हॉट भाभी Xex कहानी में मैं गर्लफ्रेंड की भाभी के घर गया तो वहां देखा कि भाभी अपने ससुर के एक दोस्त से चुद रही थी. मैं पहले से ही उसे चोदना चाहता था.
ये बात तब की है जब मैंने अपनी गर्लफ्रेंड की सगी भाभी को चोद दिया क्योंकि उनको मैंने चुदते पकड़ लिया था और ये बात आज तक पारुल को नहीं पता, जो अब भी मेरी गर्लफ्रेंड है।
एक बार पारुल की भाभी, उसके बड़े भाई की पत्नी, उससे मिलने आईं और पारुल को 2-3 दिन के लिए उसी बीच ऑफिशियल ट्रिप से अर्जेंट बाहर जाना पड़ा।
पारुल ने उतने दिन मुझे अपनी भाभी सुरुचि की देखभाल करने को कहा।
सुरुचि 32-33 साल की मस्त गदराई जवानी थी।
उन्होंने खुद को मेंटेन किया हुआ था।
पतली कमर, खरबूजे जितनी बड़ी चुचियाँ, मादक गाँड।
मतलब उनका फिगर 34-30-36 होगा।
बहुत ही गरम चूत थी भाभी की।
उनकी मखमली चूत का स्वाद आज भी याद करके लंड अंगड़ाई लेने लगता है।
पारुल के जाने के बाद मैं उसके फ्लैट पर रुक गया और वहीं से ऑफिस और कोर्ट का काम करने के लिए जाता था।
एक दिन मैं जल्दी घर आ गया तो देखा मेन गेट बंद नहीं है।
मैं जब अंदर आया, मुझे सुरुचि भाभी के मादक चीखने की आवाज़ सुनाई दी।
मैं दबे पाँव बेडरूम की तरफ गया तो देखा एक 50-55 साल का आदमी सुरुचि भाभी के ऊपर चढ़ा हुआ है और उनके मुँह में लंड पेल-पेल के उनके मुँह को चोद रहा है और भाभी मस्त होकर लौड़ा पूरा निगल रही हैं।
थोड़ी देर बाद उस अंकल ने भाभी को लिटा के उनकी टाँगों को चौड़ा कर दिया और उनकी चूत चाटने लगा।
फिर सुरुचि भाभी को उठा के अपनी गोद में अपने लौड़े पर बिठा लिया और सुरुचि भाभी की कमर पकड़ के नीचे से चूत में लंड ठोकने लगा।
सुरुचि भाभी की दूध सी सफ़ेद चुचियाँ पीने लगा और बोला, “बहू, तेरी माँ भी चोद रखी है डार्लिंग, साली को तेरी शादी के दिन घोड़ी बना दिया था। तेरी चूत कब से मारना चाह रहा था, मौका नहीं मिल रहा था। जब पता लगा तू पारुल के पास आई है तब ही सोच लिया था तुझे बिना चोदे नहीं जाने दूँगा। पारुल बेटी बोल के गई है भाभी का ख्याल रखना, तो डार्लिंग तेरा ख्याल तो रखना पड़ेगा ना!”
ये बोल के उसने सुरुचि भाभी को उठा के बेड पर पटक दिया और उसकी जाँघों को बूब्स पर दबा के दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख के उनकी चूत फाड़ने लगा।
बुड्ढे में दम था, भाभी उसको झेल नहीं पा रही थीं।
अब मेरे अंदर बुड्ढे की पहचान जानने की उत्सुकता जग गई कि कौन है ये मादरचोद जो भाभी की माँ भी चोद चुका और अब बेटी ठोक रहा है।
उसकी शक्ल जब दिखी तो मेरे होश उड़ गए।
वो पारुल मेरी गर्लफ्रेंड के पापा का जिगरी यार सुखविंदर था।
जो एकदम पारुल और उसके भाई को अपना बेटा-बेटी मानता था और अब अपनी मुँहबोली बहू को रंडी की तरह बजा रहा है।
उसने भाभी को ठोक-ठोक के थका दिया और उसकी चूत में पूरा माल छोड़ के बोला, “बहू, तेरी मस्त चूत का इनाम है मेरा वीर्य तेरी चूत में!”
हॉट भाभी Xex चुदाई देखने के बाद अब मैं चुपचाप घर से बाहर आया और आकर बेल बजाई।
10 मिनट बाद गेट खुला और भाभी मेरे सामने थीं, बोलीं, “अजय, बड़ी जल्दी आ गए!”
मैं बोला, “हाँ भाभी, आपकी याद आ रही थी!”
और हँस के आँख मारी।
मुझे देख के सुखविंदर अंकल बोले, “और बेटा, कैसा है तू? कैसा चल रहा तेरा काम? तू तो आता ही नहीं है, तेरी आंटी बहुत याद करती है, आ जा कभी घर।”
मैंने हाँ बोला और भाभी को चाय बनाने को कहा और सुखविंदर से बातें करने लगा।
उसको भनक भी नहीं लगने दी कि मैंने देख लिया है सुरुचि भाभी की चुदाई उसके साथ।
सुखविंदर इतना मादरचोद था, मुझे बोला, “तुम फ्रेश हो लो, मुझे कुछ बात करनी है सुरुचि से अकेले में।”
और रूम में ले गया और रूम लॉक कर दिया।
लेकिन वो भूल गया वो पारुल का फ्लैट है।
मुझे उसके कमरे में झाँकने की सारी ट्रिक पता है।
मैं बगल वाले रूम से पारुल की बालकनी में चला गया जहाँ उसकी खिड़की की दरार से रूम का सारा नज़ारा दीखता है।
सुखविंदर ने भाभी की गाँड मारने के प्लानिंग से रूम में ले गया था।
सुरुचि भाभी उसको मना कर रही थीं कि मैं बाहर हूँ, लेकिन वो सुनाने को तैयार नहीं था।
उसने सुरुचि भाभी का मुँह हाथ से दबा लिया और घोड़ी बना के उनकी गाँड में लौड़ा उतार के उनकी गाँड मारने लगा और 20 मिनट तक उसने भाभी की गाँड मार के उनको रुला दिया और अपना लौड़ा उनके मुँह में ठूंस के पूरा माल उनको पिला दिया और खुद को सही करके रूम के बाहर आ गया।
मैं भी आकर बाहर हॉल में बैठ गया।
उसके आने के 10 मिनट बाद भाभी आईं और उनके चेहरे पर दर्द साफ़ झलक रहा था और सुखविंदर चौड़े में बैठा था।
थोड़ी देर बाद, “बहू, फिर मिलते हैं!”
बोल के चला गया।
दूसरी चुदाई ने भाभी को रंडी वाली फील दे दी थी और वो दुखी थीं।
अब मैंने भी खुल के बात करने की सोची और बोला, “भाभी, इस मादरचोद से क्यों चुद रही हो आप?”
भाभी चौंक गईं।
मैं बोला, “मैंने आपकी दोनों चुदाई देखी हैं। मैंने देखा कैसे सुखविंदर आपको चोद के अपनी हवस मिटा रहा था।”
भाभी ने बोला, “छोड़ो, बस किसी को बताना मत, पारुल को भी नहीं।”
हम दोनों सोफे में बैठे थे।
भाभी थोड़ी देर में अपने रूम में चली गईं।
मैं बाहर बैठा रहा।
थोड़ी देर बाद मैं कमरे में घुसा।
भाभी सो रही थीं।
मैं उनके बगल में जाके लेट गया और उनकी गाँड पर प्यार से हाथ फेरने लगा।
भाभी मस्त हो के अपनी गाँड दबवाने लगीं।
मैं अब उनके बदन से खेलने लगा और 5 मिनट में भाभी को पूरा नंगा कर दिया।
मैं सुरुचि की चुची को दबा के पीने लगा।
मैंने हाथों से उसकी चूत की मालिश करके उसकी चूत पूरी गीली कर दी।
सुरुचि आहें भरने लगीं।
मस्त सिसकारियाँ लेते हुए बोलीं, “साले, तुझे तो मैं सीधा समझती थी। मादरचोद निकला तू!”
मैं बोला, “सुखविंदर से अगर तुझे चुदते नहीं देखा होता तब भी तुझे चोदता भाभी। बस थोड़ा टाइम लगता। अभी बिना मेहनत के तेरी चूत मिल गई। अब तुझे पारुल के आने तक चोदूँगा।”
अब मैंने उसको दोनों टाँगें खोल के चूत पर लंड लगाया और सुरुचि को चोदने लगा।
सुरुचि लंड ले के मस्तिया गईं और मस्त हो के चुदने लगीं।
वो मेरी छाती पर हाथ रख मुझसे बोलीं, “लंड तो तगड़ा है आपका अजय जी। पारुल के तो मज़े हैं। रोज़ तुम्हारा लंड लेती है।”
मैंने सुरुचि को रस्सी की तरह ऐंठ के उसकी चूत की पोज़िशन बदली और उसकी चूत को बजाने लगा और बोला, “पारुल पारुल है, उसको पता है कैसे मुझे हैंडल करना है।”
ये बोल के मैंने सुरुचि की चूत में रेलगाड़ी चला दी और सुरुचि 10 मिनट में झड़ गईं।
2-3 मिनट मैंने उसको और चोदा और फिर लेट गया।
सुरुचि को बोला, “चूसो।”
सुरुचि प्यार से लंड चूसने लगीं और बोलीं, “तुम्हारे चोदने का तरीका बता रहा, सिर्फ़ पारुल से भूख तो तुम्हारी नहीं मिटती होगी।”
अब मैंने उसको उठा के घुमाया और लंड पर बिठा के उसकी पीठ को जीभ से चाटा और उसको बेड पर गिरा के उसको पीछे से कब्ज़े में ले लिया।
घोड़े की तरह अब मैं सुरुचि को दौड़ाने लगा और बोला, “तेरी चूत में मेरा लंड है, तुझे अभी डाउट है कि बस पारुल ही मेरी भूख है?”
सुरुचि को हिला दिया चोद के मैंने।
वो हाँफने लगीं और बोलीं, “अजय, मस्त चोदता है तू!”
अब मैंने सुरुचि को मेढक बना पीछे से लंड पेला और ज़ोर का एक झटका दिया।
पूरा 8 इंच का लंड उसकी गाँड फाड़ के अंदर था।
भाभी पूरा लंड हल्की ही तकलीफ़ में झेल गईं।
अब मैंने एक और झटका मार लंड को सेटल किया और उसकी गाँड सहला-सहला चोदने लगा।
सुरुचि को मैंने चोद-चोद के थका दिया और बोला, “भाभी, कमाल चूत है। मन कर रहा चोदता रहूँ।”
वो बोलीं, “अब थक गई हूँ। प्लीज़ जल्दी करो।”
सुरुचि को खड़ा कर मैंने बेड पर झुका दिया और एक पैर बेड पर रख लंड को चूत पर लगाया और सुरुचि को चढ़ के चोदने लगा।
उसके चिल्लाने की आवाज़ पूरे घर में गूँज रही थी।
सुरुचि और मैं एक साथ झड़े और एक-दूसरे से चिपके थोड़ी देर पड़े रहे।
पारुल के वापस आने तक मैंने सुरुचि को अपने फ्लैट ले जाके खूब चोदा।
उसके बाद सुरुचि मुझसे खूब ठुकी।
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