मेरी चालू बीवी-8


सलोनी- चल अब जल्दी से घर चल… देर हो रही है।
 

पारस- भाभी प्लीज माफ़ कर दो न… अच्छा अब कभी ऐसी गलती नहीं करूँगा…प्रोमिस…

सलोनी- अच्छा ठीक है… पर कुछ समय दूर रह… मेरा मूड बहुत ख़राब है…

पारस- ओके मेरी प्यारी भाभी… पुचच च च च…

पारस- भाभी, मैं अभी आता हूँ… जरा कुछ सामान लेना है बाजार से… भूल गया था…

काफी देर बाद…

टेलीफोन की घण्टी की आवाज … ट्रिन ट्रिन… ट्रिन ट्रिन

सलोनी- हेल्लो…

मेरी किस्मत अच्छी थी कि सलोनी ने फ़ोन स्पीकर पर कर लिया था..

उसकी सहेली नज़ाकत- हेलो मेरी जान, कहाँ हो आजकल?

सलोनी- यहीं हूँ यार ! तू सुना.. कहाँ मस्ती मार रही है…?

नज़ाकत- वाह, मस्ती खुद कर रही है और मेरे को बोल रही है…

सलोनी- ओह लगता है शकील भाई नहीं हैं आजकल जो मुझसे लड़ने लगी…?

नज़ाकत- उनको छोड़… तू ये बता… आज बाजार में किसके साथ मटक रही थी, बिल्कुल छम्मक छल्लो की तरह..?

सलोनी- अरे वो तो इनका छोटा भाई है.. मैं तेरी तरह नहीं हूँ जो किसी के भी साथ यूँ ही घूमने लगूँ…

नज़ाकत- हाँ हाँ… मैं तो ऐसी वैसी हूँ… और तू कैसे घूम रही थी वो सब देखा मैंने… मेरी आवाज भी नहीं सुनी.. और अपने चूतड़ मटकाती हुई निकल गई…

सलोनी- अरे यार… मैंने सही में नहीं देखा, कहाँ थी तू…?

नज़ाकत- उसी बाजार में जहाँ तू बिना कच्छी के अपने नंगे चूतड़ सबको दिखा रही थी… यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

सलोनी- अरे यार… वो जरा वैसे ही हे… हे… जरा मस्ती का मूड था तो… और तू क्या कर रही थी वहाँ…?

नज़ाकत- मैं तो शकील के साथ शॉपिंग करने गई थी…

सलोनी- हाय !! तो क्या शकील भाई ने भी कुछ देखा..

नज़ाकत- कुछ… अरे सब कुछ देखा… उन्होंने ही तो मुझे बताया… कि यह आज सलोनी को क्या हो गया है… उन्होंने तो तेरे उस भाई को तेरे नंगे चूतड़ों पर हाथ से सहलाते भी देखा… तभी तो मैं तुझसे कह रही हूँ…

सलोनी- ओ माय गॉड, क्या कह रही है तू…?

नज़ाकत- बिल्कुल वही जो हुआ… अब सच सच बता… क्या बात है?

सलोनी- यार, शकील भाई कहीं इनसे तो कुछ नहीं कहेंगे?

नज़ाकत- अरे नहीं यार वो ऐसे नहीं हैं… लेकिन तू मुझे बता… ये सब क्या है… और क्या क्या हुआ…?

सलोनी- अरे कुछ नहीं यार, बस थोड़ी मस्ती का मन था.… इसलिए बस और कुछ नहीं यार…

नज़ाकत- हम्म्म… वो तो दिख ही रहा था.. तू बताती है या मैं कोई जासूस छोड़ूँ तेरे पीचे…?

सलोनी- जा कुतिया… कर ले जो तेरे से होता है… साली धमकी देती है? ब्लैकमेल करती है माँ की … … …?

नज़ाकत- प्लीज बता ना यार… क्या क्या हुआ… और वो हैंडसम कौन था…?

सलोनी- बताया तो यार… मेरा देवर है॥…और बस थोडा मस्ती का मूड था तो ऐसे ही बाहर निकल लिए बस और कुछ नहीं हुआ… और तुझे मस्ती लेनी है तो तू भी बिना चड्डी के जाना, देखना बहुत मजा आएगा..

नज़ाकत- अरे वो तो सही है.. तू बता न क्या हुआ मेरी जान.. कितनों ने उंगली की तेरी में… बता न यार..?

सलोनी- नहीं यार… ऐसा कुछ नहीं हुआ… बस जैसे तूने देखा… ऐसे ही किसी न किसी देखा होगा… बस… और तो कुछ नहीं हुआ…

नज़ाकत- अच्छा और तुम्हारे देवर, वो कहाँ तक पहुँचे..?

सलोनी- कहीं तक नहीं यार… बस ऐसे ही थोड़ी बहुत मस्ती बस… और क्या मैं…

सॉरी दोस्तो, रिकॉर्डिंग ने धोखा दे दिया… लगता है यहाँ तक बैटरी थी…उसके बाद बैटरी खत्म !

मगर इतना कुछ सुनकर मुझे यह तो लग गया था कि सलोनी को अब रोकना मुश्किल है..

मैं कुछ देर तक बस सोच ही रहा था कि अब आगे क्या और कैसे करना चाहिए…

बहुत समय तक अनाप-शनाप सोचने के बाद मैंने सब विचारों को बाहर निकाल फैंका…

फिर सोचा कि यार मैंने सलोनी को अब तक दिया ही क्या है…

यह घर… ऐश्वर्य या कुछ जरूरी सामान… क्या ये सब ही काफ़ी था…?

आखिर उसकी भी अपनी ज़िंदगी है… और सेक्स तो शरीर की प्राथमिक जरूरत है… मगर मैंने इस ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया

पर अब मुझे इस और ध्यान देना होगा…

मैंने एक ही पल में सब सोच लिया कि मैं अब सलोनी का पूरा ध्यान रखूँगा…

वो जो भी चाहती है, जैसा भी चाहती है, मैं उसमें उसका साथ दूँगा… आखिर मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ।

अब अगर उसने ये सब किया तो मैं नहीं समझता कि इसमें उसकी कोई गलती है… अगर उसको ये सब अच्छा लगता है तो उसको मिलना चाहिए…

और मैं भी कौन सा दूध का धुला हूँ? अपनी क्लासमेट से लेकर… सेक्रेटरी से लेकर… साली तक… अनगिनत पड़ोसनों, कालगर्लों तक… न जाने कितनी चूतों को मार चुका हूँ।

फिर अगर सलोनी मजे ले रही है तो यह उसका जायज हक़ है।

अब यह सोचना था कि कैसे मैं उसको अपने विश्वास में लूँ।

यह सब सोचते हुए मैं घर पहुँच गया।

अब घर पहुँच कर मैंने घण्टी बजाई… घर्र्न्न… घर्र्न्न…

सलोनी- कौन है…?

मैं- खोल ना… मैं हूँ।

दरवाजा खुलते ही…

सलोनी- क्या हुआ? बड़ी देर लगा दी… कहाँ रुक गए थे.. पारस का फोन आया कि वो तो 2 घंटे पहले ही निकल गया.. वो और मैं दोनों कॉल कर रहे थे पर आपका फोन ही नहीं लग रहा था… कहाँ थे..? कहीं कुछ हुआ तो नहीं… कितना घबरा रही थी

मैं… कुछ हुआ तो नहीं… क्या तुम भी… एक कॉल भी नहीं कर सकते थे…

ओह माय गॉड, मुझे याद आया… मैं अपना फोन कॉल ऑफ किया था… जब रिकॉर्डिंग सुन रहा था… और यहाँ ये सब कितने परेशान हो गए बेचारे…

मैं- ओह… जरा ठहर मेरी जान… ऐसा कुछ नहीं हुआ… बस कोई मिल गया था… और मेरा फोन गिरने से ऑफ हो गया था… मुझे पता ही नहीं चला…

सलोनी मेरे सीने से लग गई… मैंने कसकर उसे अपनी बाँहों में जकड़ लिया… मुझे उसके कमसिन शरीर का अहसास होने लगा.. जो पिछले 1-2 साल से मैंने खो दिया था।

वाक़यी सलोनी एक बहुत खूबसूरत और काम-रति सम्पन्ना स्त्री है। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

उसका अंग अंग रस से भरा है… उसके उठे हुए नुकीले स्तन, चूची मेरे सीने में चुभ रहे थे..

उनके निप्पल तक की चुभन का अहसास मुझे हो रहा था… मुझे पता था कि उसने ब्रा नहीं पहनी थी…क्योंकि उसकी गहरी लाल रंग की ब्रा, कच्छी हमारे बेड के कोने में लैंप के पास रखीं थी।

सलोनी अमूमन तो घर पर ब्रा कच्छी पहनती ही नहीं थी। और अगर पहनी हो तो रात को सोने से पहले वो उनको उतार वहीं रख देती थी।

वो हमेशा मेरे सामने ही यह सब करती थी, मगर उसके प्रति मेरी रुचि बिल्कुल ख़त्म सी हो गई थी इसलिए मैं कोई ध्यान नहीं देता था।

मगर आज की सारी घटनाओ ने मेरा नजरिया ही बदल दिया था। मुझे सलोनी संसार की सबसे प्यारी स्त्री लग रही थी।

यकीन मानना… मेरा लण्ड उस रिकॉर्डिंग को सुनने के बाद से खड़ा था और बहुत दिनों बाद आज सलोनी के शरीर की गर्मी महसूस कर उसको छू रहा था।

इसका एहसास सलोनी को भी हो रहा होगा…

मैं अपना हाथ उसकी पीठ से लहराते हुए उसके गदराये चूतड़ों तक ले गया।

कसम से इतने सेक्सी चूतड़ किसी के नहीं हो सकते… ऐसा मखमली अहसास जैसे मक्खन एक पर्वत को चूतड़ का आकार दे दिया गया हो…

सलोनी ने सफ़ेद मिडी जैसा गाउन पहना था, जो उसके चूतड़ों से थोड़ा ही नीचे होगा… मेरा हाथ सरलता से उसके गाउन के अंदर उसके नग्न नितम्बों (चूतड़ों) के ऊपर पहुँच गया था।

मैं उस मखमली एहसास से सराबोर हो गया था… सलोनी और कसकर मेरे से लिपट गई…

उसकी इस अदा ने मेरे दिल में उसके प्रति और भी प्यार भर दिया…

यह सच है कि वो कभी मुझे किसी बात के लिए मना नहीं करती थी।

आज ना जाने उसने कितनी मस्ती की होगी, और कई बार सेक्स भी किया ही होगा… चाहती तो इस समय वो गहरी नींद सो रही होती…

उसका शरीर इस समय तृप्त होना चाहिए, पर मेरे लिए वो फिर तैयार थी… वो कुछ मना नहीं कर रही थी..

बल्कि मेरे बाहों में सिमटी आहें भर रही थी… उसको मेरी जरूरत का हर पल ख्याल रहता था…

मैंने अपने हाथ को उसके चूतड़ों के चारों ओर सहलाकर, उसके दोनों उभारों को अपनी मुट्ठी में भरने के बाद अपनी दो उंगलियों से उसकी दरार को प्यार से सहलाया फिर अपनी उँगलियों को उसके गुदाद्वार यानि चूतड़ों के छेद पर ले गया जो एक गरम भाप छोड़ रहा था…

फिर वहाँ से मेरी उँगलियों ने उसकी मखमली चूत तक का सफ़र बड़ी रंगीनी के साथ तय किया…

सलोनी- आअहाआ… ह्ह्ह्हह…

बस उसके मुख से केवल आहें ही निकल रहीं थीं..

क्या बताऊँ कितना नरम अहसास था… मैं गांड और चूत के मुख को प्यार से ऐसे सहला रहा था कि इन दोनों बेचारो छेदों ने कितनी चोट सही हैं आज…

मगर गांड की गर्मी और चूत के गीलेपन ने मुझे यह बता दिया कि वो फिर चोट सहने के लिए तैयार हैं…

मैंने अपने मुंह से ही सलोनी के कन्धों पर बंधे स्ट्रैप खोल दिए… उसका गाउन नीचे गिर गया… वो अब पूर्ण नग्न-अवस्था में मेरी बाहों में थी…

मैंने उसको थोड़ा पीछे कर उसके गदराये मम्मों को देखा… उन पर काफी सारे लाल लाल निशान थे… जो शायद आज हमारे पारस साब बनाकर गए होंगे…

मगर सलोनी कभी कुछ छिपाने की कोशिश नहीं करती थी इसीलिए मुझे उस पर कभी कोई शक़ नहीं होता था..

तभी सलोनी बोली- सुनो, आप कपड़े बदल लो… मैं दूध गर्म कर देती हूँ…

मैं- हाँ मेरी जान, कितने दिन पारस के कारण हम कुछ नहीं कर पाये.. आज बहुत मन हो रहा है…

सलोनी के मुख पर एक सेक्सी मुस्कराहट थी… वो एक नई नवेली दुल्हन की तरह शरमा रही थी… उसने रसोई में जाते हुए अपनी आँखों को झुकाकर एक संस्कारी स्त्री की तरह स्वीकृति दी…

उसकी इस अदा को देखकर कोई सपने में भी विश्वास नहीं कर सकता था कि आज पूरे दिन उसने किस तरह अपना अंग प्रदर्शन किया और बुरी तरह से अपने पति के रहते किसी परपुरुष से चुदाई करवाई…

यही होती हैं नारी की अदाएँ जिन्हें कोई नहीं समझ सकता।

समझदार पुरुष को इन सबसे तालमेल बनाना ही होता है… वरना होता तो वही है जो नारी चाहती है..

अब या तो आपकी ख़ुशी के साथ या फिर आपका जीवन बर्बाद करने के बाद…

फिलहाल मैं कपड़े उतार हल्का सा शावर ले, एक रेशमी लुंगी पहन, अपने शरीर को डियो से महकाकर बिस्तर पर आ बैठ गया।

मुझे ध्यान आया कि जब मैंने सलोनी को छोड़ा था तब वो पूरी नंगी थी।

उसकी नाइटी अभी भी वहीं पड़ी थी… इसका मतलब वो रसोई में नंगी ही होगी।

बस मैं उठकर रसोई की ओर जाने लगा।

ऐसा नहीं है कि ऐसा पहले नहीं होता था, मगर मैं कभी इस सब रोमांच के बारे में नहीं सोचता था।

पहले भी ना जाने कितनी बात सलोनी घर में नंगी ही और काम करती रहती थी मगर मैं उससे कोई रोमांस नहीं करता था और ना मुझे कोई अजीब लगता था। क्योंकि हम दोनों यहाँ अकेले ही रहते थे तो उस आज़ादी का फ़ायदा उठाते थे।

मैं भी ज्यादातर पूरा नंगा ही सोता हूँ और घर पर काफी कम कपड़े ही पहनता हूँ।

मैं जब रसोई में गया तो…

कहानी जारी रहेगी।

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