ननद का रिश्ता और हॉट भाभी का जलवा- 2

Views: 212 Category: Bhabhi Sex Story By goodgirlanjali1993 Published: March 17, 2026

X कामुक कहानी में मैं बहुत हॉट सेक्सी माल हूँ. मेरी ननद सुंदर नहीं है. लड़के वाले उसे देखने आये तो सबकी नजर मेरे बदन पर थी. मैंने भी इसका फ़ायदा उठाकर ननद का रिश्ता तय कर दिया.

दोस्तो, मैं मैं एक बार पुनः आपको अपनी सेक्स कहानी में वापस ले चलती हूँ.
कहानी के पहले भाग
गदराई माल भाभी की ननद का रिश्ता
में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरी ननद की शादी के लिए उसे देखने उसके होने वाले पति व दोस्त गौतम व जेठ दीपांश ने मुझे सैट करने की कोशिश की.
मैं भी राजी हो गई थी.
मेरी ननद का होने वाला पति पंकज मुझसे लहरा लहरा कर बात कर रहा था.
मैंने उसकी तारीफ की तो वह गदगद हो गया.

अब आगे X कामुक कहानी:

मैंने कहा- जी शुक्रिया, आप भी काफी हैंडसम हैं.
पंकज- जी, ये तो आप हमारे सम्मान में कह रही हैं.

मैंने कहा- अरे नहीं-नहीं पंकज जी … सच में!
पंकज- अच्छा … तो एक खूबसूरत औरत और एक हैंडसम मर्द इतनी दूर क्यों बैठे हैं?

मैंने कहा- अरे अरे पंकज जी, आप मेरे वाले सोफ़े पर आकर बैठ जाइए न … मैं कोई मना कर रही हूँ क्या?

मैं जिस सोफ़े पर बैठी थी, वह टू-सीटर सोफ़ा था.
मेरे कहते ही पंकज तुरंत आकर मेरे वाले सोफ़े पर बैठ गया जैसे मानो इंतज़ार ही कर रहा था.

मैंने कहा- अरे अरे पंकज जी, पहले रिश्ता तो पक्का हो जाने दीजिए!
पंकज- रिश्ता तो मैंने आपको देखते ही पक्का कर लिया था.
यह बोलकर वह गंदी तरह से मुस्कुरा दिया.

मैंने कहा- मुझे देख कर क्यों? मेरी ननद को देख कर कीजिए न!

पंकज- अरे उन्हें देख कर क्या करेंगे. जब देखने के लिए आप हैं तो … आखिर साली भी आधी घर वाली होती है!
अंजलि- हा हा हा … वह तो साली होती है. मैं तो सलहज हूँ.

पंकज मेरी जांघों पर हाथ मारते हुए बोला- साली भी … और सलहज भी होती है.

उसका हाथ मेरी जांघों पर लगते ही मुझे एक करंट-सा लगा क्योंकि मैंने इसकी उम्मीद बिल्कुल नहीं की थी.
हालाँकि इतने पास बैठकर वह लगातार चिपकने की कोशिश कर रहा था.

मैंने हल्का-सा गुस्से वाला मुँह बनाया- पंकज जी, छुआ-छेड़ी शादी के बाद कीजिएगा कंट्रोल कीजिए!
मैं मुस्कुरा दी.

पंकज- पर आपको देखकर कैसे कंट्रोल हो सकता है भाभी जी. शादी के बाद तो हम छुआ-छेड़ी करेंगे ही करेंगे.
मैंने कहा- अच्छा जी तो फिर अभी क्यों कर रहे हैं? हा हा हा!

पंकज ने फिर से मेरी जांघों पर हाथ रखा, हल्का-सा दबा दिया और बोला- यह देखने के लिए कि लड़की वालों के पास कितना माल-पानी है!

मुझे लगा कि बार-बार विरोध करने से कहीं ये बुरा न मान लें.
मैं समझ चुकी थी कि बाकी दोनों ननदोई की तरह यहां भी ये मेरे चक्कर में है, पर अन्दर से मुझे अच्छा लग रहा था और मज़ा भी आ रहा था.

इस बार मैंने अपना हाथ उसके हाथ पर रखा, उसका हाथ हटाकर उसकी जांघ पर रख दिया और बिना अपना हाथ हटाए पूछा- तो क्या रिश्ता पक्का समझें हम?
पंकज- एक शर्त पर!
मैंने कहा- हां बताइए!

पंकज- वादा करिए कि आप मेरी कभी किसी बात को मना नहीं करेंगी!
मैंने कहा- इस बारे में तो सोचना पड़ेगा ननदोई जी!
पंकज- तो आपकी ननद के बारे में हमें भी सोचना पड़ेगा अंजलि जी!

मैं यहां पर आप लोगों को अपने बारे में एक बात और बता दूँ कि मुझे डॉमिनेट होना पसंद है.
ये इस चीज़ की परफेक्ट सिचुएशन थी.

मैंने कहा- जी अच्छा चलिए मान ली आपकी ये शर्त भी, अब नीचे चलकर सबसे कह दीजिए कि आपको रिश्ता पसंद है.

पंकज- मैं कैसे मान लूँ कि आपने शर्त मान ली? रिश्ता हो जाने के बाद आप मुकर गईं तो?

मैंने कहा- तो कैसे मानेंगे ननदोई जी?

पंकज- एक डांस दिखा दीजिए न अंजलि जी, आपको देखकर लगता है कि आपका डांस देखकर कोई भी पागल हो जाएगा.
मैंने कहा- अच्छा बताइए … कौन से गाने पर देखेंगे?

यह सुनकर उसकी आंखों में एक ऐसी चमक-सी आ गई, जैसे उसे अमृत मिल गया हो.

पंकज- मेरा फेवरेट गाना है ‘ज़रा ज़रा महकता है आज तो मेरा तन-बदन.’

मैं मुस्कुराती हुई- आप तो बड़े नॉटी हो!
पंकज- अब आप भी नॉटी हो जाओ मैं गाना लगा रहा हूँ … आप डांस दिखाओ.

मैं डांस करने के लिए खड़ी ही हुई थी कि इतने में मेरा फोन बजा.
मेरे हसबैंड का फोन था.

मैंने फोन पिक किया तो वे पूछ रहे थे कि इतनी देर क्यों लग रही है.
तो मैंने उनसे कहा कि बस आ रही हूँ.
तो उन्होंने कहा कि तुरंत आ जाओ … सब लोग आ गए हैं.

मैंने कहा- चलिए ननदोई जी अब डांस कभी और देखिएगा … तुरंत नीचे जाना है.

यह सुनकर पंकज को हल्का-सा गुस्सा आ गया और उसके चेहरे पर वह साफ़ नज़र आ रहा था.
मुझे डर लग रहा था कि कहीं नीचे जाकर रिश्ते के लिए ये मना न कर दे.

पंकज- आपने अपना वादा पूरा नहीं किया हमसे भी उम्मीद मत रखिएगा.

मैंने कहा- अरे ऐसा मत कहिए, अभी तो शादी तक कई बार मिलना होगा. मैं आपको डांस ज़रूर दिखाऊंगी. तब तक रिश्ता पक्का होने की खुशी में एक-दूसरे को बधाई दे देते हैं.
यह कहकर मैं हंस दी.

पंकज- और कैसे देंगी बधाई? बताइए … गले लग कर?
मैंने कहा- हां ननदोई जी, अब इतना तो आपका अधिकार बनता ही है.

वह एक पल भी गंवाए बिना तुरंत खड़ा हो गया और मेरी तरफ़ लपका.
मैं हल्का-सा पीछे हुई, तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपनी ओर खींच लिया.

फिर उसने दोनों तरफ़ से मेरी कमर में हाथ डाला और मुझे अपने आप से कसके चिपका लिया.
मेरे शरीर में तो जैसे आग-सी लग गई, पर मैंने खुद को कंट्रोल किया.

मैंने भी उसे पीछे से दोनों हाथों से पकड़ लिया.

अब हम दोनों एक-दूसरे की बांहों में थे.
वह मेरे बैकलेस ब्लाउज़ का पूरा फायदा उठा रहा था.

उसके हाथ की हथेलियां मेरी पीठ पर थीं और वह मेरी पीठ सहला रहा था.
मुझे भी मज़ा आ रहा था.

मेरे दोनों स्तन उसकी छाती से बहुत ज़्यादा चिपक गए थे और दब रहे थे.

क्योंकि मैं साड़ी कमर से काफी नीचे बांधती हूँ इसलिए मेरी कमर भी पीछे से खुली हुई थी.
वह धीरे-से अपना हाथ पीठ से मेरी कमर पर ले आया और कमर सहलाने लगा.
उसकी गर्म सांसें मुझे अपने कानों में महसूस हो रही थीं.

यह सब चल ही रहा था कि उसका दोस्त गौतम उसे बुलाने कमरे में आ गया.
उसने हम दोनों को ऐसे देख लिया, उसके तो मानो होश उड़ गए … क्योंकि वह तो मुझे छूने के लिए मरा ही जा रहा था.

गौतम- ये क्या हो रहा है?
पंकज- जश्न … मेरी शादी तय होने का!
गौतम- तो हमें भी शामिल कर लो!

तब मुझे पता चला कि मेरा ननदोई कितना कमीना है.
पंकज ने गौतम को भी बुला लिया.

गौतम तुरंत मेरे पीछे से आकर मुझसे लिपट गया.
अब मैं उन दोनों के बीच में आ गई. वह मुझसे एकदम चिपक गया.

मुझे उसका पूरा का पूरा लंड फील हो रहा था.
उसका मुँह मेरे खुले कंधे पर था और वे दोनों अपने-अपने शरीर का वज़न मेरे ऊपर डालने लगे थे.

फिर गौतम कमीने ने मेरी कमर पर गुदगुदी की तो मेरी हंसी निकल गई.

गौतम- इसका मतलब भाभी जी को गुदगुदी होती है!

फिर पंकज ने भी की.
मैं फिर हंस दी.

मैंने कहा- बस बस … सबको होती है गुदगुदी तो!

फिर मुझे लगा कि 5 मिनट हो चुके हैं … कहीं कोई आ न जाए.
मैंने कहा- चलो अब चलते हैं!

पंकज- मेरा तो छोड़ने का मन नहीं है आपको मैं जी!
गौतम- मन तो मेरा भी नहीं है, पर नीचे सब बुला रहे हैं … मैं यही बताने आया था.

तब तक मेरा फोन फिर से बज गया. मेरे हसबैंड का कॉल आ गया.

मैं जैसे-तैसे उनके बीच से निकली, फोन उठाया और बोली- बस पहुंच गई!

मैंने कहा- चलिए होने वाले जीजाजी और गौतम जी, दोबारा बुलावा आ गया!

दोनों के चेहरे तो खिले हुए थे.
वे एक साथ बोले- आपके पीछे-पीछे चलेंगे!

मैं मुड़ी और चलने लगी.
वे दोनों मेरे पीछे-पीछे आने लगे.

पीछे आते-आते पंकज ने अपना मोबाइल मेरी पीठ पर लगा दिया.
वह ठंडा था, तो मेरी सिसकारी निकल गई.

मैं मुस्कुराकर बोली- इस्स्स्स … क्या कर रहे हैं ननदोई जी?
पंकज- अब तो हमारा हक़ है ये!

यह देखकर गौतम ने भी अपना मोबाइल मेरी पीठ पर लगा दिया.

मैंने कहा- आप भी गौतम जी?
पंकज- मेरे दोस्त का भी तो हक़ है!
मैंने कहा- अब आप कह रहे हैं तो मैं मना नहीं करूँगी.

तब तक हम अगले कमरे में पहुंच गए.
वहां मेरी ननद और दीपांश जी हमारा इंतज़ार कर रहे थे.

दीपांश- क्या बात है गौतम? बड़े खुश दिख रहे हो?
गौतम- बात ही ऐसी है.
दीपांश- हमें भी बताओ!

मैं बीच में बोल पड़ी, क्योंकि मुझे लगा कहीं ये कमीना मेरी ननद के सामने सब न बोल दे.

मैंने कहा- अरे रिश्ता पक्का कर दिया ना पंकज जी ने … इसलिए!

दीपांश- ऐसा क्या जादू कर दिया आपने अंजलि जी?
गौतम- अरे भैया, जादू ही समझो आप तो!

दीपांश- तो एक बात समझ लीजिए अंजलि जी … यह जादू तो आपको हम पर भी करना पड़ेगा, क्योंकि रिश्ता पक्का हम ही करेंगे!
गौतम- तो दीपांश भैया और मैं जी यहीं रुकिए … और हम सब बाहर चलते हैं.

इस बात पर सब हंस दिए.
पर दीपांश इतना कमीना था कि बोला- भाभी जी, कहें तो हम रुक जाएं!
मैंने कहा- नहीं-नहीं अब चलना चाहिए.

हम सब नीचे आ गए.

नीचे आने के बाद वे तीनों आगे चले गए.

दीपांश ने मेरे कान में कहा- अंजलि जी … अपना जादू हमें भी दिखा दीजिएगा। रिश्ता हम ही तय करेंगे तो … प्लीज!
मैंने भी झट से कह दिया- आपको दिखाने में कोई ऐतराज़ नहीं है … बस रिश्ता होने दीजिए.
मैं मुस्कुरा दी.

दीपांश- अरे अंजलि जी, अब बता दो ना कि क्या जादू था?

इससे पहले मैं कुछ बोलती, दीपांश ने गौतम को आवाज़ लगाई- ओए, उन दोनों के साथ कहां जा रहा है ये? इधर तो आ!

गौतम- हां भैया, बताइए?
दीपांश- अबे बता न … क्या जादू था?

इस पर मैंने बीच में टोकते हुए कहा- अरे कुछ नहीं, बस मज़ाक था.

लेकिन गौतम ने तुरंत अपना हाथ मेरी पीठ पर फेर दिया और बोला- देखिए भैया … ये था जादू!
मैंने कहा- ईस्स्स्स गौतम जी, ये सब क्या कर रहे हैं?

मेरी सिसकारी सुनकर दीपांश तो पागल ही हो गया और बोला- तो वहां चलो, जहां कोई नहीं है.
गौतम- हां चलते हैं.

मैंने कहा- नहीं-नहीं सब ढूँढेंगे … आप लोग कंट्रोल कीजिए. ये सब मज़ाक अब तो चलता ही रहेगा, इतना उतावले क्यों हो रहे हैं?
दीपांश- एक मौका तो हमें भी मिलना चाहिए.
यह कहकर दीपांश ने अपना हाथ मेरे पूरे पेट पर फेर दिया.

मैं एकदम से पीछे हट गई.
मैंने कहा- आप लोग तो बस …

दीपांश- अभी तो आपको छोड़ रहे हैं … लेकिन बैचलर पार्टी में तो अब आपको आना ही पड़ेगा!
मैंने कहा- जी पक्का!

गौतम- हमें तो पेट पर हाथ लगाने को मिला ही नहीं?

मैंने कहा- आपको काफी कुछ मिल गया … अब चलिए!

उस रात जब रिश्ता तय करके वापस आए तो मैं पूरी रात सो नहीं पाई.
मुझे उन लोगों के छूने का अहसास होता रहा, जैसे वे तीनों मेरे बदन को छू रहे हों.

इतना तो मैं समझ चुकी थी कि अब जल्दी ही मेरे साथ कुछ होने वाला है.

यही सब सोचते हुए मुझे नींद आ गई और नींद में ही मुझे सपना दिखाई दिया कि मैं उन तीनों के बीच पूरी नंगी पड़ी थी और गौतम अपना लंड मुझे चुसवा रहा था.
जबकि दीपांश जी और ननदोई जी मेरे एक एक दूध को चूस रहे थे.

मेरी चुत भलभला कर बहने लगी थी.

दोस्तो, कुछ आप भी कल्पना कीजिए कि मेरे साथ क्या क्या हुआ होगा. मैं आपकी राय का बेसब्री से इंतजार करूंगी.

फिलहाल मैं अपनी इस सेक्स कहानी को यहीं रोक रही हूँ.
मुझे मालूम है कि मेरी स्टोरी धीरे-धीरे चल रही है, लेकिन यह मैं आप लोगों के मनोरंजन के लिए ही कर रही हूँ.

मैं जल्दी ही आगे की लेकर आपके सामने आऊंगी.

आपको मेरी X कामुक कहानी कैसी लगी?
मुझे मेल और कमेन्ट करके ज़रूर बताइएगा.
goodgirlanjali1993@gmail.com

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