ब्लैक डिक सेक्स कहानी में मेरी बीवी की वासना की आग नीग्रो का लंड देख कर भड़क जाती थी. मेरी शादी की दसवीं वर्षगाँठ आई तो मैंने उसे एक अनोखा उपहार देने का निश्चय किया.
मित्रो, आपका दोस्त मानस की तरफ से आप सभी को प्यार भरा नमस्कार!
सबसे पहले मेरी पिछली कहानी
प्यासी मुँहबोली बेटी संग पति पत्नी का सेक्स
को इतना पसंद करने के लिए आप सभी का दिल से धन्यवाद।
पिछली कहानी में मैंने सावी को सालगिरह पर दिया गया उपहार बताया था और हमारे नटखट पाठक उस रात की चुदाई की कहानी जानने को बेताब थे।
आप सबके सम्मान में हाजिर हूँ एक नई गरमागरम ब्लैक डिक सेक्स कहानी लेकर।
आप मुझे तो जानते ही हैं, फिर भी नए पाठकों के लिए दोबारा परिचय दे देता हूँ।
मेरा नाम मानस पाटिल, उम्र 48 साल।
पिछले 15 सालों से बीवी सविता (उम्र 44 साल) के साथ लंदन में रहता हूँ।
सविता जैसी सुंदर और सुशील औरत न रसोई में पीछे है, न चुदाई में।
शादी के कुछ ही साल बाद हमें बेटी हुई, जीवन मानो धन्य हो गया।
अब तक आप जान चुके हैं कि संभोग के मामले में हम पति-पत्नी कितने खुले विचारों वाले हैं।
शुरू-शुरू में शरमाने वाली सावी आज बेशर्म, आवारा रंडी बनकर मेरा साथ देती है।
परायी औरत के साथ सावी के सामने चुदाई, पत्नियों की अदला-बदली, ग्रुप सेक्स… ये सारे कारनामे हम कर चुके हैं।
देखते-देखते शादी को दस साल होने वाले थे।
बेटी भी बड़ी होकर बोर्डिंग चली गई थी।
इन दस सालों में मेरे पत्नी का प्यार और निष्ठा देख मैंने भी उसे एक अनोख़ा उपहार देने का विचार बना लिया.
पत्नी के मन की बात समझना वैसे मुश्किल होता है पर एक बात मैंने इन कुछ सालों में ज़रूर जान ली थी.
जब भी काले हट्टे-कट्टे नीग्रों के साथ चुदाई की फिल्में देखती या फिर कोई कहानी पढ़ती, उसकी वासना की आग ऐसे भड़क जाती कि मैं मुश्किल से उसे क़ाबू कर पाता.
उसके बाद होने वाली संभोग में उसकी मादकता ऐसे बढ़ जाती जैसे मेरे नहीं बल्कि उस नीग्रो से चुद रही हो.
इंटरनेट की दुनिया में गोते लगाने के बाद मुझे एक कंपनी का पता चला, जो पैसे लेकर औरतों को ख़ुश करने वाले मर्दों का इंतजाम करती है.
सावी को आश्चर्यचकित करने के हेतु मैंने चोरी-चोरी एक बड़ी मनचली योजना बनाई.
चूँकि वो कंपनी अमरीका से थी तो मैंने सावी को बिना बताये सालगिरह मनाने के लिए अमरीका जाने का फ़ैसला किया.
आख़िरकार वो दिन आ ही गया.
मैं और मेरी पत्नी अमरीका पहुंचे.
पंच तारा होटल को देख सावी बड़ी ख़ुश दिखाई दे रही थी.
यात्रा की थकान के चलते हमने बस जैसे तैसे खाना खाया और एक-दूसरे की बाहों में सो गए.
शाम के करीब 6 बजे मोबाइल के खन-खन से मेरी नींद खुली.
फ़ोन उसी काले नीग्रो का था जो मेरे बीवी का उपहार था.
सावी से छुपकर मैंने उसे आज रात 10 बजे आने का निर्देश दिया. और साथ में ये हिदायत भी दी कि उसे वो सब करना पड़ेगा जो हम कहेंगे.
उसने भी अपने काम की हामी देते हुए फ़ोन काटा और मैं निश्चिंत होकर मेरे बीवी के पास आया.
एक छोटे से गाउन में आधी नंगी सावी का गदराया बदन देख कर एक बार तो ऐसे लगा जैसे चढ़ जाऊ साली पर.
ख़ैर, मैंने उसे जगाया और झट से अपने उपहार के लिए तैयार रहने को कहा.
रात में होने वाले चुदाई के युद्ध के लिए मैंने एक ख़ास वस्त्र चुना था और वो था, एक झीनी नाइटी और उसका मनपसंदीदा ‘बट-प्लग’.
रात के 8 बजे तक तो हम होटल से बाहर टहलने में लगे रहे.
कमरें में आते ही मैं और सावी दारू और खाने पर टूट पड़े.
जान बूझकर मैं आज सावी को ज्यादा पिला रहा था, उसकी चूत और दुधारू स्तन मसल मसल कर मैंने उसे काफ़ी गरम कर दिया.
वो भी उतने ही जोश से मेरा लौड़ा सहला रही थी.
तभी कमरे का दरवाजा खटखटाया.
तुरंत मैंने घड़ी देखी, समय देख कर मेरी आँखें ख़ुशी से झूम उठी थी.
उत्तेजना और उत्सुकता से मैंने दरवाजा खोला.
7 फुट लंबा एक काला सांड मेरे ठीक सामने खड़ा था.
उसके भारी-भरकम शरीर को देख मैं समझ गया कि आज मेरी बीवी के हर एक छेद की क्या दुर्गति होने वाली है.
मैंने भी बड़े प्यार से उसे कमरें में आने का निवेदन किया.
जैसे ही हम कमरे में आये तो सावी की आँखों में हजारों सवाल उभर आये.
कमरें में अंजान आदमी को देख सावी सीने पर दुपट्टा लेते हुए पूछा- ये कौन है? यहाँ क्यों आया है?
उसकी तरफ देख मैं मंद मुस्कान से बोला- लो संभाल लो तुम्हारा उपहार!
आश्चर्य और अवाक् होकर सावी मुझे देखने लगी.
तो मैंने कहा- क्यों, कैसा लगा उपहार? पसंद आया या दूसरा भी मंगवा लूँ?
सैम (काले नीग्रो का नाम) को सोफ़े पर बैठने को बोलकर मैं सावी के पास पहुँचा.
आँखों में खुशी के आंसू लिए सावी खड़ी हुई और उसने कसकर मुझे गले लगाया.
सावी की ख़ुशी देख कर मैंने वाइन की बोतल खोली, सोफे पर आराम से बातें करते हुए हमने एक दूसरे की पसंद के बारे में बताया.
काले नीग्रो से चुदवाने की कामना से सावी की आँखें सैम का बदन ताड़ रही थी.
तभी मुझे सावी के लिए खरीदे वस्त्र की याद आयी.
सैम को घूरती सावी को मैं बोला- वाह मेरी जान, बड़ी मचल रही है तू आज, चल आज मेरे बैग में एक और उपहार है, उसे पहन कर आ जा!
सावी ने शर्माते हुए मेरे सीने पर मुक्का मारा और अपनी फूली हुई गांड मटकते हुए अंदर चली गयी.
यहाँ मैंने सैम को भी उसके कपड़े खोलने का आदेश दिया तो उसे अपना कच्छा छोड़ बाकी सारे वस्त्र निकाल फेंके.
सावी को कमरे से बाहर आते देख हम दोनों की आँखें खुली-की-खुली रह गयी.
37 साल की शादीशुदा गदरायी औरत को देख सैम के मुँह से लार टपकने लगी.
कमरे में बाहर आकर जैसे सावी ने आधे नंगे सैम का शरीर देखा तो वो कांप उठी.
पर अपनी अंतर्वासना की आग बुझाने के लिए वो तैयार थी.
इधर मैंने भी चुपके से इशारा करके सैम को अपना कच्छा निकालने को कहा.
सावी की तरफ देख उसने भी तुरंत अपना नंगा लौड़ा हवा में लहरा दिया.
काले लौड़े को आँखें फाड़-फाड़ के घूरते हुए सावी मेरे पास आकर सोफ़े पर बैठी तो मैं तुरंत अपना हाथ उसके भोसड़े पर ले गया.
इसके आगे की सारी बाते इंग्लिश में हुई पर आपको देसी चुदाई का आनंद मिले इस हेतु से हिंदी में अनुवादित कर रहा हूँ.
सैम की तरफ़ देख मैंने कहा- वाह, क्या मस्त लौड़ा है सावी? कुतिया, तेरा भोसड़ा तो अभी से टपकने लगा रंडी!
सैम के लौड़े ने उस पर ऐसा जादू किया कि मेरा लौड़ा सहलाते सहलाते वो उसे ही घूर रही थी.
मदहोश सावी की चूत मसलते मसलते मैंने हल्के से उसके नाइटी की डोर खोली और एक ही झटके में निकाल फेंका.
सावी ने भी तुरंत मेरा कच्छा खींचते हुए मुझे नंगा किया, आधे खड़े मेरे लौड़े को सहलाते हुए वो सैम को देखने लगी.
सावी के मन की बात जानकर मैंने सावी को सोफे पर बिठाया और सैम को उसके बगल में बैठने का इशारा किया.
छलांग लगाकर वो भी सावी के बग़ल में आ गया, मेरे बीवी की नंगे स्तन सहालते हुए वो उसकी गर्दन चाटने लगा.
सावी तो सैम का लौड़ा पकड़ने के लिए मरी जा रही थी, सैम के स्पर्श से सिसकते हुए उसने अपनी आँखें बंद की और झट से उसका लौड़ा दबोचा.
सावी की पीठ सहलाते वो बोला- क्या सुंदर औरत है आपकी बीवी सर, ऐसी औरत चोदने के लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ!
मौके का फ़ायदा उठाते हुए मैंने कहा- देख लो, फिर मैं जो भी कुछ कहूंगा, तुझे करना होगा!
सैम भी सावी की चुदाई करने के लिए मरा जा रहा था- जैसे आपकी आज्ञा सर!
बस इतना जवाब देते हुए उसने सावी को अपनी बाहों में भरा.
सैम का नंगा लंड सहलाते हुए सावी भी उसे चूमने लगी, एक दूसरे की लार चाट-चाट कर दोनों की वासना बढ़ने लगी.
धीरे धीरे कठोरता प्राप्त करते हुए सैम का लौड़ा अपने पूरे आकार में आ गया.
तभी अचानक वो खड़ा हुआ और ज़मीन पर बैठ गया.
सावी की जाँघें चूमते हुए उसने टाँगे खोली और सीधा अपना मुँह मेरे बीवी के फ़टे भोसड़े पर लगाया.
‘आअह्ह सैम मम्मम’ की आह भरते हुए सावी ने उसके बाल पकड़े और सैम का मुँह अंदर दबाया.
सामने बैठे बैठे दारु का स्वाद लेते मैंने सावी की चूँचियाँ चूसना चालू किया तो वो भी मेरा लौड़ा पकड़ कर हिलाने लगी.
अचानक अपनी दोनों टाँगे ऊपर उठाते हुए वो बोली- आअह भोसड़ी के, मेरी गांड क्या तेरा बाप चाटेगा रंडी के पिल्ले?
सावी की खुली गांड देख वो बोला- जो हुकुम मेरी रांड, अब देखो मैं आपकी गांड मेरे जीभ से चोदूँगा.
पराये मर्द के मुँह से रंडी सुनकर सावी भड़क गयी, उसके मुँह पर थूकते हुए वो बोली- रंडी होगी तेरी माँ भोसड़ी के, आज तो तुझे मेरे गांड का हलवा खिलाऊंगी मादरचोद!
मेरा लौड़ा सावी से छुड़वाकर मैं बोला- इसका लौड़ा क्या अब तेरी माँ आकर चूसेगी रंडी, चूस भोसड़ी की?
मेरे कहने पर सावी से सैम को खड़ा किया, सोफे पर उसे धकेलते हुए अपनी गांड से उसका मुँह गांड में फंसा लिया.
आजतक मेरे 7 इंची लौड़े से चुदने वाली मेरी बीवी, सैम के 9 इंची लौड़े को देख कर लार टपकाने लगी.
बाजारू धंधेवाली बिकाऊ रंडी जैसे वो गैर मर्द का लौड़ा चूसने लगी, जीभ बाहर निकाल आकर उसे सैम के अंडकोष को भी चाटना चालू किया.
सैम ने भी जीभ सावी की गांड में घुसा दी और दो उंगलियां उसकी चूत में घुसाकर जोर-जोर से रगड़ने लगा.
वासना की आग में जलती मेरी बीवी सावी ने भी अपनी कमर हिलाना चालू किया, जिस कारण उसकी चूत और गांड एकसाथ जीभ से घिसने लगे.
कुछ ही देर में सैम का लौड़ा और सावी की चूत गीले हो चुके थे, चूत से निकलता कामरस सैम भूखे भेड़िये की तरह चाट रहा था.
सावी को दूर धकेलते हुए सैम बोला- आजा मेरी रांड, अब दिखाता हूँ तुझे ज़न्नत!
तभी मैं बोला- सब कुछ सोफे पर ही करेगा क्या भोसड़ी के, चल अंदर आज देखता हूँ तेरी ताकत!
सैम अब सावी को अपनी गोदी में उठाकर बेड़रूम की तरफ़ बढ़ने लगा.
सावी के चूचे उसके सीने पर पिस चुके थे.
सावी को नरम गद्दे पर फेंक पर उसने बाल पकड़ कर सावी का मुँह लौड़े पर दबाया.
कुतिया की तरह झुकी सावी को नीग्रो का लौड़ा चूसते देख मैं उसके पास गया और चूतड़ फ़ैलाते उसका भोसड़ा चाटने लगा.
मेरे चाटने से सावी ‘आअह्ह उफ्फ हम्म्म्म’ जैसी हुंकार भरने लगी, ख़ुद अपनी गांड मेरे चेहरे पर दबाने लगी.
सैम मेरे सामने मेरे बीवी का मुँह किसी दो कौड़ी की रंडी जैसे चोद रहा था, ‘मादरचोद, रंडी’ जैसी गालियां देने में उसे मज़ा आ रहा था.
मेरे थूक से अपना भोसड़ा चमकाकर सावी खुद बिस्तर पर लेट गयी.
उसका इशारा समझकर सैम भी बिस्तर पर आ गया.
सैम को चुदाई के लिए तैयार देख सावी ने मुझसे कहा- एक बात कहूँगी तो गुस्सा तो नहीं करोगे ना?”
उसके दुधारू स्तन मसलते हुए मैं बोला- बोलो मेरी जान, क्या आज्ञा है आज मेरे लिए?”
दोनों हाथों में मेरा चेहरा पकड़ कर चूमते हुए वो बोली- अपने हाथों से पकड़ कर घुसा दो ना इसका लौड़ा तुम्हारे बीवी के भोसड़े में!
मुस्कुराकर मैंने कहा- बस इतनी सी बात? तू कहे तो इसका लौड़ा चूस के घुसा दूँ?
मेरे सुझाव पर ग़ुस्से से आँखें बड़ी करके वो बोली- ख़बरदार इस मादरचोद का लौड़ा चूसा तो, बस अपने हाथ से घुसा दो!
भले वो मेरे सामने ग़ैरमर्द से चुदने जा रही थी पर उसे कतई मंजूर नहीं था कि उसके पति का मान किसी ने सामने कम हो.
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