नई बुर की चुदाई कहानी में मैं बहुत गर्म माल हूँ. मेरी बेटी जवान हुई तो मुझे लगा कि इसकी बुर भी लंड मांगने लगी होगी. मैंने अपनी बेटी की कुंवारी बुर घर के नौकर से चुदवा दी.
मेरा नाम मिसेज बरखा है दोस्तो।
मैं अपने शौहर और बेटी के साथ दिल्ली में रहती हूँ.
हमारा एक्सपोर्ट का काम है इसलिए मेरे शौहर अक्सर विदेश आते जाते रहते हैं।
घर में मैं मेरी बेटी सोफ़िया और मेरा एक नौकर बिल्लू रहता है।
घर का काम और थोड़ा बहुत बाहर का काम बिल्लू देखता है और बाकी काम मैं खुद देखती हूँ।
बेटी सोफ़िया कॉलेज जाती है अपनी पढ़ाई करती है तो उससे ज्यादा काम नहीं करवाती।
सोफ़िया बेहद खूबसूरत है और गज़ब की हॉट है।
मैं भी खूबसूरत हूँ सेक्सी हूँ और हॉट भी क्योंकि अभी तो मैं सिर्फ 41 की ही हूँ।
मुझे सेक्स जरूरत से ज्यादा पसंद है।
मैं सेक्स की दीवानी हूँ।
मुझे अगर एक लण्ड की जरूरत है तो मैं तीन लण्ड लेती हूँ।
लण्ड लेने में न मैं कभी शर्माती हूँ और न किसी भोसड़ी वाले से डरती हूँ।
यह बात मेरी बेटी सोफ़िया को मालूम है और वह भी बुर चोदी जबसे जवान हुई है तब से बिल्कुल मेरी ही तरह हो गयी है, मुझसे खुल कर लण्ड की बातें करने लगी है।
मैं चाहती थी कि मेरी बेटी मेरे साथ रहे, कहीं गलत लोगों के चक्कर में न पड़े.
इसलिए मैंने उसे अपना दोस्त बना लिया और चुदाई की बातें करने लगी।
मैंने सोच लिया कि मैं बेटी की लण्ड की जरूरत पूरी कर दूंगी तो वह कहीं और नहीं जाएगी।
वो जितना चाहेगी उतने लण्ड पेलूँगी उसकी चूत में और उससे पेलवाऊंगी भी लण्ड अपनी चूत में।
ताकि घर की इज़्ज़त घर में ही बनी रहे।
यह नई बुर की चुदाई कहानी मेरी बेटी की पहली चुदाई की है.
एक दिन इत्तिफाक से सोफ़िया अपना मोबाइल घर में भूल गयी थी तो मैंने उसे देखना शुरू किया।
उसमे बड़े बड़े मोटे मोटे लण्ड की फोटो थीं, खूब गन्दी गन्दी बातें लिखी थीं।
उसकी चैट देखी तो उसमें माँ बहन चुदाने की बड़ी मस्त मस्त बातों के अलावा ट्रिक्स भी लिखीं थीं।
लड़कियां कैसे अपनी माँ बहन चुदवायें और लड़के कैसे अपनी माँ बहन चोदें।
इन सबका तरीका लिखा हुआ था।
यह सब पढ़कर मेरी चूत धधक उठी।
मेरे मन में आया कि सोफ़िया किसी का लौड़ा तो नहीं पकड़ रही है? किसी से चुदवा तो नहीं रही है?
उसके मोबाइल से मालूम हो रहा है कि उसे लण्ड बहुत जल्दी चाहिए।
मैं तो सोच रही हूँ कि आज ही मैं उसे क्यों न कोई लण्ड पकड़ा दूँ.
जब मेरी चूत का ये हाल है तो उसकी चूत का लण्ड के बिना तो वाकई बड़ा बुरा हाल होगा.
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि किसका लण्ड उसे पकड़ा कर उसकी चूत चुदवा दूँ।
इतने में बिल्लू आ गया.
बस मेरे मन में आया कि क्यों न मैं इस नौकर बिल्लू का ही लौड़ा पकड़ा दूँ सोफ़िया को?
बिल्लू घर का नौकर है तो घर की बात घर में ही रहेगी।
कोई रिस्क नहीं है।
वैसे मैं आपको बता दूँ दोस्तो, कि मैं बिल्लू का लण्ड कई बार पकड़ चुकी हूँ।
कई बार मैंने बिल्लू से अपनी गांड धुलवाई है, कई बार उससे अपनी झांटें बनवाईं हैं और कई बार उसके सामने पूरी नंगी होकर अपने पूरे बदन की मालिश करवाई है.
और मजे की बात यह कि मैंने ये सब उसका लण्ड पकड़े पकड़े किया है।
मैंने तो उससे अपना भोसड़ा भी चटवाया है और अपनी गांड भी चटवाई है।
उसका लण्ड भी खूब चाटा है मैंने!
मगर हां मैंने लौड़ा कभी चूत में नहीं पेलवाया।
कभी लौड़ा उसका अपनी गांड में नहीं ठुकवाया।
उससे कभी चुदवाया नहीं मैंने।
हां मैं उसके लण्ड के साथ हर बार खेलती रही हूँ।
लण्ड साला 8 इंच का है और मोटा भी मजे का है।
लण्ड का लाल लाल सुपाड़ा बड़ा क्यूट लगता है जिसे चाटने में बड़ा मज़ा आता है।
बस मैंने ठान लिया कि आज मैं बुर चोदी सोफ़िया को नौकर का लण्ड पकड़ा दूंगी और फिर इसी का लण्ड उसकी चूत में घुसड़वा दूंगी।
आज मैं खुद अपने हाथ से चोदूंगी अपनी बिटिया की बुर।
सोफ़िया के आने के पहले मैंने बिल्लू को बैठा कर सब समझा दिया।
बिल्लू हमारे घर में पिछले 5 साल से काम कर रहा है।
अब वह मस्त जवान हो चुका है।
वह भी मुझे सोफ़िया की तरह अम्मी कहता है और मेरे शौहर को अब्बा।
सोफ़िया को तो वह आपी कह कर बुलाता है हालाँकि वह सोफ़िया से एक साल बड़ा है।
एक घंटा के बाद सोफ़िया आ गयी।
मैंने मोबाइल के बारे में कुछ नहीं कहा और उसने कुछ पूछा भी नहीं।
रात को डिनर के बाद मैंने बिल्लू को अपने कमरे में बुलाया।
मेरी तो चुल्ल लगी हुई थी।
मैंने सोचा कि मैं जब तक बिल्लू का लण्ड सोफ़िया की चूत में पेल नहीं देती तब तक मुझे चैन नहीं मिलेगा।
इसलिए मैं नंगी नंगी सोफा पर बैठ गई और बिल्लू को बुला लिया।
वह आया तो मैंने उसे नंगा किया और अपने सामने खड़ा कर लिया।
उसका लण्ड खड़ा हो चुका था और मेरे मुंह के सामने आ गया था।
मैं लण्ड हिला हिला कर चाटने लगी।
तभी मैंने सोफ़िया को आवाज़ दी और कहा- यहाँ मेरे कमरे में आ जाओ।
वह कमरे में आई और मुझे देख कर दंग रह गई, बोली- अरे अम्मी ये क्या हो रहा है?
मैंने कहा- देख नहीं रही हो, मैं नंगी नंगी लण्ड चाट रही हूँ।
वह बोली- अरे अम्मी, ये नौकर का लण्ड है। इसका लण्ड कैसे चाट सकती हो तू?
मैंने कहा- क्या नौकर का लण्ड, लण्ड नहीं होता? क्या मालिक का लण्ड अलग तरह का होता है? क्या ये लण्ड तुझे अच्छा नहीं लगता?
वह बोली- अच्छा तो है!
मैंने कहा- अच्छा है तो ले पकड़ ले बूर चोदी सोफ़िया बिल्लू का लण्ड। नौकर का लण्ड उसके मालिक के लण्ड से ज्यादा मोटा और तगड़ा है। ले इसे चूस और चाट कर मज़ा ले ले।
उसने लण्ड पकड़ा और उसका टोपा चूम लिया।
फिर मैंने आहिस्ते से उसके कपड़े उतार कर उसे भी नंगी कर दिया।
उसे नंगी देख कर बिल्लू का लण्ड बहन चोद और ज्यादा फनफना उठा।
सोफ़िया बोली- अरे अम्मी, इसका लौड़ा तो बड़ा मोटा और कड़क होता जा रहा है।
फिर मैं भी झुक कर उसके साथ लौड़ा चाटने लगी।
बिल्लू भोसड़ी का मस्त हो गया।
मैंने सोफ़िया की चूत में सीधे तीन उँगली घुसेड़ दीं।
उसकी चूत बहुत ज्यादा ही गरम थी।
मैं समझ गयी कि इसे सच में लण्ड की बहुत जरूरत है।
मैं उन दोनों को लेकर बेड पर चली गई, सोफ़िया को चित लिटा दिया तो बिल्लू उसके ऊपर चढ़ बैठा।
मैंने उसकी टांगें फैला दी और लण्ड उसकी चूत पर रगड़ने लगी।
वह बोली- अअअ अअऊऊ ऊऊओ अम्मी ये क्या हो रहा है बड़ा अच्छा लग रहा है। क्या मस्त लौड़ा है इस भोसड़ी वाले का!
तब तक बिल्लू साला बहुत उत्तेजित हो चुका था।
उसने लण्ड एक ही धक्के में पूरा घुसेड़ दिया मेरी जवान बेटी की चूत के अंदर।
सोफ़िया की चीख निकल पड़ी।
दूसरे तीसरे झटके में वह बहुत ज्यादा चीखने लगी तो मैंने उसके मुंह पर तकिया रख दिया और बोली- चीख मत भोसड़ी वाली, चुप रह! थोड़ा बर्दाश्त कर। ज्यादा चिल्लायेगी तो मैं तेरी माँ चोद दूंगी। थोड़ा रुक … अभी तुझको इतना मज़ा आएगा कि तू आसमान में तैरने लगेगी।
मैंने बिल्लू को इशारा किया तो वह और ज्यादा जोर से लौड़ा पेलने लगा, नई बुर की चुदाई करने लगा।
वह बोला- चिंता न करो आपी, मैं तुम्हें पूरा मज़ा दूंगा। तेरी गरम चूत को हलवा बना दूंगा मैं! मैं जब तुमको देखता था तो मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता था आपी। मैंने कई बार तेरा नाम ले ले कर मुठ्ठ मारा है। आज मुझे तेरी बुर चोदने को मिली है। मैं तुम्हे चोद चोद कर खुश कर दूंगा। मैं भी तेरी बुर चाटूँगा तेरी गांड चाटूँगा और तेरी झाँटें बनाऊंगा। मुझे तुम्हें चोदने में बहुत मज़ा आ रहा है।
सोफ़िया बोली- तेरी माँ का भोसड़ा साले कुत्ते हरामी … यहाँ मेरी चूत फटी जा रही है तुझे अपने मजे की पड़ी है। तू मादरचोद मेरी माँ के सामने मुझे चोद रहा है? बेशरम बेहया कहीं का?
मुझे तो सच में अपनी बिटिया की बुर चुदाने में बड़ा मज़ा आ रहा था।
मुझे ख़ुशी इस बात की थी कि मेरी बेटी को जो जरूरत थी वो मैं पूरी कर रही थी।
लेकिन मैंने सोचा कि अब इस बुर चोदी को रोज़ लण्ड चाहिए।
कोई बात नहीं मेरे पास भी कई लण्ड हैं; मैं इसकी बुर फड़वाती रहूंगी।
बिल्लू पूरे जोश में चोदे चला जा रहा था।
सोफ़िया भी उतने ही जोश चुदवाती जा रही थी।
जब उसे मज़ा आने लगा तो बोली- हाय रे … क्या लौड़ा है तेरा भोसड़ी के बिल्लू! तूने मुझे पहले क्यों नहीं चोदा? आआ आहह हह … लौड़ा पूरा घुसा दे अंदर तक रहा है। तू मादरचोद मेरी अम्मी की फुद्दी चाटता रहा, मेरी कभी नहीं चाटी।
वह बोला- चिंता मत करो आपी. अब मैं रोज़ तेरी बुर चाटूँगा। तेरी गांड साफ़ करूंगा, तेरी झांटें बनाऊगा और तुझे चोदूंगा आपी।
अचानक सोफ़िया की चूत ढीली हो गई।
उसका पानी बलबला कर बाहर आ गया और बिल्लू का लौड़ा भी माल उगलने लगा।
फिर हम दोनों ने मिलकर झड़ता हुआ लण्ड चाटा और मस्ती की।
फिर हम तीनों नंगे नंगे हाथ पैर फैलाकर बिस्तर पर लेट गये।
मैं सोचने लगी कि आज मैंने अपनी बेटी चुदवा कर अच्छा किया। अब ये कहीं बाहर मुंह नहीं मारेगी।
बेटी सोफ़िया सोचने लगी कि लौड़ा तो बिल्लू का बड़ा मज़ा देने वाला है। इसी से चुद कर मज़ा लेती रहूंगी और अम्मी का भोसड़ा भी चुदवाती रहूंगी।
बिल्लू सोच रहा था कि आज आपी को चोद कर मज़ा आ गया। मैंने अभी तक बरखा अम्मी को नहीं चोदा। मौका तो मुझे कई बार मिला पर कभी हिम्मत नहीं हुई। आज अगर इसकी बुर मिल जाये तो मज़ा आ जाए।
यह सोचा तो अचानक उसका लौड़ा उठ कर खड़ा हो गया।
मेरी निगाह बिल्लू के लण्ड पर पड़ी तो मैंने उसे दबोच लिया।
बेटी ने मुझे लौड़ा चाटते हुए देखा तो वह उठ बैठी और लण्ड मेरे हाथ से छीन कर अपने मुंह में ले लिया।
उसका एक हाथ मेरी चूत पर चला गया।
फिर उसने तीन उंगलियां मेरी चूत में घुसेड़ दीं और बोली- अब मैं चोदूंगी अपनी माँ का भोसड़ा!
यह सुनकर बिल्लू का लौड़ा साला लोहे की तरह सख्त हो गया।
वो तो मुझे चोदना चाहता ही था।
सोफ़िया ने लण्ड धीरे से मेरी चूत पर सटा दिया और बोली- बिल्लू भोसड़ी के, पेल दे पूरा लौड़ा इस हरामजादी बरखा की चूत में! आज बड़ा अच्छा मौका है बहनचोद बिल्लू. आज तू मेरे सामने मेरी अम्मी चोद कर पूरा मज़ा ले ले। आज मैं अपनी माँ चुदाने का मज़ा लूटूँगी।
बिल्लू तो चाहता ही था।
उसने लौड़ा पूरा का पूरा एक ही बार में सट्ट से घुसेड़ दिया अंदर।
मेरे मुंह से उफ्फ्फ निकला और मैं रंडी की तरह अपनी बेटी के सामने अपने नौकर से बिंदास चुदवाने लगी।
मेरी इच्छा भी थी कि मैं किसी दिन अपने बेटी के सामने चुदवाऊं।
आज मुझे वो मौक़ा मिला तो मैं उसका पूरा फायदा उठा चाहती थी।
मैंने कहा- साले बिल्लू मादर चोद कुत्ते, आज तुझे छूट है जिस तरह से चाहे उस तरह से चोद ले मेरा भोसड़ा। फाड़ दे मेरा भोसड़ा। जैसे तू मेरी बेटी चोद रहा था वैसे ही अब बेटी की माँ चोदो। मैं एक रंडी हूँ।
वह बोला- अरे बरखा अम्मी, मैं तुम्हें चोद चोद कर महा रंडी बना दूंगा।
तब तक सोफ़िया घूम कर आयी और नंगी नंगी मेरे मुंह पर बैठ गयी, बोली- बुरचोदी बरखा, ले अब तू मेरी चूत चाट चाट कर बिल्लू से चुदवाने का मज़ा ले।
मैं तो उत्तेजित थी ही।
मेरी चूचियाँ तनी हुई थी।
वह मेरी दूध मसलने लगी और मैं उसकी चूत चाटने लगी और बिल्लू मेरा भोसड़ा चोदने लगा।
हम तीनों मिलकर थ्रीसम का मज़ा लेने लगे।
इतने में सोफ़िया बोली- अम्मी, आज मुझे माँ चुदाने की ट्रिक मालूम हो गई है। मैं ये सब अपनी सहेलियों को बताऊंगी क्योंकि आजकल लड़कियां बड़ी मस्ती से अपनी अपनी माँ चुदाने लगीं हैं।
इतने में मैं पलट पर घोड़ी बन गई और बोली- बिल्लू अब तू मुझे पीछे से चोदना शुरू कर दे।
बिल्लू ने लौड़ा पीछे मेरे भोसड़ा में घुसेड़ दिया।
मैं इधर सामने झुक कर सोफ़िया की बुर चाटने लगी।
कुछ देर में बिल्लू ने मेरी गांड में उंगली घुसेड़ दी।
मैं कुछ बोली नहीं पर समझ गयी कि अब ये मेरी गांड लेगा।
मेरा सोचना सही निकला।
बिल्लू ने लण्ड मेरी गांड में रखा और एक ही झटके से अंदर घुसेड़ दिया।
मेरी गांड पहले से चुदी हुई थी तो मुझे कोई दर्द नहीं हुआ.
फिर भी बोली- भोसड़ी के बिल्लू, तूने बिना बताये मेरी गांड में लौड़ा ठोक दिया? मेरी गांड तेरे बाप की ज़ागीर नहीं है। तू तो बड़ा हरामी निकला। चल अब ठोक ही दिया तो फिर चोद भी ले अच्छी तरह मेरी गांड भी।
उसके बाद तो मैं अपने दोस्तों से सोफ़िया की चूत चुदवाने लगी और सोफ़िया भी अपने बॉयफ्रेंड्स के लण्ड मेरे भोसड़े में पेलने लगी।
बिल्लू तो बहनचोद रोज़ ही कभी सवेरे, कभी दोपहर और कभी रात में हम दोनों माँ बेटी की चूत में लण्ड पेल पेल कर चोदता रहा।
नई बुर की चुदाई कहानी कैसी लगी?
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