हॉट Xxx गर्ल कहानी में मैं अपने दोस्त के दोस्त की शादी में गया. वहां एक गजब की माल लड़की मेरे सामने आई. लेकिन वो चालू सी लग रही थी. वो मेरे लंड के नीचे कैसे आई?
नमस्कार दोस्तो, मैं बैडमैन फिर से एक बार अपनी सच्ची घटना लेकर हाज़िर हूँ.
मैं अपनी आपबीती हॉट Xxx गर्ल कहानी सुनाने के लिए इतना उत्सुक था कि दो दिन भी चैन से नहीं बैठ सका.
ये इत्तेफाक दिसंबर 2023 के दूसरे सप्ताह का है.
मैं और मेरे एक मित्र उसके कॉलेज के दोस्त की शादी के रिसेप्शन में शहडोल गए हुए थे.
शहडोल मध्य प्रदेश का संभाग जिला है.
जिस होटल में रिसेप्शन था, उसी होटल में लगभग एक साल पहले मेरे स्कूल के दोस्त की बहन की भी शादी हुई थी तो मैं उस होटल से वाकिफ था.
मुझे किसी से ज्यादा कोई मतलब नहीं था क्योंकि न मैं किसी को जानता था और न दूल्हा-दुल्हन से कोई मतलब था.
अपन तो बस एंजॉय करने के नाम से गए थे.
लेकिन किंतु परंतु भैया … सामने वह आती है दिल की धड़कन मुँह में, ज़ुबान और सांसें रुक जाती हैं … कुछ यही हालत थी मेरी … दुल्हन को देखकर.
मैं दुल्हन की खूबसूरती बयान तो नहीं करूँगा, लेकिन इतना कहना चाहूँगा कि दिल ने ये कहा था मन से.
‘मुझे बाहर निकाल तन से, रख दे दुल्हन के कदम पे … और कह दे तू मेरा सनम है!’
मतलब भाइयो … मन तो किया अपना दिल निकाल कर उसके सामने रखकर बोल दूँ कि दे दो तलाक और चलो मेरे साथ.
पर मैंने अपना होश संभाला और दिल को ‘ऑल इज़ वेल.’ बोला और खाने की तरफ रुख किया.
जैसे ही खाने की स्टॉल की तरफ पहुंचा, मेरे कदम फिर से ठहर गए.
कारण था एक कमसिन जवानी सामने आ गई थी.
साढ़े पांच फुट की … स्लिम बॉडी, सांवला कलर, 30 के बूब्स, 32 की गांड.
एक झटके में मेरी नज़र ने उसके पूरे बदन को भाँप और नाप लिया था.
मेरे लंड से अचानक आवाज़ आई कि बेटा … ये है असल माल, मिल जाए तो मज़ा आ जाए.
तभी उसके साथ चार लड़के आए और उसे घेर कर सभी मसाला डोसा का मज़ा लेने लगे.
ऐसा लगा जैसे आज मेरे शेर को बिल्ली मारने का मौका तो नहीं मिलने वाला.
जैसे-तैसे उसे ताड़ते हुए मैंने खाना खत्म किया.
चूंकि ठंड का मौसम था, तो जिसके साथ मैं गया था, उसके साथ जाकर एक कॉफी पीकर पान खाते हुए निकलने को हुए.
तभी मेरा प्रेशर बन गया.
अब अगर ऐसे ही निकल जाता, तो रास्ते में दिक्कत हो जाती.
सो मैंने दूल्हे से ही बोला.
किस्मत से उसने उसी लड़की को आवाज़ दी- इन्हें मेरे वाले रूम में ले जाओ … थोड़ा इमरजेंसी है.
मैं जाते-जाते उसके बारे में जानना चाहा, तो पता चला कि वह भोपाल में पढ़ती है.
उसका नाम दिव्या था और वह यहां उसकी सहेली के भाई की शादी में आई थी.
दिव्या देखने में 23 साल की एक छरहरी काया वाली मस्त लौंडिया थी.
मेरा उस पर दिल आ गया था.
वह खुद भी कुछ इस तरह की हरकतें कर रही थी … मतलब साली चार लड़कों के साथ घूम रही थी.
इससे मुझको शंका हुई कि दिव्या ज़रूर थोड़ी चालू है.
उधर दूल्हा ने भी किसी लड़के की बजाय इसको क्यों बुलाया?
इसी उधेड़बुन में हम लोग कमरे में पहुंच गए.
मैं दिव्या से बोला- तुम पांच मिनट यहीं रुको … मैं फ्रेश होकर आता हूँ. मुझे ज़्यादा टाइम नहीं लगेगा.
यह बोलकर मैंने शर्ट-पैंट उतार कर टॉवेल लपेटा और उसको देखते हुए बाथरूम का दरवाज़ा बंद करने का नाटक करते हुए उड़का दिया.
जब मैं बाथरूम में जा रहा था तो मैंने दरवाजे की झिरी में से देखा कि उसने मेरी शर्ट को सहलाते हुए उठाया.
मुझे समझ में आ गया कि इसके साथ कुछ मामला बन सकता है.
मैं जल्दी जल्दी फ्रेश हुआ और जानबूझ कर अपना टॉवेल ढीला बांधा ताकि बाहर आते ही अपने आप खुल जाए.
जैसे ही बाहर निकला, तो टॉवेल गिर गया.
उधर देखा तो वह खुद अपनी साड़ी उतार कर ब्रा-पैंटी में टॉवेल लपेटी खड़ी है
मैंने आश्चर्य से बोला- सॉरी … मुझे नहीं मालूम था.
यह बोलते हुए मैंने आंखें झुका लीं.
दिव्या बोली- मैं भी पांच मिनट में आती हूँ.
यह बोलती हुई वह मेरे लंड को घूरने लगी.
मेरा लंड आधा खड़ा था तो वह मेरे लंड को अपने हाथ से छूती हुई मेरे बाजू से निकल कर बाथरूम में अन्दर जाने लगी.
यहां मेरा लंड उसके छूते ही अपनी पूरी औकात में आ गया था.
बेगानी शादी में लन्ड हुआ दीवाना
मैं उसे देखने लगा था तो वह कंटीली मुस्कान से मुझे देखने लगी थी.
अब मैंने रुकना उचित नहीं समझा और दिव्या को पीछे से पकड़ कर अपने आगोश में ले लिया.
मैंने उसके कान की लौ को दांत से काट लिया.
फिर दिव्या के दोनों बूब्स को दबाकर रगड़ दिया और उसको छोड़ दिया.
वह घूमकर मेरे सीने से लग गई और मेरी पीठ में नाखून गड़ाकर मुझे किस करने लगी.
अजीब सी बड़बड़ाहट निकल रही थी उसके मुँह से- आह मैं बहुत गर्म हो गई हूँ … साले मेरे दोस्त भी आए हैं … वे सब फट्टू हैं मादरचोद … मैं एक घंटे से उनको लाइन दे रही हूँ … कोई भोसड़ी वाला समझ ही नहीं रहा है. तुम मेरी आग बुझाओगे या नहीं?
इतना बोलती हुई वह अपने घुटनों के बल नीचे बैठ गई और मेरे लंड को सहलाने लगी.
अब इस ठंड के मौसम में कोई लड़की नंगी होने के लिए उतावली हो, तो कोई कैसे रुक सकता है
मैंने दिव्या का सर पकड़ कर लंड उसके मुँह में डाल दिया और घपाघप उसके मुँह की चुदाई करने लगा.
इतने में मेरे दोस्त का फोन आया- कितना टाइम लगेगा? बहुत देर हो रही है.
मैंने उसको दस मिनट बोलकर फोन रख दिया.
अब मैं दिव्या के मुँह की चुदाई करते हुए उसके बूब्स मसलने लगा.
दिव्या भी किसी मंजी हुई रांड की तरह मेरा लंड चूस रही थी.
वह पूरा लौड़ा गले के अन्दर लेती और होल्ड करके निकालती.
दो तीन मिनट तक ऐसा करने पर मेरा माल निकलने को हो गया.
अब मैंने अपना लंड पूरा उसके गले में डाल दिया और वीर्य की एक-एक बूंद उसके गले में उतार दी.
दिव्या ने वीर्य गटक लिया और उसने मेरे लंड को अच्छे से चाटते हुए पूरा साफ करके बाहर निकाला.
वह वासना से मुझे देखती हुई बिस्तर पर पेट के बल लेट गई.
मैंने उसके पास जाकर उसकी ब्रा स्ट्रिप खोल दी.
ब्रा खुलते ही वह तुरंत पलट गई और अपने दूध दिखाने लगी.
मुझे आगे बढ़ने से मना कर रही थी.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो वह बोली- लंड चूसने में बड़ा मज़ा आता है … लेकिन मैं अब तक उससे आगे नहीं बढ़ी हूँ!
ज्यादा पूछने पर पता चला कि उसके कॉलेज में उसके दोस्तों के अलावा (जो शादी में आए हुए थे) शायद ही कोई बचा होगा, जिसके लंड का स्वाद इसने ना चखा हो.
तभी इतने गज़ब ढंग से चूस रही थी.
दूल्हे के बारे में भी बोली कि स्टेज में आने के लिए जब वह तैयार हो रहा था, तभी वह उसके रूम में गई थी.
वह अकेले अंडरवियर पहन कर खड़ा था, तो जाकर उसका भी लंड चूसकर मज़ा लिया है.
मैं समझ गया कि तभी दूल्हा इतना स्याना बन रहा था.
मैं उसे चोदने के लिए बोला,
तो वह मना करने लगी- मैंने कभी किसी से अपनी चुत नहीं चुदवाई है … मैं अभी भी कुंवारी हूँ. चुदाई तो मैं उसी के साथ करूंगी जिसके साथ शादी करूंगी.
मैं बोला- ठीक है … एक बार और लंड चूसकर झड़वा दे लेकिन इस बार 69 पोजीशन में!
वह मान गई.
मैंने धीरे से उसकी पैंटी में हाथ डालकर चूत को छुआ.
वह एकदम गीली पड़ी थी.
साली चुदने को रेडी तो थी लेकिन मुँह से ना कह रही थी.
मैंने उसकी पैंटी उतार कर उसकी टांगों को फैलाकर चूत में जीभ से चाटा.
वह चिहुंक उठी और बोली- आप 69 करने वाले थे!
तब तक तो मैंने उसकी चुत को क्रीम बिस्किट की तरह मुँह में भरकर चूसना शुरू कर दिया था.
ऐसा करने से दिव्या तड़पने लगी और मेरा लंड चूसने के लिए मचलने लगी.
मैंने तुरंत उसे अपने ऊपर लिटाया और 69 पोजीशन में ले आया.
अब दिव्या ने मेरे मुँह में अपनी अनचुदी चूत रखकर मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया.
मैं नहीं चाहता था कि उसकी चूत झड़ने से पहले मैं फिर से उसके मुँह में झड़ जाऊं.
मैंने उसकी चूत को चूसना जारी रखा.
पूरी जीभ को उसकी चुत में डालने की कोशिश करता और उसका भग्नासा अंगूठे से मसलता जाता, उसके क्लिट को मसलता, जीभ से चूसता हुआ मैं मिडिल फिंगर को उसकी चूत में अन्दर तक डाल रहा था और जोर-जोर से फिंगरिंग कर रहा था.
नतीजा ये था कि दिव्या अपने आपे से बाहर हो गई और मेरा लंड ठीक से चूस नहीं पा रही थी.
मैं उसकी चुत को एक पल के लिए भी छोड़ने की फिराक में नहीं था.
दिव्या की चूत मुझे रसमलाई लग रही थी.
दिव्या सिर्फ लंड को चूसने की कोशिश कर पा रही थी लेकिन चूत की खलबली उसे ऐसा करने से रोक रही थी.
आखिरकार मेरे चूत चूसने और उंगली करने से उसकी चूत एक बार झड़ गई और वह तड़पने लगी.
दिव्या की चूत का पूरा पानी मैंने चाट कर साफ कर दिया.
अब मैं उसकी चुत में दो उंगलियां डालने की कोशिश करने लगा लेकिन बिना चुदी चूत में दो उंगली का जाना थोड़ा मुश्किल हो रहा था.
मैंने अपने अंगूठे को चूत में अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.
इससे उसे संभलने का मौका नहीं मिला और वह अपनी कमर हिलाकर मज़ा लेने लगी.
मौके का सही फायदा उठाकर मैंने उसे बिस्तर में चित लिटाया और उसकी चूत के ऊपर लंड को रगड़ने लगा.
चूत के भग्नासे में लौड़े की रगड़ लगने से दिव्या तड़पने लगी और लंड को अन्दर डालने के लिए बोलने लगी.
तभी मैंने उससे पूछा- तुम चुदने के लिए मना कर रही थी?
उस हॉट Xxx गर्ल ने कहा- वह सब मां चुदाने गया … तू लंड अन्दर डाल दे. इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया, जितना तुम्हारे साथ आ रहा है … प्लीज़ अपना लंड अन्दर डाल दो … अब बर्दाश्त करने की हिम्मत नहीं है.
मैंने पास में पड़ी पिलो को उसे देकर बोला- इसे अपने मुँह में दबा लो … पहली बार में दर्द होगा चिल्लाना मत … नहीं तो अगल-बगल वाले भी चोदने आ जाएंगे.
उसने मुँह में तकिया लगाया.
मैं उसे बिस्तर के कोने में लाकर दोनों पैरों को मोड़कर अपने लंड को चूत में सैट करके थोड़ा दबाव दिया.
लंड के टोपे को चुत के होल में सैट किया और हल्का सा झटका लगा दिया.
लंड थोड़ा अन्दर गया और उसकी आंखों में आंसू भर गए.
उसके मुँह से हल्की सी चीख निकली.
मुझे समझ में आ गया कि मेरे शेर ने गुफा में प्रवेश करने के लिए अपना रास्ता बना लिया है.
फिर मैंने दिव्या के मुँह से तकिया हटाया और प्यार से उसे किस किया.
उसके दूध चूसने लगा.
एक मिनट तक उसके दूध चूसने के बाद मैंने उससे पूछा- कैसा लग रहा है?
दिव्या बोली- दर्द हो रहा है … लेकिन अच्छा भी लग रहा है!
यह कह कर वह मुस्कुरा दी.
मैंने भी मुस्कुराते हुए अपने लंड पर कसाव बनाया.
उसके होंठों को लिपलॉक किया और पूरी ताकत से झटका मारकर एक बार में समूचा लंड उसकी चूत में पेल दिया.
मेरे लंड को ऐसा अहसास हुआ जैसे किसी दीवार में जाकर टकरा गया हो.
दिव्या भी इस झटके से इतनी जोर से चीखी कि होंठों की ग्रिप हल्की सी छूट सी गई.
मगर मैंने तुरंत दोबारा से होंठों पर होंठ जमा दिए.
तब भी उसकी आवाज से ऐसा लगा मानो उसकी चीख मेरे मुँह से होते हुए वापस बाहर निकल जाएगी.
उसकी आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे और चूत खू.न से भर गई थी.
लगभग दो मिनट तक मैं उसे इसी तरह पकड़ कर उसके ऊपर लेटा रहा था.
उसकी गूँ-गूँ की आवाज़ जब कुछ कम हुई, तो मैंने उसके एक हाथ को छोड़ दिया और उसके दूध दबाने लगा … निप्पल मसलने लगा.
इससे दिव्या को थोड़ा आराम मिला.
तभी मेरा फोन बजने लगा.
मैंने उसके मुँह को छोड़ा, तो लगा कि यह चिल्लाएगी.
लेकिन उसने दर्द बर्दाश्त कर लिया था.
मैंने कॉल उठाया तो मेरा मित्र पूछने लगा- कहां है बे इतनी देर से? क्या टॉयलेट में ही बैठा है या कहीं और लग गया है?
मैंने लूज मोशन वाला बहाना बनाते हुए कह दिया.
मैं बोला- यार कुछ गड़बड़ खा लिया है शायद अभी दस मिनट और लगेगा.
मेरे फोन रखते ही दिव्या का फोन बजा. उससे भी वही सवाल और फिर उसने भी वही बहाना बना दिया.
उसकी बात से मुझे लगा कि शायद ये दर्द भूल गई.
तो मैंने उसे फिर लिप किस किया और लंड को अन्दर-बाहर करने लगा.
उसके चेहरे पर फिर से दर्द के भाव आने लगे थे लेकिन एक मिनट बाद वह अपनी गांड उठाकर सहभागिता दिखाने लगी और चुदाई का आनन्द लेने लगी.
हम दोनों को चुदाई का परमसुख मिल रहा था.
कुछ मिनट बाद मुझे लगा कि मैं छूटने वाला हूँ.
मैंने लंड निकाल कर उससे घोड़ी बनने को कहा.
लंड निकलते ही उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया.
चुत से पानी के साथ ब्ल.ड भी बाहर आने लगा.
मुझे लगा कहीं चादर गंदी हुई तो लेने के देने पड़ जाएंगे.
मैंने झट से पास में पड़ी नैपकिन टॉवेल को उसके नीचे लगा दिया.
फिर उसे घोड़ी बनाकर पीछे से चुदाई करने लगा.
उसकी गांड अपनी पूरी गोलाई लिए हुए थी.
गांड को पकड़ कर थप्पड़ मारते हुए चुदाई करने का मज़ा अलग ही मिल रहा था.
बीच-बीच में कुतिया के जैसे पकड़ कर उसके दूध मसलते हुए मैं उसकी चुदाई कर रहा था.
इससे उसे भी अलग ही लेबल का आनन्द मिल रहा था.
हमें चुदाई करते लगभग दस मिनट हो चुके थे.
अब तक वह एक बार और झड़ गई थी जिससे लंड और मज़े से अन्दर-बाहर होने लगा और चुदाई का मज़ा दोनों को मिलने लगा.
हालांकि मैं हमेशा अपने साथ एक कंडोम ज़रूर रखता हूँ.
इसलिए जब मुझे लगा कि मैं जल्दी झड़ जाऊंगा, तो मैंने अपनी पैंट खींची और उसमें से पर्स निकाल कर उसमें से डॉटेड कंडोम निकाल कर मुँह से रैपर फाड़ने लगा.
वह देखने लगी.
मैंने जल्दी से कंडोम निकाला और तुरंत लंड निकाल कर उस पर लगा लिया.
अब मैं बिंदास हो गया था तो फिर से उसकी घोड़ी स्टाइल में चुदाई करने लगा.
कंडोम डॉटेड था, तो उसे भी घर्षण में मज़ा आने लगा.
फिर एक मिनट बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए.
मैंने कंडोम लगा लिया था, तो बिना टेंशन मैं चूत के अन्दर झड़ने का मज़ा लेने लगा था.
इस तरह झड़ना उसे भी बड़ी संतुष्टि प्रदान कर गया.
लंड अन्दर ही डाले हुए मैं उसके ऊपर लेट गया.
कुछ मिनट बाद हम दोनों उठे, बाथरूम में जाकर दोनों ने अपने आप को साफ किया.
दिव्या फिर से एक बार मेरे लंड को चूसने लगी.
पांच मिनट तक लंड चूसने के बाद हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और रूम से बाहर आ गए.
दिव्या लंगड़ा कर चल रही थी, पर पूरी कोशिश कर रही थी कि किसी को शक न हो.
उसके दोस्त उसे ढूँढते हुए ऊपर आ गए थे. वे उसे मेरी बांहों में देखकर थोड़ा असहज से हुए.
मैंने बोला- थोड़ा ध्यान रखा करो अपने साथ वालों का … देखो ये रूम में गिर गई है. वह तो मेरे (लंड के) ऊपर गिरी थी … तो थोड़ी कमर में ही चोट आई है, वर्ना आज कुछ ज्यादा चोट लग जाती. अब इसे कमरे में ले जाकर दर्द की गोली देकर सुला देना.
वे सब लोग उसे लेकर चले गए.
फिर मैंने नीचे जाकर गर्म-गर्म कॉफी पी और एक पान का आनन्द लिया और ईक सिगरेट मुँह में दबा कर अपने मित्र के साथ वापस घर के लिए चल दिया.
बस इतना लफड़ा हुआ था कि जल्दबाज़ी में न मैं उससे नंबर ले पाया, न उसने मुझसे मांगा.
बस उसकी चुत चुदाई की मीठी यादों को समेटे हुए मैं घर वापस आ गया और उसकी चुदाई की चाहत को पूरा करने के चक्कर में रात में बीवी की एक राउंड चुदाई बड़ी बेरहमी से कर डाली.
तो दोस्तो, मेरी ये हॉट Xxx गर्ल कहानी आपको कैसी लगी … मुझे ज़रूर बताएं.
bad.man.0088@gmail.com