नई चूत की चुदाई कहानी में जवानी आते ही मेरा दिल सेक्स के लिए करने लगा. लेकिन मुझे चूत फड़वाने से डर लगता था. मेरी सगी भाभी ने अपने फुफेरे भाई से मेरी बुर की सील तुड़वायी.
कहते हैं कि जवानी में हर एक के कदम सेक्स के नशे में थोड़ा इधर उधर डगमगाने लगते हैं।
ऐसा कुछ मेरे साथ भी हुआ था. मेरा भी झुकाव सेक्स की तरफ बढ़ने लगा था।
पहली बात तो यह कि मैं अपनी सहेलियों के साथ कॉलेज में गन्दी गन्दी बातें करने लगी थी।
मुझे मज़ा आने लगा था।
फिर मैं भी औरों की तरह खुल कर बोलने लगी थी।
मुझे अच्छा लगने लगा था.
दूसरी बात यह कि मैं मोबाइल पर पोर्न देखने लगी थी तो मैं सेक्स की तरफ तेजी से आकर्षित होने लगी और खिंचती चली गयी।
नई चूत की चुदाई कहानी बनने तक मैं 18 पार कर चुकी थी।
उंगली तो मैं पहले से ही करने लगी थी।
फिर एक दिन बड़ा बदलाव आ गया मेरे जीवन में।
मेरी एक सहेली ने मुझे एक लड़के का लण्ड पकड़ा दिया।
मैंने ज़िन्दगी में पहली बार लण्ड देखा था तो बड़ी उत्तेजित हो गई थी।
थोड़ा डर भी लगा था मुझे, थोड़ी शरमाई भी थी मैं … लेकिन फिर किसी तरह हिम्मत की और हाथ बढाकर पकड़ लिया लण्ड।
मुझे लण्ड पकड़ना अच्छा लगा।
सहेली ने जैसा जैसा कहा था वैसा वैसा ही मैं करने लगी।
वह भी मेरा साथ देने लगी।
हम दोनों ने मिलकर लण्ड का मुट्ठ मारा।
उस दिन मुझे मालूम हुआ कि मुट्ठ मारना यानी सड़का मारना किसे कहते हैं और मुट्ठ कैसे मारा जाता है?
लण्ड से जब सफ़ेद सफ़ेद गाढ़ा गाढ़ा कुछ निकला तो सहेली ने ही मुझे उसका नाम बताया।
उसके बारे में पूरी जानकारी मुझे दी।
उसके बाद तो मैंने 3 लण्ड और पकड़े, उन्हें हिलाया, चूमा और खूब मस्ती की।
उसके बाद मैंने सबका मुट्ठ मारा और खूब एन्जॉय किया।
मेरी चूत भी बुरी तरह गरमाने लगी थी और खुजली भी बहन चोद खूब होने लगी थी मेरी चूत में!
लेकिन मैंने अभी तक किसी भी लण्ड को अपनी चूत तक आने नहीं दिया।
यही नहीं, मैंने तो किसी मादरचोद को भी अपनी चूत पर हाथ भी नहीं लगाने दिया।
मेरा नाम रितिका चौहान है।
मेरे घर में मेरी माँ, मेरे पापा और मेरा बड़ा भाई है।
भाई साहेब की शादी हो गई है।
मेरी अनुजा भाभी बड़ी खूबसूरत, सेक्सी और एकदम गोरी चिट्टी हैं।
वह मुझसे सिर्फ दो साल ही बड़ी हैं।
मैं उनसे खुल कर बातें करती हूँ। मैंने अपने दिल की बात उसे बता देती हूँ, यहाँ तक की मैंने जिस जिस का लण्ड अभी तक पकड़ा था और मुट्ठ मारा था वो सब मैं उसे बता चुकी हूँ।
भाभी ने भी अपनी सारी बातें मुझे बता दीं हैं।
यहाँ तक कि वह शादी के पहले किस किस से चुदी थी और उनके लण्ड कैसे कैसे थे, वो सब मुझे बता चुकी थीं.
फिर तो भाभी मेरी पक्की सहेली बन गईं।
एक दिन भाभी का मूड बना तो वह मुझे लेकर अपने मायके चली गईं।
वहां जाकर मैं भाभी के माता पिता से मिली और उसके भाई से भी मिली।
मैं सबसे मिलकर बहुत खुश हुई और वो सब भी मुझे देख कर बहुत खुश हुए।
इधर हम दोनों आपस में मादर चोद, बहन चोद, बुर चोदी, भोसड़ी वाली कह कर बातें करने लगीं।
एक दिन भाभी के माता पिता और भाई एक हफ्ते के लिए बाहर चले गए।
अब घर में केवल मैं और भाभी रह गई।
उस दिन हम दोनों बड़ी मस्ती के मूड में थी।
खूब हंसी मजाक हो रही थी।
तभी भाभी मुझसे खूब खुल कर बातें करने लगीं।
भाभी ने कहा- रितिका तू तो लण्ड पकड़ चुकी हैं न ?
मैंने कहा- हां भाभी, लण्ड तो मैं पकड़ चुकी हूँ।
वह बोली- आज मैं तुझे एक और लण्ड पकड़ाऊंगी। शर्माना नहीं। मस्ती से पकड़ लेना। लेकिन नंगी होकर पकड़ना पड़ेगा लण्ड।
मैंने पूछा- किसका है लण्ड भाभी ये तो बताओ?
उसने कहा- मेरी बुआ का लड़का है। नाम है उसका तरुण। बड़ा मस्त लौड़ा है उसका। आज मैं जो कहूँगी वो तुम्हें करना पड़ेगा।
मैंने कहा- ठीक है भाभी। तुम जो कहोगी वो मेरे लिए अच्छा ही होगा।
तरुण जब आया तो उसे देख कर ही मेरी चूत गीली हो गई।
वह साला एकदम गोरा चिट्टा लम्बा चौड़ा कसरती लड़का था; बड़ा स्मार्ट और हैंडसम था।
मेरे मन में लड्डू फूटने लगे।
खैर भाभी ने मुझे उससे मिलवाया।
धीरे धीरे बातचीत होने लगीं।
नाश्ता पानी खूब मजे से हुआ।
भाभी ने पूछा- तरुण तुमको मेरी ननद कैसी लगी?
वह बोला- ये तो बिल्कुल अप्सरा हैं दीदी। बड़ी सुन्दर और सेक्सी हैं।
यह सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं थोड़ा शर्मा भी गई।
भाभी ने कहा- अगर तुमको मेरी ननद अच्छी लगती है तो तुम क्या इसकी ले सकते हो?
वह बोला- इतनी बढ़िया चीज को कौन मना करेगा दीदी?
तब भाभी ने उसका लौड़ा ऊपर से ही दबा कर बोली- अरे यार, तेरा लौड़ा तो अभी से खड़ा हो गया है?
वह बोला- इतनी खूबसूरत लड़की को देख कर किसका लौड़ा खड़ा नहीं होगा दीदी?
यह सुनकर मैं अंदर से बड़ी मस्त हो गई।
फिर भाभी हौले हौले उसकी पैंट खोलने लगीं तो मैं बड़ी उत्सुकता से उसे देखने लगी।
लण्ड का बाहर आने का इंतज़ार करने लगी।
भाभी ने उसकी पैंट खोली तो वह चड्डी में आ गया।
भाभी ने उसके ऊपर के कपड़े पहले से ही उतार रखा था।
चड्डी का उभार बता रहा था कि लण्ड अंदर से खड़ा है।
भाभी ने उस उभार को चूम लिया तो मेरे बदन में करंट लग गया।
तब तक भाभी ने उसे खड़ा कर दिया और चड्डी के दोनों तरफ अपनी उंगलियां फंसा दी.
मैं बिना पलक झपकाए चड्डी का उतरना बड़े गौर से देखने लगी।
मेरी निगाहें बाहर आने वाले लण्ड पर टिक गईं।
फिर भाभी ने झर्र से चड्डी नीचे घसीट दिया तो लण्ड टन टनाता हुआ एकदम से बाहर आ गया और भाभी के गाल पर ऐसे लगा जैसे की किसी ने तप्पड़ मार दिया हो।
लण्ड मुझे एक नज़र में पसंद आ गया.
लण्ड एकदम चिकना था, झांटों का नामोनिशान नहीं था।
लण्ड का टोपा पूरा खुला हुआ था।
भाभी ने लण्ड मुट्ठी में लिया उसे दो तीन बार चूमा और फिर उसने लण्ड मुझे पकड़ा दिया।
मैं भाभी के सामने लण्ड पकड़ कर ख़ुशी के मारे झूम उठी।
मैंने थोड़ी बेशर्मी दिखाई और लण्ड की प्यार से कई चुम्मियाँ ले डाली।
मैंने जबान निकाल कर लण्ड का टोपा भी चाट लिया।
लण्ड मेरे हाथ में आकर और ज्यादा उछलने लगा था।
तब तक भाभी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिया।
मैंने भी कुछ नहीं कहा और पूरे कपड़े उतरवा लिये।
मैं मादरचोद तरुण के आगे बिल्कुल नंगी हो गई क्योंकि नंगा वह भी था मेरे आगे।
मैं अंदर से बिल्कुल बेशरम हो चुकी थी।
मैंने मन में ठान लिया कि आज जो होना है वो हो जाए।
मैं किसी को रोकूंगी नहीं।
भाभी ने भी अपने कपड़े उतारे और नंगी नंगी मेरे साथ लौड़ा चूसने लगीं।
हम दोनों एक दूसरे के मुंह में लण्ड बार बार घुसेड़ कर चूसने लगीं।
भाभी का दूसरा हाथ मेरी चूत पर था।
उसने मेरी नई चूत में उँगली करना शुरू कर दिया।
मुझे लण्ड का सुपाड़ा चाटने चूसने में मज़ा आने लगा।
लौड़ा एकदम चिकना था तो ज्यादा क्यूट लग रहा था।
तरुण ने मेरे नंगे बदन पर हाथ फिराना शुरू किया.
उसने मेरी छोटी छोटी झाटों वाली चूत देखी तो बोला- दीदी तेरी ननद की चूत बड़ी सेक्सी है। इसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ तो मुझे बड़ा उत्तेजित कर रहीं हैं। बड़ा मस्त माल है।
भाभी बोली- मस्त माल है तभी तो तेरे पास लायी हूँ भोसड़ी के तरुण। आज तुझे इसकी फ्रेश चूत में लण्ड पेल पेल कर इसे बुरी तरह चोदना है।
मैंने कहा- हाय दईया भाभी, इतना बड़ा लण्ड तो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगी। मेरी छोटी सी चूत फट जाएगी भाभी।
वह बोली- तेरी चूत की माँ का भोसड़ा … तेरी चूत की बहन की बुर। तू नहीं जानती कि तेरी चूत तरुण का लण्ड क्या तरुण के बाप का लण्ड भी खा जाएगी। ये चूत साली लण्ड खाने में बड़ी माहिर होती है रितिका। एक बार लण्ड खाना शुरू करेगी तो फिर रुकेगी नहीं। तुझे इसे रोज़ रोज़ लण्ड खिलाना पड़ेगा। समझ में आया बुर चोदी रितिका।
भाभी की बातों ने मेरी उत्तेजना दुगुनी कर दी।
तरुण ने लौड़ा न्यू चूत पर रगड़ा और फिर गच्च से अंदर घुसा दिया।
लण्ड घुसते ही मेरी चीख निकल पड़ी।
मैं छटपटाने लगी- उई माँ मर गई मैं … लौड़ा बड़ा मोटा है बहन चोद। बड़ा दर्द हो रहा है भाभी!
भाभी ने मेरे मुंह पर तकिया रख दिया और बोली- चुप रह भोसड़ी वाली, थोड़ा बर्दाश्त कर। अभी ज़न्नत का मज़ा आएगा।
उधर तरुण लण्ड बार बार निकाल निकाल कर पेलने लगा।
बस पांच मिनट में ही लण्ड ने अपना रास्ता बना लिया और फिर मुझे भी मज़ा आने लगा।
मेरी कमर बहन चोद अपने आप हिलने लगी और फिर मेरी चूत साली तरुण का लौड़ा बड़े मजे से खाने लगी।
मेरे मन में आया कि मैंने बेकार में ही इसे इतने दिनों तक बचा रखा। मुझे बहुत पहले लौड़ा अपनी चूत में पेलवा लेना चाहिए था।
मैं जब मस्ती से गांड़ उचका उचका के चुदवाने लगी.
तो भाभी ने अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी और बोली- ले बुर चोदी रितिका मेरी बुर चाट ले। तुझे चुदवाने में दुगुना मज़ा आने लगेगा।
मैं सच में भाभी की बुर चाटने लगी, मुझे चुदने में ज्यादा मज़ा आने लगा.
तब मुझे अहसास हुआ कि चुदाई में कितना मज़ा आता है!
मेरी कुंवारी चूत की सील टूट चुकी थी।
लौड़ा मुझे पूरा मज़ा देने लगा था।
मैं एन्जॉय करने लगी थी.
तरुण का लौड़ा मुझे अच्छा लगने लगा था।
तब मैंने सोचा कि तरुण तो भाभी को कई बार चोद चुका होगा।
भाभी भी हरामजादी शादी के बाद भी पराये मर्दों से चुदवाती है।
मेरे मुंह से निकला- भाभी, तुम तो शादी के बाद भी कई लोगों से चुदवाती होगी?
वह बड़े मजे से बोली- अरी रितिका, एक बात सुन, दुनिया में ऐसी कोई बीवी नहीं है जो पराये मरद से चुदवाती न हो? हां यह बात जरूर है की वह पराये एक मर्द से चुदवाती है या कई मर्दों से चुदवाती है पर चुदवाती जरूर है। सच बताऊँ तुझे मैं कई पराये मर्दों से चुदवाने वाली बीवी हूँ। जैसे कोई भी बीवी एक लण्ड के सहारे ज़िन्दगी नहीं गुज़ार सकती वैसे मैं भी तेरे भैया के लण्ड के सहारे ज़िन्दगी नहीं गुज़ार सकती। मुझे कई मर्दों के लण्ड चाहिए और मैं लेती हूँ।
यह सुनकर मैं और ज्यादा मस्ती से चुदवाने लगी।
भाभी बोली- रितिका एक बात बताऊँ? मुझे अपनी ननद की चूत चुदवाने में बड़ा मज़ा आ रहा है। मैंने ही अपने हाथों से पहला लण्ड तेरी चूत पेला है। तेरी चूत की सील मैंने ही तुड़वाई है।
मैंने कहा- हां यार, तभी तो मैं कहती हूँ ki तू मेरी हरामजादी भोसड़ी वाली बड़ी मस्त भाभी है। तू मेरी भाभी ही नहीं, मेरी पक्की दोस्त भी है। भगवान करे तेरी जैसी भाभी सबको मिले जो अपनी ननद को खूब चुदवाती रहे।
तरुण उधर झटके पे झटके मारे जा रहा था और भाभी उसके पेल्हड़ बड़े प्यार से सहला रही थी।
भाभी ने अपना मुंह मेरी चूत के पास लगा रखा था और बीच बीच में लौड़ा चूत से निकाल निकाल कर चूस लेती थी और फिर मेरी चूत में घुसेड़ देती थी।
भाभी का ऐसा करना मुझे भी मज़ा दे रहा था।
मेरा हाथ भाभी की चूत पर था।
मैं उसकी चूत सहला रही थी और उसके चूतड़ों पर भी हाथ फिरा रही थी।
तरुण तूफ़ान मेल की तरह मुझे चोदे जा रहा था।
जितने झटके वह मार रहा था मुझे हर झटके में एक नया मज़ा आ रहा था.
मुझे मालूम हो गया की चुदाई में कितना मज़ा है।
फिर उसने मुझे दबा कर और ज्यादा अच्छी तरह से चोदा।
मेरी इतनी उत्तेजना बढ़ी कि मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।
निकल गयी सारी गर्मी मेरी चूत की।
उधर तरुण ने भी लास्ट में इतने जोर जोर से लौड़ा पेला कि उसके लण्ड ने भी उगल दिया सारा माल।
लण्ड बाहर निकला तो मैंने दबोच लिया और मुंह में लेकर चाटने लगी।
मेरे साथ भाभी भी चाटने लगीं लण्ड।
इस चुदाई ने मुझे पूरी तरह संतुष्ट कर दिया।
तब मुझे इस बात का अहसास हुआ कि लड़कियां क्यों लण्ड के पीछे भागती रहती हैं।
उसके बाद हम तीनों बाथ रूम में गए जहाँ हम दोनों ने मिलकर तरुण और उसके लण्ड को बड़े प्यार से नहलाया।
उसने भी हम दोनों की चूत और चूचियों पर साबुन लगा लगा कर खूब मज़ा लिया।
फिर हम सब लोग नंगे नंगे बिस्तर पर एक दूसरे के नंगे बदन पर हाथ रख कर लेट गए।
अब क्या बताऊँ दोस्तों की चूत साली कुछ देर बाद फिर से चुदने के लिए तैयार हो गयी।
उधर जैसे ही मैंने लण्ड पर बड़े प्यार से हाथ रखा वैसे ही वह भी मादरचोद फनफना उठा।
एकदम से उठ कर खड़ा हो गया लण्ड।
लण्ड का टोपा फिर से चमकने लगा।
फिर क्या … मेरी जबान लण्ड के टोपे पर चलने लगी।
क्या मस्त लौड़ा था यार … मुझे उसे चाटते ही ऐसा मज़ा आया कि मेरे मुंह से निकला- यार तरुण, तुम मुझे फिर से चोदो। मैं बुरी तरह चुदासी हो गयी हूँ।
फिर तो तरुण ने इस बार मुझे घोड़ी बना कर लौड़ा पीछे से मेरी चूत में घुसेड़ दिया।
चुदाई की आवाज़ से भाभी की भी नींद खुल गई।
वह बोली- अरे वाह, तुम लोग भोसड़ी के फिर से जुट गए।
तभी उसे जोश आया तो उसने लण्ड मेरी गांड़ में घुसा दिया।
गांड़ में लण्ड घुसते ही मैं चीख पड़ी- हाय रे फट गई मेरी गांड़ … साले कुत्ते तूने बिना बताये लण्ड मेरी गांड़ में घुसेड़ दिया। तेरी माँ की चूत कमीने!
लेकिन वह रुका नहीं साला लण्ड पेल पेल कर मेरी गांड़ मारता रहा।
बीच बीच में लण्ड चूत में भी घुसाता रहा और भाभी मुझे गांड़ मरवाते हुए देख कर बड़ा मज़ा लेने लगी।
पीछे से मेरी चूत की चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगी।
इस तरह मैं जब तक भाभी के मायके में रही तब तक भाभी मुझे हर रोज़ उससे चुदवाती रहीं, मेरी गांड़ मरवाती रहीं।
चलते चलते वे बोली- रितिका अब मैं तेरी माँ का भोसड़ा भी चुदवाऊंगी।
नई चूत की चुदाई कहानी कैसी लगी दोस्तो?
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