लेडी टीचर सेक्स कहानी में मेरे पति डिप्रेशन में थे. मैं स्कूल टीचर हूँ तो एक साथी टीचर से दोस्ती हो गयी. एक दिन उसने मुझे अपने घर बुलाया. वहां क्या हुआ?
दोस्तो, मेरा नाम आँचल है, मैं 31 साल की शादीशुदा हूँ और गाज़ियाबाद में रहती हूँ।
हापुड़ में एक प्राइमरी स्कूल में टीचर हूँ।
यह लेडी टीचर सेक्स कहानी 2021 की है जब मेरे पति की जॉब चली गई थी और वो डिप्रेशन में थे।
मेरे स्कूल में दिनेश नाम का एक अच्छा दोस्त बन गया था जो कि लगभग फैमिली फ्रेंड ही था और मेरे पति से भी उसकी दोस्ती हो गई थी।
क्योंकि मैं अपने पति के डिप्रेशन की वजह से बुझी-बुझी सी रहती थी तो वो स्कूल में मेरा ध्यान रखने लगा और हमारी दोस्ती थोड़ी गहरी हो गई।
एक दिन दिनेश ने मुझे परिवार के साथ अपने चचेरे भाई की सगाई में इनवाइट किया।
मैंने कहा- मेरे पति नहीं आ पाएंगे तो मेरा आना भी मुश्किल है!
पर उसने काफी इंसिस्ट किया तो मैंने स्कूल से छुट्टी लेकर दिनेश के घर जाने का प्रोग्राम बना लिया।
मैंने उससे कहा- मैं सुबह 8 बजे आपके घर ही जाऊँगी और मुझे 4 बजे घर निकलना रहेगा क्योंकि मैं घर पर बिना बताए आ रही हूँ. घर पर सबको ये पता है कि मैं स्कूल ही गई हूँ।
सगाई के दिन जब मैं सुबह दिनेश के घर पहुँची तो घर पर उसके अलावा कोई नहीं था।
उसने मुझे बताया कि सगाई अब शाम की है और सब लोग लड़की वालों के यहाँ गए हैं, और वो भी मेरे साथ 2 बजे वहाँ चलेगा।
मैंने उससे मना कर दिया क्योंकि मुझे 4 बजे घर निकलना था।
उसने मुझे घर में अंदर बुला लिया और बोला, “आँचल आप टेंशन ना लो, मैं थोड़ा लेट सगाई में चला जाऊँगा। 4 बजे तक मैं आपके साथ में ही हूँ और फिर आप 4 बजे ओला बुक करके घर निकल जाना!”
हम साथ में सोफे पर बैठ गए और मैं अपने पति की जॉब के बारे में बात करने लगी।
थोड़ी देर बाद वो मेरी गर्दन और कंधे पर मेरे बालों को छूने लगा जिसको मैंने नज़रअंदाज़ किया।
उसकी उँगली जब मेरी गर्दन पर टच होती थी तो मुझे हल्की गुदगुदी हो रही थी और शायद मेरी हल्की हँसी ने उसे थोड़ा और मोटिवेट कर दिया।
मैं अपने बारे में बता दूँ, मैं साँवले कलर की हूँ।
मेरी हाइट 5.4 है और मेरी बॉडी स्लिम बिल्ड है।
मैंने एक हरे और लाल कलर का सूट पहना था।
दिनेश की हाइट मेरे से थोड़ी ही ज़्यादा होगी पर उसका शरीर गठीला था।
वो मेरे काफी पास आ गया था और वो मेरी जॉ लाइन को अपनी उंगलियों से टच कर रहा था।
उसने अचानक आगे बढ़कर मेरी गर्दन पर हल्का सा किस किया।
मैं उससे कुछ बोल नहीं पाई और वो मेरी गर्दन और होंठों को चूमने लगा।
मैं उसे सपोर्ट तो नहीं कर रही थी पर रोक भी नहीं पा रही थी।
वो कम से कम मुझे 15-20 मिनट तक चूमता रहा और मैं सब भूल गई और उसके होंठों को चूमने लगी।
मुझे चूमता देख शायद उसे थोड़ा साहस मिला और वो मेरे बूब्स को भी हल्के से दबाने लगा।
काफी देर चूमने के बाद उसने मुझे सोफे पर लिटा दिया और मेरा कमीज ऊपर करके मेरे पेट को चूमने लगा।
उसने अपना एक हाथ मेरे सूट में डाल दिया था और मेरी ब्रा के ऊपर से मेरे बूब्स को भी सहला रहा था।
थोड़ी देर के बाद उसने मुझे बैठाकर मेरा कुर्ता उतार दिया और मैं पहली बार अपने पति के अलावा किसी मर्द के सामने बस ब्रा में थी।
उसने अपनी शर्ट और जीन्स उतार दी और मैं उसके बॉक्सर में उसका खड़ा लंड देख रही थी।
दिनेश ने मेरी ब्रा उतार दी, मेरे दोनों बूब्स को मसलने लगा और मेरे निप्पल्स को चूसने लगा।
उसके होंठ कभी मेरे बूब्स पर होते, कभी मेरी गर्दन पर और कभी मेरे बूब्स के बीच में।
थोड़ी ही देर में मैं पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और मेरे हाथ ने उसके लंड को पकड़ लिया।
उसने तुरंत खड़ा होकर अपना बॉक्सर उतार दिया और मेरी सलवार भी उतार दी।
अब मैं लाल पैंटी में थी और दिनेश बिल्कुल नंगा।
दिनेश ने अपना लंड मेरे दोनों बूब्स को पकड़कर उनके बीच में रगड़ा।
दिनेश का लंड मेरे पति से काफी बड़ा था, मैं कहूँगी लगभग 7 इंच का होगा, पर इसका मोटापा लगभग मेरे पति के लंड के बराबर ही था।
दिनेश ने मुझे खड़ा करके मेरी पैंटी एक बार में उतार दी और मुझे लिटाकर अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया।
मैं इतनी गीली हो चुकी थी कि वो आराम से अंदर चला गया।
मैंने अपने दोनों पैर उठा लिए जिससे दिनेश पूरी तरह अंदर जा सके और उसने भी धीरे-धीरे झटके देना शुरू कर दिया।
अब दिनेश मेरे दोनों बूब्स को कसकर पकड़कर मुझे ज़ोर से झटके दे रहा था।
मुश्किल से 5-6 मिनट्स में ही वो अपना रिलीज़ कर चुका था।
रिलीज़ करते ही वो नीचे गया और मेरी चूत को चाटने लगा जो उसी के सीमन से भरी हुई थी।
मेरी चूत को मेरे पति ने भी कभी नहीं चाटा था।
मैं बता नहीं सकती कि मुझे कितना अच्छा लगा और मैं 2-3 बार झर गई।
जब मैंने उससे रोका तो वो होंठों पर किस करके बोला, “आँचल मैं तुम्हें पहले दिन से प्यार करता हूँ! तुम्हारी लंबी गर्दन, पतली कमर और तुम्हारे बूब्स मुझे बहुत ही अच्छे लगते हैं!”
मैंने उसे रोका और कहा, “दिनेश जो हुआ है वो बस हमारे बीच में है। आगे मुझे नहीं लगता मैं कोई रिलेशनशिप निभा पाऊँगी और फिर मैं मैरिड भी हूँ, पर आज के लिए मैं तुम्हारी हूँ!”
और फिर दिनेश मेरे बूब्स को किस करते हुए लेट गया।
लगभग 30 मिनट हम किस करते रहे और फिर दोनों साथ में नहाने चले गए।
नहाते हुए भी दिनेश मुझे नहीं छोड़ रहा था और मेरे पूरे शरीर को खुद ही साफ कर रहा था।
नहलाते हुए उसने कई बार मेरे बूब्स को किस किया और मेरे निप्पल्स को चूसा।
मेरी चूत को भी उसने अपने हाथों से साफ किया और काफी देर तक इसमें उँगली की।
मैंने भी दिनेश के लंड और उसकी बॉल्स को बहुत देर तक सहलाया और उसके लंड को किस भी किया।
दिनेश ने मेरे मुँह में अंदर तक लंड डालने की कोशिश की जो मैंने मना कर दिया और उससे चिढ़ाते हुए कहा, “तुम नीचे ही डाल दो पर इस बार मुझसे पहले मत झरना!”
मेरी बात सुनकर वो मुझे गोद में उठाकर अपने बेडरूम ले गया और बिस्तर पर पटक दिया।
उसने मेरे होंठों को किस किया और मेरे पैर ऊपर करके अपना लंड मेरे अंदर डाल दिया।
जाने क्यों इस बार मुझसे ऐसा लगा कि उसका साइज़ बहुत बड़ा हो गया है और ये मेरी चूत फाड़ देगा, और मैं हल्का-हल्का कराहने लगी।
मेरी हल्की चीख सुनकर दिनेश को जोश आ गया और वो रगड़कर मुझे चोदने लगा।
मैंने अपने पैर उसके कंधों पर रख लिए जिससे वो पूरी तरह अंदर जा पाए।
दिनेश ने अपना पूरा वजन मुझ पर डाल दिया और वो पूरी तरह मेरे अंदर था और मुझे बुरी तरह रगड़ रहा था।
ना जाने उसके पास इतनी ताकत कैसे आ गई? मेरे पति तो मुझे दिन में एक बार ही चोद पाते हैं।
अब दिनेश ने अपनी स्पीड बढ़ा दी थी और मुझे बहुत ज़ोर से झटके दे रहा था, और मेरी चीखों की आवाज़ तेज़ हो रही थी।
मुझे लगने लगा कि मैं झरने वाली हूँ और मैंने उससे बताया।
ये सुनकर उसने मेरे बूब्स कसकर पकड़ लिए और 8-10 झटके बहुत ज़ोर से दिए और मैं झर गई।
पर दिनेश बोला, “वो तो अभी शुरू हुआ है!”
फिर हमने पोजीशन बदली।
उसने मुझे घोड़ी बनाकर फिर से रगड़ना शुरू कर दिया।
एक हाथ से उसने दोनों बूब्स कसकर पकड़े हुए थे और दूसरे हाथ से वो मेरे बाल ज़ोर से खींच रहा था।
कभी-कभी मेरे निप्पल को चुटकी भी मार रहा था पर ये दर्द उसके चोदने की खुशी से बहुत कम था।
कभी धीरे कभी तेज़ दिनेश मुझे घोड़ी बनाकर 15-20 मिनट्स तक चोदता रहा और मैं एक बार और झर गई।
मैंने उससे थोड़ी देर रुकने को बोला।
दिनेश बोला, “आँचल अब रुकना बहुत मुश्किल है!”
जिस पर मैंने उससे कहा, “थोड़ी देर रुक जाओ, दर्द होने लगा है। मैं इतनी देर चूस लूँगी!”
दिनेश ने लंड निकालकर पहले मेरे बूब्स के बीच में रगड़ा और फिर मेरे मुँह में डाल दिया।
पता नहीं क्यों ये पहली बार से काफी बड़ा और मोटा हो गया था पर मैंने थोड़ी देर उसका लंड चूसा और उसकी बॉल्स को भी किस किया।
पर वो मेरे मुँह में भी नहीं आ रहा था, मेरी हलक को टच करने लगा जिसके कारण मैंने बाहर निकाल लिया और दिनेश से कहा, “अब तुम मुझे सैटिस्फाई कर दो!”
और दिनेश मेरे टाँगें उठाकर फिर से मेरे अंदर आ गया।
इस बार उसने धीरे और गहरे झटके मारने शुरू किए और अपने दोनों हाथों से मेरे बूब्स बहुत ज़ोर से मसलने शुरू कर दिए।
मैं दर्द में चीखने लगी और उसने झटके और तेज़ बहुत तेज़ कर दिए।
इस बार हम दोनों ने साथ में ही रिलीज़ किया।
ये मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा सेक्स था।
लगभग 2 बज चुके थे।
दिनेश और मैंने अपने कपड़े पहन लिए और खाना खाने के बाद साथ में बैठ गए और बात करने लगे।
दिनेश मुझे हल्का-हल्का किस कर रहा था और मेरे बूब्स टच कर रहा था।
मैं भी उसके बॉक्सर के ऊपर से उसका लंड सहला रही थी।
थोड़ी देर में दिनेश ने मुझे कहा, “आँचल पता नहीं हम फिर कभी ऐसे मिलेंगे या नहीं। मैं चाहता हूँ कि तुम एक बार मेरा लंड चूसो और इससे पी लो!”
उसका लंड अभी थोड़ा छोटा हो चुका था और मेरा भी उससे खेलने का मन था।
मैंने अपने पति का मुँह में तो लिया था पर कभी पिया नहीं था।
फिर भी मैंने उसका बॉक्सर उतारकर लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
उसने मेरे एक हाथ में अपनी बॉल्स पकड़ा दी और उन्हें दबाने को कहा।
धीरे-धीरे लंड बड़ा हो गया और मैंने और ज़ोर से चूसने लगी।
4-5 मिनट में उसने मेरे मुँह में रिलीज़ कर दिया जो मेरे सीधे हलक से नीचे उतर गया।
जिसके बाद मैंने कैब बुक कर दी और घर आ गई।
ये मेरा पहला एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर था और मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा सेक्स।
पर जब मैं घर पहुँची अपने पति को देखकर मुझे बहुत गिल्ट फील हुआ और मैंने दिनेश से कभी ना मिलने की कसम खा ली।
मेरे मन में है कि मेरे पति मुझे कभी इतना सैटिस्फाई करें और मेरी चूत को दिनेश की तरह रगड़ दें।
उम्मीद है आपको ये लेडी टीचर सेक्स कहानी अच्छी लगी होगी।
मुझसे बात करने के लिए मेल डालें।
आपकी टीचर आँचल
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