पड़ोसन भाभी ने गाना गाकर अपने घर बुलाया

Views: 161 Category: Padosi By stomdinu7391 Published: March 16, 2026

भाभी चुदाई लाइव स्टोरी में मेरे पड़ोस में एक शादी हुई. मस्त नई भाभी ने मेरा लंड खड़ा कर दिया. मैं उसे फांसने के तरीके देखने लगा. भाभी भी मेरे ऊपर नजर रख रही थी.

हाय, मेरा नाम सोनू है और मैं 32 साल का हूँ.

मेरी ज़िंदगी में 2018 में एक बहुत खूबसूरत घटना हुई थी.
मेरे पड़ोस में, मेरे घर के ठीक सामने, एक नया जोड़ा शादी करके आया था.

उस जोड़े की औरत मेरी नज़रों में बड़ी ही खूबसूरत थी.
उसका नाम संगीता था.

संगीता भाभी की असली खूबसूरती उसके शरीर की बनावट में थी.
हल्का सांवला रंग, घुंघराली नाक के ऊपर टिक्का, जिससे चेहरे की खूबसूरती और भी बढ़ जाती.

पतली लचकती सी कमर, उम्र करीब 20 साल की और कमर के नीचे साड़ी पहनने से उसकी नाभि साफ़ दिखती थी जो सबसे ज़्यादा ध्यान खींचती थी.

मैं रोज़ सुबह 7 बजे उठ जाता, सिर्फ़ उसे देखने के लिए.
मेरी ज़िंदगी में अब बस एक ही मकसद रह गया था … भाभी को अंग से अंग लगाना है, चाहे जो हो जाए!

इस भाभी चुदाई लाइव स्टोरी बनाने के लिए मैंने रोज़ नए-नए तरीके सोचना शुरू कर दिए.
दिन बीतते गए और भाभी का हर अंग अब अपने साइज़ से बड़ा होने लगा था, जो मुझे और ज़्यादा अट्रैक्ट कर रहा था.
उनके बूब्स पहले से काफ़ी बड़े हो गए थे, उनकी गांड अब तराज़ू की तरह ऊपर-नीचे होने लगी थी, जो मुझे पागल बना रही थी.

भाभी का पति मनोज घर से दूर काम करता था.
वह सुबह 7 बजे ही घर से निकल जाता और रात 8 बजे के बाद ही लौटता था.

इस वजह से भाभी दिन भर अकेली रहती थी.
वह सुबह ही अपना सारा काम निपटा कर फ्री हो जाती और हमारे घर के आंगन में बैठकर टाइम पास करती थी.

अब हमारा रिश्ता भी अच्छा हो गया था.
हम हंसी-मज़ाक, शरारतें करने लगे थे.

एक दिन की बात है, मैं अपने आंगन में बैठकर पब्जी खेल रहा था.

अचानक मेरा ध्यान भाभी की तरफ़ गया.
वह अपने घर के बाहर बैठी थीं और पैर ऊपर करके रखे हुए थे.

इस वजह से उसकी साड़ी का नीचे का हिस्सा थोड़ा नीचे सरक गया था, जिससे उसकी पैंटी साफ़ दिख रही थी.
वह मुझसे सिर्फ़ 20 फिट की दूरी पर थी और मोबाइल में रील देख रही थी.

वह इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि पैर ऊपर करने की वजह से साड़ी सरक गई है.
उसे टांगों में हवा लग रही थी और मुझे जन्नत नज़र आ रही थी!

भाभी ने रेड कलर की नेट वाली पैंटी पहनी हुई थी.

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था!
मैं उसे तिरछी नज़रों से देख रहा था.
मेरा कंट्रोल खो रहा था.

आख़िरकार मैंने हिम्मत जुटाई, मोबाइल साइड में रखा और उसके पास को आ गया.
मैंने धीरे से कहा- भाभी जी!

उसने मुस्कुराकर कहा- हां क्या हुआ सोनू?

मेरे हाथ-पैर कांप रहे थे, फिर भी मैंने हिम्मत करके बोल दिया- भाभी जी, आपकी साड़ी नीचे सरक गई है!

जैसे ही मैंने कहा, भाभी ने अपना हाथ नीचे की तरफ़ घुमाया. उसे तुरंत अहसास हो गया कि मैंने सब देख लिया है.
वह झटके से उठी और अपने घर में जाने लगीं.
जाते-जाते पीछे मुड़कर मुझे डांटती हुई लेकिन मुस्कुरा कर दरवाज़ा बंद कर लिया.

उस दिन के बाद मैंने कुछ नया नोटिस किया. भाभी अब अपनी पैंटी और ब्रा बाहर सुखाने के लिए रखने लगी थी.
जैसे ही मैं सुबह उठकर ब्रश लेकर आंगन में जाता, भाभी के घर के बाहर उसकी पैंटी और ब्रा दिख जाती.
मेरी उत्तेजना और भी बढ़ जाती.

अब तो मैं भाभी की ब्रा और पैंटी को अपने हाथों से उतारना चाहता था.
रोज़ रात में 12 बजे के बाद, जब सब सो जाते थे, मैं धीरे से जाकर भाभी की पैंटी और उसकी ब्रा की खुशबू सूंघता था.

अब ये मेरी आदत बन गई थी और आने वाले दिनों में यही आदत मुझे मेरी मंज़िल तक पहुंचाने वाली थी.

एक दिन की बात है, रात के 11 बज रहे होंगे.
मैं पब्जी खेल रहा था और मेरा मोबाइल डिसचार्ज हो गया था.

अब मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो मैं अपनी मंज़िल की तरफ़ चल दिया.

जैसे ही मैंने भाभी की पैंटी और ब्रा को हाथ में लिया, मुझे भाभी की सिसकारियों की आवाज़ आने लगी.
वह ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियां ले रही थी.

मेरा इंटरेस्ट और भी बढ़ गया.
उसका घर कच्चा बना था, जिस वजह से घर में छोटे-छोटे कई जगहों पर छेद थे.

मैंने भाभी की ब्रा और पैंटी को वहीं रख दिया, जहां से उठाया था.
अब मैं एक ऐसे छेद को ढूँढने लगा, जिसमें से मुझे भाभी दिख जाए.

मुझे एक बढ़िया जगह मिल गई, जहां मुझे कोई देख नहीं सकता था.

उसके घर के पीछे मेरी ईंटें रखी हुई थीं और वहीं एक जगह छोटा-सा गोल छेद था, जिसमें से भाभी का पूरा घर दिख रहा था.
मुझे जन्नत के दर्शन हो रहे थे और मेरे हाथ-पैर कांपने लगे.

मैंने देखा कि भाभी ने कुछ भी नहीं पहना हुआ था और वह मनोज के ऊपर घुटनों के बल होकर ज़ोर-ज़ोर से झटके मार रही थी.
उसकी चुदाई देखकर मुझे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था कि मैं लाइव पॉर्न देख रहा हूँ.

भाभी ने अपने बालों का जूड़ा सिर पर बांध रखा था. अपने दोनों हाथ मनोज की छाती पर रखे हुए थे और वह अपना सिर ऊपर की तरफ़ करके सिसकारियां भर रही थी.
पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था. उसके निप्पल छोटे और नुकीले थे, जैसे कोई हापुस आम हो.

उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, जैसे कि उसने चुदाई से कुछ देर पहले ही शेव की हो.

मैंने उन दोनों की चुदाई करीब आधा घंटा देखी.
मनोज भी अब फुल जोश में आ चुका था.

उसने संगीता भाभी को घोड़ी बनाया और ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा, जिससे भाभी की सिसकारियां और बढ़ गईं.

मैं खुद को वहां महसूस करने लगा, जैसे कि झटके मैं ही मार रहा हूँ.
मैंने अपना लंड हिलाना शुरू कर दिया.

मनोज फुल जोश में था और उसकी रफ़्तार तेज़ हो चुकी थी.
भाभी की गांड से छप-छप की आवाज़ आने लगी, जो उसकी चूत के पूरी गीली होने की गवाही दे रही थी.

कुछ देर बाद मनोज झड़ गया और मैंने भी अपना पानी निकाल दिया.
मैं उन्हें वहीं खड़े होकर निहार रहा था.

भाभी वैसे ही थककर पूरी नंगी सो गई थी.
उसके दोनों पैर मेरी तरफ़ थे, जिस वजह से मुझे भाभी की चुत का पूरा छेद साफ़ दिख रहा था और जन्नत जैसा लग रहा था.

अब ये मेरा नया रोज़ का काम हो गया था.
मैं उनके दरवाज़े बंद होने का इंतज़ार करता और 10 बजे वहीं जाकर उनके घर के पीछे छुप जाता.

ऐसा सिलसिला बहुत दिनों तक चला.
भाभी चुदाई लाइव में रोज़ नए-नए पोज़ देखने को मिलते.

नया होने की वजह से वे दोनों नए-नए तरीके आज़माते, उन्हें चुदाई करते देख कर मुझे बेहद मज़ा आ रहा था और लौड़े का रस भी मस्ती से निकल रहा था.

अब मेरी संगीता भाभी को पाने की इच्छा बढ़ने लगी थी.
उसे भी पता लग गया था कि मैं उस पर लाइन मारता हूँ.

पर मैं थोड़ा डरपोक था.
वह मुझे पूरा चांस देती, पर मैं कभी फ़ायदा नहीं उठा पा रहा था.

फिर मेरी किस्मत बदली और मुझे मौक़ा मिलने वाला था.
एक रोज भाभी ने मुझे नहाते वक्त अपनी चूचियां दिखाईं और गाना गाने लगी.

सीधे अन्दर आजा राजा, कुंडी मत खड़काओ राजा.
मैं समझ गया कि भाभी मुझे देने के लिए राजी हो गई है.

जब वह नहा कर बाहर आई तो मैंने भी उसी गाने को वापस गाया.
वह इधर उधर देख कर हंस दी और इशारे से अन्दर आने का कहने लगी.

मैं अन्दर चला गया तो उसने अपने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया.

हम दोनों एक दूसरे से लिपट गए और चूमाचाटी करने लगे.

करीब पांच मिनट बाद वह बोली- चलो कम से कम चूमना तो अच्छे से जानते हो.
मैंने कहा- मतलब?

वह हंस दी और बोली- मैं तो सोच रही थी कि सिर्फ मुठ मार कर ही काम चलाना जानते हो.
मैं समझ गया कि भाभी मुझे ताना दे रही है.

जल्दी ही हम दोनों नंगे हो गए और भाभी ने मुझसे पहली बार अपनी चुदाई घोड़ी बन कर करवाई.
मैंने उसे दस मिनट तक चोदा और अपना रस उसकी चुत में ही छोड़ दिया.

वह भी मस्त हो गई थी और मुझसे चुत चुदवा कर खुश थी.
अब मैं उसे लगभग रोज चोदता हूँ.

बाकी की बात मैं आपको अपनी अगली सेक्स कहानी में बताऊंगा, जब उसके पति ने मुझे उसको चोदते हुए देख लिया था.

यह मेरी सच्ची भाभी चुदाई लाइव स्टोरी आपको कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
stomdinu7391@gmail.com

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