पड़ोसन आंटी के घर में उनकी गांड चुदाई

Views: 0 Category: Padosi By sp6282878 Published: October 05, 2026 📖 7 min read
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आंटी ऐस्स फक स्टोरी में मेरे पड़ोस की आंटी को मुझसे चुदाने में बहुत मजा आता था. इस बार मुझे उनके घर रुकना पड़ा तो मैंने दिन में आंटी की गांड मारी.

मेरी पिछली कहानी
पड़ोसन आंटी की चुत की प्यास बुझाई
में जब से पड़ोसन आंटी ने मेरे लंड का मज़ा लिया है, तब से आंटी और मेरी बहुत अच्छी पटने लगी थी।

अक्सर उनको अगर कहीं जाना होता तो वो मुझसे ही कहती थी।

वैसे मुझे बताया गया कि अंकल की दूसरी पत्नी हैं।
अंकल की उम्र ज़्यादा है और आंटी अभी भी खूबसूरत हैं और जवान हैं।

आंटी ने बताया था कि अंकल उनको चुदाई का मज़ा नहीं दे पाते हैं।
इसीलिए आंटी कई दिनों से एक लंड की तलाश में थी जो उनकी चूत की प्यास को बुझा सके।

मेरे घर वालों को नॉर्मल लगता था कि अंकल जी चले जाते हैं अपनी दुकान पर और इनके छोटे लड़के का हल्का मानसिकता अस्थिर है, इसके लिए कहती होंगी।
आंटी अक्सर अपने कुछ ना कुछ काम के लिए घर बुलाती रहती हैं।

आंटी ऐस्स फक स्टोरी वाले दिन दिन रविवार था इसलिए मैं आज घर पर ही था।

आंटी को आज उनको एक रिलेटिव के यहाँ जाना था जिसका यहाँ कुछ समारोह होने वाला था।
मुझे ख़तना देखने को लेकर बहुत उत्साह था।

मैं आंटी को उनके रिलेटिव के यहाँ ले गया।
वहाँ जाकर समारोह हुआ और हम दोपहर को ही घर आ गए।

घर आकर मैं अपना घर चला गया लेकिन मॉम-डैड कहीं गए हुए थे तो मुझे वापस आंटी के घर जाना पड़ा।

आंटी ने कई दिनों से चुदाई का मज़ा नहीं लिया था, आज मौका मिल गया था।
आंटी ने मुझे कहा, “गर्मी है, नहा लो और खाना खाकर सो लो कुछ देर!”

आंटी वहीं बिस्तर पर बैठकर मुझे देखने लगी।

मैंने कपड़े उतारे तो अंडरवियर पर आ गया।
मेरे खड़ा हुआ लंड अंडरवियर में से साफ़-साफ़ समझ आ रहा था।

आंटी से रहा नहीं गया और उन्होंने मेरे पास आकर कहा, “अब दिखा ही दो!”
और मेरे अंडरवियर को नीचे खींच दिया।
मेरा खड़ा हुआ लंड सामने आ गया।

आंटी उसको हाथ में लेकर उसकी त्वचा को आगे-पीछे करने लगी और मुझे कहा, “तेरा भी ख़तना हो जाएगा तो तेरा लंड भी मस्त दिखने लगेगा और तेरा टोपा खुला रहेगा!”
मैं हँस दिया क्योंकि आंटी अक्सर मुझसे करती हैं मज़ाक ही।

आंटी ने कहा, “तू बैठ, मैं आती हूँ।”
मैं कुछ देर बैठा रहा।

आंटी अपने साथ जेल, शेविंग क्रीम, डिटॉल, ट्रिमर और रेज़र अपने साथ ले आईं।

उन्होंने मेरे लंड को पकड़ा और मुझे वॉशरूम में ले गईं और कहा, “आज मैं तुझे अच्छे से नहलाऊँगी!”

आंटी की बात सुनकर मेरा भी मूड चुदाई करने का होने लगा था।
मैंने हाँ में सर हिलाया।

उन्होंने शावर चालू किया और मेरे शरीर पर हाथ फेरने लगीं।

आंटी के हाथ लगते ही मेरा छोटा लंड फिर खड़ा होने लगा था।
वे जैसे-जैसे मेरी बॉडी पर हाथ फेरती, मेरा लंड कड़क होता जा रहा था।

कुछ देर में ही मेरा लंड एकदम तनकर खड़ा हो गया।
आंटी ने हँसते हुए कहा, “ऐसे ही तेरा छुटपन में खड़ा हो जाया करता जब मैं तुझे नहलाया करती थी!”

मैं भी मुस्कुरा दिया।

आंटी साबुन लगाकर मेरे शरीर को अच्छे से साफ़ करने लगीं और मुझे अच्छे से नहला दिया।
तब आंटी ने मेरे लंड के आस-पास शेविंग क्रीम लगाई और रेज़र से मेरे लंड के आस-पास के बालों को साफ़ किया।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
फिर मैंने अपने साइड के बालों को ट्रिम किया।

मुझे नहाते हुए आंटी के सारे कपड़े भीग गए और भीगे हुए कपड़ों में आंटी की चूचियाँ साफ़-साफ़ नज़र आ रही थीं।
मैंने भी देर न करते हुए आंटी का कमीज उतार दिया और आंटी के बड़े-बड़े चूचे मेरे सामने आ गए।

फिर आंटी की ब्रा खुलते ही चूचे और बड़े दिखने लगे।
मैंने तुरंत ही आंटी के चूचे को मुँह में भर लिया और एक हाथ से दूसरा चूचा दबाने लगा और एक हाथ को कमर पर फिराना शुरू कर दिया।

आंटी ने भी मुझे कसकर पकड़ लिया और होंठ से मेरे कंधे को चूमने लगीं।
फिर मैंने दूसरे हाथ से आंटी के सलवार के नाड़े को खोल दिया और आंटी की अंडरवियर में हाथ डालकर चूत को छूने लगा।

आंटी को जैसा मज़ा ही आया और उन्होंने खुद ही अंडरवियर को उतार फेंका।
अब मैं और आंटी पूरे नंगे खड़े थे।

मेरा लंड खड़ा हुआ आंटी के पेट पर लग रहा था।
आंटी की चूत ज़्यादा फैल हुई नहीं थी और साइज़ में छोटी थी जो देखने में भी बहुत अच्छी थी और एकदम गोरी थी लेकिन हल्के-हल्के बाल थे जिसे मैंने ट्रिमर से साफ़ किया।
फिर मैंने आंटी को भी शावर चालू किया और नहला दिया।

गीले बदन में आंटी एकदम माल लग रही थीं।

फिर मैंने आंटी को थोड़ा ऊपर बैठाया और उनकी टाँगों को फैलाकर उनकी चूत को चाटने लगा।
गुलाबी चूत में अपनी जीभ को डालकर चाटकर एकदम गीला कर दिया था।

वह आंटी भी गरम होकर लंड लेने के लिए उतावली हुई जा रही थीं।
फिर मैंने आंटी की चूत में उँगली डालकर हिलाया।

आंटी ने पानी छोड़ दिया और उन्हें मुझसे कसकर पकड़ लिया।

कुछ देर पकड़ने के बाद मैंने आंटी को खड़ी किया और झुकाकर उनके मुँह में अपने लंड को दे दिया।
आंटी ने भी लॉलीपॉप की तरह मेरे लौड़े को चूसना चालू कर दिया।

आंटी के मुँह में समाया हुआ मेरे पूरा नरम लंड अब कड़क होने लगा था और आंटी के मुँह से आधा बाहर आ चुका था।
उन्होंने लंड को जीभ घुमाकर साफ़ कर दिया।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

मज़े ही मज़े में मैंने आंटी के मुँह को चोदना चालू कर दिया।
आंटी भी मेरा साथ दे रही थीं।

कुछ देर में मेरा माल छूटने वाला था और मैंने आंटी के मुँह में लंड की पिचकारी मार दी।
ज़्यादा जोश के कारण मैंने आंटी के मुँह में लंड को कुछ ज़्यादा अंदर डाल दिया था, जिससे आंटी की आँखों में आँसू आ गए।

मैंने आंटी को सीने से लगा लिया और उनकी गांड को दोनों हाथों से मसलने लगा।
आंटी को भी मज़ा आ रहा था।

फिर आंटी और मैंने अच्छे से नहाया और कमरे में आ गए।
आंटी ने भी तौलिया से मेरे सारे शरीर को पौंछा और हाथ में तेल लेकर लगाने लगीं।

उन्होंने मेरे लौड़े पर भी तेल लगाया और उसकी अच्छे से मालिश की।

आंटी की मालिश का कमाल हुआ कि मेरा लंड फिर खड़ा होने लगा।
उन्होंने कहा, “ये तो फिर खड़ा हो रहा है!”

आंटी ने और तेल लेकर मेरे लंड को तेल से तर कर दिया।

मैंने भी आंटी को बिस्तर पर उल्टा लिटाया और उनकी गांड के छेद को देखने लगा।
आंटी ने बताया, “अंकल गांड में चोदू हैं, चूत कम ही मारते हैं।”

मैंने सोचा मैं भी गांड मार के देखूँ।
मैंने आंटी की गांड पर एलोवेरा जेल लगाया और लंड को गांड के पास रखकर लंड को रगड़ने लगा।

फिर मैंने छेद मिलाकर एक ही झटके में लंड को गांड में डाल दिया।
वे “आह… आह…” की आवाज़ कर रही थीं और कह रही थीं, “निक।लो इसे! दर्द हो रहा है!”

लेकिन मैंने लंड नहीं निकाला।

कुछ देर बाद मैंने आहिस्ता-आहिस्ता लंड को आगे-पीछे करना चालू किया।
आंटी ऐस्स फक में उनको मज़ा आ रहा था।

फिर मैंने स्पीड बढ़ा दी और शॉट मारने लगा।

झटके लगाने पर आंटी को दर्द होने लगा लेकिन मैं नहीं रुका और बिना रुके आंटी की गांड मारता रहा।
गांड मारने के बाद मैंने आंटी को सीधा किया और उनकी चूत में लंड सेट करके उनकी चूत को चोदने लगा।

चुदाई की आवाज़ के साथ आंटी की सिसकियाँ बढ़ती गई और आंटी मदहोश होकर बोलने लगी, “आह… आह… और चोदो मुझे और चोदो… ! मेरी चूत को चोद-चोदकर इसका भोसड़ा बना दो… आह!”

कुछ देर बाद मैं झड़ने वाला था।
मैंने आंटी की गांड में ही माल गिरा दिया।

फिर मैंने लंड निकाल लिया और वॉशरूम में जाकर लंड को साबुन से साफ़ किया और वापस आकर कपड़े पहन लिए।

आंटी गांड को ऊपर करके लेटी हुई थीं और उनकी गांड से मेरा माल बह रहा था।

फिर आंटी उठकर वॉशरूम गईं।
उन्होंने मुँह धोया, वो साफ़ किया और कपड़े पहनकर किचन में चली गईं।
मैं भी बाहर जाकर बैठ गया।

फिर अंकल भी आ गए दुकान से और फिर हम दोनों ने साथ खाना खाया।
तब अंकल रूम में सोने चले गए।
आंटी भी अंकल के साथ सोने चली गईं और मैं बाहर ही सोफ़े पर लेट गया।

कैसी लगी मेरी आंटी ऐस्स फक स्टोरी?
sp6282878@gmail.com

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