जिगोलो Xxx कहानी में मेरा दोस्त कॉल बॉय है. मैंने उससे इसी काम में मदद मांगी. उसने मुझे कुछ दिन बाद एक क्लाइंट दी और उसे तय वक्त पर होटल में मिलने को कहा.
मेरा नाम वरुण है। कद-काठी से सामान्य औसत दिखता हूँ।
उम्र 26 साल और ऊंचाई 170 cm है।
औजार का साइज आम भारतीय से थोड़ा ज्यादा 7.5 इंच का है और चोदने की समय सीमा 30 मिनट पहली बार में तथा 45 मिनट से ज्यादा पहली बार के बाद हो जाती है।
मैं एक प्रोफेशनल कॉल बॉय हूँ, यह मेरे सफ़र की कहानी है।
यह जिगोलो Xxx कहानी आज से 2 साल पहले की है, जब मैं प्रयागराज अपने घर में था।
मेरा एक दोस्त जो लखनऊ में था, उससे मिलना हुआ।
वह एक कॉल बॉय था।
दारू पे उसने सब बताया मुझे अपने काम के बारे में कि कैसे क्लाइंट से डील करते हैं, कैसे उसे आनंद देते हैं।
मैंने भी उसके सामने कॉल बॉय बनने का प्रस्ताव रखा।
दारू के नशे में उसने भी हाँ कर दी।
अगले दिन वह दिल्ली रवाना हो गया।
दिन बीते, मैं उस रात की बात को भूल चुका था लेकिन वह नहीं।
4 दिन बाद उसका कॉल आता है कि एक 34 साल की डॉक्टर को सर्विस चाहिए, वह दिल्ली है सर्विस के काम से, तो क्या मैं यह काम कर सकता हूँ?
मैंने भी हाँ कर दी।
उसने मुझे 2000 रुपये एडवांस भेजे।
कुछ क्रीम, जैली और आयल के नाम भेजे और कहा- सब ले कल लखनऊ चला जाना। वहाँ एक 4 सितारा होटल में बुकिंग है जिसकी डिटेल उसने मुझे दी और कहा कि यह बस शुरुआत है भाई, आगे का सफ़र तेरा यह काम तय करेगा।
पराई चूत चोदने का मौका मुझे मिल गया था.
उसके बताए अनुसार मैं भी सब तैयारी के साथ पहुँच जाता हूँ। अपने पब्लिक हेयर को उसके निर्देशानुसार हटा के, अच्छे से तैयार होकर मैं क्लाइंट के आने का इंतजार करता हूँ।
शाम 6 बजे दरवाज़े पे दस्तक होती है।
एक साँवली सी महिला मेरे सामने होती है।
कद उसका कोई 5’5″ था, छाती के उभार 34, पतली कमर, नाभि से नीचे साड़ी ब्लू कलर की, पतले होंठ, लम्बे पतले हाथ।
उसने हाथ बढ़ाया और कहा, “हैल्लो!”
जवाब में मैंने हाथ मिलाया और कहा, “हैल्लो!”
काफ़ी मुलायम हाथ थे उसके।
मैंने कहा, “अंदर आइये, मेरा नाम वरुण है और आपका!”
जैसा मैं आपको बता चुका हूँ कि मैं प्रोफेशनल हूँ तो उसका नाम उजागर नहीं करूंगा, परन्तु कहानी के दृष्टिकोण से आप लोग उनका नाम प्रिया रख लो।
उसने पूछा, “काम शुरु करें!”
मैंने हाँ में सर हिला दिया।
इस काम में जाने के पहले मेरे मित्र ने हिदायत दी थी कि कोई पर्सनल बात नहीं।
इसलिए मैंने भी कुछ नहीं पूछा और आज तक मैंने अपने किसी क्लाइंट के जाती ज़िन्दगी की कभी बात नहीं की, क्योंकि शारीरिक सुख पे सभी का अधिकार है चाहे महिला हो या पुरुष, उसको जज करने का अधिकार किसी को नहीं है।
खैर जिगोलो Xxx कहानी पे लौटते हैं।
मैंने उसको बिस्तर पे बैठा के उसके होंठों पे होंठ रख दिये।
करीब 5 मिनट तक हमने एक दूसरे को चूमा और मेरे हाथ उसके बालों में चल रहे थे।
धीरे-धीरे होंठ मेरे उसके गले पे आने लगे और हाथ उसके उरोज पे।
उसके उरोज को ब्लाउज के ऊपर से मैं दबा रहा था।
उसके मुँह से सी… सी… सी… की आवाज़ मेरे कानों में गूंज रही थी।
धीरे-धीरे मैंने उसके उरोज को ब्लाउज और लाल रंग के ब्रा से आज़ाद कर दिया और चुचक को होंठ से काटने लगा और एक हाथ से दूसरे उरोज को दबाने लगा।
किसी भी सेक्स में पहला नियम होता है कि शुरुआत बगल, उरोज और कान को कम से कम 5 मिनट चूम के ही करें।
इससे महिला सेक्स में उत्तेजित होकर भाग लेती है।
फिर उसके बगल को मैंने चाटना शुरु किया जो पूरी तरह से साफ था।
फाइनल कान को चूमते हुए मैंने अपना पूरा ध्यान उरोज को चूमने में लगा दिया।
वह मेरे पीठ पे हाथ फेर रही थी, कभी मेरे माथे पे, कभी मुट्ठी से चादर भींज रही थी।
फिर उसके बदन से साड़ी को अलग कर मैंने पेटीकोट उतार दिया।
वह वापस से मेरे मुँह को चूमने लगी। वह चूमने की कला में निपुण थी, मैंने भी अपनी कौशलता का पूरा उपयोग किया।
अब उसकी नाभि में जीभ डाल मैं उसको उत्तेजित कर झटके से उसकी लाल रंग की पैंटी अलग कर दी।
अगला निशाना मेरा उसकी चुत थी।
उसकी चुत पहले से काफ़ी गीली हो चुकी थी।
मैंने भी अपनी जीभ उसके चुत में डाल कर उसके जी-पॉइंट को होंठों से चूसने लगा।
वह मेरे मुँह में पूरी तरह से झड़ गई, इसका एक-एक बूंद मैं पी गया।
फिर उसको बेड के किनारे लाकर मैंने उसका पाँव उठा कर उसके अंगूठे और चुत के पास जाँघ को चूमना प्रारम्भ कर दिया।
वह फुसफुसाहट करने लगी, “आ… आ… खा जाओ इसको!”
वापस चुत को चाटते हुए मैंने उसकी गांड के छेद में अपनी जीभ डाल दी।
उसका स्वाद नमकीन सा आज भी याद है मुझे।
अब वह पूरी तरह से अपना आपा खो दी और मुझसे कहने लगी, “अब आ जाओ मेरे अंदर! बस करो अब, डालो अंदर!”
मैंने भी उनकी चुत पे जैल लगा के ख़ुद पान फ्लेवर वाला कंडोम पहन उनकी चुत में पहला धक्का दे दिया।
अभी मेरा लंड 40% ही घुसा था, वह कहने लगी, “आ… आराम से डालो! बहुत मोटा और बड़ा है तुम्हारा!”
मैं फिर से उनके होंठों को चूमते हुए धीरे-धीरे जोर चुत में बनाता गया।
करीब 2 मिनट बाद मेरा पूरा लंड उनके चुत में घुस गया।
सेक्स में जरूरी है समय, इसके लिये सेक्स में बिना उत्तेजित हुए पहले धीरे-धीरे धक्कों से इसकी शुरुआत करें और मैंने वैसा ही किया।
करीब 10 मिनट तक रूम में बस आह… अहह… अह्ह्ह… हम्म… ऐसे ही, बस यही गूंज रहा था।
अब मैंने अपनी रफ़्तार 50% बढ़ा दी और बीच-बीच में एक तेज़ शॉट देने लगा, जिसपे वह मेरे पीठ को नोचने लगी, मुझे गले पे काटने लगी और मैं भी उनके कानों को चूमता, धक्कों की रफ़्तार बढ़ाता गया।
करीब 5 मिनट ऐसे चलने पे मैंने रुक कर बोला, “आप ऊपर आएँगी!”
वह मान गई।
उसने चुत पे लंड सेट कर धीरे-धीरे बैठने लगी।
मैंने उनको रुकने बोल उनकी कमर को पकड़ नीचे से एक तगड़ा धक्का लगाया और लंड फच के साथ अंदर चला गया।
मेरे ऊपर लेट अपना चुचक मुझे पिलाने लगी और मैं नीचे से धक्का देने लगा।
3 मिनट में वह फिर झड़ गई और पूरा पानी मेरे जाँघ पे आने लगा।
मैंने भी धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और 10 मिनट बाद मेरा भी छूट गया।
वह निढाल होकर मुझ पे गिर गई।
करीब 10 मिनट बाद उठकर वह नंगी ही अपनी सिगरेट जलाती है, पीती है और पर्स से निकाल कर 4000 रुपये मुझे देती है और कहती है, “आप कपड़े पहन जा सकते हो! मैं 15 मिनट बाद जाऊंगी! और हाँ, लखनऊ में रुकना कल, मेरी एक सहेली कॉल करेगी, आज रात कल रात उसके साथ रुक जाना!”
मैं भी बाथरूम में जाकर ख़ुद को साफ कर, कपड़े पहन, उनको गले से लगा कर निकल जाता हूँ।
यह है मेरे जिगोलो बनने के सफ़र की पहली रात, आगे की कहानियों में आपको अगली दास्तां सुनाऊंगा।
कैसी लगी मेरी जिगोलो Xxx कहानी?
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