हार्ड सेक्स स्टोरी में मेरे दोस्त के घर गया तो उसकी फुफेरी बहन आई हुई थी. वह चाय लाई तो मैं उसे देखता रह गया. पता लगा कि वह तलाकशुदा है. मैं उसे चोदना चाह रहा था.
हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम कुलदीप चौहान है, मेरी उम्र 28 साल है.
आज मैं आपको अपने साथ हुई एक सच्ची हार्ड सेक्स स्टोरी सुनाने जा रहा हूँ.
ये बात अभी कुछ टाइम पहले की है.
मेरी बीवी गर्भवती थी इसलिए मुझे चूत के लिए तरसना पड़ता था.
हालांकि मेरी बीवी जॉब करती है तो वह अपनी जॉब पर जाती है लेकिन चुत चुदाई नहीं करने देती है.
मैं चूत के जुगाड़ में घूम रहा था रास्ते में कई सेक्सी खूबसूरत लड़कियों को देख कर ही मन को तसल्ली दे देता था और जिस दिन आग ज्यादा लगती तो उस दिन मुठ मार कर काम चला लेता था.
मेरा एक दोस्त है, उसका नाम संदीप है.
वह मेरे साथ ही जॉब करता है.
हम काफ़ी वक़्त से अच्छे दोस्त हैं.
मैं अक्सर उसके यहां आता जाता रहता था.
एक दिन संडे को मैं संदीप के यहां गया था.
थोड़ी देर बात कर करके मैंने उससे कहा- साले, मैं कितनी देर से तेरे पास आया हूँ, पानी तो पिला … चाय तो पिलाने से तू रहा!
वह हंस कर बोला- नहीं यार, ऐसी कोई बात नहीं है. अभी पिलाता हूँ.
उसने अपनी बहन को आवाज़ दी- पूजा दीदी, पानी दे दीजिए और चाय भी बनाइए.
मैंने कहा- ये पूजा दीदी कौन हैं?
उसने बताया- ये मेरी बुआ की लड़की हैं, शादी होने के 2 साल बाद उनका पति तलाक़ हो गया.
फिर उस वक्त मेरी आंखें खुली रह गईं जब सामने से एक 28-29 साल की लड़की भरे बदन वाली चुस्त कुर्ती सलवार पहने आई.
उसने झुक कर जब ट्रे सामने की तो मैं उसके चेहरे को देखता रह गया.
उसके गोरे गाल गुलाबी होंठ, बड़ी बड़ी आंखें, कसा हुआ बदन.
मैं देखता ही रह गया.
फिर मैंने अपनी नजरें थोड़ा नीचे करके देखा तो उसके तने हुए दूध दिखे.
उसके मम्मों के उभार उस टाइट कुर्ती में तो एकदम जहर लग रहे थे.
ऐसा लगा मानो वह सेक्स की देवी हो.
वह नज़ारा मेरी आंखों से हट ही नहीं रहा था.
वह पानी देकर चली गई.
मैं संदीप से बातें करने लगा लेकिन मुझे बार बार पूजा का चेहरा दिख रहा था.
मैंने सोचा कि ये तो कमाल की लड़की है.
ये अगर चोदने को मिल जाए तो मज़ा ही आ जाए.
दोस्त के घर से वापस आकर सबसे पहला काम अपने लंड को तसल्ली देने का किया.
अपने घर आते ही मैंने जल्दी से बाथरूम में जाकर मुट्ठ मारी.
अब मैं प्लान बनाने लगा कि कैसे जुगाड़ हो.
मैं दूसरे दिन अपने दोस्त के घर पुनः गया.
उधर बातों बातों में ये पता चला कि पूजा 2 हफ्ते के लिए रहने आई है.
मेरे पास वक़्त कम था.
सारा दिन उसके बारे में सोचते सोचते गुजर गया.
रात में मैंने फिर से मुट्ठ मारी.
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.
बस लग रहा था कि किसी भी तरह से पूजा की चुत चोदने के लिए मिल जाए.
उसको पाने के लिए मैं पूरी तरह से बेताब हो गया था.
उस रात मैंने 3 बार मुट्ठ मारी.
पूजा को पाने के लिए मेरे जिस्म की आग बढ़ती जा रही थी.
दो दिन बाद मैं सुबह देर से जागा और तुरंत रेडी होकर संदीप के घर पहुच गया.
मैं जानता था कि वह ऑफिस चला गया होगा.
दरवाजा खटखटाने पर पूजा ने दरवाजा खोला.
उसे सामने देख कर मेरे मुँह से आह भरी सिसकारी निकल गयी.
वह मुझे देखने लगी.
मैंने पूछा- संदीप चला गया क्या?
पूजा ने कहा- हां वह चला गया.
मैं उसे देखने लगा तो उसने कहा- आइए, मैं चाय बनाती हूँ.
मैं अन्दर जाकर बैठ गया.
संदीप की मम्मी भी आ गईं.
मैं संदीप की मम्मी से बात करने लगा.
तभी पूजा चाय लाई और उसने झुक कर मुझे चाय दी.
तब मैंने उसके जिस्म का पूरा जायजा लिया.
वह किसी एंगल से तलाक़शुदा या शादीशुदा नहीं लग रही थी.
मेरे ऊपर तो कयामत तब बरसी, जब वह मुड़ कर जा रही थी.
उसके कूल्हों के बीच में सूट फंसा हुआ था, जिससे उसकी गांड का शेप सही तरीके से दिख रहा था.
जब वह चल रही थी, तब उसकी मटकती हुई गांड देख कर मैं एक बार फिर से खौल गया और उसको पाने के लिए मेरी तड़प और बढ़ गई.
मैंने अपने लौड़े को सहला कर सोचा कि साली ये तो सच में कयामत है, बिस्तर में बहुत मजा देगी.
अब तो कुछ भी हो जाए, मैं इसको चोद कर ही रहूँगा.
मैंने अगले दिन से संदीप के घर की निगरानी शुरू की, तो पाया कि वह रोज सुबह मंदिर जाती थी.
मैंने उससे मंदिर में ही मिलने का प्लान बनाया.
उसके अगले दिन मैं पहले से मंदिर में जाकर उसके आने का इंतजार करने लगा.
जब वह ऑरेंज कलर के सूट में आई तो मैं देखता रह गया.
जब वह मंदिर से वापस जाने लगी तो मैंने उसको आवाज देकर रोका और कहा- पूजा सुनो!
उसने मुझको देखा और बोली- अरे आप! आप भी इसी मंदिर में आते हो क्या?
मैंने कहा- हां मंदिर भी आता हूँ देवताओं को भी मानता हूँ और देवियों को भी देखता हूँ.
वह हंस कर बोली- बहुत बढ़िया.
मैंने कहा- आप मेरे घर आइए ना कल शाम को, मैं इंतज़ार करूंगा.
उसने कहा- देखो टाइम मिलेगा तो ज़रूर आऊंगी.
मैं घर जाकर शाम को उसका इंतज़ार करने लगा.
लेकिन वह नहीं आई.
मुझे बहुत उदासी हुई … मेरा मन नहीं लग रहा था.
मैं संदीप के घर से सिर्फ़ 7 घर दूर ही रहता था, ऐसे में मैं और ज्यादा परेशान था कि इतनी भी क्या दिक्कत थी.
मैंने लगातार दो दिन तक उसका इंतज़ार किया लेकिन वह नहीं आई.
अगले दिन सुबह जब मैं उसके घर पहुंचा तो वहां ताला लगा देख कर हैरान रह गया.
मैंने संदीप को कॉल की तो फोन ऑफ था.
मैं अपने घर आ गया.
उस दिन मैं घर में ही रहा, जॉब पर भी नहीं गया.
मेरी बीवी आज ऑफिस के टूर पर 2 दिन के लिए अजमेर गयी थी तो मैं दोपहर तक सोता रहा.
करीब 4 बजे मैंने चाय बनाई और जैसे ही चाय पीना शुरू किया कि दरवाजे की घंटी बजी.
मैंने दरवाजा खोला तो सामने पूजा सफ़ेद टाइट सूट सलवार पहने खड़ी थी.
मैं हाथ में कप लिए था.
वह बोली- अरे वाह आप तो मुझे दरवाजे में ही चाय पिला कर भेजोगे क्या?
मैंने कहा- अन्दर आ जाओ पूजा!
मैं बहुत खुश हो गया.
मैंने कहा- आप बैठो, मैं 2 मिनट में आया आपके लिए चाय लेकर.
मैंने जाकर चाय बनाई और लाकर उसको दी.
मैंने कहा- इतने दिन बाद आई? मैं उस दिन से ही आपका इंतज़ार कर रहा था! एक दिन घर में ताला भी लगा था?
वह बोली- क्यों इंतजार कर रहे थे मेरा?
मैंने कहा- आपको बुलाया था, ऐसे मैं नहीं आओगी तो इंतज़ार नहीं करूंगा! अगर नहीं आती तो मैं जिंदगी भर आपका इंतज़ार करता.
वह एकटक मुझे देखने लगी.
मैंने सही मौका जान कर उससे कह दिया- पूजा आप बहुत ही खूबसूरत हो.
वह बोली- थैंक्स!
मैंने ना जाने क्या सोच कर बोलना शुरू किया और पता नहीं, कहां से मेरे अन्दर इतनी ताक़त आ गयी.
मैंने कह दिया- आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो. उस दिन से मैं दिन रात आपके बारे में सोचता रहता हूँ.
मैं लगातार बोले जा रहा था और पता नहीं क्या क्या बोल गया था.
वह बस मुझे देखे जा रही थी.
फिर अचानक से वह बीच में ही मुझे रोक कर बोली- यही सब बकवास करने के लिए मुझे बुलाया था? मैं घर में अकेली बोर हो रही थी, तो सोचा कि तुम्हारे पास आकर बातें करूंगी. लेकिन मैं अब जा रही हूँ.
वह उठ कर चली गई.
मैं रोक भी नहीं पाया.
रात में 11:30 बजे करीब मेरे मोबाइल में रिंग हुई, तो मैंने देखा कि संदीप का कॉल आ रहा था.
मैं डर गया कि कहीं पूजा ने घर जाकर उसको बता तो नहीं दिया.
इसलिए मैंने फोन नहीं उठाया.
दोबारा रिंग आई.
जब 3 बार रिंग हुई तो मैंने कॉल रिसीव किया.
मैंने हैलो बोला.
वहां से संदीप की आवाज़ की बजाए पूजा बोल रही थी.
वह सॉरी बोलती हुई कहने लगी- मुझे आपके घर से ऐसे वापस नहीं आना था. मैं कल आऊंगी.
मैंने कहा- तुम एक काम करो. इस फोन को काटो और अपने मोबाइल से मुझे मिस्ड कॉल दो. मैं फोन करूंगा.
उसने ऐसा ही किया.
मैंने कॉल बैक किया.
उससे बातें करने में ही न जाने कैसे फोन कट हो गया था.
तो उसने कॉल बैक किया.
वह बोली- कल मैं पक्का आऊंगी.
अगले दिन मैंने सुबह से ही घर की सफाई की सब सैट किया.
वह ठीक 3 बजे आ गयी और आते ही सॉरी बोली.
मैंने उसको चाय पिलाई.
मैं उसके काफ़ी करीब आ गया और उसको ‘आई लव यू’ बोला.
वह चुप थी.
फिर वह बोली- तुम मेरे बारे में जानते हो. ये मैं नहीं कर सकती!
मैंने उसको समझाया.
उसकी हर बात को मैं अपने तरीके से बोल रहा था ताकि वह मान जाए.
बातों ही बातों में मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसको दोबारा से ‘आई लव यू’ बोला.
वह कुछ कहती कि मैंने जल्दी से उसके हाथ पर किस कर लिया.
वह हाथ झटक कर दूर हो गयी और बोली- ये ग़लत है.
मैंने कहा- आई लव यू.
अब वह जब भी कुछ बोलती, मैं रिप्लाइ में आई लव यू बोलता.
अंत में उसने भी आई लव यू बोल दिया.
बस फिर क्या था, अगले ही पल हम दोनों एक दूसरे की बांहों में लिपट गए.
मैंने उसको कस कर पकड़ रखा था और उसके जिस्म की तपिश को महसूस कर रहा था.
थोड़ी देर में हम दोनों अलग हुए.
वह बोली- जानू अब मैं जाती हूँ, भैया आने वाले हैं.
मैंने कहा- कब आओगी?
उसने हंस कर कहा- दो घंटे बाद आती हूँ.
वह जाने लगी.
मैं उसके पीछे दरवाज़े तक आया.
जैसे ही उसने दरवाजा खोलने को किया, मैंने पीछे से उसकी कमर को पकड़ कर खींचा और गर्दन में किस करके फिर से ‘आई लव यू’ बोला.
वह भी बोली- जाने दो ना, जल्दी ही आऊंगी.
मैंने उसके कूल्हों में थपकी दे कर कहा- हां इस बार आना लेकिन वापस मत जाना.
वह हँसती हुई चली गयी.
ये मेरी जीत थी.
मैंने दरवाजा बंद किया और वहीं खड़े होकर मुट्ठ मारना शुरू कर दी.
थोड़ी देर बाद उसका फोन आया.
थोड़ी देर यहां-वहां की बातें करने के बाद अचानक उसने पूछा- जानू, तुमने मेरे पीछे हाथ क्यों मारा था?
मैंने नाटक किया- कब मारा?
उसने कहा- मारा … क्यों झूठ बोलते हो?
मैंने कहा- मैंने तुम्हारा कुछ नहीं मारा और ना मारी.
वह हंस कर बोली- झूठे, तुमने मेरी कमर के नीचे आते वक़्त हाथ मारा था!
मैंने कहा- हां यार मारा था, तेरे वे अच्छे लग रहे थे न … इसलिए मारा.
उसने कहा- हूँ … मेरा और क्या क्या अच्छा लगता है?
मैंने सब कुछ डिटेल में बोलना शुरू किया और वह सुनती रही.
अंत में वह बोली- तुम तो मुझे काफ़ी ज़्यादा अच्छा महसूस करवा रहे हो!
मैंने कहा- शाम को आओ तो और भी अच्छा लगने लगेगा.
उसने कहा- ठीक है, आ जाती हूँ शाम को!
उसने फोन काट दिया.
शाम को 7 बजे आ गई.
मैंने दरवाजे को बंद करते ही उसको दीवार से सटाया और चिपक कर चूमना शुरू कर दिया.
वह भी ज़ोर ज़ोर से सांसें लेने लगी.
मैं चूमना बंद ही नहीं कर रहा था.
वह बोली- तुम जब शुरू करते हो, तो बंद क्यों नहीं करते! इधर ही सब करोगे क्या? दरवाजे से सटा रखा है … बिस्तर में चलो न प्लीज़!
मैंने उसको गोद में उठा लिया और बिस्तर में ले जाकर चूमने लगा.
बेतहाशा चूमने से वह जोश में आ गई थी.
उसने भी मुझे चूमना शुरू कर दिया था.
मैंने कहा- मैं सारी रात तुमको चूमने में बिता सकता हूँ.
वह हंस कर बोली- सारी रात चूमोगे तो करोगे कब?
मैंने कहा- अभी करूंगा.
मैंने उसका कमीज उतारने के लिए पकड़ा, मगर वह काफ़ी टाइट था.
मैंने कहा- तुम इतने टाइट कपड़े पहनती हो कि सारा माल बाहर से ही दिख जाता है.
उसने कुर्ती को उतार कर कहा- क्या क्या दिख जाता है?
मैंने कहा- भगवान ने तुम्हारे हर अंग तराश कर बनाया हुआ है. तुम बड़ी मस्त चीज़ हो यार!
अगले ही पल जब उसने सलवार उतारी तो वह मेरे सामने ब्रा पैंटी में आ गई.
मैंने देखा तो झट से ब्रा खोल दी तो उसके चमकते हुए दूध देख कर मैं पागलों की तरह उन पर झपट पड़ा. एक को चूसने लगा दूसरे को मसलने लगा.
वह अपने दूध को खुद पकड़ कर मेरे मुँह में दे देकर पिला रही थी.
मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाला तो वह चिकनी चूत थी, झांट का एक बाल भी नहीं था और चूत एकदम गीली थी.
मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि मैं उस लड़की के साथ हूँ जो मेरे लिए एक सपना सी हो गई थी.
मैंने उसकी पैंटी को भी हटा दिया और उसकी चूत को देख कर लगा मानो जन्नत का दरवाजा हो.
जब मैंने उसकी चूत में उंगलियां डालनी शुरू की तो वह बोली- अपना माल भी तो दिखाओ ना!
मैंने कहा- ठीक से बोलो?
वह बोली- अपना लंड दिखाओ और पिलाओ.
मैंने अपने सारे कपड़े हटाए और उसके मुँह में लंड दे दिया.
वह मस्ती से लंड चूस रही थी.
मैं पीछे से हाथ डालकर उसकी चूत में उंगलियां कर रहा था.
फिर मैंने अपना लंड उसके मुँह से निकाला और उसकी टांगें खोल कर चूत के ऊपर रख कर लंड घुसेड़ दिया.
वह ‘ऊई मर गई म्म्म्म आह’ करने लगी.
मैंने उसको चोदना शुरू कर दिया.
वह अपने दूध दबाती हुई ‘एयेए आह’ करने लगी.
मैं उसके मम्मों को मस्ती से दबा रहा था और चूस रहा था.
साथ ही उसको चोदते हुए कह रहा था- तुम जितनी सुंदर बाहर से दिखती हो, उससे कहीं ज़्यादा तो तुम कपड़ों के अन्दर से सुंदर लगती हो … और बिस्तर में तो तुम अच्छी खिलाड़ी महसूस हो रही हो!
उसने अपनी गांड उठाते हुए कहा- मुझे दो साल से लंड नहीं मिला था. आज बहुत दिनों बाद मिला है … चुदने में मज़ा आ रहा है जल्दी से चुत चोद दो … फिर गांड भी मारना.
मैंने कहा- रियली! तुम मुझसे गांड भी मरवाओगी?
वह बोली- हां.
मैंने खुशी के मारे उसको और जल्दी जल्दी चोदना शुरू कर दिया.
वह भी जोश में साथ दे रही थी.
मैंने कहा- तुम तो मस्त चुदवाती हो.
वह हम्म हम्म करके चुदती रही.
कुछ देर बाद मैंने कहा- तुमने पहले गांड मरवाई है न इसी लिए तो इतना शानदार शेप है!
वह मुस्कुरा दी.
मैं उसे जल्दी जल्दी चोदने लगा और शायद उसका भी चरम बिंदु आ चुका था.
मेरा काम तमाम हुआ तो साथ में उसका भी काम खत्म हो गया.
मैंने उसकी चूत के अन्दर ही अपना माल गिरा दिया और हम दोनों लिपट कर लेट गए.
हम दोनों बिस्तर में थोड़ी देर पड़े रहे और एक दूसरे को प्यार करते रहे.
कुछ देर बाद मैं फिर से जोश में आने लगा.
अब मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके बालों से खेलते खेलते कहा- तुम बहुत प्यारी खूबसूरत और सेक्सी हो, काश तुम हमेशा मेरे साथ रहो.
वह बोली- हम दोनों का साथ रहेगा, चिंता मत करो.
उसने मुझे नीचे लिटा दिया और खुद मेरे पैर के पंजे का अंगूठा चूसने लगी.
वह धीरे धीरे चूमती हुई ऊपर को आई और उसने मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसा तो वह पहले से ज़्यादा कड़क हो गया.
उसने कहा- तुम तैयार हो गए हो, अब अन्दर जाने दो.
वह मेरे लंड को पकड़ कर अपनी गांड में लगा कर बैठने लगी, बड़े आराम से लंड अन्दर घुस गया.
मुझे अहसास हुआ कि इसकी जबरदस्त चुदाई की गई है और तभी इसको लंड की भूख है.
वह ‘सी स ई …’ बोलती रही और खुद ही उठ बैठ कर चुदने लगी.
मैं उसके तने हुए चूचों के निप्पलों को पकड़ कर खींचने लगा.
वह बोली- तुम भी कम नहीं हो चोदने में!
मैंने कहा- तुम्हारी चुदाई करने में मज़ा आ रहा है.
वह बोली- पीछे से आओ ना, ऐसे में दिक्कत हो रही है.
मैंने उसको डॉगी स्टाइल में कर दिया और पीछे से उसकी गांड में लवड़ा घुसेड़ दिया.
वह उऊहमहः उम्मह की आवाज़ निकालने लगी.
उसके मांसल और दमकते हुए कूल्हों को देख कर मैं काफी जोश में आ गया.
मैंने कहा- तुम्हारी जैसी गांड मारने को मिले तो जोश कितना बढ़ जाता है … सच में क्या शानदार गांड है तुम्हारी … आह मज़ा आ गया!
वह भी आगे पीछे होकर साथ दे रही थी.
काफ़ी देर तक हम दोनों हार्ड सेक्स करने में लगे रहे.
फिर जब मेरा माल उसकी गांड में गिरा तो वह ऐसे ऊपर को होने लगी मानो उसके अन्दर दो लंड समा जाएं.
फिर हम लोग अलग हुए और अपने अपने कपड़े पहनने लगे.
उसने मेरे किचन में जाकर चाय बनाई.
रात के 9 बजने वाले थे.
वह जब घर जाने लगी, तो मैंने कहा- यार मत जाओ!
वह बोली- जाना तो होगा, लेकिन कल आऊंगी.
मैंने उसको गले लगा कर जाने दिया.
रात में हम दोनों ने काफ़ी देर तक फोन से बात की.
दोस्तो, मेरी हार्ड सेक्स स्टोरी आपको कैसी लगी प्लीज़ फीडबैक देना.
मेरा ईमेल पता है
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