अमीर बहू की चुत-गांड में नौकर का लंड- 2

Views: 37 Category: Naukar-Naukarani By divyavaryani700 Published: July 04, 2026

किचेन सेक्स स्टोरी में रात के खाने के बाद मैं रसोई समेट रही थी, मेरा नौकर मेरे साथ काम कर रहा था. सबके जाने के बाद उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरी चूत में …

फ्रेंड्स, मैं दिव्या भाभी आपको अपनी इस मस्त सेक्स कहानी में नौकर के लौड़े से गांड चुदवाने वाली सुना रही थी.
कहानी के पहले भाग
नौकर ने मुझे बेडरूम में चोदा
में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरा नौकर रमेश मेरी गांड मार रहा था.

अब आगे किचेन सेक्स स्टोरी:

कुछ देर तक गांड में बड़ा सा गड्ढा बना देने के बाद रमेश ने मुझसे उठने को कहा.

मैं भी झट से पलंग से उठकर खड़ी हो गई.
रमेश ने मुझे तुरंत पकड़ कर दीवार से चिपका दिया और मेरी एक टांग उठा कर अपने हाथ में पकड़ ली.

अब उसने नीचे से मेरी गांड के छेद में अपना लंड सैट किया और एक जोरदार धक्का मार दिया.

‘हयीईई दैयाआ मरर गईईई रमेश … बहन के लौड़े छिनाल समझ कर चोद रहा है मादरचोद आह मेरी गांड फट गई कमीने!’

रमेश ने मेरी चिल्ल-पौं को नजर अंदाज किया और एक हाथ से मेरी टांग को पकड़ कर दूसरे हाथ से मेरा गला दबा दिया.
वह किसी ब्लू-फिल्म के पॉर्न स्टार की तरह कस कसके मुझे चोदने लगा.

कुछ ही धक्कों के बाद मैं उसके लंड का अपनी गांड में आनन्द लेने लगी.
रमेश मुझे चोदता रहा.

फिर अचानक से वह बोला- आह्ह्ह आआह दिव्या तू कौन है मेरी?
मैं बोली- आआह आह्ह सबके सामने तेरी संस्कारी घरेलू मालकिन और अकेले में तेरे लंड की आराधनी रंडी!

ये सुनते ही रमेश और जोर-जोर से मेरी गांड मारने लगा.
वह कोई 15 मिनट तक मुझे ऐसे ही एक टांग पर खड़ी करके मेरी गांड का बाजा बजाता रहा.

फिर उसने लंड निकाला और मुझे पकड़ कर नीचे झुका दिया.
मैं झट से नीचे बैठ गई और उसके लंड को अपने मुँह में भरकर जोर-जोर से चूसने लगी.

‘ऊऊ ऊऊओ ऊओह साली छिनाल … चूस ले बहन की लवड़ी आह किस तरह की मस्त रंडी है तू आह … ऊऊओ!’
इधर मैं ‘गुऊऊ गुऊऊ ओ गुऊऊ ओक ओक.’ करती हुई उसके लौड़े को अपने गले के अंतिम छोर तक लील रही थी.

कोई 2 मिनट बाद रमेश ने मेरा सिर जोर से पकड़ कर अपने लंड को अन्दर दबा दिया.
मुझे सांस लेने में दिक्कत होने लगी.

उसी पल उसका गर्म गाढ़ा रस मेरे गले में उतरने लगा.

मैं गले में लंड फंसाए उसका रस निगलती गई.
सारा रस पीने के बाद मैंने लंड को चूसकर अच्छे से साफ कर दिया.

फिर मैं उठकर खड़ी हो गई.
रमेश मेरे होंठों को चूसने लगा.
मैं भी उसका साथ देने लगी.

दस मिनट की जोरदार किसिंग के बाद हम दोनों अलग हो गए.
मैंने रमेश को बाहर जाने को कहा.

रमेश ने अपने कपड़े उठाए और जल्दी जल्दी पहन कर कमरे से बाहर चला गया.

मैं बाथरूम में शॉवर लेने चली गई.
शॉवर लेते-लेते मुझे उन दोनों कूड़े वालों के लंड याद आने लगे.
मैं बाहर जाकर अपनी ड्रॉअर से डिल्डो (नकली लंड) निकाल लाई.

बाथरूम में आकर शॉवर खोलकर उसके नीचे खड़ी हो गई और उनके लंड याद करती हुई चूत में डिल्डो अन्दर-बाहर करने लगी.

कोई 5 मिनट बाद ही मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और मैं अपने होंठ काटती हुई मदहोश होकर फव्वारे के नीचे ही बैठ गई.

कुछ देर बाद मुझे राहत मिली तो मैं नहाकर बाहर आ गई और एक छोटा शॉर्ट तथा टॉप पहन लिया.
उसे भी मैंने बिना ब्रा-पैंटी के पहना था.

कुछ देर के बाद मैं नीचे चली गई.
नीचे सब बैठे चाय पी रहे थे.
मैं भी उनके साथ बैठ गई.

रमेश मेरे लिए चाय लेकर आया.
मैं सास-ससुर से बात करती हुई चाय पीने लगी.

फिर कुछ समय बाद दरवाजे की बेल बज गई.
बेटी ने जाकर दरवाजा खोल दिया.

मेरे पति राज ऑफिस से आ गए थे.
उनके आते ही सास ने कहा- राज बेटा, तुम फ्रेश हो आओ. कुछ बात करनी है.

राज फ्रेश होने चला गया.

कुछ समय बाद वह नीचे आ गया.
मैं किचन में खाना बनाने चली गई.

रमेश किचन में मेरा हाथ बंटा रहा था.
हम दोनों किचन में खड़े बाहर की बातें सुन रहे थे.

सास ने राज से कहा कि उनके गांव से फोन आया है. उनके चाचा जी ने पूजा रखी है और सबको बुलाया है.
राज ने कहा- ये तो बहुत अच्छी बात है मां!

मां जी बोलीं- हां, हम सबको चलना है बेटा.
तभी राज बोले- मां, मैं तो नहीं जा पाऊंगा. मेरी कुछ मीटिंग्स हैं और वह बहुत इम्पोर्टेंट मीटिंग्स हैं. उन्हें नहीं छोड़ सकता. आप बाकी सबके साथ चले जाओ.

मां जी बोली- ठीक है बेटा. तुम खाना-पीना कैसे करोगे?
राज बोले- अरे रमेश है ना, वह बना देगा.

तभी रमेश ने मेरी कमर में हाथ डालकर मुझे अपने करीब खींचा और मेरे होंठों को चूसने लगा.

मैं हटी और बोली- क्या कर रहे हो? कोई आ जाएगा तो!
रमेश बोला- जान, अपना काम तो बन गया. तेरा पति नहीं जा रहा. अब तू भी बहाना मार सकती है.

मैं हंस दी.

फिर रमेश ने कहा- अब जा तू भी अपना काम कर आ.
मैं बोली- ओके.

मैं बाहर गई और बोली- क्या हुआ मम्मी जी?

सास बोली- राज जाने से मना कर रहा है बहू.
तो मैं बोली- क्यों राज … क्या हुआ? तुम क्यों नहीं जा रहे?

राज बोले- दिव्या, मेरी मीटिंग्स हैं और तुम्हें पता है कि मैं मीटिंग्स नहीं छोड़ सकता.
तो मैं बोली- ओह अच्छा तो मम्मी जी, मैं भी यहीं रुक जाती हूँ. यहां ये अकेले कैसे रहेंगे? और ये तो ऑफिस में रहेंगे, फिर घर की देख-रेख कौन करेगा?
सासू मां बोली- हां बहू, तुम सही कह रही हो. तुम भी यहीं रुक जाओ.

ऐसे ही हमारी बातें चलीं.
फिर मैंने टेबल पर खाना लगा दिया.

हम सब साथ में खाना खाया और फिर सब अपने कमरे में सोने चले गए.

राज भी रूम में चला गया.

मैं किचन में काम करने लगी.
तभी रमेश ने मुझे पीछे से आकर दबोच लिया.

मैं अचानक हुए इस हमले से घबरा गई- आ आउच्छ क्या कर रहे हो रमेश? कभी भी पकड़ लेते हो हटो, कोई देख लेगा!
वह मेरे पीछे खड़ा मेरे चूचे दबाने लगा और बोला- सब गए सोने. अब कौन देखेगा?

मैंने कहा- सोए नहीं, बस कमरे में गए हैं. हटो चलो वैसे भी कल से तो हम अकेले ही रहेंगे ना? थोड़ा तो सब्र रखो!

रमेश ने मेरे शॉर्ट्स का बटन खोला और अन्दर हाथ घुसाकर चूत सहलाने लगा.
मैं बर्तन धोती हुई मचलने लगी- उम्म सीसी आअह ओह्ह रमेश मत करो ना प्लीज!’

रमेश नहीं माना और मेरी चूत में दो उंगलियां घुसेड़कर अन्दर-बाहर करने लगा.
साथ ही दूसरे हाथ से मेरे चूचे दबाने लगा.

मैं उसे रोकने की कोशिश करने लगी, पर वह रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.
इसलिए मेरी भी अब टांगें नीचे से फैल गईं.

मेरी टांगें फैलते ही रमेश ने मेरा शॉर्ट्स नीचे को उतारा, अपना लंड बाहर निकाला और मेरी चूत पर रख दिया.
मैं भी क्या करती? मैं बर्तन धोती हुई वहीं आगे को झुक कर घोड़ी बन गई.

रमेश ने अपने लंड पर थूक लगाया और मेरी चूत में घुसा दिया.
उसने मेरी चूचियां पकड़ लीं और धक्के देने लगा.
किचेन सेक्स का मजा लेते हुए मेरा बदन हिलने लगा.

मैं उसके लंड के धक्के खाती हुई बर्तन धोने लगी.
मैं बर्तन धोती रही और रमेश पीछे से मेरी चूत चोदता रहा.
कोई 15-20 मिनट बाद मेरे बर्तन धुल गए तो मैंने रमेश को हटने को कहा.

उसने कहा- मेरा होने वाला है, बस थोड़ी देर तो और साथ दो!

मैं उसे बोली- ठीक है, जल्दी करो!

मैं स्लिप पर अपने हाथ रखकर अच्छे से झुक गई. रमेश जोर-जोर से चोदने लगा.

‘आआह आह्ह्ह आआह आआ ह्ह्ह रमेश धीरे प्लीज धीरे कोई सुन लेगा भोसड़ी के … आआह!’

रमेश तेज़ी से मुझे चोदता रहा और फिर दस मिनट बाद वह मेरी चूत में झड़ गया.
मैंने अपने कपड़े ठीक किए और फिर उसे किस करके वहां से कमरे में चली गई.

राज रूम में बैठे लैपटॉप पर काम कर रहा था.
मैंने रूम बंद किया और उसके बगल में जा बैठी.

राज ने मुझे देखा और लैपटॉप बंद करके मुझे पकड़ कर चूमने लगा.
मैं भी उसका साथ देने लगी.

चूमते-चूमते राज ने मुझे नंगी कर दिया और फिर खुद भी नंगा हो गया.

उसने मुझे बिस्तर पर लेटाया और मेरे चूचे चूसने लगा.
मैं उसके बाल सहलाने लगी ‘आह्ह्ह्ह राज आह्ह्ह्ह चूसो बेबी आह्ह्ह्ह जान!’

राज ने दस मिनट तक चूचियों को चूसा. फिर वह मेरे चेहरे के पास लंड लेकर आ गया.
मैं बोली- रुको, ऐसे नहीं राज!

राज रुक गया.
मैं उठकर बेड पर लेट गई, अपना सिर बेड के नीचे की तरफ लटका दिया और राज को खड़े होकर मुँह में डालने को कहा.

राज मेरे चेहरे के पास आया, मेरे मुँह में लंड डाला, मेरी तरफ झुक गया और मेरी चूची चूसता हुआ जोर-जोर से मेरा मुँह चोदने लगा.

ऐसे लेटकर लंड लेने में मुझे अलग सा मजा आ रहा था.
तभी मेरे दिमाग में बात घूमने लगी कि अगर ऐसे ही लेटकर मैं उन लोगों का लंड लूँ तो मेरी क्या हालत होगी?

ये सब सोच-सोचकर मेरी चूत गीली होने लगी.
मैंने राज को कहा- राज, जोर-जोर से धक्के दो न प्लीज!

राज ने मेरी बात सुनकर वापस लंड मुँह में डाला और जोर-जोर से चोदने लगा.
मैं मुँह में लंड लेकर अपने हाथ से अपनी चूत मसलती हुई उसके लौड़े के धक्कों का मजा लेने लगी.

मैं बोली- राज अपना लंड निकाल कर, जितनी जोर से धक्के दे सकते हो, दो और मेरे चूचे काटो!
राज बोले- बेबी, तुम्हारा मुँह दर्द करने लगेगा.
मैं बोली- उसकी चिंता मत करो बस तुम करो!

राज मेरी बात मान गया और मुँह में लंड डालकर जोर-जोर से चोदने लगा, साथ ही मेरे चूचियों को काटने लगा, निपल्स को दांतों से खींचने लगा.

मैं पागल होने लगी और जोर-जोर से अपनी चूत रगड़ने लगी ‘ऊऊओ ऊऊओ ऊऊओ ऊऊओ गुऊओ गुऊओ गुऊओ गुऊओ!’

थोड़ी देर बाद राज ने लंड बाहर निकाल लिया और मुझे लिटा दिया.

मैं उन बड़े बड़े लौड़ों वाले मर्दों के बारे में सोच-सोचकर इतनी पागल हो चुकी थी कि मुझसे रहा नहीं गया.

मैंने राज से कहा- राज आज चूत नहीं, सीधा मेरी गांड मारो!
राज बोला- बेबी, क्या हो गया आज तुम्हें? पहले तो मारने नहीं देती थी, अब खुद पहले गांड मारने को कह रही हो?

मैं बोली- तुमसे जितना कहा उतना करो ना यार!
राज ने बोला- ठीक है, घोड़ी बनो.

मैं तुरंत घोड़ी बन गई.

राज ने मेरी गांड पर थूक लगाया और एक धक्के में अन्दर पेल दिया.
मैं बनावटी दर्द से कराह कर बोली- आह फट गई … आह चोदो जोर-जोर से और थप्पड़ भी लगाते रहो मेरे चूतड़ों पर आह!

राज मेरी गांड पर थप्पड़ लगाने लगा और जोर-जोर से मुझे चोदने लगा.
मैं बिस्तर को कसके पकड़ कर आंखें बंद कर उन सभी मर्दों के लंड याद करने लगी.

‘आहह आआह आह्ह्ह्ह चोदो मुझे चोदो मुझे!’

तभी मेरे दिमाग में एक ख्याल आया और मैंने राज से कहा- राज सुनो तो एक मिनट रुको.
उसने रुकते हुए कहा- हां बोलो बेबी!

मैं उससे बोली- तुम अब मुझे रोलप्ले में चोदो!
राज बोला- कौन सा रोल जान?

तो मैं बोली- तुम एक कूड़ा उठाने वाले और मैं अमीर घर की बहू.

मेरे मुँह से ये सुनते ही राज का मुँह खुला का खुला रह गया और वह बोला- ये क्या कह रही हो तुम? तुम्हें ऐसे रोल क्यों करने हैं दिव्या?
तो मैं बोली- बस मेरा दिल कर रहा है और कौन सा हम सच में ऐसा कर रहे हैं? रोल ही तो है!

मैंने जैसे-तैसे राज को अपनी बातों में फंसा लिया.

फिर शुरू हुई हमारी चुदाई, राज मेरी गांड पर थप्पड़ लगाता हुआ मुझे चोदने लगा.
मैं आंखें बंद कर उन मर्दों के लंड याद कर चुदाई का मजा लेने लगी.

‘आह आह आह आह् चोदो मुझे चोदो मुझे और जोर से जोर से आह आआह्ह कितना बड़ा और कितना मोटा लंड है तुम्हारा … आह मेरे कूड़ा वाले … आह चोदो न मुझे … और जोर जोर से चोदो!’

राज भी अब कूड़ा वाला बन गया और मेरा पूरा साथ देने लगा.
‘आह्ह मालकिन आआह रंडी मालकिन क्या मस्त गांड है आपकी … हमारी तो किस्मत खुल गई जो मुझ जैसे कूड़ा उठाने वाले को आपको चोदने का मौका मिला है!’

राज की बातें सुन मुझे बड़ी खुशी हुई और मैंने चुदाई में थोड़ा और तड़का डालना शुरू कर दिया.

‘आह्ह आह ह्ह्ह चोदते रहो चोदते रहो … तुम्हारे साहब से तो कुछ होता नहीं … छोटा सा लंड है उनका आह इसलिए आज मैं तुम्हारे नीचे लेटी हूँ … तुम्हारा साहब साला गांडू है वह अपने काम में व्यस्त रहता है भोसड़ी वाला … और यहां उसकी बीवी एक कूड़े वाले से अपनी गांड उठा-उठा कर चुदवा रही है!’

राज ये सुन पागल हो गया. उसने झुक कर जोर से मेरा गला दबाया और मेरे एक चूतड़ पर थप्पड़ लगाता हुआ पूरी जान से चोदने लगा.
‘आह्ह आह्हह ले साली रंडी अपने पति को गांडू कह रही है … बहन की लौड़ी छिनाल … ले ले और ले और ले और ले इस कूड़ेवाले का लंड … मां की लौड़ी कुतिया!’

मैं चिल्लाने लगी- आआह ह्ह्ह ह्हह आह मेरे राजा चोदो … चोद दो साले आह वह है ही गांडू मादरचोद का बच्चा है साला … बहन का लौड़ा कुत्ते का पिल्ला … उसकी मां की चूत!

मैं राज को गंदी-गंदी गालियां देने लगी, जिससे राज गुस्से में आकर और जोर-जोर से मेरी गांड चोदने लगा.
मैं उसकी इस उत्तेजना का पूरा मजा लेती रही.

कुछ ही देर में राज ने गांड में अपना पानी निकाल दिया और तेज़ सांसें लेता हुआ मेरे बगल में लेट गया.

मैं आज पूरे जोश में थी.
मैं राज के बगल में लेटी और ड्रॉअर से डिल्डो निकाल चूत के अन्दर-बाहर करने लगी.
ये सब करते देख राज मुझे लेटे-लेटे देखने लगा.

मैं आंखें बंद कर जोर-जोर से चूत में डिल्डो लेती रही.
‘आह्ह आह आआह ह्ह्ह राज आआह बेबी मुझे लंड चाहिए … मुझे उसका लंड चाहिए … मैं पागल हो जाऊंगी … मुझे उससे चुदना है मुझे उसका लंड चूसना है … प्लीज मुझे उसी से चुदवा लेने दो!’

राज मेरी बातें सुन शायद शॉक्ड था.
वह बोला- जान तुम किसकी बात कर रही हो … दिव्या आराम से दिव्या … क्या हो गया है तुम्हें? रुको बेबी प्लीज रुक जाओ … किसके लंड की बातें कर रही हो तुम? मुझे बताओ प्लीज शांत हो जाओ दिव्या!

मैं जोर-जोर से उस कूड़ेवाले के लंड को याद कर चूत में अन्दर-बाहर करती रही.

थोड़ी देर बाद मेरी जांघें जोर-जोर से कांपने लगी, मेरी सांसें तेज हो गईं, आंखें ऊपर चढ़ गईं और मैं जोर-जोर से सिसकारियां लेने लगी.

मेरी आवाजें इतनी तेज़ निकल रही थीं कि सबको घर पर आवाज़ सुनाई दे रही होंगी.
इसलिए राज ने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया.

कुछ ही सेकंड बाद मेरी चूत में से एक लंबी धार पानी की बहने लगी, मेरी जांघें जोर-जोर से कांपती रहीं.

मैं 15–20 सेकंड तक झड़ती रही और फिर निढाल होकर बिस्तर पर पड़ गई.
राज ने हाथ हटा लिया.

मेरी हालत ऐसी थी कि मैं अभी बेहोश हो जाऊंगी.

राज ने बेडशीट देखी तो वह चूत के पानी से पूरी तरह गीली हो चुकी थी.
राज ने मुझे उठने को कहा, तो मैं उठने लगी, पर मुझे उठा नहीं गया.

मैं बिस्तर पर वापस गिर गई.
राज ने मुझे अपनी गोद में उठाकर नीचे लिटाया और खुद बेडशीट चेंज की.
बेडशीट चेंज करने के बाद उसने दोबारा मुझे लिटा दिया.

फिर मैं कब सो गई, मुझे पता ही नहीं चला.

मेरे प्यारे मित्रो, ये थी आपकी प्यारी भाभी दिव्या की चुदाई की कहानी, जो अभी समाप्त नहीं हुई है.

आगे की कहानी जानने के लिए आपको थोड़ा इंतज़ार करना पड़ेगा और मुझे अपने ईमेल भी भेजना पड़ेगा कि आपकि दिव्या भाभी को कूड़े वालों के लौड़ों ने कैसे सैंडविच बना कर चोदा.

मेरी यह किचेन सेक्स स्टोरी आपको कैसी लगी, बताने के लिए नीचे दिए मेल पर मुझे जरूर मेल कीजिए.
divyavaryani700@gmail.com

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