Papa Ka Dost - 2

Views: 184 Category: Jawan Ladki By Garimasexy Published: July 03, 2025

📚 Series: Papa Ka Dost

अब आगे ठरकी अंकल के घर में :

एक बार की बात है, सोनू छुट्टियों में घर आया हुआ था।
मैंने पहले ही फोन पर सोनू को अंकल के बारे में बता दिया कि कैसे पापा के एक दोस्त इस समय मुझे लाइन मार रहे हैं और मैं भी उन्हें लाइन दे रही हूँ।
इस बात के सोनू भी मजे लेता था।

सोनू के आने के बाद एक बार अंकल घर आये थे तो सोनू ने चोरी से उनकी हरकत को देखा और फिर उनके जाने के बाद बोला- अंकल तो सच में तेरे दीवाने लग रहे हैं।

सोनू ज्योति की चुदाई करना चाहता था लेकिन मौका ही नहीं मिल पा रहा था क्योंकि ज्योति के घर उसके कुछ रिश्तेदार आए थे और हमारे घर तो मम्मी का पहरा था ही।

मैंने आइडिया दिया कि क्यों ना अंकल के घर तू ज्योति की चुदाई कर लेना उनके घर में कोई नहीं है।

सोनू बोला- अरे तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे पापा को पता नहीं चलेगा और क्या बता कर चलेंगे कि अंकल के घर जा रहे हैं मस्ती करने! और अंकल को क्या बोलेंगे कि हम आपके घर आ रहे हैं क्योंकि मुझे एक लड़की को चोदना है?

मैं बोली- तू उसकी चिंता मत कर … मैं बताती हूँ क्या करना है।

फिर हमने ज्योति को भी प्लानिंग के बारे में बता दिया।
ज्योति भी तैयार हो गयी।

दरअसल पापा ने एक बार बातचीत में कहा था कि अंकल की मैथ बहुत अच्छी है और वे कॉलेज के टाइम उनसे मैथ पढ़ते थे।
मैंने ज्योति को शाम को घर पर बुला लिया था पढ़ाई के बहाने से।

पापा जब ऑफिस से लौटे तो मैंने कहा- पापा ने बताया था कि अंकल की मैथ बहुत अच्छी है। तो उनसे बोल दीजिए कि हमारे कॉलेज में टेस्ट है तो थोड़ा मैथ में मुझे और ज्योति को थोड़ा गाइड कर दें।

इस पर पापा मान गये और अंकल को फोन किये कि गरिमा और उसकी दोस्त को थोड़ा मैथ पढ़ना था तो अगर टाइम हो तो थोड़ा पढ़ा दो।
अंकल बोले- हाँ हाँ, क्यों नहीं! थोड़ी देर में घर पर आने को बोल दो मैं गाइड कर दूँगा।

मैंने पापा के सामने ही सोनू से बोला- सोनू तू भी चल न साथ में!
सोनू तुरंत बोला- ठीक है चलो, मैं भी खाली ही बैठा हूँ।

फिर मैं, ज्योति और सोनू पैदल ही ठरकी अंकल के घर में चले आए।
अंकल ने दरवाजा खोला।
उन्होंने लोअर और टीशर्ट पहना हुआ था।

सोनू को देखकर अंकल का मूड थोड़ा खराब हो गया।
उनका चेहरा देखकर हम तीनों मन ही मन हंस दिये।

अंकल अंदर बुलाकर आगे चले तो हम तीनों एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुरा दिये।
हम तीनों समझ रहे थे कि सोनू को देखकर अंकल का मूड खराब हो गया है।

लेकिन बेचारे अंकल को क्या पता कि असली मजा तो सोनू की वजह से ही मिलेगा उन्हें!

हम तीनों सोफे पर बैठ गये और बातें करने लगे।

अंकल किचन से पानी लेकर आये और टेबल पर रखते हुए बोले- चाय पियोगे तुम लोग?

सोनू बोला- हां हां क्यों नहीं … आप बैठिये, हम बनाते हैं चाय!
फिर ज्योति की तरफ देखते हुए बोला- चलें दीदी, आप और हम मिलकर चाय बनाते हैं.
ज्योति मुस्कुराते हुए बोली- चलो।
फिर वह मेरी ओर देखते हुए बोली- तू अंकल के साथ बैठ, मैं और सोनू चाय बनाकर लाते हैं।

यह कहकर वे दोनों किचन में चले गये।
अंकल ने बता दिया कि किचन में चाय, चीनी वगैरह कहाँ रखी है।

फिर मैं और अंकल वहीं सोफे पर बैठकर बातें करने लगे।

हालांकि अंकल का मूड अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ था।
सोनू उन्हें कवाब में हड्डी की तरह लग रहा था।

अब बेचारे अंकल को क्या पता कि सोनू तो बेचारा कवाब खाने ही आया है।

उन दोनों के किचन में जाते ही अंकल बोले- सोनू भी पढ़ने आया है?
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- अरे नहीं अंकल, वह तो बेचारा ज्योति के चक्कर में आया है. उसे घर पर या कहीं उससे अकेले मिलने का टाइम ही नहीं मिल रहा था तो हमने प्लान बनाया कि वह हमारे बहाने वह यहाँ आकर उसके साथ थोड़ा अकेले में मजे ले लेगा।

अंकल मेरी इस बात पर हैरान हुए फिर थोड़ा मजे लेते हुए बोले- तो दोनों के बीच कुछ चक्कर चल रहा है क्या … ज्योति तो बड़ी है ना उससे? और वह तो उसे दीदी कहता है।
मैं मुस्कुराती हुई बोली- अरे अंकल, दीदी तो वैसे ही सबके सामने बोलता है। बाकी तो आप समझ ही रहे होंगे।

मेरी बातों से अब अंकल का मूड कुछ ठीक होने लगा था इसलिए वे भी मजे लेते हुए मुस्कुरा कर बोले- तो किचन में चाय ही बनाने गये हैं या कुछ और करने?
मैं हंसती हुई बोली- गये तो चाय ही बनाने हैं, अब कुछ और कर भी रहे होंगे तो करने दीजिए।

अभी हम लोग बातें कर ही रहे थे कि थोड़ी देर में सोनू और ज्योति चाय लेकर आ गये।
हम चारों चाय पीने लगे।

ज्योति और सोनू समझ गये थे कि अंकल का मूड पहले से थोड़ा सही लग रहा है।

मैं जानबूझकर ज्योति से बोली- तुझे पढ़ना तो है नहीं … तो तुम दोनों कमरे में या छत पर जाकर बातें करो, मैं थोड़ा अंकल से पढ़ लेती हूँ।
सोनू बोला- ठीक है तुम पढ़ाई करो, मैं और ज्योति दीदी कमरे में जाकर बातें करते हैं।

मैं बोली- अंकल के कमरे में मत जाना, दूसरे कमरे में जाना।
अंकल बोले- कोई बात नहीं बेटा, किसी भी कमरे में चले जाओ। बगल वाला रूम भी खाली है उसमें भी बैठकर बातें कर सकते हो।

इसके बाद सोनू और ज्योति उठकर बगल वाले रूम में जो शायद गेस्ट रूम था उसमें चले गये।
फिर उनके दरवाजा बंद करने की आवाज आयी।

मैं अंकल की तरफ देखकर मुस्कुरा दी और फिर जानबूझकर किताब खोलकर पढ़ने बैठ गयी और अंकल से थोड़ा समझाने को कहा।

अंकल बोले- तुम और सोनू काफी खुले हुए हो एक दूसरे से!
मैं- हां … डेढ़ साल ही छोटा है मुझसे … उम्र में ज्यादा अंतर नहीं है. तो बचपन से ही भाई-बहन से ज्यादा दोस्त की तरह ही रहे हैं हम दोनों। एक दूसरे की हर बात शेयर करते हैं।
अंकल मुस्कुराते हुए बोले- हाँ वह तो दिख रहा है।

मैंने टीशर्ट और घुटनों तक की स्कर्ट पहनी थी और अंकल के ठीक सामने सोफे पर बैठी थी।

जानबूझकर मैंने अपनी जांघ को थोड़ा फैला दिया और उन्हें स्कर्ट के अंदर अपनी गोरी मांसल जांघों के दर्शन करने का पूरा मौका दे दिया।

अंकल को भी यहाँ घर की तरह मम्मी-पापा का डर तो था नहीं तो वे भी बात करते हुए बिना किसी झिझक के मेरी जांघों को ललचाई नजरों से देख रहे थे।

वे बड़े सोफे पर बैठे थे वह अपने बगल में बैठने का इशारा करते हुए बोले- यहाँ आकर बैठो।
मैं तुरंत उठी और उनके बगल जाकर बैठ गयी।

अंकल धीरे से अपना हाथ स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी जांघ पर रखते हुए मुस्कुराकर बोले- तो तुम अपने भाई को उसकी गर्लफ्रेंड से मिलवाने लायी हो यहाँ!
मैं मुस्कुरा कर बोली- क्या करूं … कोई और जगह सूझ ही नहीं रही थी।

ठरकी अंकल- तुम्हारा भी कोई बॉयफ्रेंड है?
मैं हंसकर बोली- क्यों? ये जानकर क्या करेंगे?

अंकल- नहीं बस ऐसे ही पूछ रहा हूँ. वैसे ज्यादातर लड़कियों के होता है इसलिए पूछा।
मैं हंसती हुई बोली- वैसे है तो नहीं कोई, आपको बनना है तो बताइये।
अंकल- वाह, मेरी तो किस्मत खुल जाएगी फिर तो!

बातचीत से अंकल की हिम्मत थोड़ी बढ़ने लगी थी और वे अब मेरी जांघ को सहलाना शुरू कर चुके थे।
हांलाकि अंकल स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी जांघ हल्का-हल्का सहला रहे थे लेकिन उनके सहलाने की वजह मेरी स्कर्ट खिसक गयी थी जिससे मेरी गोरी मांसल जांघें साफ दिख रही थीं।

मैं- क्यों किस्मत क्यों खुल जाएगी?
अंकल- अरे तुम्हारे जैसी खूबसूरत और जवान लड़की अगर गर्ल फ्रेंड बनेगी तो फिर तो कहना ही क्या!
मैं बिना कुछ बोले बस मुस्कुरा दी।

हम दोनों जान रहे थे कि अंदर कमरे में सोनू और ज्योति चुदाई कर रहे हैं और बाहर हम आपस में बातें कर रहे थे।

इससे घर का माहौल थोड़ा कामुक सा हो गया था।
मेरी निगाह अंकल के लोअर की तरफ गयी तो वहां पर उनके लण्ड का तनाव साफ दिख रहा था।
तनाव देख कर साफ पता लग रहा था कि उन्होंने लोअर के नीचे अण्डरवियर नहीं पहनी है।
ऐसे माहौल में मेरी चूत भी हल्का-हल्का पनियाने लगी थी।

अंकल बोले- जब तुम छोटी थी तो मैं तुम्हें गोद में खिलाता था लेकिन अब तो जवान हो गयी हो।
इस बात पर मैंने भी जानबूझकर मजे लेते हुए कहा- हाँ … मन हो तो कहिए गोद में बैठ जाऊँ आपकी?

ठरकी अंकल की आँखों में वासना साफ झलक रही थी।
वे मुस्कुराकर बोले- अरे वाह … आ जाओ बेटा मेरी गोद में!
मैंने कहा- अरे तो इसमें कौन सी बड़ी बात है … अभी आपके गोद में बैठ जाती हूँ।

मैं जान रही थी कि अभी हमारे पास काफी समय है क्योंकि ज्योति और सोनू अभी जल्दी कमरे से बाहर आने वाले नहीं थे।
और मैं भी अब थोड़ा मजा लेना चाह रही थी।

मैं मुस्कराती हुई खड़ी हो गयी।

अंकल थोड़ा पीछे होकर सोफे पर पीछे टेक लेकर बैठ गये और अपने जांघों को फैलाकर मुझे गोद में बैठने की पूरी जगह दे दी।
गोद में बैठते ही लोअर के अंदर अंकल के तने हुए लण्ड को मैं साफ महसूस कर रही थी जो ठीक मेरी गांड के नीचे था।

अंकल के लण्ड को अपनी गांड पर महसूस करते ही मेरी चूत एकदम गीली हो गयी।
मैं जानबूझकर बोली- अब तो हो गयी गोद में बैठाने की तमन्ना पूरी? अब उठ जाऊं?

अंकल ने अपने दोनों हाथों को मेरी कमर के अगल-बगल से लाकर एक हाथ मेरे जांघ पर रख दिया और दूसरे हाथ को मेरे पेट पर रखकर कसकर मुझे पकड़ते हुए बोले- बस बेटा, थोड़ी देर और बैठी रहो ना ऐसे ही! अच्छा लग रहा है।
अंकल अभी तक जहाँ स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी जाँघों को सहला रहे थे अब वह स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर मेरी चिकनी नंगी जांघ को सहलाने लगे थे।
साथ ही अपने लण्ड को मेरी गांड पर दबाए हुए थे।

मैं हंसती हुई बोली- वे दोनों बाहर आ गये तो?
अंकल बोले- वे इतनी जल्दी कहां आने वाले हैं बाहर!

मैं- अच्छा तो कब तक बैठी रहूंगी इसी तरह? आपको तो मजा आ रहा है।
अंकल- प्लीज थोड़ी देर बैठी रहो ना … तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा क्या?
मैं मुस्कुराती हुई बोली- कुछ खास तो नहीं।

अब मैं भी आराम से गोद में बैठी हुई मजे लेने लगी और बात करते हुए किसी न किसी बहाने अपनी गांड को लोअर के ऊपर से ही अंकल के लण्ड पर हल्का-हल्का रगड़ रही थी।
वहीं बात करते हुए मैंने अपनी जांघों को दोनों ओर थोड़ा फैला दिया और अंकल को सहलाने के लिए और जगह दे दी।

अंकल भी समझ रहे थे कि अब मैं भी मजा लेने के मूड में आ गयी हूँ।
इससे अंकल की हिम्मत थोड़ी बढ़ी और अब वे धीरे-धीरे अपने दोनों हाथों को जांघों पर घुटनों की तरफ से ऊपर की और सरकाते हुए ले आए और जांघों के ऊपरी हिस्से सहलाने लगे।

अंकल बोले- काश, तुम मेरी बेटी होती तो मेरे साथ घर में ही रहती और रोज मैं तुम्हें इस तरह अपनी गोद में बैठाता!
मैं- तो आपके भी तो बेटी है ना … उसी को गोद में बैठा लिया करिए इस तरह! वह भी तो जवान और सुंदर होगी। कभी इस तरह गोद में बैठाया है अपनी बेटी को?

अंकल- हाँ है तो … लेकिन तुम्हारे जैसी खुले विचार की नहीं है ना! वैसे एक तरीका है तुम्हें अपने घर में साथ रखने का!
मैं बोली- क्या?
अंकल- बाद में बताऊंगा, अभी नहीं।

बात करते हुए मैं अपनी गांड को अंकल के लण्ड पर हल्का-हल्का रगड़ती जा रही थी।
वहीं अंकल भी अपने लण्ड को मेरी गांड पर दबाए हल्का-हल्का अपनी कमर को हिला रहे थे।
हम आपस में बातें भी कर रहे थे।

तभी अंकल बोले- बेटा, थोड़ा एक मिनट के लिए उठोगी तो मैं थोड़ा पैर ठीक कर लूँ फिर आराम से ठीक से गोद में बैठ जाना।

मैंने ‘ठीक है’ बोलकर अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठा दिया.
तो अंकल अपने पैरों को थोड़ा फैलाया और फिर ऐसा लगा जैसे मेरी स्कर्ट को पीछे से कुछ किए।
उसके बाद मुझसे बोले- हाँ अब बैठ जाओ बेटा!

जैसे ही मैं वापस उनकी गोद में बैठी मैं समझ गयी अंकल ने क्या किया है।

दरअसल अंकल ने अपने लंड को एडजस्ट कर ठीक मेरी गांड के नीचे कर लिया था और बैठते समय मेरी स्कर्ट को पीछे से उठा दिया था जिससे अब मैं सिर्फ पैण्टी में ही उनकी गोद में थी।

बातचीत से अंकल की हिम्मत और बढ़ गयी थी जिससे अब वह मेरी जांघ सहलाना छोड़कर मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया और बैठे-बैठे ही अपनी कमर को हल्का-हल्का हिलाते हुए अपने लण्ड को मेरी गांड पर रगड़ने लगे।

अंकल ने बात करना बंद कर दिया था और उनके मुंह से धीमी-धीमी सिसकारी निकल रही थी।

मेरा भी मन अब बात करने में कम था और सारा ध्यान अपनी जांघों के बीच पनियायी चूत पर आ गया था जिसकी खुजली अब बर्दाश्त के बाहर हो रही थी।
मैं भी हल्का-हल्का कमर हिलाते हुए उनका साथ दे रही थी।

हम दोनों एकदम चुप थे बस हमारे शरीर हिल रहे थे।

मुश्किल से अभी 2 मिनट ही बीते होंगे कि तभी मैंने महसूस किया कि अंकल ने मुझे जोर से चिपका लिया है और अपनी कमर को थोड़ा तेज हिलाने लगे हैं।

अभी मैं कुछ समझती … तभी अचानक उन्होंने अपने लण्ड को मेरी गांड पर एकदम दबा दिया और कमर को एक तेज झटका देने के साथ उनके मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली- बस … बेटाआ आआ आआ … आआआ आआहहह हह!

उसके बाद उनके शरीर में हल्के-हल्के दो-दीन झटके लगे और कांपते हुए वे मेरी पीठ से चिपके रहे।
मैं समझ गयी कि अंकल लोअर के अंदर ही झड़ गये हैं।

तो मैं जल्दी से उनके गोद से उठकर सोफे पर आकर बैठ गयी कि कहीं ऐसा न हो कि मेरी स्कर्ट पर उनके लण्ड का पानी लग जाए।

मैंने अंकल की तरफ देखा तो वे आँखें बंद किये सोफे पर बैठे अपनी सांस को काबू में करने की कोशिश कर रहे थे।
उनका लोअर लण्ड के पास वीर्य से गीला हो गया था जो साफ पता चल रहा था।

अंकल ने मुझे देखते हुए देख लिया और वे समझ गये कि जो कुछ हुआ है, वह सब मैं समझ रही हूँ।
जैसे ही हमारी निगाह मिली, हम दोनों हल्का सा मुस्कुरा दिये।

इसके बाद अंकल बिना कुछ बोले तेजी से उठे और अपने कमरे की तरफ चले गये।

तभी थोड़ी देर बाद ज्योति और सोनू कमरे से बाहर आ गये।
अंकल को न देखकर पूछने लगे- अंकल कहाँ हैं?
मैंने कहा- किसी काम से कमरे में गये हैं.

और फिर मैं मुस्कुराती हुई बोली- उन्हें छोड़ो … यह बताओ काम हो गया कि कुछ कसर बाकी रह गयी है? प्लान सही था कि नहीं मेरा?
ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- प्लान तो लाजवाब था।

फिर हम तीनों हंस दिये।

तभी कुछ देर बाद अंकल भी लोअर चेंज कर आ गये।
चूंकि उन्होंने दोबारा उसी रंग की लोअर पहनी थी तो ज्योति और सोनू ने ध्यान नहीं दिया कि वे दूसरी लोअर पहने हैं।

फिर हम सबने कुछ देर बातें की और फिर घर के लिए वापस चल दिये।

कहानी अभी लम्बी चलेगी.
ठरकी अंकल के घर की घटना पर अपने विचार मुझे भेजते रहिएगा.

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