यंग स्टूडेंट गर्ल सेक्स कहानी में मैं रेस्टोरेंट में मिली लड़की को अपने होटल रूम में ले गया। मैंने उसे बीयर ऑफर की और मुझे उम्मीद हुई कि एक कमसिन चूत आज चोदने को मिल जाएगी।
दोस्तो, मैं राहुल श्रीवास्तव आपको अपनी सेक्स स्टोरी बता रहा था जिसके पहले भाग
रेस्तरां में कॉलेज गर्ल से दोस्ती और खुली बात
में आपने पढ़ा कि कैसे एक जवान लड़की से रेस्टोरेंट में मेरी मुलाकात हुई।
दोनों में बातें बढ़ीं और बात गर्ल-फ्रेंड व बॉयफ्रेंड तक पहुंच गई।
वो थोड़ी खुली तो मुझसे अपने फिगर के बारे में पूछने लगी।
मैंने खुले शब्दों में उसको उसके शरीर का माप बता दिया और शर्मा गई।
अब आगे यंग स्टूडेंट गर्ल सेक्स कहानी:
काफी देर वो चुप सी रही कि क्या कहे, कैसे रियेक्ट करे।
उसको समझ में ही नहीं आ रहा होगा कि क्या बोलूं।
मगर इतना तो था कि कनपुरिया लड़की थी वो!
तो ये हिंदी के उत्तेजक शब्द जरूर उसको पता होंगे।
मुझे यह भी समझ आ गया था कि उसने बुरा नहीं माना।
थोड़ी देर की चुप्पी के बाद वो धीरे से बोली- क्या आप भी … ऐसे कौन बताता है!
मैं- मैं बताता हूँ, आप तो बस अब ये बताओ कि मेरा अनुमान कितना सही है?
लड़की- अच्छा जी, वैसे आप का अनुमान काफी हद तक सही है। मगर मैंने जितना सोचा था आप तो उससे कुछ ज्यादा ही शरारती हो।
मैं- अच्छी बात है ना। इस छोटी सी मुलाकात में आप हमारे बारे में सोचने भी लगीं।
लड़की- हां आप बात ही इतनी अच्छी करते हैं। कोई भी सामने वाला सोचेगा ही आपके बारे में।
मैं- हाँ, वो तो हूं। मैं तो और भी शरारत कर सकता हूँ, अगर तुम अनुमति दोगी तब पता चलेगा तुमको शरारत क्या होती है!
लड़की- अच्छा … ऐसी क्या अनुमति चाहिए आपको?
मैं- अनुमति होगी तभी तो मैं जो मैं शरारत करना चाहता हूँ उसके लिए आगे बढ़ सकता हूँ।
लड़की- अच्छा, कितना आगे तक जायेंगे आप, और कैसी शरारत करना चाहते हैं? फिर मुझे तो अभी रूम में भी जाना है।
मैं- हाँ तो मैं छोड़ दूंगा तुमको तुम्हारे रूम तक, तब तक तो मुझे कुछ शरारत करने दो। शायद तुमको भी मेरी शरारत की जरूरत होगी इस समय!
इतना कह कर मैंने अपनी मंशा साफ़ कर दी कि मैं उसको चोदना चाहता हूँ, और ये भी बता दिया कि मुझे समझ में आ रहा है कि वो भी चुदने का मन बना रही है।
दोस्तो, मुझे इतना तो समझ में आ गया था कि बंदी तैयार है लेकिन झिझक रही है।
मैं जान चुका था कि लंड लेने का मन उसका भी बन चुका है।
मुझे यह भी समझ में आ रहा था कि वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स में एक्टिव है।
लेकिन मेरा अंदाजा था कि काफी समय से उसकी चूत को उसके बॉयफ्रेंड का लंड नहीं मिला है इसलिए उसकी चूत में सेक्सी बातें सुनते ही खुजली होने लगी थी शायद।
दोस्तो, जो लड़की इस उम्र में चुद रही हो, उसको बस जरा सी चिंगारी दिखाने की जरूरत होती है, चूत उसकी बहुत जल्द भभक उठती है।
वैसे भी इस उम्र में लड़की रोज भी चुद ले तो चूत की मांसपेशियां बहुत जल्दी ढीली नहीं पड़ती हैं।
इसलिए लड़कियां इस उम्र में एक बार चुदने के बाद खुलकर सेक्स करती हैं।
तभी उसका हाथ टेबल पर रखे मेरे हाथ पर आकर टिक गया।
मेरा अनुमान पर उसने अपनी सहमति की मोहर लगाकर उसे पक्का कर दिया।
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने हाथ न हटाया बल्कि मेरी तरफ मुस्करा कर देखने लगी।
मैंने उसके हाथ को सहलाना शुरू कर दिया।
वो भी मुस्कराती चली गई।
उसके कोमल हाथ का स्पर्श पाते ही मेरे तो लंड में तूफान मचने लगा।
लौड़ा तनकर पैंट में उधम मचाने लगा।
मैं उसके कोमल हाथों के स्पर्श से बेचैन हो उठा एकदम से।
शायद उसको भी एक मर्द का स्पर्श पाकर ऐसी ही कुछ बेचैनी हो रही होगी जैसा कि मैं अंदाजा लगा पा रहा था।
बस अब मैं चाह रहा था कि किसी तरह ये चुदने के लिए हां कर दे।
मैं सोच रहा था कि रास्ता कैसे साफ किया जाए और ये खुद चलकर मेरे लंड के नीचे आये।
चूंकि मैं इस शहर से वाकिफ था तो मैंने सेल्फ ड्रिवेन कार ले रखी थी।
लड़की- आपको कैसे पता कि मेरे को भी आपकी शरारत की जरूरत है?
मैं- अगर नहीं भी होगी तो मैं उसकी जरूरत बना दूंगा। दूसरे, अगर तुमको मैं और मेरी बातें पसंद नहीं होतीं तो तुम अब तक मुझे थप्पड़ मार चुकी होती। या फिर उठ कर चली गई होती।
लड़की- नहीं, ऐसी बात नहीं है। मैंने ही आपसे पूछा था। और आप स्मार्ट हैं, साथ ही समझदार भी। मेरे से ज्यादा आपको अनुभव है। लड़की को अच्छे से समझ लेते हो, साथ में बात थोड़ी ज्यादा ही अच्छी करते हैं। तो थोड़ा साथ तो बैठ ही सकती हूँ। वैसे भी अभी रूम पर जाकर मेरा स्टडी का कोई मूड नहीं है। इसलिए मैंने मैं सोचा कि कुछ समय आपके साथ ही सही। मेरा भी मन बदल जाएगा।
मैं- तो एक एक काम करते हैं, मेरे पास कार है … क्यों न कहीं और चलें?
लड़की- मगर अभी तो शाम है, कहाँ जायेंगे? मुझे यहाँ का कोई ज्यादा पता नहीं है। रूम में जाकर वार्डन को भी बोलना पड़ेगा।
मैं- देखो अभी कोई ज्यादा वक़्त तो नहीं हुआ है। जहाँ तक मुझे पता है, हॉस्टल में तो 11 बजे तक भी एंट्री मिल सकती है। बोल देना कि मेरे अंकल आ गए थे तो मूवी देखने चले गए थे। मैं खुद तुमको छोड़ कर आऊंगा और वार्डन से भी बात कर लूंगा।
लड़की- हम्म … वो सब तो ठीक है. लेकिन वार्डन बहुत सख्त है।
मैं- एक काम करते हैं। तुम्हारे हॉस्टल चलते हैं, और मैं परमिशन ले लेता हूँ चलकर! परेशान होने की जरूरत नहीं है, मैं संभाल लूंगा वार्डन को।
दोस्तो, ये तो पक्का हो चुका था उसने भी चुदने का मन बना लिया था।
थोड़ी डर रही थी बस, या ये कहो असमंजस में थी।
मगर मैं इस मौके को छोड़ना नहीं चाहता था।
मैं लगातार उसके हाथ को सहला रहा था कि उसमें थोड़ी मर्द की दी हुई ग़र्मी बनी रहे।
बस जरूरत थी एक एकांत की।
और वो मेरे होटल के रूम में मिल सकता था।
मैंने उसको चलने के लिए कहा और हम उठ गए।
मैंने बिल दे दिया।
उसने भी अपनी कॉपी किताब उठाई और हम बाहर आ गए।
पार्किंग से गाड़ी ली, फिर मैं पास में ही अपने होटल आ गया।
दोस्तो, अभी तक मैं उसका नाम भी नहीं जानता था और जरूरत भी नहीं थी।
मेरे लिए वो एक रात की रंगीनियत थी जिसके बाद हम दोनों एक दूसरे को शायद कभी नहीं मिलने वाले थे।
मेरा मूड तो चुदाई का हमेशा ही रहता है।
मेरी ट्रैवेलिंग किट में चुदाई से सम्बंधित सारे प्रोटेक्शन हमेशा ही रहते हैं।
लड़की बिल्कुल चुप सी थी।
वो कुछ सोच सी रही थी।
मैंने उसका मूड हल्का करने के लिए फ्रिज से बीयर के दो कैन निकाल के दिए।
उसने मना किया।
मैंने कहा कि कुछ सिप ले लो।
एक कैन मैंने वापस फ्रिज में रख दिया।
लड़की- आप तो बहुत शानदार होटल में रुकते हैं।
रूम के काउच पर हम दोनों बैठे थोड़ी बात करते रहे जिससे कि वो थोड़ा कम्फर्टेबल हो जाए।
साथ ही मैंने अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया।
उसने मेरे हाथ की ओर देखा लेकिन कुछ कहा नहीं।
शायद दिलो-दिमाग से अब वो आने वाले पल का खुल कर मज़ा लेना चाहती थी और अब मानसिक रूप से तैयार भी थी।
थोड़ी और बातों के बाद मैंने उसकी बांह पकड़ कर उसे अपने करीब कर लिया।
वो भी मेरे बदन से सट गयी।
अभी तक जो भी मैंने किया उसे कोई ऐतराज़ नहीं हुआ।
मैं हौले से उसकी बाँह सहलाता रहा।
उसकी बॉडी में हो रहा कम्पन मुझे समझ में आ रहा था क्योंकि वो अभी तक जिससे भी बंद कमरे में, या कहो सम्भोग के लिए मिली, वो सब उसके जानकर थे और हम-उम्र थे।
जबकि मैं एक अजनबी था और लगभग उसकी दोगुनी उम्र का था।
इसलिए उसकी हिचकिचाहट तो स्वाभाविक थी।
उसके हाथ भी मेरी जांघ पर आ ही गए थे।
हाथ के दबाव से मुझे समझ में आने लगा था कि वो भी गर्म हो रही है।
मैंने उसके गाल पर हाथ रख कर उसका मुँह अपनी तरफ कर लिया।
लेकिन मुंह मेरी तरफ करते ही उसने अपनी आंखें बंद कर लीं।
मैं थोड़ा रुक गया।
जब मैंने कुछ नहीं किया तो उसे लगा कि सब थम कैसे गया।
फिर उसने आंखें खोलकर देखा।
मैं उसकी ओर मुस्करा रहा था।
उसने भी शरमाकर मेरी आँखों में देखा और फिर नजरें झुका लीं।
अबकी बार मैंने उसके सिर पर पीछे की ओर हाथ रखा और मुंह ऊपर करवा कर उसके होंठों पर होंठों को रख दिया।
उसका बदन कांप उठा और उसके हाथ ने मेरी बांह को जोर से पकड़ लिया।
मेरे होंठों ने दबाकर उसके होंठों को चूसना शुरू किया तो उसके हाथों का दबाव भी बढ़ गया।
वो कोई विरोध तो नहीं कर रही थी लेकिन अपनी तरफ से कुछ प्रतिक्रिया भी नहीं कर रही थी।
उसने बस मुझे जैसे उसके होंठों को चूसने की छूट दे रखी थी।
हालांकि मैं जानता था कि कुछ ही पल बाद वो मेरा पूरी तरह से साथ देने लगेगी।
उसका सिर मेरी एक बांह पर था और मेरा हाथ उसके सिर पर था।
जैसे ही उसने अपना मुंह थोड़ा सा खोला, मैंने उसका निचला होंठ अपने होंठों में दबा लिया।
तभी उसने मेरे ऊपर वाले होंठ को चूसना शुरू कर दिया।
उसका साथ पाया तो मैंने सिर से हाथ हटा कर उसकी कमर को सहलाना शुरू कर दिया।
उसकी भारी सांसें और हल्की आआ अह्ह ह्ह्ह से अब दोनों ही उत्तेज़ना के सागर में डूबने लगे।
उसकी सांसों में गर्माहट और तेज़ी आ गई।
फिर उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और चूसते हुए मेरे मुँह के अंदर तक का जायजा लेने लगी।
अब मैं उसकी जीभ को चूसने लगा।
उसके हाथ मेरे सीने पर आ गए और वो उत्तेज़ना में मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी।
फिर खुद ही मैंने अपनी शर्ट निकल कर फेंक दी।
उसके हाथ मचल उठे थे मेरी गहरे काले बालों से भरी छाती पर रेंगने के लिए।
उसके रेंगते हाथ मुझमें दोगुनी उत्तेजना पैदा करने लगे।
अपने हाथ से कभी मेरे छोटे से निप्पल सहला देती तो कभी मसलते हुए उन्हें भींच कर अपनी आग का अहसास करवाती।
जब भी वो जोर से निप्पल भींचती तो मेरा बदन कांप जाता था और मुंह से हल्की आह्ह … निकल जाती थी।
मुझे पता चल गया था कि संभोग के खेल में वो पारंगत हो चुकी थी।
उसको अपनी पसंद के मर्द के साथ पहल करने से कोई गुरेज नहीं था।
अय्य … उम्म्ह … अहह … याह … आईई ईईई, ऊऊ युययु ऊऊयू हाआआ अहा हह … जैसी सिसकारियां दोनों तरफ से आ रही थीं।
ये आवाजें जिनका कोई मतलब नहीं निकलता, लेकिन हवस की आग में ये घी का काम करती हैं!
इधर मैं भी शर्ट के ऊपर से ही उसकी चूचियां सहला रहा था।
उसकी सांसें गर्म होने लगीं।
मुझे कोई जल्दी नहीं थी।
मैं आराम से उसके अंगों के साथ खेल रहा था।
कभी कान तो कभी गर्दन को चूमकर उसमें सिरहन पैदा करता रहा।
कभी उसके गाल को मुंह में भर लेता तो कभी होंठ को।
मैं लगातार उसकी चूचियां सहला रहा था और वो लगातार आहें भरती जा रही थी- अह्ह … आआ … ओह … उफ्फ!
अब उसको नंगी करने का समय आ गया था।
मैंने टीशर्ट को ऊपर उठाना शुरू किया तो उसने मेरे हाथ पकड़ लिए।
शायद कुछ शर्म बाकी थी।
या फिर कुछ और बात थी, ये तो वही जाने।
लेकिन मैंने यहां पर रुकना ठीक नहीं समझा।
मैंने थोड़ा जोर लगाया और उसके हाथ हटाते हुए टीशर्ट को उतार दिया।
कपड़ा हटते ही मेरी आंखों के सामने सफेद रंग की डिजाइनर ब्रा आ गई।
ब्रा में उसकी सुडौल चूचियां कैद थीं।
उसे देखकर लग रहा था जैसे कि उन्हें पाषाण प्रतिमा में तराशा गया हो।
चूचियों की वो दरार, जिसे क्लीवेज कहते हैं, मेरे सामने थी जिसकी त्वचा थोड़ी हल्की शेड में कुछ ब्राउन सी थी।
मेरी आंखों में उस भाग को चूमने की ललक उस वक्त साफ पढ़ी जा सकती थी।
मुझसे रुका न गया और मैंने चूचियों के ऊपरी हिस्से पर अपने होंठ रख दिए।
लड़की- ओह्ह … अह्ह … स्स्स …
मैंने अगले ही पल उसकी ब्रा का हुक खोलना शुरू कर दिया और उसकी ब्रा जमीन पर थी।
यंग स्टूडेंट गर्ल सेक्स कहानी को यहां विराम दे रहा हूं।
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