कामा बाबा Xxx कहानी में एक अमीर आदमी अपने बेटे के लिए लड़की देखने गया तो लड़की की बड़ी उम्र के कारण उसने मना कर दिया. लड़की का बाप हरामी था.
दोस्तो, यह एक काल्पनिक कामा बाबा Xxx कहानी है.
चुदाई का मजा लेने के लिए जरूर पढ़ें और मजा लें.
एक गांव में सुखवीर ठाकुर नामक व्यक्ति रहता था.
उसकी उम्र 45 साल की थी.
उसकी बीवी एक दुर्घटना में मर चुकी थी इसलिए उसके रिश्तेदार उसे दूसरी शादी करने की सलाह दे रहे थे.
उसने अपना इकलौता बेटा दलवीर 18 साल का था वह उसी को देख कर शादी नहीं कर रहा था.
कुछ ने सलाह दी कि अच्छा तो तुम अपने लड़के के लिए दुल्हन देख लो, घर में एक महिला हो जाएगी तो खाना आदि की सहूलियत हो जाएगी. ज्यादा से ज्यादा कुछ पैसे ही तो खर्च करने पड़ेंगे.
सुखवीर को यह विचार पसंद आ गया.
अब वह बहू की तलाश करने लगा और कुछ दिन बाद वह अपने लड़के दलवीर के लिए लड़की देखने गया.
सुखवीर के लड़के की उम्र 18 साल की थी जबकि जिस लड़की फूलवती के लिए वह देखने गया था, वह उसके लड़के से चार साल बड़ी थी.
इसलिए सुखवीर ने फूलवती से अपने लड़के की शादी करने से इन्कार कर दिया.
लड़की का बाप चुन्नीलाल बहुत हरामी था, उसने सोचा कि सुखवीर एक रईस आदमी है और यदि उसकी लड़की फूलवती की शादी उसके लड़के से हो जाती है, तो मेरी बेटी सारी जिंदगी ऐश से रहेगी.
यह शादी के एवज में पैसा भी खर्च करेगा, इस बात की जानकारी चुन्नीलाल को पहले ही थी.
वह सोच रहा था कि उसकी लड़की फूलवती का ससुर भी यदि कुछ अपना मन भर लेता है तो मेरी लड़की का क्या घिस जाएगा.
यह सब सोच कर चुन्नीलाल ने कहा- ठाकुर साब, आप किसी ऐसी लड़की को अपनी बहू बनाकर लाइए, जो आपका भी काम कर सके … समझ रहे हैं आप!
यह कहते हुए चुन्नीलाल ने सुखवीर को एक इशारा दिया.
सुखवीर ने इशारा समझ लिया और चुन्नीलाल को टटोलते हुए कहा- हां, कोई भी लड़की आएगी तो काम तो करेगी ही … मगर इससे होगा क्या?
चुन्नीलाल ने अब खुलते हुए कहा- आपको चुदाई करने का मन नहीं करता है क्या?
चुदाई का सुनकर सुखवीर का मन उत्तेजित हो गया.
लेकिन वह मन मारकर बोला- पत्नी के मरने के बाद दूसरी शादी ही नहीं की, तो चुदाई किसके साथ करूँ?
चुन्नीलाल उसके कान में फुसफुसा कर बोला- अपनी बहू को नीचे ले लेना न!
सुखवीर ने यह सुना तो उसके लंड में एक तरंग दौड़ गई और लंड टनटनाकर खड़ा हो गया.
वह अपने लौड़े को सहलाता हुआ बोला- कहीं बहू की भी चुदाई कोई करता है क्या?
चुन्नीलाल- आजकल लोग ऐसी बहू ही खोजते हैं जो ससुर के लंड से भी अपनी चुत की चुदाई कराए.
यह सुनते ही सुखवीर का मन बहू चोदने के लिए कुलाचें भरने लगा और लंड बेकाबू हो गया.
उसने कहा- आपकी नज़र में ऐसी लड़की हो तो बताइए!
गर्म लोहे पर हथौड़ा मारते हुए चुन्नीलाल कान में फुसफुसा कर बोला- मेरी बेटी फूलवती आपकी सब तरह से सेवा करेगी.
अब तो सुखवीर का लंड फनफना कर फुफकार मारने लगा.
वह बोला- मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है कि आप अपनी लड़की के साथ चुदाई की बात से नाराज़ नहीं होंगे?
चुन्नीलाल अपनी मूँछों पर ताव देता हुआ बोला- नहीं … नहीं ठाकुर साब ऐसी कोई बात नहीं है. एक काम कीजिए आप चाहें तो शादी के पहले ही मेरी बेटी के साथ सुख ले लीजिए, फिर तो विश्वास कीजिएगा!
यह सुनकर सुखवीर राज़ी हो गया.
फूलवती से एक सप्ताह तक सेवा करने के लिए चुन्नीलाल ने सुखवीर को अपने घर में ही रोक लिया.
चुन्नी लाल ने अपनी बीवी को अपनी योजना समझाते हुए बेटी को चुदाई के लिए तैयार करने को कहा.
उस शाम को दोनों ने दारू पी और उसके बाद खाना खाने बैठ गए.
खाना परोसने फूलवती आई तो वह झुक झुक कर अपने होने वाले ससुर सुखवीर को अपने दूध दिखाने लगी थी.
उसके मस्त रसीले दूध देख कर सुखवीर का लंड टनटन करने लगा था.
तभी चुन्नीलाल ने समझ लिया कि सुखवीर गर्म हो गया है तो वह बोला- आप सोने से पहले मालिश करवाते होंगे ठाकुर साब … मेरी बेटी आपकी अच्छे से मालिश कर देगी.
यह सुनकर सुखवीर ने तुरंत हां भरते हुए कहा कि यह तो बड़ी अच्छी बात कही है आपने.
बस खाने के बाद रात हुई तो फूलवती एक कटोरी में तेल लेकर सुखवीर की मालिश करने के लिए आ गई.
जब फूलवती कमरे में आई तो वह एक चुस्त ब्लाउज और घुटनों से ऊपर तक आने वाला लहंगा पहनी हुई थी.
सुखवीर को वह बड़ी कमसिन माल लग रही थी.
सुखवीर को फूलवती कमसिन होते हुए भी अपने लिए फिट आइटम लगी.
सुखवीर- क्या नाम है बेटी?
फूलवती मुस्करा कर बोली- मेरा नाम फूलवती है और मैं आपकी तेल मालिश करने आई हूँ.
सुखवीर को फूलवती अपने लिए चुदाई का माल नज़र आने लगी.
उसकी पतली कमर, संतरे साइज़ चूची, एकदम खूबसूरत चेहरा, जिसे देखकर कोई भी फिसल जाए.
सुखवीर अपना धोती-कुर्ता उतार कर बैठ गया और बोला- चलो शुरू हो जाओ आह … जल्दी से आ जाओ … मेरा लंड बेकाबू होकर फनफनाकर फुफकार मार रहा है.
सुखवीर ने खुल कर लंड शब्द का प्रयोग किया तो फूलवती उसके पैरों में मालिश करती हुई बोली- अब अपना अंडरवियर भी उतार दीजिए, जिससे आपके लंड की मालिश करके मैं उसका दर्द भी निकाल दूँ.
सुखवीर ने यह सुना तो वह चित लेटकर बोला- तुम ही मेरा अंडरवियर उतार दो … आखिर सेवा तन-मन से करने के लिए आई हो न!
फूलवती ने मुस्करा कर सुखवीर का अंडरवियर ढीला किया और उसे नीचे उतारती हुई अलग करके रख दिया.
सुखवीर का लंड एकदम से टनटना रहा था.
उस मूसल लंड को देखकर फूलवती डरती हुई बोली- बाप रे, यह तो घोड़े का लंड लग रहा है … और मेरी चूत तो छोटी सी है, अन्दर कैसे जाएगा?
सुखवीर मुस्कराकर बोला- सब चला जाएगा … लड़की को जितना मोटा और लम्बा लंड मिलता है, वह उतना ही ज्यादा खुश होती है. तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि ससुर का लंड घोड़े के लंड जैसा है. कोशिश करो … दनादन अन्दर बाहर करते हुए जाएगा!
यह सुनकर फूलवती ने सुखवीर का लंड पकड़ लिया और उसको अपने दोनों हाथों से पकड़ कर रगड़ रगड़ कर मालिश करने लगी.
सुखवीर मस्त हो गया.
एक कुंवारी कमसिन लौंडिया उसके लौड़े को पकड़ कर मालिश कर रही थी, तो मन बेकाबू होने लगा था.
उसके लंड में तो अब और दर्द होने लगा था.
सुखवीर ने कहा- आह फूलवती मेरे लंड का पूरा दर्द ऐसे नहीं जाएगा. इसकी मालिश तुम अपनी बुर से करोगी … तब ही इसका पूरा दर्द ठीक हो पाएगा.
यह सुनकर फूलवती ने अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिए.
सुखवीर ने नग्न हो रही फूलवती को रोका और उसे अपने पास बिठाया.
फिर वह उसका मुँह चूमते हुए बोला- तुमने मेरी अंडरवियर उतारी है … इसलिए मैं ही तुम्हारे सारे कपड़े उतारूंगा!
फूलवती राजी हो गई.
सुखवीर ने सबसे पहले फूलवती के मम्मों पर हाथ फेरा और उसके ब्लाउज़ के बटन खोलना शुरू कर दिए.
ब्लाउज उतारते उतारते सुखवीर ने कम से कम आठ दस बार फूलवती के दोनों दूध मसले, फिर ब्लाउज को उसके मम्मों पर हटा दिया.
अब फूलवती गुलाबी रंग की ब्रा में उसके सामने थी. सुखवीर ने फूलवती की ब्रा का हुक खोला और उसे भी उतार कर एक तरफ रख दिया.
अब फूलवती की दोनों चूचियां खुली हवा में कबूतरों की मानिंद फुदकने लगी थीं.
सुखवीर ने एक दूध को अपने हाथ से पकड़ा और उसे सहलाते हुए अपने मुँह में लेकर चूसने लगा, साथ ही वह अपने दूसरे हाथ से फूलवती की दूसरी चूची को मसलने लगा.
कुछ देर बाद फूलवती की आह आह निकलने लगी और सुखवीर की वासना बढ़ने लगी.
अब उसने फूलवती के लहंगे के नाड़े को ढीला करना शुरू कर दिया और नाड़ा खुलते ही उसका लहंगा जमीन पर गिर गया.
अब फूलवती सिर्फ़ पैंटी में रह गई थी.
सुखवीर होंठ, चूची, कमर को चूमते हुए एक हाथ से पैंटी के अन्दर उंगली करता हुआ उसकी नन्हीं सी चूत को सहलाने लगा.
जवान फूलवती पर भी धीरे-धीरे मस्ती छाने लगी और वह कामुक आवाज में सिसकारी भरने लगी ‘ओह … आह … ओह … आह … बहुत गुदगुदी हो रही है!’
उसकी मादक आवाजें सुनकर सुखवीर ने उसे चित लिटा दिया और उसकी पैंटी को भी उतार कर अलग कर दिया.
फूलवती एकदम से नंगी होकर चित पड़ी थी.
उसकी मादक कमसिन जवानी को अपनी वासना से तप्त आंखों से चोदता हुआ सुखवीर उस नमकीन लौंडिया की टांगों के बीच में आ गया और अपनी जीभ से फूलवती की सीलपैक बुर को चाटने लगा.
अपनी चुत पर एक मर्द की जीभ का अहसास पाते ही फूलवती सिहर उठी और वह कमर को उठाती हुई अपनी चुत चटवाने का सुख लेने लगी.
कुछ देर चुत चाटने के बाद सुखवीर से रहा न गया, तो वह अपनी एक उंगली भी फूलवती की बुर में घुसेड़ कर आगे-पीछे करने लगा.
अब फूलवती आनन्द से सिसकारी मारने लगी- आआ … ओह … ओह … काका … मेरी बुर के अन्दर खुजली और गुदगुदी हो रही है … आह!
सुखवीर- मज़ा आ रहा है न मेरी बुलबुल? अभी तो तुझे और मज़ा आएगा!
फूलवती- हां काका बहुत मज़ा आ रहा है … बस ऐसा लग रहा है कि कोई लंड डालकर मेरी बुर की खुजली मिटा दे आह … आह … सीईईई अंम्म!
यह सुनकर सुखवीर ने अपने लंड का सुपारा फूलवती की कुंवारी बुर के मुँह पर रख दिया और ऊपर-नीचे करता हुआ चुत को रगड़ने लगा.
फूलवती एकदम से उत्तेजित होकर बोली- काका, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है … आह जल्दी से मेरी बुर की खुजली मिटा दो न प्लीज़!
सुखवीर ने आव देखा न ताव और एक धक्का मार दिया … जिससे ‘फचाक’ की आवाज़ के साथ सुपारा सहित तीन इंच लंड बुर को फाड़ता हुआ अन्दर घुसता चला गया.
फूलवती लंड के हमले से एकदम से चिल्ला उठी और वह रोकर बोलने लगी- आ आहह काका … मर गई … आह जल्दी से लंड निकाल लो न … मुझे बहुत दर्द हो रहा है!
सुखवीर उसकी फ़रियाद को अनसुनी करता हुआ पिल पड़ा.
उसने फूलवती का मुँह बंद करके एक और ज़ोरदार धक्का मार दिया.
इस बार के धक्के से उसका आधा लंड बुर के अन्दर घुस गया.
फूलवती छटपटा उठी.
अपना मुँह बंद होने के कारण वह आवाज नहीं निकाल पा रही थी इसलिए घिघियाती हुई बोली- काका आह आपने तो लंड को बुर के अन्दर और घुसा दिया … ओह … आह … माई रे बचाओ मुझे, काका तो मार ही देंगे!
सुखवीर धीरे-धीरे धक्का देते हुए शेष लंड भी घुसाते हुए बोला- मेरी बहू, जब लंड निकाल दूंगा … तो चुदाई कैसे कराओगी? बेवकूफ़ मत बनो, चुपचाप मजा लो … अच्छा एक बात बताओ … बुर की खुजली और गुदगुदी मिटी कि नहीं?
फूलवती- खुजली और गुदगुदी मिट गई लेकिन दर्द हो रहा है काका … आप जल्दी से लंड बाहर निकालो!
यह सुनकर सुखवीर ने अपना लंड बाहर निकाल दिया. फूलवती राहत की सांस लेने लगी.
अब उसकी बुर को लंड का स्वाद लग चुका था.
कुछ देर तक सुखवीर ने वापस से अपनी होने वाली बहू फूलवती की बुर को जीभ से चाटा तो फूलवती की बुर के अन्दर वापस खुजली होने लगी और वह अपने होने वाले ससुर के मोटे लौड़े से दनादन चुदाई मांगने लगी.
उसकी खुजली और गुदगुदी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी तो वह गांड उठा कर चुत चुसवाने लगी थी.
फूलवती बोली- काका मेरी बुर के अन्दर फिर से काफी खुजली और गुदगुदी हो रही है … मिटा दो न प्लीज़!
सुखवीर अपनी मूँछों पर ताव देता हुआ बोला- खुजली और गुदगुदी तभी मिटेगी जब मेरा लंड अन्दर तक ठोकना शुरू करे!
फूलवती ने दोनों पैर फैला दिए और अपनी आधी फटी बुर को खुली हवा में आज़ादी की सांस दिलाती हुई बोली- आप जीते और मैं हारी काका … अब अपना घोड़ा लंड मेरी बुर में पेल दीजिए और दनादन दनादन चुदाई करके इसे ठोको न प्लीज़!
सुखवीर ने तड़पती हुई फूलवती को चुदाई की पोजीशन में लिया और अपना लंड उसकी अधफटी बुर के छेद पर रखकर एक ज़ोरदार धक्का दे मारा.
‘फचाक.’ की आवाज़ के साथ आधा लंड फूलवती की बुर में घुसता चला गया.
फूलवती वापस कराही लेकिन इस बार सुखवीर रुकने वाला नहीं था.
उसने धीरे-धीरे धक्का मारते हुए अपना पूरा लंड अन्दर तक ठोक दिया.
कुछ ही देर बाद अब फूलवती को भी मज़ा आने लगा और वह अपनी कमर हिलाती हुई अपने होने वाले ससुर सुखवीर के मोटे लंड से चुदने का आनन्द लेने लगी.
सुखवीर भी दनादन दनादन चुदाई करते हुए बोला- फूलवती रानी, मेरी बहुरानी तुम्हारा आदेश हो तो लंड बाहर निकाल दूँ … अब दर्द तो नहीं हो रहा है?
फूलवती- नहीं, मेरे होने वाले ससुर जी, अब तो खूब मज़ा आ रही है … आप दनादन दनादन चुदाई करके मेरी बुर को फाड़कर इसका भर्ता बना दीजिए न … आह काका आह … आह … बहुत मज़ा आ रहा है!
सुखवीर ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा और फूलवती की चुत से रस फूट पड़ा जिससे ‘फच फचाक … फचाक …’ की आवाज़ गूंजने लगी.
फूलवती और सुखवीर की चुदाई की आवाज़ सुनकर चुन्नीलाल और उसकी पत्नी काफी खुश हो गए और वे दोनों चैन की सांस लेने लगे कि उनकी बेटी चुदाई में पास हो गई.
उधर दोनों में घमासान चुदाई चलने लगी थी और तरह-तरह के आसनों में लेट कर फूलवती अपनी बुर की चुदाई करवाने लगी थी.
सुखवीर भी कभी फूलवती को खड़ी करके तो कभी घोड़ी बनाकर, कभी खुद चित लेटकर अपने लौड़े पर उसे कुदवा कर … तो पीठ के बल लेटाकर पीछे से चुदाई, कभी उसकी टांग उठाकर दनादन दनादन चुदाई करने लगा था.
सुखवीर ने करीब आधा घंटा तक अपनी होने वाली बहू फूलवती की खूब दनादन-दनादन चुदाई की और उसके बाद लंड से वीर्य की पिचकारियां फूलवती की बुर में गिराने लगा.
सुखवीर अपनी बहू की बुर को अपने वीर्य से भरता हुआ बोला- लो बहू, मेरा लंड का प्रसाद … इस बीज से मेरे जैसा लंडधारी लड़का पैदा होगा.
फूलवती भी टांग उठाकर ससुर की कमर पर लपेट कर लंड का वीर्य प्रसाद के रूप में ग्रहण करने लगी.
वह मुस्करा कर बोली- मुझे भी आपके लंड के प्रसाद से बच्चा चाहिए ससुर जी!
यह सुनकर सुखवीर खुश होकर फूलवती के मुँह, होंठ, चूची और बुर को चूमने लगा.
वह आशीर्वाद देता हुआ बोला- खुश रहो बेटी!
पूरी रात भर ससुर बहू की चुदाई का कार्यक्रम चलता रहा.
फूलवती ने कई बार अपने ससुर के लौड़े से टपके प्रसाद को ग्रहण किया और वह धन्य हो गई.
सात रोज़ तक सुखवीर ने चुन्नीलाल के घर में रहकर अपनी होने वाली बहू फूलवती की बुर को चोद चोद कर फैला दिया और बुर को भोसड़ा बना कर रख दिया.
अब तो उसका घोड़ा लंड चुत के छेद के मुँह पर रखकर एक ही धक्का में पूरा अन्दर तक घुसने लगा था.
सात दिन बाद सुखवीर अपने समधी चुन्नीलाल को पांच लाख का चेक देते हुए बोला- समधी चुन्नीलाल जी, आपकी लड़की ने तो मुझे खुश कर दिया है, इसलिए पांच लाख रुपये लीजिए और शादी-विवाह की तैयारी करें. सात दिन के अन्दर शादी-विवाह होना चाहिए क्योंकि उससे अधिक अब बहू की जुदाई बर्दाश्त नहीं होगी. मेरा लंड फुफकारकर मारने लगा तो फिर आपके घर पर डेरा डाल देंगे. समझ रहे हैं न, हम क्या कह रहे हैं? सात दिन में मेरा लंड तब तक आराम कर लेगा.
चुन्नीलाल भी चेक लेते हुए बोला- समधी जी, आप तो साक्षात भगवान निकले और मेरी गाय जैसी बेटी को अपनी बहू बना रहे हैं. हम चार दिन के भीतर शादी-विवाह कर देंगे!
नियत समय पर फूलवती और दलवीर की शादी-विवाह चार दिन के भीतर हो गई और फूलवती ससुराल आ गई.
सुहागरात के दिन सुखवीर का लंड बहू को देखकर फनफनाकर फुफकार मारने लगा.
सुहागरात को दलवीर अपनी पत्नी को चुदाई करके सो गया.
तब फूलवती रात में बगल के कमरे में जागे ससुर से चुदाई कराने आ गई और वीर्य ग्रहण करके सुखी हो गई.
सब लोग दूसरे दिन बधाई देकर चले गए.
अब तो दलवीर के काम पर जाने के बाद रोज़ चुदाई होने लगी.
नौ माह गर्भधारण के बाद फूलवती ने एक सुन्दर लड़का को जन्म दिया.
पड़ोस और रिश्तेदार सभी बधाई देते हुए बोले- बधाई हो दलवीर, बेटा तो दादा पर गया है!
यह सुनकर सुखवीर अपनी मूँछ उमेठने लगे और फूलवती सिर पर साड़ी ओढ़कर मुस्कराने लगी.
आपको इस कामा बाबा Xxx कहानी पर अपनी बेबाक राय रखने की पूरी आजादी है.
आपका लंडराज
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