तुर्क बादशाह ने महाराणी को चोदा- 4

Views: 1 Category: Indian Biwi Ki Chudai By RaatKiBaat Published: October 12, 2026 📖 10 min read
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बेगम सेक्स कहानी में बादशाह ने अपनी नई बेगम की गांड सबके सामने हरम में चाटी. उसके बाद शहद लगा कर अपनी बेगम की गांड मारी बादशाह ने.

दोस्तो, मैं राज आपको एक ऐतिहासिक चुदाई की सेक्स कहानी का रस चखा रहा था.
कहानी के तीसरे भाग
महारानी ने नए नए तरीके सीखे सेक्स के
में आपने पढ़ लिया था कि महाराणी प्रियंवदा की गांड में बादशाह का शहद लगा लंड घुस चुका था.

अब आगे बेगम सेक्स कहानी:

इधर बादशाह अपने मूसल को मलिका की गांड में अन्दर तक डाल रहा था, वह भी गर्म हो रहा था.

तभी एक औरत जो बादशाह के पीछे आ गई.
उसने अपने बादशाह की गोलियों को मुँह में भर लिया और चूसने लगी.

इस बार चीख मारने की बारी बादशाह की थी.
उसकी भी आंखें बंद हो गई थीं.

अब तो जैसे हरम का हर इंसान अपने आलमपनाह को मजे करते देख रहा था.
अचानक मलिका जोर से चिल्ला पड़ी, उसका पूरा जिस्म कांप उठा और वह अपना प्रेम रस अपनी चुत से छोड़ने लगी.
उसने अपना पूरा रसीला पानी उस जवान लड़की के मुँह में भर दिया.

वह लड़की भी मलिका के रस को अमृत समझ कर पूरा पीने लगी.

मलिका के बदन में अब कोई ताकत नहीं बची थी.
वह बेजान होकर बिस्तर पर गिर पड़ी.

उसको अब बादशाह के लंड के धक्के अपनी गांड में कुछ अजीब सा महसूस करा रहे थे.

वह शायद बादशाह को कुछ बोलने ही वाली थी कि उसको अपनी गांड के अन्दर बादशाह का ढेर सारा पानी गिरता महसूस हुआ.
वह चुपचाप बिस्तर पर पड़ी रही.

पूरे हरम में बादशाह की आहों की आवाजें सुनाई दे रही थीं, वह अपनी सारी ताकत अपने लंड के सहारे अपनी प्यारी बेगम की प्यारी गांड में डाल रहा था.

वह काफी देर तक धक्के लगा कर अपना रस मलिका की गांड में भरता रहा.
फिर अचानक मलिका की पीठ पर गिर पड़ा.

उसका लंड भी ‘पक.’ की आवाज के साथ मलिका की गांड से बाहर आ गया और वह लड़की जो बादशाह की गोलियां चाट रही थी, बादशाह के मोटे और रस में भीगे हुए लंड को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ करने लगी.

बादशाह बेसुध अपनी बेगम के ऊपर पड़ा था.
मलिका ने यूँ ही अपनी आंखें खोलीं तो उसको अपने सामने नंगे खड़े बहुत से मर्द और औरत अपनी ओर घूरते हुए दिखे.

मलिका भी उनको देखने लगी.
वे औरतें धीरे से मुस्कुरा रही थीं और उनको देख कर मलिका भी मुस्कुरा उठी.

मलिका को अब जाकर थोड़ा होश आने लगा, अब तक तो वह हवस के नशे में थी.
उसने जब महसूस किया कि वह अपने बादशाह के साथ नंगी ही हरम में कई लोगों के सामने पड़ी है, तो उसको थोड़ी शर्म आने लगी.

हरम तो उसने महाराजा करण सिंह का भी देखा था, पर उसको ये पता नहीं था कि हरम में ऐसा भी कुछ हो सकता है!
बादशाह अभी भी अपनी बेगम के ऊपर पड़ा था, वह औरत अभी भी बादशाह का लंड चाट रही थी.

बादशाह का लंड अपने पूरे रौब में आने लगा.
महल से बाहर औरतों की अजीब अजीब सी आवाजें आ रही थीं.

कभी कोई औरत चिल्ला पड़ती थी और कभी किसी औरत की सिसकारियों की आवाजें आने लगती थीं.
माहौल में अभी भी मादकता थी.

धीरे धीरे हरम में भी मर्द और औरतें अपने रंग में आने लगे.
फिर से प्यार भरा माहौल पूरे हरम में नजर आने लगा.

बादशाह अपनी बेगम के ऊपर से उठ खड़ा हुआ और एक सोने के मर्तबान में रखा पानी पीने लगा.

उसने एक मर्द को बुला कर धीरे से कुछ कहा और वह मर्द सलाम कर के बाहर चला गया.
अब मलिका भी बिस्तर पर बैठी थी और अपने जिस्म की ताकत वापस बटोर रही थी.

वह अपने चारों तरफ चल रहे खेल को देख कर वापस गर्म हो रही थी.

थोड़ी देर में ही वह मर्द जो बाहर गया था वापस हरम में लौट आया, पर वह अकेला नहीं आया था, उसके पीछे आठ लोग थे जिन्होंने अपने साथ कुछ वाद्ययंत्र ले रखे थे.

उनको देख कर ही हरम में नंगे बदन खड़े लोगों के चेहरों पर चमक आ गई.

वे आठों लोग बादशाह को सलाम करते हुए दूर रखे एक बड़े से तख्त पर जाकर बैठ गए.
मलिका को कुछ समझ नहीं आया कि अब क्या होने वाला है!

पर उन लोगों के पास उन वाद्य यंत्रों को देख कर वह कुछ कुछ समझ रही थी.

इतने में ही सभी के कानों में संगीत की बड़ी मीठी मीठी धुन पड़ने लगी.

अब मालिका समझ रही थी कि बादशाह ने इन लोगों को क्यों बुलाया है.
‘बादशाह मेरा कितना ख्याल रखते हैं!’

यह सोच कर वह बादशाह की ओर देख कर मुस्कुराने लगी.
बादशाह ने धीरे से उसके कान के पास जा कर कहा- हमें यकीन है कि तुम हमारे साथ मजे कर रही हो और आज यह मस्ती पूरी रात चलने वाली है!

यह सुनकर मलिका के चेहरे पर मुस्कान छा गई.
वह तो वापस गर्म हो चुकी थी.

बादशाह उस वक्त बिल्कुल नंगा था, वह एकदम से बिस्तर पर घुटनों के बल हो गया और उसका तना हुआ लंड बिस्तर पर बैठी मलिका के मुँह के बिल्कुल सामने आ गया.

मलिका रजानी-उल-मरियम समझ गई कि बादशाह क्या चाहते हैं!
मलिका ने अपने एक हाथ से बादशाह के लंड को पकड़ लिया और उसको बड़ी जोर से पीछे की ओर कर दिया.

बादशाह की तो ‘आह्ह’ निकल पड़ी.
वह धीरे से बिस्तर पर लेट गया, उसका लंड हवा में झूल रहा था.

मलिका ने उसका लंड हाथ में पकड़ रखा था और वह पीठ के बल लेटे हुए बादशाह के ऊपर आ गई.
उसको उस लड़की का चेहरा याद आ गया, जो उस मर्द का लंड बड़े मजे से अपने मुँह में लेकर चूस रही थी.

मलिका ने कभी किसी का लंड अपने मुँह में नहीं लिया था, पर वह पिछले दिन से जो कुछ कर रही थी, वह सब भी उसने पहले कभी नहीं किया था.

हरम का आज का नजारा देख कर तो वह वैसे ही गर्म थी और ऊपर से संगीत का असर कुछ ऐसा हो रहा था कि पूरा मौसम ही मादक हो गया था.
वह कुछ झिझकती हुई लंड पर झुकी और बादशाह के लंड के सुपाड़े को अपने मुँह में भर लिया.

उसने अपने होंठों को बेहद जोर से लंड पर कस लिया और अपनी जीभ मुँह के अन्दर ही लंड के सुपाड़े पर फेरने लगी.

बादशाह की तो आहें निकल पड़ीं, वह अपने हाथ अपने सिर की तरफ ले गया और अपनी आंखें बंद कर लीं.
मलिका को लंड चूसने की बड़ी उत्सुकता थी. उसको पता ही नहीं था कि लंड चूसने में इतना मजा आता है.

वह बेहद कामोत्तेजक हो रही थी.
वह अब अपने मुँह में काफी अन्दर तक लंड को भरने लगी थी, उसके मुँह से उसका थूक बादशाह के लंड को गीला कर रहा था.

वह अपने एक हाथ से लंड को पकड़ी हुई थी और अपने मुँह के कमाल से बादशाह को अपना दीवाना बना रही थी.
बादशाह का मूसल जैसा लंड मलिका के मुँह और हाथ में बड़ा भारी लग रहा था, पर वह धीरे धीरे बड़ी आसानी से लंड को अपने मुँह में अन्दर तक लेने लगी.

कुछ ही देर में मालिका बादशाह का मूसल जैसा पूरा लंड अपने मुँह में गले तक लेती और अपने होंठों को लंड पर जोर से कसके दबा लेती.
फिर जोर से अपने हाथ से लंड को पकड़ कर मुँह से बाहर खींच लेती और वापस से अपने मुँह में अन्दर तक भर लेती.

उसकी इस हरकत ने बादशाह की हालत पतली कर दी थी.
उसकी मस्ती भरी आवाजें पूरे हॉल में गूँज रही थीं और वे आठ लोग अपने यंत्रों से बड़ी ही उत्तेजनापूर्ण संगीत निकाल रहे थे.

पूरे हरम में माहौल वापस रंगीन होने लगा था.

अपनी बेगम की इस हरकत का मजा ले रहा बादशाह मस्ती में कराह रहा था- आह बेगम, क्या लंड चूस रही हो तुम आह … और जोर से चूसो लंड को … अब रुकना मत बस मेरा लौड़ा अपने मुँह में पूरा खा लो … आआह बेगम, बड़ा मजा करवा रही हो आज तुम … आज तुम जो माँगोगी तुम्हें वह मिलेगा … आह … बस चूसती रहो मेरी जान!

मलिका भी बादशाह की बात सुन कर और गीली हो गई, वह अपने एक हाथ से अपनी चुत को मसलने लगी.
उसका मुँह बादशाह के लंड को जितना कस रहा था, उतना ही उसकी उंगलियां अपनी चुत को मसल रही थीं.

मालिका अब अपने होंठों को और कस कर लंड को चूसने लगी. उसके मुँह से घु … घु की आवाजें आ रही थीं और वह अपने ही हाथ से अपनी चुत को मसल रही थी.
उसके मुँह से घुन घुन के साथ ‘आआह ह्ह्ह्ह.’ की आवाजें भी निकल रही थीं.

मालिक का मुँह पूरा फूल गया था.
उसके मुँह की गर्माहट पाकर बादशाह का लंड भी और फूल कर ज्यादा बड़ा और मोटा हो गया था.
उसके लंड की नसों में खून बड़ी तेजी से दौड़ने लगा था.

बादशाह का लंड मलिका ने चूस चूस कर एकदम लाल कर दिया था.
बादशाह को पता था कि वह अब कभी भी पानी छोड़ सकता है, पर वह अपनी बेगम के मुँह में ही पानी छोड़ना चाहता था इसलिए उसने अपनी बेगम को कुछ नहीं बताया और उसका लंड झड़ने के करीब आकर और बड़ा व भयंकर रूप ले चुका था.

मलिका अपने मुँह के अन्दर ही अन्दर बादशाह का लंड चबाए जा रही थी.
इतने में ही बादशाह का बदन बड़े जोरों से हिलने लगा, उसने बेगम का मुँह अपने लंड पर जोर से दबा दिया और बादशाह का ज्वालामुखी फूट पड़ा.

उसने अपना गाढ़ा रस बेगम के मुँह में भर दिया.
मलिका का मुँह लगातार बादशाह के गर्म पानी से भरा जा रहा था.

बादशाह लगातार झटके मारता हुआ अपना पानी मालिक के मुँह में भरे जा रहा था.

मलिका को यह गर्म खट्टा सा पानी कुछ अजीब सा लगा और उसने एक बार मुँह खोल कर इस पानी को बाहर थूकने की कोशिश की.
पर बादशाह ने उसका सिर अपने लंड पर इतना जोर से दबा लिया था कि वह अब अपना मुँह खोल भी नहीं पा रही थी.

उसको ज्यादा देर तक यह गर्म पानी अपने मुँह में बर्दाश्त नहीं हुआ और वह गट … गट करके उस पानी को पीने लगी.
पानी था कि खत्म ही नहीं हो रहा था, पर मलिका ने पूरा पानी अपने पेट उतार लिया.

उसको अब सुकून सा मिला.
उसने अपने हाथ से लंड पकड़ रखा था.

उसको पता नहीं क्या सूझी और वह लंड को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ करने लगी.

बादशाह बिस्तर पर पड़ा पड़ा आहें भर रहा था और मजे लूट रहा था.
वह अपने वीर्य से इस नई नवेली दुल्हन की चुत, गांड और मुँह सब भर चुका था.

उसके चेहरे पर अजीब सा सुकून था.
उसकी आंखें अभी भी बंद थीं.

फिर वह उठा और अपनी बेगम को अपनी बांहों में भर लिया.
महाराणी अपने मालिक की बांहों में मचल उठी.

अभी तो खेल शुरू हुआ था, अभी तो पूरी रात बाकी पड़ी थी.
महाराणी प्रियंवदा को अभी काफी मेहनत करनी थी और बादशाह को भी.

इधर महाराणी अपना सब कुछ भुला कर जवानी का आनन्द लूट रही थी और उधर रणकपुर के महाराजा करण सिंह खिड़की से चाँद को देख रहे थे.
वे एकदम उदास, बिल्कुल शांत थे.

महाराजा करण सिंह अपने राजकुमार विक्रम सिंह और बेटी चंद्रकांता और अपने राजपरिवार के सदस्यों और अपने हरम की दासियों के साथ गुप्त मार्ग से निकल कर काफी समय तक जंगलों में भटकने के बाद हमीरगढ़ के महाराजा वीर सिंह की शरण में चले गए थे.

हमीरगढ़ पास की ही एक रियासत थी.
महाराजा करण सिंह और हमीरगढ़ के महाराजा वीर सिंह एक ही वंश से ताल्लुकात रखते थे, इस वजह से दोनों महाराजाओं में अच्छे संबंध थे.

हमीरगढ़ भी एक शक्तिशाली रियासत थी और महाराजा वीर सिंह भी एक शक्तिशाली महाराजा थे.
महाराजा वीर सिंह को महाराजा करण सिंह की तरह अपने राज्य की प्रजा से ज्यादा कुछ लगाव नहीं था.

उनका अधिकतर समय अपने हरम में मौज मस्ती करने में गुजरता था.
शराब और शवाब में उनके रात और दिन डूबे रहते थे, पर उन्होंने अपने क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए महाराजा करण सिंह को पनाह दी थी.

दोस्तो, यह बेगम सेक्स कहानी आपको कैसी लगी?
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