बड़े लंड से डॉक्टर की गांड चुदाई | Bade Lund Se Doctor Ki Gand Chudai

Views: 86 Category: Gay Sex Stories By swatantras2 Published: June 06, 2026

गे डॉक्टर सेक्स कहानी मेडिकल स्टूडेंट की गांड मरवाने की है. फाइनल ईयर पास करने के बाद उसने अपने जूनियर स्टूडेंट से अपनी गांड मरवाई.

हैलो फ्रेंड्स, मैं आपका पुराना साथी आजाद गांडू.

मैं एक बार फिर से अपनी गे डॉक्टर सेक्स कहानी को लेकर हाजिर हुआ हूँ.

डॉक्टर सुरेंद्र डाक्टरी के फाइनल ईयर अभी-अभी पास हुए थे.
वे बॉयज हॉस्टल में रहते थे.

उन्हें डॉक्टरी के अलावा एक और शौक था … नाटक करने का.
उन्होंने अभी-अभी शहर के थिएटर हॉल में एक नाटक स्टेज किया था जिसे बड़ी प्रशंसा मिली थी.

नाटक टीम के सारे सदस्यों को रात में पार्टी दी गई और बियर भी पिलाई गई.
रात में देर हो जाने के कारण चार-पांच कलाकार उनके ही साथ सोने उनके रूम में आ गए.

उनमें दो तो उनके ही मेडिकल स्टूडेंट थे, जो शहर में रहते थे, उन्हें डे स्कॉलर कहते थे.
तीन अन्य थे.

उनमें एक थे भूरे पंडित जी.
उनका नाम तो कुछ और था पर बहुत गोरे होने के कारण सब उन्हें भूरे पंडित कहते थे.
वे एक गांव से थे और यहां शहर पढ़ने आए थे.

पंडित जी की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी इसलिए उन्होंने कई पापड़ बेले थे.

वे संगीत जानते थे.
कुछ यहां सीखा, तबला-ढोलक बजाते थे, नाचते थे.
रामलीला, रासलीला में नाचे, फिर नौटंकी में भी नचैया लौंडा बन जाते थे.

बहुत कोशिश के बाद भी कोई उन्हें राम या कृष्ण का रोल नहीं देता था, हां कभी सीता या राधा का रोल मिल जाता था.
कई बार तो वे राम या कृष्ण पात्र से ऊंचे दिखते, पर दर्शक कोई विचार नहीं करते, हल्का सा मुस्कुरा देते बस.

अधिकतर वे नर्तक ही रहते थे, जिन्हें लोग ‘नचैया’ पुकारते थे.
उन्हें कभी जोकर या अन्य रोल भी मिल जाता.

फिलहाल वे एक कथा वाचक पंडित जी की कथा में ढोलक बजाते थे.

वैसे वे कॉलेज में पढ़ते भी थे, हिंदी में एम.ए. कर चुके थे और संस्कृत में एक पाठशाला में पढ़ते थे.
सेल्फ डिपेंडेंट थे और स्ट्रगल कर रहे थे.

डॉक्टर सुरेंद्र के पास कोई ऐसा नाचने वाला नहीं था.
वैसे तो सारे ही उनके साथी ग्रुप डांसर थे, गायक भी बहुत से थे.
कोरस में तो सभी गाते थे, एक्टर तो थे ही, पर लोक गायक नहीं थे.
पर साड़ी/लहंगा पहनकर लोक नृत्य या कत्थक नृत्य नाचने के लिए सबने मना कर दिया था.

इसलिए पंडित जी को पकड़ लिया गया.

वे गाना भी बहुत सुरीला गाते थे — भजन, संस्कृत के श्लोक, लोक गीत, फिल्मी पैरोडी पर गीत … सुरताल में गा बना भी लेते थे.
कथा वाचक को पंडित जी के साथ गाना पड़ता था.

पहले तो कथा वाचक पंडित जी साथ गाते, पर उनका कंठ उतना सुरीला नहीं था.
अतः बाद में वे कथा वाचन से रुक जाते और भूरे पंडित गाना शुरू कर देते, साथ में वे ढोलक या तबला भी बजाते.

वे गोरे तो थे ही, बहुत सुंदर या कहिए नमकीन थे.
फिर नचैया होने के कारण उनकी अदाएं भी जनानी हो गई थीं, वे हाथ नचा-नचाकर बात करते थे.

वैसे ऊंचे, पूरे स्वस्थ व्यक्ति थे.
किसी को भी पहली निगाह में आकर्षित कर लेते थे; कोई भी उन्हें देखता रह जाता था.

वे अपने साथ एक दूसरे कलाकार को भी लाए थे, जो एक स्लिम, उनके जैसा ही नमकीन और सुंदर लड़का था.
वह लड़का बेरोजगार था.

पंडित जी की सिफारिश पर उसे भी एडजस्ट कर लिया गया था.
वह भी गाता था, नाचता था, तबला-ढोलक बजा लेता था.

पंडित जी नाचते तो वह ढोलक या तबला बजाता, दोनों साथ गाते तो वह हारमोनियम संभाल लेता.
एक तरह से वह पंडित जी का असिस्टेंट सा था.

वह उनसे थोड़ी कम उम्र का भी लगता था.
एकदम सीधा और चुप्पा था, बहुत कम बोलता था.

उसका नाम शाहिद था, पर कथा के श्रोता नाराज न हों, इसलिए पंडित जी ने उसका पुकारने का कुछ और नाम रखने की नीयत से बबलू रखा हुआ था.

डॉक्टर सुरेंद्र भी हट्टे-कट्टे और आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक थे.
अभी स्टूडेंट ही थे, ज्यादा से ज्यादा बीस-बाईस साल के होंगे. स्मार्ट, शहर के जाने-माने आर्टिस्ट थे. कई नाटकों में हीरो का रोल किया था.

वे आत्मविश्वास से भरे, सोशल थे और नाटक टीम के आयोजक भी थे.

अधिकतर साथी उनकी तरह स्टूडेंट ही थे — यंग चैप थे.
उन्हें संभालना सरल नहीं था.
वे उन्हें जोक सुनाते, गीत गाते, बहुत अच्छे भाषण देते और श्रोताओं को मोह लेते थे.

वे ओरेटर तो थे ही, डिबेटर भी थे और कॉलेज का प्रतिनिधित्व करते थे.
क्लास में मेरिट में उनका तीसरा या चौथा नंबर था. मतलब पढ़ाई में ठीक-ठाक थे.

अधिकतर कार्यक्रमों का संचालन वही करते थे. कॉलेज की टीम में लड़ाई या कॉम्पिटिशन में भी साथ देते.
प्रोफेसरों से बात करनी होती तो उन्हें ही आगे किया जाता था. एक अच्छे संगठनकर्ता थे.

नाटक उनकी हॉबी थी. सारे कॉलेज में पॉपुलर थे. टीचिंग स्टाफ भी उन्हें पसंद करता था.

एक और सदस्य जो लड़के ही थे, टीम के सबसे कम उम्र के कलाकार थे. वे दसवीं या ग्यारहवीं के स्टूडेंट थे.

एक अन्य महोदय भी डॉक्टर सुरेंद्र से जुड़ गए थे, वे सामान्य छरहरे, नाटक के शौक के कारण जुड़े थे.
वे डॉक्टर साहब के किसी दोस्त के छोटे भाई थे. दिखने में अभी चिकने थे, दाढ़ी-मूँछ नहीं आई थी और बोलने में सीनियर साथियों से झेंपते थे.

उनका नाम समीर था.

उनकी माशूकी के कारण अन्य कलाकार उनका चेहरा चूम लेते, गाल काट लेते.
कोई-कोई ज्यादा ही कमीनापन करता तो उनकी गांड में उंगली कर देता, कभी-कभी कोई पीछे से चिपक भी जाता.

अगर सुरेंद्र जी देख लेते तो डांटते, पर लौंडे थे कि हरकत करने से मानते ही नहीं थे.

वे सब एक दूसरे से भी ऐसी हरकतें करते रहते.
आखिर सारे बीस से कम उम्र के ही तो थे.

उस दिन पार्टी के बाद जब सबको सोना था तो वे डॉक्टर सुरेंद्र के हॉस्टल के कमरे में आ गए थे.
यह कमरा छोटा सा ही था.

डॉक्टर साब की खटिया खड़ी कर दी गई और सबके लिए बिस्तर फर्श पर बिछा दिए गए.
सब लोगों ने अपने पैंट-शर्ट या जींस-टी-शर्ट जो भी पहने थे, उतार दिए.
सब अंडरवियर और बनियान में आ गए.

किसी के पास दूसरे कपड़े नहीं थे, अतः वे लोग वैसे ही लेट गए.
सब लोग एक दूसरे से सटकर लेट गए, फिर भी बन नहीं रहे थे.

इसलिए डॉक्टर सुरेंद्र खुद उसी विंग के एक और रूम में, जो उनके जूनियर का था, उसमें सोने चले गए.
तब तक देर रात हो गई थी.

उन्होंने दरवाजा खटखटाया.
दरवाजा खुला तो उनका वह जूनियर प्रश्नवाचक चेहरा बनाए उन्हें देख रहा था.

सुरेंद्र ने कहा- नीरव, आज मैं तेरे साथ सोऊंगा, मेरा रूम फुल है.
यह कहते हुए डॉक्टर साब नीरव के कमरे में अन्दर आ गए.

नीरव ने रूम का दरवाजा बंद कर दिया.

डॉक्टर सुरेंद्र ने पहले अपना पैंट उतार कर हैंगर पर टाँगा, फिर शर्ट उतारकर टाँगी.
तभी नीरव हंस पड़ा.
उस वक्त डॉक्टर सुरेन्द्र को पता लगा कि वे नंगे खड़े थे.

तब उन्हें याद आया कि पिछली रात पानी बरस जाने से उनके अंडरवियर और बनियान सूखे नहीं थे और उन्होंने जल्दी जल्दी में नहाते समय अपने पहने हुए अंडरवियर को गीला कर लिया था, अतः जल्दी में ऐसे ही नंगे रह कर उन्होंने सीधी जींस-टी-शर्ट पहन ली थी.

डॉक्टर सुरेंद्र ने नीरव से तौलिया मांगकर लपेट ली और वे दोनों एक ही खाट पर लेट गए.
डॉक्टर साब बियर पिए थे, इसलिए जल्दी खर्राटे भरने लगे.

नीरव की नींद डिस्टर्ब हो गई थी. वह जाग रहा था.
सुरेंद्र उसकी तरफ पीठ किए सो रहे थे.

सोते में उनका तौलिया खुल गया था.
उनकी निचली टांग फैली हुई थी, पर ऊपर वाली टांग का घुटना हल्का सा मोड़ लिया था.

डॉक्टर सुरेंद्र थके हुए थे, दिन भर व्यस्त रहे थे, अब गहरी नींद में रिलैक्स सो रहे थे.

नीरव सोने की कोशिश कर रहा था, पर सुरेंद्र के गोरे-गोरे मस्त चूतड़ उसे परेशान कर रहे थे.
बल्ब की डिम लाइट में डॉक्टर सुरेन्द्र की गुलाबी गांड चमक रही थी.

नीरव का लंड खड़ा हो गया.
वह उसे हाथ से सहलाने लगा पर लंड बैठ नहीं रहा था.

बार-बार नंगे खड़े डॉक्टर सुरेंद्र सर की मस्त बॉडी, मुस्कुराता चेहरा और आंखें नीरव की आंखों में घूम जा रही थीं.
डॉक्टर सुरेंद्र, नीरव के सीनियर थे … उम्र में भी शायद एक साल बड़े रहे होंगे.

उसका बार-बार मन लपलपा रहा था पर गांड भी फट रही थी.

आखिर उसने डॉक्टर सुरेंद्र की तरफ करवट ले ही ली.
उसने लंड एक बार सहला कर उसमें थूक लगा लिया और सुरेंद्र की गांड पर टिका दिया.
फिर हल्का सा धक्का दिया, तो सुपाड़ा अन्दर जाने के बजाए नीचे खिसक गया.

उसने फिर से कोशिश की, हाथ से पकड़ कर धीरे से गांड पर टिकाया और धक्का दिया.
अब सुपाड़ा गांड के छल्ले को फैला कर अन्दर चल गया था.

फिर वह थोड़ा रुका और वापस से जोर लगाया.
अब आधा लंड अन्दर था.

नीरव बहुत धीरे-धीरे अन्दर-बाहर कर रहा था.
उसने डॉक्टर सुरेंद्र के कंधे पर दबाव डाला तो वे औंधे हो गए.

अब वह समझ गया कि डॉक्टर साहब मजा ले रहे हैं.
यह सोचते ही नीरव उनके ऊपर चढ़ बैठा और पूरी ताकत से पेल दिया.

सुरेंद्र के गले से हल्की-हल्की ‘आ … आ …’ की आवाज निकली और नीरव का पूरा लंड उनकी गांड में समा गया.

सुरेंद्र की गांड नशे और थकान की वजह से गहरी नींद में बिल्कुल ढीली थी.
फिर भी नीरव की सर की चुदाई में गांड फट रही थी.
इससे वह धीरे-धीरे धक्के लगा रहा था, बीच-बीच में रुक जाता … पर डर रहा था.

तब भी गांड से लंड निकाला नहीं, डाले रखा.
यह उसकी हिम्मत थी या मजबूरी, इस वजह से लंड से पानी भी नहीं छूट रहा था.
वह परेशान था कि क्या करे.

तभी डॉक्टर सुरेंद्र ने उसकी मदद की और बोले- अबे नीरव, भोसड़ी के … इत्ती देर से मेरी गांड में लंड पेल रहा है, अभी भी झड़ा नहीं … दो-चार जोर के झटके लगा कर जल्दी निपटा … अब मेरी गांड जलने लगी है, कब तक पेले रहेगा?

यह सुनकर नीरव की हिम्मत बढ़ गई.
वह जोश में आ गया और दे दना-दन … दे दना-दन चालू हो गया.

दस मिनट तक लगातार नीरव अन्दर-बाहर, अन्दर-बाहर, धच्‍च-फच्‍च, धच्‍च-फच्‍च करते हुए जोर-जोर से कमर चला रहा था.
आखिर वह हांफने लगा और रुक गया. उसने डॉक्टर साब की गांड में लंड डाले रखा और ऊपर ही चढ़ा रहा.

डॉक्टर सुरेंद्र बोले- अबे, गांड तो रगड़ कर फेंक दी … लाल कर दी … छूटा नहीं? तेरे में बड़ा जोर है?

नीरव हांफते हुए गिड़गिड़ाया- सर, बस थोड़ा और सहन करें … छूटने ही वाला है. आपको बड़ी तकलीफ दी, प्लीज सर बस थोड़ा कॉपरेट करें … आपने इतना साथ दिया … बस थोड़ा और सही!

डॉक्टर सुरेंद्र बोले- अबे नीरव मुझे कोई तकलीफ नहीं हो रही, मजा आ रहा है. बहुत दिनों बाद ऐसे कोई मारने वाला मिला है. इतनी देर तक चुदाई करने वाला तो मुझे आज तक कोई नहीं मिला, मजा बांध दिया यार, तेरे लौड़े में बड़ा दम है!
यह सुनकर नीरव खुश हो गया और डॉक्टर साहब के दूध सहलाने लगा.

डॉक्टर साहब- अब मैं माशूक नहीं रहा, पट्ठा हो गया हूँ. गांड पर बाल आ गए हैं, तो कोई लौंडा मुझे प्रपोज भी नहीं करता, पटाता भी नहीं. सालों की हिम्मत ही नहीं पड़ती, फटती है. तूने बड़ी हिम्मत की … पर अब तू हांफ रहा है, पसीना-पसीना हो गया. मेरी गांड भी ढीली कर दी. तेरा हथियार भी बड़ा मस्त है, नए चिकने माशूक लौंडों की तो फाड़ कर रख देता होगा!

नीरव खींसें निपोर कर हंस दिया.

डॉक्टर साहब- लगता तो दुबला-पतला है, पर मुझे तू ही माशूक लगता है. तू मेरा दोस्त है, जूनियर है, सोचा कभी कहूँगा तो तू बिचक न जाए. अब तो कभी-कभी मुझे मजा देगा न?

नीरव बोला- सर, चाहे जब निपट लेना … अभी मैं उतर जाऊं, तो आप मेरे ऊपर चढ़ बैठना. अपनी इच्छा भी पूरी कर लें. मैं आप जितना माशूक तो नहीं, आप जैसी मस्त बॉडी भी नहीं, आप जितना फेयर कलर भी नहीं, न इतना तगड़ा हूँ, पर साथ पूरा दूंगा. आपके चूतड़ देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और नियत खराब हो गई. खुद को रोक ही नहीं पाया. सोचा अब चाहे जो हो, आज तो सर की मारनी ही है, ऐसा माल कहां मिलेगा सर … आपने कॉपरेट करके मेरी हिम्मत बढ़ाई और मजा दिया. आपको टू मच थैंक्स!

डॉक्टर साहब हंस दिए.
नीरव- डॉक्टर साहब मैं दम भर आपको मजा दूंगा. आप कहें तो और माशूक लौंडे दिलवा दूं? मुझे इतनी मस्त गोरी चूतड़ और गुलाबी गांड कभी मारने को नहीं मिली. आपकी क्या मस्त जांघें हैं, क्या चूतड़ सर, कसरत करते हैं? आप इतने फेयर कलर के, तगड़े, मस्कुलर और नमकीन हैं, मेरे से ऊंचे-पूरे. लौंडियां आप पर मरती होंगी!

डॉक्टर साहब हंस कर बोले- अभी अपना अन्दर बाहर अन्दर बाहर चालू रख!

नीरव चालू हो गया और बोला- मेरी किस्मत है ये डॉक्टर साहब कि इतने दिल से करवाने वाले आप मुझे मिले. तबीयत हरी कर दी. आपको कभी नहीं भूल पाऊंगा. मैं तो पर्सनालिटी में आपका आधा भी नहीं … न इतना गोरा, डाउन कलर का हूँ.

डॉक्टर सुरेंद्र बोले- अबे इतना मक्खन लगाने की जरूरत नहीं, चमचागिरी रहने दे … बस लगा रह. तू भी मस्त चीज है, नमकीन है, मुझसे कम नहीं है. तेरे पर मैं मरता हूँ और लौंडे भी मरते होंगे.

नीरव की बात करने से उसका पानी थोड़ी देर और रुका रहा.

फिर उसने और दो-तीन जोरदार झटके दिए.
अब डॉक्टर साहब भी उत्साह में आ गए थे. वे खुद अपनी गांड चलाने लगे, ढीली कसती-ढीली कसती करने लगे, चूतड़ उचकाने लगे.

डॉक्टर साहब बोले- नीरव, गांड में नहीं झड़ रहा हो तो मैं तेरा हथियार चूस लूं? तू परेशान हो रहा होगा?

नीरव बोला- सर एक मिनट ठहरें. मुझे चुसवाने में मजा नहीं आता. मैं गांड का ही आशिक हूँ … और फिर इतनी गोरी मस्त चीज हाथ लगी है तो मेरा मजा न बिगाड़ें. बस थोड़ा और सहन करें, मैं आपका बहुत थैंकफुल हूँ. बस-बस, दो-तीन मिनट … आपको बहुत परेशान कर रहा हूँ.

वह तेज तेज झटके देने लगा.
अब वह झड़ रहा था. उसका पानी छूट रहा था.

झड़ने के बाद वह सुरेंद्र पर पसरा रह गया … फिर अलग हो गया.

गांड चुदाई के बाद वे दोनों थाक गए थे तो सो गए.

दोस्तो, आपसे मुलाकात होती रहेगी.
फिलहाल तो यह बताएं कि आपको मेरी यह गे डॉक्टर सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज मेल जरूर करें।
swatantras2@gmail.com

You May Also Like

कॉलेज के दोस्त के साथ गे सेक्स का मजा
Views: 150 Category: Gay Sex Stories Author: ak0638169 Published: April 15, 2026

Xxx गांड सेक्स कहानी में मैं टॉप गे हूँ. मुझे अपना रूममेट बहुत अच्छा लगता था. एक बार मैंने उसे किस कर लिया. वह नाराज हो ग…

पीजी वाले अंकल ने मेरी गांड मार ली
Views: 238 Category: Gay Sex Stories Author: newy7650 Published: April 29, 2026

अंकल गे कहानी में मैं PG में रह कर पढ़ाई कर रहा था. एक शाम PG के मालिक मोबाइल में गे वीडियो देख रहे थे. उन्होंने मुझे गे …

Comments