पापा-मम्मी और आंटी ने कुंवारी लड़की को चोदा- 1

Views: 102 Category: Risto Me Chudai By rahulenters8 Published: August 28, 2026 📖 10 min read
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पापा सेक्स कहानी में मेरी सहेली ने अपनी पहली चुदाई का बताया तो मेरा मन भी सेक्स के लिए बेचैन होने लगा. मैं उंगली से मजा लेने लगी. लेकिन एक रात …

दोस्तो, मेरा नाम सोनम है.
ये पापा सेक्स कहानी मेरे पहले सेक्स के ज्ञान से शुरू होती है.

उस वक्त मैं जवान हो गई थी.
उसी वक्त मेरी एक सहेली टीना ने बताया कि उसने पहले सेक्स का अनुभव अपने भाई के साथ कैसे लिया.

पहले तो मैंने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया लेकिन उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को देख कर लगा कि वह सच कह रही है.
तब मेरी चूचियां तो बिल्कुल छोटी सी थीं लेकिन जब पहली बार मैंने अपने रूम में उन्हें दबाया, तो मुझे बहुत मजा आने लगा.

मैंने सोचा कि साली टीना ने सही बताया है सेक्स के बारे में … चूचियां दबाने में ही इतना मजा आ रहा है तो चुत में लंड लेने में तो मजा का टॉप छूने को मिल जाएगा.

मेरे घर पर मेरे पापा और मम्मी एक रूम में और दूसरे रूम में मैं अकेली ही रहती थी.

एक दिन मुझे बड़ी जोर से चुदास चढ़ी थी तो मैंने अपना रूम अन्दर से लॉक किया और अपनी पजामी और पैंटी उतार कर अपनी चूत को देखा.
ज्यादा कुछ तो नजर नहीं आया लेकिन हल्की हल्की झांटें और एक पतली सी दरार दिखी.
मैंने अपनी बुर की फांक में उंगली घुसेड़ दी.

आह … क्या मजा आ रहा था.
मैंने अपनी उंगली को चूत के छोटे से छेद पर रखकर कुछ और अन्दर को घुसाया तो थोड़ा दर्द सा हुआ.

मैंने उंगली बाहर निकाल ली.

कुछ देर बाद मन नहीं माना तो मैंने फिर से अपनी चूत रगड़ना शुरू कर दी.

इस बार तो मेरी चूत ऐसे मचलने लगी, जैसे कुछ मांग रही हो.
बस मेरी उंगली चूत में घुसती चली गई … बिना दर्द की परवाह किए मैंने धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

अब तो मुझसे रुका ही नहीं जा रहा था.
यह लगभग रोज चलने लगा था.

मेरी सहेली भी मुझे बट प्लग दिखा कर बताने लगी थी कि वह आजकल अपने ब्वॉयफ्रेंड से गांड मरवाने की तैयारी कर रही है.
उसने गांड मरवाने के लिए किस तरह से तैयारी की जाती है, उसके लिए भी काफी कुछ बताया.

मैं चुप रही और अपने घर आ गई.
मैंने भी गूगल पर जानकारी हासिल की और ऑनलाइन एक बट प्लग मँगवा लिया.

मैं अपनी गांड को कुरेदने की प्रेक्टिस करने लगी.
मगर मुझे मजा नहीं आया तो मैंने ज्यादा नहीं किया.

अब मैं रोज ही अपनी चुत के साथ खेलने लगी थी.

एक रात को मैंने अपने कमरे में बैठकर अपनी एक उंगली से अपनी चूत को कुरेदा तो एक करंट सा लगा मानो जन्नत का सुख मिला हो.
अब मैं अपनी चुत में उंगली करने लगी थी और सोचने लगी थी कि किस लड़के का लंड अपनी चुत में ले लूं.

अचानक से पापा मम्मी के रूम से चीखने और झगड़े की आवाज आई.
मैंने झट से अपने कपड़े पहने और रूम के बाहर आ गई.

जैसे ही मैं मम्मी के रूम के पास आई तो देखा कि एकदम से दरवाजा खुला और मम्मी रोती हुई बाहर आ गईं.
पापा केवल अपनी अंडरवियर में पीछे खड़े थे.

मेरी नजर पापा के तंबू बने लंड पर पड़ी तो आंखें वहीं जाकर रुक गईं.
इससे पहले में मम्मी से कुछ पूछती, मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ा और वे मेरे रूम में आ गईं.

उन्होंने रूम लॉक किया और धम से बिस्तर पर गिर कर सो गईं.
अब मेरी चूत में खुजली बढ़ गई थी लेकिन मम्मी के होते मैं अपनी चुत में उंगली कैसे करती, इसलिए मैं भी चुपचाप सो गई.

बस सोते समय पापा का वह तंबू दिमाग में घूमने लगा कि कैसा होता होगा लंड और चूत में … कैसे अन्दर जाता होगा वगैरह वगैरह.
फिर मैंने आंखें बंद की और सो गई.

सुबह देर से उठी तो देखा मम्मी रूम में नहीं हैं.
मैं फ्रेश होकर बाहर हॉल में आई, तो देखा कि पापा बड़े नाराज और गुस्से से चेयर पर बैठे हैं.

मैंने सोचा कि कल रात क्या हुआ, पापा से पूछा जाए.

मैं पापा के पास गई और पूछा- मम्मी कहां हैं पापा?
पापा ने कहा- बाहर गई हैं.

वे मुँह फिरा कर बैठ गए.

मैंने कहा- पापा कल क्या हुआ था, आप झगड़े क्यों थे मम्मी से?
पापा ने बड़ी निराशा से कहा- बेटी तुझसे क्या छिपाऊं. तेरी मम्मी मेरी जरूरत पूरा नहीं करती है.

मैंने पूछा- कौन सी जरूरत पापा?
पापा ने कहा- तुझे बताकर क्या फायदा?

मैंने कहा- बोलिए न पापा, मैं आपकी बेटी हूं. क्या आपकी जरूरत मैं पूरा नहीं कर सकती भला?

पापा ने मेरी आंखों में देखा और मैंने पापा की.

पापा ने कहा- तेरी मम्मी मुझे प्यार चाहिए नहीं दे पाती हैं!
मैं पापा के करीब गई और अपने दोनों हाथ को पापा के कंधों पर रखकर हल्की सी झुक गई.

मेरी छोटी छोटी चूचियां पापा के मुँह के सामने थीं.
मैंने पापा से कहा- जिसने मुझे पैदा किया, उसे मैं प्यार ना दूँ तो बेटी कहलाने का क्या मतलब!

पापा ने भी इशारा समझ लिया और मुझसे कहा- बेटी तुझे पैदा करने वाला अंग इधर नहीं, बल्कि यहां है.
उन्होंने अपनी आंखें अपने पैंट पर कर दीं.

अब मुझे डर सा लगा कि ये सब गलत तो नहीं हो रहा है. लेकिन मेरी वासना ये सब भूल गई और मैं अपने घुटनों के बल बैठ गई.
मेरे हाथ पापा की जांघों पर आ गए और आंखें पापा के लंड की ओर चली गईं.

पापा ने भी मौका देखकर अपनी पैंट को खोल दिया और अपना अंडरवियर नीचे घुटनों तक उतार दिया.
पापा का लगभग 5 इंच का सोया हुआ लंड मेरी आंखों के सामने था.

मैंने पहली बार लंड के दर्शन किए थे.
मैंने सिर उठाकर पापा को देखा तो उनका एक हाथ मेरे सर के पीछे आकर मुझे अपने लंड पर झुकाने लगा … और मैं भी अपने को रोकने के बजाए उनके लंड पर झुकती चली गई.

मेरी नाक में पापा के लंड की खुशबू पागल सा करने लगी और मेरी जुबान लंड को चाटने लगी.
अचानक से पापा के लंड में हल्के हल्के झटके आने लगे और देखते ही देखते पापा का लंड 8 इंच का लंबा और मोटा हो गया.

मेरी तो आंखें फटी की फटी रह गईं कि इतना बड़ा लंड कोई कैसे चूत में ले सकता है?
मैं यही सब सोचती रही.

उधर पापा का लंड तो मेरे मुँह को निशाने पर रखकर अन्दर जाने की कोशिश करने लगा.

मेरा मुँह खुलते ही पापा ने मेरा सिर नीचे को दबा दिया और मैं ‘उम ऊम’ करके लंड को अपने मुँह के अन्दर बाहर होते देखती रही.

मेरी सांसें फूलने लगी और बड़ी मुश्किल से मुझे हटने का अवसर मिला.
मेरे मुँह की लार से लंड गीला हो चुका था.

मैं उठ खड़ी हुई और पापा ने मेरी पजामी नीचे उतार दी.
उन्होंने मेरी पैंटी को भी उतार दिया.

मैंने शर्म के मारे अपने हाथ से चूत को छिपा लिया.
मैं जानती थी कि पापा मेरे हाथ को भी हटाएंगे ताकि मेरी चूत के दर्शन कर सकें.

लेकिन पापा ने वैसा कुछ नहीं किया बल्कि मेरी पतली कमर पर दोनों हाथ रखकर मुझे उल्टा कर दिया.
अब मेरी नंगी गांड पापा के सामने थी.

पापा ने मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ मारा तो मुझे करंट सा लगा.
उन्होंने मुझे खींचकर अपने लंड पर बैठा दिया.
वे मेरी दोनों चूचियों को दबाकर अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ने लगे.

मुझे तो मजा सा आ गया और मैंने पीछे मुड़कर पापा की ओर प्यार भरी नजरों से देखा.
पापा में मेरे होंठों को कस कर चूम लिया.

मैंने अपने एक हाथ से पापा का लंड अपनी चूत पर सैट किया और हल्के हल्के से अन्दर लेने की कोशिश करने लगी.
पर लंड मोटा था और चुत सील पैक थी तो दर्द हो रहा था.

उन्होंने अपने लौड़े को चुत में पेलने के लिए ताकत लगाई तो मैं दर्द के मारे उछल पड़ी.

पापा ने मेरी कमर पकड़ कर वापस लौड़े पर सैट किया और कहा- रुको, मैं करता हूँ.
उन्होंने मुझे हल्का सा उठाया और अपना लंड पकड़ कर मेरी गांड की छेद पर टिका दिया. वे मुझे नीचे दबाते हुए लंड पर बिठाने लगे.

मुझे उनका लंड चुभने लगा.
मैंने कहा- पापा ये आप कहां डाल रहे हो?

मैंने थोड़ा सरक कर उनका लंड चूत के छेद पर सैट कर दिया और इस बार मैं हल्के हल्के ऊपर नीचे होकर चूत में लंड को लेने लगी.
दर्द के साथ साथ मजा भी आ रहा था.

मैं आह आह करने लगी.
तभी पापा ने मेरी पीठ पर एक जोर का धक्का मारा और मैं सीधी जमीन पर जा गिरी.

मैंने कहा- क्या हुआ पापा?
पापा ने कहा- तू और तेरी मां एक जैसी ही हो, जो मुझे करना ही वह करने ही नहीं देती.

मैंने कहा- आपका मतलब क्या है पापा?
तो पापा ने कहा- मुझे गांड मारनी है … न कि चूत .. वह तो तेरी मम्मी की मार मार कर थक गया हूं.

मैं यह सुनकर हैरान रह गई.
तब समझ में आया कि पापा मम्मी में क्या झगड़ा हुआ होगा.
लेकिन अब तो मैं भी अपने ही जाल में फंस गई थी.

पापा ने मुझे घोड़ी बनाया और अपना लंड गांड पर टिका दिया.
मैंने कहा- प्लीज पापा, ये मेरा पहली बार है!

पापा ने कहा- तू अपनी गांड ढीली छोड़ना बस, कुछ नहीं होगा.
ये तो मेरी सहेली ने भी बताया था कि सेक्स में गांड मारी जाती है, लेकिन उसके लिए तैयारी करनी पड़ती है और मैंने एक दो बार ही अपनी गांड में बट प्लग डाला था.

मैं आंखें बंद करके पापा के लंड को अपनी गांड पर महसूस करने लगी.
पापा का प्रेशर बढ़ने लगा तो मेरी चीख निकलने लगी.
मेरी समझ में ही नहीं आ रहा था कि मुझे अब बचाएगा कौन?

मेरी गांड का ढक्कन खुलने लगा और पापा का लोहे जैसा लंड गांड के अन्दर जाने के लिए पूरा दबाव डालने लगा.
मेरे पसीने छूटने लगे और अचानक से डोर पर बेल बजी.

मैं तो खुशी से उछल पड़ी और झट से अलग हो गई.
हम दोनों ने अपने कपड़े पहने.

मैं दौड़ कर डोर खोलने गई तो देखा मम्मी आई थीं.
मैंने मम्मी को कसकर गले से लगा लिया, ऐसा मैंने पहले कभी नहीं किया था.

मम्मी ने कहा- क्या बात है, इतना प्यार मम्मी पर कैसे आज?
मैंने कुछ नहीं कहा और मम्मी के साथ रूम में आ गई.

पापा से नजरें मिलाईं तो देखा कि पापा की आंखों में हवस भरी हुई थी.
शाम होने लगी और मम्मी तैयार होकर कहीं जाने लगीं.

तब मैंने देखा कि पापा तो वहीं कुर्सी पर बैठकर शायद इसी समय का इंतजार कर रहे थे.
मैंने सोचा कि अगर मम्मी चली गईं तो पापा मुझे पकड़ कर मेरी गांड बुरी तरह से मार देंगे.

इसी लिए मैंने मम्मी से कहा- मम्मी, मुझे भी आपके साथ बाहर चलना है!

मम्मी ने कहा- मैं तो मोना आंटी के घर जा रही हूं, तेरा वहां क्या काम?
मैंने कहा- मम्मी जो भी काम होगा, कर दूंगी पर मुझे आपके साथ चलना है.

मम्मी हल्के से मुस्कुरा दीं और उन्होंने ओके कर दिया.

मैं बहुत खुश थी लेकिन मुझे क्या पता था कि मैं कुंए से बचकर खाई में जा रही हूं.

मोना आंटी के घर पहुंचे तो वे बिल्कुल अकेली थीं.

मम्मी ने आंटी से कहा- लो आज कुछ नया लाई हूं तेरे लिए!
वे दोनों मुझे देखकर हंसने लगीं.

मोना आंटी में मुझसे कहा- सोनम, आज तुझे वहां ले जाएंगे, जहां से तू आई है!
मोना आंटी ने मम्मी के कान में कुछ कहा और मम्मी रूम में चली गईं.

मैंने मोना आंटी से पूछा- कहां ले जाओगी आप मुझे?
मोना आंटी ने कोई उत्तर नहीं दिया और वे यह कह कर फ्रिज के पास चली गईं कि तुम पहले जूस पियो!

उस जूस को पीते ही मेरे तनबदन में आग सी लगने लगी और मेरा मूड बनने लगा.
मुझे अपनी चुत में चीटियां सी रेंगती महसूस होने लगी.

मैं अपने हाथ से अपने दूध मसलने लगी और सोचने लगी कि मैं मम्मी के साथ गलत आ गई, उधर पापा से ही चुदवा लेती तो ठीक रहता.

दोस्तो, मैं क्या सोच रही थी और मेरे साथ क्या हुआ … वह सब आपको इस सेक्स कहानी के अगले भाग में पढ़ने को मिलेगा.

प्लीज मेरी इस पापा सेक्स कहानी पर अपने मेल जरूर भेजें.
आपकी कमसिन सोनम
rahulenters8@gmail.com

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