वर्जिन ब्राइड Xxx कहानी में गाँव की लड़की इसे मुझे प्रेम हुआ, विवाह तक बात पहुंच गई. विवाह के बाद हमारी प्रेम भरी सुहागरात हुई.
नमस्ते साथियो, मेरा नाम अंश वर्मा है. मैं झारखंड राज्य के गिरिडीह का रहने वाला हूँ.
यह मेरे जीवन की एक अविस्मरणीय, सुंदर और सच्ची घटना है, जिसे मैं आपके बीच में इस वर्जिन ब्राइड Xxx कहानी के माध्यम से साझा कर रहा हूँ.
यह बात 2023 की है. मैंने स्नातक पूरा कर गांव में रहकर खेती करना शुरू कर दिया था.
इसी दौरान मुझे वर्षा से प्रेम हो गया.
हम दोनों के बीच बहुत कम बातें हुईं परंतु दोनों के दिल में गहरा प्रेम हो गया और धीरे-धीरे विवाह तक बात पहुंच गई.
अप्रैल 2023 में वर्षा मेरी धर्मपत्नी बनने को राजी हो गई.
हमारा विवाह संपन्न हुआ.
विवाह के बाद हमारी प्रेम भरी सुहागरात हुई.
वर्षा ने अपना संस्कारी और कामयौवना भरा सुंदर रूप दिखाया.
उसके पास संभोग का आनन्द लेने की अद्भुत कला थी.
संस्कारी के साथ साथ अतिकामपिपासु धर्मपत्नी वर्षा का शरीर संभोग के कामरस से भरा हुआ था.
उसके अंग-अंग को चूमने और प्रेम करने में स्वर्ग की अप्सरा जैसी अनुभूति हो रही थी.
वर्जिन ब्राइड Xxx का मजा लेते हुए मैंने संभोग के साथ-साथ वर्षा के हर अंग से गहरा प्रेम किया और वर्षा पूरी तरह कामरस से भरकर मेरे प्रेम में मग्न हो गई.
संभोग का वह अविस्मरणीय तीन चक्र चला, जो जीवन भर याद रखने योग्य है.
पर मुझे कहां पता था कि अगली सुबह इससे भी ज्यादा आनन्दमयी होने वाली है.
सुबह 4 बजे ही मेरी नींद खुल गई और साथ ही वर्षा भी जाग गई.
रात को संभोग के बाद मैं उसके स्तनों को पकड़ कर सोया था और वर्षा मेरे लिंग को हाथ में लेकर सोई थी.
इसी वजह से हम दोनों एक साथ जाग गए.
हम दोनों पूरी तरह नग्न ही थे.
जागने के बाद मैंने उसकी प्रेमरस से भरी आंखों में आंखें डाल कर उसे देखा और उसके होंठों को चूम कर जीभ को चूसने लगा.
जल्द ही हम दोनों पुनः कामपिपासु हो गए.
इस बार मैं उसे अपनी गोद में उठाकर वॉशरूम में ले आया.
वॉशरूम में शॉवर के नीचे खड़ी करके मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया.
वह काममुग्ध होने लगी.
होंठ चूमते हुए मैंने उसके स्तनों को दबाना आरंभ कर दिया.
उसकी कामुक आवाजों से पूरा वॉशरूम चहक उठा.
स्तनों को दबाने और चूमने के बाद मैं उसकी योनि को चाटने लगा.
उसकी योनि जल्द ही पूरी तरह कामरस से भर गई.
वर्षा ने तुरंत अपने हाथों से मेरे लिंग को पकड़ा और झुक कर उसे प्रेम करने लगी.
हम दोनों संभोग का पूरा आनन्द लेने लगे.
मैंने उसे बाथरूम के फर्श पर लिटाया और चुत को भेद कर लंड से चुदाई चालू कर दी.
लगभग बीस मिनट के इस मस्त संभोग के उपरांत हम दोनों फव्वारे में स्नान करने लगे.
मैंने उसके हर अंग पर साबुन लगाया और उसने मेरे हर अंग पर.
मैंने उसे अच्छी तरह नहला दिया.
इसी बीच उसने कहा- स्नान के बाद अपने हर अंग को सुखाकर और तैयार होकर निर्वस्त्र ही बाहर हॉल में चले जाना और उधर से कुछ देर बाद लगभग साढ़े पांच बजे तक वापस कमरे में आ जाना.
दोस्तो, मैं यहां बताना चाहता हूँ कि मेरे कमरे से अटैच बाथरूम कुछ ऐसा है कि उसका एक दरवाजा बाहर हॉल में खुलता है और दूसरा कमरे में खुलता है.
मैंने समझ लिया कि वर्षा कुछ अलग करने के मूड में है.
मैंने सर हिला कर हामी भर दी.
वह बाथरूम से निकल गई.
मैं भी स्नान करने के बाद हॉल में आ गया और कपड़े आदि पहन कर तैयार होने लगा.
वह कमरे में तैयार हो रही थी.
घड़ी में 5:30 बजते ही मैं रूम की ओर बढ़ा. रूम के सामने पहुंच कर मैंने आवाज़ दी.
अन्दर से कामुक और प्रेम भरी मधुर आवाज़ आई- आ जाइए!
मैंने धीरे से अन्दर प्रवेश किया तो एक अविस्मरणीय और बेहद सुंदर दृश्य देखकर मेरा मन प्रेम से भर गया.
मेरी धर्मपत्नी वर्षा पूरी तरह से प्रेम की कामदेवी रति के अवतार में पूर्ण नग्न खड़ी थी.
उसके उस नग्नावतार की व्याख्या करना असंभव सा लगता है.
उसकी मांग में सिंदूर लगा हुआ था, माथे पर लाल रंग की छोटी बिंदी, होंठों पर गहरे लाल रंग की लिपस्टिक और दोनों कानों में सुंदर झुमके थे.
वर्षा बहुत सुंदर लग रही थी.
उसके दोनों नग्न स्तन सुंदरता से भरे हुए थे और दोनों स्तनाग्र (निप्पल) प्रेम के लाल रंग से रंगे हुए थे.
मंगलसूत्र दोनों स्तनों के बीच में सुशोभित होकर प्रेम भरी कामुकता प्रदर्शित कर रहा था.
रस से भरी उसकी योनि बहुत सुंदर लग रही थी.
पैरों में पायल पहन कर मेरी वर्षा पूरी नग्न कामयौवना बनकर अपने पति के समक्ष खड़ी थी.
मैं भी पूरी तरह नग्न हो गया था और धर्मपत्नी वर्षा के इस अवतार को देखकर मेरा लिंग पूरी तरह से उर्ध्व अवस्था में आ गया था.
प्रेम की देवी को साक्षात देखकर मैं अविस्मरणीय आनन्द से भर गया.
हम दोनों एक दूसरे के नग्न कामुक तन को निहार रहे थे.
वर्षा ने मेरे चरण स्पर्श किए.
हम दोनों की यह सुबह अविस्मरणीय हो रही थी.
वर्षा ने मेरे पूरी तरह उर्ध्व लिंग को हाथ में पकड़ा और माथे से लगाया.
इससे मेरा लिंग और भी कामुक अवस्था में आ गया.
मैंने कहा- तुम तो प्रेम की देवी के अवतार में हो प्रिये!
मैंने वर्षा की योनि को प्रेम से नमन किया, स्पर्श किया और चूमा.
इस समय तक दोनों कामुकता से भर चुके थे.
मैंने वर्षा को अपनी बांहों में भर लिया और उसके होंठों को चूमने लगा.
दोनों के होंठ कामरस से भरे हुए थे और एक दूसरे के होंठों को कामुक होकर चूम रहे थे.
उसके होंठों को चूमते हुए मैंने उसके स्तनों को हाथ से स्पर्श किया.
मेरे हाथ का स्पर्श पाते ही वर्षा के दोनों स्तन और भी कामरस से भर गए.
मंगलसूत्र के दोनों ओर वर्षा के सुंदर स्तन एकदम सख्त होकर मेरे हाथों में कैद हो गए थे.
मैं उसके दोनों रसभरे स्तनों को दबाते हुए चूम रहा था.
वह मुझे बांहों में भरकर चूम रही थी.
चूमने के बाद हमने एक दूसरे को देखा.
वह सुंदरता की सभी सीमाओं को पार कर चुकी थी
उसने अपने हाथ से अपना एक स्तन पकड़ा और मेरे होंठों पर रख दिया.
मैं लाल रंग से रंगे निप्पल को मुँह में लेकर स्तनपान करने लगा और दूसरे स्तन को हाथ से दबाने लगा.
वर्षा वासना के उच्चतम शिखर पर पहुंच रही थी और मेरे केशों को पकड़ कर मुझे स्तनपान करवा रही थी.
हम दोनों प्रेम के समुद्र में कामक्रीड़ा कर रहे थे.
स्तनपान के बाद वर्षा ने मुझे पुनः अपनी बांहों में भर लिया और वह नीचे को सरक आई.
उसने अपने हाथों से मेरे लिंग को पकड़ा और लिंग के अग्रभाग को नीचे कर लाल-गुलाबी रंग के लिंगमुंड को प्रेम से चूमा.
उसके चूमने से लिंग पूर्ण उर्ध्व स्थिति में आ गया.
उसने लिंग को प्रेम से देखा और लगातार चूमने लगी.
लिंग और लिंग के नीचे लटक रहे मेरे अंडकोशों को जीभ से चाटने के बाद मुँह में भर कर चूसा.
इसके बाद वह लिंग को जिह्वा (जीभ) से चाटने लगी.
पूरे लिंग और लिंग के इर्द-गिर्द उगे हुए बालों को प्रेम में भरकर चाटती हुई वह मुझे देख रही थी, जिससे यह पल और भी सुंदर और अद्भुत हो रहा था.
उसने कुछ देर तक लिंग को चूसना छोड़ा और मेरी आंखों में अपनी आंखें डालकर मुझसे नयन संभोग किया.
तदुपरांत वर्षा ने लिंग को पुनः हाथ में पकड़ा और मुँह के पास ले आई.
उसने अपने मुख को खोलकर मुझे देखते हुए लिंग को मुख में ले लिया और अन्दर बाहर करने लगी.
मेरे लिंग का आकार कुछ अधिक बड़ा होने के कारण वर्षा आधे लिंग को चूसती हुई कुछ और ज्यादा कामुक लगने लगी थी.
उसकी आंखें लगातार मुझे ही देख रही थीं और उसकी नशीली नजरों से मैं फुंका जा रहा था.
उसके माथे की बिंदी अद्भुत लग रही थी. दोनों झुमके हिल रहे थे और वर्षा मेरे लिंग को अपने प्रेमरस में भरकर चूस रही थी.
यह पल अपने आप में प्रेम से भरा हुआ अति कामुक दृश्य था.
मेरे लिंग को काफी देर तक चूसने के बाद वह प्यासी आंखों से मुझे देखने लगी.
मैंने वर्षा को प्रेम से उठाया और अपनी बांहों में भर लिया.
अब मैंने अपनी स्थिति बदली और उसकी योनि के पास आ गया.
मैंने वर्षा की सुंदर योनि को निहारा और योनि द्वार को चूमा.
योनि के होंठों को अपने होंठों से मिलाते हुए प्रेम से चूमने लगा.
अपनी योनि पर मेरे होंठों का संवेदनशील स्पर्श पाकर वर्षा की कामुकता बढ़ने लगी.
मैंने उसकी योनि के द्वार पर अपनी जिह्वा लगा दी और योनि के द्वार को जीभ से भेद कर चाटने लगा.
योनि के अन्दर जिह्वा का आवागमन कुछ गतिमान होने लगा.
इससे वर्षा की योनि से मधुर कामरस स्खलित होने लगा और वह विकल होकर मेरे केश पकड़ कर मुझे योनि रस का आनन्द देने लगी.
उसके कंठ से आह आह की ध्वनि मेरे जोश में निरंतर बढ़ोत्तरी कर रही थी.
मैं प्रेम में मग्न होकर वर्षा की योनि से प्रेम कर रहा था और वर्षा विकल होकर मेरी जिह्वा का आनन्द ले रही थी.
अब हम दोनों का प्रेम अपनी वासना के सर्वोच्चतम स्तर पर था.
योनिरस का आनन्द लेने के बाद मैंने नग्न वर्षा को गोद में उठाया और उसके तन को चूमते हुए उसे शैय्या पर ले गया.
शैय्या पर लेटते ही वर्षा अपने सुंदर तन को मुझसे छिपाने लगी.
मैं वर्षा की आंखों के भाव को देखते हुए शैय्या पर आ गया और उसके ऊपर आकर प्रेम से उसे निहारने लगा.
उसके हाथों को स्तनों के ऊपर से हटाकर अपने हाथों से मिला लिया.
इस समय तक मेरा लिंग वर्षा के योनि द्वार के पास पूर्ण उर्ध्व स्थिति में उत्तेजित होते हुए किसी कुद्र नाग की तरह फनफना रहा था.
मैंने वर्षा के हाथों को अपने हाथों से मिलाया और उसके ऊपर आकर अपने उर्ध्व लिंग को वर्षा की योनि में घुसा दिया.
योनि में उर्ध्व लिंग के घुसते ही वर्षा विकल होकर हाथ-पैर छुड़ाने का प्रयास करने लगी.
हम दोनों प्रेम में मग्न होकर संभोग करते रहे और प्रातः काल की इस बेला में हम दोनों ने संभोग के पुनः तीन चक्र पूर्ण किए.
सुहागरात में कुछ सात बार संभोग करना हम दोनों के जीवन में एक विशेष स्थान बना कर हमारी स्मृतियों में संरक्षित हो चुके थे.
यह पति पत्नी के अंतरंग पलों का विवेचन है, तो इसमें किसी भी तरह की असत्यता का स्थान ही नहीं है.
आपको मेरी यह वर्जिन ब्राइड Xxx कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
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