Maa aur Beta - 6

Views: 353 Category: Family Sex By RaatKiBaat Published: May 07, 2025

Previous Part : Maa aur Beta - 5

मैंने उसे हाँ बोल दिया और उससे बोला अगर ज्यादा दर्द हुआ तो मैं गांड में लंड नहीं डलवाऊंगी । अमित ने मेरी बात मान ली और तैयार हो गया । मैंने अमित को क्रीम लाने के लिए कहा तो वो उठकर क्रीम ले आया। फिर मैंने अमित से मेरी गांड के छेद पर क्रीम लगाने को बोला। उसने ढेर सारी क्रीम अपनी उंगली से मेरी गांड के छेद के ऊपर और कुछ क्रीम अंदर भर दी ।
वैसे तो अमित का लंड बहुत गीला था पर फिर भी उसने अपने लंड को भी क्रीम से मल लिया । अब अमित बिल्कुल तैयार था पर मुझे बहुत डर लग रहा था । मैं अमित को फिर से याद दिलाते हुए बोली- रोहन, अगर दर्द हुआ तो फिर मैं नहीं करवाऊँगी ।
तो अमित बोला- मम्मी आप चिंता मत करो, मैं आपको बिल्कुल भी दर्द नहीं होने दूंगा ।
अमित ने मुझे उल्टा लिटा दिया और घोड़ी बनने का बोला तो मैं अपने दोनों हाथों को बेड पर रखकर घोड़ी बन गई । मैंने डर के मारे अपने मम्मों और सर को भी बेड से चिपका दिया । फिर अमित उठा और मेरी गांड पर हाथ फेरते हुए मेरी गांड से अपने लंड को टच करने लगा, फिर उसने अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर रख दिया ।
मैं समझ चुकी थी कि आज मैं दर्द से तड़पने वाली हूँ, मेरी धड़कनें तेज होने लगी थी । अमित ने मेरी गांड के छेद को अपने दोनों हाथों से खींचकर फैलाया और फिर अपने लंड को हल्के से अंदर की तरफ धकेला । मुझे हल्का सा दर्द हुआ तो मैंने अपने हाथों से अपनी गांड को पकड़ लिया ।
अमित ले सख्त लण्ड का आधा सुपारा मेरी गांड में घुस चुका था फिर अमित ने एक और हल्के धक्के में अपना सुपाड़ा मेरी गांड के अंदर कर दिया । मैं चिल्ला उठी मैंने दर्द में कराहते हुए अमित को बोला- रोहन, मुझे गांड में दर्द हो रहा है। अब इससे ज्यादा दर्द मैं सहन नहीं कर पाऊँगी ।
अमित बोला- मम्मी, बस अब इससे ज्यादा दर्द नहीं होने दूँगा आपको । मैं कुछ नहीं बोली और वैसे ही लेटी रही । अमित ने कुछ देर के लिये अपने धक्कों को रोक दिया, वो मेरे नॉर्मल होने का इंतेजार कर रहा था ।
थोड़ी देर बाद जब उसे लगा कि अब मुझे दर्द नहीं हो रहा तो उसने धीरे धीरे ही अपने लंड के सुपारे को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया । वो लंड को धीरे से बाहर करता और फिर थोड़े से दबाव के साथ ही उसे फिर से अंदर कर देता । ऐसा करते करते उसका लंड मेरी गांड के अंदर जाने लगा था पर इसमें एक मीठे से दर्द के अलावा अमित के प्यार का एहसास था ।
वो इतना धीरे से ये सब कर रहा था कि कब अमित का आधा लंड मेरी गांड के अंदर बाहर होने लगा, मुझे पता ही नहीं लगा । मैं भी अब मस्त हो चुकी थी और ‘आआहहहह… रोहन… …आ…आ… हा.. हा.. ओह्ह… मेरे लाल… उफ्फ्फ…’ की सीत्कारें भर रही थी ।
फिर अमित ने अपने लंड का दबाव मेरी गांड पर बढ़ाना शुरू कर दिया और उसका थोड़ा और लंड मेरी गांड के अंदर चला गया । मैं ‘अआई आअहूचच…’ करते हुए अमित को बोली- अमित बेटा, अब इससे ज्यादा अंदर मत डालो, मुझे दर्द हो रहा है । वो रुक गया और फिर उतने ही घुसे हुए लंड से मेरी गांड को चोदना शुरू कर दिया । पहले तो वो हल्के हल्के धक्कों से मेरी गांड को चोद रहा था फिर धीरे धीरे उसने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी ।
अमित मेरी कमर को पकड़कर मुझे आगे की तरफ धक्के दे रहा था । मैं भी मीठे से दर्द और मजे के साथ अपनी गांड को अपने बेटे अमित से चुदवा रही थी । फिर अमित ने मुझे वैसे ही पकड़कर उठाया, उसका लंड अभी भी मेरी गांड के अंदर था, वो नीचे लेट गया और मुझे अपने ऊपर बैठा लिया । अब मैं अमित के ऊपर बैठी हुई थी और उसका लंड मेरी गांड के अंदर था ।
मैं थक चुकी थी तो मैंने अपना शरीर अमित के शरीर के ऊपर रख दिया था । मेरे मम्मे अमित के सीने पर रगड़ खा रहे थे और फिर वो मेरे होंठों को चूमने लगा । अमित के दोनों हाथ मेरी गांड पर थे और वो उन्हें सहला और दबा रहा था ।
अमित ने फिर धीरे से अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और फिर लगातार धक्कों से मेरी गांड में अपना लंड डाल रहा था । मैं भी कमर उठा कर उसका साथ दे रही थी । अमित अब तेजी से मेरी गांड मार रहा था और मेरे होंठों को चूमे जा रहा था । मेरी कसी हुई गांड ने अमित को ज्यादा देर तक नहीं टिकने दिया और उसने मेरी गांड को मजबूती से जकड़ लिया और जोर से झटके देते हुए मेरी गांड के अंदर ही झड़ने लगा ।
उसका गर्म वीर्य मेरी कसी हुई गांड में काफी देर तक स्खलित हुआ । अमित अब निढाल होकर बेड पर ही लेट गया और मैं भी उसके ऊपर लेट गई । अमित का लंड अभी भी मेरी गांड के अंदर था । थोड़ी देर बाद जब अमित का लंड मुरझा कर बाहर आया तो मुझे दर्द का एहसास होने लगा और मेरी गांड में से अमित के वीर्य का सैलाब बाहर आकर बहने लगा जो मेरी गांड से होते हुए अमित के पैरों पर आने लगा था ।
आज पहली बार अमित का इतना वीर्य स्खलन हुआ था । मैं अमित से बोली- आज तो दवा खाकर बड़े ही जोश में हैं जनाब? और आज मेरी गांड को भी नहीं छोड़ा । अमित बोला- मम्मी, आज तो मैंने आपको थका दिया ना… और आपको दर्द हुआ उसके लिए सॉरी मम्मी ।
मैं अमित को बोली- चल ठीक है, अपनी मम्मी को भी सॉरी बोलेगा अब? और तूने मुझे इतने प्यार से चोदा कि ज्यादा दर्द नहीं हुआ मुझे। आज मैं पहले से ही थकी हुई थी तो ज्यादा देर तक एन्जॉय नहीं कर पाई तेरे साथ ।
अमित मेरे बालों पर हाथ फेरने लगा और मेरे माथे पर चुम्बन करते हुए बोला- मम्मी… आई लव यू… आपने मेरे लिए कितना कुछ किया। मैंने आपसे जो भी बोला आपने मेरी हर वो बात मानी… मम्मा… आई लव यू सो मच !
मैंने अमित से बोला- आई लव यू टू बेटा… और मैं तेरी बात नहीं मानूँगी तो कौन मानेगा। भला माँ अपने बेटे का ख्याल नहीं रखेगी तो कौन रखेगा ?
फिर मैंने अमित से कहा- अब तूने जो मेरी गांड में फैलाया है उसे कौन साफ करेगा ? मेरे इतना बोलते ही वो उठा और मेरी नई पैंटी को उठाकर मेरी टांगों के बीच आ गया और मेरी गांड के छेद को साफ करने लगा । मुझे साफ करने के बाद अमित ने अपनी टांगों को भी साफ किया और फिर हम दोनों आपस में लिपट कर बाते करने लगे ।
अमित का लंड फिर से मेरे नंगे बदन का स्पर्श पाकर खड़ा होने लगा तो मैंने अमित से कहा- ये महाशय तो फिर से खड़े हो गए लगता है इनका मन नहीं भरा अभी तक ? अमित हंसने लगा और बोला- मम्मी, आप हो ही इतनी सेक्सी कि मन भर ही नहीं सकता । मैं भी उसकी बात सुनकर हँसने लगी ।
तो अमित बोला- मम्मी, आप थक चुकी हो तो रहने दो… मैं बाद में आपको परेशान करूँगा ।
मैंने कहा- कोई बात नहीं, मैं इसे सहला देती हूँ ।
तब मैंने अमित के लंड को अपने हाथों में लिया और सहलाने लगी । अमित का लंड एकदम कड़क हो चुका था । थोड़ी देर सहलाने के बाद मैं उसका लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। अमित भी मेरे सर को अपने लंड पर दबा रहा था जिससे उसका लंड मेरे मुँह के अंदर समाने लगा । अमित ने फिर अपने लंड से मेरे मुँह को चोदना शुरू कर दिया ।
फिर वो उठा और मेरे मुँह से लंड को निकालकर मुझे बेड पर लेटा दिया। अमित का लंड मेरे थूक से सना हुआ था । अमित मेरे ऊपर आया और मेरे बूब्स के बीच अपना लंड डालकर मेरे मम्मों को आपस में दबाने लगा । मुझे उसकी यह हरकत बहुत अच्छी लगी । उसने मेरे मम्मों को चोदना शुरू कर दिया। अमित के दोनों हाथ मेरे मम्मों पर थे और लंड मेरे मम्मों के बीच से उन्हें चोद रहा था ।
अमित अब झड़ने वाला था तो उसने मुझसे बोला- मम्मी, मैं झड़ने वाला हूँ… अपना वीर्य कहाँ निकालूँ ?
मैंने उसकी बात का जवाब न देते हुए सीधे उसके लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी । कुछ ही पलों बाद उसने झड़ना शुरू कर दिया और उसका सारा वीर्य मेरे मुंह में स्खलित हो गया जिसे मैंने निगल लिया । मैंने अमित के लंड को चाटकर साफ कर दिया ।
मैं अमित से बोली- अन्नू के आने का टाइम हो गया है अब कपड़े पहन लो । फिर मैं उठी और अपने कपड़े पहनने लगी । अमित अपनी चड्डी पहनते हुए बोला- मम्मी, आज बहुत दिनों बाद हम दोनों को टाइम मिला था और वो भी इतनी जल्दी ख़त्म हो गया… पता नहीं अब कब हमें टाइम मिलेगा ।
अमित का उदास सा चेहरा देखकर मैं बोली- इतना उदास मत हो, दो दिन बाद तेरे पापा बाहर जा रहे है और फिर एक हफ्ते बाद ही आएंगे। तब तेरे पास टाइम ही टाइम होगा । मेरी बात सुनकर अमित इतना खुश हुआ की उसने मुझे गोद में उठा लिया ।
अमित बोला- मम्मी आने वाले सात दिन बस मैं और आप साथ में बिताएंगे । मैंने भी हंसते हुए उसे हां बोल दिया ।
फिर वो अपने रूम में चला गया । थोड़ी देर बाद अन्नू और अभिषेक दोनो घर आ गए । दो दिन बाद अभिषेक अपने काम के सिलसिले में बाहर चले गए । अन्नू भी स्कूल जा चुकी थी ।
अभिषेक को दिखाने के लिए अमित भी कॉलेज चला गया था पर उनके जाने के बाद वो घर पर वापस आ गया ।
इससे आगे की चुदाई की कहानी अगले भाग में ।

 

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