जवान भाभी की अधूरी वासना की पूर्ति

Views: 227 Category: Bhabhi Sex Story By raviyayavar Published: March 28, 2026 📖 7 min read
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हॉट भाभी वासना कहानी में मैंने किराए का कमरा लिया और उस परिवार में घुलमिल गया. एक दिन भाभी अकेले में मेरे कंधे पर सर रखकर रोने लगी.
पिछले कई वर्षों से यहाँ मैं नियमित पाठक रहा हूँ।
लंबे समय से अपनी कहानी लिखना चाहता था, यहाँ मेरी यह पहली कहानी है।
कोई भूल हो तो मुझे मेल में शिकायत या सुझाव दे सकते हैं।

चलिए, अब आपको मैं अपनी वास्तविक घटनाओं पर आधारित हॉट भाभी वासना कहानी की ओर ले चलता हूँ।

मेरा नाम रवि है और मैं मूलतः लखनऊ का रहने वाला हूँ। अपने बारे में बताऊं तो मैं एक सामान्य नवयुवक हूँ। मेरा कद 5 फुट 3 इंच है और मेरा लिंग 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।

यह कहानी तब शुरू होती है जब मैं अपनी उच्च शिक्षा के लिए नया-नया लखनऊ आया था।
यहाँ आकर मैंने अपने लिए एक कमरा ढूंढा जहाँ मुझे रहने में असुविधा न हो।

भाग्यवश मुझे एक ऐसी फैमिली में रहने का अवसर मिला जहाँ मकान मालिक के तौर पर बस एक बूढ़ी अम्मा रहती थीं।
उनका एक बेटा और बहू ही सहारा थे।

बहू पेशे से अध्यापिका थी और बेटा रियल स्टेट के काम में लगा था।
मैं उन्हें ‘भैया’ और ‘भाभी’ कहकर बुलाता था।
भाभी का नाम शीतल था।

वहाँ मेरे पढ़ने के लिए अनुकूल माहौल था क्योंकि सारा दिन घर में शांति रहती थी और अक्सर अम्मा ही घर पर रह जाती थीं।

एक दिन भैया ने मुझसे कहा कि चलो सब लोग कहीं घूमने चलते हैं।
पहले तो मैंने पढ़ाई का बहाना दिया, फिर जब उन्होंने जोर दिया तो मुझे लगा कि चला जाता हूँ।
वैसे भी जब कोई मुझसे बड़ा जोर देकर कुछ कहता है, तो मैं मना नहीं कर पाता हूँ!

रविवार का दिन तय हुआ.
लेकिन सुबह अचानक भैया को कुछ काम आ पड़ा।
वे भाभी से मेरे साथ जाने को कहने लगे।
दोनों में इस बात पर हल्की नोंक-झोंक भी हुई कि आपके पास मेरे लिए कभी समय नहीं होता, सिर्फ काम, काम और काम!

मैं चुपचाप खड़ा था, कर भी क्या सकता था।

खैर, भाभी ने कहा- तुम मेरे साथ चलो.
तो मैंने हामी भर दी।

हमने मेट्रो ली।

मेट्रो में बैठने के कुछ दूर बाद भाभी ने मेरे कंधे पर सिर रखकर जोर-जोर से सुबक कर रोना शुरू कर दिया।
मैंने कई बार पूछा कि अचानक क्या हो गया?
मेरे बहुत पूछने पर उन्होंने बताया कि कई महीनों से उन्हें शरीर का सुख नहीं मिला है। भैया काम से आने के बाद थक कर सो जाते हैं और उनकी जिंदगी सिमट सी गई है। वह किसी से कुछ कह भी नहीं पा रही थीं।

मुझे समझ नहीं आया कि इस पर क्या प्रतिक्रिया दूँ क्योंकि मैं उनके लिए कभी गलत सोच ही नहीं सकता था।

पर अगले ही पल उन्होंने मुझसे पूछा, “भैया की जगह तुम होते, तो क्या तुम भी यही करते?”
“बिल्कुल नहीं! हर इंसान को शरीर के सुख का हक है!” मैंने सोचकर जवाब दिया।

“क्या तुम मुझे मेरे हिस्से का सुख दे सकते हो?” उन्होंने सीधे सवाल किया।
“मैं कैसे भाभी?” मैंने हड़बड़ाते हुए पूछा।

“क्यों, तुम मर्द नहीं हो क्या!” उन्होंने पलटकर कहा।
बात अब मर्दानगी तक आ पहुंची थी, तो मैंने भी कह दिया।

“अगर ऐसा है, तो आप मौके की तलाश शुरू कर दीजिए! आपको हर वो सुख दूंगा जो आपको नहीं मिला है!” मैंने ठोक कर कहा।

इसके बाद हमने मूवी देखी, घूमे और वापस आ गए।

एक सप्ताह बीत गया पर मौका मिला ही नहीं।

कहते हैं न कि देर है पर अंधेर नहीं! मौका लगा अगले ही रविवार को।

उस दिन भैया को अम्मा को लेकर उनके गांव जाना था।

वे भाभी से घर का ख्याल रखने को कहकर चले गए और बोले कि वह अगले दिन आएंगे।

उनके जाते ही भाभी तनतनाती हुई मेरे कमरे में घुस आईं और मुझे पीछे से पकड़कर मेरी गर्दन पर किस करने लगीं।
हॉट भाभी वासना में जल रही थी.
मैं समझ गया कि आज वह वक्त आ ही गया है, जिसका सप्ताह भर से इंतजार था!

मैंने भाभी को अपने सामने लाकर उन्हें फ्रेंच किस करना शुरू किया।
मुझे फ्रेंच किस जोर से करना पसंद है क्योंकि इससे सामने वाले की वासना भड़क उठती है और सब्र का बांध टूट जाता है।
मैंने उनकी गर्दन और कान की लौ पर चूमना शुरू किया तो वह पिघल सी गईं और जोर-जोर से आहें भरने लगीं।

थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझसे अपने रूम में चलने को कहा क्योंकि वह ज्यादा सेफ था।
कमरे में जाते ही भाभी भूखी शेरनी की तरह मुझ पर टूट पड़ीं और झट से मेरे लगभग सारे कपड़े उतार कर फेंक दिए।

उन्होंने लोअर और टॉप पहन रखा था।

मैंने जैसे ही उनका टॉप उतारा तो काली ब्रा में 36 के आकार के अमृत कलश दिखाई दिए।

यकीन मानिए, मैंने इतने सुंदर वक्ष कभी नहीं देखे थे!

मैंने ब्रा के ऊपर से ही उन्हें चूमना शुरू किया, तो भाभी पागल होने लगीं।
उन्होंने तुरंत अपनी ब्रा खुद खोल दी और अपना बायां कलश मेरे मुंह में दे दिया।
मैंने उनके गुलाबी निप्पल पर जीभ फेरकर उन्हें चूसना शुरू किया।
कभी दायां, कभी बायां… चूस-चूस कर मैंने उन्हें मदहोश कर दिया था।

मैं पहले से ही लगभग निर्वस्त्र था, अब बारी मेरे अंडरवियर की थी।
भाभी उसे उतारने की कोशिश करने लगीं।

आपको पता ही है, जब लिंग पूरी तरह टाइट होता है तो अंडरवियर उतारने में दिक्कत होती है।
जैसे ही उन्होंने उसे उतारा और मेरा लहराता हुआ 6 इंच का लौड़ा देखा, उनकी आंखों में चमक आ गई।

“वाह! इतना प्यारा सामान! यह तो मेरे लिए ही बना है!” भाभी बोलीं और उसे गप से मुंह में लेने का प्रयास करने लगीं।

जैसे ही उन्होंने उसे मुंह में लिया, मैं सातवें आसमान पर था!
यह मेरा पहला ब्लोजॉब का अनुभव था, और यह सुख वही जानता है जिसने इसे भोगा हो!

अगले ही पल मैंने भाभी के बचे हुए कपड़े भी उतार दिए।
मैंने देखा कि उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था।

उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मौके के लिए हर दूसरे दिन सफाई की है।
मुझे हमेशा से चिकनी चूत पसंद है।

मैंने उन्हें बेड पर सीधा लिटाकर उनकी टांगें उठाईं और चूत चाटना शुरू किया।
भाभी को इतना आनंद आ रहा था कि उन्होंने अपनी दोनों टांगें मेरी गर्दन में लपेट लीं।

मैंने तब तक चूत चाटना बंद नहीं किया, जब तक वह जल बिन मछली की तरह तड़पने नहीं लगीं!

अब वे मिन्नतों पर उतर आई थीं।
“कैसे भी करके इसे अंदर कर दो!” वह तड़पकर बोलीं।

मैंने देर न करते हुए उनके नीचे दो तकिया रखे और अंदर करने की सोची।
पर यह क्या! भाभी की चूत इतनी कसी हुई थी जैसे किसी नई नवेली दुल्हन की हो।

“जिसे इसका ख्याल रखना चाहिए था, उसने ध्यान नहीं दिया! अब तुम्हें ही यह सब देखना है!” उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा।

मैंने हल्का सा धक्का लगाया और लण्ड का टोपा अंदर सरक गया।
वे ‘आह-आह’ करने लगीं।
मैंने प्यार से उनके सिर पर हाथ फेरा।
“यह दर्द भी यादगार रहेगा!” मैंने मुस्कुराकर कहा।

उन्होंने अनुमति दे दी।
अगले ही पल मैंने बिना ढील दिए दूसरा झटका दिया, जिससे काफी हद तक लण्ड अंदर चला गया।

तीसरे झटके में पूरा का पूरा अंदर था!
भाभी की आंखों में आंसू थे पर उन्होंने धीरे से मुझे ‘थैंक यू’ कहा।
मैंने उनकी प्रतिक्रिया देखी और धक्कों की गति बढ़ा दी।

हमने करीब 7 मिनट तक इसी पोज में किया, फिर डॉगी स्टाइल और अन्य अलग-अलग पोज में लगभग 20 मिनट तक चुदाई की।

भाभी हर झटके पर मजे से चिल्ला रही थीं!

जब मेरे निकलने का समय आया, तो मैंने भाभी को बताया।

“बिना एक बूंद खोए, मैं इसे अपने अंदर ही लेना चाहूंगी!” उन्होंने कहा।

अगले ही पल भाभी की चूत मेरे वीर्य से भर गई।
मैं उनके ऊपर ही लेट गया और जब हटा, तो वीर्य उनकी चूत से रिस रहा था।

भाभी ने मुझे फिर से गले लगा लिया।
“आज तुमने मुझे वो दिया, जिसके लिए मैं महीनों से तड़प रही थी!” उन्होंने सुकून से कहा।

उस रात मैंने भाभी की जमकर 3 बार चुदाई की, हर उस कामसूत्र के 64 आसन में जो संभव था!
बाद में उन्होंने अपनी एक सहेली से भी मेरा परिचय कराया।
वह कहानी फिर कभी!

इस हॉट भाभी वासना कहानी पर आप अपने विचार लिखें.
raviyayavar@gmail.com

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