कुंवारी लड़की को उसके घर में ही चोदा

Views: 66 Category: Randi Ki Chudai By nitinshukla726797 Published: July 08, 2026

अमेच्योर देसी गर्ल हॉट कहानी में मेरे पड़ोस की एक लड़की मुझे पसंद थी पर वह भाव नहीं देती थी. एक शाम वह अपनी छत पर ब्लू फिल्म देख कर चूत में उंगली कर रही थी. वो मेरे से कैसे चुदी?

दोस्तो, मेरा नाम राकेश है, मैं उत्तर प्रदेश में एक गांव का रहने वाला हूँ.

मैं ज्यादा बातें न करते हुए और आप लोगों का समय बचाते हुए सीधा अपनी सच्ची अमेच्योर देसी गर्ल हॉट कहानी पर आता हूँ.
यह मेरी गर्लफ्रेंड के साथ पहली चुदाई का अनुभव है.

मेरी उम्र करीब 21 वर्ष है और मेरी गर्लफ्रेंड का नाम खुशी है.
उसकी उम्र भी 20 वर्ष है.
वह दिखने में एकदम मस्त माल लगती है.

उसके उभरे हुए बूब्स और गांड हर किसी को आकर्षित करती है.
उसको देखते ही गली के कई लड़के उसके नाम से ही मुठ मार लेते हैं.

कुछ समय पहले तक खुशी मुझे भाव नहीं देती थी.

एक दिन वह अपनी छत पर रात को थी, तभी मैं अपनी छत से होता हुआ चुपके-चुपके उसकी छत पर जा पहुंचा.

मैंने देखा कि वह मोबाइल फोन पर सेक्स मूवी देख रही थी.
मैंने उसका यह वीडियो अपने मोबाइल फोन पर बना लिया.

वीडियो में खुशी अपनी पैंटी के अन्दर हाथ डाली हुई थी.
वह उस समय बहुत ही हॉट और कामुक लग रही थी.
उसकी सांसें तेज चल रही थीं.

इतने में मैंने जाकर उसको अपनी बांहों में भर लिया.
वह अचकचा गई और उसके हाथ से मोबाइल छूट कर छत पर गिर गया.

वह चिल्लाती कि तभी मैंने उसके मुँह को अपने हाथ से दबा लिया और उसके कान में कहा- चुदाई की फिल्म देख कर अपनी चूत को अपने हाथ से नहीं सहलाना चाहिए मैडम … ये सेवा मुझे करने दीजिए.

तभी उसके घर से आवाज आई, तो हम दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए.

उसने अपना मोबाइल उठाया और बिना किसी तरह की बात करती हुई नीचे चली गई.
मैं भी वापस अपनी छत पर आ गया.

उसके बाद मैंने उससे दूसरे दिन बात करने की कोशिश की, मगर वह बात नहीं कर रही थी.
मैं उसके हाथ में एक कागज का टुकड़ा पकड़ा आया … उसमें मेरा फ़ोन नंबर लिखा था.

वह कुछ नहीं बोली और चली गई.

अब मुझे इंतजार था कि उसका फ़ोन कब आता है.
इस बात की उम्मीद कम ही थी लेकिन उम्मीद तो थी.

फिर करीब एक सप्ताह बाद खुशी ने मुझे फ़ोन किया और कहा- मैं खुशी बोल रही हूँ. शाम को मिलना.
इतना कह कर उसने फ़ोन काट दिया.

शाम को मैं उसके खेतों वाली सड़क पर खड़ा हो गया क्योंकि गांव में एक वही रास्ता ऐसी थी जो शाम को सुनसान हो जाती थी.
मैंने देखा कि अंधेरा होने लगा था और वह अपने खेतों की तरफ वाले इसी रास्ते पर आ रही थी.

मैं उसी रास्ते में खड़ा था, तो जैसे ही वह मेरे सामने से निकली.

मैंने उसे आवाज दे दी- खुशी इधर आओ!
खुशी ने मुझे देख कर कहा- आज रात घर पर कोई भी नहीं होगा, मेरे और मेरी दादी के सिवा … मैं इधर नहीं रुक सकती … तुम छत पर आ जाना.

मैंने कहा- ओके ठीक है.
वह चली गई.

मैं सोचने लगा कि ये रुकी क्यों नहीं … इतना ही कहना था तो फ़ोन पर भी कह सकती थी.

मैं ऐहतियातन अपने साथ एक पानी की बोतल लिए हुए था कि कोई देख कर पूछे कि क्या कर रहे हो तो कह दूँ कि मैं पॉटी करने आया था.

खैर … कोई नहीं मिला और न ही किसी तरह की दिक्कत हुई, मैं घर आ गया.

फिर रात्रि करीब दस बजे मैं उसकी छत पर गया.
तो मैंने देखा कि मेरा माल छत पर ही मेरा वेट कर रही थी.

हम दोनों एक-दूसरे से लिपट कर गले मिले.
फिर वह बोली- कमरे में चलते हैं, यहाँ खुले में कोई देख लेगा.

मैं और खुशी दोनों छत से उतर कर उसके कमरे के अन्दर दाखिल हुए.

मैंने पूछा- तेरी दादी कहां है?
वह बोली- दादी को मैंने उनके रूम में सुला दिया है और उनकी दवाई भी उन्हें दे दी है. उनकी दवाई में नींद की गोली भी होती है तो दादी दवा खाकर सो गई हैं.

यह सुनकर मैं एकदम से खिल गया और सोचने लगा कि वाह री मेरी सैटिंग … तुझे चुदने की कितनी ज्यादा चुल्ल है!

फिर मैंने वापस से उसको अपने गले से लगाया.

वह बोली- तुम यहीं रुको, मैं अभी आती हूँ.
मैंने ओके बोला और उसके कमरे को देखने लगा.
उसका कमरा काफी बड़ा था और बहुत सुंदर बेडरूम लग रहा था.

थोड़ी देर बाद देखा कि खुशी पिंक नाइटी में कमरे में दाखिल हुई.
उसने दरवाजा बंद किया और वह मेरे पास आकर बैठ गई.

वह पिंक नाइटी में एकदम हॉट माल लग रही थी, तो मैंने एक पल का समय भी बर्बाद करना ठीक नहीं समझा.
मैंने उसको अपनी बांहों में उठाया और बेड पर लिटा दिया.

वह मुझे प्यार से देखने लगी.
मैंने उसकी नाइटी की डोरी को खींचा तो उसने अपनी गांड उठा कर नाइटी को अपने बदन से निकाल दिया.

अब वह सिर्फ लाल रंग की ब्रा पैंटी में मेरे सामने पड़ी थी.
मैं उसे चुदाई के लिए एकदम रेडी देख कर अपने कपड़े निकालने लगा.

कुछ ही पलों में मैं सिर्फ ब्लैक कलर की फ्रेंची चड्डी में उसके सामने खड़ा था और वह ब्रा और पैंटी में मेरे सामने पड़ी थी.

उसकी नजरें मेरे फूले हुए लौड़े पर ही टिकी थीं. मैं उसे चुदासी नजरों से देखता हुआ उसके करीब आ गया.
वह भी मेरे लौड़े को देखती हुई अपनी लार सी टपका रही थी.

फिर उसने मेरी चड्डी की इलास्टिक को पकड़ कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया.
मैं उसके ऊपर गिर गया और वह मेरे सीने से लिपट गई.
अब खुशी और मैं एक-दूसरे से आपस में चिपक कर चूमा चाटी करने लगे.

कुछ समय बाद खुशी ने भी मेरी चड्डी को उतार दिया.

मैंने भी उसकी ब्रा पैंटी को हटा दिया था. हम दोनों के नंगे जिस्म एक दूसरे से रगड़ खा रहे थे.
उसका पेट मेरे लंड से निकलने वाले प्रीकम से चिपचिप करने लगा था.

मैं उसकी चूत में उंगली करने लगा.
उसकी चूत से पानी काफी मात्रा में निकल कर रिसने लगा था.
मैंने एक बार उसकी चूत से टपकने वाले रस को अपनी उंगली में लेकर सूंघा तो मुझे बहुत ही मनमोहक लगा था, मैंने उसे देखते हुए ही अपनी उंगली को मुँह में भर लिया.

वह बोली- कैसा स्वाद है?
मैंने कहा- नमकीन शहद है मेरी जान!

वह बोली- मुझे भी अपना शहद चखाओ न?
मैं समझ गया कि बंदी को 69 का मजा लेना है.

फिर मैंने पोज बनाया और 69 में आ गया. वह मेरे ऊपर थी और मैं उसके नीचे था.
मैंने अपना मुँह उसकी चूत में लगा दिया और चूत को चाटने व चूसने लगा. साथ ही मैंने अपना लंड उसके मुँह में रख दिया.

पहले तो उसने लंड को जीभ से चाटा और उसके बाद उसने मेरे लंड को मुँह में भर कर उसे चूसना शुरू कर दिया.
कुछ ही देर बाद वह एकदम रांड बन गई थी और मेरी गोटियों को मसलती सहलाती हुई मेरे लंड को चूस रही थी.

उसने मेरे लौड़े को तब तक पिया, जब तक मेरा वीर्य उसके मुँह में निकल न गया.
उधर वह भी झड़ चुकी थी तो मैंने उसके रस को पी लिया था.

फिर हम दोनों ने चुदाई के लिए वापस से एक दूसरे को गर्म करना चालू कर दिया.
चुदाई से पहले मैंने अपने लंड पर टाइगर किंग सेक्स क्रीम लगाई और एक सेक्स की गोली खा ली.

करीब दस मिनट बाद मेरा लंड फुल मौसम में आने लगा और चुदाई के लिए तैयार हो गया.

मैंने उसकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और कमर के नीचे तकिया रखकर अपने लंड का सुपारा उसकी बुर पर रख दिया.

वह सुपारे की गर्मी से गांड उठाने लगी और उसे अन्दर लेने के लिए मचलने लगी.
फिर जैसे ही थोड़ा सा धक्का लगाया, तो वह रोने लगी और मना करने लगी, कारण उसका यह पहला अवसर था, जब मर्द का लंड उसकी चूत की सील तोड़ने घुसा था.

मैंने उसे चूम कर कहा कि थोड़ा सा सहन करो मेरी जान … मैं बहुत धीरे-धीरे से करूंगा.
उसने कराह कर कहा- ठीक है.

बस फिर क्या था … मैं उसको कभी गाल पर किस करता, तो कभी होंठों पर … और धीरे धीरे एक एक सूत करते हुए अपने लौड़े को उसकी बुर में ठाँसने लगा.
धीरे-धीरे उसकी चूत से रस निकला तो चूत में चिकनाई आ गई और उसके अन्दर मेरे लंड को अपनी बुर में लेने की चुल्ल जागने लगी.

उसकी बुर से लगातार पानी निकल रहा था.
अब तक मैंने उसकी बुर में अपने मोटे सुपारे को अन्दर फंसाते हुए लगभग दो इंच ठांस दिया था.

वह मुझे चूमने में मस्त थी.
उसकी जीभ मेरे मुँह में अपना रस छोड़ रही थी और नीचे चूत मेरे लंड को चूसने के लिए रस छोड़ रही थी.

मैंने सही अवसर जान कर अपने लंड को एक झटका मारा और एक जोरदार धक्का लगा दिया.
खुशी की मैया चुद गई.

अचानक से लंड चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुसा तो उसका पूरा शरीर लाल हो गया और मेरा लंड खू.न से लथपथ हो गया.
पलंग पर बिछी बेडशीट में और मेरी झाटों तक खू.न के छींटे आ गए थे.

वह छटपटा रही थी और मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी. लेकिन मैंने उसे किसी मुर्गी की तरह दबोचा हुआ था.
न तो उसकी आवाज निकल पा रही थी और न ही वह मेरी मजबूत बांहों की पकड़ से खुद को छुड़ा पा रही थी.

मैंने भी खुशी को एक मस्त माल समझ कर बहुत जोर से चोदना चालू कर रखा था.
लंड के आठ दस धक्कों में ही उसकी चूत की सील पूरी तरह से टूट चुकी थी और चूत का भोसड़ा बन गया था.

करीब दस मिनट बाद वह लंड को झेलने की हालत में आ गई थी तो उसने खुद को ढीला छोड़ दिया था.
मैंने अब उसकी बुर में मस्ती से धक्के लगाने शुरू कर दिए.

बस फिर क्या था … कुछ ही समय बीतने के बाद वह मेरे लंड से लोहा लेने लगी थी और पूरा रूम उसकी ‘आह उह शी आउच.’ की आवाजों से गूंजने लगा था.

अब उसको भी चुदाई का पूरा मजा आ रहा था, तो वह मस्त होकर चूत चुदवाने में लगी थी.
उसकी दोनों टांगें हवा में उठ गई थीं और मेरे लौड़े को चूत के अन्दर आने जाने में बड़ी आसानी होने लगी थी.

कुछ ही देर में मैं झड़ गया और वह भी संतुष्ट हो गई.

उस रात हम दोनों ने मिलकर पूरी मस्ती से चुदाई का अनुभव लिया और अलग-अलग पोजीशनों में तीन बार चुदाई की.
मैंने उसे डॉगी स्टाइल में चुदाई, सिक्सटी नाइन पोजीशन में और मिशनरी पोजीशन में चोदा.

वह काऊ गर्ल पोजीशन में भी चुदवाना चाह रही थी लेकिन उसकी चूत में दर्द था तो वह लंड की सवारी करने में परेशानी महसूस कर रही थी.
इसी तरीके से मॉर्निंग चार बजे तक हम दोनों की मस्ती चलती रही.

फिर सुबह हम दोनों एक साथ वॉशरूम में नंगे नहाने गए और वहां भी चूत और लंड का मिलन हुआ.
रात में हुई चुदाई की इस घटना से वह सुबह ठीक से चल नहीं पा रही थी.

उसकी बुर में सूजन भी आ गई थी.

मॉर्निंग करीब पाँच बजे मैं उसके घर से अपनी छत पर आया और अपने कमरे में आ गया.
फिर शाम को खुशी अपनी छत आई तो मैंने उसका हाल पूछा, तो उसने बताया कि उसकी बुर में अभी भी हल्का सा दर्द है.

मैंने दर्द की गोली लाकर उसको दे दी और उसे बिठा कर अपना लंड उसके मुँह में दे दिया.

इसी तरीके से अब हम दोनों की चुदाई अक्सर होने लगी है.
खुशी अब मेरी पर्सनल रखैल बन गई है. जब मन हो, जैसे मन हो, वैसे मौका देखकर उसे चोद देता हूँ.

दोस्तो, यह अमेच्योर देसी गर्ल हॉट कहानी आपको कैसी लगी? आप मेरी मेल आईडी पर जरूर बताएं.
nitinshukla726797@gmail.com

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