हॉट मामी पोर्न कहानी में मेरे मामा की शादी के समय ही मामी मुझे अच्छी लगी और उनसे दोस्ती हो गयी. उनसे मिलने मैं नानी के घर गया तो मामी की चूत मिल गयी.
सब खूबसूरत महिलाओ और लड़कियो, आप सब अपनी अपनी चूचियां दबवाने के लिए तैयार हो जाओ और साथ ही अपनी चुत से पानी निकलवाने के लिए भी तैयार हो जाओ.
ये हॉट मामी पोर्न कहानी मेरे जीवन की सच्ची घटना पर आधारित है.
इसमें पात्रों के नाम काल्पनिक हैं.
मैं अनुभव कुमार, इंजीनियरिंग का तीसरे साल स्टूडेंट हूँ.
आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने बारे में बताना चाहता हूँ.
मैं 5 फुट 11 इंच लंबा मर्द हूँ.
मैं चौड़ी छाती वाला, एकदम गोरा और स्मार्ट बंदा हूँ.
मेरे लंड का नाप आठ इंच है … जो किसी भी महिला को चोद कर संतुष्ट करने के लिए काफी मजबूत है और देर तक चुदाई करता है.
अभी तक जिस भी लड़की ने मेरे लंड का स्वाद चखा है, वह बार-बार बस इसे पाने की जिद करती है.
मेरे ऊपर शुरू से ही कामदेव की कृपा रही है और चूतों की कभी कमी नहीं रही.
लेकिन जिंदगी का पहला सेक्स जब मैंने किया, तो वह मैंने अपनी मामी के साथ किया था.
उन्होंने मुझे सेक्स का ऐसा ज्ञान दिया जो मुझे आज तक महिलाओं को संतुष्ट करने में काम आता है.
ये बात तब की है, जब मैं ग्यारहवीं क्लास में था.
उस समय मैंने अपनी छोटी मामी को पहली बार देखा था.
दरअसल हम सब लोग नाना जी के साथ अपने छोटे मामा के लिए लड़की देखने गए थे.
जब हम लोग उनके घर गए, तब हमारा स्वागत बहुत ही अच्छे तरीके से हुआ.
देखने में वे लोग काफी इज्जतदार लग रहे थे.
कुछ देर बैठने के बाद नाना जी ने उन लोगों को इशारे से लड़की को बुलाने के लिए कहा.
कुछ देर बाद एक खूबसूरत सी लड़की पानी लेकर आई.
उस वक्त मेरे दिमाग में उनके प्रति कुछ भी नहीं था पर वह एकदम बला की खूबसूरत लग रही थी.
गुलाबी साड़ी में एकदम हूर की परी लग रही थी.
मैंने ध्यान दिया कि उसका फिगर करीब 32-28-34 का था.
यह फिगर एकदम वर्जिन लड़की के जैसा था.
वह लड़की मेरी मामी बनी, तब मुझे बाद में पता चला था कि वे शादी के बाद भी कुंवारी ही रही थीं.
उस टाइम मैं एक दुबला-पतला लड़का हुआ करता था और लड़कियों से कभी बात नहीं करता था.
पर जब मेरे नाना ने मुझसे कहा- जा, अपनी होनी वाली मामी से बात करके आ!
तो मैं एकदम से सकपका गया.
लेकिन जब मैं उनके पास गया, तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर एकदम मुझे शांत कराया … क्योंकि मेरे हाथ कांप रहे थे.
तभी मुझे एकदम से उनसे प्यार-सा हो गया. मैंने उनसे बात की.
उनका नाम काव्या था.
मैंने उनका नंबर भी ले लिया.
उन्होंने मुझसे कहा- हम दोस्त बन सकते हैं न!
उनके हाथ का स्पर्श पाते ही मैं बहुत ही खुश हो गया क्योंकि ये मेरा पहला स्त्री स्पर्श था.
हमारे छोटे मामा बहुत ही शर्मीले किस्म के आदमी हैं.
वे तो शादी के लिए भी मना कर रहे थे … पर नाना के जबरदस्ती करने पर मान गए.
लड़की वाले तो राजी थे ही, सो वे भी मान गए.
मेरे मामा रेलवे में गार्ड के पद पर थे.
मामा की शादी तय हो गई.
दो महीने बाद की तारीख निकली.
इसी बीच मेरी और मामी की दोस्ती भी हो गई.
हमारी ऑनलाइन बहुत सारी बातें होती थीं.
मैंने मामी को कभी भी गंदी नजर से नहीं देखा था.
फिर वह दिन आ ही गया, जब मामी दुल्हन बनकर आईं.
वे एकदम खूबसूरत और गोरी-चिट्टी अंग्रेजन मेम जैसी लग रही थीं.
उनकी आंखें एकदम परी जैसी थीं और फिगर तो ऐसा लग रहा था मानो सच में कोई हूर धरती पर उतर आई हो.
सच में मुझे उनसे प्यार हो गया था.
पर वे मामी थीं तो मैं क्या कर सकता था.
शादी के तीन दिन बाद ही मामा अपनी ड्यूटी पर चले गए, वे मामी को घर पर छोड़कर गए थे.
हम सब भी शादी के बाद अपने घर आ गए थे.
मैंने घर आकर जिम जॉइन कर ली.
कुछ दिनों में मेरी बहुत अच्छी बॉडी भी बन गई.
लेकिन लड़कियों के मामले में अभी कच्चा था.
मैं अभी भी सिर्फ पोर्न देखकर और हाथ से लंड हिलाकर अपना काम चलाता था.
इसी के साथ साथ मैं छोटी मामी से अभी भी चैट करता था.
अब वे अकेली थीं तो बहुत उदास रहने लगी थीं.
मैंने उनसे कई बार पूछने की कोशिश की.
पर उन्होंने मुझे नहीं बताया.
वे मुझे बहुत पसंद करती थीं तो हम दोनों की लंबी लंबी बातें चलती रहती थीं और हमारी दोस्ती और भी गहरी हो गई थी.
एक दिन उन्होंने मेरी इंस्टाग्राम पर बॉडी वाली पिक देखकर मुझे टेक्स्ट किया- अरे गजब यार, तुम पर तो बहुत सारी लड़कियां मरती होंगी!
मैंने भी कहा- अरे यार मामी … आपको पसंद आई … मेरे लिए यही बहुत बड़ी बात है. वैसे आप मरेंगी क्या मेरे पे?
यह पढ़ कर उनका तुरंत रिप्लाई आया- यार, शादी हो गई वरना अभी मर जाती!
तभी मैंने सोचा कि लाइन क्लियर है … इनके साथ कुछ खेल किया जा सकता है.
मैंने कहा- अरे तो अभी क्या प्रॉब्लम है?
यह सुनते ही वे ऑफलाइन हो गईं.
मैंने सोचा कि वे नाराज़ हो गईं क्योंकि उसके बाद हमारी बात नहीं हुई.
कुछ महीने बीत गए.
मेरी गर्मियों की छुट्टियां आ गईं.
मैंने अपने नाना के घर जाने का फैसला किया.
घर में बात करने के बाद दूसरे दिन अपने नाना के घर पहुंच गया.
मुझे देख कर सभी लोग बहुत खुश हो गए थे.
नाना, बड़े मामा-मामी, छोटे मामा और स्पेशयली छोटी मामी … जो एक अजीब-सी ही मुस्कान दे रही थीं.
छोटी मामी मेरे सामने पानी रखने के लिए झुकीं तो पता नहीं क्यों … मेरी नजर उनके 34 साइज़ के हो गए चूचों पर चली गई.
उसी वक्त उनकी और मेरी नजरें भी मिल गईं.
उन्होंने मेरी नजरों को पढ़ लिया था कि मैं उनके दूध देख रहा हूँ. उसी पल मेरे आठ इंच के मूसल में खलबली मच गई थी … लेकिन मैं खुद को काबू में रखे रहा.
कुछ देर बाद हम दोनों ही उधर अकेले रह गए थे.
मैंने मामी से कहा- अरे आप्गले मिलो ना … हम दोनों दोस्त हैं.
यह सुनते ही मामी मेरे गले से ही लग गईं.
मुझे पहली बार मामी के गर्म चूचों का अहसास हुआ और मैंने भी उन्हें अपनी बांहों में कस कर भींच लिया.
फिर मामी ने मुझे छोड़ने का प्रयास किया तो मैं भी उनसे अलग हो गया.
कुछ देर बाद छोटे मामा अन्दर आ गए, मामी थोड़ी दूर को हो गईं.
मामा ने मुझे बाजू वाला कमरा दिखाकर कहा- ये वाला तेरा कमरा है.
यह कमरा मामी के कमरे के एकदम बगल में था.
मैं आपको अपने नाना के घर के बारे में बता देता हूँ.
उनके गांव में सबसे बड़ी हवेली उनकी ही है.
उस हवेली में तीन हिस्से हैं.
एक हिस्से में बड़े मामा-मामी और उनके तीन बच्चे रहते हैं. उनके दो लड़के और एक लड़की हैं. वह बारहवीं कक्षा में है. मस्त लगती है.
उसके बारे में मैं कभी और ज्यादा बताऊंगा.
दूसरे हिस्से में छोटे मामा-मामी.
तीसरे हिस्से में नाना अकेले ही रहते हैं … क्योंकि नानी का देहांत दस साल पहले ही हो चुका था.
मेरे नानाजी बहुत ही रंगीन मिजाज के हैं. उनके बिस्तर पर गांव की कोई न कोई मस्त माल चुदने के लिए आती ही रहती है, इसलिए वे अकेले ही रहते हैं.
मुझे छोटी मामी के साथ इसीलिए रखा गया क्योंकि मामा ज्यादातर बाहर ही रहते हैं.
पहला दिन तो मैंने नानाजी के साथ खेत पर घूमने में ही निकाल दिया.
घर आया तो सब लोगों के साथ खाना खा-पीकर सो गए.
उस दिन मामी जी से कुछ बात ही नहीं हो पाई.
रात को मामी के कमरे से अजीब-सी आवाजें आ रही थीं.
मैंने कान लगाकर सुना तो पता चला कि मामा-मामी की लड़ाई हो रही थी.
मैंने ध्यान से सुना कि मामी मामा से कह रही थीं- तुमसे कुछ नहीं हो पाएगा, कभी जब कुछ कर नहीं पाते तो मुझसे शादी करके मेरा जीवन बर्बाद क्यों किया? दस सेकंड का काम करते हो और सो जाते हो … मुझे ऐसी ही प्यासी छोड़ देते हो!
तभी एक जोर से आवाज आई.
मामाजी ने मामी को एक जोर का तमाचा जड़ दिया था.
उसके बाद आवाजें आना बंद हो गईं और समझ में आ गया कि वे लोग सो गए हैं.
मेरे मन में तभी गंदे ख्याल आने लगे थे और मैं मन ही मन मामी को चोदने का प्लान बनाने लगा.
उस वक्त मेरे दिमाग में एक योजना आ गई और मैं मामी की लेने की तैयारी में लग गया.
मुझे पता है कि जब मैं सुबह उठता हूँ, तभी मेरे कमरे में मामी रोज झाड़ू लगाने आती हैं.
इसीलिए मैं उस रात अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा ही सो गया.
सुबह मामी के आने से पहले मैं उठ गया और उनके आने के पहले अपना लंड सहला कर खड़ा करने लगा.
जल्दी ही मेरा लंड पूरा आठ इंच का होकर खड़ा हो गया.
अब मैं बिना रजाई के ही सोने का नाटक करने लगा.
तभी मामी मेरे कमरे में झाड़ू लगाने के लिए आईं और मेरा खड़ा लंड देखकर एकदम से घबरा गईं.
वे थोड़ी देर तक ऐसे ही देखती रहीं कि ये लंड है या आफत!
फिर वे बिना आहट किए मेरे पास आ गईं और लंड को करीब से देख कर मेरे कमरे से भाग गईं.
उनके जाते ही मैं उठ गया और अपना प्लान कारगर होते देख कर मुस्कुरा दिया.
फिर मैं पजामा पहन कर रोज की तरह मामी के पास चाय लेने के लिए आ गया.
मैंने मामी को देखा और गुड मॉर्निंग कहा.
मामा भी थे तो उनसे भी गुड मॉर्निंग हुई.
मामा ने मुझसे हाल-चाल पूछना शुरू कर दिया.
वे बोले- मुझे कुछ दिनों के लिए बाहर काम पर जाना है, तुम मामी का ख्याल रखना.
ये सुनते ही मेरी तो किस्मत ही खुल गई और मैंने मामी की तरफ देखा.
उनके चेहरे पर भी एक अजीब-सी मुस्कान आ गई थी.
अब मेरे पास पूरे सात दिन थे मामी को पटाने और चोदने के लिए.
एक घंटा बाद मामा काम पर चले गए.
उन्हें उधर से ही दिल्ली जाना था.
कुछ देर बाद नाना जी भी खेतों की तरफ निकलने को रेडी हो गए.
उन्होंने मुझे आवाज दी कि चलो खेतों में चलते हैं.
मैंने ना कर दी.
आज मैं उनके साथ नहीं गया क्योंकि मेरे दिमाग में कुछ और ही चल रहा था.
कुछ देर बाद मामी और मैं साथ में खाना खाने बैठे थे.
मैंने उनसे उनके चेहरे पर लगी चोट के निशान के बारे में पूछा.
लेकिन मामी ने उस बात को ऐसे ही टाल दिया.
वे मुझसे बोलीं- तुम सही से सोया करो … फालतू की बातों में दिमाग नहीं लगाया करो.
मैं समझ गया कि तीर सही जगह लगा.
मैं कमरे में आ गया और सोचने लगा तो मुझे एक तरकीब और सूझ गई.
मुझे पता था कि कुछ देर में मामी मेरे कमरे में आएंगी.
इसी लिए मैं अपने रूम में आकर अपना आठ इंच का लंड हाथ में लेकर हिलाने लगा.
तभी एकदम से मामी कमरे में आ गईं और वे एकदम से मेरे लंड की तरफ देखने लगीं.
उसी समय एकदम से मेरे लंड का पानी छूट गया और पिचकारी की कुछ बूंदें मामी के चेहरे पर जा गिरीं.
तभी मामी को होश आ गया और वे कमरे से भाग गईं.
तभी मैं सोचने लगा कि सारा काम खराब हो गया.
लेकिन नहीं, यह काम सही हुआ था.
थोड़ी देर में जब मैं मामी से माफी मांगने गया तो देखता हूँ कि काव्या मामी आधी नंगी लेटी हुई अपनी चूत में उंगली कर रही हैं और एक हाथ से खूबसूरत चूचे दबा रही हैं.
मैं पहली बार किसी लड़की को नंगी देख रहा था.
उनका एकदम गोरा रंग, बड़े-बड़े चूचे, एकदम चिकनी जांघें और उनके बीच में पाव रोटी जैसी गुलाबी चूत देख कर मेरा लंड फिर से अपने विकराल रूप में आ गया.
तभी मामी मुझे देख एकदम से सकपका गईं तो मैं भी उनके कमरे से निकल गया और हॉल में आकर बैठ गया.
इसके बाद पूरे दिन तक हमारी कोई बात नहीं हुई.
दूसरे दिन मामी मेरे पास आईं और मुझसे बोलीं- कुछ बात करनी है तुमसे.
मैं उनके साथ उनके कमरे में चल दिया.
हम दोनों बिस्तर पर बैठ गए.
वे मुझसे बोलीं- तुम अपना वीर्य इस तरह क्यों बर्बाद कर रहे हो? तुम्हें पता नहीं कि कितना कीमती है ये … न जाने कितनी औरतें इसके सुख से वंचित रह जाती हैं … और तुम इसे इस तरह बहा रहे हो. कोई गर्लफ्रेंड नहीं है तुम्हारी?
मैं उनसे बोला- मामी, आप जैसी कोई मिली ही नहीं, जिसके साथ ये सब कर पाता!
मामी हंस कर बोलीं- पहले कभी नहीं किया था क्या ये सब?
मैं- नहीं.
वे चुप हो गईं.
मैंने मामी से कहा- मामा और आप कल रात को क्यों लड़ रहे थे? क्या मैं आपकी कुछ मदद कर सकता हूँ?
इतना सुनते ही मामी मेरे गले लगकर फूट-फूटकर रोने लगीं.
वे बोलीं- तेरे मामा कुछ कर नहीं सकते और मैं सुहागरात से ही उनसे असंतुष्ट हूँ.
मैंने मामी से कहा- मैं आपसे प्यार करता हूँ मामी, क्या आप मेरी होगी?
वे मेरे सीने से लग गईं और हम दोनों एक-दूसरे के होंठों को चूसने लगे. हम लोग जोर-जोर से एक दूसरे को चूसने व चूमने की ऐसी कोशिश कर रहे थे मानो न जाने कबसे प्यासे हों.
तभी न जाने क्या हुआ कि मामी एकदम से मुझसे दूर हो गईं.
वे बोलीं- हम लोग गलत कर रहे हैं.
मैंने उनसे कहा- तो कर लेने दो हमें गलत … दिक्कत क्या है?
वे चुप रहीं.
मैंने उनसे बोला- जबसे मैंने आपको पहली बार देखा था, तभी से आपको चाहने लगा था. ऐसी कोई रात नहीं जाती जिस दिन मैं आपको याद करके अपने लंड को हिलाता न होऊं!
वे मुँह खोल कर विस्मय से मुझे देखने लगीं.
मैं अपने दोनों हाथों से उनकी चूचियों को पकड़ कर मसलने लगा और वे आह आह करने लगीं.
फिर धीरे से मैंने अपना एक हाथ उनकी जांघ पर रख दिया और उसे फेरने लगा.
वे अपनी टांगें खोल कर मुझसे मजा लेने लगीं तो मैंने एकदम से अपनी एक उंगली उनकी चूत में घुसा दी.
वे एकदम से तड़फ उठीं और बोलीं- आह ऐसे नहीं!
मैंने कहा- तो कैसे?
‘मैं बड़ी हूँ ना, आज तुझे सेक्स करना सिखाती हूँ.’
मैंने उनकी चूत में उंगली करना जारी रखा.
वह कुछ देर में ही एक लंबी ‘आह्ह्ह’ के साथ झड़ गईं.
अब मैंने एक एक करके उनके सारे कपड़े उतार दिए.
मां कसम, ऐसे खूबसूरती मैंने कभी नहीं देखी थी … एकदम मखमली बदन चाँदी सा चमकता हुआ.
कोई चूतिया ही इसे नहीं चोदेगा.
वे बोलीं- तुम भी तो कुछ निकालो.
मैंने अपने कपड़े निकाल दिए और वे मेरा आठ इंच का लंड देखकर एकदम से घबरा कर बोलीं- अरे दईया … ये अन्दर कैसे जाएगा? उनका तो सिर्फ इसका आधा भी नहीं है!
मैंने हंस कर उनसे लंड को प्यार करने को कहा, पर उन्होंने मना कर दिया.
फिर मैंने उन्हें चुदाई की पोजीशन में लिटाया और हाथ को मामी की चूत पर लगा दिया.
फिर मैं उनकी चुत को चाटने लगा.
मामी ‘आह … आह … आह … ’ करने लगीं.
वे बोलीं- लंड काम नहीं करता है क्या तुम्हारा … जो उंगली चला रहे हो!
यह सुनकर मैंने एक तकिया मामी की गांड के नीचे लगाया और लंड चूत पर रखकर रगड़ने लगा.
उनकी चुत रस से चिकनी थी तो मैंने देर न करते हुए अपना लंड चुत में पेल दिया.
मगर उनकी चुत एकदम सीलपैक जैसी थी तो मेरा लंड फिसल गया.
इस बार मामी से रहा नहीं गया और वे खुद अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रख कर रगड़ने लगीं.
उन्होंने सुपारा चुत में फंसाया और धक्का मारने को कहा ‘धक्का मार!’
मैंने एक धक्का लगा दिया.
लेकिन लंड केवल दो इंच अन्दर जाकर कहीं फंस गया.
मामी की सील अभी तक नहीं टूटी थी, तो वे जोर से चिल्ला उठीं.
‘आह साले ने मार डाला रे … मर जाऊंगी … आह निकाल इसे मादरचोद!’
वे मुझे गंदी-गंदी गालियां देने लगीं लेकिन मैं नहीं रुका.
मैंने एक और धक्का दे मारा.
इस बार मेरा पूरा का पूरा लंड मामी की चूत में घुसता चला गया.
मामी बेहोश हो गईं.
मैंने धक्के मारने जारी रखे थे.
कुछ देर बाद मामी को भी मजा आने लगा.
मैंने कहा- मजा आ रहा है न मामी?
मामी बोलीं- आह हां … बहुत मजा आ रहा है आह आज से मैं तेरी रखैल हूँ, जैसे चाहे वैसे चोद लेना मुझे … और मुझे काव्या डार्लिंग बुला साले … अब मैं तेरी मामी नहीं रही.
मैंने धक्के मारना चालू रखे.
करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद मैंने उन्हें घोड़ी बनाया और पीछे से लौड़ा पेल कर उन्हें चोदना चालू कर दिया.
मैंने काफी देर तक मामी को अलग-अलग आसनों में खूब चोदा.
हॉट मामी पोर्न चुदाई के बाद वे मेरे लौड़े की दीवानी बन गई थीं.
करीब आधा घंटा बाद मैंने मामी से पूछा- कहां आऊं?
तो मामी ने कहा- मुझे अपने बच्चे की मां बना दे, मेरी जिस्म की प्यास बुझा दे!
मैं उनकी चूत में ही झड़ गया.
कुछ वीर्य बहकर उनकी गांड पर आ गया.
फिर हम दोनों सारा दिन वहीं लेटे रहे और दो बार और सेक्स का मजा लिया.
काव्या मामी की गांड और बड़ी मामी की चुदाई के अलावा उनकी बेटी की चुदाई की कहानी भी मेरे पास है … वह सब बाद में कभी लिखूँगा.
आप मुझे मेरी हॉट मामी पोर्न कहानी पर अपने विचार जरूर भेजें.
आपका अपना अनुभव कुमार
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