नंगी भाभी Xxx कहानी में एक रात मैंने अपनी नई आई भाभी को भाई से चुदती देखा तो मेरे मन में भी भाभी के जिस्म का मजा लेने की लालसा जागृत हो गयी.
दोस्तो, आप लोगों का इतना प्यार मिलता है कि न चाहते हुए भी आप लोगों की खुशी के लिए कहानी लिखना पड़ता ही है।
बहुत सी डिमांड आती हैं और फिर आप लोगों की इच्छानुसार एक बार फिर कहानी लिखने बैठा हूँ।
हाँ, मेरी सभी पिछली कहानियों की तरह यह नंगी भाभी Xxx कहानी भी केवल काल्पनिक है।
इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।
यह कहानी केवल और केवल आपके मनोरंजन के लिए ही लिख रहा हूँ।
आज जो कहानी लिख रहा हूँ वो उस दौर की कहानी है, जब इंटरनेट नहीं हुआ करता था और किताब के माध्यम से सेक्स की कहानी पढ़ी जाती थी।
तो मैं आपको उसी दौर की एक कहानी बताने जा रहा हूँ।
अगर आपको यह नंगी भाभी Xxx कहानी पसंद आए तो अपने मेल के माध्यम से मुझे अपना प्यार देना।
तो दोस्तो, मेरा नाम मोनू है और मैं 19 साल का हूँ।
करीब साढ़े पाँच फुट का एक साँवला लड़का हूँ।
मैं अपनी पढ़ाई पर फोकस करता हूँ।
मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।
लेकिन मुझे पोर्न मूवी देखने और सेक्सी कहानी पढ़ने की गंदी आदत लग गई।
raatkibaat में कहानी पढ़ने लगा तो मुझे भी लगा कि एक कहानी मैं भी लिखूँ.
पर हिंदी में मैं टाइप नहीं कर सकता था तो मैंने सक्सेना जी से अनुरोध किया तो वो मेरी कहानी लिखने को मान गए।
तो दोस्तो, कहानी कुछ यूँ है कि मेरे बड़े भाई की शादी को हुए तीन महीने हो चुके हैं।
वो मेरे भाई की गर्लफ्रेंड थी और उसी से शादी कर ली।
मेरी भाभी का नाम मीनू है, वो बिल्कुल साधारण नाक-नक्शे वाली है।
वो भी मेरी तरह साँवली है।
मेरे पापा ने छत पर ही एक रूम बनवाकर उन दोनों को ऊपर सेटल कर दिया।
मेरी और मीनू भाभी में खूब पटती थी।
बल्कि वो मुझे मेरी पढ़ाई में भी बहुत मदद किया करती थीं।
रविवार के दोपहर की बात थी, जब घर के सभी लोग खा-पीकर अपने-अपने कमरे में चले गए और मैं भी अपने कमरे में चला आया।
अकेला मैं अपने कमरे में करूँ तो क्या करूँ और पढ़ाई में भी मेरा मन वैसे भी नहीं लगता था।
मैं यह सोचकर कि चलो चलकर भइया-भाभी के पास चलकर उन्हीं के पास बैठते हैं।
मैं उठा और सीधा उनके कमरे की तरफ बढ़ गया।
उनके कमरा बंद था।
जैसे ही मैं उनके कमरे के दरवाजे को खटखटाने जा ही रहा था कि मुझे ‘आह-ओह-ओह और जोर से और जोर से चोदो’ की आवाज सुनाई पड़ी, मेरे कान खड़े हो गए और मैंने अपने कान दरवाजे पर लगा दिए।
आवाज और तेज हो गई।
“अबे कुत्ते और जोर से चोद!”
“हाँ साली, मादरचोद जोर से चोद तो रहा हूँ।”
अब मेरी उत्सुकता अंदर देखने की होने लगी।
मैं कमरे के ‘अंदर क्या हो रहा है’ देखने के लिए बड़ा उत्सुक हो रहा था।
पर कैसे?
आवाज अभी भी आ रही थी।
बहुत प्रयास किया और फिर सफलता हाथ लग गई, खिड़की के पास हल्का सा एक झरोखा था।
मैंने अंदर देखने का प्रयास किया.
क्या सीन था… मेरा हाथ सीधा मेरे लौड़े पर चला गया।
अंदर भाई और भाभी पूरे नंगे थे।
भाभी और भाई दोनों की गाँड मेरे नजरों के सामने थी।
पलंग पर भाभी अपने दोनों हाथों को टिकाए झुकी हुई थी और भाई उनके पीछे उनके कमर को पकड़ कर धक्के लगाए जा रहे थे।
भाभी बोले जा रही थी- और जोर से और जोर से मेरी जान, और जोर से चोदो।
तभी भाई का लंड बाहर आ गया।
भाई का लंड अभी भी तना हुआ था।
भाई थोड़ा सा झुके भाभी की गाँड को फैलाए और लगे चाटने।
फिर भाभी हो-हो करने लगी- मनीष, तू बहुत अच्छे से चाटता है और अच्छे से चाट मेरी गांड।
भाई ने अपना पूरा मुँह ही उनकी गांड के अंदर डाल दिया था।
फिर वो खड़े हुए और भाभी की गांड पर एक जोर सा तमाचा जड़ते हुए बोले- मीनू मेरी जान, हो जा तैयार अब तेरी गांड चुदने जा रही है।
“आ जा मेरी जान, जल्दी से चोद मेरी गांड, साली मरी जा रही है मादरचोद, तेरे लंड से चुदवाने के लिए।”
भाई ने गांड पर लंड सेट किया और एक ही धक्के में उनका लंड भाभी की गांड के अंदर!
और फिर धक्के पर धक्का भाई लगाए जा रहे थे।
इधर मैं भी अपने लंड को उस सीन को देखते हुए मसले जा रहा था।
थोड़ी कोशिश की तो भाभी की लटकते हुई चूची की एक हल्की झलक दिखाई पड़ी जो पेंडुलम की तरह हिल रही थी।
कुछ और धक्का लगाने के बाद भाई कहराते हुए बोले- जान अब मेरी मलाई निकलने वाली है,
कहकर उन्होंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और भाभी पलटी और फिर घुटने के बल बैठकर भाई के लंड को मुँह में भर ली और जोर-जोर से चूसने लगी।
भाई, भाभी के सर को पकड़े ‘आह-ओह’ करने लगे.
कुछ देर बाद भाभी के मुँह से सिकुड़ा हुआ लंड बाहर निकला, भाभी अभी उसको चाटे जा रही थी, फिर चटकारे लेते हुए बोली- मनीष, तेरी मलाई बहुत ही टेस्टी है।
“आ जा, मेरी रानी, अब तू भी अपनी मुनिया की टेस्टी मलाई मुझे चटा दे। बड़ा नशा देती है तेरी मलाई।”
“ले मेरी जान, मेरी मुनिया तेरे सामने है.”
कहते हुए वो पलंग पर टाँगें चौड़ी करके लेट गई और भाई उनकी टाँगों के बीच आकर उनकी चूत लगे चाटने।
थोड़ी देर बाद भाई, भाभी के बगल में लेट गए।
भाई का सिकुड़ा लंड और भाभी की चुदी चूत मेरे सामने थी।
और मेरे हाथ में मेरे लंड का माल था, जिसको मैं दीवार में पौंछता हुआ, जल्दी से अपने कमरे में आ गया।
अभी भी मेरी नजर के सामने भाई और भाभी के चुदाई का सीन चल रहा था।
मैं लेटा-लेटा केवल भाभी के बारे में ही सोच रहा था।
शाम को कोई 7 बजे भाभी चाय लेकर मेरे पास आई।
हालाँकि जब वो मेरे कमरे में मुझे चाय देने आई, उनके जिस्म का कोई हिस्सा खुला नहीं था, फिर भी मेरी नजरें उनको बिना कपड़े के देख रही थीं।
मैं उनमें ही खो गया था।
भाभी ने मुझे झकझोरते हुए चाय दी और चली गई।
मेरे मन में उनको नंगा देखने की तीव्र इच्छा हो रही थी।
मैं अब जुगाड़ सोचने लगा।
रविवार की वो मेरी रात केवल भाभी के बारे में सोचने में बीती।
खैर, कोई जुगाड़ नहीं सूझा।
आज मेरा मन नहीं था कॉलेज जाने का… तो मैंने सब को बता दिया।
भाभी अपने काम में व्यस्त थी और मेरी नजरें भाभी पर!
भाई अपने समय पर ऑफिस के लिए निकल गए।
भाभी ने घर में बचे हुए बाकी सदस्यों को नाश्ता देने के बाद नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई।
उनके बाथरूम में घुसते ही, मैं अंदर झाँकने के लिए सुराख ढूँढने लगा।
मुझे कोई सुराख नहीं मिला और मैं मायूस हो गया।
लेकिन मुझे उनको नंगी देखना था तो मैं उनके रूम में घुस गया।
पलंग पर उनके कपड़े पड़े हुए थे तभी दरवाजे के पास आते हुए कदमों की आवाज सुनाई पड़ी और मैं पलंग के नीचे चुपचाप छुप गया।
फिर सटाक से दरवाजा बंद होने की आवाज आई।
पलंग के नीचे से मुझे केवल उनकी टाँगें ही नजर आ रही थीं।
मैं अपनी पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन कोई चांस नहीं बन रहा था।
लेकिन मुझे तो कैसे भी उन्हें देखना था तो मैं हल्का सा सरक कर आगे आ गया।
अब मुझे उनके चूतड़ भी दिखाई देने लगे।
इसी बीच उन्होंने क्रीम उठाई और हाथों में लेकर अपनी पीठ पर लगाते हुए चूतड़ों पर भी लगाकर पैंटी पहन ली और फिर धीरे-धीरे उन्होंने अपने पूरे कपड़े पहन लिए और फिर कमरे का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई।
मैंने हल्का सा देखा, भाभी अब वहाँ नहीं थी, मैं जल्दी से वहाँ से निकल कर अपने कमरे में आ गया और जल्दी से बिस्तर में घुसकर और उनके जिस्म को इमेजिन करते हुए मूठ मारने लगा।
“आह भाभी, तुम कितनी सेक्सी हो, क्या जिस्म पाया है। मैं तो तुम्हारी चूत और गाँड का दीवाना हो गया हूँ!” इसी तरह बड़बड़ाते हुए मेरे हाथ तेज-तेज चलने लगे, मेरी आँखें बंद थीं।
मेरा माल निकलने ही वाला था कि तभी किसी ने मेरे हाथ को पकड़ लिया।
झट से मेरी आँखें खुल गईं, देखा तो सामने भाभी खड़ी थी।
मैं थर-थर काँपने लगा।
“सॉरी भाभी, सॉरी भाभी!” कहते हुए मैं अपने लंड को उनसे छिपाने लगा.
पर भाभी बड़ी ही शांत अवस्था में खड़े होकर और मेरे बालों को सहलाते हुए बोली- मूठ मारने से पहले कमरे का दरवाजा बंद कर लिया करो।
और फिर मेरी नाक को पकड़ते हुए बोली- अच्छा तू बता, मेरा नाम लेकर कब से मूठ मार रहे हो।
मैं चुपचाप था।
पर अभी भी वो बड़ी नार्मल थी और बोली- कहीं तुझे भाभी को चोदने का मन तो नहीं करता है।
मैंने अपने सर को झुका लिया।
वो हँसते हुए उठ गई और यह कहते हुए ‘चलो बाहर आ जाओ और खाना खा लो,’ जाने लगी।
मैंने थोड़ा हिम्मत करके उनका पकड़ लिया।
वो मुझे देखने लगी।
मैंने हकलाते हुए कहा- भाभी, मैं आपको देखना चाहता हूँ।
“तुम मुझे देख तो रहे हो?”
“भाभी, नंगी देखना चाहता हूँ।”
“हम्म.” कहते हुए उन्होंने अपने हाथ कमर पर रखते हुए बोली- क्या बोल रहे हो? चलो चुपचाप चलकर खाना खा लो।
“प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज!” मैंने कई बार बोल दिया।
“ठीक है, पर शर्त है कि इसके आगे कुछ नहीं।”
“ठीक है भाभी।”
फिर भाभी ने धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारकर बिल्कुल नंगी हो गई और घूम-घूम कर अपने पूरे जिस्म को दिखाने लगी।
उनको नंगा देखकर मेरे तन-बदन में आग लग गई और मैं उनको पकड़कर चूमने-चाटने लगा उनकी चूची दबाने लगा।
वे मुझे झटकते हुए बोली- बस इससे ज्यादा कुछ नहीं।
“प्लीज भाभी।”
“हाँ प्लीज भाभी, प्लीज भाभी कहकर तुम भाभी को चोद ही दोगे।”
“प्लीज भाभी!” मैंने एक बार फिर कहा।
“ठीक है बाबा, लेकिन अभी नहीं। सब लोग अभी खाने के वेट कर रहे हैं। जब सब लोगों को खाना खिलाकर मैं फ्री हो जाऊँगी तब तुम मेरे कमरे में आ जाना, फिर मैं तुमको जन्नत का मजा दूँगी, लेकिन आज के बाद तुम मूठ नहीं मारोगे।”
इतना कहने के बाद भाभी ने अपने कपड़े पहन लिए और कमरे से बाहर आ गई।
मैं भी जल्दी-जल्दी उनके पीछे आ गया।
भाभी सीधा रसोई में घुस गई और सबके लिए खाना लगाने की तैयारी करने लगी।
ऐसा लग रहा था कि जैसे समय थम सा गया है।
मैं बार-बार सभी लोगों पर नजर डालता और बड़बड़ाते हुए कहता कि ‘आज ही धीरे-धीरे खाना’
भाभी मेरी इस बेचैनी का बड़ा मजा ले रही थी।
मेरा खाने में बिल्कुल मन नहीं लग रहा था।
लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था।
जब सबने खाना खाना खत्म कर लिया तो भाभी ने एक और बम फोड़ते हुए कहा- मोनू भइया, जरा बर्तन धुलवाने में मेरी मदद कर दो।
अब भला मैं भाभी को कैसे मना कर सकता था और वो भी इस समय, जब मुझे भाभी को चोदने का मौका मिल रहा हो।
तभी मम्मी भी बोल उठी- हाँ-हाँ जा कर अपनी भाभी की थोड़ी हेल्प करा दे।
मैं अनमने मन से रसोई में गया और अपना बुरा सा मुँह बनाते हुए बोला- क्या भाभी?
हँसते हुए बोली- क्या हुआ? मेरी मदद नहीं करानी।
“हाँ-हाँ करा लो, करा लो। आज ही सब करा लो।”
मेरे गालों को चूमती हुई भाभी बोली- आसानी से मिलने वाली चीज में मजा नहीं आता जितना मजा इंतजार के बाद मिलने वाली चीज में आता है।
मैंने जल्दी-जल्दी भाभी के साथ मिलकर काम को खत्म किया और हाथ पकड़कर बोला- अब चलो भाभी, अब और नहीं तड़पा जाता है।
“हाँ-हाँ मैंने कब मना किया है। मम्मी-पापा बाहर बैठे हैं। तू ऐसा कर चुपचाप मेरे कमरे में चल, मैं थोड़ी देर बाद पीछे से आती हूँ।”
भाभी की बात मुझे ठीक लगी.
मैं चुपचाप और जल्दी से भाभी के कमरे में आ गया और अपने सब कपड़े उतारकर नंगा होकर उनके पलंग पर लेट गया।
चुदाई की सोच से ही मेरा लंड तन चुका था और बस मौका मिलते ही चूत द्वार के अंदर घुसने को तैयार था।
मैं लंड को पकड़े हुए बार-बार दरवाजे की तरफ देख रहा था।
पाँच मिनट बीत गए पर भाभी अभी भी नहीं आई।
मैं मन ही मन बड़बड़ाने लगा- साली के पास चूत है तो नखरे मार रही है। चोद कर चूत का भोसड़ा बना दूँगा साली का, तब समझ में आएगा।
तभी भाभी आती हुई दिखाई दी।
मैं झट से उठा और जैसे ही भाभी कमरे के अंदर आई, मैंने उनको कसकर पकड़ लिया।
“अरे-अरे, कम से कम दरवाजा बंद कर लेने दो कोई आ गया तो?” कहते हुए अपने को मुझसे छुड़ाकर कमरे का दरवाजा बंद करके जब घूमी और मुझे नंगा देखा तो बोली- मोनू, बहुत उतावले हो रहे हो। थोड़ा सब्र करो।
“भाभी दो घंटे से सब्र तो ही कर रहा हूँ। देखो न लंड बेचारा।”
“हाँ, ये भी तुम्हारी तरह उतावला हो रहा है!” वे मेरे लंड को पकड़ते हुए बोली।
फिर उन्होंने मुझे हल्का सा धक्का देते हुए पलंग पर लेटा दिया और मेरी टाँगों के बीच आकर लंड को पकड़कर उसे सूँघने लगी।
फिर एक लंबी सांस लेती हुई बोली- ताजा है तुम्हारा लंड।
भाभी का कहा- मुझे कुछ समझ में नहीं आया?
मैं विस्मय सा उनका देखता ही रहा।
एक बार फिर भाभी ने गहरी और लंबी सांस लेते हुए मेरे लंड को सूँघा और फिर ने अपनी जीभ को सुपाड़े के चारों ओर चलाने लगी.
उनके ऐसा करते ही मेरा शरीर अकड़ने लगा.
इसी बीच भाभी मेरे सुपाड़ी को अपने दाँतों के बीच लेकर काटने लगी, अब मेरे बर्दास्त के बाहर हो रहा था।
मुझे नहीं समझ में आ रहा था कि मेरे साथ क्या हो रहा था।
भाभी मस्त मेरे लंड से खेल रही थी।
अब भाभी ने मेरे लंड को मुँह में भर लिया और बस यहीं से मुझे लगा कि मेरा माल निकल रहा है।
भाभी ने अपनी नजर उठाकर मेरी तरफ देखा लेकिन उन्होंने लंड को अपने मुँह से बाहर नहीं निकाला।
कुछ ही सेकंड बाद लंड सिकुड़कर अपनी वास्तविक औकात पर आ गया।
भाभी ने मेरे वीर्य को गटकते हुए कहा- क्या मोनू भइया, शुरू हुए नहीं और खत्म पहले हो गए।
मैं बिल्कुल शिथिल सा पड़ा भाभी से अपनी नजर चुरा रहा था।
भाभी मेरे बगल में आकर लेट गई और फिर उलहाना देते हुए बोली- क्यों भइया चोदोगे नहीं अपनी भाभी को।
मेरे ऊपर शर्म और हावी होती जा रही थी।
मैं बिस्तर से उठकर जाने लगा, तो मेरा हाथ पकड़कर अपने ऊपर मुझे गिराते हुए बोली- अरे शर्मा मत, पहली बार होता है। थोड़ी देर रुक, तेरा लंड फिर खड़ा होकर मुझे चोदेगा!
और फिर मेरी गाँड में उँगली करने लगी।
मैं उनके ऊपर लेटा हुआ था।
“मोनू हट, मेरा दम निकला जा रहा है!” कहते हुए भाभी मुझे धकेलने लगी.
मैं उनके बगल में पट पोजिशन में लेट गया।
भाभी ने करवट बदला और मेरी पीठ पर चुंबन की बौछार कर दी।
उसके बाद मेरे चूतड़ों को पकड़कर मसलने लगी और फिर मुझे अपनी गांड पर गीलेपन का अहसास हुआ।
शायद भाभी ने मेरी गांड पर अपनी थूक गिराई थी और फिर छेद को कुरेदने लगी।
फिर अपनी गांड पर उनकी जीभ चलने का अहसास मुझे होने लगा।
भाभी की इस उत्तेजक हरकतों से मेरे पेट के अंदर एक अजीब सा मरोड़ उठने लगा.
और मेरी मस्ती का आलम यह था कि मुझे अपने दाँत भींचने के लिए मजबूर होना पड़ा और अगले 2 मिनट के अंदर ही मेरे लंड में एक नई ऊर्जा का संचार होने लगा और तनाव सा आने लगा, मजबूरन मुझे अपने घुटने के बल आना पड़ा क्योंकि मेरा लंड बिस्तर से रगड़ खा रहा था।
भाभी ने तुरंत ही मेरे दोनों टाँगों के बीच से अपने हाथ डाल कर मेरे लंड को अपनी गिरफ्त में ले लिया और मेरी गाँड चाटने के साथ ही साथ मेरे लंड को भी दबाए जा रही थी।
हारकर मुझे आखिर में कहना ही पड़ा- भाभी, इस बार भी आप मेरा माल ऐसे ही निकालकर मेरे लंड को मुरझा दोगी, और मैं आपको चोद नहीं पाऊँगा।
इतना सुनना था कि भाभी मुझसे अलग हो गई और जब मैं सीधा हुआ तो भाभी को अपने कपड़े उतारते हुए देखा।
उधर भाभी कपड़े उतार रही थी इधर मेरा लंड तन कर 60 डिग्री हो गया था।
इधर भाभी भी पूरी नंगी हो चुकी थी और पलंग पर मेरे बगल लेट गई।
मैं इस समय उनकी चूत चोदने को इतना उतावला था कि मैं तुरंत अपनी जगह से उठा और उनकी टाँगों के बीच में आ गया।
भाभी कुछ बोली नहीं, बस अपनी टाँगों को और फैला दिया।
मेरे लंड उनकी चूत से टच करने लगा, मुझे ऐसा लगा कि लंड महाराज किसी बहुत गर्म सतह से टकरा रहे हों।
मुझे कोई आईडिया ही नहीं था कि चूत के अंदर लंड को कैसे डालना है।
बस मैं जैसे ही चूत पर लंड को सेट करता, अपने आप ही मेरी कमर धक्का लगाने लग जाती और लंड फिसलकर दूसरी ओर चला जाता।
भाभी अब मेरी इस बेचारगी पर मुस्कुरा रही थी।
मैंने विनय करते हुए कहा- भाभी प्लीज, बहुत मन कर रहा है।
भाभी को मुझ पर तरस आ गया और उन्होंने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ा और चूत पर लगाकर बोली- चलो, अब धक्का मारो।
मैंने उनकी आज्ञा का पालन किया और इस बार मेरा लंड चूत के अंदर चला गया।
एक सकून सा मिला, ऐसा लगा कि किसी ऐसी गहराई में मेरा लंड चला गया, जिसके ओर और छोर दोनों का ही मुझे पता नहीं था, लेकिन लंड जो था स्वचालित सा हो गया था अपने आप ही लंड अंदर-बाहर हो रहा था।
लंड की स्पीड अपने आप बढ़ती ही जा रही थी।
भाभी की चूचियाँ इधर-उधर डोल रही थीं।
अभी तक मेरे हाथ भाभी के जिस्म से दूर थे, लेकिन अब मेरे दोनों हाथ उनकी चूचियों पर थे।
भाभी भी ओह-ओह किए जा रही थी।
मुझे जो मजा आ रहा था उसका मैं वर्णन नहीं कर सकता।
ऐसा लग रहा था कि चूत की उस गहराई में मेरी गाड़ी अपनी स्पीड में चल रही थी।
मेरी स्पीड बढ़ती ही जा रही थी।
फिर अचानक से मेरा शरीर अकड़ने लगा और मेरा वीर्य छूटकर भाभी की चूत के अंदर जाने लगा।
मैं किसी कुत्ते की भाँति हाँफते हुए भाभी के ऊपर गिर पड़ा।
मैं अपनी साँसों को काबू में करने की कोशिश कर ही रहा था कि भाभी ने मुझे अपने ऊपर से हटाया।
मैं उनके बगल में सीधा लेट गया।
मेरा लंड अब बिल्कुल शिथिल सा हो गया।
अब इसमें कोई जान नहीं थी।
कुछ देर बाद भाभी उठी और बाथरूम में चली गई और मैं वहीं बिस्तर पर पड़ा हुआ था।
थोड़ी देर बाद भाभी बाहर आई और अपने कपड़े पहने और फिर मुझसे बोली- मोनू, चल अब अपने कपड़े पहन और अब मन लगा कर अपनी पढ़ाई करना। बाकी तेरी भाभी तेरे लंड की सेवा बीच-बीच में करती रहेगी।
तो दोस्तो, यह मेरी पहली चुदाई मेरी भाभी के साथ थी।
मेरी नंगी भाभी Xxx कहानी कैसी लगी, आप सभी के मेल के इंतजार में आपका अपना शरद सक्सेना।
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