हगना-मूतना, नहाना, खिलाना-पिलाना, सुलाना, सब करता था।
स्कूल जाते समय उसे पड़ोस में दे जाता और स्कूल से आकर उसकी अच्छी तरह देखभाल करता।

समय बीतने के साथ वो भी बड़ी होती गई।
नूरी का फिगर 28-26-30 और ऊँचाई 5 फुट 1 इंच है।
मैं भी बलवान, 5 फुट 5 इंच का तगड़ा जवान आदमी हूँ।

नूरी स्कूल जाने लगी और मैं काम पर।

एक दिन नूरी बोली, “भाई, मेरे पेट में दर्द हो रहा है!”
मैंने उसे नींबू-पानी पिलाया और घर पर सुलाकर काम पर चला गया।

शाम को जब घर आया तो नूरी सुबक-सुबक कर बेड पर रो रही थी।
मैंने पूछा, “क्या हुआ मेरी बाबू… को?”

तो उसने चादर हटाई और मैं देखकर दंग रह गया और रोने लगा।
उसे अपने सीने से लगा लिया।
उस वक्त वो बस एक पतले से फ्रॉक में बैठी थी, तो उसके छोटे-छोटे बूब्स मेरे सीने में घुसने लगे।

मैंने 15 मिनट तक उसे अपने सीने से लगाए रखा।

मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था।

मैं ये तो जान गया कि इसे पीरियड हुए हैं, पर बताऊँ कैसे?
तब मुझे मेरी माँ की याद आने लगी।

“ओह्ह माँ, कहाँ चली गई तुम हमें छोड़कर…!” मैं चीख पड़ा।

बहन भी मुझे सीने से लगाकर रोने लगी कि उसे कोई बीमारी तो नहीं हो गई।

कुछ देर बाद मैंने धीरे से उसे चूमा और बाथरूम ले गया।
फिर उसके सारे कपड़े निकालकर उसे गर्म पानी से नहलाया।

उसे बचपन से मैं नहलाते आया था तो आज भी कपड़े उतारने में उसे कोई झिझक महसूस नहीं हुई क्योंकि हम दोनों ही एक-दूसरे को बचपन से नंगा देखते आए हैं।
उसकी चूत पर छोटे-छोटे बाल भी आ गए थे अब तो।

फिर अच्छी तरह साफ करके मैं उसे बाहर लाया और कपड़े पहनाने लगा।
तभी उसने मुझे मेरे माथे पर किस कर दिया।

फिर क्या, मैंने उसे रोते हुए सीने से लगा लिया।

अब भी वो टॉवेल में ही थी तो रगड़ से टॉवेल नीचे गिर गया और वो नंगी हो गई।

मैं उसे वैसे ही उठाकर बेड पर ले आया।

उसे धीरे से पूछा, “क्या अब भी दर्द है? मालिश कर दूँ?”
तो वो बोली, “हाँ भाई, अब भी थोड़ा दर्द है… आप मालिश कर दो!”

मैंने सरसों का तेल लाया और मालिश करने लगा।
नूरी बोली, “भाई, आपके कपड़े गीले हैं, इसे निकाल दीजिए!”

मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और चड्डी में आ गया और तेल से मालिश करने लगा।

जवान बहन का नंगा बदन देखकर मेरा चुन्नू भी जवान होने लगा और चड्डी में अपनी जगह बनाने लगा।

उसकी छोटी सी चूत के ऊपर मालिश करते-करते वो बड़ी राहत की साँस लेने लगी।

मैंने उसकी चूत पर एक पप्पी ले ली तो वो दुल्हन के जैसे शर्मा गई।
बोली, “भाई, आप भी न… बड़े बदमाश हो..!”

सारे बदन की मालिश करके मैं बोला, “आप आराम करो, मैं दवाई लेकर आता हूँ।”
और मैं उसे चूमकर कपड़े पहनकर दवाई लेने चला गया।

फिर मेडिकल स्टोर से दवाई, हॉट वाटर बैग, पैड और चॉकलेट लिया, साथ ही खाना भी पार्सल ले लिया।

घर पहुँचकर मेरी नूरी की तरफ देखा तो बिल्कुल मादरजात नंगी बहन बेड पर बड़ी सुकून से सो रही थी।

मैंने खाना गरम किया और उसे उठाने गया।
मेरी आहट से ही उसकी नींद खुल गई और मेरे तरफ वो बड़ी मासूमियत से देखने लगी।

एक बार फिर मैंने उसके छोटे चुचों और छोटे झाँटों वाली बुर पर जीभ लगाकर चुम्मी ले ली।
उसे उठाया और अपने गोद में लेकर समझाने लगा पीरियड्स के बारे में।

उसे पैड-चड्डी लाकर दी और पहनना सिखाया।
फिर एक छोटा सा फ्रॉक पहनाकर हमने एक ही थाली में मस्ती करते हुए खाना खाया।

मुझे रात में सिर्फ चड्डी पहनकर सोने की आदत है तो मैं सोने के लिए चड्डी में आ गया।

मुझे देख नूरी बोली, “भाई, मैं आपकी गोद में सोऊँगी!”
मैंने उसे अपनी गोद में ले लिया और अपने ऊपर ही सुला लिया।

धीरे-धीरे समय बीतता गया और वो चंद्रकला की तरह पूर्ण होने लगी।
पर अब भी उसकी हरकतें वही ब.चपन वाली ही थीं।

बाथरूम में नंगी नहाती पर दरवाजा कभी बंद नहीं करती।
मैं टोकता तो कहती, “भाई, यहाँ आप ही तो हैं न!”

बहन है तो क्या, जवान नंगी चूत देखकर मेरा चुन्नू कभी-कभी लार टपकाने लगता।
अब कॉलेज और सहेलियों से उसे चूत-चुदाई, ऊँगली करना, मुठ मारना, पोर्न देखना, लेस्बियन सेक्स, जैसी और भी जानकारी मिलने लगी।

एक बार मैं काम से वापस आया तो देखा, मेरी बहन नूरी पूरी नंगी होकर बेड पर लेटी हुई खीरा अपनी चूत में अंदर-बाहर कर रही थी और सीत्कार कर रही थी मेरे नाम से, “मेरे राजा भाई, एक बार आ जाओ.. मेरी प्यास बुझा जाओ!”

मैं घबरा गया और वापस बाहर से खिड़की में से छुपकर देखने लगा।
फिर 15 मिनट झड़ने के बाद बाथरूम में जाकर वो साफ करके आई और कपड़े पहनने लगी।

मैं अंदर आया तो मुझे आकर कस के गले लगा लिया।
अब मेरा लंड तो पहले ही खड़ा था जो वो महसूस कर चुकी थी।

अब तो उसके नींबू वाले बूब्स संतरे से बड़े हो गए थे।
मेरे छाती पर वो भी बड़े गद्देदार महसूस होने लगे।

मन तो होने लगा कि अभी मसल दूँ और दूध पी जाऊँ, पर…

आज नूरी बहुत मीठी-मीठी बातें करने लगी।
बड़े प्यार से आज उसने अपने हाथों से मुझे खाना खिलाया और हम साथ में सोने लगे।

बचपन से ही नूरी रात में चड्डी उतारकर ही सोती थी।

आधी रात में जब नींद खुली तो उसकी स्कर्ट आज ऊपर हो गई थी और चूत पूरी खुली हुई आँसू बहा रही थी।
शायद उंगली करते हुए नींद आ गई हो।

मैं भी तुरंत उसकी चूत चाटने लगा और अंदर तक जीभ डालकर मुँह से ही चोदने लगा, और बूब्स भी सहलाने लगा।
उसे मैंने होठों पर, गाल पर और गर्दन पर भी चूमा।

आज पहली बार मैंने वासना से मेरी प्यारी बहन नूरी को चूमा-चाटा था और स्कर्ट नीचे करके बाथरूम जाकर नूरी के नाम की मुठ मारी और सो गया।

सुबह मेरी बहन नूरी मुझे मेरे होठों पर पप्पी लेकर कहने लगी, “टाइम देखिए भाई, आज काम पर नहीं जाना क्या?”

टाइम देखा तो 9:30 हो चुके थे।
मैं तुरंत उठने को हुआ पर मेरा चुन्नू मुझसे पहले चड्डी में खड़ा था जो नूरी देख चुकी थी।

उसने जाते-जाते फिर पलटकर देखा और कातिल अदा से मुस्कुरा दी।
मैं लंड को हाथ से छुपाकर बाथरूम में घुस गया और हगने बैठ गया।

इतने में नूरी आकर दरवाजा ठोकने लगी, “भाई जल्दी दरवाजा खोलो, मुझे नहाना है, कॉलेज के लिए लेट हो रहा है. प्लीज़!”

बाथरूम की कड़ी ढीली होने से दरवाजा खुल गया।
वह अंदर आ गई।

मैं हगता रहा और वो बोली, “सॉरी भाई, मुझे सच्ची लेट हो रहा है आज। आप भी मेरे साथ ही नहा लो!”
और फटाफट नंगी होकर शावर चालू कर दी।

उसके अंग से नहाने का पानी मुझ पर भी छींटे पड़ रहा था।
जैसे ही मैं फॉरिग हुआ उसने मुझे अपनी ओर खींच ली और तुरंत मेरी चड्डी निकाल दी।

मैं शरमाने लगा तो बोली, “ओह कम ऑन भाई, हम तो बचपन से ही साथ नहाए हैं न… फिर अब क्या शरमाना!”

कहकर शावर बंद करके वो मेरी पूरी बॉडी पर साबुन लगाने लगी।
आज बहुत सालों के बाद हम साथ में नहा रहे थे, वो भी पूरे नंगे होकर।

धीरे-धीरे उसके हाथ नीचे की ओर जाने लगे।
मेरे चिकने छः इंच के लंड पर उसका हाथ पहुँचते ही मैं आसमान में उड़ने लगा।

नहाना तो एक बहाना था, उसे तो मेरा लंड हिलाना था।
वो रगड़-रगड़ कर मेरा लंड साफ करने लगी और पीठ के साथ पूरी बॉडी पर साबुन लगाकर बोली, “लो भाई, अब मेरी बॉडी पर भी अच्छे से साबुन लगा दो, आज तो सारी गंदगी निकाल ही दो आप!”

मैं भी पूरी तन्मयता के साथ नूरी की बॉडी पर साबुन लगाने लगा।

साबुन लगाते-लगाते मैंने भी एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी।
बड़ी ही मासूम दिखने वाली मेरी बहन कामातुर होकर सिसकारियाँ भरने लगी, “ओह्ह भाई, ओह्ह भाई, अंदर तक.. अंदर तक साफ कर दो..!”

“हाँ, हाँ नूरी, आज तो पूरी साफ करके ही रहूँगा! तुम अपनी चूत के बाल निकालती नहीं क्या? बड़े बालों से बीमारी हो जाती है!” मैं बोला।

“नहीं भाई, मुझे रेजर चलाने से डर लगता है और क्रीम से स्किन काली पड़ जाती है, ऐसा सहेलियाँ बताती हैं, तो कभी हिम्मत नहीं की।”

“आओ आज तुम्हारी चूत के बाल साफ कर देता हूँ!” कहकर मैंने अपना शेविंग किट निकाला और क्रीम लगाकर झाग बनाने लगा और गुदगुदी होने से वो मुस्कुराने लगी।

फिर रेजर से सारे बाल निकालकर चूत से गाँड तक एकदम चिकनी बना दिया।
और बगल के बाल भी निकाल दिए।

अब मैं गाँड-चूत के साथ बूब्स भी सहलाने लगा और फिर शावर चालू कर दिया।

हमने एक-दूसरे को साफ किया और शावर हुआ बंद।

नूरी गीले ही शरमाकर बाहर चली गई।
मैं टॉवल से पोंछने लगा।

पैंटी ढूँढते हुए मैं रूम में आया तब तक नूरी कमीज और पैंटी पहन चुकी थी।

फिर क्या, मैंने भी टॉवल फेंककर नंगा ही मेरी चड्डी ढूँढने लगा.
तो नूरी बोली, “भाई, आपकी चड्डी खराब हो गई थी तो मैंने फेंक दी!”

फिर क्या, छज्जे पर बॉक्स में रखी मेरी एक नई चड्डी निकालने के लिए मैं ट्राय करने लगा, पर मेरा हाथ नहीं पहुँच पा रहा था और मेरा खड़ा लंड हचकोले मार रहा था।

तभी मेरे दिमाग में आइडिया आया।
मैं नूरी से बोला, “बेबी, मैं आपको उठाता हूँ, आप ऊपर वाला बॉक्स पकड़कर निकाल लेना!”

फिर क्या, मेरी बहन का चिकना गोरा बदन कमर के नीचे से पकड़कर मैं उठाया और बॉक्स निकालते ही उसे धीरे-धीरे अपने लंड पर बिठा लिया।
अगर नूरी पैंटी पहनकर न रहती तो पक्का आज तो उसकी गाँड का उद्घाटन हो गया होता।

लंड महसूस होते ही उसके हाथ से बॉक्स छूट गया और सिसकारी निकल गई।

कुछ समय तक ऐसे ही मैं भी मजे लेता रहा।

फिर नूरी बोली, “भाई, आप आज मुझे कॉलेज छोड़ देना प्लीज़!”

मैंने उसे नीचे उतारा और हाँ कहकर कपड़े पहनने लगा।

बीस मिनट में हम रेडी होकर अपना-अपना टिफिन लेकर निकल पड़े।

शाम को दोनों अपने-अपने समय पर वापस आए।

कुछ दिन ऐसे ही चलते रहे।

एक दिन रात में मेरे चड्डी में कुछ गुदगुदाने का महसूस हुआ। देखा तो नूरी का हाथ मेरी चड्डी में था और लंड उसके हाथ में।

धीरे-धीरे लंड पर उसके कोमल हाथों का स्पर्श मेरे नुन्नू को जवान कर रहा था।
मैं आँखें बंद करके सोया रहा।
थोड़ी देर बाद नूरी बेड से उतरते हुए बाथरूम की तरफ जाने लगी।

मैं धीरे से उठकर बाथरूम के पास गया तो…
“भाई, मेरे राजा भाई, आह्ह.. ओह्ह.. भाई!” नूरी बुदबुदाने लगी।

उसके नल चालू करते ही मैं वापस आकर लेट गया।

थोड़ी देर बाद वो भी वापस आकर सो गई।

मेरी तो नींद उड़ गई।
मैं रात भर करवटें बदलता रहा और सुबह-सुबह सो गया।

देर सुबह उठने पर उसके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी दिख रही थी।
शायद वो जान गई थी कि उसका हस्तस्पर्श का मुझे एहसास अच्छा लगा।

कुछ दिन तक तो सिर्फ लंड को हाथ से सहलाना चलता रहा, मैं भी मजे देता-लेता रहा।

फिर एक रात नूरी ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और मुझे नींद में देखकर मेरी चड्डी भी निकाल दी, और लंड खड़ा करके मुँह में डाल लिया और चूसने लगी।
15 मिनट चूसाई कार्यक्रम चला।

जैसे-जैसे लंड चूसाई का अहसास होता वैसे-वैसे चरमोत्कर्ष तक पहुँचता गया।
लंड की अकड़न बढ़ती गई और मेरा वीर्य फौवारा उसके मुँह में जेट स्प्रे की तरह निकलता गया।

वीर्य की आखिरी बूंद तक वो पी गई और लंड चाटकर साफ कर दिया।

शायद नूरी भी अपनी बुर सहलाकर झड़ गई थी.
उसने अपने कपड़े से ही चूत पोंछ ली और नंगी ही मुझे चिपककर सो गई।

उसके नंगे बदन का एहसास मुझे बहुत भाया और ‘मैं भी नींद में हूँ’ ऐसा जताकर उसे अपनी बाँहों में लेकर सो गया।

सुबह भी हम ऐसे नंगे ही एक-दूसरे की बाँहों में लिपटे हुए थे।
दोनों की नींद साथ ही खुली, मतलब मेरी और मेरे चुन्नू की।

साथ ही चुन्नू मुन्नी को पप्पी लेने लगा।

पप्पी के एहसास से नूरी की भी नींद खुल गई और उसने अपने आप को मेरे बाँहों में नंगी ही जकड़ा हुआ पाया।

पर उसने छूटने की कोशिश नहीं की ना ही उसे कोई हिचकिचाहट हुई।

मैंने नूरी को होठों पर चूम लिया तो वो शरमा गई और मुझे कस के गले से लगा लिया।

“वो रात में गर्मी हो रही थी भाई, इसीलिए कपड़े निकाल दिए मैंने. मेरे और आपके भी!” वो सफाई देने लगी।

कुछ देर बाद हम अलग हुए और एक-एक करके फॉरिग हुए।
फिर नहाकर नूरी जल्दी-जल्दी खाना बनाने लगी और टिफिन पैक किया और हम चले अपने-अपने काम पर।

दोपहर में नूरी का फोन आया, “भाई, मुझे कुछ सामान लेना है तो क्या आप आज जल्दी छुट्टी लेकर मार्केट आ सकते हैं?”

मुझे भी कुछ खास काम तो था नहीं तो मैंने हाँ कह दिया।

मार्केट चौक पर हम ठीक चार बजे मिले।
फिर एक मॉल की तरफ चल पड़े।

बाइक में नूरी बिल्कुल चिपककर बैठी थी पर अचानक से मौसम बिगड़ने लगा और बारिश होने लगी।
हम दोनों ही भीगने लगे।

भीगते हुए हम पहुँचे मॉल में।
जहाँ सब नूरी के गीले कपड़ों में बदन का एक्सरे करने लगे.
ये बात नूरी को बहुत भा गई।

अब गीले होने की वजह से ठंड लगने लगी तो मैं बोला, “चलो, दोनों नए कपड़े खरीद लेते हैं!”

नूरी के लिए मैंने एक वन पीस सूट पसंद किया और उसने मेरे लिए एक शर्ट-पैंट, और चले चेंज करने।

पाँच मिनट बाद जब नूरी कपड़े बदलकर आई तो मेरी नजर नूरी से हट ही नहीं रही थी।

“अच्छा लगा न भाई..?” नूरी बोली पर मैं तो उसके सपनों में खो गया।

उसने मुझे झकझोरकर हिलाया तब मैं बोला, “बेहतरीन…!”

नूरी ने ब्रा नहीं पहना था गीला होने की वजह से तो उसके कड़क निप्पल साफ नजर आ रहे थे।

मेरी नजर पैंटी लाइन्स पर गई तो पाया कि वो अंदर से एकदम नंगी है।
मैंने उसे सीने से लगाना चाहा पर उसने मुझे धकेलकर चेंजिंग रूम में भेज दिया।

मैं चेंज करके बाहर निकलता तब तक वो एक जींस और टॉप सेलेक्ट कर चुकी थी और ट्राय करने जाने लगी।

उसने जींस-टॉप पहना और बाहर आई।
मैंने एक नंबर का इशारा किया तो वो मुस्कुरा दी।

मैंने सब कपड़ों की पेमेंट किया, अपने गीले कपड़े समेटकर और निकल पड़े।

नूरी बोली, “भाई, कुछ और भी सामान लेना है, आप प्लीज़ साथ चलो!”
पर वो पीछे पलट-पलट कर देखने लगी।
मैं पहले समझा नहीं, बाद में समझा।

उसके साथ मैं आया तो एक कॉस्मेटिक शॉप पर उसने अपने लिए लिपस्टिक वगैरह सामान लिया।
तब तक मैं मॉल में टहलकर आ गया।

शॉपिंग खत्म हुई।
मैं उसे एक अच्छे रेस्टोरेंट में ले आया और उसके पसंद का खाना ऑर्डर किया।

खाना खाकर हम निकल पड़े घर की ओर।

घर पहुँचकर मैंने उससे पूछा, “आज की शॉपिंग में मजा आया न?”
उसने “हाँ” कहा।

“मैंने तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लिया है..!”
और एक पैकेट नूरी की ओर बढ़ा दिया।

पैकेट खोलते ही वो उछल पड़ी, और मुझे गाल पर पप्पी लेते हुए बोली, “थैंक यू सो मच भाई!”
ये वही चीज थी जो वो पलट-पलट कर देख रही थी—उसकी फेवरेट कलर और न्यू डिज़ाइन की ब्रा-पैंटी।
उसकी आँखों में चमक के साथ-साथ पानी भी था।

मैं बोला, “जाओ, ट्राय कर लो!”

वह तुरंत ट्राय करने चली गई।

ब्रा-पैंटी पहनकर तो नूरी बिल्कुल सन्नी लियोनी की तरह लग रही थी।

मुझे फिटिंग दिखाते हुए बोली, “यू आर सो केयरिंग भाई!”
और मेरे गले से आकर लटक गई।

मैं भी उसे चूमकर गले से लिपटाए रखा।

धीरे से बोला, “आई लव यू नूरी!”
वो भी बोली, “आई लव यू टू मेरे राजा भाई!”

मैं उसे नीचे उतारा और कपड़े बदलने चला गया।

सोना ही था तो आ गया एक चड्डी में।
वो अब भी उसी ब्रा-पैंटी में थी।

और हम सोने लगे।

रात में नूरी बार-बार करवट बदलती और ब्रा को एडजस्ट करती रही।

मेरी नींद खुली तो मैं बोला, “नूरी, कोई तकलीफ है क्या?”
तो बोली, “ब्रा-पैंटी गड़ रही है भाई, इसीलिए नींद नहीं आ रही!”

अब ये सुनहरा मौका मैं कैसे छोड़ सकता था।
मैं उसकी ब्रा उतारने लगा।

जैसे ही उसके कबूतर आजाद हुए वो एक सुकून की साँस लेने लगी और अपने चुचे सहलाने लगी।

फिर मैंने उसकी पैंटी भी निकाल दी और लाइट चालू कर दिया।
मैं बोला, “दिखाओ, कुछ रैशेज तो नहीं हुए?”

वो बिल्कुल छोटी बच्ची जैसे अपने चुचे मेरे मुँह के पास ला ली।
देखा तो लाल-लाल रैशेज उसकी बूब्स लाइन पर, पीठ और कमर पर बने थे।

मैं बोला, “शायद ये फैब्रिक तुमको सूट नहीं कर रहा इसलिए रैशेज हो गए हैं। मैं क्रीम लगा दूँ।”

मैं उसके पीठ पर क्रीम लगाने लगा।

फिर उसे सीधे लेटने के लिए कहा और चुचों पर क्रीम लगाने लगा, या समझो क्रीम हाथ में लेकर मसलने लगा।

मर्द के हाथों से अपने बूब्स मसलवाकर वो भी काम के चरम तक आने लगी।
मेरी छोटी बहन दो मिनट में ही झड़ने लगी।
उसकी चूत से काम-रस का फव्वारा निकलने लगा और बेड गीला होने लगा।

कामुकता के इस सागर में हम अब डूबने जा रहे थे।

मैंने वही क्रीम वाला हाथ उसकी चूत की तरफ बढ़ा दिया और नाभि से नीचे हल्का मसाज करने लगा।
और धीरे से चूत के तरफ हाथ लाकर एक उंगली चूत में घुसा दी।

फिर 69 की पॉजिशन में आकर मैंने अपनी चड्डी निकाली, लंड उसके मुँह में दे दिया और उसकी चिकनी चूत चाटने लगा।

अब आग तो भड़क गई ही थी तो मैंने भी हथौड़ा मारना उचित समझा।
मैंने लंड चूत के मुहाने पर सेट करने लगा और हल्का सा दबाव बनाया।

नूरी काम-रस से सरोबार, काम-सागर में डूबने को तैयार।
मेरा लंड चूत में समाता गया और नूरी की चीखें निकलने से पहले ही मैं उसे होठों पर किस करने लगा।

इधर किसिंग शुरू ही है और चुदाई के स्ट्रोक भी दनादन शुरू हो गए।
किसिंग रोककर मैं चुदाई पर ध्यान केंद्रित करने लगा।

“भाई… भाई… ओ ओ… आ.. आ… भाई… अंदर तक…. आ आओ… मुझे सदा के लिए अपना बना लो, प्लीज़!”

उसकी इन कामुक आवाज़ों से मेरी चोदन क्रिया को बल मिलता रहा।
और अब वो दुबारा झड़ने की कगार पर थी तो खुद ही कमर उठा-उठा कर साथ देने लगी।

पौना घंटा चली इस काम-क्रीड़ा में हम दोनों ही साथ-साथ झड़ने लगे।
मैं उसके पेट पर झड़ने लगा और उससे लिपटकर सो गया।
और हम यंग सिस्टर फकिंग करके एक-दूसरे को चूमते हुए नींद के आगोश में चले गए।

दूसरे दिन सुबह का अलार्म भी हमने मिस कर दिया।

सुबह 11 बजे हमारी नींद खुली।
संडे होने से आज ऑफिस नहीं जाना था।

मेरी आँखों में देखते ही वो शरमा गई और रात की चुदाई उसके ध्यान में आते ही वो सिसकने लगी, बोली, “सॉरी भाई.. रात में मैं बहक गई थी!”

“मजा आया न तुझे?”
मैंने पूछा तो वो मुझसे लिपटकर बोली, “हाँ, बहुत मजा आया! भाई, आप एक वादा करोगे मुझसे… मुझे कभी छोड़कर तो नहीं जाओगे न? मैं तो मर ही जाऊँगी आपके बगैर!”

“धत् पगली, मैं कहाँ जाऊँगा तुझे छोड़कर.. तू ही तो मेरी दुनिया है.. तेरे सिवा यहाँ मेरा है ही कौन? और ये मरने वाली बातें दुबारा न करना, समझी!”
कहकर मैंने हल्के से उसके गाल पर एक चपत लगा दी।

और हम दोनों सदा के लिए एक हो गए।

अब तो जब दिल में आया तब, जहाँ चाहा वहाँ पर, धमाधम चुदाई होने लगी।
कभी रूम में, कभी किचन में, कभी बालकनी में, नहाते समय.. और ना जाने कहाँ-कहाँ.

कैसी लगी मेरी यंग सिस्टर फकिंग स्टोरी?
rajuchakole21@gmail.com

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