Saale Ki Biwi Ki Chudai - 1

Views: 161 Category: Jija-Sali By longchampfare Published: August 18, 2025

📚 Series: Saale Ki Biwi Ki Chudai

Xxx फॅमिली स्टोरी में मुझे ठण्डी बीवी मिली जिसे चुदाई में रत्ती भर भी रूचि नहीं थी. उसका भाई भी ऐसा ही था पर उसकी बीवी को सेक्स का मजा लेना था तो हम दोनों ने एक दूसरे की कमी को पूरा किया.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम गौरव है और मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करता हूं.
मेरी उम्र 30 वर्ष है, मैं 5 फुट 10 इंच लम्बा हूं और एक स्मार्ट लुक का आदमी हूं. मेरा रंग ज्यादा गोरा तो नहीं, पर एवरेज है.

मैं भोपाल में रहता हूं, मेरी शादी हो चुकी है और अपनी पत्नी के साथ रहता हूं.
हमारी शादी 3 वर्ष पहले ही हुई थी.

मैं अपनी पहली सेक्स कहानी को आप सबसे साझा कर रहा हूं.
इस Xxx फॅमिली स्टोरी में जगह, सभी सदस्यों के नाम बदलकर आपको सुना रहा हूं.

मेरी पत्नी कविता (बदला हुआ नाम) दिखने में काफी खूबसूरत है लेकिन सेक्स लाइफ से दूर रहती है.
मैं तो कविता को पहली बार देखकर ही काफी खुश हुआ कि ऐसी परी जैसी लड़की पत्नी बनेगी मेरी.

मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि यह लड़की सेक्स और रोमांस से काफी दूर रहती है!

जब हम दोनों हनीमून पर गए और उधर मैंने देखा कि कविता का सेक्स में इंट्रेस्ट न के बराबर था.
तो मैं इस बात से काफी दुखी हो गया था.

मैं खुद को बदकिस्मत सोच रहा था क्योंकि कविता के बर्ताव से मेरे सारे सपने टूट गए थे.
मेरी इस तकलीफ को एक महिला समझ भी रही थी और वह थी मेरी सलहज जया! (बदला हुआ नाम)

वास्तव में मैं और जया एक ही कश्ती के नाविक थे.

मेरी ससुराल में कुल चार लोग थे.
मेरी सास विमला, साला सचिन, मेरी पत्नी और मेरी साली सविता.
ये सब बदले हुए नाम हैं.

मेरे ससुर का देहांत शादी से पहले ही हो गया था.
यह परिवार एक आश्रम से जुड़ा हुआ था और इन सभी का जीवन काफी सात्विक था.

मेरे साले सचिन की शादी मुझसे दो साल पहले ही हुई थी, पर अभी कोई बच्चा नहीं था.
मेरी सलहज काफी रोमांटिक मूड की है.

शादी के समय साली और सलहज दोनों काफी मजाक कर रहे थे और मेरा भी अपनी सलहज को देखकर मूड बन रहा था.
मेरी सलहज की उम्र भी 30 वर्ष है. तब 27 यानि कि वह मेरी उम्र की ही थी.
जबकि साली 20 वर्ष की.

मुझे दो महीने बाद ही अपनी सलहज जया से सहारा मिल गया.
वह सब कैसे हुआ और कैसे जया मेरी बांहों में आई, वह मैं अगले भाग में लिखूंगा.

अभी आप सलहज की चुदाई का मजा लें.

जैसा कि 2020 में लॉकडाउन लगा था तो हर कोई अपने घर में कैद हो गया था. फिर धीरे धीरे जिंदगी बढ़नी शुरू हुई.
दो वर्ष बाद यानि इस वर्ष होली के कुछ दिन पहले मेरी सास का फोन आया कि सबसे मिले हुए काफी दिन हो गए हैं, तो इस बार आप होली में यहीं आ जाओ.

मैंने खुश होकर जया से बात की.
उसने भी फोन पर खुशी जताई.

जया के बारे में बता दूं. उसका रंग बिल्कुल गोरा, कद 5 फुट 6 इंच और गढ़ा हुआ शरीर है.
उसका फिगर 34-30-36 का है, गांड थोड़ी उठी हुई है जो उसे सेक्स बम बनाती है.

मेरा ससुराल रीवा में है और साले साहब ग्वालियर में जॉब करते हैं.

खैर … होली के दो दिन पहले हम सब रीवा पहुंच गए.
मेरी साली अपने परीक्षा के कारण नहीं आई थी.

मैं बार बार जया से अकेले में मिलने को इशारा कर रहा था.
पर वह टाल रही थी.

मेरी ससुराल का घर काफी बड़ा है और सामने काफी जगह है.
रात में जब सभी सोने की तैयारी में लगे तो जया ने ही सबका कमरा ठीक किया.

फिर हर कोई अपने कमरे में चला गया.
उसी वक्त वह दूसरी मंजिल पर कुछ काम से गई.

वहीं मौका पाकर मैंने उसे ऊपर वाले बाथरूम में खींच लिया.
पहले तो वह घबराई, फिर हाथ छुड़ाती हुई बोली- क्या कर रहे हैं? जाकर सो जाइए!
मैं- ऐसे कैसे सो जाऊं, इतने दिनों बाद मिले हैं … तुम्हें खुशी नहीं हुई?

जया इठलाती हुई बोली- उहं … जैसे आप तो रोज याद करते थे!
मैं- हां मेरी जान, तुम्हें क्या मालूम कितना तड़पा हूं तुम्हारे बगैर!

यह कहते हुए मैंने उसके ब्लाउज को खोल दिया और होंठ चूसने लगा.

जया- कोई आ जाएगा!
मैं- कोई नहीं आएगा!

यह कह कर मैं उसके बूब्स दबाने लगा.
अब वह भी मेरे होंठ चूसने लगी और साथ देने लगी.

मैं- चूत कब दोगी?
यह कह कर मैंने उसके बूब्स पर रंग लगा दिया.

जया- आह … ओ ..ह क्या किया ये?
मैं- होली खेल रहा हूं जान, चूत कब दोगी?

जया- तुम्हें कब चाहिए?
यह कहते हुए वह मेरा लंड पकड़कर दबाने लगी.

मैं- मुझे अभी चाहिए!
एक बड़ा किस करते हुए उसने कहा- अभी जाओ, कल पक्का दूंगी.

मैं उसके बूब्स पर और ज्यादा रंग लगाते हुए मसलने लगा.
मैंने कहा- पक्का न!

उसने मुझे धकेलते हुए कहा- हां, पर अभी जाओ!
फिर मैं वहां से निकल गया.

अगले दिन सुबह से ही हमारा होली खेलना शुरू हुआ.
सचिन के कुछ दोस्त भी आए थे.
मेरी सास अन्दर बैठी थी.

तभी कविता और जया भी आ गईं.
उसने सभी को लस्सी का ग्लास दिया, मेरी सास को भी.
फिर सभी होली खेलने लगे.

जया ने गहरे रंग का कुर्ता पहना था.
रंग लगाते हुए मुझे दिखाया कि अन्दर उसने कुछ नहीं पहना है.

फिर मैंने भी मौका पाकर उसके बूब्स पर अन्दर रंग लगा दिया.
थोड़ी देर बाद मैंने उसके फोन पर कॉल किया और उसे एक तरफ आने को कहा.

वह फोन पर बात करने का नाटक करने लगी और वहीं आ गई जहां मैं पहले से था.

मैंने उसके बालों पर गुलाल डाला और उसके पीछे खड़ा हो गया, वहीं उसके कुर्ते को सरका कर अन्दर हाथ डालकर उसकी चूचियों को दबाने लगा.

फिर वहां भी रंग लगाया और बूब्स को मसलने लगा.
जया की मीठी सिसकारियां निकल रही थीं.

कुछ देर के लिए हम अलग हुए और सबके बीच जाकर होली में शामिल हो गए.

थोड़ी देर बाद मैंने फिर से जया को कॉल किया और वह अपना फोन लिए किनारे होती हुई मेरे पास उसी बाथरूम में आ गई.

अबकी बार मैंने उसकी लैंगिंग्स में हाथ डाला और उसकी चूत मसलने लगा.
वह मदहोश होने लगी, उसकी चूत पानी छोड़ रही थी.

मैंने अपना हाथ बाहर निकाल कर जेब में से थोड़ा सा रंग लिया और उसकी चूत में डाल दिया.
फिर पीछे से उसकी गांड पर भी रंग लगा दिया.

इस तरह कई बार में मैंने उसके सारे जिस्म को रंग दिया.

वह भी अब काफी गर्म हो चुकी थी.
अब जया बोली- क्या कर रहे हो यार, क्या यहीं मार दोगे आज?
मैंने कहा- हां तुम नंगी हो जाओ, फिर मार देंगे तुम्हारी चूत!

वह हंसने लगी और मेरे साथ किस करने लगी.
फिर कुछ समय बाद होली का खेल खत्म हो गया.

साले के दोस्त भी अब जा चुके थे.
सब लोग अपना रंग साफ करने में लगे थे.

तभी जया ने फिर से हर किसी को लस्सी पीने के लिए दी.
पर मुझे बाद में एक अलग ग्लास दिया.

मुझे थोड़ा अजीब लगा पर मस्ती में मैंने कुछ नहीं कहा.

शाम को होली समारोह के बाद सभी लोग अपने अपने घर आ गए.

हर कोई थका हुआ था.
यहां तक कि मेरी सास भी अब सोने जा रही थी जिसने कुछ भी नहीं किया था सिवाय नमस्ते करने के.

जया ने जिद से हर किसी को थोड़ी खीर खिलाई.
सब सोने लगे, तब रात के दस भी नहीं बजे थे.

कुछ देर बाद मेरे कमरे में आकर जया ने मुझे बाहर हॉल में बुलाया.
मैंने कविता को वहीं छोड़ दिया और बाहर आ गया.

तभी उसने मुझे कसकर पकड़ लिया.
मैंने कहा- सारे अभी ही सोए हैं, कुछ देर तो रुक जाओ मेरी जान!
जया- घबराओ मत, कल बारह बजे से पहले कोई नहीं जागेगा.

मैंने आश्चर्य चकित होकर पूछा- क्यों?
जया- बाबू, सबको जो लस्सी पिला रही थी, उसमे भांग मिली थी और रात की लस्सी में भी भांग मिलाई थी, वह और भी नशा बढ़ा देगी.

मैं- आज पूरा मजा लेने के मूड में हो!
यह कहते हुए मैं उसकी गांड पर एक चमाट लगा दी.

वह हंस कर बोली- सारे दिन से आग लगा रहे हो, क्या अब भी कोई शक है!

फिर हम दोनों एक अलग कमरे में आ गए.
वहां हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे.

उसने मुझे कसकर पकड़ रखा था और मैं उसके होंठ चूस रहा था.
कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और एक दूसरे को वासना से देखने लगे.

तभी उसने मुझे दोबारा से पकड़ लिया और हम एक दूसरे को प्यार करने लगे.
मैं उसकी पीठ सहलाते हुए उसकी गांड पर थपड़ जड़ रहा था और वह आह कह कर रह जाती.

हम लोग अब बिस्तर पर आ गए और एक दूसरे की बांहों में थे.
वह मेरे सीने पर सर रखकर लेटी हुई थी और मैं उसकी पीठ को सहला रहा था.

मैं- तूने ये सारा कुछ कल ही सोच लिया था न!
जया मेरी पैंट में हाथ डालती हुई बोली- हां मेरे राजा!

मैं- तुझे नहीं मालूम जय, मैं कितना तड़पा हूं तेरे लिए!
जया- जानती हूं राजा, तभी तो ये होली का प्रोग्राम बनाया.

इतना कहते ही उसने मेरा लंड पकड़कर बाहर निकाल लिया और मसलने लगी.

मेरा सात इंच लंबा और तीन इंच मोटा लंड पहले से ही तना हुआ था.
मैं- तुझे मेरा लंड पकड़ने में देरी नहीं लगती … बता किसका बड़ा है मेरा या तेरे पति का?

जया लंड सहलाती हुई बोली- आपका!
यह कह कर उसने खुद को झुकाया और लंड को चूसना चालू कर दिया.

मैं- लंड चूसने की बड़ी शौकीन है तू, बिल्कुल ट्रेंड हो गई है … साली कविता ऐसा कुछ भी नहीं करती … आह हा!
अब मैं बिल्कुल मस्ती में आ गया था.

जया- ये सिर्फ मेरा बाबू है, इसे प्यार भी सिर्फ मैं ही करूंगी.
Xxx फॅमिली स्टोरी में वह लगातार लंड चूसने में लगी थी.

मैं लेटा हुआ था और वह बगल में थी.
तभी मैंने उसे अपने आगे बैठाया और लंड उसके मुँह में दे दिया.

मैं- ऐसे सामने से आ जा मेरी जान, आह हां … तू रुक जा, अपने हाथ नीचे कर ले जान.
वह अभी भी लंड चूसने में मस्त थी.

मैं उसके बालों के साथ सर पकड़ कर उसके मुँह में ही लंड को आगे पीछे करने लगा.
वह बस उह उह उह उह कर रही थी.

मैं- हां आह ऐसे ही चूस … चूस … साली … रण्डी आह … ओह … ओह. ऐसे चुसाते हैं लंड … तेरा पति चुसाता है तुझे?
वह कुछ नहीं बोली.

करीब पांच मिनट तक लंड चुसाने के बाद मैंने उसे सीधा लिटा दिया और उसकी लैंगिंग्स खींच कर निकाल दी; फिर उसकी कुर्ती को भी उतार दिया.

मैं बिल्कुल दंग रह गया.
उसने अपने शरीर पर लगा रंग बिल्कुल भी साफ नहीं किया था.

मैंने पूछा- ये क्या तुम्हारा रंग ठीक से साफ नहीं हुआ क्या?
जया- आप ही तो कहते हो कि कविता बिल्कुल सादी है, इसलिए आपकी ये बीवी बिल्कुल रंगीन होकर आई है.

मैंने जल्दी से अपने कपड़े भी उतार दिए और उसके पैर खोलते हुए बीच में आ गया.
उसकी एक चूची को दबाते हुए दूसरे को चूसने लगा.

वह बस आह ओह कर रही थी और मेरे बालों को सहला रही थी.
मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ना चालू कर दिया.

वह गर्म तो पहले से ही थी सो सिसकारने लगी- आह अब और मत तड़पाओ … डाल दो चूत में.

उसकी चूत पूरी तरह से गीली थी.
मैंने भी एक ही झटके में उसके चूत में लंड घुसा दिया.

चूत में चिकनाहट के कारण मेरा आधा लंड अन्दर घुसता चला गया था.

लंड लेते ही वह जोर से चीख पड़ी.
मैं- क्या हुआ मेरी जान, अभी तो पूरा गया भी नहीं है!
जया- आह बड़े दिनों के बाद मिला है आह … इसलिए … दर्द हुआ आह!

मैंने उसके गाल को सहलाते हुए कहा- आज तो सारी रात चुदेगी तू … साली बाजारू रंडी बना दूंगा तुझे!

यह कहते हुए मैंने एक बार फिर जोर से शॉट मारा और पूरा लंड पेल दिया.
इससे पहले कि वह चीखती, मैं उसके होंठ चूसने लगा और वह आह करके रह गई.

मैं भी रुक गया और उसे किस करने लगा.
जब वह थोड़ी शांत हुई, तो खुद ही नीचे से झटके मारने लगी.

मैंने उसे अब चोदना शुरू कर दिया.
वह भी मजे में आ गई और बराबरी से मेरा साथ देने लगी.

एक बार मैं लंड अन्दर तक ले जाता, तो अगली बार वह चूत ऊपर लाती.

जया- आह … हां ऐसे … ही चोदो … अपनी रण्डी को … आह … बहुत मजा आ रहा है आह … ऐसे ही. फाड़ … दो ये… चूत मुझे … अपनी बना लो आह … आपकी ये रण्डी आपसे हर रोज चुदेगी ऐसे ही आह … आह!

वह कुछ ज्यादा ही जोश में आ गई थी, उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और अकड़ने लगी.

मैं समझ गया कि वह झड़ गई.

मैंने उसे फिर से चूमना चालू कर दिया और धीरे धीरे चोद भी रहा था.
उसके कान के कोने पर, गले पर, तो कभी होंठ चूसने लगता, जिससे वह फिर से गर्म होने लगी और मेरा साथ देने लगी.

अब मैं लेट गया और उसे अपने लंड पर बिठा लिया.
वह भी उछल उछल कर चुद रही थी और उसकी आवाज पूरे हॉल तक जा रही थी.

दस मिनट बाद वह फिर से झड़ गई.
अब वह मेरे ऊपर लेटती हुई कहने लगी- आह आज क्या खा लिया है कि तुम्हारा हो नहीं रहा है … आह!

मैं- क्यों मजा नहीं आ रहा क्या? आज तो सारी रात चोदूंगा तुझे!
जया- आह मजा ही तो आ रहा है, तभी तो तुम्हारा लंड लिया है.

मैं उसे फिर से लंड चुसाने लगा- आह ओह … आज तेरी बुर का भोसड़ा …. बना दूंगा … आह मेरी जान ऐसे ही चूस इसे … आह!

फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत चोदने लगा.
वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.

मैं- बहनचोद … तेरी तो चूत फाड़ दूंगा आज आह आह ले!
जया- फाड़ दो मेरे राजा … आह ये सिर्फ तुम्हारे लिए ही बनी है!

अब कमरे में सिर्फ जया की ओ…ह आ…ह आ…उई मां की आवाज निकल रही थी.

वहीं मेरा लंड उसकी चूत पर फच फ़च की आवाजें करता हुआ चल रहा था.

कमरे में मादक आवाजें गूंज रही थीं.

मैं- आह … मेरा अब निकलने वाला है!
जया- अन्दर ही डालना जान … आह अपना बीज … आह … क्योंकि इससे कुछ नहीं होगा.
मैं- किससे कुछ नहीं होगा? मेरे माल से? ले … बहन की लौड़ी … ले तेरी … चूत में गया आह.

ऐसे ही कहते हुए मैंने आठ दस शॉट मारे और उसके अन्दर ही अपना माल डाल दिया.
मैं उसके ऊपर ही लेट गया.

मेरे साले की बीवी मुझसे रंडियों की तरह चुदी.

थोड़ी देर बाद हम दोनों अलग हुए.

कुछ देर बाद मैंने एक बार फिर से उसे मसल कर चोदा और उसके बाद हम दोनों वैसे ही नंगे एक दूसरे को पकड़ कर सो गए.

सुबह नौ बजे के बाद मेरी नींद खुली तो जया वहां नहीं थी और बाकी सब सोए हुए थे.

मैं उठकर बाहर आया तो वह किचन में थी.
उसने एक मुस्कान के साथ मुझे देखा.

मैं- सच में, ये सब अभी सो रहे हैं?
जया- मैंने क्या कहा था न जल्दी कोई नहीं जागेगा!

मैं- तुमने दवा ली?
जया- कौन सी?
मैं- प्रेगनेंसी रोकने वाली!
जया- नहीं, मुझे बच्चा चाहिए.

यह कहते हुए वह मेरे पास आई और मेरे पास आकर धीमी आवाज में बोली- सचिन सन्यासी बन गया है, पर मैं थोड़ी ना हो गई हूं!

फिर मैंने एक बार और उसे किचन में ही पकड़ चोद दिया और सारा माल उसकी चूत में ही डाल दिया.

उसके अगले दिन हम अपने घर वापस आ गए.

अगली कहानी में बताऊंगा कि कैसे मैंने जया के साथ सेक्स किया था और कहां कहां चोदा था.
फिर कैसे उसने खुद को मेरे हवाले किया और वह आज भी मेरी रातें रंगीन करती है.

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