पिता बेटी सेक्स कहानी में मैं और मेरी मम्मी एक जैसी दिखती हैं. मैं अक्सर मम्मी की नाइटी पहन लेती थी. इस चक्कर में मेरे साथ क्या हो गया?
मेरा नाम खुशी है.
मेरी उम्र 22 साल है, ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही हूँ, और मेरे परिवार में मैं इकलौती बेटी हूँ।
हमारे घर में मैं हूँ, मेरे पापा हैं और मेरी मम्मी हैं।
मेरे पापा की उम्र 45 साल है और मेरी मम्मी की उम्र 42 साल है।
मैं अपनी मॉम पर गई हूँ।
मेरा चेहरा भी मेरी मॉम पर गया है और बहुत लोग मेरी मॉम को मेरी बड़ी बहन समझते हैं क्योंकि मैं 22 की और मेरी मॉम 42 की हैं।
पापा भी अभी यंग हैं, वे भी सिर्फ 45 के हैं और पूरी फिट एंड फाइन हैं, पूरी यंग लड़के की तरह।
मेरे पापा कॉरपोरेट ऑफिस जॉब करते हैं जहाँ हमेशा पार्टियाँ होती रहती हैं, जिसके कारण पापा महीने में 7 या 8 बार घर देर से आते हैं, वे भी पूरे नशे में।
यह हमारी जिंदगी का एक आम हिस्सा बन गया था।
मेरा घर एक नॉर्मल मिडिल-क्लास फैमिली के घर की तरह ही था।
घर में दो रूम थे, एक मम्मी-पापा के लिए और एक मेरा रूम था।
घर में एक हॉल, एक किचन और बाथरूम भी था।
मम्मी घर में रात को हमेशा नाइटी पहनती हैं जबकि मैं रात को पजामे और सूट पहनती हूँ, पर कभी-कभी मम्मी के कहने पर नाइटी भी पहन लेती थी जब मेरे कपड़े भीग जाते थे।
मुझे पजामे और सूट ही पसंद थे, इसलिए मैंने कभी नाइटी नहीं खरीदी थी।
जब भी पहनती थी तो मम्मी की ही नाइटी पहनती थी।
मेरी कहानी उस वक्त शुरू हुई जब ठंडी का मौसम था, दिसंबर का महीना।
सब नॉर्मल था।
एक दिन कॉल आया कि नानी की तबियत खराब है।
मम्मी परेशान हो गईं और नानी से मिलने जाना चाह रही थीं।
मम्मी पापा से बोलीं कि नानी की तबियत खराब है।
पापा ने पूछा, “ज्यादा खराब है?”
मम्मी बोलीं, “हाँ, खराब है पर अभी थोड़ा ठीक भी है।”
पापा ने कहा, “ज्यादा तबियत खराब हो तो चले जाना।”
उसके बाद दो-तीन दिन बीत गए।
दिन था शनिवार का, पापा ऑफिस चले गए, मैं कॉलेज नहीं गई थी।
लगभग 3 बजे कॉल आया कि नानी की तबियत फिर खराब हो गई है और हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा।
कॉल के बाद मम्मी पूरी परेशान हो गईं।
मम्मी पापा को कॉल करने लगीं पर पापा का फोन नहीं लग रहा था।
मम्मी बताने के लिए कॉल कर रही थीं कि वे नानी के घर जा रही हैं पर पापा का कॉल नहीं लग रहा था।
मैंने कहा, “मम्मी आप जाइए, मैं बता दूँगी पापा को कि नानी की तबियत ज्यादा खराब हो गई थी।”
उसके बाद मम्मी नानी के घर चली गईं 4 बजे और मैं भी गेट लगा के काम करने लगी और खाना बनाने लगी।
खाना बनाते वक्त मेरे कपड़ों पे खराब हो गया था और मेरे दूसरे कपड़े धुले हुए थे, इसलिए मुझे मम्मी का नाइटी पहनना पड़ा।
रात के 7 बजे मुझे भूख लग गई थी, तो मैंने खाना खा लिया और अपने रूम में जाकर फोन चलाने लगी।
तभी लाइट कट गई.
मुझे अँधेरे से बहुत डर लगता है।
मैंने सबसे पहले कैंडल जलाया।
मैंने कुछ देर वेट की पर लाइट नहीं आई।
घर में मैं अकेली थी तो मुझे डर लग रहा था।
मैं मम्मी के रूम में चली गई क्योंकि वहीं घर का पूजा स्थान था जहाँ भगवान थे।
मुझे लगा मैं उस रूम में रहूँगी तो डर नहीं लगेगा।
मैं मम्मी के रूम में जाकर फोन चलाने लगी, वहीं कैंडल रखकर फोन चलाते हुए।
रात के कब 9 बजे गए, मुझे पता ही नहीं चला और मुझे नींद आने लगी तो मैं मम्मी के ही रूम में सो गई।
पापा अभी तक घर नहीं आए थे, शनिवार था तो मुझे लगा वे लेट से ही आएँगे, तो मैं सो गई।
रात के 10 बजे पापा घर आए, मैं सो रही थी.
पापा पूरे नशे में थे।
पहले ही कहा था कि महीने में पापा कुछ दिन ऐसे ही नशे में घर आते हैं, वह दिन भी वैसा ही था।
मैं रूम में सो रही थी, पापा घर आए।
पापा के पास घर की एक चाबी रहती है, तो वे रात में गेट खोलकर अंदर आ गए।
घर में लाइट नहीं थी, पापा नशे में रूम में आए।
रूम में कैंडल जल रही थी तो हल्की-हल्की रोशनी थी।
पापा आए और नशे में ही अपने कपड़े चेंज किए.
पापा रात को लुंगी पहनकर सोते हैं।
मैं वहीं रूम में बेड पे आराम कर रही थी।
पापा को लगा मैं मम्मी हूँ।
मैं विश्राम कर रही थी तो मुझे पता भी नहीं चला कि पापा आगे हैं।
पापा मेरे पास आकर सो गए, वे मुझे मम्मी समझ रहे थे क्योंकि मैं मम्मी की नाइटी पहनकर मम्मी के ही रूम में सोई हुई थी।
रूम में पूरा अँधेरा था, पापा मेरे बगल में आकर सो गए।
वे पूरे नशे में थे, वे आकर मुझे पकड़कर सोए।
मैं आलस्य में थी तो पता नहीं चला जब वे मुझे पकड़े।
उसके बाद उन्होंने मेरे गर्दन पर किस किया।
रूम में कैंडल जल रही थी, वह भी बुझ गई थी।
रूम पूरा अँधेरा था, हल्की सी चाँद की रोशनी खिड़की से आ रही थी।
उसके बाद पापा अपनी लुंगी खोलकर सिर्फ अंडरवियर में हो गए और मेरी नाइटी को अपने हाथ से ऊपर करके मेरी पैंटी खोल दी।
मैं विश्रामावस्था में थी और मुझे अभी तक कुछ खास पता नहीं चला.
लेकिन जब पापा मेरे ऊपर आए, मेरे दोनों पैरों को खोलकर अलग किया और अपने अंडरवियर को खोलने लगे और अपने लंड को मेरे अंदर डालने लगे, तब मेरी तंद्रा टूटी।
पापा का लंड पहली बार मेरे अंदर नहीं गया, मुझे थोड़ा लगा पर मन में थोड़ा रोमांच भी था।
मैं कुछ बोलने जा रही थी, तब पापा मेरे ऊपर पूरे तरह से आगे थे।
जैसे ही मैंने मेरे मुँह से हल्की सी आवाज निकाली दर्द की, तो पापा मुझे किस करने लगे और मेरे ऊपर पूरी तरह से चढ़ने लगे।
पापा मुझे किस कर रहे थे, एक हाथ से मुझे अपनी बाँहों में जकड़े हुए थे, जिसके कारण मैं हिल भी नहीं पा रही थी।
उसके बाद अपने दूसरे हाथ का इस्तेमाल करके लंड को मेरे बूर में सेट किया और जोर का धक्का दिया।
पापा नशे में होने के कारण नहीं पता था कि मैं उनकी बेटी हूँ।
पापा का लंड मेरे अंदर जैसे ही गया, मुझे कुछ लगा, पर मैं कुछ नहीं बोली क्योंकि पापा मुझे लगातार किस कर रहे थे।
लेकिन दर्द से मेरे आँखों से आँसू निकल गए थे।
पापा जैसे मम्मी को चोदते हैं, वे मुझे भी मम्मी समझकर चोदने लगे।
लंड अंदर के बाद, पापा अपना लंड को मेरे बूर के अंदर-बाहर करके चोदने लगे।
पहले 2 मिनट तो पापा धीरे-धीरे चोद रहे थे, फिर उसके बाद उनकी चोदने की रफ्तार बढ़ गई।
उनके चोदने के रफ्तार के कारण मेरे दर्द भी मुझे अच्छा लगने लगा और मैं भी तब तक गर्म हो गई थी जब पापा मुझे चोद रहे थे।
और मैं भी फिर पापा का साथ देने लगी, अपनी कमर को उठा-उठा कर पापा मुझे चोदते जा रहे थे।
लगभग 10 मिनट चोदने के बाद पापा बोले, “आज तुमको चोदते हुए मुझे हम दोनों की फर्स्ट नाइट लग रही है!”
और इतना कहकर पापा मुझे और तेज चोदने लगे और उसके बाद अपना एक हाथ मेरे दूध पर रखकर उसे दबाने लगे।
कुछ देर दबाने के बाद, वे मेरी नाइटी को और ऊपर करके मेरे दूध को मेरी ब्रा से अलग कर दिया।
जिससे मेरा दूध मेरे सीने में साफ, मेरे पापा के पास था, पर पापा उसे देख नहीं पा रहे थे, सिर्फ महसूस कर रहे थे।
और वे अपने मुँह को मेरे दूध पर ले गए और उसे पीने लगे।
पापा ने जैसे ही मेरे दूध को अपने मुँह से पिया, मेरे अंदर एक अजीब सी गर्मी और अजीब सा एहसास हुआ जो मुझे अलग ही लग रहा था।
मेरे पापा मेरे दूध को पीते जा रहे थे और मुझे चोदते जा रहे थे।
मुझे अब बहुत अच्छा लग रहा था।
फर्स्ट टाइम कोई मेरे दूध को पी रहा था।
उसके बाद, पापा ने मेरे दोनों दूध को अपने मुँह में ले-लेकर चूसा और मुझे जोर से चोदा।
मेरा दर्द अब एक अलग ही सुकून में बदल गया था।
पापा के चोदने का रफ्तार और तेज होता जा रहा था और मुझे भी अब और अच्छा लगने लगा था।
रात के एक बज रहे थे, पापा अभी भी मुझे चोदे जा रहे थे।
मेरा साँस तेज हो गया था, और मैं भी अपने पापा के साथ मिलकर उनका साथ दे रही थी।
हमारे बीच की एक अनोखा रिश्ता बन गया था उस रात को, जो मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी।
पापा ने अपनी रफ्तार बढ़ाते हुए मुझे जोर से चोदा, और फिर एकदम से उनका सारा लंड मेरे अंदर और गहरा चला गया।
उन्होंने मुझे जोर से अपनी बाँहों में जकड़ लिया, और एक जोर से चीख मारकर अपना लंड मेरे अंदर खाली कर दिया।
मैं नींद में थी, पर उनका हर एक धड़कन महसूस कर रही थी।
पापा ने अपना लंड मेरे अंदर रखकर मुझे जोर से पकड़ लिया।
उनकी साँस तेज थी और मेरी भी।
उसके बाद पापा ने अपना लंड धीरे से निकाला और मेरे बगल में सो गए, मुझे अपनी बाँहों में पकड़कर।
रात के उस अँधेरे में, मैं अपने पापा के साथ उस रिश्ते को लेकर बहुत परेशान थी।
लेकिन उन्होंने मुझे इतना प्यार से पकड़कर रखा था कि मैं कुछ बोल नहीं पाई।
रात का वह पल मेरे लिए कभी भूलने वाला नहीं था।
सुबह जब मैं उठी, पापा अभी भी सो रहे थे।
मैं धीरे से उनकी बाँहों से निकलकर अपने रूम में चली गई।
मेरे मन में बहुत सारी बातें चल रही थीं।
मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या हुआ और क्यों हुआ।
पर वह एक रात मेरी जिंदगी का सबसे अनोखा पल था जो मैं कभी भूल नहीं सकती थी।
मैं तुरंत नहाकर फ्रेश हुई, लेकिन मुझे अंदर से अजीब सा लग रहा था।
मैं अपने कमरे में गई और कपड़े पहनकर नाश्ता बनाने लगी।
पापा जब उठे, तो उन्होंने देखा कि मैं रूम में नहीं हूँ। वे अपने कपड़े पहनकर सीधा मेरे कमरे में आए।
मैं पापा को देखकर कुछ नहीं बोल पाई।
पापा ने मुझे देखते ही पूछा, “तुम्हारी मम्मी कहाँ हैं?”
मैंने रुकी हुई आवाज में जवाब दिया, “मम्मी तो कल दोपहर को नानी के घर चली गई थीं।”
पापा यह सुनकर परेशान हो गए और उन्होंने पूछा, “कल रात को फिर तुम मम्मी के रूम में क्यों थी?”
मैंने कुछ देर चुप रहकर कहा, “लाइट चली गई थी और मुझे अँधेरे से डर लगता है, इसलिए मम्मी के रूम में सो गई थी।”
पापा ने यह सुनकर अपना सर पकड़ लिया।
उन्होंने कहा, “मुझे पता ही नहीं चला कि मैं तुम्हारे साथ क्या कर रहा हूँ।”
मैं चुप थी.
और पापा भी कुछ देर तक चुप रहे।
फिर पापा ने कहा, “जो कुछ भी हुआ, वह गलत था। मैं नशे में था और मैंने तुम्हें मम्मी समझकर यह सब किया।”
मैंने पापा से कहा, “पापा, जो हुआ सो हुआ। आप इससे लेकर इतने परेशान मत हो। यह सिर्फ एक गलती थी।”
पापा फिर भी परेशान थे।
मैंने उन्हें खाना खाने को कहा पर उन्होंने मना कर दिया।
पापा ने अपने आप को एक कमरे में बंद कर लिया और दिन भर कुछ नहीं खाया।
मैं भी अपने कमरे में बैठी रही, कुछ समझ नहीं पा रही थी कि आगे क्या होगा।
दोपहर को मैं पापा के कमरे में गई और उन्हें खाना देने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कुछ नहीं खाया।
उन्होंने सिर्फ इतना कहा, “मुझे कुछ वक्त चाहिए।”
मैं भी चुपचाप वहाँ से निकल आई।
मुझे भी समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ।
एक रात ने मेरी जिंदगी का चेहरा बदल दिया था।
उस रात के बाद, पापा और मैं एक दूसरे से नजर नहीं मिला पा रहे थे।
पापा ऑफिस जाते, मैं कॉलेज जाती, पर हम दोनों के बीच वह एक अजीब सी दूरी बन गई थी।
हम दोनों को समझ नहीं आ रहा था कि कैसे इस बात का सामना करें।
यह कहानी यहीं पर खत्म नहीं हुई थी। लेकिन उस रात ने हमारे रिश्तों में एक गहरा असर डाल दिया था। मैं यह सब कुछ समझ नहीं पा रही थी, लेकिन मुझे पता था कि यह मेरी जिंदगी का एक अहम मोड़ था।
kumarikhushimwd@gmail.com