ऑफिस गर्ल चुदाई कहानी में मेरे ऑफिस में एक नई शादीशुदा लड़की आई. वो बला की सेक्सी थी. एक बार मैं उसे अपने साथ टूर पर ले गया तो हमारी सेटिंग हुई.
मेरी सेक्स की प्यासी भाभियो और सेक्स के दीवाने मेरे भाइयो, मेरा नाम नवीन शर्मा है.
मैं साउथ दिल्ली में रहता हूँ.
मेरे लंड का साइज काफी मस्त है, यह सात इंच लंबा व तीन इंच मोटा है, जो किसी भी चुत से पानी निकालने के लिए काफी है.
जो भी लड़की मेरे लंड को अपनी चुत में लेती है, वह इसकी दीवानी हो जाती है.
मेरी पुरानी कहानी
लॉक डाउन में पड़ोसन भाभी की चुदाई
के लिए आप लोगों का बहुत प्यार मिला, काफी संख्या में मेल और कमेंट भी आए.
मैं सबका शुक्रगुजार हूँ.
ये दो साल पहले की मेरे ऑफिस में वर्क करने वाली रिंकी की चुदाई की एक रियल ऑफिस गर्ल चुदाई कहानी है.
आज भी जब उन पलों को याद करता हूँ, तो सोच कर ही लंड खड़ा हो जाता है.
मैं रिंकी को आज भी बहुत याद करता हूँ.
मैंने अपनी नई कंपनी की नींव रखी थी.
इसी कंपनी ने मुझे कहानी की नायिका से मिला दिया था.
जब रिंकी को मैंने पहली बार सफ़ेद कमीज और लाल लैगी में देखा तो देखता ही रह गया.
वह जॉब के लिए इंटरव्यू देने आयी थी.
रिंकी का फिगर 34-30-36 का मस्त भरा हुआ था.
वह शादीशुदा थी.
मैं बायोडाटा देखने के बहाने छुपी नजरों से उसी को देख रहा था.
कुछ पूछने के बाद मैंने उसको जॉब पर रख लिया और रिंकी की ट्रेनिंग अगले दिन से स्टार्ट हो गयी.
ऐसे ही दिन निकलने लगे लेकिन मुझे उसके नजदीक जाने का कोई मौका नहीं मिला.
वह सितम्बर का महीना था.
एक दिन की बात है, मेरे साथ कहीं विजिट पर जाने के लिए ऑफिस में कोई नहीं था.
इतने में रिंकी आ गयी.
मैंने रिंकी से पूछा- विजिट पर चलोगी मेरे साथ?
रिंकी ने कुछ सोच समझ कर हां कर दी.
वह पहला मौका था, जब हम दोनों गाड़ी में एक साथ बैठे थे.
ऐसे ही सामान्य बातें होने लगीं. घर परिवार के बारे में बातों से पता चला कि उसके हस्बैंड ने उसको छोड़ दिया था, लेकिन अभी तलाक नहीं हुआ था.
उसके दो बच्चे भी थे, जो उसी के साथ रहते थे. वह अपनी मम्मी के साथ रहती थी.
रिंकी देखने में एकदम बला की सेक्सी थी. फिर भी उसके पति ने उसे क्यों छोड़ दिया, यह मुझे आज तक पता नहीं चल सका.
उस दिन मेरे दिमाग में कुछ ऐसा नहीं आया.
अब आए दिन मैं उसको अपने साथ विजिट पर ले जाने लगा.
वह पूरी विजिट में अपने काम से काम रखती और ज्यादा कुछ नहीं बोलती.
पर कहते हैं न कि आग और भूसा पास नहीं रखने चाहिए … चिंगारी लग ही जाती है.
एक दिन हम दोनों विजिट पर गए थे. उस दिन रिंकी कुछ बदली बदली सी नजर आ रही थी.
मेरे काफी पूछने पर उसने बताया कि बच्चों की वजह से वह परेशान है.
लेकिन मैं समझ गया था कि बात कुछ और ही है.
ज्यादा कुरेद कर पूछने पर रोने लगी और सुबकते हुए उसने बताया कि उसके हस्बैंड से कॉल पर झगड़ा हुआ था, तो उसने उसे उल्टा सीधा कहा.
जब रिंकी ने यह सब बताया, तो मैंने उसे सांत्वना दी और चुप कराया.
कुछ देर बाद वह सामान्य हो गई और हम दोनों ने एक जगह रुक कर चाय पी.
चाय पीते समय मैंने हिम्मत करके उससे पूछ लिया कि तुम दोनों का सेक्स रिलेशन सही नहीं था क्या?
इस पर रिंकी चुप होकर मेरी तरफ देखने लगी.
कुछ पल बाद वह बोली- ऐसी बात नहीं है, लेकिन हस्बैंड रिस्पेक्ट से बात नहीं करते हैं. आए दिन गाली देना उनके लिए सामान्य हो गया था. इसलिए हम दोनों अलग अलग रहने लगे हैं.
बात मेरी समझ में आ गयी थी.
अगर केयर करके बात की जाए तो रिंकी बांहों में आ जाएगी.
मैंने उसको रिलैक्स कराया और बाद में हम दोनों लंच पर गए.
आज काफी दिन बाद मैंने उसके चहरे पर मुस्कान देखी थी.
मेरे भी दिल को सुकून मिला कि चलो मुस्करायी तो सही.
ऐसे ही दिन बीतते गए और मेरा झुकाव कब उसकी तरफ हो गया, कुछ पता ही नहीं चला.
मेरे दिल में उसके लिए एक ख़ास जगह बन गयी थी.
जब तक मैं उसे ऑफिस में देख नहीं लेता, तब तक मैं खुश नहीं होता था.
जहां चाह, वहां राह बन ही जाती है, ऐसा ही मेरे साथ हुआ.
एक दिन रिंकी ने मुझसे मेरे बारे में पूछा- आपके घर में कौन कौन है? आपने शादी की या नहीं?
मैंने बताया- शादी तो की है लेकिन मैं भी सिंगल ही हूँ. मेरी लाइफ भी ऐसी ही चल रही है. बीवी अभी मेरे पास नहीं रहती है.
जब रिंकी ने यह सुना तो वह भी समझ गयी कि मैं भी जीवन में अकेला ही हूँ.
हम दोनों जान गए थे लेकिन पहल कौन करे, यही सोचते रहते थे.
रिंकी भी मुझे पसंद करने लगी थी, लेकिन शायद वह कहने से डरती थी.
ये मुझे बाद में पता चला था, जब उसने बताया.
एक दिन हम दोनों फिर से साथ में विजिट पर गए थे.
आज मैंने सोच रखा था कि पहल मुझे ही करनी पड़ेगी.
मैंने रिंकी से पूछ लिया- मुझसे शादी करोगी? तुम्हें खुश रखूँगा, मान सम्मान सब दूँगा … पलकों पर बिठा कर रखूँगा.
मेरी बात से रिंकी थोड़ी डर गयी और बोली- मेरे बच्चे हैं, ये तो आपको पता ही है … और आप की भी शादी हो रखी है. मैं अपने पापा के घर रहती हूँ. वे क्या सोचेंगे … और बच्चे?
मतलब हां तो उसकी थी, लेकिन वही बात कि लोग क्या कहेंगे?
घर वाले मानेंगे या नहीं?
इसी उलझन में फंसी हुई थी.
मैंने रिंकी के हाथ पर हाथ रखा और उसकी आंखों में आंखें डाल कर कहा- हां है मैडम जी? तो ये डर भी दूर हो जाएगा!
मेरी इस बात पर वह मुस्करा दी और मैंने उसके गाल पर एक किस कर दी.
वह शर्म से नजरें चुराने लगी.
मैंने कहा- और कुछ नहीं करूंगा, डरो मत.
फिर हम दोनों हंसने लगे.
उसी वक्त उसने बताया कि मैं भी आपको पसंद करती हूँ लेकिन कह नहीं पा रही थी.
इस तरह आज इजहार इकरार दोनों की तरफ से हो गया था.
अगले दिन जब रिंकी ऑफिस आयी तो बोली- मुझे आपसे अकेले में बात करनी है!
मैंने कहा- केबिन में आ जाओ.
आज पहली बार हम केबिन में अकेले मिलने वाले थे.
कुछ करने का ख्याल मन में बार बार आ रहा था, पर हिम्मत नहीं कर पा रहा था कि कैसे शुरू करूं!
मैं गेट के पास आकर खड़ा हो गया और उसके आने का इन्तजार करने लगा.
जैसे ही वह अन्दर आयी, मैंने दरवाजा बंद करके पीछे से उसे अपनी बांहों में भर लिया.
इस पर थोड़ा नर्वस हो गयी थी लेकिन बाद में उसने भी सहमति दे दी थी और उसने भी मुझे कस कर अपने गले से लगा लिया था.
उस दिन पहली बार मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और लिप किस करने लगा.
दस मिनट तक किस करने के बाद हम दोनों अलग हुए.
मैंने उससे पूछा- बताओ क्या कहना था?
वह बोली- मैं शादी तो नहीं कर सकती आपसे … लेकिन आपको छोड़ना भी नहीं चाहती … क्यों न हम रिलेशनशिप में रहें और एक दूसरे की जरूरत पूरी करते रहें!
मैंने गहरी सांस ली और कहा- मैं क्या कह सकता हूँ, जैसा आप चाहती हो, वैसा ठीक है. बाद में अगर मन बदलेगा तो आगे चल कर शादी कर लेंगे.
इस पर उसने सहमति दे दी थी.
अब उसके मन से भी बोझ निकल गया था.
हम दोनों जब भी अकेले में मिलते, तो किस करते, हग करते एक हस्बैंड वाइफ की तरह एक दूसरे से प्यार की बातें करते.
हम दोनों की ज़िंदगी अच्छी तरह से चल पड़ी थी.
लेकिन तनों में जो आग लग गयी थी, उसको बुझाने का मौका नहीं मिल पा रहा था.
मैंने एक दिन रिंकी से मूवी देखने के लिए पूछा- फिल्म देखने चलें?
वह बोली- ऑफिस टाइम में ही जा सकते हैं, घर लेट गयी तो माँ पूछेगी कि कहां लेट हो गयी?
मैंने कहा- ठीक है ऑफिस टाइम में ही चलेंगे.
मैं उसको मूवी दिखाने एक मॉल में लेकर गया.
आज मेरे घर पर भी कोई नहीं था, सब लोग दो दिन के लिए कहीं बाहर गए थे.
हम दोनों ने ऊपर वाले हिस्से में कार्नर की सीट ली और मूवी देखने लगे.
मुझे शरारत सूझी, तो मैंने उसकी लैगी में हाथ डाल दिया.
इस पर वह मुस्करायी और उसने कुछ नहीं कहा.
मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैं धीरे धीरे पैंटी के ऊपर से ही उसकी चुत को रगड़ने लगा.
वह गर्म होने लगी और मुझे प्यासी नजरों से देखने लगी.
मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और धीरे से अपने हाथ को वापस उसकी पैंटी में डाल लिया.
अब मेरी उंगली उसकी चुत की फांकों पर थी और मैं उसे धीरे धीरे चुत के अन्दर करने लगा.
वह भी कसमसाने लगी और उसने अपने दोनों पैरों को खोल दिया.
यह देख कर मैंने दो उंगलियां एक साथ उसकी चुत में डाल दीं और जल्दी जल्दी अन्दर बाहर करने लगा.
वह नीचे से अपनी गांड उठाती हुई कमर को उंगलियों के साथ हिलाने लगी.
इस तरह से उसकी चुत की चुदाई होने लगी.
मैंने सोचा कि अगर अभी इसका पानी निकाल दिया तो शायद ये लंड लेने के लिए न माने और मेरे लौड़े की भूख अधूरी रह जाएगी.
यही सोच कर मैंने उसकी चुत से उंगलियां बाहर निकाल लीं.
उसे अच्छा नहीं लगा और वह मुझे खा जाने वाली नज़रों से ऐसे देखने लगी, जैसे कह रही हो कि रुक क्यों गए.
मैं मुस्कुरा दिया, तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर खींचा और वापस अपनी चुत पर दबाने लगी.
मैंने उससे कहा- मेरे घर चलते हैं, आज कोई नहीं है.
वह तो खुद ही इसी इंतज़ार में बैठी थी.
उसने झट से हां कह दी.
मैं उसको लेकर घर आ गया और कमरे के दरवाजे बंद करते ही कब हमारे कपड़े उतरे, पता ही नहीं चला.
हम दोनों सेक्स की वासना में जल रहे थे.
मैंने उसको नंगी करके बिस्तर पर पटक दिया और उसकी पैंटी को भी उसके जिस्म से अलग कर दिया.
मेरे सामने उसकी मस्त सी फूली हुई चुत रो रही थी, जो कह रही थी कि आओ और मुझे चोद कर मेरी प्यास बुझा दो. आज इस तरह रगड़ो कि जन्मों की प्यास बुझ जाए.
मैंने अपना सात इंच का लंड उसकी चुत की फांकों के मध्य रखा और धीरे धीरे अन्दर करने लगा.
काफी दिन से चुदाई न होने से चुत काफी टाइट थी.
जैसे जैसे लंड अन्दर जा रहा था, चुत लौड़े का स्वागत करती हुई उसे अपने अन्दर समाती जा रही थी.
साथ ही उसकी मीठी कराहें मुझे और ज्यादा उत्तेजित कर रही थीं.
चार पांच इंच लंड अन्दर जाते ही उसकी चीख निकलने लगी- आह मर गई, प्लीज रुको!
मैं रुक गया और मैंने धीरे से लंड को वापस बाहर को खींचा.
वह समझी कि मैं लंड बाहर निकाल लूँगा, मगर मैंने अगले ही पल वापस एक जोर का झटका दे दिया.
मेरा पूरा लंड उसकी चुत में घुसता चला गया और वह जोर की चीख के साथ मुझे पकड़ने लगी.
मैं रुका नहीं और धकापेल धक्कों की बाढ़ सी ला दी. मैं गहरे सेक्स में डूब गया था.
उसके कंठ से ‘आआह हमर गई उह …’ की दर्द भरी आवाजें निकल रही थीं.
मैं हम्म हम्म करके उसकी चुत को धोबी पछाड़ जैसी चुदाई करने में लगा था.
हम दोनों की ऐसी आवाजों से पूरा रूम भर गया था.
हम दोनों की तेज चलती सांसों के साथ साथ मेरा लंड उसकी चुत की धज्जियां उड़ाने में लगा था.
कुछ देर बाद रिंकी को मजा आने लगा और उसकी मस्ती भरी आवाजें मुझे और तेज चोदने के लिए उकसाने लगी थीं.
आज रिंकी को भी इतने दिन बाद सही चुदाई मिली थी, तो वह भी तेज़ आवाज़ निकाल रही थी ‘आह मेरे राजा … और तेज़ .. आह फाड़ डालो चुत को … मुझे अपनी बना लो … आह रगड़ दो इसको … बहुत प्यासी है लंड की … आहह अह.’
उसकी सांसें भी अपने उफान पर थीं.
दो जिस्म एक हो चुके थे, वासना के सागर में गोते लगा रहे थे.
तभी इस तूफान ने तेजी पकड़ी और एक तेज़ तेज़ आवाज़ के साथ वह कंपकंपाती हुई झड़ने लगी.
उसकी चुत ने काफी सारा गर्म पानी छोड़ दिया था.
उसकी चुत के रस से मेरा लंड चिकना हो गया था और चूंकि लंड अभी भी उसकी चुत की धज्जियां उड़ाने में लगा था, तो लंड की रफ्तार किसी पिस्टन के जैसे बढ़ गई थी.
हम दोनों काफी समय से प्यासे थे, तो इतनी जल्दी प्यास कहां बुझने वाली थी.
कुछ ही पल बाद वह वापस चार्ज हो गई और गांड हिलाने लगी.
मैंने उससे ऊपर आने को कहा और लंड को उसकी चुत से बाहर निकाल कर चित लेट गया.
वह मेरे ऊपर आ गई और अपने हाथ से लंड को पकड़ कर उसे अपनी चुत में डाल कर धक्के लगाने लगी.
वह ऐसी मस्त होकर धक्के लगा रही थी जैसे आज उसको सब मिल गया हो. इतने दिन से प्यासी थी.
उसकी चूचियां मस्ती से हिल हिल कर मुझे अपनी तरफ आमंत्रित कर रही थीं और मैं बार बार उसे अपने सीने पर झुका कर उसकी चूचियों को चूसने और मसलने लगता था.
इसी तरह से चुदाई करते हुए हम दोनों चालीस मिनट हो गए थे.
मेरा लंड भी अब जवाब देने वाला था.
मैं झड़ने लगा और जितना वीर्य निकाल सकता था, मैंने सारा रस उसकी चुत में निकाल दिया.
कुछ बह कर नीचे गिरने लगा.
उसने हांफते हुए मुझे गले से कस कर चिपका लिया.
ऐसे उस दिन ऑफिस गर्ल चुदाई हुई.
उस दिन के बाद हम दोनों को जब भी मौका मिलता, हम लोग सेक्स करने लगे थे.
कभी ऑफिस में, कभी मेरे घर, कभी उसके घर … और हमने ये चुदाई सभी से गोपनीय रखी.
फिर दिन बीतते गए और एक दिन मुझे लीवर में प्रॉब्लम हो गयी, जिससे मेरी तबियत ख़राब हो गयी थी.
मुझे ट्रीटमेंट के लिए दिल्ली छोड़ कर उत्तर प्रदेश आना पड़ा.
एक साल ट्रीटमेंट के बाद तबियत ठीक हो गई.
अब भी जब मैं रिंकी को याद करता हूँ, तो उसके साथ बिताए सारे पल याद आने लगते हैं.
अब मैं उत्तर प्रदेश में ही सेटल हो गया हूँ.
रिंकी से एक साल से फ़ोन पर बात तक नहीं हुई.
आप लोग ही बताओ कि क्या मुझे उससे दुबारा बात करनी चाहिए?
बीमारी की वजह से कंपनी भी क्लोज हो गयी और रिंकी से दूरी भी हो गई.
मगर उससे एक भावनात्मक लगाव हो गया था.
आज तक मेरे दिल से उसकी याद नहीं जाती.
मुझे समझ में ही नहीं आता कि क्या करूं!
जब भी मेरा किसी से सेक्स रिलेशन बनता है, वह मेरे साथ नहीं रह पाती है या मैं उसे अपना नहीं बना पाता.
मुझे आज भी जीवन में एक सच्चे साथी की तलाश है. नूपुर के बाद रिंकी मेरी लाइफ में आयी थी लेकिन अब वह भी साथ नहीं है.
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मेरी मेल आईडी है
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