राजवैप सेक्स कहानी में मुझे जॉब मिली तो कम्पनी के एक कर्मचारी ने मुझे पेईंग गेस्ट रख लिया. उसकी बीवी मस्त माल थी. हमारा बाथरूम भी एक ही था.
हाय दोस्तो, मेरा नाम राहुल राज है, यह बदला हुआ नाम है.
मैं ग्रेटर नोएडा का रहने वाला हूँ.
मेरे लौड़े का साइज़ 7 इंच है.
आज मैं आपको अपनी दोस्त की वाइफ यानि भाभी के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसने मुझको अपनी गांड का लालच दिया और चूत भी चुदवाई.
अब राजवैप सेक्स कहानी में बताता हूँ कि कैसे भाभी ने पहले मुझको मज़ा दिया, फिर खुद मज़ा लिया.
बात जुलाई महीने की है.
मुझको नोएडा में एक जॉब मिल गई.
इसलिए मैंने एक कमरा रेंट पर लेने की सोची क्योंकि घर से बहुत दिक्कत आती थी.
मैंने अपनी कंपनी में ही एक कर्मचारी से बात की.
तो उसने बताया कि उसके मकान में एक रूम खाली है, तो तुम उसको ले लो. दोनों साथ में रहेंगे और रेंट भी कम देना पड़ेगा.
इस पर मैं राज़ी हो गया और अपना बैग उठाकर उसके साथ चला गया.
वह अपनी वाइफ के साथ रहता था.
जब हम उसके घर पहुंचे तो उसकी वाइफ ने दरवाज़ा खोला.
क्या माल थी उसकी वाइफ … बड़े-बड़े चूचे और एक मोटी गांड की मालकिन थी.
उसे देखकर मन कर रहा था कि उसको पटक कर यहीं चोद दूँ, पर कंट्रोल कर गया और दोस्त के साथ अन्दर चला गया.
मेरे दोस्त ने 3 BHK फ्लैट ले रखा था.
उसने मुझको एक कमरा दिया और बोला- अब तुम यहीं पर रहना और हम लोग किराया आधा-आधा दे देंगे.
इस पर मैं राज़ी हो गया मुझे तो वैसे भी उसकी बीवी के दूध पसंद आ गए थे.
मेरा दोस्त कुछ देर बाद मुझको छोड़ कर अपनी जॉब पर चला गया.
जाते वक्त वह बोला कि किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो अपनी भाभी से मांग लेना.
मैंने ओके बोल दिया.
उसने फिर बोला- वैसे तुम कब से ज्वाइन कर रहे हो?
मैंने उसको बोला- कल तो आज से ही रहा हूँ, पर मेरी नाइट शिफ्ट है.
उसने बोला- ठीक है, फिर तो एक ही बाइक से काम चल जाएगा. मैं तुम्हारी बाइक लेकर जा रहा हूँ, जब मैं आ जाऊंगा तब तुम चले जाना.
मैंने ओके बोल दिया और वह मेरी बाइक लेकर चला गया.
उसके थोड़ी देर बाद दोस्त की वाइफ मेरे पास आईं और बोलीं- आपको किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो बता देना!
मैंने मन-मन में सोचा कि ज़रूरत तो तेरी चुत की है भाभी … आ लेट जा.
मैंने हां में सर हिला दिया और भाभी चली गईं.
मैं भी अपना रूम सेट करने में लग गया और फिर आराम से सो गया क्योंकि नाइट ड्यूटी के लिए जाना था.
मैं अपना रूम सेट करके सो गया.
शाम को उठा तो ड्यूटी चला गया.
अगले दिन मैं जब मॉर्निंग में वापिस आया तो देखा मेरा फ्रेंड निकलने वाला था.
उसने बाइक ली और निकल गया.
मैं अपने कमरे में आया और मैंने अपना बैग रखा और बाथरूम की तरफ जाने लगा.
तो मुझको भाभी ने आवाज़ दी- आप जल्दी निकल आना, मुझको नहाने जाना है!
मैंने हां में सर हिला दिया और बोला कि बस अभी निकल आऊंगा.
मैं जल्दी ही निकल आया.
उसके बाद भाभी अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुस गई.
भाभी काफी देर बाद निकली और बोली- राज, अब तुम नहा लो, तब तक मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए बना देती हूँ.
मैंने भाभी को बोला- ठीक है भाभी!
मैं नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया. मैंने देखा वहां पर भाभी की ब्रा और पैंटी टंगी हुई थी.
उनको देखकर मेरा लंड उफान मारने लगा.
मैंने भाभी की पैंटी को उतारकर सूंघने लगा.
अअह क्या मस्त महक थी भाभी की चूत की!
मेरे दिमाग में बस भाभी की चूत ही चल रही थी.
जिसको सोच-सोचकर मैंने अपना माल भाभी की पैंटी पर ही निकाल दिया.
फिर उसको पानी में धोकर वहीं पर टांग दिया और नहाने के बाद बाहर आ गया.
मेरे बाहर आते ही भाभी ने बोला- राज, खाना तैयार है … कपड़े पहन कर आ जाओ!
मैंने भाभी को बोला कि अभी आता हूँ.
मैंने अपने कपड़े पहने और खाने के लिए भाभी के पास चला गया.
भाभी ने मुझको खाना लगाकर दिया. मैं खाना लेकर अपने रूम में आ गया.
भाभी ने थोड़ी देर बाद आवाज़ लगाई- कुछ और चाहिए?
मैंने उनको बोला कि बस एक रोटी दे दो.
भाभी मेरे लिए रोटी लेकर आ गईं … और जैसे ही वे रोटी देने के लिए झुकीं, मुझको उनके दूध के दर्शन हो गए.
क्या मस्त दूध थे एकदम गोरे-गोरे और गोल-गोल.
उनको देखकर लंड में करंट दौड़ने लगा.
मैंने अपने आप को संभाला, तब तक भाभी जा चुकी थीं.
मैं भी खाना खाने के बाद किचन में थाली रखने के लिए गया तो भाभी झुकी हुई थीं.
मुझको भाभी की गांड दिख रही थी.
क्या मस्त गांड थी … मन कर रहा था अभी पीछे से पकड़ कर गांड में डाल दूँ.
मैं प्लेट रखकर वापिस आ गया और लेटकर भाभी के बारे में सोचने लगा कि कैसे भाभी को चोदा जाए.
यही सब सोचते-सोचते मैं सो गया.
करीब तीन बजे के आसपास मेरी आंख खुली. मैं बाथरूम की तरफ जाने लगा तो मुझको बाथरूम से सिसकारियों की हल्की सी आवाज़ आने लगी.
मैंने पास जाकर सुना तो भाभी सिसकारियां ले रही थीं.
शायद वे अपनी चूत में उंगली कर रही थीं.
भाभी बार-बार ‘ओह्ह्ह यस ओह्ह अअह अअह’ की आवाज़ निकाल रही थी.
उनकी आवाज़ इतनी सेक्सी थी कि मेरा लंड अपने आप खड़ा होने लगा.
मैंने अपने लंड को अपने हाथ से दबाया और अपने रूम में आ गया.
अब मैं भाभी के बाहर निकलने का वेट करने लगा.
करीब दस मिनट बाद भाभी बाहर निकलीं.
उनकी सांसें फूल रही थीं.
मैंने भाभी से पूछा- भाभी, क्या हुआ?
तो भाभी ने कहा- कुछ नहीं!
वे मुस्कुरा कर चली गईं.
फिर शाम को मेरा दोस्त आ गया और मैं ड्यूटी चला गया.
अगले दिन जब मैं वापिस आया तो मेरे दोस्त ने बोला- तेरी भाभी नहाने गई है और चाय टेबल पर रखी है, पी लेना.
वह मेरी बाइक लेकर निकल गया.
मैंने चाय का कप उठाया और बाथरूम के बाहर जाकर खड़ा हो गया.
थोड़ी देर बाद भाभी की सिसकारियां आनी शुरू हो गई और मेरे लंड में भी करंट दौड़ने लगा.
फिर मैं भाभी को चोदने के बारे में सोचने लगा और अपने रूम में वापिस आ गया.
मैं अपने बेड पर लेटा हुआ सोच रहा था कि भाभी को कैसे चोदा जाए.
तभी भाभी की आवाज़ आई- राज, नहा लो!
मैं उठकर बाहर गया तो भाभी सिर्फ़ टॉवेल लपेटकर ही अपने बाल सुखा रही थीं.
उनको ऐसे देखकर मेरा लंड सलामी देने लगा, जो कि शायद भाभी ने नोटिस किया भी.
मैं बाथरूम में घुस गया. मैंने देखा भाभी की ब्रा और पैंटी वहीं टंगी हुई थी.
मैंने देर न करते हुए भाभी की पैंटी को अपने लंड पर लपेटा और ब्रा को सूंघने लगा.
फिर मैं मुट्ठ मारने लगा और भाभी की पैंटी में अपना माल निकाल कर उसे बिना धोए वहीं टांग दी ताकि भाभी जब अपनी पैंटी देखें तो उनको पता लगे कि ये काम मेरा ही है.
मैं नहाकर बाहर आ गया तो देखा भाभी ने एक मस्त ब्लैक कलर की टी-शर्ट पहनी हुई थी और एक लोअर पहना हुआ था.
उस दिन भाभी ने ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि उनकी टी-शर्ट से उनके निप्पल साफ़ दिख रहे थे.
यह देखकर मेरा फिर मूड बनने लगा.
मैं जाकर अपने कमरे में लेट गया और मेरी आंख लग गई.
शाम को मेरी आंखें खुलीं और मैं अपने रूम से बाहर आया तो भाभी मुझको देखे ही जा रही थी.
आज उनके देखने का तरीका कुछ अलग ही था.
मैंने भाभी से पूछा- क्या हुआ भाभी?
वे मुस्कुरा कर बोलीं- कुछ नहीं!
मैं भी मुस्कुरा दिया.
फिर भाभी ने बोला- एक बात पूछूँ?
मैंने हां में सर हिला दिया तो भाभी ने पूछा- मेरी पैंटी भीगी हुई मिली थी? तुमने कुछ किया था क्या?
ये सुनकर मेरे हाथ-पांव फूलने लगे.
मैंने बोला- नहीं भाभी, वह नीचे गिर गई थी तो इसलिए भीग गई होगी.
मैं वहां से लगभग भागता हुआ चला गया.
भाभी भी कुछ नहीं बोलीं.
मैं अपने कमरे में आ गया और भाभी को चोदने के बारे में सोचने लगा कि भाभी को कैसे चोदा जाए.
अगले दिन संडे था तो मैं लेट उठा क्योंकि मेरी छुट्टी रहती थी.
मैं बाथरूम की तरफ गया तो उसमें भाभी नहा रही थीं.
मैंने बाहर से आवाज देते हुए पूछा- कितना टाइम लगेगा?
तो भाभी बोलीं- आज तो टाइम लगेगा, संडे है न!
इसलिए मैं वापिस अपने रूम में आ गया.
थोड़ी देर बाद भाभी भी निकल आईं.
जब मैं बाथरूम में घुसा तो मैंने देखा वहां पर बाल पड़े थे.
शायद भाभी ने अपनी चूत साफ़ की थी.
मैं फ्रेश होकर बाहर आया तो मैंने भाभी से पूछा- बाल कैसे पड़े थे बाथरूम में?
तो भाभी ने मुस्कुराकर कहा- कुछ नहीं, थोड़ी सफाई करी थी.
मैंने पूछा- कहां की?
तो भाभी बोली- वहीं की, जहां की तुम सोच रहे हो!
यह कह कर वे मुस्कुरा कर अन्दर चली गईं.
मैं भी अपने रूम में चला गया और नहाने के लिए आया तो मैंने भी अपने बाल साफ़ करके अपने लंड को चिकना कर लिया.
क्योंकि अब मेरी ड्यूटी दिन में आने वाली थी और आज संडे था तो टाइम भी मिल गया.
इसी तरह दिन निकल गया.
शाम के टाइम मैं पीने के लिए व्हिस्की ले आया और अपने रूम में बैठा आराम से पी रहा था.
भाभी ने आवाज़ दी- खाना खा लो!
मैंने बोल दिया- आप बना कर टेबल पर रख दो, जब भूख लगेगी खा लूँगा.
उन्होंने मेरा खाना बनाकर टेबल पर रख दिया और अपने रूम में चली गईं.
मैं भी अपने रूम में लगा रहा.
पीने से करीब 10 बजे मैं अपना खाना लेने के लिए बाहर गया तो मैं बाहर का सीन देखकर चौंक गया.
बाहर भाभी कुर्सी पर बैठी हुई सिगरेट में दम लगा रही थी.
वे सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज़ में थी, जिसमें से उनके बड़े-बड़े चूचे साफ़ दिख रहे थे, जो कि बाहर को आने के लिए बेताब थे.
भाभी पसीने में लथपथ थी.
शायद वे अभी चूत चुदवा कर आ रही थीं, लेकिन बहुत सेक्सी लग रही थीं.
भाभी ने मुझको देखा और एक हल्की सी मुस्कान देते हुए सिगरेट मेरी तरफ बढ़ा दी.
लेकिन मेरा ध्यान भाभी के चूचों पर था.
जिसको देखकर मेरा लंड ज़ोर मार रहा था, जिसे भाभी ने नोटिस कर लिया.
भाभी ने मुझको छुआ, जिससे मेरा ध्यान भाभी की तरफ गया.
भाभी ने पूछा- क्या देख रहे हो?
मैंने बोला- कुछ नहीं भाभी, बस ऐसे ही!
भाभी ने बोला- कुछ तो देख रहे हो, नहीं तो ये ऐसे ही खड़ा नहीं होता!
मैंने पूछा- कौन?
भाभी ने मेरे लंड की तरफ इशारा किया.
मैंने नीचे देखा तो मेरा लंड पूरा तना हुआ था, जो कि लोअर में से साफ़ नज़र आ रहा था.
भाभी ने मुझको सिगरेट दी.
मैं सिगरेट में दम मार ही रहा था कि अचानक भाभी ने ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया और अपने होंठों पर उंगली रखकर मुझको चुप रहने के लिए कहा.
वे मेरे लंड को बाहर से ही सहलाने लगीं, जिससे मेरा लंड पूरा तनकर खड़ा हो गया.
भाभी मेरे लंड को सहलाए जा रही थी.
थोड़ी देर बाद भाभी ने मेरे लोअर को नीचे उतार दिया, जिससे कि मेरा लंड अपने पूरे आकार में आकर भाभी को अपनी तरफ बुलाने लगा और ऊपर-नीचे होने लगा.
कड़क हथियार को देखकर भाभी के मुँह से ‘ओह तेरी … क्या धांसू लंड है!’ निकल गया.
भाभी के मुँह से लंड सुनकर मेरा लौड़ा और भी जोश में आ गया.
भाभी अपने हाथों से मेरे लौड़े को आगे-पीछे करने लगीं और कुर्सी से उतरकर मेरे आगे घुटने पर बैठकर मेरे लौड़े को हिलाने लगीं.
मेरा लौड़ा भाभी के बिल्कुल मुँह के सामने था.
थोड़ी देर लंड हिलाने के बाद भाभी ने मेरे लौड़े पर जैसे ही अपनी जीभ फेरी, मानो मेरी तो जान ही निकल गई और मेरे मुँह से ‘आहह’ की आवाज़ निकलने लगी थी.
भाभी ने धीरे-धीरे मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया और वे उसे हाथ से आगे-पीछे करने लगीं.
मैं लंड चुसाई का मज़ा ले रहा था.
क्या मस्त लौड़ा चूस रही थीं भाभी!
वे मेरे समूचे लौड़े को मुँह में भरकर चूसने लगी.
मैंने भी भाभी के बालों को पकड़ा और उनके मुँह में झटके मारने लगा.
भाभी भी मेरे झटकों का पूरा मज़ा ले रही थीं.
थोड़ी देर लंड चुसाई के बाद मैंने भाभी को खड़ा किया और मैं खुद घुटने पर बैठकर भाभी के पेटीकोट में घुस गया.
अब मैं भाभी की चूत पर हाथ रखकर सहलाने लगा.
बिल्कुल चिकनी चूत थी भाभी की.
मैं भाभी की चूत पर हाथ फेरने लगा लेकिन भाभी कुछ और ही चाहती थीं.
भाभी ने मेरे सर को पकड़ा और वे सर को अपनी चूत पर रखकर दबवाने लगीं.
मैं समझ गया कि भाभी चूत चुसवाना चाहती हैं.
मैं भाभी की चूत को चूसने और चाटने लगा जिससे भाभी के मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगीं.
भाभी बड़बड़ाने लगीं- अअह ओओह ओओ आह राज … अहह चूसो आह अच्छे से चूस लो मेरी चूत को. अहह आउउच्छ अहह आहह!
मैं बस भाभी की चूत को चूसे ही जा रहा था.
करीब दस मिनट चूत चुसाई में ही भाभी एकदम से अकड़ने लगीं और उन्होंने मेरे सर को अपनी जांघों में दबाकर चूत को मेरे मुँह में भर दिया.
वे ‘अअह अआह अओह’ की आवाज़ निकालने लगीं और अपनी चूत को मेरे मुँह पर रगड़ने लगीं.
करीब पांच मिनट बाद ही भाभी ने मेरे सर को अपनी चूत पर ज़ोर से दबा लिया और ‘आहह अअह’ की आवाज़ के साथ ही भाभी ने अपनी चूत का पानी मेरे मुँह में ही भर दिया.
फिर करीब दो मिनट तक उन्होंने मेरे मुँह को अपनी चूत पर ही दबाकर रखा.
तब तक मैंने भाभी की चूत को चाट-चाट कर साफ़ कर दिया.
भाभी ने अपने पेटीकोट को उठाकर मुझको बाहर निकालने के लिए बोला.
मैं जैसे ही बाहर निकल कर खड़ा हुआ, भाभी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगीं.
मैं भी भाभी का साथ देने लगा और भाभी के होंठ चूसने लगा.
भाभी एक हाथ से मेरे लंड को सहला रही थीं जो पहले से ही भाभी की चूत में जाने के लिए तैयार था.
दोस्तो, भाभी के साथ चुदाई की कहानी को विस्तार से अगले भाग में लिखूँगा.
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