आपी की दवाई – घर में ही चुदाई

Views: 1 Category: First Time Sex By surbharti071 Published: October 13, 2026 📖 11 min read
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अमेच्योर गर्ल सेक्स कहानी में मेरा बदन भरा नहीं था, मैं अपने जिस्म को भरा-पूरा सेक्सी बनाना चाहती थी. मेरी मौसी की बेटी ने मेरी मदद की, बताया कि लंड लेने से जिस्म भरेगा.

आप सोचिए किसी लड़की की उमर बीस साल हो लेकिन बदन बारह साल का तो आप क्या कहेंगे?

हो सकता है कि आप कोई हेल्थ ड्रिंक पीने की राय दें, पौष्टिक आहार खाने को कहें, थोड़ा व्यायाम और योगासन की राय दें, या किसी डॉक्टर से इलाज कराने को कहें इत्यादि।

लेकिन इतना सब कुछ करने के बाद भी कोई फर्क न पड़े तो क्या कहेंगे उसे?
ठिगनी, नटुरी, बौनी आदि कई उपनाम मिल जाएंगे उसे!

फिर ऐसी हालत में जो कोई भी जैसा भी उसका इलाज बताएगा वो करने को तैयार हो ही जाएगी.
जैसे मैं भी तैयार हो गई और यह इलाज बिल्कुल कारगर साबित हुआ।

मैं सबीरा 21 साल की मस्त माल।
5 फीट 6 इंच लंबाई, गदराया बदन, सुडौल जोबन, मटकता कुल्हा, लचकती कमर, दमकता चेहरा, फटी बुर, फटी गांड लेकिन बिना शादी कुंवारी नहीं हूं अभी।

समझ गए न आप कि चुदाई चालू है और यह सब लंड और उसके मलाई का करिश्मा है।

लेकिन ये सब मुझे मुफ्त में मिल गया है ऐसा बिल्कुल मत सोचिएगा।
मौत के मुंह से बाहर आई हूं तब जाके ऐसी मस्त माल बन पाई हूं।

मेरा दावा है अगर एक बार मुझ पर आपकी नजर पड़ गई तो आपका लंड अकड़ उठेगा और आपको मूठ मारकर अपनी मलाई निकालकर बर्बाद करनी पड़ेगी।

इसलिए आपके मलाई को बचाने के लिए बुर को बुरके में रखने लगी हूं।

लेकिन लंड देखते ही बुर भोसड़ी खुजलाने लगती है, फिर चुदवाए बिना चैन नहीं मिलता।
मेरी बुर बहुत सम्मान करती है लंडों का।

बीस साल की ठिगनी, नटुरी, छोटी गुड़िया सबीरा मस्त माल कैसे बन गई आप जरूर जानना चाहेंगे।

अमेच्योर गर्ल सेक्स कहानी में हुआ यूं कि मैं पांच-छह साल बाद अपने खालाजान के घर जौनपुर गई।

वहीं मिली मेरी खाला की बेटी और मेरी हमउम्र बहन समीरा।

समीरा मुझसे सिर्फ दो माह बड़ी थी और मैं उसे आपी कहती थी।

लेकिन जब इस बार मिली तो उसका गदराया भरापूरा बदन देखकर मुझे अपने आप पर गुस्सा आने लगा।
दिल किया कहीं डूब मरूं या फंदे पर लटक जाऊं।

समीरा को मेरी हालत समझते देर न लगी।
उसने मुझे अपने आगोश में भर लिया और अपने बेडरूम में लाकर बेड पर पटक दिया।

मुझे बहुत बुरा लगा लेकिन अगले ही पल वो मेरी समस्या का हल बताने लगी।

समीरा- अरे सबीरा बहन! बीस साल की बच्ची हो अब तक लंड-वंड नहीं लेती हो क्या?

मैं- ये लंड-वंड क्या होता है आपी? कोई दवाई है क्या?

समीरा- बस समझ गई। तुम बहुत भोली हो, इसी कारण अब तक बच्ची की बच्ची हो।

मैं- अरे आपी! मुझे तो सब कुछ खिलाया-पिलाया गया पर मैं बढ़ ही नहीं पाई। अब तो तुम्हें देखकर मर जाने का मन करता है।

समीरा- ठीक है मरने का शौक है तो मर जा। लेकिन मैं तो चाहती हूं तुम्हारा मरना भी हो जाए और फिर जीना भी शुरू हो जाए।

मैं- ऐसा कैसे होगा? मरकर कौन जिंदा होता है भला! तुम भी क्या-क्या बकते जा रही हो आपी! मेरा मजाक मत बनाओ।

समीरा- अरे मेरी प्यारी बहना! बुरा मान गई? भला तेरी आपी तेरा मजाक उड़ाएगी? देख सबीरा देख! अपनी इस आपी की गदराई जवानी देख। मैंने इसे मरकर पाया है और जिंदा तुम्हारे सामने हूं या नहीं??
मैं- बिल्कुल जिंदा हो आपी। खैर! छोड़ो सब बातें। आखिर तुम कहना क्या चाहती हो? ये लंड-वंड का क्या चक्कर है?

समीरा- लंड-वंड छोड़, पहले ये वादा कर कि मरने वाला दर्द सह लोगी तुम। तुम्हें जिंदा रखने की जिम्मेवारी मेरी!
मैं- लो आपी, पक्का वादा करती हूं। तुम जो चाहे मेरे साथ करो, लेकिन मुझे उमर के लायक तो बना ही दो।

समीरा- अरे बहन! मैं तो कुछ नहीं करूंगी, करेगा तो लंड। मैं तो सिर्फ तेरी मदद करूंगी।

मैं- लंड तो देखने दोगी न?
समीरा- हां, लेकिन जब तुम मेरी तरह हो जाओगी तब! उसके पहले तो तेरे आंखों पर पट्टी रहेगी और लंड से पेलाई होती रहेगी।

मैं- तेरी तरह होने में समय कितना लगेगा आपी? और आंखों पर पट्टी क्यों और पेलाई क्या होता है आपी?

समीरा- ज्यादा सवाल मत कर, एक महीने की पेलाई में तुम मेरी तरह हो जाएगी। लंड देखोगी तब जब मैं चाहूंगी।

मैं- फिर तो तेरे साथ तीन महीने जरूर रहूंगी। अब बताओ तो लंड आएगा कब?
समीरा- ज्यादा बेचैन मत हो, मैं सब तैयारी कर देती हूं। पहले बाथरूम में चल!

आपी मुझे बाथरूम में ले गई और मुझे नंगा कर दी।
कागजी नींबू की तरह छोटी-छोटी चूंचियां और बुर पर सुनहरे छोटे-छोटे बाल।

अब आपी भी नंगी हो गई।
बड़ी-बड़ी चूचियां, भरापूरा गदराया बदन, फूली हुई बुर।

मुझे अपने पर ही तरस आने लगा और रुआंसी हो गई।

लेकिन आपी ने धीरज दिया और मेरे बुर के बालों पर हेयर रिमूवर लगाकर मेरी चूंचियों को धीरे-धीरे मसलने लगी।

मुझे मजा आने लगा।
थोड़ी देर बाद बुर के बाल को भी रगड़कर साफ कर दी और बुर से खेलने लगी।

मैंने अपने आप को आपी के हवाले कर दिया था।

आपी ने मेरे बुर पर थोड़ा जेल लगाया, अपनी उंगली को मुलायम किया और खेल-खेल में बुर में रेल दिया।

मैं- उई आपी! क्या कर रही हो?
समीरा- बस, तुम चुप रहो, नो बकवास।

आपी ने उंगली से ही पेलाई शुरू कर दी और मैं चुपचाप उंगली पेलाई का मजा लेने लगी।

कुछ देर में ही लगा जैसे मेरे अंदर लावा फूटा और बह निकला।
मुझे अजीब आनंद का अहसास हुआ और मैंने आपी को बाहों में जोर से कस लिया।

समीरा- कैसा लगा सबीरा?
मैं- क्या बताऊं और कैसे बताऊं आपी? मेरे पास अल्फाज नहीं हैं।

समीरा- ठीक है, अब अच्छे से नहा-धो लो। आज रात तेरे बुर में लंड डलवाऊंगी।
मैं- ठीक है आपी। आप बड़ी दयावान हो।
समीरा- यह तो रात में पता चलेगा कि मैं दयावान हूं या कसाई।

मैं- मतलब?
समीरा- मतलब तो रात में ही समझ आएगा मेरी भोली-भाली बहना, बस इंतजार करो।

मैं रात होने का इंतजार करने लगी।

नौ बजे तक डिनर खत्म हो चुका था।
हम दोनों एक साथ सोने के लिए आ गई।

आपी ने सफेद रंग की धुली चादर बेड पर डाली, दो की जगह चार तकिए बेड पर रखे, एक काले रंग का दुपट्टा और नारियल तेल की डिब्बी।

मैं- आपी! इतना सारा इंतजाम किसलिए?
आपी- अपने सबीरा बहन की सेवा और सुविधा के लिए।

आपी हंसते हुए बोली- आ मेरी बहन! तेरी सेवा करती हूं।

आपी ने मुझे नंगी कर दिया और खुद नंगी हो गई।
मुझे बिस्तर पर पटककर मेरे ऊपर चढ़ गई और चूमने- चाटने- चुसने- रगड़ने लगी।

पहले तो यह अजीब लगा लेकिन थोड़ी ही देर में मुझे मजा आने लगा।
आपी ने मेरे बुर में ढेर सा नारियल तेल डाला और बुर के अंदर-बाहर मसाज करने लगी।

मेरी बुर पानी छोड़ने लगी।
तेल और पानी का मिलना और आपी द्वारा उंगली से बुर की चुदाई और घच-घुच घच-घुच… की आवाज मस्ती में ला दिया।

आपी ने काले दुपट्टे से मेरी आंखें बांध दीं और बोली- बहन सबीरा! अब तुझे लंड का स्वाद चखाती हूं। ज्यादा चीखना-चिल्लाना मत नहीं तो घरवाले जाग गए तो सब खेल खराब हो जाएगा और तुम जैसी हो वैसी ही रह जाओगी फिर मैं तेरी कोई भी मदद कभी नहीं करूंगी। पहली बार है दर्द होगा ही पर अल्लाह कसम आगे जो मजा आएगा न वैसा मजा दुनिया के किसी काम में नहीं है। तुम भले ही बोलोगी ‘मर गई’ लेकिन न तुम मरोगी न मैं मरने दूंगी। लंड मारता नहीं, सिर्फ मजा ही मजा देता है। बस रास्ते की सफाई में थोड़ी सी तकलीफ होती है।

मैं- तुम निश्चिंत रहो आपी। मैं तेरी छोटी बहन सबीरा वचन देती हूं कि मैं ‘ऊफ्’ तक नहीं करूंगी भले मर जाऊं। लेकिन तुम मरने कहां दोगी। अब आगे की कार्रवाई शुरू करो। बुर कुछ मांग रही है, ऐसा लग रहा है।
आपी- ओके ओके बहन!

कुछ देर कमरे में शांति रही फिर पिछले दरवाजे के खुलने और बंद होने की हल्की आवाज सुनाई दी।

फिर आपी और एक मर्दाना आवाज की फुसफुसाहट सुनी।

आपी ने मुझे बिस्तर पर चित लिटाया और मेरे चूतड़ के नीचे तकिया लगाकर बुर को ऊपर उठा दिया।
मैं बंद आंखों से आपी के अनुसार अपने को करती गई।

आपी ने मेरे सिर को अपनी गोद में रखा तभी किसी मर्दाना हाथ ने मेरी टांगें फैला दीं।
आपी को दिए वचन के अनुसार मुझे चुप रहना था।

मेरी छोटी सी बुर के मुंह पर गरम गोला सटा और गीली मुलायम बुर में घुसने लगा।
मैं समझ गई यही लंड है।

फिर दबाव बढ़ा और मेरी बुर फटने लगी।
उंगली पहुंचने की जगह मोटा लंड बुर में घुस चुका था।

मोटाई का अंदाज लगा चुकी थी मैं!

मेरा सिर आपी की गोद में था और हाथ मुंह पर।

“एक झटके में पूरा डाल दो!” आपी ने जैसे आर्डर दिया हो।
लेकिन उसने लंड बाहर निकाल लिया।

मैं सोचने लगी यह क्या हुआ?

आपी तो पूरा डालने को बोली थी यह तो पूरा निकाल लिया।

लेकिन पल भर में सब कुछ बदल गया।
आपी ने मेरा हाथ, मुंह और सिर कब्जे में लिया।

लंड बुर के गेट पर सेट हुआ और एक जोरदार और घातक झटका।
मोटा सरिया सबीरा के बुर को फाड़ते हुए कलेजे तक पहुंच गया।
मौत से मुलाकात और मुकाबला हुआ।

आपी- रुको मत सलीम! पेलाई शुरू करो। यह छोटी नहीं है, बीस साल की जवान है। लंड मिला नहीं इसलिए बढ़ी नहीं। रहम मत करो। भोसड़ी वाली मुझसे केवल दो महीने की छोटी है। बेधड़क पेलो।

आपी का आर्डर जैसे किसी फौजी अफसर का आर्डर था।
सलीम ने आर्डर पाते ही बुर को भोसड़ा बनाना शुरू कर दिया।

मैं सचमुच मौत से मुकाबला कर रही थी और आपी कसाई की तरह मेरा मुंह, सिर और हाथ दबाए हुए थी।
सलीम का लंड पिस्टन की तरह मेरे बुर में तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था।

बुर की हर गांठ टूटती जा रही थी और ऐसा लग रहा था कि मैं सचमुच बड़ी होती जा रही हूं।
पांच मिनट में पांच सौ झटके खा चुकी बुर, लंड की दीवानी होने लगी।

मैं मौत को मात दे चुकी थी और बुर लंड को दे चुकी थी।
मीठा-मीठा दर्द मजा देने लगा।

मुझे संतुलित और सामान्य समझकर आपी ने मेरे मुंह पर से हाथ हटा लिया।

सलीम पूरी रफ्तार में पेलते जा रहा था।

आपी- कैसा लग रहा है सबीरा बहन?
“अभी मत पूछो आपी, पेलवाने दो! आह ओह आह ऊंह ऊंह ऊई ऊई आह ओह ओई आह ऊंह ऊई पेलो पेलो और जोर से पेलो और जोर से! आह वाह ओहोहो हो ओह हो अई अई अई मैं गई ऊई ऊई हा हा हा अई आआ आह!

गरमागरम लंड के जूस से बुर भर गई और अब तक की जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी मिली।
थोड़ी देर शांत पड़ी रही।

लंड पाने की खुशी, सील टूटने का दर्द और औरत बनने का आनंद कितना निराला होता है न!

मैं- आपी तुम्हें दिली शुक्रिया!
आपी- शुक्रिया वुक्रिया छोड़, बता कैसा लगा?
मैं- आपी! क्या सच में तुम बोलकर बता सकती हो इस खुशी को?

आपी- नहीं रे। तुम सच बोली। इस मजे के लिए कोई अल्फाज ही नहीं बने। अब बता क्या करना चाहती है तू?
मैं- लंड दिखा सकोगी? और ये सलीम कौन हैं?
आपी- वादे के अनुसार एक महीने बाद लंड और लंडधारी का दीदार कर लेना। फिलहाल लंड और लंडधारी एक माह तेरी सेवा करते रहेंगे। ठीक है आपी।

उस रात चार बार पेलाई हुई।
फिर सुबह होने के पहले पिछला दरवाजा खुला और बंद हुआ।
मतलब पेलने वाला चला गया।

आपी ने मेरी आंखों से दुपट्टा खोल दिया।
अब कमरे में हम दोनों बहने थीं।

सफेद चादर पर लगे ल.हू के दाग सील टूटने और सुहागरात मनाने की गवाही दे रहे थे।

पहली पेलाई से ही बदन में बदलाव दिखना शुरू हो गया।
दूसरी रात में आपी ने मेरी गांड की भी सील तुड़वा दी।

फिर तीसरी, चौथी, पांचवीं… करते करते तीसवीं रात आ गई।

आपी की दवाई करामात कर चुकी थी।
बस आपी बीस तो मैं उन्नीस।

तीसवीं रात को मुझे उस करामाती लंड और लंडधारी का दीदार होना था।
आखिर सलीम कौन होगा?

यह नाम तो यहां घर और आसपास में भी किसी का नहीं है तो फिर कौन होगा?

वो रात आई और मेरा इंतजार खत्म हुआ।
आपी दरवाजा खोलकर आई, अपने हाथों से मेरी आंखें बंद कर दीं।

सलीम बिस्तर पर बैठ चुका था।

आपी ने मेरे आंख से अपने हाथ हटाया।
मैं- सबीर भाईजान आप?

आपी- हां सबीरा! भाईजान ने ही मुझमें और तुममें जान डालकर जानदार और शानदार बनाया है। अब इनके शानदार, जानदार हथियार का भी दीदार कर ले जिसने तेरी कायापलट कर दिया है।

आपी ने भाईजान को नंगा कर दिया।

उनका हब्शी लंड देखकर मैं सोच में पड़ गई।
इतने बड़े लंड से मेरी छोटी सी बुर पेलवाती रही।

खैर! जो हुआ सो हुआ।
उस रात भाईजान ने मेरे सामने ही समीरा आपी को भी जमकर पेला।
महाचुदक्कड़ समीरा आपी ने भाईजान से पेलवा-पेलवाकर मुझे भी महाचुदक्कड़ बना दिया।

घर में ही हमारी चुदाई चलती रही और घरवालों को ही खबर नहीं तो बाहर वाले क्या घंटा जानते।

मैं एक महीने के लिए आई थी लेकिन बहाने बना-बनाकर छह महीने रह गई।
इस छह महीने में बिना नागा किए रोज चार-पांच बार चुदवाती रही।

चुदाई ने वो चमत्कार दिखाया कि जब छह महीने बाद घर लौटी तो कोई पहचान नहीं पाया।

आते वक्त समीरा आपी ने मंत्र बताया कि घर के लंड से घर में चुदवाना पर बाहर मुंह मत मारना।

फटी बुर और फटी गांड लेकर घर आते ही इस मंत्र का प्रयोग अपने से एक साल छोटे भाई शब्बीर पर कर दी और चुदाई प्रोग्राम चल निकला।

आपी तेरी दवाई बहुत काम आई!
बधाई! बधाई!! बधाई!!!

अमेच्योर गर्ल सेक्स कहानी आपको कैसी लगी?
surbharti071@gmail.com

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