विडो पोर्न कहानी में मेरी माँ बहुत संस्कारी थी पर विधवा होने के बाद उनकी कामाग्नि का कोई इलाज नहीं हो रहा था. उनकी सहेली एक कारखाने में काम करती थी.
नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम यश है.
बिना किसी लाग लपेट के मैं आपको अपनी मां के बारे में बताता हूँ.
मेरी मां का नाम कुसुम है.
वे बहुत संस्कारी औरत हैं और उनका फिगर 36-32-40 का है.
हमारा एक फ्लैट है, जिसमें मैं और मां ही रहते हैं.
पापा की दुर्घटना में मौत हो चुकी है.
उसके बाद से मां खाना बनाने का काम करती हैं और घर चलाती हैं.
अब मैं अपनी विडो पोर्न कहानी पर आता हूँ जो कुछ दिनों पहले की ही है.
पहले मेरी मां के बारे में मेरी कोई गंदी सोच नहीं थी.
लेकिन कुछ समय से अंतर्वासना की कहानियां पढ़ने की वजह से मेरी सोच पूरी तरह बदल गई है.
अब मैं रोज़ मां-बेटे की चुदाई वाली कहानियां पढ़ता हूँ और मुठ मारता हूँ.
संडे को मेरी और मां दोनों की छुट्टी रहती है तो हम लोग घर में ही आराम करते हैं.
एक दिन संडे को हम दोनों बहुत बोर हो रहे थे.
तभी मम्मी ने कहा- आज हम दोनों मेरी सहेली दीप्ति के पास चलते हैं!
मैंने भी हां कर दी.
दीप्ति आंटी अकेली रहती हैं.
उनका कुछ समय पहले ही पति से तलाक हो गया था क्योंकि उनका किसी के साथ चक्कर चल रहा था.
अब वे अकेली रहती हैं और वे एक कपड़े सिलने वाली जगह पर ही रहकर सिलाई का काम करती हैं.
कपड़े सिलने वाले उस कारखाने में संडे को ऑफ रहता है तो आंटी की भी छुट्टी रहती है.
रेडीमेड कपड़ों का कारखाना ऊपर की मंजिल पर था और आंटी उसी बिल्डिंग में नीचे की फ्लोर पर रहती थीं.
मैं और मां बाइक से आंटी के घर के लिए निकल गए.
वहां पहुंचते ही देखा कि आंटी खाना बना रही थीं.
हम दोनों अन्दर आ गए.
आंटी ने हमें देखकर बहुत खुशी जताई और हमें बैठाया.
उसके बाद मम्मी और आंटी आपस में बात करने लगीं.
मैं अपना मोबाइल चलाने लगा.
कुछ देर बाद आंटी का सेठ आया.
उसने आवाज़ दी.
आंटी उनसे बात करने चली गईं.
फिर सेठ ऊपर की मंजिल पर चला गया.
आंटी ने मम्मी को बुलाया और कहा- कुसुम, मुझे थोड़ा-सा काम है. मैं थोड़ी देर में कारखाने से आती हूँ.
फिर आंटी ऊपर चली गईं.
आधे घंटे के बाद आंटी और उनका सेठ नीचे आए.
सेठ चला गया और आंटी हम दोनों के पास आ गईं.
जब वे आईं तो बहुत थकी हुई लग रही थीं.
मम्मी को उन दोनों पर शक हुआ.
लेकिन उस समय मम्मी कुछ नहीं बोलीं क्योंकि मैं वहां मौजूद था.
फिर हम सबने बातचीत की.
उसके बाद हम सबने खाना खाया.
फिर मम्मी और मैं घर के लिए निकल गए.
फ्लैट पर पहुंचने के बाद हम थकान की वजह से सो गए.
शाम को हम उठे और अपने-अपने काम में लग गए.
रात में मां ने और मैंने खाना खाया.
मैं अपने कमरे में चला गया.
मम्मी हॉल में बैठकर फोन चलाने लगीं.
मम्मी ने आंटी को मैसेज किया- हाय.
आंटी ने भी उधर से हाय का जबाव दिया.
आंटी का मैसेज आते ही मेरे फोन में भी नोटिफिकेशन आई क्योंकि मेरे फोन में मम्मी का व्हाट्सएप भी चालू था.
मैंने तुरंत दोनों की चैट देखनी शुरू कर दी.
मम्मी- खाना हो गया?
आंटी- हां हो गया.
मम्मी- तुझसे एक बात पूछूँ?
आंटी- हां पूछ ना.
मम्मी- तेरी आज छुट्टी थी, फिर भी तेरा सेठ आया और तुम दोनों ऊपर गए … जब तुम वापस आईं, तब काफी थकी हुई सी लग रही थीं … कहीं तेरा उसके साथ चक्कर तो नहीं चल रहा है?
आंटी- कुसुम, तुझे तो पता है कि औरत की भी जरूरत होती है इसलिए मैं और मेरा सेठ जब अकेले होते हैं तो एक-दूसरे से प्यार बांट लेते हैं.
मम्मी ने थंब का निशान भेजा.
आंटी ने लिखा- देख कुसुम, ये बात किसी को बोलना मत यार … वर्ना मेरी फिर से बदनामी हो जाएगी. तू मेरी सहेली है इसलिए बता रही हूँ.
मम्मी- ठीक है. लेकिन तुझे मेरे लिए भी एक यार ढूँढना पड़ेगा, आखिर मैं भी तो अकेली हूँ … कब तक उंगली से काम चलाऊं?
आंटी- मेरे सेठ का एक दोस्त है, वह कभी-कभी आता है. मैं उनसे बात कर लूँगी. इस संडे को तुम भी आ जाओ … तुम्हारी भी आग बुझवा देती हूँ.
मम्मी- पर यार, मेरा बेटा भी तो आएगा साथ … हम उसका क्या करेंगे?
आंटी- उसको मैं बोल दूँगी कि हमें काम है तो हम ऊपर हैं, ऊपर मत आना. अगर काम हो तो फोन कर देना … वर्ना सेठ आ जाएगा तो वह चिल्लाएगा.
मम्मी- ठीक है, मैं संडे को मिलती हूँ.
भाइयो, इनकी चैट देखने के बाद मैं मां की चुदाई देखने के लिए बहुत खुश होने लगा.
उसके बाद मुठ मारकर सो गया.
अब मैं संडे का इंतज़ार करने लगा.
संडे आया … जिस दिन मेरी मां की चुदाई होने वाली थी और मैं चुपके से देखने वाला था.
हम दोनों सुबह उठे और तैयार हुए.
फिर मां ने कहा- मुझे दीप्ति आंटी के यहां चलना है. उनके कारखाने में कपड़ों का काम है, संडे-संडे का ही काम रहेगा बस!
फिर हम घर से निकले और थोड़ी देर में पहुंच गए.
उसके बाद हम बातें कर रहे थे.
तभी आंटी के सेठ की आवाज़ आई.
उसने आंटी को ऊपर आने को बोला और वह ये बोलकर ऊपर चला गया.
‘दीप्ति, कारखाने में काम है, जरा आना!’
उसके बाद आंटी ने मम्मी को चलने के लिए कहा.
फिर आंटी ने मुझसे कहा- फ्रिज में खाना है, अगर भूख लगे तो निकाल कर खा लेना … और कुछ काम हो तो फोन कर देना. ऊपर मत आना वर्ना सेठ चिल्लाएगा!
फिर मम्मी और आंटी ऊपर चली गईं.
थोड़ी देर बाद मैं भी चुपके से ऊपर कारखाने में चला गया.
ऊपर जाने के बाद मैंने देखा कि कारखाने का गेट और खिड़की बंद थे.
बस अन्दर से आवाज़ें आ रही थीं.
आंटी का सेठ आंटी से बोल रहा था- ये तो बहुत अच्छा माल लाई है दीप्ति, इसकी लेने में तो बहुत मजा आएगा!
सेठ का दोस्त भी बोलने लगा- हां यार, सच में बहुत बढ़िया माल है. इसके साथ तो बहुत मजा आएगा!
उसके बाद लाइट चली गई.
आंटी के सेठ ने कहा- दीप्ति गेट और खिड़की खोल दे, गर्मी लगने लगेगी!
आंटी ने गेट और खिड़की खोल दी.
उसके बाद मुझे खिड़की से सब कुछ साफ-साफ दिखने लगा.
मैं चुपके-चुपके देखने लगा.
अन्दर जो मैंने देखा … तो मैं देखता ही रह गया.
मम्मी और आंटी दोनों ही पूरी नंगी थीं.
आंटी का सेठ मेरी मम्मी को गले लगाकर जोर-जोर से चूम रहा था.
उसका दोस्त मम्मी की गांड मसल रहा था.
उधर आंटी सेठ के लंड को मुँह में लेकर पूरी शिद्दत से चूस रही थीं.
थोड़ी देर बाद सेठ का दोस्त मम्मी को गेट के पास ले आया और अपना 7 इंच का लंड मम्मी को चुसवाने लगा.
मम्मी बड़े मजे से उसका लंड चूसने लगीं.
इधर आंटी का सेठ उन्हें चोदने के लिए उनकी चूत पर लंड सटाने लगा.
फिर उसने एक ही धक्के में अपना लंड आंटी की चूत में पूरा डाल दिया.
आंटी को तेज़ दर्द हुआ.
वे हल्की सी चीख उठीं.
आंटी कराह कर बोलीं- आह सेठ जी, धीरे डालो … दर्द हो रहा है!
पर सेठ ने उनकी एक न सुनी और जोर-जोर से आंटी को चोदता रहा.
उधर सेठ का दोस्त मम्मी के बूब्स चूसने लगा. इतनी जोर से चूस रहा था और काट भी रहा था मानो साले को काभी औरत के दूध चूसने ही नही मिले हों.
जैसे ही उसके दांत लगते, मम्मी के मुँह से ‘आह … उफ्फ … ’ की आवाज़ें निकलने लगतीं.
लगभग 15 मिनट बाद आंटी का सेठ आंटी की चूत में ही पानी डालकर उनसे अलग हो गया.
उसी समय आंटी का भी पानी निकल गया.
आंटी थककर वहीं लेटी रह गईं.
फिर सेठ ने मम्मी को लंड चाटने के लिए कहा.
मम्मी ने उसका लंड मुँह में लेकर चाटना शुरू कर दिया.
पीछे से सेठ का दोस्त मेरी मम्मी की ले रहा था.
मैं इधर यह सीन देख कर अपनी पैंट के अन्दर से लंड बाहर निकाल कर जोर-जोर से हिलाने लगा.
थोड़ी देर बाद आंटी का मूड फिर से बन गया.
वे अपने सेठ का लंड मां के मुँह से हटाकर सेठ के लंड को पकड़ कर उन्हें बाथरूम में ले गईं.
मम्मी सेठ के दोस्त के लंड से अलग हो गईं.
कुछ देर मेरी मम्मी के दूध चूसने के बाद सेठ के दोस्त ने वापस लंड चुसवाया और उसने मेरी मां से घोड़ी बनने को बोला.
उसने इशारा किया कि गेट के पास पड़े स्टूल पर हाथ रख कर घोड़ी बन जाओ.
मम्मी तुरंत घोड़ी बन गईं.
जैसे ही मां घोड़ी बनीं, उन्हें मैं सामने स्टील की रेलिंग में लंड हिलाते हुए दिख गया.
वे उस समय मुझे देखकर भी चुपचाप उसका लंड लेने लगीं.
मुझे इस बात का बिल्कुल पता नहीं चला कि मैं मम्मी को दिख रहा हूँ.
फिर सेठ का दोस्त मम्मी की चूत पर थूक लगाया और लंड का टोपा रखकर धक्का देने लगा.
जैसे ही उसके लंड का टोपा मम्मी की चुत के अन्दर गया, मम्मी जोर से चिल्लाईं ‘आह्ह मां मर गई … बहुत दर्द हो रहा है!’
यह सुनकर सेठ के दोस्त की वासना बढ़ गई और उसने और एक ज़ोरदार धक्का दे मारा.
इस बार उसने अपने लंड का 3 इंच तक का हिस्सा चुत के अन्दर पेल दिया था.
मम्मी की आंखों से आंसू बहने लगे.
वे रोती हुई चीख रही थीं- आह्ह … आह्ह … उम्मा … मर गई.
सेठ के दोस्त के ऊपर तो ऐसा बहुत सवार हो गया था मानो वह किसी कमसिन लौंडिया को चोद रहा हो.
उसने फिर से ताकत से तीसरा धक्का दे मारा.
इस बार के धक्के में उसने अपना पूरा लंड मम्मी की चुत के अन्दर डाल दिया.
मम्मी ने उससे थोड़ी देर रुकने को कहा क्योंकि वे बहुत सालों बाद चुदवा रही थीं और उन्हें सेठ के दोस्त के मोटे लौड़े से चुदने में बहुत दर्द हो रहा था.
इतने में बाथरूम से भी चिल्लाने की आवाज़ आने लगी.
बाथरूम के अन्दर आंटी का सेठ उन्हें चोद रहा था.
फिर सेठ के दोस्त ने मम्मी को फिर से चोदना चालू कर दिया और तेज तेज धक्के मारने शुरू कर दिए.
कुछ देर बाद मम्मी को भी मजा आने लगा और वे भी उसका साथ देने लगीं.
मेरी मम्मी मादक सिसकारियां भरने लगीं और बोलने लगीं- आह, अब अच्छा लग रहा है आह जोर जोर से चोदो मुझे … आह फाड़ दो मेरी चूत … आह आह … चोदो … ह्म्म्म … ओह्ह्ह!
उन दोनों में चुदाई की स्पीड एकदम चरम पर पहुंच गई थी और दोनों अपनी अपनी ताकत से चुदाई का सुख लेने में लगे थे.
कुछ देर बाद वे दोनों एक साथ झड़ गए.
उसके बाद दोनों एक-दूसरे से चिपक कर खड़े रहे.
उधर आंटी और उनके सेठ का भी दूसरा राउंड हो चुका था.
सेठ ने मां को लंड खड़ा करने के लिए कहा.
मम्मी ने झट से मुँह में लेकर उसे खड़ा कर दिया.
इतने में ही सेठ के दोस्त का लंड भी फिर से खड़ा हो गया.
अब इस बार उन दोनों ने आंखों में इशारा किया और मम्मी को पकड़ लिया.
उन दोनों ने मम्मी की चूत में एक साथ लंड डाल दिया.
मम्मी दर्द से कराह उठीं.
मगर इस बात से बेपरवाह उन दोनों ने मेरी माँ की चुत में झटके देना शुरू कर दिया.
उधर आंटी उन तीनों की चुदाई को रिकॉर्ड करने लगीं.
उस समय मम्मी की चुदाई बहुत जोर-शोर से हो रही थी.
कुछ देर बाद मम्मी की चुत फैल गई और वे उन दोनों के लौड़े अपनी चुत में लेने लगीं.
अब तो मेरी मम्मी जोर-जोर से चिल्ला रही थीं- चोद दो मुझे … मैं रंडी हूँ फाड़ दो मेरी चूत!
वे ऐसा इसलिए बोल रही थीं क्योंकि उन्हें पता था कि मैं उनकी चुदाई देख रहा हूँ.
फिर कुछ देर बाद दोनों मम्मी की चूत में ही एक साथ झड़ गए.
मम्मी की चूत पूरी वीर्य से भर दी गई.
लेकिन मम्मी का पानी अभी भी नहीं छूटा था.
उसके बाद दोनों ने अपने लंड चुत से बाहर निकाले और मस्ती भरी बातें करने लगे.
फिर उन चारों ने कपड़े पहन लिए.
मैं नीचे आ गया.
कुछ देर बाद सेठ और उसका दोस्त चले गए.
उनके पीछे-पीछे मम्मी और आंटी भी नीचे आ गईं.
मम्मी ने मुझसे कहा- यश, अब घर चलें?
मैंने भी हां कर दी.
तभी आंटी ने कहा- इतनी जल्दी जा रही हो कुसुम? तुम कुछ खा तो लेतीं?
मम्मी ने जवाब दिया- अरे बहन मुझे थकान-सी लग रही है … घर जाकर खा लूँगी और थोड़ी देर सोऊंगी!
अब हम दोनों आंटी के घर से निकल कर अपने घर के लिए चल दिए.
थोड़ी दूर जाने के बाद मम्मी ने गाड़ी रोकने को कहा.
गाड़ी रुकते ही मम्मी ने मुझसे पूछा- तुझे ऊपर आने का मना किया था ना? तो तू ऊपर क्यों आया था?
मैं शॉक में पड़ गया.
मुझे समझ नहीं आया कि मम्मी को कैसे पता चला.
मैंने पूछा- मम्मी, आपको कैसे पता चला?
मम्मी ने कहा- जब वह आदमी मुझे घोड़ी बना रहा था, तब मैंने तुझे रेलिंग में लंड हिलाते हुए देख लिया था!
मम्मी ने लंड शब्द इस्तेमाल किया तो मैं सकपका गया.
मैं उस समय चुपचाप उनकी बातें सुनता रहा और कुछ नहीं बोला.
फिर मम्मी ने कहा- ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए कि मैंने ये सब काम किया है.
तब मैंने सोचा कि मां को क्यों न सच बोल दूँ कि मैं उन्हें चोदना चाहता हूँ.
इतने में मां ने ही मुझसे कहा- तेरा इतना बड़ा है … पहले क्यों नहीं बताया? मैं किसी और से नहीं चुदवाती. जब इतना बड़ा लंड घर में है, तो क्यों किसी के सामने नंगी होती? चल ठीक है … अब ये सब छोड़ और जल्दी घर ले चल. मुझे तेरे लंड से चुदना है … मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है. मुझे मालूम है कि तू सेक्स कहानी पढ़ता है और क्या क्या सोचता है.
यह सुनकर मैं खुश हो गया.
मैंने मम्मी से कहा- हां मम्मी, मेरी एक इच्छा है. मैं आपको सिर्फ चोदना नहीं चाहता … मैं आपको दुल्हन बनाकर आपके साथ सुहागरात मनाना चाहता हूँ.
मम्मी ने हंस कर कहा- ठीक है राजा … तू जो चाहता है वह कर. मुझे तुझसे अब लपक लपक कर चुदवाना है!
फिर हम दोनों घर के लिए निकल दिए.
मैं मन ही मन बड़ा खुश हो रहा था कि मेरी मम्मी मुझसे चुदने के लिए खुद से राजी हो गई हैं और मैं उन्हें अपनी दुल्हन बना कर उनके साथ सुहागरात वाली चुदाई करूंगा.
दोस्तो, आगे क्या हुआ, उसके लिए आपको मेरी अगली सेक्स कहानी का इंतज़ार करना पड़ेगा.
उसमें मैं आपको बताऊंगा कि कैसे हम दोनों ने रात भर चुदाई की और सुहागरात मनाई.
अगर आपको मेरी विडो पोर्न कहानी अच्छी लगी हो तो मुझे मेल करके जरूर बताएं.
kahanisingh1025@gmail.com