भाभी की कुंवारी चचेरी बहन के साथ सुहागरात

Views: 0 Category: Jawan Ladki By bunnyb8982 Published: August 27, 2026 📖 11 min read
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जवान लड़की की वासना की कहानी में मेरे भाई की छोटी साली हमारे घर आई. वो मुझे घूरे जा रही थी. मैं समझ गया कि इसकी चूत लंड मांग रही है.

दोस्तो, मेरा बनी चौधरी है.
मैं साल 2011 से raatkibaat का नियमित पाठक हूं.
मैं जब जब फ्री रहता हूं तो इधर प्रकाशित मजेदार सेक्स कहानियां पढ़ता रहता हूं.
इतने सालों में मैंने कई सारी कहानियां पढ़ी हैं, जो मुझे काफी ज्यादा पसंद आईं.

अब मैं भी कुछ योगदान करना चाहता हूं और आज मैं भी कुछ अपनी असली जिंदगी के मजेदार अनुभव को आपके साथ शेयर कर रहा हूँ.

मेरी उम्र अभी 26 साल है.
मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे का रहने वाला हूं.
मेरी हाईट 5 फुट 4 इंच है और मेरा शरीर एकदम जिम जाने वाले लड़कों की तरह है.
मेरे हथियार का साइज लगभग 6 इंच है और इससे मैंने कई भाभी, गर्लफ्रेंड और भाई की दो सालियों को पेला है.

मैं अपनी पहली सच्ची सेक्स घटना को शेयर कर रहा हूं.

यह जवान लड़की की वासना की कहानी 2011 की है, जब मेरे भाई की शादी हुई थी.

शादी के कुछ दिनों बाद हमारे घर पर भाभी की एक चचेरी बहन रहने आई थी.
उसका नाम ज्योति था.

वह देखने में ही एकदम नई नकोर माल लड़की लग रही थी.
लेकिन उसकी सुंदरता को देख कर मुझे भरोसा नहीं हुआ कि ये किसी से सैट न हो!

फिर जब मैंने उसको चोदते वक्त चुत को छुआ था, तो पता चला कि इसकी तो अभी बौनी भी नहीं हुई थी.

हालांकि मेरा इरादा उसके साथ कुछ करने का नहीं था पर वह साली जब से घर आई थी तो मुझे ही घूरे जा रही थी.
मैंने भी उससे थोड़ा सा मजाक किया और यहां वहां की बातें की.

वह हंस दी तो समझ में आ गया कि ये तो आसानी से फंस जाएगी.
उन दिनों बारिश का मौसम था और शादी का सीजन भी चल रहा था तो मेरी भाभी की रिश्तेदारी में पास के ही गांव में शादी थी.
ज्योति भी शादी में गई हुई थी.

यानि घर के सब लोग वहां गए हुए थे. घर पर बस मैं और मेरी मम्मी थीं.
रात को एक बंदा उसको घर पर छोड़ने आया.

उस समय मैं और मेरी मम्मी खाना खा रहे थे तो मम्मी ने उससे पूछा- खाना खाओगी ज्योति?
उसने कहा- शादी में खाकर आई हूँ आंटी!

मैं खाना खा पीकर अन्दर वाले कमरे में भाभी के उस बेड पर लेट गया जो वे अपने यहां से लेकर आई थीं.
ज्योति मम्मी के साथ आगे वाले कमरे में टीवी देख रही थी.

वे दोनों लगभग दस बजे तक टीवी देखती हुई बातें करती रहीं.
मैं बेड पर लेट कर अपना फोन चला रहा था.

थोड़ी देर बाद मम्मी सो गईं और वह वहीं टीवी जे सामने बैठी रही.
कुछ देर बाद वह टीवी को चलता छोड़ कर मेरे पास आकर बैठ गई.

मैंने उसे देखा तो वह बोली- चौधरी जी, क्या कर रहे हो?
मैंने भी मजाक में कह दिया कि बस भाई की साली जी, आपका इंतजार कर रहा था.

ये सुनकर वह हंसने लगी.
मैंने उससे पूछा- यहां क्यों आई हो? नींद आ रही हो तो मम्मी के साथ सो जाओ!

वह कहने लगी- सो जाऊंगी, पहले आपसे बातें तो कर लूं!
उसकी बात करने की स्टाइल से मुझे अन्दर से कुछ अजीब सा होने लगा.

मैं सोचने लगा कि ये क्या बात करेगी मुझसे?
उसी वक्त तेज बारिश की वजह से लाइट चली गई और कमरे में अंधेरा हो गया, तो वह मौका देखकर या पता नहीं डर के कारण तुरंत मेरे साथ उसी बेड पर लेट गई.

कसम से… मेरी गांड फट गई.
मैंने उससे कहा- क्या हुआ … यहां मत लेटो मम्मी जाग जाएंगी तो वे गलत समझेंगी!
वह बोली- वे तो सो गई हैं गहरी नींद में!

मुझे यकीन नहीं हुआ तो मैंने कहा- रुको मैं देख कर आता हूँ.
मैं बाथरूम के बहाने गया और उनको देख कर वापस आ गया.

वह बोली कि सो गई हैं ना!
मैंने हां में सिर हिला दिया, पर मुझे अभी भी डर लग रहा था कि वे जाग न जाएं और मेरी बैंड बज जाए.

फिर मैंने मन में सोचा कि अगर डरता रहूंगा तो इसको पेलने का मौका भी चला जाएगा और पता नहीं ऐसा सुनहरा अवसर दुबारा कब मिलेगा.
अब मैं बेड पर दीवार की तरफ लेट गया और उससे बात करने लगा.

पहले मैंने उससे उसके हाल-चाल पूछे.
फिर उसने मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा, तो उस टाइम मेरी एक गर्लफ्रेंड थी, पर मैंने उसको झूठ बोल दिया कि कोई नहीं है!
वह थोड़ा मुस्कुरा कर बोली- ठीक है!

मैंने उससे पूछा कि तुम्हारा कोई ब्वॉयफ्रेंड है?
वह बोली- मेरा भी कोई नहीं है.

अब यही सब बातें करते करते मैंने मोबाइल में देखा तो रात के ग्यारह बज गए थे.
मैंने उससे झूठे मन से कहा कि जाओ अब मम्मी के साथ सो जाओ!

वह बोली- मुझे आपके साथ ही सोना है.
मैंने कहा- ठीक है सो जाओ.

मैंने करवट ले ली, पर मुझे नींद कहां आने वाली थी.
मैं उसकी तरफ पीठ करके सोने का नाटक करने लगा.

कुछ मिनट बाद मैंने वापस उसकी तरफ करवट ली, तो वह मेरी तरफ मुँह करके जाग रही थी और शायद कुछ सोच रही थी.
मैंने पूछा- क्या हुआ?

वह कुछ नहीं बोली, बस मेरी तरफ देखे जा रही थी.
मैंने 2-3 बार पूछा, पर उसने कोई जवाब नहीं दिया.

मैंने उसके कंधे पर हाथ रखकर उसको हिलाया, तो वह बोली कि कुछ नहीं!
मैंने पूछा- कुछ हुआ है क्या?

वह अभी भी शांत रही.
अब मुझे भी समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं?

मैंने अपना हाथ धीरे से उसके सीने की तरफ किया, तो उसके मम्मों से टच हो गया.
उसने कुछ नहीं बोला, बस आंखें बंद कर लीं.
इससे मुझे लगा शायद ये ग्रीन सिग्नल है.

मैं उसके एक दूध को धीरे से दबाने लगा और उससे पूछने लगा- क्या हुआ?
वह कुछ बोली ही नहीं, बस उसकी आंखें अंधेरे में चमकने लगी थीं.

थोड़ी देर बाद वह मेरे और पास को खिसक आई और उसने मेरा हाथ अपने सीने से हटा दिया.

मैंने फिर से उसके मम्मे को टच किया और जब वह कुछ नहीं बोली.
तो मैंने एक झटके से उसके दोनों बूब्स को अपने हाथ से बारी बारी से दबाना चालू कर दिया.

अब वह धीमी धीमी आवाज में कराह रही थी और मजा ले रही थी.

जवान लड़की की वासना को मैं समझ गया और मैं देर न करते हुए उसके ऊपर चढ़ गया.

मेरी मम्मी नींद से कभी भी जाग सकती थीं.
मैं उसके एक दूध को उसके कुर्ते के ऊपर से ही अपने मुँह में भर लिया और पीने लगा.

मैं कभी उसके नर्म होंठों को चूमता, तो कभी उसके बूब्स को चूसने लगता.
वह मस्त कराह भर रही थी.

मैं अपना एक हाथ उसकी कमर के नीचे ले जाने लगा, तो उसने तुरंत मेरा हाथ पकड़ लिया.
मैंने उससे अपना हाथ छुड़ाया और उसकी सलवार के अन्दर डाल दिया.

अब जैसे ही मैंने उसकी चूत को छुआ तो वह एकदम कचौड़ी सी फूली हुई थी और गीली लग रही थी.
उसी वक्त मैंने चुत की दरार में उंगली डालने की कोशिश की तो वह तड़फ उठी.
मैं समझ गया कि ये सील पैक माल है.

अब मैंने जरा सी भी देर न करते हुए उसके कुर्ते को उतारने की कोशिश की.
वह थोड़ी झिझक रही थी.

मैंने गुस्से दिखाते हुए कहा- अगर करना है तो जल्दी करने दो, वर्ना मम्मी जाग जाएंगी तो कुछ नहीं हो पाएगा!

यह सुनते ही उसने कुर्ते को छोड़ दिया.
मैंने झट से उसका कुर्ता ऊपर उठा दिया. वह बोली- इतना ही रहने दो न!

मैंने भी सोचा कि क्या करना पूरा उतार कर, ऊपर के दोनों दूध मेरे सामने नंगे हो गए.
मैं उसके दोनों बूब्स को किसी प्यासे कुत्ते की तरफ पीने लगा.

वह अपने मुँह से आह आह करने लगी.
मैंने कहा- ज्यादा आवाज मत करो मम्मी जाग जाएंगी.

उसने अपने हाथ से अपना मुँह बंद कर लिया.
अब बारी उसकी सलवार की थी, तो मैंने तुरंत उसकी सलवार का नाड़ा ढीला किया और नीचे करके उतार दी.

उसकी सलवार हटी तो गीली पैंटी में हाथ लगा, मैंने झट से उसकी पैंटी को भी नीचे सरका कर उतार दिया.
अंधेरे के कारण मुझे पैंटी का रंग पता ही नहीं चल रहा था.

अब मैंने जल्दी से अपने सर कपड़े उतारे और उससे कहा- चल जल्दी से मेरा लौड़ा मुँह में ले कर गीला कर दे!
वह कहने लगी- नहीं मुझे मुँह में नहीं लिया जाएगा.

मैंने भी उससे जबरदस्ती नहीं की.
फिर उसके एक हाथ को अपने लौड़े पर रखकर बोला कि चलो इसको हिलाओ और खड़ा करो!

वह लंड हिलाने लगी और मैं उसकी चूत में उंगली करने लगा.
करीब दो ही मिनट के बाद वह चुदासी हो गई और मचल कर अपनी कमर इधर उधर करने लगी.

मैं तुरंत समझ गया कि अब इसको लौड़ा चाहिए!
मैंने भी देर नहीं की और उसकी चूत पर अपना लौड़ा सैट करने लगा.
पर उसकी चूत का छेद तो अभी बहुत छोटा सा था, तो लौड़े को अन्दर घुसने की जगह ही समझ में नहीं आ रही थी.

मैंने उसकी चूत पर थोड़ा थूक लगाया और उससे कहा कि लौड़े पर भी चिकनाई लगा जल्दी से!
उसने अपने मुँह से थूक निकाल कर लंड पर लगा दिया.

फिर मैंने अपने हाथ से लंड पकड़ा और उसकी चूत पर लौड़ा सैट करके घुसाने लगा.
वह अपने हाथ से लंड पकड़ कर छेद में सही से लगाने लगी.

दरअसल उसे चुत में खुजली हो रही थी, तो वह लंड को जल्दी से अन्दर करवाना चाह रही थी.
उसे पता ही नहीं था कि लंड जब चुत को फाड़ कर अन्दर घुसेगा तो क्या होगा.

मैंने लंड को दबाना स्टार्ट किया तो सुपारे ने चुत को चीर कर एंट्री लेना शुरू की.
वह दर्द से आंखें फाड़ने लगी.

मैंने कहा- आवाज नहीं निकलनी चाहिए, नहीं तो सब काम बिगड़ जाएगा.
उसने अपने ही हाथ को मुँह पर लगा लिया और मैंने लंड पेलना स्टार्ट कर दिया.

अब तक मेरे लंड का टोपा ही अन्दर गया होगा कि वह छटपटाने लगी.
मैंने उसे चूम कर कहा- थोड़ी सब्र करो, दर्द होगा लेकिन बाद में मजा आएगा!

वह हम्म करके चुप हो गई.

मैंने लंड वापस अन्दर डालना स्टार्ट किया और धीरे धीरे मैंने अपना लगभग आधा लंड उसकी चूत में पेल दिया.
अभी आधा लौड़ा बाहर ही था.

मैंने देखा कि उसकी आंखों में आसूं आ गए थे, तो मैंने पास में पड़े कपड़े से उसके आंसू पौंछ दिए और चूम लिया.
वह कुछ संयंत हो गई.

मैंने फिर से अपने लंड को अन्दर बाहर करना स्टार्ट कर दिया.

कुछ ही पल बाद वह भी एन्जॉय करने लगी और मुझे भी मजा आने लगा.

करीब 5 मिनट बाद मैं झड़ गया और पसीने में लथपथ होकर उसके ऊपर ही लेट गया.
इस दौरान वह भी झड़ चुकी थी.

करीब दस मिनट बाद मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया.
अबकी बार मैंने उससे कहा- अब इसको चूसो!
उसने पुनः मना कर दिया.

मैंने कहा- एक बार चूसो तो, अच्छा नहीं लगे तो नहीं चूसना.
वह लंड चूसने लगी.

उसने कुछ ही देर में इस तरह से लंड चूसना शुरू कर दिया था कि मुझे स्वर्ग नजर आने लगा.
दो मिनट तक लंड चूसने के बाद उसने खुद ही कहा कि अब ये खड़ा हो गया … प्लीज इसे मेरी चूत में डालो जल्दी से!

मैंने तुरंत उसको पोजीशन में लिया और लंड पेलना स्टार्ट कर दिया.
इस बार वह बड़े आराम से मेरे लौड़े का मजा ले रही थी.

करीब दस मिनट बाद मैं दोबारा झड़ने वाला था तो मैंने जल्दी से लौड़े को चुत से बाहर निकाला और उसके पेट झड़ गया.
वह भी मेरे साथ ही झड़ गई थी.

उस वक्त रात के करीब एक बज चुके थे, तो मैंने उससे कहा कि अब जाओ, सो जाओ.
वह कहने लगी- मुझको तुम्हारे साथ ही सोना है!

मैंने मन में सोचा कि अब गड़बड़ हो जाएगी.
मैंने उससे कहा कि तुम जा रही हो या मैं ही बाहर चला जाऊं!

वह हंस दी और चली गई.

दोस्तो, चुत चुदाई के बाद जो सुकून की नींद आती है, वह मुझे उस दिन मालूम हुआ.
थकान के बाद कुछ देर उसकी चुत की याद करने के बाद मुझे गहरी नींद आ गई.

सुबह जब मैं आठ बजे जगा तो देखा कि वह मेरी मम्मी के साथ किचन में काम करवा रही थी.
मैंने चाय के लिए आवाज लगाई तो मम्मी ने ज्योति को चाय लेकर मेरे पास भेज दिया.

मैंने उसको पकड़ लिया और पूछा- किसके दूध की चाय है?
वह हंस कर बोली- मेरे!

मैंने उसको पकड़ कर एक चुम्मी ली और तभी मम्मी की आवाज आई तो वह वापस चली गई.
उसी दिन शाम को ज्योति अपने घर चली गई. उसके बाद मैंने बहुत कोशिश की कि उसकी चुत चुदाई का मौका पुनः मिल जाए, लेकिन अभी तक मौका नहीं मिला है.

दोस्तो, मैं उम्मीद करता हूं कि आपको मेरी पहली सच्ची जवान लड़की की वासना की कहानी पसंद आई होगी.
मुझे आपके विचारों को जानने की काफी उत्सुकता है, प्लीज जरूर लिखिएगा.
धन्यवाद.
bunnyb8982@gmail.com

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