कुंवारी लड़की की पहली चुदाई की लालसा- 1

Views: 22 Category: Jawan Ladki By suhani.kumari.cutie Published: February 28, 2026

माय सेक्स डिजायर X कहानी में मेरा रिश्ता तय हुआ तो मैं अपने मंगेतर से मिलने लगी. मंगेतर के साथ चूमा चाटी ने मेरी अन्तर्वासना बढ़ा दी. मेरे मंगेतर भी मेरे साथ सेक्स करना चाहता था.

दोस्तो, कैसे हैं आप सब!
मैं आपकी अपनी सुहानी चौधरी!

मेरी पिछली कहानी थी: गन्ने के खेत में भाई के साथ चुदाई

अब मैं आप सबका अपनी इस नयी कहानी में स्वागत करती हूँ।

इससे पहले मैं माय सेक्स डिजायर X कहानी पर आगे बढ़ूँ, उससे पहले मैं आप सब से माफी चाहती हूँ क्योंकि इस बार कहानी आने में काफी समय लग गया.
बस यूं समझ लीजिये कि मैं जिंदगी में व्यस्त थी।
खैर फिर भी थोड़ा समय निकाल कर मैं आप सबके लिए एक और मजेदार कहानी लाई हूँ.

तो अपनी सारी टेंशन दुख दर्द और गमों को भूल जाइए और खो जाइए मेरी इस नयी कहानी में!

यह कहानी मुझे मेरी एक ऑनलाइन फ्रेंड ने भेजी है, वह मुझसे सम्पादित करवा के प्रकाशित करवा रही है.
और वह अपना नाम उजागर नहीं करना चाहती तो मैं उसका नाम इस्तेमाल नहीं कर सकती.
इसलिए इस कहानी में भी अपना नाम ही इस्तेमाल करूंगी।

तो चलिये शुरू करते है आज की कहानी का सफर!

मेरा नाम सुहानी चौधरी है, यह मेरी सच्ची कहानी है.
मैं एक माध्यम वर्गीय परिवार से हूँ.

मेरे पिताजी एक निजी कंपनी में काम करते हैं.
और मेरी मम्मी गृहिणी हैं।
मेरा एक छोटा भाई है.

मैं दिखने में मैं काफी आकर्षक और हंसमुख हूँ. रंग गोरा और साफ है, खूबसूरत आँखें सुनहरे बाल और एक अच्छा फ़िगर!

अब फ़िगर की बात आई है तो आपके मेरे बारे में विचारों को एक शक्ल देने के लिए बता देती हूँ.
मेरा फ़िगर है 36-26-36 … और अगर आप मुझे किसी अपने ख्यालों में चित्रित करना चाहते हैं तो अपनी किसी दोस्त को जिसके प्रति आपके मन में थोड़े बहत सेक्सी ख्याल आते हों, उसे ही मान लीजिये।

वैसे तो मेरे काफी दोस्त हैं पर एक लड़का जय मेरा बहुत अच्छा दोस्त है बचपन से!
क्योंकि उसका और मेरे परिवार का काफी आना जाना है तो घर वालों की भी कोई रोक-टोक नहीं है।

मैं अपनी हर बात उससे साझा करती थी और वह मुझसे!

धीरे धीरे हम बड़े हो गए, स्कूल खत्म, कॉलेज शुरू, और कॉलेज की पढ़ाई भी खत्म होने वालो ही थी।

कभी कभी ज़िंदगी इस तरह से भागती है कि हम समझ ही नहीं पाते कि पिछले कुछ साल कहाँ निकल गए।

अब कॉलेज खत्म होते होते मेरे रिश्ते की भी बात होने लगी थी.

तो एक दिन मेरे लिए एक अच्छे घराने से एक रिश्ता आया।
लड़के का नाम राकेश था।

अब क्योंकि लड़का भी बहुत हैंडसम और अच्छी नौकरी वाला था तो मुझे भी कोई खास ऐतराज नहीं था.
रिश्ता पक्का हो गया.

शुरू में तो हमारी थोड़ी थोड़ी फोन पर बातें होने लगी।
मैं अपनी सारी बातें अपने दोस्त जय को बताती थी।

फिर कुछ समय बाद मेरा और राकेश का मिलना-जुलना भी शुरू हो गया।
हम लोग लंच करने, घूमने फिरने, फिल्म देखने जाने लगे।

अब लड़कों की तो फितरत ही होती है लड़कियों से नज़दीकियाँ बढ़ाना … तो राकेश भी थोड़ी बहुत छेड़-छाड़ करने लगा.
हालांकि मुझे शुरू में अच्छा नहीं लगा.
पर जय ने समझाया- एंजॉय कर लाइफ को! शादी से पहले रोमैन्स का मजा ही अलग होता है।

तो उसकी सलाह मानते हुए मैं भी थोड़े-थोड़े मजे लेने लगी।
और इसके साथ ही मेरी कामवासना भी बढ़ने लगी।

पर जय ने सलाह दी थी कि मैं खुद को थोड़ा कंट्रोल करू और उसे थोड़ा दूर करने की कोशिश करूं.
वरना बात बिगड़ भी सकती है, वह मेरे चरित्र पे शक भी कर सकता है।

तो मैं इतनी हवा भी नहीं दे रही थी।

एक बार हम मूवी देख के लौट रहे थे तो कार पार्किंग में राकेश मुझे किस यानि चुम्बन करने की इच्छा जताने लगा।
मैंने अपनी एक्टिंग चालू कर दी और कहा- ये सब शादी के बाद मिस्टर!

फिर वह जिद सी करने लगा तो थोड़ा थोड़ा मैं भी उसका साथ देने सी लगी और हमारी धीमे धीमे किस होने लगी।

मैंने पहली बार किसी को किस किया था तो मुझे बहुत मजा आने लगा.
फिर वह मेरी छाती पर हाथ फेरने लगा और मुझे और मजा आने लगा.

मेरी उत्तेजना बहुत बढ़ गयी थी पर मुझे अपने आपको को काबू भी करना था।

लगभग 5 मिनट तक यही सिलसिला चलता रहा.
पर फिर मुझे जय की बात ध्यान आई और मैंने सती-सावित्री बनने की एक्टिंग चालू कर दी।

मैं बोली- रुक जाओ राकेश … अब आगे नहीं!
और थोड़ा नकली का विरोध भी करने लगी.

पर मैं मजे पूरे ले रही थी।

खैर जय थोड़ी देर बाद रुक गया।

हालांकि मुझे बहुत बुरा लगा ऐसे पर मैंने कुछ नहीं कहा और फिर हम घर आ गए।

घर आकर भी मेरे अंदर की वासना खत्म नहीं हुई थी।
मैंने जय को फोन मिलाया और सारी कहानी बतायी।

फिर मैं बोली- तेरी सलाह की वजह से रुक गयी वरना आज तो कुछ कांड हो ही जाता।
वह भी हंसने लगा और बोला- कुछ दिन सब्र कर ले … फिर खुल के मजे लेना।

पर मेरा मन नहीं भरा था.

तो मैंने फोन काटने के बाद अपने कमरे की कुंडी लगाई और कम्प्यूटर पर एक सेक्सी फिल्म लगा के अपनी वासना को थोड़ा और भड़काने लगी।
इसके साथ ही मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये और अपने हाथों से अपने बूब्स भींचने लगी अपने शरीर से खेलने लगी.

फिर मैं धीरे धीरे अपनी चूत को प्यार से रगड़ने लगी।
पहले धीरे धीरे फिर थोड़ा तेज़ तेज़!

और ऐसे करते करते कुछ देर में मुझे बहुत मजा आने लगा और मेरी चूत ने उत्तेजना में अपना रस छोड़ दिया।
मुझे बहुत मजा आया और मैं हाँफती हुई सुस्ताने लगी और ऐसे ही सो गयी।

कुछ दिन बाद मैं और राकेश फिर से घूमने गए.
और फिर थोड़ा बहुत रोमैन्स करने लगे.

इस बार भी पिछली बार की तरह मेरी उत्तेजना तो बढ़ गयी पर मैंने खुद को और उसको आधे मजा ले के रोक दिया।

ऐसे ही 2-3 बार और हुआ, हर बार मेरी हवस बढ़ जाती और मुझे मजबूरन ब्रेक लगाने पड़ते।

थक-हार कर राकेश ने मुझसे कहा- तुम सच में बहुत शरीफ हो सुहानी, मुझे तुम्हारी यही बात बहुत पसंद है, तुम अपनी हद पार नहीं करोगी जब तक शादी नहीं हो जाएगी। दिल जीत लिया तुमने, अब से मैं तुम्हारे साथ कभी ऐसी हरकत नहीं करूंगा और शादी होने तक हाथ भी नहीं लगाऊँगा। तुम सच में बहुत अच्छी हो!

मैं उसकी हाँ में हाँ तो मिला रही थी पर अंदर ही अंदर ही कह रही थी- चोद दे मुझे जानेमन, छोड़ ये सब कायदे-कानून!
पर मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा।

फिर हम घर आ गए।

पर मेरे अंदर आग तो लगी ही थी तो मैंने जय को फोन मिलाया और आज की सारी बात बता दी।

उसने भी कहा की- अच्छा है चलो अब कुछ गड़बड़ नहीं होगी।

शुरू में एक दो दिन तो मैंने पता नहीं कैसे शांत कर के निकाले पर अब मुझे अपनी हवस के लिए एक लंड चाहिए था चाहे कुछ भी करना पड़े।

मैंने जय को अपने घर बुलाया।
अब क्योंकि हम बचपन के दोस्त थे तो इसलिए घर वालों की कोई रोक-टोक नहीं थी और वह मेरे कमरे में ही आ गया।

मैंने उसके बताया- यार, बहुत बैचनी हो रही है, दिमाग में गंदे गंदे ख्याल आ रहे है, समझ नहीं आ रहा क्या करूँ?

वह बोला- मैं कुछ समझा नहीं … थोड़ा विस्तार में बता?
मैंने उसे अपनी सारी हवस की कहानी बता दी।

उसने बोला- कोई नहीं … ये तो नैचुरल है, सब के साथ ऐसा होता है।

मैंने कहा- पर मैं करूं क्या अब तो मैं अपने रास्ते खुद बंद के आ चुकी हूँ। वह शादी से पहले हाथ भी नहीं लगाएगा और इधर मेरी जान निकली जा रही है।

जय ने मुस्कुराते हुए कहा- तो बात कर ले उससे!

मैंने कहा- नहीं, अब बहुत देर हो चुकी है. वह मुझे शरीफ मान के अब कुछ नहीं करेगा. पर इस शरीफ लड़की के अंदर बहुत गंदे-गंदे ख्याल आ रहे हैं. मुझे तो आजकल किसी भी लड़के के स्पर्श से उत्तेजना होने लगती है।

जय हंसने लगा और बोला- हम्म, तो हालत इतनी बुरी है।
मैंने कहा- मत पूछ यार … ये देख!

और इतना कह कर मैंने उसकी हथेली अपनी छाती पे रख के दबा दी।
इससे मुझे एक अलग ही सुकून मिला और वह भी सुन्न हो गया।

मैं अपने हाथ से पकड़े हुए उसका हाथ अपनी गर्म छाती पे ऊपर नीचे फिरा रही थी।

उसकी आँखें आश्चर्य से फटी हुई थी और मैं ये भूल ही गयी थी कि वह मेरा दोस्त है।
यहाँ तक कि उसका लंड भी तन गया था।

फिर जब थोड़ी देर में होश आया तो उसने अपना हाथ हटाया और मैंने कहा- सॉरी यार! बस समझ नहीं आ रहा कि क्या करूँ।

वह भी घबरा के खड़ा हुआ तो उसका लंड पूरा तन चुका था और पैंट में अलग ही चमक रहा था।

जब उसने मुझे उसका लंड देखते हुए देखा तो वह तुरंत बैठ गया.
और मैं मंद मंद मुस्कुराने लगी।

फिर वह भी मुस्कुराने लगा.
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- यार जय, कुछ कर ना … अब काबू करना मुश्किल हो रहा है।

वह कन्फ्यूज था कि क्या बोले!

पर वह बोला- मैं क्या कर सकता हूँ, मैं तेरा होने वाला पति तो हूँ नहीं जो सारी इच्छाएं अभी पूरी कर दूँ?
मैंने कहा- हाँ ये भी है।

फिर थोड़ी देर हम ऐसे ही बैठे सोचते रहे.
तभी मुझे लगा कि अभी के अभी मेरी जरूरत तो सिर्फ और सिर्फ जय ही पूरी कर सकता है. आखिर लंड तो उसके पास भी है, उसका मना भी तो लड़की चोदने का करता होगा।

मैंने थोड़ा शर्माते हुए सी कहा- यार, एक बात कहूँ … बुरा तो नहीं मानेगा?
उसने बोला- क्या?
मैंने कहा- देख बुरा मत मानना, पर तू मेरा सबसे अच्छा दोस्त है. मेरा होने वाला पति ना सही … पर इस वक़्त जो चाहिए वह तो दे ही सकता है।

वह थोड़ा हड़बडा सी गया और बोला- मतलब?
मैंने कहा- यार, मुझे तेरा वह दिखा दे।

वह बोला- पागल हो गयी है क्या, होश में तो है?
मैंने कहा- सुन यार, किसी को कुछ नहीं पता चलेगा, प्लीज एक बार, अपनी दोस्ती की कसम तुझे!

वह अब और कन्फ्यूज भी था और शर्मा भी रहा था।
मैं उससे बहुत विनती करने लगी।

आखिरकार वह मान गया।
मैंने तुरंत जा के कमरे की कुंडी लगा दी।

फिर उसने इधर उधर देखा और बोला- देख किसी को बताइयो मत!
तो मैंने कहा- पक्का।

फिर उसने अपनी बेल्ट धीरे धीरे ढीली करी और पैंट नीचे सरका दी।

हालांकि उसका लंड थोड़ा ढीला हो चुका था पर कच्छे में झलक रहा था।
मैंने कहा- जल्दी उतार न अंडरवियर!

उसने थोड़ा शर्माते हुए उसको भी नीचे कर दिया।

मैंने कहा- शर्ट तो ऊपर कर!
तो वह चुप रहा।

जैसे ही उसने शर्ट उठाई, उसका आधा खड़ा लंड मैंने पहली बार देखा।

मैंने पहली बार किसी जवान लड़के का लंड असल जिंदगी में देखा था।
मैं खुश भी थी और हैरान भी!

तभी मेरे अंदर एक इच्छा हुई उसे अपने हाथ से छूने की … तो मैंने अपने कोमल हाथों से उसे छुआ तो वह झटका से ले गया.
और जय ने ‘आह …’ करी।

फिर मैंने धीरे धीरे उसपर हाथ फिराना शुरू कर दिया और वह खड़ा होने लगा।

हम में से कोई कुछ नहीं कह रहा था पर मैं उसके लंड से खेल रही थी।

अब तक वह पूरा तन चुका था, मैं उसके मुट्ठी में भर के ऊपर नीचे मसल रही थी एक हाथ से और दूसरे हाथ से अपने बूब्स को मसल रही थी।

धीरे धीरे मैंने उसका लंड ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया और वह आहह … आह … करने लगा.

कुछ ही देर में उसका लंड फुंफकारे मारता हुआ फूलने सी लगा.
और अचानक उसने मेरे कपड़ों पे ज़ोर की पिचाकरी मार दी जो सीधा मेरी टीशर्ट पर मेरे बूब्स पर गिरी।

फिर वह शांत हो गया और मैं भी थोड़ा सा शांत हो गयी।

माय सेक्स डिजायर X कहानी चार भागों में चलेगी.
आपने विचार आमंत्रित हैं.
suhani.kumari.cutie@gmail.com

You May Also Like

Padosi Ke Ladke Ne Maa Betiyaan Chod Di - 3
Views: 167 Category: Jawan Ladki Author: longchampfare Published: June 21, 2025

विपुल ने उसे गोद में उठा लिया और उसके एक चूचे को अपने मुँह में दबा कर चूसने लगा, ऊपर से बारिश और विपुल की इस हरकत से खु…

Cyber Cafe Me Chut Marwai
Views: 55 Category: Jawan Ladki Author: manshipandya11104 Published: February 03, 2026

बैड गर्ल सेक्स स्टोरी में मेरे कॉलेज के सामने साइबर कैफे वाला लड़का मुझे आते जाते घूरता था. मुझे भी वह पसंद था पर साला फट्टू…

Comments