ऑनलाइन फ्रेंड सेक्स कहानी में नेट पर मेरी दोस्ती दिल्ली की एक बिंदास लड़की से हुई. हम सेक्स वीडियो चैट करने लगे. एक बार मैं दिल्ली गया तो उसे होटल में बुलाया.
मेरा नाम राज है, मैं इंदौर, मध्यप्रदेश का रहने वाला हूं।
मेरी उम्र 36 साल है.
मेरे लंड का साइज 6 इंच है।
यह ऑनलाइन फ्रेंड सेक्स कहानी मेरी और नेट पर मिली मेरी एक दोस्त की है जिसका नाम रागिनी है.
यह मेरी पहली कहानी है, कोई गलती हो तो माफ करना।
रागिनी 32 साल की है।
वह दिल्ली में रहती है।
रागिनी का फिगर 34-28-34 का है।
एक बार नेट पर एक दोस्त बनी जिसका नाम रागिनी है।
हम लोग रोज बात करने लगे।
रागिनी बहुत ही बिंदास लड़की है और अपनी जिंदगी खुल के जीती है।
हमारी बात होते-होते कब सेक्स चैट होने लगी, पता ही नहीं चला।
हमारी वीडियो कॉल पर भी बात होने लगी।
रागिनी वीडियो कॉल पर अपना पूरा जिस्म दिखाती थी।
अब हम दोनों मिलने के लिए तड़पने लगे।
एक बार मेरा दिल्ली जाना हुआ।
तब हमने होटल में मिलने का तय किया।
रागिनी तय समय पर होटल आ गई।
पहली बार उसे देखा तो मेरा मुंह खुला का खुला रह गया।
वो सफेद रंग की सलवार कमीज पहनकर आई थी, जिसमें वो बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी।
उसके गुलाबी रसदार होंठ, बड़ी-बड़ी कजरारी आंखें, गजब का तराशा हुआ जिस्म, उसकी छाती के ऊपर एक छोटा सा तिल जानलेवा है, उसके हाथ पर दो टैटू हैं जो उसे और सेक्सी बनाते हैं।
हम जैसे ही कमरे में पहुंचे, मैं उस पर टूट पड़ा, उसे दीवार की तरफ धकेलकर चूमने लगा, उसके होंठों का रस पीने लगा, उसके होंठों को चबा लिया, उसकी जीभ चूसने लगा।
मेरी लार उसके मुंह में जाने लगी।
हम दोनों पागलों की तरह एक-दूसरे के होंठ चूमने लगे।
शरीर पर अब कपड़े बोझ लगने लगे थे।
मैं उसके कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स दबा रहा था।
वो जोर-जोर से आहें भर रही थी, “जोर से दबाओ, और जोर से दबाओ, निचोड़ दो इनका सारा दूध!”
फिर मैंने उसकी कुर्ती उतार दी।
उसने लाल रंग की सेक्सी ब्रा पहनी थी।
उसकी ब्रा में उसके सफेद दूध समा नहीं रहे थे।
मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी।
उसके बूब्स पर भी एक तिल था जिसे मैं चाटने लगा।
उसके गुलाबी निप्पल जो एकदम कड़क थे, उनको चूसने लगा।
रागिनी मेरा सर दबा रही थी।
मैंने उसके बूब्स को मसलने लगा, जोर-जोर से दबाने लगा, उसके निप्पल्स को मरोड़ रहा था।
उसने मेरा लंड पैंट के ऊपर से पकड़ लिया था।
वो चिल्ला रही थी, “कुत्ते खा ले, जोर से चूस, पी ले सारा रस इनका, निचोड़ दे इनको पूरा, बहुत सताते हैं!”
मैंने उसके दोनों हाथ सर के ऊपर रखवा दिए और उसकी बगल को सूंघने लगा।
हल्की-हल्की पसीने की सुगंध मुझे उत्तेजित करने लगी।
मैं उसकी बगल को चाटने लगा।
मैं एक हाथ से उसकी लेगिंग के ऊपर से उसकी चूत को मसल रहा था।
रागिनी से कंट्रोल नहीं हो रहा था।
उसने मेरा शर्ट और पैंट उतार दिए और मेरी छाती चाटने लगी, मेरे निप्पल को काटने लगी।
वह निप्पल पर जीभ घुमा रही थी।
दोनों निप्पल को अच्छे से चाटने के बाद मेरी नाभि में जीभ घुमाने लगी, मेरी चड्डी के ऊपर से मेरे लंड को चाटने लगी।
मैंने उसकी लेगिंग्स उतार दी।
अब मैं उसकी चड्डी सूंघने लगा।
क्या महक थी उसकी!
फिर मैं रागिनी की चूत को उसकी चड्डी के ऊपर से चाटने लगा।
वो पागल हो रही थी।
रागिनी से रहा नहीं गया और उसने बोला, “मेरी पेंटी उतार के चाट कुत्ते, चूस ले इस निगोड़ी चूत का सारा रस, साली बहुत तड़पती है!”
मैंने उसकी पेंटी उतार दी।
वो मेरे सामने पूरी मादरजात नंगी लेटी थी।
रागिनी की चूत पर बिल्कुल बाल नहीं थे, आज ही साफ कराए थे उसने।
रागिनी ने चूत पर परफ्यूम लगा रखा था, ऐसी महक रही थी जैसे कोई अप्सरा की चूत।
मैं नाक लगाकर उसे सूंघने लगा।
मैंने पूरी नाक उसकी चूत में डाल दी और उसकी महक लेने लगा।
फिर मैं उसकी चूत के होंठों को चूमने लगा।
चूमते-चूमते मैंने उसके चूत के होंठों को खोला।
एकदम गुलाबी थी अंदर से।
मैंने उसकी चूत में जीभ डाल दी और चाटने लगा।
रागिनी के बर्दाश्त के बाहर होने लगा।
उसके हाथ मेरे बालों को सहला रहे थे।
मैं उसकी चूत चाटने लगा।
रागिनी ने पैरों के बीच मेरा सिर फंसा दिया।
वो आहें भरने लगी, गालियां देने लगी, “मादरचोद चाट अपनी रंडी की चूत, क्या चाट रहा है भड़वे! मजा आ गया! मुझे अपना गुलाम बना दे! पूरी अंदर तक चाट कमीने! रंडी की औलाद अच्छे से चाट! मुझे अपनी रखैल बना दे बहनचोद!”
थोड़ी देर में उसका जिस्म अकड़ने लगा और उसके चूत से झरना बहने लगा जिसे मैंने पूरा चाट लिया और थोड़ा उसके मुंह में डाल दिया मेरे मुंह से और उसके होंठों को चूमने लगा।
फिर मैंने अपनी चड्डी उतारी और उसके होंठों पर अपना कड़क लंड रखा।
वो मेरे उस प्यारे को चूसने लगी, मेरे लंड को चाटने लगी।
मेरी लंड की गोटियों को मुंह में भर लिया उसने।
मेरा लंड उसके मुंह की गर्मी पाकर फूंकारने लगा।
मैंने अपना पूरा लंड उसके मुंह में डाल दिया और चुदाई करने लगा उसके मुंह की।
एकदम रंडी की तरह चूस रही थी।
मैंने बोला, “कुतिया, रंडी अच्छे से चूस अपने यार का लंड, मादरचोद!”
इतनी अच्छी चुसाई मैं सहन नहीं कर पाया और उसको बोला, “मेरा पानी निकलने वाला है!”
रागिनी बोली, “मेरे मुंह में ही निकाल दो अपनी मलाई, मुझे पीना है मेरे यार की मलाई!”
मैंने उसके मुंह को एक से पकड़ा और पूरी मलाई उसके मुंह में छोड़ दी।
रागिनी ने चटकारे लेकर पी लिया पूरा वीर्य।
अब मैं उसके पास लेट गया, उसके बूब्स मसलने लगा, उसको फिर से चूमने लगा।
रागिनी मेरे लंड से खेल रही थी।
थोड़ा आराम करने के बाद वो मेरे लंड को खड़ा करने में लग गई।
उसने मेरे मुरझाए हुए लंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
मैं उसकी चूत को सहला रहा था, उसकी चूत के दाने को मसल रहा था।
उसकी चूत में उंगली करने लगा।
वो भी पूरे लगन से मेरे लंड को चूस रही थी।
उसकी मेहनत रंग लाई और मेरा लंड अपने पूरे विकराल आकार में आ गया।
रागिनी बोली, “अब रहा नहीं जाता, मेरी प्यास बुझा दो! डाल तो अपना लंड मेरी चूत में! भोसड़ा बना दो मेरी चूत का! चोद दो मुझे!”
मैंने रागिनी की चूत पर थुका और फिर उसकी टांग उठाकर अपने कंधों पर रखी और उसकी चूत पर रगड़ने लगा।
रागिनी तड़पने लगी, “क्यों तड़पा रहा है कुत्ते! डाल दे अपना लंड मेरी चूत में! मत तड़पा अब अपनी रंडी को!”
मैंने रागिनी की चूत में अपना लंड जोर से एक ही बार में पूरा घुसा दिया।
रागिनी चिल्लाने लगी, गालियां देने लगी, “बहनचोद, हरामी! फोकट की चूत समझ के चोद रहा है! फाड़ दी कुत्ते मेरी चूत! कुत्ते धीरे से डालने में क्या तेरी बहन चुद रही थी!”
मैं जोर-जोर से उसे चोदने लगा, रागिनी को गाली देने लगा, “ले मादरचोद अपने यार का लंड ले! बहन की लोड़ी! रंडी की औलाद! तुझे तो अपनी रखैल बना के रखूंगा कुतिया! तेरी बहन को चोदूं!”
रागिनी की भी मजा आने लगा, वो भी गांड उठाकर साथ देने लगी, अपने होंठ चबाने लगी, “क्या मस्त चोद रहा है! जोर से चोद कुत्ते! आहह! इतना मजा तो कभी नहीं आया! मुझे अपनी रखैल बना ले! मैं गुलामी करूंगी पूरी जिंदगी! और जोर से चोद!”
फिर मैंने उसे कुतिया बनाया और पीछे से उसकी चूत में लंड उतार दिया और उसके बाल पकड़कर चोदने लगा।
मैं लंड रागिनी की चूत के एकदम अंदर तक मरने लगा।
मैं उसकी गांड पर चपत लगाने लगा जोर-जोर से।
उसकी गांड एकदम लाल हो गई।
रागिनी का पूरा जिस्म कांपने लगा।
अब वो जोर-जोर से चीख रही थी, “राजा जोर-जोर से चोद! मैं आने वाली हूं! समा जा मुझे मेरे राजा! आह आह आह!”
और रागिनी झड़ गई।
उसकी चूत से बहुत सारा पानी निकल रहा था जो मेरे लंड और गोटों को भिगो रहा था।
उसकी गीली चूत के कारण फट-फट की आवाज आ रही थी।
“रागिनी मेरा भी निकलने वाला है, कहां निकालूं पानी?”
रागिनी बोली, “मेरी चूत में ही आ जाओ! मैं तुम्हारा पानी की गर्मी महसूस करना चाहती हूं! मेरी चूत को अपने पानी से तृप्त कर दो!”
मैंने जोर से चीखते हुए अपने पानी उसकी चूत में छोड़ दिया और उसके ऊपर लेट गया।
हम दोनों की सांसें तेज चल रही थीं।
फिर लंड उसकी चूत से निकल गया।
उसकी चूत से मेरा और उसका दोनों का पानी बह रहा था।
उसको उंगली से लेकर मैंने चाट लिया और थोड़ा रागिनी को भी चटाया।
थोड़ी देर आराम करके हम दोनों साथ में नहाए।
मैंने एक बार और बाथरूम में चुदाई की उसकी।
फिर वो वापस मिलने का वादा करके चली गई।
वापस हम कहां मिले और हमने क्या-क्या किया, अगली कहानी में बताऊंगा।
आशा करता हूं आप सब को मेरी कहानी पसंद आई होगी।
आपको मेरी ऑनलाइन फ्रेंड सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज बताएं।
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