Xxx भाभी Sexx कहानी में मेरे दोस्त की मकान मालकिन मस्त माल थी. मैंने दोस्त से पूछा तो उसने बताया कि भाभी बहुत गर्म है, कोशिश करो तो पट जायेगी.
दोस्तो, मेरा नाम समीर है और मैं भरतपुर से हूँ.
मेरी उम्र 27 साल की है. मेरे लंड का साईज इतना है कि मैं किसी भी प्यासी लड़की को पूर्ण सन्तुष्ट कर सकता हूँ.
मुझे चूत चाटने और लंड चुसवाने का भी बड़ा शौक है.
मैं आज आपके लिए एक नई और सच्ची सेक्स कहानी के साथ हाजिर हूँ.
यह Xxx भाभी Sexx कहानी मेरे दोस्त की मकान-मालकिन भाभी की है.
वैसे दोस्तो, मुझे भाभियों में बहुत ज्यादा लगाव है इसलिए मैं अपने सुख के लिए ज्यादातर भाभियां ही देखता हूं.
एक दफा मैं अपने काम से अलवर गया हुआ था और उधर मैं अपने एक दोस्त के पास रुक गया था.
रात को हम दोनों बैठ कर हंसी मजाक कर रहे थे.
तभी मुझे कुछ याद आया और मैं अपने दोस्त से बोला- यार, तेरी मकान मालकिन भाभी तो बहुत मस्त माल हैं. क्या नाम है उनका?
वह मुझसे बोला- उनका नाम ममता है. और यार सुनो न भाभी को जॉब की जरूरत है, वे मुझसे इस बात को कई बार बोल चुकी हैं.
मैंने अपने दोस्त को देखा और कहा- अच्छा तेरी उनसे इतनी ज्यादा जमने लगी है क्या कि वे तुझसे जॉब की बात कर रही हैं!
दोस्त मेरी बात का मतलब समझ गया और बोला- हां यार, वे मेरे साथ सेक्स के लिए रेडी तो हैं लेकिन मैं अपनी गर्लफ्रेंड को धोखा नहीं दे सकता हूँ.
मैंने कहा- भाभी का पति किसी काम का नहीं है क्या?
वह बोला- हां शायद … वह कुछ काम भी खास नहीं करता है इसलिए उन्हें जॉब की जरूरत है!
यह सब सुनकर मैंने भी फट से हां बोलते हुए कह दिया- अरे जॉब क्या बड़ी बात है, मैं सब व्यवस्था कर दूंगा! बस भाभी मुझे जरा बिस्तर में सहयोग करें तो …
वह बोला- मैं यह सब उनसे नहीं कह सकता … हां तू चाहे तो उन्हें सैट कर ले, मुझे कोई आपत्ति नहीं है.
मैंने हां कर दी.
अगले दिन सुबह मुझे जल्दी निकलना था तो मैं अपने शहर वापस आ गया.
बाद में मेरे पास मेरे दोस्त का कॉल आया और उसने भाभी की जॉब को लेकर बात दोहराई.
मैंने कहा- हां मुझे याद है, बस एक बार भाभी से जरा समझना है कि वे किस तरह की जॉब चाहती हैं!
उस वक्त भाभी मेरे दोस्त के पास ही थीं तो उसने भाभी से मेरी बात करवा दी.
मैंने भाभी से बात करके समझा और उनको बोल दिया कि मैंने अपने एक दोस्त से बात की थी, तो वह बोल रहा था कि आपको अलवर में ही जॉब दिला देगा.
इस बात को सुनकर भाभी ने कहा- आप प्लीज मेरा काम करवा दो, मैं आपका अहसान नहीं भूलूँगी. आप जो बोलोगे मैं वह सब करूंगी!
मैंने कहा- अरे भाभी आप परेशान न हों, मैं खुद ही आपसे सब कुछ ले लूँगा.
यह सुनकर वे हंस दीं.
इतनी बातचीत से ही मामला काफी कुछ सैट हो गया था.
शाम को भाभी का फिर से कॉल आया.
उस टाइम ममता भाभी और मेरा दोस्त दोनों पास में ही थे तो उसने भाभी से बात करा दी.
मैंने भाभी से नमस्ते की और उनसे जॉब की बात स्टार्ट कर दी.
मैंने बोला- भाभी जी, मैं आपको कॉल करके बताता हूँ.
भाभी जी ने बोला- आपका नंबर?
मैंने बोला- मेरे दोस्त से ले लेना … ओके!
मॉर्निग मैं भाभी का कॉल आया तो हम दोनों काफी देर तक बात करते रहे.
ऐसे ही 8 दिन निकल गए.
इतने दिनों मैं हम दोनों काफी अच्छे से घुल मिल गए थे और खूब खुल कर हंसी मजाक करने लगे थे.
मैं अब फ़ोन कॉल पर ही भाभी से अश्लील मजाक भी करने लगा था.
भाभी भी मेरे इशारे समझ रही थीं, पर उनके मन में कोई गांठ थी.
एक दिन वे मुझसे मेरी जीएफ के बारे में पूछने लगीं.
तो मैंने भी बोल दिया- पहले थी, पर इस टाइम एक भी नहीं है.
भाभी ने चुटकी लेते हुए कहा- तो अब कैसे रहते हो बिना गर्लफ्रेंड के?
मैंने भी हंस कर बोल दिया- भाभी, मन तो बहुत करता है, पर क्या करूं … दूसरी कोई पटी ही नहीं है और आप मेरे बारे में कुछ सोचती ही नहीं हो!
इसी तरह की बातचीत चलती रही और फरवरी का महीना आ गया.
उस दिन रोज डे था, तो मैंने सोचा कि रोज डे का कुछ लाभ उठाया जाए.
मैंने यही सोच कर वाट्सएप पर हैप्पी रोज डे का मैसेज किया.
उधर से कोई रिप्लाई नहीं मिला तो मुझे बहुत दुख हुआ.
कुछ देर बाद भाभी का कॉल आया तो मैं सोच मैं पड़ गया और मैंने कॉल उठा लिया.
मेरी उनसे हाई हैलो हुई.
भाभी बोलीं- समीर, ये रोज डे क्या होता है?
मैं बोला- अरे आप नहीं जानती हो क्या?
भाभी बोलीं- नहीं!
तो मैं भी मजाक मजाक में बोला- भाभी जी इतनी दूर से नहीं बता पाऊंगा, इसको बताने के लिए तो सामने आना पड़ेगा.
ऐसे ही हम मजाक कर रहे थे तो भाभी बोलीं- आप अपने दोस्त से मिलने नहीं आ रहे हो क्या?
मैंने भी बोल दिया- दोस्त से मिलने आते रहेंगे, कभी आप भी तो बुला लिया करो!
भाभी भी कहां पीछे रहने वाली थीं, उन्होंने भी बोल दिया- चलो मेरे बुलाने पर ही आ जाओ!
मैंने पूछा- ओके, कब आना है?
भाभी भी बोलीं- कल ही आ जाओ और रोज डे का मतलब भी बता देना.
मैंने बोला- अरे वाह … क्या बात कही है भाभी जी.
वे भी हंस दीं
मैंने मजाक में कहा- मगर भाभी जी, रोज डे का अर्थ तो मैं आपको घर पर नहीं बता पाऊंगा!
‘तो कैसे बताओगे … क्या घर नहीं आओगे?’
मैंने कहा- मैं आ तो जाऊंगा … पर घर पर नहीं, कहीं बाहर मिलो न!
उन्होंने मना कर दिया कि मैं ऐसे किसी से बाहर नहीं मिल सकती, किसी को पता चल जाएगा!
मैंने कहा- मैं होटल में रूम बुक कर लूंगा, किसी को भी पता नहीं चलेगा. बस आप हां बोलो तो ही बात बनेगी!
भाभी बोलीं- पक्का किसी को पता नहीं चलेगा?
तो मैं- भाभी किसी को कुछ भी नहीं चलेगा.
जैसे तैसे करके मैंने भाभी को मना लिया.
फिर क्या था … मुझे भी अगले दिन जाने की बहुत जल्दी थी.
मैंने होटल वाले दोस्त को कॉल लगा दिया और बोल दिया- मैं कल आ रहा हूँ. स्पेशल वाला कमरा रोक कर रखना!
उसने हंस कर कहा- ओके भाई आ जाओ!
अगले दिन सुबह मैं तैयार होकर अलवर के लिए निकल गया.
मैं अपनी कार से ही अलवर आ गया.
मैं भाभी को फोन लगाने वाला ही था कि तभी भाभी जी का कॉल आ गया.
तो वे बोल रही थीं- कहां पर हो?
मैंने उन्हें बताया कि मैं आपके शहर के बस स्टैंड पर खड़ा हूँ.
भाभी बोलीं- मैं बस 5 मिनट में आई!
मैं सड़क के किनारे एक चाय की दुकान पर खड़ा होकर चाय पीने लगा.
कुछ देर बाद जैसे ही भाभी जी मुझे दिखाई दीं.
तो मैं तो फूला नहीं समाया.
भाभी जी ब्लैक साड़ी में कयामत लग रही थीं.
मैं उन्हें देख कर पागल हो रहा था.
मैं भी झट से अपनी कार में आ गया और उन्हें देखने लगा.
तभी उन्होंने मुझे देख लिया और इशारे से मुझे आवाज लगाने से रोका.
मैं मुस्कुरा दिया.
अगले कुछ पलों बाद भाभी जी कार के पास आ गई थीं.
जैसे ही मैंने विंडो का कांच नीचे किया तो वे दरवाजा खोल कर अन्दर आ गईं.
मैं उनको बिठा कर सीधे होटल ले गया.
मैंने रिसेप्सन पर अपने नाम बताया और रुपए दे दिए.
उसने मुझे कमरे की चाभी पकड़ा दी और हम दोनों रूम में चले गए.
मैं रास्ते से ही गुलाब के फूल ले आया था.
हम दोनों रूम के अन्दर आ गए और मैंने रूम लॉक कर दिया.
अन्दर आकर मैंने बिल्कुल भी देर नहीं की.
अपने बैग से मैंने गुलाब के फूलों का गुलदस्ता निकाला और घुटने के बल बैठ कर भाभी को ‘हैप्पी रोज डे’ बोल कर गुलदस्ता पकड़ा दिया.
भाभी शर्मा गईं और मुझे प्यार से देखने लगीं.
मैं खड़ा हो गया और मैंने अपनी बांहें फैला दीं.
भाभी भी मेरी बांहों में आ गईं और मुझसे जोर से लिपट गईं.
मैंने भी ना देर करते हुए उनको अपने बाहुपाश में जकड़ लिया और माथे को चूमा.
भाभी जी बहुत खुश थीं.
उसके बाद मैंने नाश्ता ऑर्डर किया और हम दोनों नाश्ता आने का वेट करते हुए बातें करने लगे.
कुछ मिनट बाद कमरे की बेल बजी, वेटर नाश्ता लेकर बाहर खड़ा था.
मैंने दरवाजे पर जाकर उसके हाथ से नाश्ता लिया और गेट को बंद कर दिया.
हम दोनों लोग नाश्ता करने लगे.
हम लोग नाश्ता करके एक दूसरे को देखने लगे थे.
मेरे मन में भाभी को अपने सामने देख कर लड्डू फूट रहे थे.
तभी भाभी ने एक अंगड़ाई ली तो उनके दोनों कबूतर उड़ने के लिए दिखाई देने लगे.
मेरी नजर भाभी के उन दोनों कबूतरों पर टिक गई.
भाभी भी मेरी आंखों में प्यासी नजर से देख रही थीं.
मैं बोला- क्या हुआ भाभी जी?
वे मुस्कुरा कर बोलीं- कुछ भी नहीं, आपको कुछ चाहिए है क्या?
मैंने उनके मम्मों को बदस्तूर घूरते हुए कहा- कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न?
वे अपने दूध को एक अदा से हिलाती हुई बोलीं- नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं है!
तो मैंने भी मजाक में बोल दिया- तो फिर कैसी बात है भाभी जी?
ऐसा बोलते बोलते मैं उठ कर उनके बगल में बैठ गया और बिल्कुल चिपक कर उनके बदन की गर्मी का अहसास करने लगा.
भाभी ने भी मेरी तरफ को झुक कर देखा और कहा- क्या हुआ देवर जी!
मैंने उनका हाथ थाम लिया और उनको अपनी ओर खींच लिया.
वे भी मुस्कुरा कर मेरी बांहों में कटी पतंग के जैसी खिंची चली आई.
मैंने उनके माथे पर किस कर दिया और वे मुझसे चिपक गईं.
वे भी मेरा साथ देने लगीं और हम दोनों एक दूसरे को चूमा-चाटी करने लगे.
बस आग भड़क गई और दोनों को जो भी समझ में आया सो करने लगा.
फिर मैंने भाभी को बेड पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया.
वे मस्ती से टांगें फैला कर मेरे नीचे बिछ गई थीं.
मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए और 5 मिनट तक अपने होंठों को भाभी के होंठों से चिपकाए हुए उन्हें चूमता ही रहा.
उसी समय मेरी जीभ ने भाभी के मुँह में एंट्री ले ली थी और हम दोनों एक दूसरे की लार को पीने लगे थे.
लंबी चूमा चाटी के बाद मैंने भाभी की साड़ी को निकाल दिया और उन्हें खड़ी करके उनके पेटीकोट का नाड़ा ढीला किया ही था कि वह माफी मांगते हुए उनकी टांगों से अलग होकर जमीन पर गिर पड़ा.
मैंने उनके चटकनी बटन वाले ब्लाउज को भी एक झटके से खींचा तो सारे बटन भी चटचट करके खुलते चले गए और वे मेरे सामने ब्रा पैंटी में खड़ी हो गई थीं.
कसम से मैंने उन्हें टू पीस में देख कर ठिठक गया और उन्हें नशीली आंखों से देखने लगा.
भाभी मुझे जन्नत की कोई अप्सरा सी लग रही थीं.
उनके दूधिया बदन पर लाल रंग की ब्रा और काले रंग की पैंटी जानलेवा लग रही थी.
वे भी मादक नजरों से मुझे देख रही थीं.
तभी उन्होंने मेरी कमर में मेरी पैंट को अपने एक हाथ से पकड़ लिया और मुझे अपनी तरफ खींचा.
मैं एकदम से उनके सीने से चिपक गया और अब मैं भी एक पल का समय टाइम खराब नहीं करना चाहता था.
मैंने उन्हें अपनी बांहों में भर लिया और उन्हें किस करने लगा.
भाभी ने अपना मुँह अलग किया और बोलीं- सिर्फ रस ही चूसना है तो और जगह से भी तो रस निकलता है … क्या गर्लफ्रेंड ने कुछ नहीं सिखाया?
मैंने यह सुनते ही उनकी ब्रा के ऊपर से ही उनके दोनों दूध पकड़ लिए और कहा- मेरी रसभरी चूचियों वाली महबूबा … तुमने सही याद दिलाया … आज तो भर भर कर दूध पियूँगा मैं तुम्हारे इन कबूतरों का!
भाभी आह आह करके मुझसे अपने मम्मे मिंजवाने लगीं.
मैंने उनके एक दूध को अपने मुँह में भर लिया और भर कर चूसने लगा.
कुछ देर बाद भाभी बोलीं- एकदम जंगली सांड हो तुम … क्या तुमको ये नहीं पता कि दूसरे में से भी रस निकलता है!
मुझे जैसे याद आया और मैं हंस कर उनके दूसरे दूध को चूसने लगा.
भाभी मेरे सर को हाथ से सहलाती हुई अपने दोनों दूध बारी बारी से चुसवाने लगी थीं.
दस मिनट के बाद वे मुझसे अलग हुई और बिस्तर पर लेट गईं.
मैंने उन्हें देखा तो अपनी पैंट के बटन खोलने लगा.
भाभी तुरंत उठीं और वे खुद अपने हाथ से मेरी पैंट को उतारने लगीं.
मेरा लंड बिल्कुल लोहे की रॉड के जैसे खड़ा था और चड्डी को फाड़ कर बाहर निकलने को मचल रहा था.
भाभी चड्डी के ऊपर से ही लंड से खेलने लगीं.
मैंने चड्डी को लंड से नीचे किया तो लंड फनफना कर बाहर आ गया.
मैंने भी देर ना करते हुए पैंट और चड्डी को अपनी टांगों से अलग किया और लंड को भाभी के मुँह में देने की कोशिश करने लगा.
पर उन्होंने मुझे मना कर दिया.
मैं चुप रह गया और सोचने लगा कि कोई बात नहीं भाभी … अभी कुछ देर बाद तुम मेरे लंड को लपक लपक कर चूसोगी.
मुझे भी पूरा अनुभन था कि लंड को कैसे लड़की या भाभी के मुँह में दिया जाता है.
मैंने अब देर ना करते हुए उनको चित लिटाया और उनके मम्मों को चूसते हुए उन्हें चुदाई के लिए गर्म करने लगा.
मेरा लंड उनकी चुत से लड़ रहा था तो मैं धीरे धीरे भाभी की चूत को लंड से ही रगड़ने लगा.
अब उनकी चूत बुरी तरह से गीली हो चुकी थी और लंड को लपकना चाह रही थी.
मैं भी नीचे को हो गया और भाभी की चूत को अपने मुँह से चाटने लगा.
भाभी मस्त हो गईं और अपनी गांड उठाती हुई चुत मेरे मुँह में देने लगीं.
मैंने उनकी चूत के अन्दर ज्यों ही अपनी जीभ को डाला तो वे भी एकदम से मचल उठीं और पूरी धनुष सी ऐंठ कर अपनी गांड को उठा कर मेरे मुँह में देने लगीं.
कुछ ही देर में खेल पलट गया और उन्होंने मुझे अपने नीचे लिटा लिया.
मैं कुछ समझ पाता कि भाभी ने अपने घुटनों के बल बैठ गईं और मेरा लंड अपने मुँह में भर कर चूसने लगीं.
वही भाभी जो लंड चूसने से मना कर रही थी, वह अब मेरे लौड़े को मस्ती से चूस रही थी.
यह देख कर मुझे भी मज़ा आने लगा और मैं उनके सर के बालों को पकड़ कर उनके मुँह को अपने लंड से चोदने लगा.
करीब दस मिनट बाद मैंने लंड उनके मुँह से बाहर निकाला और उन्हें चित लिटा कर उनके ऊपर चढ़ गया.
पहले मैं उनकी चूत को चाटने लगा और वे भी अपनी दोनों टांगें फैला कर चुत चुसवाती हुई गर्म सिसकारियां भर रही थीं.
वे ‘ऊ ऊ ऊ …’ की मधुर आवाज निकाल रही थीं.
मुझे उनकी मादक आवाज सुनकर मजा आ रहा था.
अब वे मेरे हथौड़े जैसे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर लेकर रगड़ने लगी थीं.
उनके कंठ से ‘चोदो आह अब देर न करो ऊ आह’ की मधुर आवाज निकल रही थी.
मैं उन्हें चोद नहीं रहा था, बल्कि तड़फा रहा था.
कुछ ही देर बाद भाभी ने गाली देते हुए कहा- साले अब मत तड़फा न … जल्दी से मेरी चुत के अन्दर अपना लंड डाल दे न!
मैंने भी देर ना करते हुए पोज सैट किया और एक ही बार में पूरा लंड चुत के अन्दर पेल दिया.
उनकी तेज आवाज निकल गई- आह मर गई.
मैंने उनकी आवाज को नजरअंदाज किया और दे धक्के पे धक्का … दनादन चुदाई चालू रखी.
कुछ ही देर में भाभी को मजा आने लगा और वे अपनी गांड को उठा उठा कर खुद ही झटके पे झटके देने लगी थीं.
मैं जैसे ही लंड को अन्दर करता, उनके मुँह से आई लव यू समीर और जोर से पेलो आह जोर जोर से मेरी जान! निकलने लगता.
मैं ताबड़तोड़ चुदाई करता रहा.
करीब 15 मिनट तक धाकड़ चुदाई करता रहा और अब मैं भी झड़ने वाला हो गया था.
मैंने कहा- भाभी अन्दर ही डलवाना है या बाहर?
वे बोलीं- मुझे मुँह में लेना है!
मैंने लंड चुत से निकाला और जल्दी से उनके मुँह के अन्दर डाल दिया.
वे लंड को चूसने लगीं और उन्होंने मेरा सारा माल अपने मुँह के अन्दर ही ले लिया.
हम दोनों काफी थक गए थे तो लेट कर अपनी सांसें नियंत्रित करने लगे.
कुछ देर बाद हम दोनों वापस चुदाई के अगले राउंड के लिए रेडी होने लगे.
बाद में जब हम दोनों बात कर रहे थे तब भाभी ने खुलासा किया कि वे नौकरी के लिए इतनी ज्यादा परेशान नहीं थीं, जितना एक मजबूत लंड के लिए परेशान थीं.
उन्होंने मेरे दोस्त को बहुत इशारे दिए लेकिन वह अपनी गर्लफ्रेंड के चलते भाभी के साथ सेक्स करने को राजी नहीं था.
इसी लिए भाभी मुझसे गर्लफ्रेंड को लेकर पूछ रही थीं.
उस दिन मैंने भाभी को तीन घंटे तक बार बार गर्म करके चोदा.
मैंने उन्हें कुल चार बार हचक कर चोदा.
फिर हम दोनों एक एक करके होटल से बाहर आ गए और भाभी अपने घर चली गईं.
उसके बाद तो मैंने न जाने कितनी बार भाभी को पेला होगा, मुझे खुद भी याद नहीं है.
दोस्तो, यह सेक्स कहानी मैं पहली बार लिख रहा हूँ … मुझसे इससे पहले कभी भी लिखने का तजुर्बा नहीं था.
Xxx भाभी Sexx कहानी आपको कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
मैंने बहुत सी भाभियों के साथ सेक्स किया है और यदि आप कहेंगे तो मैं आगे बहुत सी सेक्स कहानी लिख कर आपका मनोरंजन करने वाला हूं.
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