मेरी गांड कहानी में जब मुझे गांड में लंड वाली चुदाई का पता चला तो मुझे भी अपनी गांड में गुदगुदी महसूस हुई. मैं भी गांड में लंड घुसवा कर देखना चाह रहा था.
raatkibaat के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार.
मेरा नाम प्रेम है और मैं झारखंड का रहने वाला हूँ.
वर्तमान में मै अपनी जॉब के कारण ओडिसा के केंदुझरगढ़ जिले में रहता हूं.
मेरी उम्र 27 साल है.
यह मेरी पहली गे सेक्स कहानी है और यह मेरी गांड कहानी तब की है जब मैं 19 साल का था.
कॉलेज के दोस्तों से सेक्स की बातें करते करते मुझे गांड चुदाई के बारे में पता चला.
क्योंकि मैंने कभी सेक्स नहीं किया था तो मुझे उसके बारे में जानने की तलब दिन प्रति दिन बढ़ती गई.
मैं अकेले में छुप छुप कर मोबाइल में गांड चुदाई के वीडियो देखने लगा.
धीरे धीरे मुझे भी गांड मरवाने की इच्छा होने लगी.
मैं पढ़ाई के कारण दूसरे शहर में किराए के मकान में रहता था, जिसके कारण किसी से मिलने में मुझे परेशानी नहीं थी.
पर डर के कारण मैं किसी को अपनी इच्छा बता भी नहीं पा रहा था.
समय के साथ साथ मेरी गांड मरवाने की इच्छा और बढ़ती जा रही थी.
मुझे गांड चुदाई के सपने भी आने लगे थे.
सपने में मैं किसी अनजान से जी भर के गांड मरवाने के मजे लेता था.
मैं अकेले में अपनी गांड में कभी पेन या पेंसिल तो कभी मोमबत्ती डालने की कोशिश करता रहता और सोचता काश ये पेन की जगह कोई लंड मेरी गांड में होता!
मैंने एक सोशल साइट में फेक नाम से एक आईडी बनाई और अपने आस-पास के एरिया में किसी ऐसे मर्द को ढूंढने लगा जो मेरी गांड की प्यास बुझा सके.
मैंने कई लोगों से बात की, पर किसी से मिलने तक बात नहीं पहुंच सकी.
कई दिनों बाद एक अंकल से मेरी बात हुई जो अकेले रहते थे.
उनकी उम्र लगभग 38 साल की थी.
उनसे 2-4 दिन बात होने के बाद बातें गंदी होती चली गईं और हम दोनों खुल कर सेक्स की बातें करने लगे.
वे मुझे तरह तरह के पोज बताते और चुदाई की बातें करते.
एक दिन उन्होंने वीडियो कॉल पर अपना लंड दिखाया.
दोस्तो क्या लंड था उनका … मैं तो देख कर ही पागल हो गया.
पूरे सात इंच का एकदम चिकना लंड था उनका … और उसका सुपारा एकदम लीची के जैसा गोल और चमकदार था.
मैंने अंकल से मिलने के लिए कहा तो उन्होंने दो दिन बाद सन्डे को मिलने की बात कही.
मैंने 2 दिन जैसे तैसे अपनी गांड में उंगली करते हुए बिताए.
सन्डे को सुबह सुबह ही अंकल का कॉल आया.
उन्होंने मुझे लेने आने की बात कही और रेडी होने को बोला.
मैं तुरंत ही नहा कर रेडी हो गया और अपनी गांड में अन्दर तक उंगली डाल कर क्रीम को लगा लिया.
थोड़ी ही देर में वे मुझे लेने भी आ गए.
जल्दी ही हम दोनों उनके फ्लैट में पहुंच गए.
घर के अन्दर पहुंचते ही उन्होंने मुझे नंगा कर दिया और खुद भी नंगे हो गए.
वे मुझे पूरा ऊपर से नीचे तक चूमने चाटने लगे.
हम दोनों पूरे गर्म हो गए और एक दूसरे में समाने की कोशिश करने लगे.
अंकल ने मेरे दोनों छोटे छोटे चूचों को चूस चूस कर लाल कर दिया.
कुछ ही देर में उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और खुद ही मेरे हाथ से अपने लंड को आगे पीछे करने लगे.
फिर वे मेरे सिर को पकड़ कर अपने लंड की ओर दबाने लगे और चूसने के लिए बोलने लगे.
मैं पहली बार किसी का लंड चूसने जा रहा था तो जरा हिचकिचा रहा था.
फिर जैसे तैसे मैंने उनके लंड को अपने मुँह में ले लिया.
उनका लंड बड़ा था तो मैं केवल उनका टोपा ही मुँह में ले पा रहा था.
धीरे धीरे किसी तरह से मैं उनके लंड को चूसने लगा और अंकल के मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं.
वे अपनी आंखों को बंद कर के लंड चुसाई का मजा लेने लगे.
थोड़ी देर के बाद उन्होंने मुझे डॉगी स्टाइल में आने को बोला.
मैं कुतिया बन कर उनके आगे खड़ा हो गया और वे खुद मेरे पीछे आ कर अपनी एक उंगली से मेरी गांड के छेद के साथ खेलने लगे.
उन्होंने मेरी क्रीम से लबालब गांड में उंगली डाली तो वह सट से अन्दर घुस गई.
अंकल को मजा आ गया और मुझे भी अपनी गांड में उनकी उंगली से सुख मिलने लगा क्योंकि मैं अपनी गांड में कुछ कुछ डालता रहता था तो सच में बड़ा अच्छा लग रहा था.
थोड़ी देर तक अपनी उंगली को मेरी गांड में अन्दर बाहर करने के बाद उन्होंने अपने लंड को मेरे छेद पर रखा और दबाने लगे.
पर मेरी गांड टाइट होने के कारण उनका लंड बार बार फिसल जा रहा था.
काफी देर कोशिश करने के बाद उन्होंने एक जोर के झटके के साथ अपना सुपारा मेरी गांड के छेद में फंसा दिया.
मेरी तो जैसे जान ही निकल गई और मुझे अपनी गांड में तेज दर्द होना शुरू हो गया.
मैं चिल्लाने लगा और उनसे लंड निकालने की जिद करने लगा, पर वे अपने लंड को मेरे गांड में फंसा कर अपने एक हाथ से मेरे लंड को हिलाने लगे और दूसरे हाथ से मेरे चूचों को दबाने लगे.
धीरे धीरे मेरा दर्द कम हो गया और मैं चुप हो गया.
यह देखते हुए उन्होंने एक और जोर का झटका दे मारा और इस बार उनका पूरा का पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया.
मैं कांटे में फंसी मछली के जैसे छटपटाने लगा, पर उन्होंने अपने भारी जिस्म के नीचे मुझे दबाया हुआ था, ताकि कि मैं जरा सा भी हिल ना सकूँ.
कुछ देर रुकने के बाद उन्होंने धीरे धीरे अपना लंड आगे पीछे करना शुरू कर दिया.
कुछ ही देर के बाद मुझे भी मजा आने लगा तो मैं भी अपनी गांड को झटकों के साथ आगे पीछे करने लगा.
मुझे ऐसा करते देख अंकल ने अपने झटकों को टॉप गियर वाली स्पीड में बढ़ा दिया और वे मुझे धकापेल चोदने लगे.
मैं भी अपनी पहली गांड चुदाई का खुल कर मजे लेने लगा.
कोई 20 मिनट के बाद उनका लंड मेरी गांड में और फूलने लगा और उन्होंने अपने लंड का पूरा रस मेरी गांड में भर दिया.
वे निढाल होकर मेरे ऊपर ही लेट गए.
धीरे धीरे उनका लंड सिकुड़ कर अपने आप ही मेरी गांड से बाहर निकल गया और मेरी गांड के छेद से धीरे धीरे उनका रस बाहर आने लगा.
थोड़ी देर आराम करने के बाद उन्होंने फिर से मुझे छेड़ना शुरू कर दिया.
उस दिन हम लोगों ने 3 बार अलग अलग तरीके से सेक्स किया और पूरे दिन मजा किया.
शाम को अंकल मुझे अपनी गाड़ी में बिठा कर घर छोड़ गए और मुझे कुछ पैसे भी दिए.
मेरी गांड में सूजन हो गई थी और मुझे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था.
ये मेरी पहली गांड चुदाई की सच्ची सेक्स कहानी है, मेरी गांड कहानी आप लोग अपने कमेंट्स जरूर लिखें.
यदि आप लोग चाहेंगे तो मैं अपनी गांड चुदाई की अगली सेक्स कहानी लिख कर आपके सामने जल्द हाजिर होने की कोशिश करूंगा.
मेरी गांड कहानी पर आपके जवाब की प्रतीक्षा रहेगी.
premkrpk97@gmail.com