Xxx कैब सेक्स कहानी में एक रात दारू में धुत्त मैंने घर के लिए कैब बुक की. ड्राइवर रियर-व्यू मिरर से मुझे हवस भरी निगाहों से निहार रहा था. पर मुझे लौड़ों से खेलना पसंद है.
मैं जैक्लीन मस्तानी … बदला हुआ नाम.
23 साल की मस्त लड़की जॉब करती हूँ.
Xxx कैब सेक्स कहानी का मजा लें.
एक रात दारू के न/शे में धुत्त मैंने घर के लिए कैब बुक की.
मैंने एक टाइट वन-पीस पहन रखा था, उसमें मैं बेहद मादक लग रही थी.
न/शे में पूरी तरह धुत्त मैं कैब में टांगें फैलाकर लेट गई.
मैंने बेखौफ आंखें बंद कर लीं.
लेकिन सोई नहीं थी … मैं पूरी तरह जाग रही थी.
चुदाई का मुझे कोई डर इसलिए नहीं रहता है कि मैं भिन्न भिन्न किस्म के लौड़ों से चुदवाने की शैदाई हूँ.
तभी मैंने हल्की-सी आंख खोली तो देखा ड्राइवर रियर-व्यू मिरर से मुझे ताड़ रहा था.
वह मेरी चूची को घूर रहा था, हवस भरी निगाहों से मेरी गांड निहार रहा था.
लग रहा था कि आज मेरी ये भूल मेरी चूत की चटनी बना देगी.
काला सांड जैसा इंसान देखकर चुत के अन्दर से सुख का झरना बह रहा था.
कुछ दूर चले थे कि अंधेरे वाले रास्ते में आते ही गाड़ी धीरे चलने लगी.
उबड़-खाबड़ रास्ते पर मेरी चूचियां फुटबॉल की तरह उछलने लगीं.
मेरी निगाह उससे मिली, जब वह मेरी चूचियों को घूर रहा था.
वह हड़बड़ा गया, उसने खुद को संभाला और सँभल कर चलने की कोशिश करने लगा.
मैंने कहा- सामने देखकर गाड़ी चलाओ अंकल, नहीं तो गाड़ी ठुक जाएगी!
वह बोला- मैडम, आपने मुझे कच्चा ड्राइवर समझ लिया क्या? काम करने में मैं पक्का हूँ!
मैं हम्म बोली.
वह बोला- मुझे आता है संभालना … नई-पुरानी हर गाड़ी को हैंडल करना आता है मुझे … आप डरो मत, मैं खिलाड़ी हूँ… ना ही कोई अनाड़ी सा बच्चा हूँ!
थोड़ी बातें करके लगा कि हरामी तो है, मगर जबरदस्ती करने वाला नहीं.
चुदक्कड़ जरूर है, मौका मिलते ही हल्की-फुल्की मस्ती करने से पीछे नहीं हटेगा.
अब वह बेशर्म होकर मेरे पूरे बदन का मुआयना करने लगा.
खुली टांगों के बीच से पैंटी देख सके, इसलिए बार-बार शीशा ठीक कर रहा था.
उसकी पैंट के ऊपर मेरी नजर पड़ी तो देखा … लम्बा-मोटा डंडा उसकी पैंट में तना हुआ था.
साले का लंड नहीं, रॉड था … जिस पर वह बार-बार अपना दाहिना हाथ फेर रहा था.
उसका लंड देखते ही अपने आप मेरा हाथ मेरी जांघों पर चलने लगा.
मेरी चूत लावा बन गई … मैं भूल गई कि कैब में हूँ. मेरी टांगों के बीच का हिस्सा जलने लगा था.
गाड़ी किनारे लगाकर वह मेरी खिड़की की तरफ आया और थोड़ी दूर खड़ा होकर मूतने लगा.
मुझे उसका काला-मोटा लंड दिख गया … मूतने के बाद उसने लंड मसलना शुरू कर दिया.
मैं उसका हथियार निहार रही थी, निगाह हटा ही नहीं पाई.
उसने मुझे लंड निहारते देख लिया था.
वह बोला- आप ठीक तो हैं मैडम? अपना हाल बताओ मुझे … मैं क्या मदद कर सकता हूँ.
मैं उसे कुछ नहीं बता पाई.
वह बिना कुछ बोले गाड़ी में बैठा और एक सुनसान पार्किंग में गाड़ी लगा दी.
वह समझ गया था कि मेरी चूत गीली है.
क्योंकि ये बात मैं अपने चेहरे से मिटा नहीं पाई थी.
गाड़ी खड़ी करके उसने ट्रिप खत्म कर दी.
पीछे का गेट खोला और आकर मेरे बगल में बैठ गया.
मैं उसे वासना से देखने लगी.
उसने मेरे वन-पीस को ऊपर सरका दिया और अपनी दो उंगलियां सीधी मेरी चूत में डाल दीं.
मेरे मुँह से आह निकल गई.
मैं कुछ समझ पाती, तब तक उस हरामी ने मेरी दोनों चूचियां बाहर निकाल दीं.
फिर धक्का देकर मुझे सीट पर लिटा दिया और चूत पर सीधा हमला बोल दिया.
वह मेरी चूत को चासनी भरी जलेबी के जैसी की तरह चूसने चाटने लगा.
उसने हल्के दांतों से काट-काट कर चूत की फाँकों को चबा लिया था.
मस्ती के जोश में मैंने दोनों पैरों से उसका मुँह अपनी चूत पर दबाना शुरू कर दिया.
मैं पागल हो गई थी … भूल गई कि यह कैब ड्राइवर है.
मैं अपनी गांड उठा-उठाकर उसका मुँह चूत में घुसेड़ने लगी.
उसकी जीभ मेरी चूत के अन्दर का सारा रस चूस रही थी, मैं पूरी मस्त थी ‘फाड़ दो मेरी चूत साले …’
चुदाई के न/शे में मैं बड़बड़ाने लगी.
वह बोला- बहुतों को चोदा है, लेकिन ऐसी चिकनी चूत आज मिली है! कई चूतों के बाद आज देखा कि कोई चूत इतनी गीली भी हो सकती है!
मैं उसके सर को अपनी चुत पर रगड़ रही थी.
‘छमिया, आज तेरी टाइट चूत में मेरा नाग घर बनाएगा. फाड़ दूँगा रांड … चोद-चोद कर तेरी चूत करनी है मुझे ढीली-पीली!’
मैं बस उसे सुन रही थी.
‘तेरी जैसी जवान लड़की मैंने कई साल पहले चोदी थी!’
मैंने कहा- कौन थी वह!
मेरे कार मालिक की बेटी की चूत थी, साली की चुत पहाड़ की ठंड में चोदी थी.’
मैंने कहा- फिर क्या हुआ था?
वह कवि बन गया और कविता पढ़ने लगा.
‘चुदाई से आ गया था उसे बुखार, फूल गई थी उसकी चूत मजेदार!’
‘बताऊंगा कभी फिर कि कैसे उसकी मां की गांड में धनिया बोया था! वह मुझसे बकचोदी कर रही थी, समझ रही थी नामर्द मुझे!’
‘चोद कर दीवाना बना दिया था जब उसे … मां की लौड़ी रो दी थी, खा कर मेरा हथियार …!’
ये बोलकर उसने चूत से मुँह हटाया, नंगा ही कैब का गेट खोलकर बाहर निकल गया.
फिर उसने आगे का गेट खोला, दोनों फ्रंट सीटें आगे करके बगल में फैलकर बैठ गया.
कमर से उठाकर उसने मेरी चूत लंड पर सैट की और हाथ छोड़ दिया.
उसका काला, मोटा, लम्बा लंड चूत में लेते ही मेरा पूरा बदन ऐंठ गया.
हाथ छोड़ते ही मैं उसके लंड पर धप्प से गिर पड़ी, काला नाग चूत में घुस गया.
दर्द से चीख निकल गई … एक ही झटके में उसने मेरी चूत फाड़ दी थी.
लग रहा था जैसे कुतिया को सांड चोद रहा हो, इतना भयानक लंड था उसका.
मेरी चूत ऐसे काँप रही थी, जैसे जड़ से ही उखाड़ दी हो उसने.
साले ने मेरी चूत फाड़ दी थी.
फिर मुझे लिटाकर पैर क्रॉस कर दिए.
लंड हल्के-हल्के मेरी चूत में घुसाने लगा.
लग रहा था चूत में धारदार आरी चल रही हो.
Xxx कैब सेक्स करने में मैं दर्द से छटपटाने लगी.
फिर उसने एक हाथ से मेरे पैर पकड़े और एक हाथ से मेरे दोनों हाथ.
बस फिर तूफानी अंदाज में वह किसी दरियाई घोड़े के जैसे मेरी चूत को बजाने लगा.
कुत्ते की तरह जीभ लपलपाते हुए, पागल होकर, मेरे तलवे चाट रहा था.
फिर उसने धक्कों की गति बढ़ाई तो चूत में लंड गुर्राने लगा.
वह काला सांड मेरी चूचियों को मखमली माल समझ कस-कस कर मसल रहा था.
उसने मेरी चूत से पानी निकलता देखा तो हरामी ने अपनी चुसाई की स्पीड और बढ़ा दी.
टांगें फैलाकर जब उसने फिर से लंड चूत में भरना शुरू किया तो चूत से फच-फच की आवाज निकल कर कार में गूँजने लगी.
मैं दस मिनट में ही झड़ गई.
मेरे झड़ने के बाद कुछ तेज झटकों के बाद उसने भी अपना गर्मागर्म लावा मेरी चूत में उड़ेल दिया.
थकावट से चूर, आधी बेहोश मैं उसके शरीर से चिपक कर सीट पर गिर पड़ी.
जब आंख खुली तो देखा कि मैं एक फ्लैट के कमरे में नीचे गद्दे पर सो रही थी.
मैंने इधर उधर देखा तो कोई नहीं दिखाई दिया.
फिर कपड़े पहन कर बाहर गई तो देखा तो तीस साल का युवक किचन में था.
मैं उठी और जाने लगी तो उसने रोका- अभी नहीं मैम … प्लीज रुकिए!
मुझे क्या पता था कि सांड ड्राइवर से भी बड़ा कमीना किचन में खड़ा था.
मैंने उससे पूछा- तुम कौन हो? और वह आदमी किधर गया जो मुझे इधर लेकर आया था?
वह बोला- वह मेरा बाप था … जो आपको लाया था. वह आपको रात में 3 बजे लाया था. उस वक्त मोहल्ले में सब सो रहे थे, वह पड़ोसियों से छुपाकर आपको घर लाया था.
मैं चुप थी और उसे सुन रही थी.
वह आगे बोला- चूंकि मेरा बाप शादीशुदा है और मैं उसका कुंवारा बेटा हूँ … लोग गलत समझेंगे कि इनके फ्लैट से यह कौन सी लड़की निकली है.
मेरे सामने सिर्फ एक लाल गमछा लपेटे खड़ा वह जवान लड़का, मुझे मेरी औकात बता रहा था कि रात को मैं न/शे में धुत्त थी और एक काले गैंडे जैसे मर्द से चुदवा कर उसके साथ बेहोशी की हालत में इस फ्लैट में आ गई थी.
मैंने कहा- अब मैं कैसे बाहर जा सकती हूँ?
वह बोला- अभी नहीं, रात होने के बाद ही जाना है आपको … तब तक मैं आपकी सेवा करूंगा!
साला हरामी बड़ा खुश होकर ये बात बता रहा था कि अब वह मेरी सेवा करेगा मतलब साफ था कि अब अपने बाप के बाद वह मुझे पेलेगा.
मैं बोली- ओये सुन, तेरी इज्जत तू देख भोसड़ी के … मैं जा रही हूँ. मैं तेरे बाप की रखैल नहीं हूँ!
वह बोला- अरे ऐसे कैसे जा सकती हैं आप?
‘न/शे में चोद दिया तेरे बाप ने… केस कर दूँगी! हट, जाने दे मुझे … पढ़ी-लिखी हूँ, बुद्धि से बैल नहीं हूँ … समझा!’
वह दौड़कर मेरे पास आया और उसने हाथ से मेरा मुँह दबा दिया.
मैं हिल भी न पाऊं, उसने मेरे बदन को अपने से इस कदर चिपका लिया था.
वह मुझे पकड़ कर रूम में ले आया, उसने हाथ से मेरी गर्दन दबोच रखी थी.
फिर उसकी मजबूत पकड़ देख कर मेरी चुत पुनः पसीज गई.
उसने मेरी कमर खींची और अपना पूरा शरीर मुझसे सटा लिया- बोला न मैडम, हमारी भी इज्जत है… आपकी तरह ही राज रखना जरूरी है!
साला गजब का हरामी था, मगर मेरे गुस्से को संभालकर उसने मुझे रुकने पर मजबूर कर लिया.
मैंने उसे धक्का देकर दूर हटाया, उस वक्त उसका लंड मेरी चूत से चिपका हुआ था.
टॉवल में उसके लंड की झलक पाई तो चुत में चींटियां रेंगने लगी थीं.
साले का लंड अलग ही तरह से भभका हुआ था.
मैंने उसे ध्यान से देखा.
उसका लम्बा शरीर, सांवला रंग, पूरा बदन पत्थर सा कड़क.
टॉवल में बड़ा सा उभार … लंड का जो देखते ही गजब का मूसल लग रहा था.
खुद को संभालते हुए मैंने कपड़े बदलने को मांगे, यह वन-पीस बहुत टाइट थी.
तब उसने अपनी लम्बी शर्ट दे दी, जो मेरी जांघों तक आ रही थी.
‘यही पहन लो, बहुत लम्बी है … काम चल जाएगा … या लोअर दूँ?’
उसकी मेरा बदन निहारने की चालाकी मुझे समझ में आ गई.
साले के इरादे नेक नहीं लग रहे थे.
मैं भी कौन सी नेक सोच में थी.
‘ठीक है, काम चल जाएगा!’
यह बोलकर मैंने गेट बंद करने की कोशिश की और अपना पर्स देखने लगी.
वह बोला- खुला रहने दो … चिल्लाओगी तो क्या करूँगा? आप चेंज करो, मैं नहीं देखूँगा!
मैं गुर्राई- क्या नहीं देखेगा?
‘तुम्हारी मस्त गांड, चिकनी चूत, मखमली चूची पर आंख नहीं सेकूँगा … बदलो आप ऐसे ही … गेट खोल कर … कसम से बिल्कुल नहीं देखूँगा!’
उसके बिंदास बोल सुनकर मैं हैरान थी.
फिर जैसे ही मैं पलटी, जिस तरफ जमीन पर गद्दा बिछा था, उधर देखने लगी.
मैंने अपने कपड़े टटोले तो पाया कि मैं बिना पैंटी के थी.
सामने गद्दे के नीचे मेरी काली पैंटी दबी दिखी तो समझ गई कि इस हरामी चोदे ने रात भर पूरा बदन निहारा था.
सच में बाप-बेटे बड़े हरामी थे.
इसका मुझे इस फ्लैट में रात तक रोकने का मकसद अपनी इज्जत बचाना नहीं था … साले को मेरी चूत बजाने का मूड था.
मैं भी चेंज करके बेड पर बैठ गई और अपने पर्स से सिगरेट की डिब्बी से एक सिगरेट निकाल कर धुआँ उड़ाने लगी.
वह वापस किचन में चला गया और खाना बनाने लगा था.
फिर दस मिनट बाद वह मेरी तरफ देखकर मुड़ा और झुककर गमछे से मुँह पौंछने लगा.
आधा गमछा उठा तो मुझे उसका लम्बा, काला, लटकता लंड मुझे साफ दिख गया.
माथे से पसीना पौंछते हुए वह मेरे सामने खड़ा हो गया.
वह अपने हाथ से लंड पकड़ कर उसे मसलने लगा और मुझे घूरने लगा.
उसे समझ आ गया था कि मैं दारू पीने की शौकीन हूँ तो एक अलमारी से घटिया सी व्हिस्की का हाफ निकाल कर मेरे सामने रख गया.
मैंने भी शरीर की टूटन को याद किया और उस हाफ का ढक्कन खोल कर एक लंबा घूंट गटक लिया.
काफी कड़वी थी तो झट से एक और सिगरेट सुलगा कर मुँह का स्वाद सही करने लगी.
फिर दस मिनट तक उसने मेरे साथ कुछ नहीं किया, बस काम में लगा रहा.
थोड़ी देर बाद उसने पूरा गमछा उतारकर कंधे पर रख लिया.
पसीना पौंछते हुए घूमा तो मैंने देखा उसका भुजंग सा लंड एकदम कड़क हो गया था और नब्बे डिग्री पर मुझे ताक रहा था.
मेरी तरफ देखकर वह ऐसे बोला, जैसे मेरा पिया पूछ रहा हो ‘रोटी बना लोगी?’
मैं ना बोल सकती थी, मगर मेरे मुँह से हां निकल गई और किचन में आना पड़ा.
पिया समझ कर हां बोली थी … तो खामियाजे में खुद को उससे चुदवाना पड़ा. मस्त लंड था तो मेरा मूड भी बन गया था.
अभी वह सुनो कि क्या हुआ किचन में…
उसके बुलाने पर मैं चुपचाप किचन में आकर खड़ी हो गई.
छोटे से किचन में इतनी दूरी थी कि मैं उसे महसूस कर सकती थी.
मेरी तरफ सरका और बोला- बेलन नीचे से निकाल लो!
बेलन निकालते वक्त उसका लंड मेरे मुँह से पकड़ने जितनी दूरी पर था.
बेलन निकालने को मैं घुटनों पर बैठी, तो उसकी टांगों के बीच आ गई.
मेरे मुँह पर उसका लंड लटक रहा था, बार-बार चेहरे से टकरा रहा था.
बेलन निकालते ही उसने सेल्फ बंद की और मेरे मुँह को लंड से दबा दिया.
जैसे कई चूतों की सुगंध सुंघा रहा हो … मुझे अपने लौड़े से डरा रहा था.
उसके लौड़े के बाजू से किसी तरह निकल कर मैं रोटी बनाने को खड़ी हुई.
चुपचाप, एकदम फटाफट रोटियां सेंकने लगी.
उसने पीछे से आकर धक्का दिया, मुझे स्लैब से चिपका दिया.
लंड की गर्मी महसूस होते ही मेरी चूत में चींटियां दौड़ने लगीं.
उसने ब्रा-पैंटी निकालकर उसने मुझे पूरी नंगी कर दिया और बोला- अब बना ऐसे ही नंगी रह कर रोटी … आज तुझे ऐसे चोदूँगा कि तेरी चूत की टोंटी खोल दूँगा. कल मेरे बाप ने ठोका होगा तुझे, अब मैं ठोककर बताऊंगा कि चुदाई किसे कहते हैं. साली रांड तुझे ऐसे रौंदूँगा आज कि पड़ जाएगी तेरी चूत छोटी!
जब तक मैंने रोटियां बनाईं, वह पीछे से मुझसे लिपटा रहा.
गांड की दरार में लंड चिपका कर मुझ पर उंगलियां फिराता रहा, मेरे दूध मसलता रहा चूसता रहा.
रोटी बनाने तक की वह मुझसे चिपका हुआ ही बोला- तू आज मेरी बीवी लग रही है! उसे भी मैं नंगी करके ऐसे पकड़ कर खाना बनवाता था. तुझे चोदकर बताऊंगा कैसे चोदता था मैं अपनी बीवी की चूत और कैसे माना था उसने मेरा लोहा … जब मैंने उसकी रगड़ कर चूत चोदी थी.
वह बके जा रहा था और मैं सुन रही थी.
‘मेरा बाप हांफ गया था लेने में उसकी, जिसने तेरी फाड़ दी थी रात में!’
‘सोच, मेरा बाप झड़ गया मगर बीवी ने नहीं दिया उसे भाव … फिर झाड़ कर उतारा था मैंने बीवी का घमंड और बाप की बेइज्जती का बदला लिया!’
न जाने क्या बड़बड़ कर रहा था साला … मेरी समझ में बस यह आ रहा था कि इसका मूसल मेरी फाड़ देगा.
वह अब भी कहे जा रहा था- बहन की लौड़ी मेरे पैरों पर गिर गई थी, दो घंटे में दस बार झाड़ दिया था पकड़ कर मैंने उसे … समझी!
रोटी बन जाने के बाद वह मुझसे बोला- पूरी स्लैब धो-साफ करके मेरे पास आ जा! थक गई होगी बहुत, आज तेल से बीवी की तरह तेरी मालिश करूँगा.
साला अपने बाप के जैसी कविता पढ़ने लगा था.
‘हर अंग पर लगाऊंगा तेल,
निकालूँगा सारी तेरे अन्दर भरी गर्मी …
रंडी सुन रही है ना …
आज चोदूँगा तुझे …
और चुदाई का नंबर उन्तालीसवां करूँगा खेल …!’
उसकी बातों से तो मैं सच में डर गई थी कि साला अड़तीस चुत चोद चुका है. मेरा न/शा फट गया था.
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