आंटी सेक्स कहानी में मुझे भाभियों और चाचियों को चोदने में मजा आता था. बाहर से पढ़ाई पूरी करके मैं गाँव आया तो घर के पास वाली विधवा चाची को चोदने की इच्छा बलवती हुई.
दोस्तो, मैं राज हुड्डा रोहतक से हाजिर हूँ अपनी एक नई कहानी लेकर!
लेकिन यह कहानी लिखने से पहले मैं फिर गुजारिश करता हूँ कोई मेरी किसी भी दोस्त की चूत दिलवाने या मिलवाने के लिए मेल ना करे।
और हाँ मैं कोई झूठी स्टोरी नहीं लिखता हूँ. ना ही इतना समय है कि झूठी कहानी बनाता रहूँ।
तो यह आंटी सेक्स कहानी इसी साल की अक्तूबर की है.
मैं रोहतक के पास ही के गांव से हूँ तो मैं रोहतक आई एम टी में एक कम्पनी में एक हेल्पर की नौकरी करने लगा और पास के ही गांव में किराये पर रहने लगा.
मेरा रूम ऊपर था।
मेरे रूम के सामने एक मकान था जिसमें एक औरत रेखा ( बदला हुआ नाम) उसके 20 साल का बेटा रहते हैं.
उनकी एक लड़की है, जिसकी शादी हो चुकी थी।
रेखा को मैं चाची कहता हूँ।
चाची का पति 2017 में बीमार होकर गुजर गये थे।
मेरे रूम और चाची के घर के बीच में बस आठ फुट की गली है.
मेरे रूम के नीचे भी किरायेदार रहते हैं।
चाची को मैं बालकनी से देखता था कभी कभी।
मन में कुछ खास नहीं था चाची के लिए तब तक!
मुझे शादीशुदा भाभी और आंटी पसंद हैं। लड़कियों की तरफ मैं ध्यान नहीं देता. बहुत समय लगता है उनको पटाने में और मिलने का समय भी बहुत कम निकालती हैं.
ऊपर से कसमें वादे करने अलग से।
भाभियों और आंटियों को पता होता है कि लड़कों को बस चूत चाहिये।
3 महीने हो गये थे मुझे वहाँ रहते. चाची का लड़का दिल्ली में पढ़ता है और शनिवार को शाम को घर आता है और सोमवार को सुबह जल्दी चला जाता है।
रेखा चाची से मैं कभी-कभी बात कर लेता था लेकिन आगे से वो पहले कभी बात नहीं करती।
रेखा चाची साधारण सी महिला है 50 साल के करीब होंगी.
ढीले चूचे, बस गांड थोड़ी चौड़ी और कुछ सफेद बाल हो गये हैं।
भाभी और आंटी मेरी कमजोरी हैं.
मुझे अब रेखा आंटी को चोदना था.
शाम को वो रोज घूमने जाती है कभी अकेली कभी कोई गांव की महिला मिल जाती.
उनके पास आधा एकड़ जमीन थी तो वो किसी भी टाइम कभी दोपहर को कभी शाम को खेत में भी चली जाती थी।
अब बस मन में ठान लिया था कि चाची को चोदना है.
सोचता था अकेली रहती है इनके घर में रोज चोदूँगा, किसी का डर नहीं होगा.
चूत और गांड जब मन चाहेगा चोदूँगा.
तो मैं प्लान बनाने लगा।
चाची जब घुमने जाती तो मैं कभी कभी पीछे चला जाता.
आगे पीछे देख कर कभी धीरे-धीरे बोल देता- रेखा डार्लिंग दे दे न!
पर वो चुपचाप चलती रहती.
कभी आमना सामना होता तो वो तिरछी नजर से मेरे लंड की तरफ देखती.
मैं सोचता मन में तो इसके बारे में.
कभी रात को उठकर बालकनी में खड़ा होकर देखता चाची को।
अब बस चाची को याद करके मुठ मारता.
कहते हैं ना जो ना मिले, लंड उसके लिए पागल हो जाता है.
अब बस मुझे चाची की चूत दिख रही थी जब भी उठता बैठता।
अब सोच लिया पहल करके देख! बहुत हो लिया.
कुछ बात बिगड़ी तो झोला उठा के भाग जाऊंगा.
मैंने 10 दिन की छुट्टी ले ली।
अब जहाँ चाची जाती, कुछ देर बाद उसके पीछे मैं चला जाता.
मैं रूम से बस चाची को ही देखता कि क्या कर रही है.
मैंने देखा सुबह 11 वो घर से बाहर जा रही है.
तो 5 मिनट बाद मैं भी रूम से निकल गया ताकि आस पास वालों को शक ना हो।
मैंने देखा कि चाची अपने खेत में धान देखने जा रही है.
तो मैं भी थोड़ा गैप करके चलता रहा.
दाएं बायें देखता रहताकी कोई देख तो नहीं रहा,
मैंने झूठे ही कान में फोन लगा लिया।
खेतों में कोई नहीं था.
चाची ने मुड़कर देखा तो 100 मीटर पीछे मैं दिखा.
फिर वो चलती, फिर मुड़कर मुझे देखती.
शायद पेशाब करना था उन्हें.
और मेरा लंड खड़ा हो रहा था यह सोचकर कि खेत में हम दो हैं बस!
फिर मैं रुक गया और मुंह फेर कर फोन पे वैसे ही बोलने लगा.
फिर देखा कि चाची पेशाब करने बैठ गयी।
तब मैं उन्हें देखता फिर मुंह फेर लेता।
उनके उठते समय मैंने मुंह उनकी तरफ कर लिया तो उनके सावंले चूतड़ दिख गए।
मेरा लंड खड़ा था, मैं तेजी से चाची की तरफ गया.
वो अपने खेत के पास खड़ी धान को देठ रही थी कभी मेरी तरफ।
मैंने लंड बाहर निकाल लिया.
उनकी और मेरी दूरी बस 10-12 फुट की रह गयी.
उन्होंने मेरा लंड देखा पर कुछ नहीं बोली.
फिर मैंने चारों ओर देखा, फिर उनके सामने लंड हिलाने लगा.
वो लंड को देखती कभी खेत को!
मैं और पास पहुंच गया और कहा- चाची, मैं बहुत प्यार करूं हूँ तेरे त।
वो एकदम तेज बोली- के चाव है तु बहूत दिन त देख रही हूँ कुछ कमा खा ले।
मैं लंड हिलाता बोला- चाची, मेरा लंड तेरा दिवाना हो रहा है.
और मैं लंड हिलाता रहा.
वह बस देखती रही.
लंड ने पानी फेंक दिया।
बस इतने में चाची ने मेरे मुंह पर थप्पड़ दिया और बोली- आखरी बार समझाऊं हूँ, दुर रहना मेरे त. ना तो पिट के जागा यहा त हरामी कुत्ते बेशर्म!
चची ने बहुत गाली दी.
वो तो सही हुआ कि कोई आप पास नहीं था.
नहीं तो पिटना पक्का था.
मैं चुपचाप रूम पर आ गया।
अब तो मैंने रेखा चाची को देखना बंद कर दिया.
कभी दिख जाती तो वो घूर कर देखती, मैं चुपचाप कमरे में घुस जाता.
7 दिन हो गए थे, बस 3 दिन और रह गए छुट्टी के!
सोचा चूत मिली ना … सैलरी भी कम आवगी।
कहते है ना लक्ष्य पर ध्यान रखो तो मिल जाता है.
मेरे मन में गुस्सा बढ़ रहा था.
सोचा कपड़े पैक कर और चाची अगर खेत मैं जाती है तो वहाँ देख फिर कोशिश करके!
नहीं मानी तो बैग उठा कर चल देना वहाँ से।
बस यही सोच रहा था कि चाची की आवाज आयी- राज के करे है? एक बार मेरी साथ पी जी आई मैं चाल रोहतक. लड़की की ननद को बच्चा होने वाला है, मिलकर आना है. मेरी बेटी का फोन आया है. हमारी बाइक ले चल!
मैंने कहा- ठीक है.
और चुपचाप उनकी बाइक निकाली और उन्हें पी जी आई रोहतक ले गया.
वो भी कुछ नहीं बोली जाते समय।
उनकी बेटी की ननद को लड़का हुआ.
टाइम हो गया शाम के 6 बजे का … तो रेखा चाची उनसे मिली, खाने की पूछ कर मुझे बोली- चल इब घर चालते है.
मैंने चुपचाप बाइक चलती की.
चाची मेडिकल मोड़ तक कुछ नहीं बोली।
फिर बोली- तनै उस दिन कती शर्म ना आई? के हरकत थी तेरी।
मैं कुछ ना बोला.
फिर बोली- मेरी उम्र त देखता के सोचा कि लंड देखते ही रेखा तो वहीं नंगी हो जागी लंड लेने ताहि।
मेरा लंड खड़ा होने लगा.
मैं बोला- चाची, प्यार मैं उम्र ना देखते लंड न छेद चाहिए और चूत न लंड!
चाची बोली- बहोत बोल्लै है.
मैं बस इतना ही बोला- देनी हो त दे दे ना तो भाषण मत दे।
चाची हंस पड़ी और बोली- किसे त मत बताना ना तो बदनामी हो जागी. ज आज तन्ने पुरा मजा दे दिया तो तेरा जी करे जितना चोद लिये. अर ज मन्ने पुरा मजा ना आया तो आगे दिखये भी मतना।
मैंने कहा- ठीक है आज रात को गेट खुला रखना 9 बजे आ जाऊंगा।
फिर चाची ने हाँ कहा.
हम घर आ गये.
मैंने बाइक खड़ी की उनके घर और रूम में आ गया।
लंड तो बैठ ही ना रहा था तो चाची की चूत गांड की सोच सोच के मुठ मार दी।
फिर 9 बजे में गली में गया तो बाहर कोई नहीं था.
मैं गेट खोलकर चाची के घर आ गया.
चाची नहा धोकर लेट रही थी.
मुझे देखा तो हंस कर बोली- लंड न रूकने ना दिया. कती टाइम प आया है। मैं गेट बंद कर आऊ!
चाची गेट बंद करने गई और पेशाब करके आ गई।
और आते ही मुझे बेड प गिरा कर मेरे ऊपर आ गई और हम एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे।
थोड़ी देर में मैंने चाची को बेड पर गिरा दिया.
अब वो नीचे मैं ऊपर.
और मैंने उसके कपड़े निकाल दिये और अपने भी.
अब चाची के ऊपर मैं उनके होंठों को चूसने लगा.
हमारी जीभ मिल गई आपस में … और लंड नीचे चूत के पास टक्कर मार रहा था।
फिर मैंने उनकी एक चूची को मुंह में भर लिया और एक हाथ से उनकी चूत को सहलाने लगा।
चूत पर हाथ लगते ही चाची ने चूतड़ ऊपर कर लिए।
मैंने एक उंगली डाली तो चाची ने दर्द भरी सिसकारी निकाली- आई ईई आहहह!
और लम्बी सांस लेकर बोली- 8 साल से कुछ नहीं किया ना. इसलिए दर्द हो रहा है!
मैं बोला- रेखा जानेमन, अब मजा लो।
और मैंने नीचे होकर चूत में जीभ लगा दी.
बस फिर क्या था … चाची की मजे वाली आवाज निकली- ये के कर रहा है? आह हह हमने त कदे ना बेरा थी चूत भी चुसा करे. तेरे चाचा न कदे ना करा यो काम!
मैं चूसता रहा और जीभ चूत के अन्दर बाहर करने लगा.
चाची चूतड़ ऊपर उठाने लगी और एक लम्बी सिसकारी ली- आहह हहह गई आह … हहह हह सी … सीसी … सीआहह।
और मेरे मुंह में चाची की चूत का पानी आ गया.
तो मैंने मुंह हटा लिया।
चाची मेरी तरफ देख कर बोली- कित त सीखा यो? पागल कर दी तन्ने तो!
मैं बोला- अब मेरा लंड चूस लो।
वे बोली- ना कती ना … मैंने कदै ना चुसा. ना मनै आता।
मैं कुछ ना बोला और चाची की चूचियों को चूसने लगा बारी बारी से!
चाची फिर गर्म होने लगी और मुझे बांहों में भर लिया।
अब मैंने सोचा कि चोद ले इब!
तो मैं उठा और चाची को बेड के किनारे ले आया ओर लंड को चूत पर लगाया.
कि चाची ने लम्बी सांस ली और खुद को ढीला छोड़ दिया।
मैंने धीरे- धीरे लंड का टोपा चाची की चूत में घुसा दिया.
चाची को दर्द हुआ लेकिन बोली कुछ नहीं।
मैं चाची की चुची दबाने लगा और एक तेज झटका मारा, लंड आधा अंदर गया।
चाची ने मुंह भींच रखा था.
मैं रूका.
चाची बोली- गांड पाड़ गा के? 8 साल से ना चुदी हूँ आराम त कर।
मैं लंड को थोड़ा थोड़ा आगे पीछे करने लगा.
चाची अब लंड को अन्दर लेने की कोशिश करने लगी।
मैंने कहा- चाची अब तैयार हो जा, पूरा जाऐगा अब!
चाचा बोली- बाड़ दे।
मैंने चाची की चूची पकड़ ली और एक तेजी त झटका मारा.
लंड पूरा फिट और मैंने चाची के होंठा त होंठ मिला लिए।
अब मैं झटके मारने लगा और आंटी सेक्स कहानी आगे बढ़ने लगी.
चाची ने मुझे बांहों भर लिया.
5 मिनट में ही चाची चूतड़ ऊपर करने लगी।
चाची बोली- तू नीचै पड़ … मैं ऊपर आऊंगी.
मैं बेड पर लेट गया और चाची मेरे लंड पर बैठकर उछलने लगी।
चाची तेजी से उछलने लगी ओर ‘आहह हह आह हह’ करने लगी.
मैं दोनों हाथों से उनकी चूची दबा रहा था।
चाची ने फिर तेजी से सिसकारी भरी- आह हह आहहह गई मैं तो!
और वहीं रूक गई और मेरे ऊपर लेट गई।
मैं नीचे से झटके मारने लगा।
चाची बोली- रूक जा थोड़ी देर … बुड्ढी हो रही हूँ मैं … इतनी जान ना है.
मैं बोला- मेरा भी निकालने दो. थोड़ी हिम्मत करो और कुतिया बन जाओ. पीछे से करूंगा।
वो उठी और बेड पर मुंह रख कर गांड ऊपर उठा ली.
मैं अब पीछे से चोदने लगा।
जैसे ही छुटने को होता, मैं रूक जाता और लम्बी सांस लेने लगता.
3-4 मिनट हो गए।
चाची बोली- छोड़ दे इब! कती कंडम करेगा के?
ये सुनते ही मैं तेज झटके मारने लगा और 20-25 झटकों में चाची की चूत भर दी।
चाची वैसे के वैसे लम्बी लेट गई।
कहानी यही खत्म करता हूँ दोस्तो!
अब भी मैं चाची को चोदता हूँ अब वो पूरा साथ देती है, गांड भी मरवाती है।
आंटी सेक्स कहानी कैसी लगी?
मुझे मेल करना कहानी के बारे में!
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