सासु मां ने अपने पहलवान देवर से चुदवाया

Views: 0 Category: Bhabhi Sex Story By rsa.mkb Published: September 21, 2026 📖 13 min read
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देवर भाभी सेक्स कहानी में मेरी ससुर बीमारी के कारण मेरी सास को चोद नहीं पाते थे. एक दिन सास ने अपने देवर का लंड देख लिया और उसे पटा कर चुद गयी.

raatkibaat के सेक्सी पाठको, मैं रवीश कुमार हूँ.
मेरी उम्र 36 साल है.
मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे अमरोहा का निवासी हूं.

मेरी ससुराल में मेरी पत्नी ममता, साठ साल के फौजी ससुर वेद पाल और मेरी सबसे प्यारी सासु मां रजनी बालियान हैं.
रजनी 52 साल की एक गदरायी बदन वाली एक परिपक्व महिला हैं.
उनके बड़े बड़े दूध हैं, जिनका साइज़ 38 इंच का है और पिछवाड़े का आकार मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता हूँ.

बस इतना लिख रहा हूँ कि उनके चूतड़ पेटीकोट में समाने में असमर्थता जताते हैं.
मैं अपनी सासु मां से ज्यादा उनकी इस हाहाकारी गांड का जबरदस्त दीवाना हूं.

मेरी सासु मां का यौवन ऐसा है मानो जन्नत से जमीन पर कोई हुस्न परी अपने दूध और गांड हिलाने उतर आई हो!

मेरे फौजी ससुर पर भगवान की असीम कृपा है जो उनको इतना बेहतरीन माल मिला.
उससे भी खतरनाक बात यह कि सासु मां का चुदवाने का ऐसा बेहतरीन अंदाज है कि मुर्दा का लंड भी जिंदा हो जाए.

मेरे ससुर फौज से एक सेवानिवृत अधिकारी हैं.
जब तक ससुर जी सरकारी सेवा में थे, वे एकदम जवान और तंदरुस्त दिखते थे, पर एक बीमारी ने उन्हें फिलहाल एकदम कमजोर कर दिया है.

अब फौजी ससुर साहब में वह दम नहीं है.
वहीं उनका एक छोटा भाई है जो एक पहलवान है और गांव के बाहर अखाड़े में ही अक्सर कसरत करता रहता है.

देवर भाभी सेक्स कहानी तब बनी जब एक दिन जब सासु मां ने अचानक अपने पहलवान देवर को घर के बाहर हौदी में लंगोटी में नहाते देखा तो वे उन्हें देखती ही रह गईं.
महीनों से लंड की प्यासी मेरी सासु मां रजनी उर्फ रज्जो रानी अब रोज अपने देवर के नहाने का इंतजार करने लगीं.

वे छुप छुप कर अपने देवर की लंगोटी में उभरे हुए मजबूत लंड को निहारती हुई उसके लौड़े से चुदने की कल्पना में मस्त होने लगी थीं.

वे मन ही मन देवर के लौड़े से चुदने के सपने देखतीं और अपने मन में बुदबुदातीं- अरी मईया री मईया, ये कहां का सांड आ गया … इसका लंड तो फ़ौजी साहब से बड़ा दिख रहा है!

अब भाभी अपने देवर को रिझाने लगीं.
देवर से रहा न गया और आखिर चौथे दिन पहलवान जी की नजर दूर कोने में छुपी अपनी भाभी पर पड़ गई जब वे अपनी चुत मसल रही थीं.

पहलवान ने उनके पास आकर उन पर धप्पा बोल दिया.
शर्माती हुई रज्जो देवर से छूट कर जाने लगीं, पर पहलवान ये खास मौका छोड़ना नहीं चाहता था.

आखिर उसने भी तो अपनी भाभी के नाम की कई बार लार टपकाई थी.
आखिर फ़ौज़न भाभी थी ही इतनी हसीन कि लौड़े की लार तो टपकना बनती ही थी.

फिर फ़ौजन ने अपने आपको इस तरह संवार कर रखा था कि आस-पास के कई गांवों में उसकी खूबसूरती और कंटीले बदन की चर्चा खुल कर होती थी.

सासु मां की कातिलाना जवानी, जवान लोगों की चर्चा तो थी ही … बूढ़े भी सासु मां के दीवाने होकर अपनी टांगों के बीच पड़े मुर्दा मेंढक को सहलाने लगते थे.

फ़ौजन और उनके देवर दोनों की आंखें मिल गईं और उनकी हवस बिस्तर तक पहुंच गई.
दोनों एक दूसरे पर हावी थे, जहां रजनी अपनी हुस्न की कयामत ढहाने में अप्सरा से कम नहीं थी, तो वहीं पहलवान देवर, जिसने अभी तक किसी भी औरत का यौवन नहीं चखा था, एकदम से व्याकुल हो गया था.

उसके अन्दर अपने फड़फड़ाते हथौड़े जैसे लौड़े को शांत करने की ख्वाहिश उफान मारने लगी थी और वह अपनी भाभी के मदहोश कर देने वाले हुस्न का रसपान का सपना देखने लगा था.

अपने पति को से छुपते छुपाते हुए फ़ौजन सासु मां और देवर धीरे धीरे नजदीक आ गए और चुदाई का खेल खेलने लगे.
सासु मां इस उम्र में भी पहलवान पर हावी होती दिख रही थीं.

क्या चुदवाने की कला थी उस रंडी के अन्दर … आह … साली की ब्लू-फिल्म बना कर वायरल करने का जी करता था!
चुदाई की प्रक्रिया में दोनों ने बिना किसी को भनक लगाए, लगभग एक वर्ष तक भरपूर आनन्द लिया.

लेकिन ये छुपाछुपी एक दिन पकड़ी गई.
जब एक गर्मी रात को पहलवान ने भौजी को ऊपर छत पर बुलाने की जिद की तो फ़ौजन भौजी भी चुत उठाए आ गई.

छत पर तड़पता पहलवान उसके अंग की खुशबू पाने को बुरी तरह व्याकुल था.

सामने से अपने माल को आते देख पहलवान जी से रुका न गया और उसने अपनी मचलती तमन्ना पर काबू न पाते हुए अपनी फ़ौजन भौजी को उठा कर खाट पर पटक दिया.

बेचारी खाट कहां टिकने वाली थी, शहद से भरी मीठी चूचियों वाली भाभी और पहलवान देवर के आगे चारपाई की क्या बिसात थी, उसे तो झुकना ही था.

आखिर बेचारी खटिया उनकी चुदाई में विघ्न डालती हुई ही कुर्बान हो गई.
उस खटिया की चरमराती हुई आवाज ने फौजी पापा की नींद तोड़ दी और उन दोनों के चुदाई वाले अभियान की भी मैया चुद गई.

अपनी रज्जो फौजन की चूचियों को अपने भाई से चुदवाती देख, फौजी ससुर सदमा सहन नहीं कर पाए और बेहोश हो गए.
चुदाई के भूत के सामने देवर जी ने टांग उठा कर पेटीकोट के अन्दर से अपनी भाभी की चूत में अपना लंड पेल दिया और मुँह से मुँह लगा कर चाटने लगे.

हवस में चूर देवर ने उसके ब्लाउज भी फाड़ दिया था और बड़े बड़े बोबे एकदम आजाद कर दिए थे.
पहलवान ने भाभी के मम्मों को मसलना शुरू कर दिया, एक दूध को चाटने लगा और दूसरे को भँभोड़ने लगा.

इसी के साथ में चुत में लंड की धमाकेदार एंट्री हुई और धकापेल चुदाई होना चालू हो गई.

इसी जल्दबाजी की चुल्ल में पहलवान का लंड भी जल्दी झड़ गया.
हालांकि मेरी सासु मां भी पहलवान देवर का लंड पी चुकी थीं ताकि उनकी चूत के शोले भी जल्दी से शांत हो सकें.

रंडी फौजन सासु मां की चुदाई की चुल्ल अब जाकर शांत हुई और वह अपने पति को होश में लाने की कोशिश करने लगीं.

पर बेचारे बुढ़ऊ भी क्या करे, उनको रिटायर हुए 9 महीने हो चुके थे और अपनी इस फड़कती जवानी वाली अधेड़ लुगाई की चुदाई की आग को शांत नहीं कर पा रहे थे.

दूसरी तरफ फौजन सासु मां को जो मजा अपने पहलवान देवर के लंड से चुदने में और उसको पीने में आता था, उसके आगे उन्हें रसमलाई का स्वाद भी फीका लगता था.
कामुक सास अपनी वासना पर नियंत्रण नहीं कर पा रही थीं और पहलवान देवर के लंड के सपने उन्हें बार बार सता रहे थे.

फिर एक दिन मौका पाकर सासु मां रजनी खेत में काम के बहाने चुदाई का आनन्द लेने में मशगूल हो गई थीं.
वे दोनों एक दूसरे की जवानी से खेल रहे थे और काम-क्रीड़ा करने में व्यस्त थे.

ठीक उसी समय फौजी पापा वहां आ गए और दोनों को नग्न अवस्था में देख लिया.
फौजी पापा जी ने अपनी लुगाई रजनी को एक थप्पड़ जड़ दिया- साली कुतिया, रंडी तुझे बिल्कुल भी शर्म नहीं आई … मेरे कहने के बाद भी चुदवाने आ गई है … साली. चल अब तुझे तो मैं पूरे गांव की रखैल बनाऊंगा!

यह सुनते ही सासु मां गिड़गिड़ाने लगीं और माफ़ी मांगती रहीं, पर पापा मानने को कतई तैयार नहीं थे.
आखिर फौजी पापा ने एक शर्त रखी कि एक बार वे उन दोनों की चुदाई अपने सामने देखना चाहते हैं.

रज्जो के लाख गिड़गिड़ाने के बावजूद उन्हें अपने पति की शर्त माननी पड़ी.

सासु मां रज्जो यानी रजनी ने हिचकिचाते हुए अपने हाथ से पहलवान देवर का पजामा खोलना शुरू कर दिया.

नाड़ा खोलते ही देवर जी का साढ़े सात इंच का मोटा और काला नेवला जैसा लंड फनफनाता हुआ बाहर निकल आया.
अपने भाई का लंड देख कर पापा जी भी चकित हो गए.

अब सासु मां उस हथौड़े को अपने हाथ में पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगीं.
कभी वे उसे अपने मुँह में लेकर चूसतीं तो कभी पकड़ कर मुठियाने लगतीं.
उसमें चिकनाई पैदा करने के लिए कभी धीरे से उसके ऊपर अपनी लार टपकाने लगतीं.

उधर सासु मां के गोल गोल चूचे पहलवान के कब्जे में थे और वह उन्हें मसल मसल कर ऊपर नीचे करते हुए भींच रहा था.
बोबे के मसलने की अदा देख कर फौजी पापा जी का लंड भी टनटना कर खड़ा हो गया.

अब माहौल देख कर पापा जी ने भी अपनी जेब से सेक्स की गोली निकाली और बिना पानी के चबा गए.
उधर खेत की झोपड़ी में सासु मां अब जमीन पर नीचे बिछ चुकी थीं और पहलवान देवर के सामने उन्होंने अपनी चुत पसार दी थी.

मेरी सासू मां रज्जो की एकदम उभरी हुई दो फांकों वाली खुली चूत और घने काले रंग की झांटों से एकदम भरी हुई थी.
मम्मी की चूत का आकार वास्तव में देखने लायक था. वह चूत नहीं भोसड़ी थी, जिसे पहलवान जी ने बड़े भाई की गैरमौजूदगी में जी भरके पेला था.

पहलवान ने इस मौके का फायदा उठाते हुए अपनी मस्त भाभी की उठी चूत को जीभ से चाटना शुरू किया.

देवर की खुरदुरी जीभ के अहसास से सासु मां इस पल को संभालने में असहज सी हो गई थीं.
पर उन्हें मजा की जो अनुभूति हो रही थी, वे उसे बिल्कुल भी खोना नहीं चाहती थीं.

पास बैठे फौजी का बेसब्री का बांध अब टूट चुका था, अब वे भी मैदान में आ गए थे.
आखिर गोली ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था.

नीचे बिछी चटाई का हिस्सा बनने के लिए अब वे भी झुक चुके थे.

महीनों बाद फौजी बलमा का लंड खड़ा देख सासु मां की तमन्ना होने लगी थी कि वे भी फौजी वेदपाल के लंड को सूत सूत कर पी सकें, चख सकें.

संकोच से बाहर आते हुए मां ने तुरंत ही फौजी वेदपाल का लंड अपने मुँह में ले लिया, जिसने वेदपाल फौजी को झकझोर कर रख दिया.
फौजी पापा आश्चर्यचकित थे कि ये क्या हुआ?

वे बोले- साली रंडी, चुदक्कड़ … ये सब कहां से सीखा?
सासु मां कुछ ना बोलीं और लंड चूसने में लगी रहीं.

जैसे ही फौजी पापा ने सासु मां रजनी की गांड पर थप्पड़ मारा, तो वे लंड चूसती हुई बोल उठीं कि इस पहलवान ने ही सब सिखाया!

फौजी पापा देख रहे थे कि सासु मां अपनी लार का तार बनाती हुई लौड़े को चूसे जा रही थीं और बगल में पहलवान देवर अपनी फ़ौजन भाभी के मांसल बोबों को मसलते, दबाते हुए उन्हें कमर से पकड़े हुए था.

अपने बालम का मोटा घुंडीदार लंड पीने के बाद फौजन सासु मां की चूत में आग भभक रही थी और उन्हें जल्दी से अपने भोसड़े में ससुर का बांस पिलवाने को बेताबी हो रही थी.

कोई भी विलम्ब न दिखाए हुए सासु मां पापा के लंड के ऊपर बैठ गईं और फच फाचक से लंड को भोसड़े के अन्दर समा लिया.
चुदाई वाली आवाज का वेग हवा में बहने लगा.

सासु मां रजनी के मुँह से कामुक सिसकारियां मदहोश कर देने वाली थीं.

‘मेरे लौड़ापति कब से प्यासी थी में तुम्हारे इस लंड की … इसने मुझे 30 साल तक चोदा है … अभी भी मूसल सा घुसा हुआ है आह आह फाड़ डालो … चोदो मुझे और जोर जोर से उई मां आह!’

सासु मां रजनी अब उछल उछल कर भोसड़े को चुदवा रही थीं.
वे कभी अपने पिछवाड़े को जोर जोर से लंड पर पटकतीं, तो कभी बैठ कर संभोग का आनन्द लेने लगतीं.
वे चुदाई में चूर हो रही थीं.

पास में बैठे पहलवान का मूसल लंड यह सब देख कर अपना आपा खो चुका था.
जैसे ही सासु मां की मोटी गांड ऊपर नीचे उछलती, वैसे ही पहलवान जी का सख्त लंड ऊपर की ओर उछल जाता.

अपनी चुदक्कड़ भाभी की चूत में भईया का लंड घुसे होने के कारण बेचारा मजबूर था, पर कितनी देर?
उसने अब देखा न ताव और पोजीशन बना ली.

उसने मौका मिलते ही अपनी भाभी के उछलते चूतड़ों के बीच वाले छेद में अपना मजबूत सा मूसल बिना तेल लगाए पेल दिया.

अपने छेद में अचानक से इतना मोटा लौड़ा घुसते ही सासु मां रजनी की सांस अधर में अटक गई क्योंकि उन्हें अपनी गांड में लंड लेने की आदत ही नहीं थी और न ही ऐसी उम्मीद थी कि एकदम से कोई गांड में सरिया ठूंस देगा.

बेचारी सासु मां दर्द के मारे छटपटा उठीं और उनके मुँह से गालियों का सैलाब निकल पड़ा- आह भोसड़ी वाले आह साले गांडू … कुत्ते मादरचोद हट जा!
वे दर्द से कराहने लगीं.

धीरे धीरे पहलवान जी ने अपनी भौजी को संभाला और दोनों भाई अपनी अपनी ताकत का प्रदर्शन करने लगे.

कभी फौजी पापा अपने सुपारा निकाल कर झटके से भोंसड़े में घुसेड़ देते, तो कभी पहलवान देवर अपनी भौजी की गांड में थूक लगा कर लंड जड़ तक डाल देता.
इसी दरमियान सासु मां की गांड चुत में मस्ती आने लगी और वे इस नए अंदाज में होने वाली चुदाई के दर्द को भूलने लगीं.

अब वे दर्द को नजरअंदाज करती हुई अपनी सैंडविच चुदाई को बहुत ही मस्ती से एंजॉय करने लगी थीं.

मैनफोर्स की गोली का असर आज इस कदर ससुर जी पर सवार था कि उन्होंने अपनी बीवी रजनी के मन को तृप्त कर दिया था.
काफी देर तक चली इस धकापेल के बाद ससुर पापा जी का वीर्य बाहर आने को हो गया था.

उसी बीच मेरी 52 साल की सासु मां ने एक झटके में लंड को अपनी भभकती चूत से बाहर निकाला और वे चुदाई के बाद आज पहली बार पापा के लौड़े को चूसने लगीं.
इस खेल से फौजी पापा को भी आज जन्नत का अहसास मिलने लगा था.

अपनी जादुई जीभ और रसीली होंठों के मीठे अहसास ने फौजी पापा के लंड को ढीला कर दिया और सारा वीर्य फ़ौजन सासु मां ने अपने मुँह में अन्दर ही निकलवा लिया.

मेरी सासु मां रज्जो आज इस कदर से दोनों छेदों से दो अलग अलग लंड से चुदाई वाला प्यार पाकर मीठा अहसास कर रही थीं और अपनी जवानी के दिनों को याद कर रही थीं.
आज वे 52 साल की उम्र में थीं लेकिन वे किसी भी जवान चुदासी लड़की पर भी भारी थीं.

उनका चुत चुदवाने का तरीका और पहली बार गांड मरवाने का अहसास एकदम लाजवाब था.

बिना तेल के चुदवाने से गांड से खू.न आने लगा था और यह देख कर पहलवान ने सासु मां की गांड चोदनी बंद कर दी.

अब मेरे ससुर का लंड चुत से निकल गया था तो सासु मां भी अपनी चौड़ी भोसड़ी खोलकर पहलवान देवर का लंड लेने को तैयार थीं.
सासु मां ने उसे ललकारा कि आगे आकर दिखा अपनी मर्दानगी!

यह सुनकर आनन-फानन में देवर ने आगे से आकर अपनी चुदक्कड़ भाभी का भोसड़ा अपने लौड़े का आशियाना बना लिया और देखते देखते ही उन दोनों की धकापेल चुदाई चालू हो गई.
पास में लेटे हुए अपनी सांसों को नियंत्रित करते हुए रजनी के फौजी पति के कान में उन दोनों की चुदाई की फच फच्चा छप छप की मधुर आवाज गूंजने लगी.

पहलवान देवर एकदम बेसुध होकर अपनी भाभी के ऊपर चढ़ा हुआ था और अपनी गांड के पूरे जोर से अपनी भाभी की चुत में पेलम-पाली कर रहा था.

मेरी सासु मां भी इस 52 साल की ढलती उम्र में एक बार भी हार मानने को तैयार नहीं थीं.
मैं समझ गया कि मेरी फ़ौजन सासु मां को चुत चुदवाने में किसी सड़क छाप रंडी के जैसी महारत हासिल थी.

सासु मां की चूचियां एकदम बेसुध होकर नृत्य कर रही थीं.
यह देख कर पापा जी भी करीब आ गए और सासु मां की घुंडियों को मसलने लगे थे.

आखिर अधेड़ सास की चूत को पहलवान देवर के बल्लम सरीखे लौड़े ने हरा दिया और रज्जो रानी ने चुत से रस का फव्वारा छोड़ते हुए चैन की सांस ली.

मैं भी ये सब देखकर उनको चोदने के ख्यालों में खो गया और मैंने कैसे अपनी सासु मां की चुत गांड की चुदाई की, वह सब आपके मेल मिलने के बाद किसी अगली सेक्स कहानी में बताऊंगा.

तो मित्रो, कैसे लगी ये देवर भाभी सेक्स कहानी?
प्लीज अपने विचार अवश्य साझा करें.
rsa.mkb@hotmail.com

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