फ्री सेक्स स्टोरी में एक बार मैंने अपनी पड़ोसन भाभी को बाड़े में नंगी नहाती देख लिया. मैं देखता ही रहा तो भाभी ने मुझे देख लिया. अगले दिन भाभी ने मुझे बुलाया.
दोस्तो, मैं मनोहर शर्मा आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार!
आप सबने मेरी पिछली कहानी
अपरिचित मैडम की होटल में चुदाई
को बहुत ही सराहा है, बहुत सारे इमेल भी आए.
अब मैं एक और खास कहानी लेकर आपके सामने हाजिर हूं।
शायद यह फ्री सेक्स स्टोरी आपके तन-बदन में आग लगा देगी!
तो यह कहानी है मेरी पड़ोसन की, जो कि बहुत ही खूबसूरत है।
मैं एक छोटे से गांव में रहता हूं, गांव में ज्यादा घर नहीं हैं तो हम सब की आपस में अच्छी बनती है।
मेरे पड़ोस में ही भैया हैं, उनकी शादी हुई और नई-नवेली दुल्हन घर आई।
हमारे गांव में नहाने के लिए अक्सर बाथरूम नहीं होता है तो अक्सर औरतें घर के पीछे बाड़े में नहाती हैं।
एक दिन जब मैं अपने बाड़े में ऐसे ही घूम रहा था तो मेरी नजर उनके बाड़े की तरफ गई तो देखा भाभी नहा रही थीं।
मैं थोड़ा साइड में होकर उनको नहाते हुए देखने लगा।
उन्होंने बिना कपड़े खोले बाल्टी से पानी सिर में डाला और सबसे पहले सिर धोया।
उसके बाद उन्होंने अपना ब्लाउज उतारा।
ब्लाउज के अंदर लाल रंग की ब्रा पहने हुए थीं।
उनका गोरा सा बदन दूर से चमक रहा था और उनके बोब्स बाहर आने को बेताब थे।
उन्होंने अपने दोनों हाथों को पीछे किया और ब्रा के हुक खोल दिए।
अब वह अपने दोनों हाथों से अपने स्तनों को सहलाने लगीं।
ऐसा लग रहा था जैसे बड़े से पपीते पैक कर लटक रहे हों।
भाभी ने साबुन लगाया और उनसे उनको ऊपर-नीचे करने लगीं।
वह निश्चिंत होकर नहा रही थीं और मैं चुपके से यह सब देख रहा था।
उनको बिना कपड़ों के देखकर मेरा भी फड़फड़ा उठा.
पर अभी तो बहुत कुछ देखना था।
अब उन्होंने अपना घाघरा उतारा और फिर पैंटी भी उतार दी।
मैं ठीक उनके सामने था, पर उनको नजर नहीं आ रहा था और मैं उनको पूरी तरह से देख रहा था।
उन्होंने साबुन हाथों में लिया और अपने पैरों से होते हुए चूत की तरफ लगाया और अच्छी तरह से साबुन लगाया।
उन्होंने पूरे बदन पर साबुन लगाया।
एक-एक अंग को इस तरह से सहला रही थीं, मानो बहुत प्यासी हों और फिर बाल्टी से पानी डालकर साबुन साफ कर दिया तो उनका बदन सोने सा चमक उठा।
क्या मस्त बदन था उनका—काले-काले बाल, बड़े-बड़े बोबे, बड़ी सी गांड और बड़े-बड़े चूतड़!
मैं यह सब देखकर बहुत उत्तेजित हो गया और मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरा हाथ मेरे लिंग पर चला गया और आगे-पीछे करने लगा।
इसी हड़बड़ी में थोड़ी बहुत आवाज भी हुई, तो भाभी को सुनाई पड़ गई।
वह इधर-उधर झांकने लगीं और जल्दी से अपने ऊपर साड़ी का पल्लू डाल दिया, पर वह मेरी तरफ ही देख रही थीं।
शायद मैं उन्हें नजर आ गया था।
उन्होंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और घर चली गईं।
मैं भी अपना काम निपटा कर आ गया।
उसके बाद मैं डर सा गया और जब भी वह नजर आतीं, मैं दूसरी तरफ चला जाता।
एक दिन शाम को मैं बाड़े में अपनी गाय-भैंसों को चारा डाल रहा था, तो वह भी अपने बाड़े में आ गईं और मुझे अपनी ओर आने का इशारा किया।
मेरा पूरा बदन पसीने से सराबोर हो गया।
पता नहीं कब क्या होगा, क्या बोलेगी— यह सोचकर मैं डर गया.
पर हिम्मत करके उनके पास गया तो उन्होंने मेरा कान पकड़कर बोला, “उस दिन तू मुझे नहाते हुए देख रहा था!”
मैंने कहा, “नहीं… ना… नहीं भाभी, मैं नहीं था!”
तो वह बोलीं, “बदमाश! मैंने सब देख लिया था। तू मुझे ही देख रहा था नहाते हुए और खुद अपना हथियार अपने हाथ से हिला रहा था! एक बात बताओ, पहले तूने किसी को नहीं देखा ऐसे नहाते हुए?”
मैंने कहा, “नहीं!”
तो वह बोलीं, “और देखना है?”
मैंने कहा, “नहीं!”
तो वह बोलीं, “मैं सब तुम्हारे भैया को बता दूंगी!”
मैंने कान पकड़कर उनसे माफी मांगते हुए बोला, “मुझे माफ कर दो, अब कभी नहीं!”
तो वह बोलीं, “तूने मुझे देखा बिना कपड़ों में, तो तू भी अपने कपड़े उतार!”
मैंने कहा, “नहीं भाभी!”
तो वह बोलीं, “उतार! वरना अभी तुम्हारे भैया को बुला लूंगी!”
वैसे मैं बता दूं कि बाड़ा एक तरफ है तो कोई आता-जाता नहीं है।
शाम को हल्का-फुल्का अंधेरा भी हो रहा था।
मैंने हिम्मत करके अपनी शर्ट उतार दी और पैन्ट भी।
मैंने कहा, “नहीं भाभी, मुझे शर्म आती है!”
तो उन्होंने खुद ही अपने हाथों से पकड़कर मेरी चड्डी भी उतार दी।
मेरा शरीर देख कर वह खिल उठीं और बोलीं, “तुम तो बहुत बड़े हो!”
वे नीचे की तरफ देखने लगीं और बोलीं, “इसे बाहर निकालो!”
मैं डर के मारे कुछ नहीं बोला.
तो उन्होंने मेरा लंड देख कर बोला, “बाप रे! तेरा तो बहुत ही बड़ा है यार!”
ऐसा बोलकर मेरी तरफ हाथ बढ़ाया और लंड को पकड़ लिया।
उनके हाथ की छुअन से पूरे शरीर में झनझनाहट सी हुई और वह सहलाने लगीं।
मैंने कहा, “क्या कर रही हैं आप, मुझे छोड़ दीजिए।”
तो वे बोलीं, “बहुत दिनों बाद पकड़ में आए हो बरखुरदार! अब नहीं छोडूंगी, अब तो पूरा निकाल के ही छोडूंगी!”
और वह घुटनों के बल बैठ गईं और अपने होठों से किस करने लगीं।
मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था यह क्या हो रहा है।
जैसे ही उनके होठों ने छुआ तो शरीर में करंट लगा और मेरा लंड फड़फड़ा उठा।
एक हाथ से वह सहला रही थीं और अपनी जबान लंड के टॉप पर फेर रही थीं।
ऐसा लग रहा था मानो मैं हवा में उड़ रहा हूं।
जैसे ही उन्होंने अपना मुंह खोला और चूसना शुरू किया, तो मेरी सहनशक्ति ने जवाब दे दिया और लावा फूट पड़ा।
वे फिर भी चूसती रहीं, उन्होंने चूसना बंद नहीं किया।
मेरा लिंग एक बार तो छोटा सा हो गया पर भाभी ने फिर से सहलाना और चूसना जारी रखा।
थोड़ी देर के बाद लंड फिर से सांप की तरह फन कर गया।
धीरे-धीरे अंधेरा बढ़ रहा था।
वे लंड चूस रही थीं.
फिर उन्होंने मुझे नीचे लेटा दिया और अपना ब्लाउज खोला और दोनों स्तनों को आजाद कर दिया।
वे मेरे मुंह के पास लाकर रगड़ने लगीं।
मुझसे रहा नहीं गया और मेरे दोनों हाथ सक्रिय हो गए।
उनके बोब्स बहुत बड़े थे, मैं दोनों हाथों से दबा रहा था और साथ में चूस भी रहा था।
उनके मुंह से अजीब सी आवाज़ें निकल रही थीं।
बहुत देर तक दबाने और चुसवाने के बाद उन्होंने अपना घाघरा ऊपर किया।
मैं लेटा हुआ था और वे मेरे ऊपर बैठकर लिंग को अपनी चूत से सटाकर ऊपर बैठ गईं।
बैठने से पूरा का पूरा लिंग उनकी चूत में घुस गया और मेरी चीख सी निकल गई!
तो उन्होंने अपना मुंह मेरे होठों पर लगा दिया और अपनी गांड को ऊपर-नीचे करने लगीं।
शुरू में मुझे बहुत दर्द हुआ पर धीरे-धीरे मजा आने लगा।
वे लगातार अपनी गांड चला रही थीं।
अब मेरा डर खत्म हो गया था तो मैं भी उनके बोब्स मसलने लगा और दबाने लगा।
थोड़ी देर बाद वह निहाल होकर मेरे ऊपर लेट गईं.
पर मेरा तो अभी बाकी था।
तो मैंने उनको नीचे लेटाया और दोनों टांगें ऊपर करके पेलना शुरू किया।
क्या मस्त चूत—पूरी टाइट! उनकी चूत पूरी तरह से खुली थी।
करते वक्त खचाखच-खचाखच की आवाजें सुनाई दे रही थीं और वह आंखें बंद करके मेरी बाहों में थीं।
थोड़ी देर में फिर से वे नीचे से उछलने लगीं, शायद फिर से गर्म हो गई थीं।
भाभी के मुंह से अजीब-अजीब सी आवाजें निकल रही थीं और मैं दनादन पेल रहा था।
उन्होंने दोनों टांगे मेरी कमर के ऊपर से जोर से कस लीं, मेरी पीठ पर नाखूनों से खरोंचने लगीं।
मैं लगातार करता जा रहा था।
थोड़ी देर में वह फिर से अकड़ने लगीं और उन्होंने अपनी टांगों से मुझे दबा लिया।
उनकी सांसें बहुत तेज चल रही थीं, पर मैं अभी भी डटा हुआ था।
मैंने कहा, “खड़ी हो जाइए!”
और थोड़ा झुक कर घोड़ी बना दिया और फिर पीछे से अपने लंड को गांड में छूने लगा।
वे बोलीं, “नहीं-नहीं! गांड में नहीं करना!”
मैंने कहा, “क्यों? चूत में मेरा निकल नहीं रहा है, गांड में ही करूंगा!”
वे बोलीं, “नहीं! मैंने कभी नहीं किया है, आप ऐसे ही कर लो!”
तो फिर मैंने चूत में डाला और शुरू हो गया।
उनके दोनों चूतरों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और पीछे से जोर-जोर से करने लगा।
वे घोड़ी की तरह ही हिनहिना रही थीं और मेरा साथ भी दे रही थीं गांड हिला-हिला कर।
मुझे बहुत ही मजा आ रहा था, कई दिनों बाद मौका मिला था।
बहुत देर करने के बाद मेरे औजार ने भी हार मान ली, तो मैंने कहा, “अंदर निकालूं या बाहर?”
तो वे बोलीं, “अंदर ही निकाल दो! मुझे बच्चा पैदा करना है— तुमसे हो या पति से हो, कोई फर्क नहीं पड़ेगा!”
मैंने कहा, “ठीक है!”
और जोर-जोर से झटके लगने के बाद मेरा भी निकल गया।
मैंने फिर से उसको मुंह में दे दिया, तो उन्होंने पूरा चूस-चूस कर साफ किया और एक लंबा सा किस किया।
उसके बाद बोलीं, “तू तो मस्त लौंडा है रे! मुझे बहुत ही मजा आया। तेरे भैया में तो दम ही नहीं है, थोड़ी देर में ही हो जाता है और सो जाते हैं। मैं रात भर तड़पती रहती हूं। शादी के बाद आज पहली बार मेरा लावा बाहर निकाला है तुमने!”
मैंने कहा, “हम फ्री हैं ना, हमें बुला लेतीं!”
तो वे बोलीं, “उसी का तो इंतजार था! आज मेरे घर पर कोई नहीं था, इसीलिए सोचा बाड़े में तू मिल जाएगा तो तुझसे अपनी प्यास बुझाऊंगी। अच्छा रहा तू मिल गया!”
तो मैंने कहा, “मैं भी इसी इंतजार में था कि कभी आप आओ और मैं आपको चोदूं! उस दिन आपको नहाते हुए देखा, उसके बाद से रोज रात को अपने हाथों से हिला-हिला कर करना पड़ता है। बहुत तड़पाया है आपने मुझे!”
इतना बोलकर मैंने उन्हें ज़ोर से अपने सीने से लगा लिया और फिर एक लंबा सा किस उनके होठों पर किया।
वे बोलीं, “अब मैं जा रही हूं, अंधेरा बहुत हो गया है। लोग देखेंगे तो कहेंगे यह क्या कर रहे हैं!”
उसके बाद उन्होंने अपने कपड़े सही किए और घर चली गईं।
मैं भी घर आ गया।
उसके बाद तो अक्सर हमारी बातें होती रहतीं और उनके बारे में या मेरे बारे में किसी को किसी प्रकार की कभी शंका नहीं हुई।
जब भी भैया नहीं होते या उनके घर कोई नहीं होता, तो वह मुझे बुला लेती हैं और हम रात भर एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर सोते हैं और सेक्स करते हैं।
उनके आने से मेरी जिंदगी में खुशी की बहार आ गई।
पर दिक्कत यह हो गई कि जब भी मैं शादी की बात करता हूं, तो वे रूठ जाती हैं। बोलती हैं, “मैं हूं ना! तुम शादी क्यों कर रहे हो?” जब भी कोई लड़की देखने आती है, तो भाभी बहुत परेशान रहती हैं।
आगे और भी बहुत कुछ है, वो अगली बार!
आपको मेरी फ्री सेक्स स्टोरी कैसी लगी?
मुझे जरूर बताएं.
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