स्कूल के दिनों में राहुल अपने दोस्त गौतम के घर उससे गांड मरवा रहा था।
इतने में दोस्त का बड़ा भाई कमरे में आया और अपने काले बड़े लंड पर तेल लगाकर बोला, “भाई के बाद मैं राहुल की गांड मारूंगा।”
गौतम के बाद उसके बड़े भाई ने अपना काला बड़ा लंड राहुल की गांड में टिकाया ही था कि दरवाजे की घंटी बज गई।
वह गांड नहीं मार सका।
राहुल की काले बड़े लंड से गांड मराने की इच्छा अधूरी रह गई।
क्या कभी उसकी इच्छा पूरी हुई?
यह कहानी मेरे स्कूल के समय के दोस्त राहुल की है।
राहुल और मैं संजय स्कूल में एक ही क्लास में पढ़ते थे।
मैं और राहुल पास के छोटे से जंगल में जाते।
राहुल पैंट उतारकर पेड़ पकड़कर झुक जाता।
मैं अपने लंड पर तेल लगाकर राहुल की गांड मारा करता।
न जाने कहां से हमने यह सीखा था।
उस समय मेरा लंड गेहूँआ, 4 इंच लंबा और पतला था।
जंगल में गड़रिये गाय-भैंस चराने आते तो हमें पकड़े जाने का डर होता था।
हमने अपने तीसरे दोस्त गौतम को इसमें शामिल करने का फैसला किया।
गौतम के परिवार में उसके पिताजी और उससे पांच साल बड़ा भाई था।
उसकी मां नहीं थी।
उसके पिताजी और बड़ा भाई शाम को देर से घर आते थे।
उसके घर पकड़े जाने का खतरा नहीं था।
गौतम खुशी से राजी हो गया।
गौतम ने मेरे सामने राहुल की गांड मारी, फिर मैंने मारी।
गौतम का लंड मेरे जितना ही 4 इंच लंबा और पतला गेहूँआ था।
हमने गांड मारना खत्म कर पैंट पहनी।
इतने में उसके पिताजी ने कॉलिंग बेल बजाई।
हम पकड़े जाने से बाल-बाल बचे।
तबसे हमने फैसला किया कि जब एक जन गौतम की गांड मारेगा, दूसरा बाहर पहरा देगा।
यदि दूर से गौतम के पिता या भाई आते दिखाई दें तो वह राहुल को आवाज देकर सतर्क कर देगा।
हमारा गांड मारने का कार्यक्रम एक साल से चल रहा था।
एक दिन जब गौतम राहुल की गांड मार रहा था, मैं बाहर पहरे पर था।
मुझे राहुल के पिताजी आते दिखे।
मैंने कॉलिंग बेल बजाकर राहुल को सतर्क कर दिया।
दूसरे दिन गौतम ने बताया कि जब वह राहुल की गांड मार रहा था, गौतम का बड़ा भाई बाथरूम से निकला।
गौतम को मालूम नहीं था कि बड़ा भाई घर पर है।
बड़े भाई राजेंद्र ने कहा, “मुझे भी राहुल की गांड मारने दो, नहीं तो सबको कह दूंगा।”
बड़े भाई ने अपने लंड पर तेल लगाया और राहुल की गांड में टिकाया ही था कि कॉलिंग बेल बज गई।
वह गांड नहीं मार सका।
कुछ दिनों बाद राहुल के पिताजी की बदली हो गई।
राहुल दूसरे शहर चला गया।
मैंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की और नौकरी करने लगा।
मेरी शादी हो गई।
बहुत सालों बाद मुझे एक दोस्त से राहुल का मोबाइल नंबर मिला।
मैं उससे फोन पर बात करता।
राहुल की शादी हुए 20 साल हो गए थे।
मैं काम से राहुल के शहर गया, होटल में ठहरा।
मैं राहुल से मिलने उसके घर गया।
उसके बीबी और बच्चे से मिला।
उसकी बेटी कॉलेज में पढ़ रही थी।
मैंने कहा, “राहुल आज दोनों दोस्त शराब पार्टी करेंगे!”
राहुल बोला, “घर में संभव नहीं। मैं तुम्हारे होटल आता हूं।”
घर में बताकर वह मेरे साथ होटल आया।
हम पीने बैठे।
स्कूल के दिनों की बातें करने के बाद मैं बोला, “राहुल तुम्हें याद है, गौतम के घर में, मैं और गौतम तुम्हारी गांड मारा करते थे। एक दिन गौतम जब तुम्हारी गांड मार रहा था, उसका बड़ा भाई राजेंद्र बाथरूम से निकला। राजेंद्र भी तुम्हारी गांड मारने की तैयारी कर रहा था। मैं बाहर पहरे पर था। मुझे गौतम के पिताजी आते दिखाई दिए। मैंने तुम लोगों को सतर्क किया। नहीं तो राजेंद्र भी तुम्हारी गांड मार देता। उसके बाद तुम्हारे पिताजी की बदली हो गई।”
मैं यह कहकर हंसने लगा।
राहुल बोला, “तुमने उसके बाद और किसी की गांड मारी या अपनी गांड मरवाई क्या?”
मैं बोला, “नहीं। उसके बाद किसी की गांड नहीं मारी न मरवाई। वह नयी जवानी का खेल था। उसके बाद मैं पढ़ाई, नौकरी फिर बीबी-बच्चे में व्यस्त हो गया।”
राहुल यह सुनकर कुछ सोचने लगा।
राहुल ने अपने लिए बड़ा पेग बनाया, चिकन तंदूरी के साथ पीया।
उसे नशा चढ़ गया था।
राहुल बोला, “मैं अपने बारे में बताता हूं।”
राहुल की कहानी – राहुल की जुबानी
जब तुम और गौतम मेरी गांड मारा करते थे, मुझे बहुत मजा आता था। तुम्हारे और गौतम के लंड छोटे, पतले और गेहुए थे।
एक दिन जब गौतम मेरी गांड मार रहा था, उससे 5 साल बड़ा भाई राजेंद्र आ गया।
राजेंद्र ने कहा कि वह भी मेरी गांड मारेगा।
राजेंद्र ने अपने खड़े लंड पर तेल लगाने लगा।
राजेंद्र का लंड तुम लोगों से डेढ़ गुना लंबा, मोटा और काला था।
मैं उसके काले मोटे लंबे लंड को हसरत से देख रहा था।
राजेंद्र ने अपना लंड मेरी गांड पर टिकाया ही था कि तुमने बताया, “गौतम के पिताजी आ रहे हैं!”
मेरी राजेंद्र के लंड से गांड मरवाने की हसरत अधूरी रह गई।
उसके बाद मेरे पिताजी की बदली हो गई।
उसके बाद मैं कल्पना करने लगा कि राजेंद्र अपने काले बड़े लंड से मेरी गांड मार रहा है।
मैं अपने चूचे दबाता और मुठ मारकर हल्का हो जाता।
कुछ दिनों बाद मैं मोटी मोमबत्ती तेल लगाकर अपनी गांड में डालने लगा।
मोमबत्ती के पिछले हिस्से में मैंने खांचा काटकर पतली रस्सी बांध रखी थी।
मोमबत्ती गांड में डालने के बाद मैं रस्सी को अपनी कमर में बांध देता जिससे मोमबत्ती पूरी अंदर न चली जाए और बाहर भी न निकले।
फिर मैं अपने चूचे दबाता और चलता।
मोमबत्ती के गांड में घर्षण से मुझे जोश आता।
मेरा लंड खड़ा हो जाता।
मैं कल्पना करता कि राजेंद्र ने मेरी गांड में लंड डाला है।
मैं लेटकर मुठ मारता।
मैंने अपनी शादी होने के पहले तक यह किया।
शादी के बाद पत्नी के साथ सेक्स जीवन अच्छा था।
मैंने राजेंद्र को याद कर मुठ मारना बंद कर दिया।
एक साल बाद पत्नी गर्भवती हो गई।
कुछ महीनों बाद डॉक्टर की सलाह से हमारा सेक्स बंद हो गया।
मुझे राजेंद्र की याद आने लगी।
मैं फिर से मोमबत्ती डालकर मुठ मारने लगा।
बच्चे के जन्म के कुछ महीनों बाद मेरा पत्नी के साथ सेक्स शुरू हुआ।
मैंने मुठ मारना बंद कर दिया।
मेरी शादी हुए 15 साल हो गए।
मेरी उम्र 37 हो गई थी।
पत्नी 35 की।
पत्नी घर-बच्चे में व्यस्त रहती, कभी-कभार ही सेक्स करने देती।
उसमें भी खास मजा नहीं आता।
मैं फिर से राजेंद्र को याद कर मोमबत्ती डालकर मुठ मारने लगा।
एक दिन गौतम ने मुझे फोन कर बताया कि उसके बड़े भाई राजेंद्र के लड़के को मेरे शहर में नौकरी मिली है। एक महीने बाद राजेंद्र लड़के के साथ मेरे शहर आ रहा है।
राजेंद्र ने मुझसे बात की।
उसने मुझे बताया कि उसके लड़के को उसके ऑफिस के पास पीजी अकोमोडेशन चाहिए। मुझे ढूंढने को कहा।
राजेंद्र ने अपना फोन नंबर दिया।
मेरे मन में आशा जगी।
कहते हैं जो शिद्दत से चाहो वह पूरा होता है।
राजेंद्र से मेरी मुलाकात होने वाली है सोचकर मैं खुश था।
कुछ दिनों में मैंने पीजी अकोमोडेशन ढूंढकर राजेंद्र को बता दिया।
जब राजेंद्र आने वाला था उस समय स्कूल में गर्मी की छुट्टी थी।
मेरी पत्नी बेटी के साथ मायके जाने वाली थी।
मैंने राजेंद्र को अपने घर में रुकने को कहा।
मैंने राजेंद्र के आने की तारीख से 7 दिन की छुट्टी ले ली।
मैंने इंटरनेट पर गांड मरवाने के बारे में विस्तार से पढ़ा, गे सेक्स वीडियो देखे, यौन बीमारी से बचने के लिए कंडोम और केवाई जेल खरीदा।
राजेंद्र के आने के एक दिन पहले मैंने अपने शरीर के बाल ट्रिमर से साफ किए, कूल्हों के बाल हेयर रिमूवर क्रीम से साफ किया।
अगले दिन मैं राजेंद्र और उसके लड़के को स्टेशन से घर लाया।
लंच के बाद हम तीनों लड़के के पीजी अकोमोडेशन गए।
सामान रखकर लड़का ऑफिस चला गया।
घर वापस आते समय मैंने राजेंद्र की सहमति से कई स्ट्रांग बियर की बोतलें खरीदीं।
मैंने सोच रखा था कि मैं अपने दिल की बात राजेंद्र को बता दूंगा।
घर पहुंचकर मैंने अच्छे से शेविंग की।
मैं दाढ़ी-मूंछें नहीं रखता हूं।
नहाकर बॉडी क्रीम लगाया, काला हाफ पैंट और गुलाबी टी-शर्ट पहना।
उम्र के साथ मेरा बदन भर गया था।
मैंने आईने में देखा।
टी-शर्ट में मेरे पुरुष चूचे नवयौवना के चूचे जैसे दिख रहे थे।
मेरी रंगत गेहूँआ है।
मेरी बाल रहित भरी जांघें मस्त दिख रही थीं।
राजेंद्र भी नहाकर आया।
उसने बरमूडा, टी-शर्ट पहना था।
उसके लंड का उभार दिख रहा था।
उसने अंदर चड्डी नहीं पहनी थी।
हम चखने के साथ बियर पीने बैठे।
दोनों ने अपने परिवार और नौकरी के बारे में बताया।
हमने एक बोतल खत्म की; दूसरी खोली।
मैं बोला, “राजेंद्र आपको याद है स्कूल के दिनों में आप मेरी गांड मारने ही वाले थे कि खबर मिली – आपके पिताजी आने वाले हैं! आप मेरी गांड नहीं मार सके!”
राजेंद्र बोला, “हां याद है। मेरी तुम्हारी गांड मारने की तमन्ना अधूरी रह गई। तुम्हारे पिताजी की बदली हो गई। मैंने आज तक किसी की गांड नहीं मारी। तुमने उसके बाद और किसी से गांड मरवाई क्या? और पत्नी के अलावा किसी और से सेक्स किया क्या?”
मैं बोला, “मैं इस शहर में आ गया। उसके बाद मैंने किसी से गांड नहीं मरवाई। पत्नी के अलावा किसी और से सेक्स नहीं किया। जब स्कूल के दिनों गौतम मेरी गांड मारा करता था, उसका लंड पतला छोटा गेहूँआ था। जब आप मेरी गांड मारने की तैयारी में अपने लंड पर तेल लगा रहे थे, मैंने आपका काला, लंबा मोटा सुंदर लंड देखा। मेरी आपसे गांड मरवाने की तमन्ना अधूरी रह गई। मैं अपनी गांड में मोमबत्ती डालकर कल्पना करता हूं कि आप मेरी गांड मार रहे हैं। अपने चूचे दबाकर मुठ मारता हूं।”
राजेंद्र मेरे पास बैठ गए, मेरी चिकनी जांघों पर हाथ फेरकर कहने लगे, “मस्त चिकनी जांघ है!”
उनका लंड खड़ा होकर बरमूडा में तंबू बन गया।
मैं बोला, “आपका स्वागत करने कल ही शरीर के बाल साफ किए हैं!”
राजेंद्र बोला, “तो देरी किस बात की? बेडरूम चले!”
हम दोनों बेडरूम में गए।
मैंने कंडोम और केवाई जेल ड्रावर से निकाला।
राजेंद्र बोला, “इसकी जरूरत नहीं। मैंने भी पत्नी के अलावा किसी और से सेक्स नहीं किया। बीमारी की संभावना नहीं है।”
मैं तेल की शीशी ले आया।
राजेंद्र ने मेरी और अपनी टी-शर्ट उतार दी, वो मेरे चूचों को दबाने-चूसने लगे।
मैं सिसकारी लेने लगा।
राजेंद्र ने मेरी और अपनी पैंट उतार दी।
हम नंगे खड़े थे।
मैंने अपनी उंगली पर तेल लेकर गांड के अंदर लगाया, तेल की बोतल राजेंद्र को दी।
राजेंद्र बोला, “तुम ही तेल लगा दो।”
मैंने अपने सपने के लंड को इतने पास से पहली बार देखा।
लंड मोमबत्ती से काफी मोटा था।
मैंने काले तगड़े लंड को चूमा और उसपर अच्छे से तेल लगाया।
मैं पलंग पर हाथ रखकर पैर फैलाकर सामने झुककर खड़ा हो गया।
बहुत साल पहले मैं ऐसे ही झुककर खड़ा था।
राजेंद्र ने मेरी गांड पर लंड टिकाया था, पर गांड नहीं मार पाया था।
उसके पिताजी आने की खबर मिलने के कारण।
पर आज किसी के आने का डर नहीं था।
राजेंद्र ने मेरे कूल्हों को चूमा, कूल्हों पर हाथ फिराया, लंड गांड की छेद में टिका दिया।
मैंने लंबी सांस ली, गांड ढीली छोड़ दी।
राजेंद्र ने मेरी कमर पकड़ी, धीरे-धीरे लंड डालने लगा।
मुझे गांड में जोर का दर्द हुआ, मैं “आ आ” कर उठा।
राजेंद्र ने रुककर पूछा, “बहुत दर्द हो रहा है?”
मैं बोला, “मेरे दर्द की परवाह मत करिए! मैं कितना भी चीखूं छोड़िए मत! पहली बार अपने सपने के मर्द का लंड ले रहा हूं! सील टूटते समय दर्द तो होगा! स्कूल के दिनों गौतम का लंड लिया था वह तो लुल्ली था!”
राजेंद्र ने धीरे-धीरे पूरा लंड मेरी गांड में पेल दिया और झुककर मेरे चूचे दबाने लगा।
कुछ देर बाद दर्द कम हुआ, मैंने चीखना बंद कर कमर हिलाई।
राजेंद्र इत्मीनान से गांड मारने लगा।
मुझे थोड़ा दर्द और ज्यादा मजा आने लगा।
मेरा लंड खड़ा हो गया।
राजेंद्र गांड मारने की गति बढ़ाने लगा।
मैं अति आनंद को झेल नहीं पाया और अपना लंड बिना छुए झड़ गया।
मैंने कहा, “मेरा हो गया है!”
राजेंद्र घमासान चोदने लगा।
उसका लंड फूल गया।
उसने आखिरी झटका दिया और “आ आ” की आवाज के साथ मेरी गांड वीर्य से भर दी।
मैं महसूस कर रहा था राजेंद्र का लंड सिकुड़ रहा है।
फिर लंड गांड से “पक” की आवाज से बाहर निकला।
राजेंद्र ने मेरी कमर छोड़ी और अलग हो गया।
मैं फ्रेश होने बाथरूम जाने लगा।
मुझे चलने में मुश्किल हो रही थी; मैं पैर फैलाकर चल रहा था।
बाथरूम से वापस आकर मैंने राजेंद्र को कहा, “आप लंड साबुन से धो लीजिए। मैंने पढ़ा है गांड के कीटाणुओं से लंड पर इन्फेक्शन हो सकता है।”
राजेंद्र बोला, “मेरे लंड का बड़ा ख्याल है तुम्हें!”
कहकर बाथरूम चला गया।
मेरी गांड दुख रही थी, मैंने दर्द निवारक दवा ली।
रुमाल में बर्फ रखकर गांड सेकने लगा।
कुछ देर में आराम मिला।
राजेंद्र बाहर आए।
हम दोनों ने एक दूसरे को बताया कि बहुत मजा आया है।
हमने कपड़े पहने।
हमारा नशा उतर गया था।
हम बियर पीने बैठे।
राजेंद्र बोला, “बहुत सालों बाद सेक्स में इतना मजा आया! पत्नी की तो सेक्स की इच्छा खत्म हो गई है!”
मैं बोला, “मेरी पत्नी की भी!”
राजेंद्र बोला, “राहुल तुम मेरी दूसरी पत्नी बनोगे?”
मैं बोला, “आपके साथ यौन क्रीड़ा के समय मुझे ऐसा लगा मैं लड़की हूं। आज से मैं आपकी पत्नी हूं! मैंने आपके आने की खुशी में 7 दिन की छुट्टी ली है!”
राजेंद्र बोला, “मैं 7 दिन तो रुक नहीं सकता, पर 4 दिन यहां रहूंगा। हर दिन हम हनीमून मनाएंगे! मुझे आप नहीं तुम कहना!”
हम दोनों ने थोड़ा खाना खाया, थोड़ी देर बाहर टहलकर आए।
मेरी गांड अभी भी दुख रही थी पर मन नहीं भरा था।
गांड मचल रही थी।
वापस आकर राजेंद्र के कहने पर मैंने सिर्फ पत्नी की साड़ी पहनी।
पत्नी का ब्लाउज, ब्रा, साया मेरे बदन से छोटा था।
माथे पर बिंदी लगाई।
हमने सिंदूर ढूंढा नहीं मिला।
सिंदूर पत्नी साथ ले गई थी।
एक लाल लिपस्टिक मिली, मैंने होंठों पर लगाई।
उसी लिपस्टिक से राजेंद्र ने मेरी मांग भरी।
मैं मन से लड़की बन गया।
हम एक दूसरे के होंठ चूमने-चूसने लगे।
मेरा आंचल गिर गया।
मैं कमर तक नंगी हो गया।
राजेंद्र ने अपनी टी-शर्ट उतार दी, मुझे आलिंगन में ले लिया।
मेरे चूचे राजेंद्र की छाती में दबे थे।
बड़ा सुकून मिला।
कुछ देर बाद राजेंद्र मेरे चूचे दबा-चूस रहा था।
उसने मेरी साड़ी उतार दी।
राजेंद्र ने अपने लंड पर मेरा हाथ रखकर पूछा, “चूसोगी?”
मैंने कभी लंड नहीं चूसा था, पर चूसने की तमन्ना थी।
मैंने सेक्स वीडियो में लंड चूसना देखा था।
मैं तकिया फर्श पर रखकर घुटनों के बल खड़ी हो गई, राजेंद्र की पैंट-चड्डी उतार दी।
मैंने मेरे सपनों के काले आधे खड़े लंड को आंखों से लगाया, फिर चूमा, फिर प्यार से चूसने लगा।
मेरा लंड खड़ा होने लगा, कुछ देर में पूरे आकार में आ गया।
मोटा लंड चूसने के लिए मुझे मुंह बहुत खोलना पड़ा।
आधा ही लंड मेरे मुंह में जा रहा था।
मुझे आश्चर्य और खुशी हो रही थी कि मैंने कुछ देर पहले ही इतने बड़े लंड को अपने प्यार के छेद में लिया था।
कुछ देर बाद राजेंद्र ने लंड मेरे मुंह से निकाला।
पलंग के किनारे तकिया रखकर मुझे तकिये पर बिठाकर पलंग पर लिटाकर कहा, “अब हम मिशनरी पोजीशन में मजा करेंगे!”
मैंने अपने पैर छाती की तरफ करके पकड़ लिए, गांड ढीली छोड़ दी।
राजेंद्र ने अपने लंड पर तेल लगाया और एक झटके में पूरा लंड गांड में पेल दिया।
मैं दर्द से तड़प उठा, आंख में आंसू आ गए, पर चेहरे पर मुस्कान थी।
राजेंद्र ने झुककर मेरे होंठ चूमे, सर पर हाथ फिराया।
मुझे थोड़ा आराम मिला।
राजेंद्र इत्मीनान से गांड मारने लगा।
मुझे दर्द कम, मजा ज्यादा आ रहा था।
कुछ देर बाद मेरी कमर दुखने लगी।
मैंने राजेंद्र को बताया।
राजेंद्र ने मुझे घोड़ी बनाकर पलंग के किनारे खड़ा किया।
मेरे घुटने-हाथ पलंग पर थे। पैर पलंग से बाहर।
राजेंद्र फर्श पर खड़ा होकर गांड मारने लगा, साथ ही मेरे कूल्हों पर हलके थप्पड़ मारता।
थप्पड़ से मुझे और जोश आ रहा था।
मैं कमर हिलाकर लंड और अंदर लेता।
कुछ देर बाद मैं आनंद से बोला, “और जोर से!”
राजेंद्र ने चोदने की गति बढ़ा दी।
मैं झड़ गया।
राजेंद्र ने मेरी गांड वीर्य से भर दी।
मुझे लगा जैसे गर्मी के बाद बरसात।
बाथरूम में राजेंद्र ने लंड साबुन से धोया।
मैंने गांड धोई और हम नंगे ही सो गए।
दूसरे दिन अच्छी पत्नी की तरह सुबह मैंने चाय बनाई, राजेंद्र को जगाने गई।
राजेंद्र नंगा चित्त लेटा था।
मैंने राजेंद्र के लंड-गोटी चूमी, उसके होंठों को चूमकर कहा, “उठ जाओ! चाय तैयार है!”
हमने चाय पी।
साथ नहाए।
नाश्ते के बाद, चूमा-चाटी के बाद मैंने फर्श पर खड़ा होकर झुककर हाथ पलंग पर रखकर खड़ा हुआ।
राजेंद्र ने कुछ देर मेरी गांड मारी फिर मैंने उसे रोका।
राजेंद्र को चित्त लिटाकर उसके लंड की सवारी करने लगा।
हम साथ झड़े।
पति-पत्नी की तरह हम साथ बाजार से सब्जी, चिकन ले आए।
दोनों ने साथ खाना पकाया।
लंच के बाद थोड़ा आराम किया।
शाम को हम राजेंद्र के लड़के से मिलने पीजी गए।
घर आकर हमने कई गे सेक्स वीडियो देखे।
हम नंगे बैठे एक दूसरे के बदन पर हाथ फेर रहे थे।
मैं मन से लड़की बन गया।
मैं बोला, “राजेंद्र तुम्हारी कोई फैंटसी है जो पूरी नहीं हुई?”
राजेंद्र ने अपनी फैंटसी बताई।
मैं बोली, “मैं उसे पूरी करूंगी!”
राजेंद्र बोला, “राहुल तुम्हारी क्या फैंटसी है?”
मैंने बताया।
राजेंद्र ने कहा, “मैं पूरी करूंगा!”
हमने 69 पोजीशन में एक दूसरे के लंड चूसकर वीर्य पी लिया।
हम दोनों की एक फैंटसी पूरी हुई।
हमारी पत्नियों ने कभी हमारा वीर्य नहीं पीया था।
रात को राजेंद्र ने मेरे चूचे चूसकर मुझे गर्म किया।
मैंने उसका लंड चूसा।
मैं पेट के बल लेट गया, अपने कूल्हों को हाथ से फैलाकर गांड की छेद से दूर किया।
राजेंद्र मेरे ऊपर लेटकर गांड मारने लगा।
वह कुछ देर गांड मारता फिर मेरे ऊपर लेट जाता, फिर गांड मारने लगता।
उसने मेरी गांड एक घंटे मारी।
मैं दो बार झड़ गया।
गांड दुखी, पर मन में था कि राजेंद्र दो दिन बाद जाने वाला है।
तीसरे दिन सुबह फ्रेश होने के बाद, हमने एक दूसरे की नंगे मालिश की।
हमने बहुत सारा पानी पिया।
जब पेशाब लगी दोनों बाथरूम गए।
मैं फर्श पर मुंह खोलकर बैठा।
राजेंद्र मूतने लगा, मैं पीने लगा।
फिर राजेंद्र मेरे शरीर पर मूतने लगा, मुझे मूत्र स्नान कराया।
उसके बाद मैं खड़ा हुआ, राजेंद्र मुंह खोलकर बैठा।
मैंने उसे मूत पिलाया, मूत्र स्नान कराया।
हम दोनों की एक और फैंटसी पूरी हुई जो हम अपनी पत्नियों के साथ पूरी नहीं कर पाए थे।
हमने एक दूसरे को साबुन लगाकर नहलाया।
हम बेडरूम में गए।
चूमा-चाटी के बाद मैं दीवार के पास एक स्टूल रखकर स्टूल पर एक पैर रखकर दीवार पकड़कर खड़ी हुई।
राजेंद्र पीछे से मेरी गांड मार रहा था, मेरे चूचे दबा रहा था।
यह आसन हमने वीडियो में देखा था।
हम लंच के बाद सो गए।
शाम को राजेंद्र ने मेजरिंग टेप से मेरे शरीर के नाप लिए और बाजार चला गया।
मैंने नेट पर मेकअप कैसे करना देखा।
थोड़ी देर बाद राजेंद्र ने एक पैकेट देकर कहा, “तैयार हो जाओ!”
पैकेट में मेरे नाप की लाल रंग की ब्रा-पैंटी और पतली नाइटी थी।
मैंने वह पहना।
पत्नी का मेकअप बॉक्स निकालकर मैंने मेकअप किया, लाल लिपस्टिक लगाई।
मैंने आईने में अपने आप को देखा।
मैं मन से लड़की बन गया।
राजेंद्र की फैंटसी थी – कॉल गर्ल को ब्रा-पैंटी में गोद में बिठाकर, उसे अपने हाथों से शराब पिलाना, उसके हाथों से शराब पीना।
मैं हाथ में पर्स लेकर ड्राइंग रूम में गई।
राजेंद्र ने मेरे हाथ में रुपये दिए।
मैंने रुपयों को अदा से चूमकर पर्स में रखा।
राजेंद्र के कहने पर दो ग्लासों में शराब, पानी, बर्फ डाली।
राजेंद्र बोला, “डार्लिंग अब नाइटी उतारकर, ग्लास हाथ में लेकर ब्रा-पैंटी में मेरी जांघ पर बैठ जाओ!”
राजेंद्र ने बरमूडा पहना था।
मैंने मुस्कुराकर एक ग्लास राजेंद्र को पकड़ाया और उसकी जांघ पर बैठ गई।
राजेंद्र मुझे अपने ग्लास से शराब पिलाने लगा।
मैं उसको अपने ग्लास से पिलाने लगी।
कुछ देर बाद राजेंद्र ने मेरी ब्रा उतार दी।
राजेंद्र मेरे चूचों पर शराब डालने लगा और बहते शराब को चूसने लगा।
राजेंद्र ने मुझे जांघ से उतारा, अपना बरमूडा उतार दिया और मुझे उसके पैरों के बीच बिठाया।
राजेंद्र अपने खड़े लंड के सुपारे पर शराब डालने लगा।
मैं पीने लगी।
ठंडी शराब से राजेंद्र का लंड सिकुड़ने लगा।
शराब खत्म हुई।
राजेंद्र के कहने पर मैंने उसका लंड चूसकर खड़ा किया और अपनी पैंटी उतार दी।
राजेंद्र ने मुझे उसके लंड पर तेल लगाने को कहा।
मैंने तेल से लंड की मालिश की।
राजेंद्र के कहने पर मैं झुककर सोफे पर हाथ रखकर कुतिया बनकर खड़ी हुई।
राजेंद्र ने एक झटके में मेरी गांड में लंड पेल दिया।
वह निर्ममता से गांड मारने लगा।
वो मेरे कूल्हों पर जोरदार थप्पड़ मार रहा था।
मैं नखरे से कह रही थी, “मारो मत लगता है!”
राजेंद्र को और जोश आ रहा था।
वह मेरी गांड में झड़ गया।
राजेंद्र ने इससे पहले भी मेरी गांड मारी थी पर निर्ममता से नहीं बल्कि प्यार से।
आज मैं कॉल गर्ल थी।
मुझे कॉल गर्ल का अभिनय करने में मजा आ रहा था।
राजेंद्र ने मुझे बाथरूम ले जाकर फर्श पर बिठाया, मेरे ऊपर मूतने लगा।
मैं मूत पी रही थी और शरीर पर बहते मूत को तेल से समान अपने शरीर पर रगड़ रही थी।
मूतना खत्म हुआ।
राजेंद्र बोला, “अब मेरे लंड को साबुन से धो और नहाकर नंगी वापस आओ!”
मैंने उसका लंड धोया।
राजेंद्र चला गया।
मैं नहाकर निकली।
राजेंद्र दूसरा पेग पी रहा था।
उसने मुझे उसके पैरों के पास बैठने का इशारा किया, सिगरेट सुलगा पर मेरे मुंह में धुआं फूंकने लगा।
मैं खांसने लगी।
राजेंद्र को मजा आ रहा था।
मैं कभी-कभी सिगरेट पीती थी, पर राजेंद्र को खुश करने खांस रही थी।
आज मैं कॉल गर्ल थी।
कुछ देर बाद राजेंद्र ने मुझसे अपना लंड चुसवाया, फिर पलंग पर मुझे पेट के बल लिटाया।
मेरे कूल्हे पर थप्पड़ मारकर कहा, “तेरा छेद दिखा!”
मैंने हाथ से कूल्हे फैलाकर गांड की छेद से दूर कर दिए।
राजेंद्र मेरे ऊपर आकर धुंधाधार गांड मारने लगा।
वह कुछ देर चोदता, फिर मेरे ऊपर लेटकर आराम करता, फिर चोदने लगता।
राजेंद्र ने थोड़ी देर पहले ही गांड मारी थी।
इस बार वह 45 मिनट टिका।
मैंने पहली बार एक रात में दो बार गांड मरवाई थी।
वह भी इतनी निर्ममता से।
मेरी गांड दुख रही थी।
झड़ने के बाद राजेंद्र मेरे ऊपर से उतरकर बोला, “मजा आ गया! पैसे वसूल हो गए!”
मैंने राजेंद्र का लंड साबुन से धोया।
कॉल गर्ल का खेल खत्म हुआ।
हमने खाना खाया और सो गए।
चौथे दिन सुबह हमने एक दूसरे की मालिश की; जमकर यौन आनंद लिया, बाथरूम में एक दूसरे को मूत पिलाया, मूत्र स्नान कराया, एक दूसरे को नहलाया।
लंच के बाद राजेंद्र चला गया।
राजेंद्र के जाने के बाद मैंने आराम किया।
दुखती गांड की बर्फ से सिकाई की।
अगले दिन राजेंद्र की बहुत याद आ रही थी।
गांड खाली-खाली लग रही थी।
मैं छुट्टी खत्म होने से पहले ही काम पर चला गया।
कुछ दिनों बाद पत्नी वापस आ गई।
मैं राजेंद्र की याद कर मुठ मारता।
अब मोमबत्ती गांड में डालने में मजा नहीं आ रहा था।
एक महीने बाद मुझसे रहा नहीं गया।
राजेंद्र का शहर बस से दो घंटे की दूरी पर था।
मैं राजेंद्र को बताकर उसके शहर गया, होटल में ठहरा।
राजेंद्र दिन भर मेरे साथ होटल में रहा, दो बार मेरी गांड मारी।
दोनों बार मैं अपना लंड बिना छुए झड़ गया।
शाम को मैं वापस आ गया।
मैं हर महीने राजेंद्र के शहर जाने लगा।
मुझे और राजेंद्र को अब पत्नी को सेक्स के लिए मिन्नतें करने की जरूरत नहीं पड़ती।
वैसे भी पत्नियों का सेक्स का जोश खत्म हो गया था।
वे सेक्स के समय मुर्दे की तरह लेटी रहती।
मेरी बेटी आगे पढ़ने के लिए दूसरे शहर चली गई।
मैंने राजेंद्र के शहर में नौकरी ढूंढ ली।
राजेंद्र के फ्लैट के पास फ्लैट किराए पर ले लिया।
मेरी पत्नी और राजेंद्र की पत्नी की अच्छी दोस्ती हो गई।
कभी मैं पत्नी के साथ राजेंद्र के फ्लैट पर जाता हूं। पार्टी होती। रात को वहीं रुकता।
मैं और राजेंद्र एक बेडरूम में सोते।
पत्नियां दूसरे बेडरूम में।
हम जमकर यौन आनंद लेते।
कभी राजेंद्र मेरे फ्लैट में पत्नी के साथ आता, रात को रुकता।
पिछले पांच साल से ऐसा चल रहा है।
मैंने अपनी ब्रा-पैंटी बेडरूम में छुपा रखी है।
जब मैं राजेंद्र के साथ बेडरूम में होती, मैं ब्रा-पैंटी में राजेंद्र की जांघों पर बैठती।
हम एक दूसरे को शराब पिलाते हैं; फिर घमासान सेक्स।
राहुल ने अपनी कहानी खत्म की और बोला, “घर जा रहा हूं!”
मैं (संजय) बोला, “राहुल तुमने कभी raatkibaat 3 में कहानियां पढ़ी हैं? मैं रतन दत्त के उपनाम से कहानियां लिखता हूं। तुम अनुमति दो तो तुम्हारी कहानी भी लिखूं!”
राहुल बोला, “मैंने पढ़ी है। तुम लिखो पर नाम बदल देना। शहर का नाम मत लिखना। हमारी पत्नियां को ऐसी कहानियों के बारे में पता नहीं है। कोई खतरा नहीं है!”
मैंने कहानी को और सेक्सी बनाकर लिखी।
आपको यह कहानी कैसी लगी?
बतायें मेल पर।
मेल भेजते समय कहानी का नाम लिखें, मैंने अनेक कहानियां लिखी हैं।
आपका – रतन दत्त
valmiks482@gamil.com