टीनएज गर्ल फर्स्ट फक स्टोरी में पड़ोस की भाभी को चोदते हमें एक कमसिन लड़की ने देख लिया. मैंने भाभी को इस लड़की को चुदाई के लिए तैयार करने को कहा.
मेरे प्यारे दोस्तो, मैं आपका अक्की।
मेरी पिछली कहानी
नंगी भाभी को देखा फिर भाभी की चूत की चुदाई
आप सभी को पसंद आई।
अब आगे इस नई टीनएज गर्ल फर्स्ट फक स्टोरी में बढ़ते हैं।
मैंने निशा भाभी को 6 महीने तक दबाकर चोदा, हर एक्शन में।
इसी बीच उनके बताने पर मैंने पिंकी पर ध्यान दिया।
वो मुश्किल से 5 फीट की गठीले बदन की 18 साल की लड़की थी।
वो 12वीं में पढ़ती थी।
रंग सांवला, तीखे नैन-नक्श, बोबे इतने कि आदमी के हाथ में पूरे आ जाएं और गांड उभरी हुई।
उसे देखने के बाद अहसास हुआ कि कॉलोनी के कई लौंडे उसे ताड़ रहे हैं।
खैर, एक दिन जब मैं निशा की चूत चाटकर चोदने का जुगाड़ कर रहा था, तभी पिंकी वहां आ गई।
शुक्र है अभी मैंने कपड़े नहीं खोले थे और निशा ने मैक्सी पहनी थी।
मैंने भाभी को इशारा कर दिया।
थोड़ी देर बाद कॉफी पीते हुए- अरे पिंकी, ये अक्की तुझ पर मरता है पर कहने से डरता है। तू इससे दोस्ती करेगी क्या?
इतना सुनते ही पिंकी के मुंह से कॉफी बाहर गिर गई।
वो सकपका गई और उठकर बिना कुछ बोले चली गई।
भाभी उसे रोकती रही पर वो नहीं रुकी।
भाभी अंदर आईं।
वो काफी डर गई थीं कि कहीं पिंकी घर पर न बोल दे।
मैं- डरो मत भाभी, वो किसी को नहीं बोलेगी!
और मैं भाभी को बाहों में भरकर होंठ चूसने लग गया और उनकी गांड दबाने लग गया।
अब तक मैं चूत चुदाई में डिग्री ले चुका था और भाभी को आधे-आधे घंटे और कई बार तो इससे भी ज्यादा देर तक दबाकर चोदता था।
भाभी बिना मन के मेरा साथ दे रही थीं।
फिर मैं भाभी की मैक्सी ऊपर उठाकर उन्हें घोड़ी बनाकर अपना मलंग लंड उनकी चूत में घुसाकर चोदने लग गया।
निशा ने पैंटी ऊपर नहीं की थी, वो अभी भी घुटनों पर थी।
भाभी- यार अक्की, मेरा चुदवाने का मन नहीं कर रहा है! डर लग रहा है। तू हट जा और घर जा!
मैं- पिंकी को गांड मराने दो भाभी! उसके चक्कर में अपना टाइम क्यों खराब करें! अब लंड अंदर है तो 10-20 तगड़े शॉट में चूत का भी मन लंड में लग जाएगा!
और मैंने निशा की कमर पकड़कर दमदार चुदाई शुरू कर दी।
अभी कोई 10 मिनट ही हुए होंगे, निशा भरपूर आहें भर रही थी कि तभी बाहर के गेट की खुलने की आवाज आई।
हम दोनों ने घबड़ाकर फटाफट अपने कपड़े सही किए और सोफे पर बैठ गए।
देखा तो ये पिंकी थी।
निशा- सॉरी पिंकी, मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था। पर ये अक्की पीछे पड़ा था कि बात करवा दो। और वैसे तू भी तो इसे पसंद करती है। पर कोई नहीं, तुझे नहीं समझ आ रहा तो छोड़ दे, पर किसी को बोलना मत प्लीज!
पिंकी- ऐसी कोई बात नहीं है भाभी, आप सॉरी मत बोलो। पर मैं अचानक हुई बात पर सकपका गई थी। मुझे कुछ समझ ही नहीं आया। पर भैया… मतलब ये भी तो मुझे बोल सकता था न!
मैं- तुझसे डर लगता है कहीं तू गुस्सा न हो जाए। इसलिए भाभी से कहा। और मुझे भैया मत बोला कर!
पिंकी- अब बचपन से आपको भैया बोला है, एकदम से थोड़े ही छूटेगा!
निशा- मतलब तेरी हाँ है?
पिंकी नीचे मुंह करके मुस्कुरा रही थी।
मैं- यार पिंकी, कुछ तो बोल! मेरा गला सूख रहा है!
पिंकी- आई लव यू टू भै… मतलब अक्की!
और फिर वो वापस भाग गई।
उसके जाते ही मैंने निशा को बाहों में भर लिया और बेतहाशा चूमने लगा।
निशा- अब नई कच्ची चूत मिल गई तो मेरी चूत को मत भूल जाना!
मुझे सोफे पर धक्का दिया और लंड निकालकर चूसने लग गई।
मेरा लंड खड़ा होते ही वो मैक्सी ऊपर करके पैंटी उतारकर मेरे ऊपर बैठ गई और अपनी चूत की चुदाई गांड हिला-हिलाकर करने लगी।
थोड़ी देर चुदने के बाद मुझे किस किया।
निशा- कम उम्र की है, तेरा लंड बड़ा है। थोड़ा आराम से चोदना। मेरी तरह उसे चोदेगा तो बेहोश हो जाएगी पिंकी। पर मुझे लग नहीं रहा तू सब्र करेगा!
मैंने निशा को उठाकर सोफे पर लिटाया, अपना लोअर चड्डी उतारकर लंड फिर से चूत की गिरफ्त में किया और निशा की टांगें उठाकर कंधे पर रखीं।
ये पोज निशा को बेहद पसंद था।
मेरा एक पैर जमीन पर था और दूसरा घुटनों से मुड़ा सोफे पर। अब मैं ताबड़तोड़ निशा की चूत में लंड पेलने लग गया।
धप… धप… फच… फच्च…
निशा- आह… आह… उईईई… वाओ… और दम लगा मेरे राजा… और अंदर… आहह… और अंदर!
कोई 10-12 मिनट तक मैंने लगातार उसकी चूत चोदी।
निशा की चूत से पानी रिसने लगा।
मैं रुका और उसके बोबे दबाते हुए उसके होंठ चूमने लगा- तुम तो ऐसे समझा रही हो जैसे कल ही पिंकी आएगी और मुझे अपनी चूत दे देगी!
निशा- तू ज्यादा दिन थोड़े ही रुकेगा! चल अब फटाफट पानी निकाल और जा, बड़ी देर हो गई है, लोग शक करते हैं!
फिर मैंने ताबड़तोड़ और 10-15 मिनट चूत चुदाई की और घर चला गया।
फिर कोई एक-दो महीने तक मेरा और पिंकी का प्यार भरा टाइम चलने लगा और निशा की चूत चुदाई भी।
फिर एक दिन पिंकी फोन पर- मुझे लगता है आप मुझे प्यार नहीं करते!
मैं- यार तेरे लिए तो जान भी हाजिर है, तू ऐसा क्यों बोल रही है?
पिंकी- आपने अभी तक न तो मुझे बाहों में भरा, न ही किस किया!
मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया, वो खुशी से झूम उठा।
मैं- ऐसा मौका ही नहीं मिला। आज माँ-बापू गांव जा रहे हैं तो कल घर आ जा!
पिंकी- ठीक है, पर सिर्फ किस ही करना और कुछ नहीं!
अगले दिन पिंकी लॉन्ग स्कर्ट और टॉप पहनकर घर आई।
आज तो मुझे वो किसी अप्सरा जैसी लग रही थी।
मैंने पिंकी को बाहों में भरा और किस किया।
उसने थोड़ी देर में मुंह हटा लिया।
मैं- क्या हुआ? अच्छा नहीं लगा?
पिंकी- नहीं, वो पहली बार है न, तो सांस चढ़ गई!
मैं- मुस्कुराकर, आराम से मजे लो और डरो मत!
फिर मैं सोफे पर बैठ गया, उसे अपनी जांघ पर बैठाया और उसके रसीले होंठ चूसने लग गया।
इस बार पिंकी थोड़ी सहज थी।
मेरा लंड खड़ा होकर उसकी जांघ पर सट रहा था।
पिंकी इसे शायद फील कर रही थी।
मेरे हाथ उसकी कमर में थे।
अच्छा लंबा किस करने के बाद मैं बोला- कैसा लगा पिंकी, हमारा पहला किस? मुझे तो बड़ा मजा आया! और तुम कह रही थी कि सिर्फ किस करना। और क्या होता है?
पिंकी- मुझे भी अच्छा लगा। और आप बनो मत, जैसे तो आपको नहीं पता क्या-क्या होता है। वो निशा भाभी ने मुझे एक किताब दिखाई थी!
मैं- अच्छा, क्या था उस किताब में? प्लीज बताओ न!
पिंकी शर्मा रही थी।
फिर मैंने जिद की और एक किस और ठोक दिया।
इस बार मैं उसकी कमर भी हल्की-हल्की दबा रहा था।
पिंकी- वो उस किताब में एक आदमी अपना सुस्सू एक औरत की सुस्सू में डाले हुए था। वो पूरे नंगे थे। भाभी ने पूरा बताया कैसे-कैसे होता है। और बता रही थी कि स्वर्ग सा आनंद आता है!
मैं- ओह्ह… तुम्हें पता है, इसे गांड कहते हैं। और इसे चूत और ये लंड होता है!
ऐसा कहते हुए मैंने उसका हाथ पहले उसकी गांड पर, फिर उसकी चूत पर, फिर अपने लंड पर रखकर लंड उसकी मुट्ठी में कर दिया।
पिंकी ने सकपकाकर अपना हाथ पीछे कर लिया।
वो घबरा गई थी।
फिर मैंने उसके बोबे पकड़ लिए- और ये बोबे होते हैं, जिन्हें प्यार से मम्मे भी कहते हैं!
पिंकी ने फटाफट मेरा हाथ हटा दिया- ये आप क्या कर रहे हो? ये सही नहीं है!
पिंकी मेरी गोदी से उठने लगी।
मैंने उसे फिर से बैठा लिया- पिंकी मेरी जान, मैं प्यार करता हूँ। धोखा नहीं दूंगा। घबराओ मत, ये सब तो लड़का-लड़की करते ही हैं। इससे प्यार बढ़ता है!
फिर मैं उसे चूमने लगा और एक हाथ उसकी गांड पर और दूसरा उसके बोबे पर।
मैं हल्का-हल्का दबा रहा था।
पिंकी काफी असहज थी।
वो मेरा हाथ अपने बोबों से हटाना चाह रही थी पर पहले जितना जोर नहीं लगा रही थी।
पिंकी ने समीज पहन रखी थी तो मुझे उसके बोबे अच्छे से फील हो रहे थे।
थोड़ी देर बाद उसका विरोध न के बराबर था।
मैं उसकी गर्दन पर होंठ फेरने लगा और हाथ उसके टॉप में डाल दिया।
क्या कयामत के बोबे थे! एकदम कसे हुए।
बिल्कुल छोटी-सी चूचियाँ।
एकदम जवान बोबे मेरे हाथ में थे।
पिंकी की सांसें तेज थीं।
वो मेरा हाथ टॉप से निकालने की नाकाम कोशिश कर रही थी।
पिंकी- प्लीज अक्की, ऐसा मत करो! प्लीज छोड़ दो मुझे, घर जाना है! प्लीज…
वो पूरी कोशिश कर रही थी पर मैं भूखे शेर की तरह उस पर टूट पड़ा था।
उसके बोबों का स्पर्श मुझे उत्तेजित कर रहा था।
तभी वो थोड़ा ज्यादा विरोध करने लगी तो मैंने उसे छोड़ दिया और खड़ा हो गया।
मेरा लंड लोअर में तंबू बनाए हुए था जिस पर पिंकी की नजर भी गई थी।
मैं- ठीक है, तुम्हें ये सब नहीं करना तो यहां से जाओ और मुझे भूल जाओ!
पिंकी मेरे सीने से लिपटकर- ऐसी बात नहीं है अक्की! पर शादी से पहले ये सब ठीक नहीं। अगर कल को तुम मुकर गए तो मैं क्या करूंगी? कौन मुझसे शादी करेगा? मैं तो कहीं की नहीं रहूंगी!
मैं उसका चेहरा चूमकर- मुझ पर विश्वास करो, मैं तुम्हें क्यों धोखा दूंगा! चलो ठीक है, मैं लंड नहीं घुसाऊंगा तुम्हारी चूत में। पर मुझे बोबों को तो प्यार करने दो!
पिंकी मेरे होंठ चूमने लगी।
मैं समझ गया तरकीब काम कर गई।
मैंने उसके टॉप में हाथ डाला और बोबों को सहलाते हुए उसे चूमने लगा।
फिर मैंने उसका टॉप उतार दिया।
अब वो सिर्फ सफेद समीज में थी।
पिंकी घबरा और शर्मा रही थी।
पर मेरे ऊपर तो वासना का भूत नाच रहा था।
मैंने उसकी समीज भी उतार दी।
उफ्फ… क्या बोबे थे! एकदम कसे हुए, हल्के भूरे रंग की छोटी-छोटी चूचियाँ।
ऐसे बोबे किसी भी मर्द को पागल कर दें।
मैं फिर से सोफे पर बैठ गया और पिंकी को जांघ पर बैठा लिया।
अब मैं एक हाथ से उसके एक बोबे को सहलाने-दबाने लगा और दूसरे बोबे को मुंह में भरकर चूसने और जीभ से चाटने लगा।
पिंकी थोड़ी देर में नॉर्मल हो गई।
वो अब आंखें बंद कर मेरे बालों में हाथ फेरते हुए बोबे चुदाई के मजे लेने लगी।
थोड़ी देर में पिंकी ने जगह चेंज की।
अब वो चाहती थी मैं दूसरे बोबे को चूसूं।
मैंने भी ऐसा ही किया।
पर इस बार उसके हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया।
थोड़ी देर में पिंकी ढंग से लंड को मसलने लगी।
अब मैंने लोअर नीचे सरकाकर लंड सीधे हाथ में दे दिया।
पिंकी चिहुंककर उठकर मेरे सामने खड़ी हो गई।
उसकी नजरें मेरे तने हुए लंड पर अटक गईं।
और मेरी नजर उसके बोबों पर।
मैंने उसे फिर से गोदी में बैठाया और लंड उसके हाथ में पकड़ा दिया।
वो मेरे लंड को ही देख रही थी।
मैं- क्या देख रही हो? छोटा लग रहा है क्या? अब जैसा भी है, तुम्हारा ही है!
पिंकी- ये छोटा है तो बड़ा कितना होता होगा?
मैं हंसकर उसके बोबे चूसने लगा।
वो हाथ से मेरे लंड को सहलाते हुए उसे ही देख रही थी।
पिंकी- ये इतना बड़ा अंदर कैसे जाएगा? मेरी चूत तो इतनी बड़ी नहीं है!
मैं- मेरी जान, हर लड़की की चूत छोटी ही होती है। फिर लंड की पेलम-पाली से वो चौड़ी हो जाती है!
पिंकी- पर ये तो बहुत बड़ा है! नहीं-नहीं, मैं तो मर जाऊंगी! प्लीज अक्की, जब मैं 22-23 की हो जाऊंगी तब घुसा लेना प्लीज!
मैं- कोई नहीं पिंकी, जब तुम तैयार होगी तभी मेरा लंड अंदर डालूंगा!
फिर मैं उसकी चूत पर हाथ फेरते हुए बोबे चूसने लगा।
थोड़ी देर में मेरा हाथ उसकी पैंटी में था और उसने अपनी जांघें भींच रखी थीं।
उसके रोएं जैसे झांटों को सहलाते हुए मैं उसकी टांगें चौड़ी करने लगा।
उसे आंखों से दिलासा दिया तो उसने टांगें खोल दीं।
मैं उसके भगनासे को हल्के से रगड़ने लग गया।
उसकी चूत पनिया गई थी।
फिर उसकी एक टांग उठाकर सोफे पर रखी और उसकी चूत रगड़ता रहा।
पिंकी सिसकारियां भरने लगी।
उसके बोबे ऊपर-नीचे होने लगे।
तभी मैंने उसे सोफे पर लिटाया और झट से पैंटी उतार फेंकी।
पिंकी- नहीं अक्की, तुमने कहा था अंदर नहीं डालोगे! प्लीज छोड़ दो!
मैं- डरो नहीं, मैं चूत नहीं मारूंगा। मैं कुछ और कर रहा हूँ, तुम एन्जॉय करो!
फिर मैं उसकी टांगें फैलाकर चूत चाटने लग गया।
पिंकी ने ऐसा बिल्कुल नहीं सोचा था।
वो उछल पड़ी।
पर मैं रुका नहीं और लगातार जीभ से चूत चाटता रहा।
पिंकी जोर-जोर से सिसकारियां भरते हुए ढेर हो गई।
उसने मेरे मुंह को जांघों में जोर से दबा लिया और अपनी कमर झटकने लगी।
मैं समझ गया कि ये तो गई।
मैं- कैसा लगा मेरी जान? तुम्हारी चूत बहुत रसीली है। मजा आ गया!
पिंकी- मजा तो बहुत आया! उस किताब में औरत भी लंड चूस रही थी। आप चाहो तो मैं…
मैंने फटाफट लंड उसके मुंह में ठूस दिया।
पिंकी उसे चूसने-चाटने लगी।
पहली बार मुझे लगा जैसे पिंकी बेझिझक ये सब कर रही है।
उसने पूरी शिद्दत से लंड चूसा और फिर घर चली गई।
अगले 1-2 महीने यही चलता रहा।
फिर एक दिन जब रात को मैं निशा को ताबड़तोड़ चोद रहा था- आहह… आह… प्लीज धीरे अक्की, दर्द हो रहा है!
मैं थोड़ा रुका, निशा के बोबे मसले, जोर से चूसे और दांत गड़ा दिए।
निशा जोर से चिल्लाई- आईईई… मार डाल मुझे! अक्की तू या तो जल्दी-जल्दी पिंकी की चूत चोद ले या मुझे छोड़ दे!
मैं- क्या हुआ निशा? पहले तो बहुत बोलती थी – जोर से चोद, और जोर से मेरी चूत फाड़ दे! और अभी 20-25 दिन से तुम बदल गई हो!
निशा- बदली मैं नहीं, तुम हो! पिंकी को तो चोद नहीं पा रहे और उसकी सारी भड़ास मुझ पर निकाल रहे हो। पिछले दिनों तुमने गौर किया? तुम कितने वहशी बनकर मेरी चूत का चुतड़ा कर रहे हो। कोई बातचीत नहीं, कोई फोरप्ले नहीं, बस आते ही चड्डी खोलकर मेरी चूत की सुताई करने लग जाते हो। पहले कितने प्यार से तुम मेरे बोबे सहलाते-चूसते थे। पर अब बुरी तरह मसलते हो, काटते हो।
वह आगे बोली- प्लीज अक्की, पहले की तरह चोदो यार! उसमें मजा था, प्यार था। अब तो ऐसा लग रहा है जैसे तुम मेरा बल।त्कार कर रहे हो!
मैं सकपका गया।
पिछली 20-25 दिन की चुदाई पर ध्यान दिया तो पता लगा निशा सच कह रही थी।
मैं सच में पिंकी की चूत की हवस में निशा को बुरी तरह से चोदकर उसकी ऐसी-तैसी कर रहा था।
मैं- सॉरी भाभी, माफ कर दो प्लीज!
और मैं प्यार से उसके बोबे सहलाने लगा।
मैं उसकी चूत में पहले की तरह लंड पेलता रहा, उसे प्यार से किस किया।
निशा की आंखों में फिर से प्यार भरे आंसू थे।
मैंने फिर निशा को पुरानी स्टाइल में बहुत प्यार से चोद-चोदकर दोनों का पानी निकाला।
निशा आंखें बंद किए मुस्कुरा रही थी।
अगले दिन पिंकी का फोन आया- पापा-मम्मी चाचा के यहां गए हैं, शाम तक आएंगे। अक्की आ जाओ प्लीज! बहुत दिन हो गए चूत चटवाए हुए और मेरे हल्के लंड को चूसे हुए!
मैं कोई 9:30 पर उसके घर पर था।
मेरे अंदर आते ही पिंकी ने सारे कपड़े उतारे फिर मेरे भी उतार दिए।
हम एक-दूसरे को चूमने-चाटने लगे।
मैं उससे अलग होते हुए- अब और नहीं होता पिंकी! आज से हम दोनों अलग!
और मैं कपड़े पहनने लगा।
पिंकी ने फट से कपड़े छीनकर फेंक दिए और मेरा लंड चूसने लगी।
फिर खड़ी होकर बोली- ऐसा मत कहो अक्की! मैं मर जाऊंगी! प्लीज मुझे मत छोड़ो!
मैं- क्या मतलब है पिंकी? मेरे सारे दोस्त अपनी फ्रेंड को खूब चोदते हैं। एक तो मेरे सामने ही कई बार चोद चुका है। और मैं चूतियों की तरह बस तुम्हारा मूत चाटकर लंड हिला कर खुश हो रहा हूं। बस अब और नहीं! मेरे एक दोस्त की फ्रेंड मोहिनी ने मुझे खुल्ला चुदाई का ऑफर दिया है। कल उसके घर जा रहा हूं उसकी चूत चोदने। तुम अपनी चूत पर अगरबत्ती लगा के रख लो!
पिंकी- ऐसा मत कहो अक्की! मैं तो खुद तुम्हें आज लंड डालने के लिए बोलने वाली थी। पर तुम पहले ही नाराज हो गए!
मेरे तो लंड को जैसे पर लग गए, वो और कड़क हो गया।
मैंने बिना देर किए उसे गोदी में उठाया और सोफे पर लिटा दिया।
फिर जमकर चूत चाटी।
फिर लंड पर थूक लगाया और चूत पर सटा दिया।
पिंकी कांप रही थी।
मैंने उसके होंठ चूसे और लंड का दबाव चूत पर देने लगा।
पर चूत बड़ी कसी हुई थी।
तो मैंने अपनी कमर अच्छी पीछे करके जोर से धक्का जड़ दिया।
लंड का टोपा चूत की सील तोड़कर अंदर समा गया।
पिंकी की चीख निकल गई- आईईई… उफ़्फ़… मर गई अक्की! प्लीज इसे बाहर निकालो! मैं मर जाऊंगी! बहुत दर्द हो रहा है! मैंने पहले ही कहा था ये बहुत बड़ा है! मुझे चक्कर आ रहे हैं! प्लीज अक्की निकालो!
और पिंकी रोने लगी।
वो लगभग बेहोश सी हो गई।
नीचे चूत के आसपास मुझे कुछ गीला-गीला महसूस हुआ।
हाथ लगाकर देखा तो ब्ल.ड निकला था।
मेरा लंड और तन गया।
पिंकी अर्ध बेहोशी में ही रो रही थी।
मैंने उसके बोबे दबाए और उसके होंठ चूमे।
वो रोए जा रही थी।
वो आगे सरककर लंड निकलना चाह रही थी पर मैंने उसे मजबूती से जकड़ा हुआ था।
मैं- पिंकी, जितना दर्द होना था वो हो चुका। अब ज्यादा नहीं होगा। तुम कहो तो मैं धीरे-धीरे चोदना शुरू करता हूं। अगर दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ तो हम नहीं करेंगे।
वो टीनएज गर्ल फर्स्ट फक के लिए मान गई।
मैं धीरे-धीरे लंड पेलने लगा, हर बार मैं लंड को अंदर घुसा देता।
फिर 20 मिनट बाद पूरा लंड अंदर ठूंसे हुए मैंने कहा- अभी भी दर्द हो रहा है तो लंड निकल लूं? कोई बात नहीं, मैं कल मोहिनी को चोद लूंगा!
पिंकी- नहीं-नहीं! तुम चोदते रहो! मुझे अब दर्द नहीं है! और दुबारा मोहिनी की बात की तो मैं सु.साइड कर लूंगी! प्लीज अक्की, आज के बाद जब तुम्हारा मन करे चूत चोद लेना! पर किसी और के पास मत जाना!
मेरी तरकीब फिर काम कर गई और मैं पिंकी की टाइट चूत में लंड पेलने लगा।
पिंकी के चेहरे से साफ दर्द झलक रहा था।
पर अपने को क्या, मैं तो उसकी टाइट चूत के मजे लेने लगा।
मैं उसके बोबे चूसते हुए धक्के देने लगा।
अभी मैंने वो निशा वाली चुदाई नहीं की थी।
पिंकी की चूत गजब गर्म थी।
ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझे जकड़ रही हो।
फिर मैंने चुदाई तेज की और 10 मिनट बाद उसकी चूत की गहराई में लंड का पानी छोड़ दिया।
मेरा रोम-रोम खिल गया था।
क्या कसी हुई चूत थी!
मैंने काफी देर तक लंड अंदर ही रखा।
वो फिर से खड़ा हो गया था पर पिंकी की हालत देखकर दुबारा चूत नहीं मारी।
बस उसके टाइट बोबे चूसता, चाटता और दबाता रहा; उसके होंठों को चूमता रहा।
फिर मैं उठा तो सोफे पर बहुत खू.न था।
पिंकी डर गई तो मैंने बताया कि तेरी सील टूट गई है।
पिंकी ने फटाफट उस पर इंक पेन की स्याही बिखेर दी और सोफा कवर धोने के लिए डाल दिया।
वो बड़ी मुश्किल से लंगड़ाकर चल रही थी।
उसकी आंखें अभी भी चूत का दर्द बयां कर रही थीं।
फिर मैं घर आ गया।
और निशा को फोन पर पूरी चुदाई और सील तुड़ाई की कहानी सुनाई।
फिर निशा ने मुझे घर बुलाकर मेरी दुबारा चुदाई की इच्छा पूरी कर दी।
मेरी आपबीती टीनएज गर्ल फर्स्ट फक स्टोरी कैसी लगी दोस्तो, बताना!
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