दोस्त की शादीशुदा बहन को नंगी चोदा

Views: 5 Category: Hindi Sex Story By justforlady29 Published: March 03, 2026

हिंदीXxx चुदाई कहानी में मेरे दोस्त की बहन के पति उसका ख्याल नहीं रखते थे तो उसकी निकटता मेरे साथ हो गयी. मैं उससे मिलने को कहता था. वो भी चाहती थी पर डरती थी.

नमस्ते दोस्तो!
मैं आपके साथ एक और एक्सपीरियंस शेयर करना चाहता हूँ कि कैसे मेरे दोस्त की माँ ने मुझे गिफ्ट दिया।
तो देर ना करते हुए हिंदीXxx चुदाई कहानी पर आता हूँ।

मैं दिल्ली में रहता हूँ और सेक्स का मुझे बहुत शौक है।

मेरा एक दोस्त है जिसका नाम दिनेश है।
दिनेश की शादी 2015 में हुई थी।
मैं उसकी मैरिड बहन से मिला, जो 38 साल की हैं।

उनके दो बच्चे भी हैं और वो एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करती हैं।
उनका नाम दिव्या है।

शादी में बातचीत के दौरान वो मुझसे काफी इम्प्रेस हुईं और हमने नंबर एक्सचेंज कर लिए।

फिर हमारी बातचीत शुरू हो गई।
मैं उन्हें “दिव्या दी” कहकर बुलाता था।

शुरुआत में हमारी बीच नॉर्मल बातें होती थीं।

धीरे-धीरे वो अपनी पर्सनल प्रॉब्लम्स शेयर करने लगीं कि उनके पति ध्यान नहीं देते, सारे काम खुद करने पड़ते हैं।
मैंने उनसे कहा- कोई नहीं, कभी भी कोई काम हो तो आप मुझे बता देना।
उन्होंने थैंक यू कहा।

फिर धीरे-धीरे रोज़ बात होने लगी और एक दिन हमारी बीच दोस्ती हो गई।
फिर मैं उन्हें मिलने के लिए बोलने लगा लेकिन वो मिलने से डरती थीं।

बस ऐसे ही कुछ सालों से सिलसिला चलता रहा।

उन्होंने कहा- दिनेश को पता लग गया तो ठीक नहीं होगा।
मैंने कहा- उसे पता नहीं लगेगा।

फिर मैंने कहा- ठीक है, ओपन में नहीं मिलना तो घर आ जाओ किसी दिन। वहाँ कोई नहीं होगा, थोड़ा-थोड़ा ड्रिंक करके एंजॉय करेंगे।
उन्होंने कहा- देखते हैं।

फिर कुछ दिनों तक उनका फोन नहीं आया।

मैंने फोन किया तो उन्होंने बताया- मेरी घुटनों में बहुत दर्द रहता है।
मैंने कहा- दवाई लो और कहीं जाकर ऑयल मसाज करवाओ।

उन्होंने कहा- कौन करेगा?
मैंने कहा- हसबैंड से करवाओ।”

उन्होंने कहा- वो केयर ही नहीं करते, मसाज क्या करेंगे!

मैंने कहा- आप बोलो तो मैं कर दूँ?
कुछ देर सोचने के बाद उन्होंने कहा- चलो, देखते हैं।

फिर एक दिन उनका सुबह 11 बजे फोन आया- क्या हम आज मिल सकते हैं?

मैं उस टाइम ऑफिस में था।
पहले मना करने वाला था क्योंकि अचानक ऑफिस से छुट्टी कैसे मिलेगी?
लेकिन फिर सोचा — अगर मना कर दिया तो दोबारा मौका कब मिलेगा, पता नहीं।

मैंने कहा- ठीक है, 1 बजे तक मिलते हैं।
उन्होंने कहा- ठीक है, गुड़गाँव आ जाओ।

मैंने पूछा- जाएँगे कहाँ?

उन्होंने कहा- जहाँ आप ले जाओ। ऑयल मसाज तो आपने देनी है।

फिर मैंने अपने एक दोस्त को फोन किया कि मुझे अर्जेंट रूम चाहिए।
वो अकेला रहता है किराए पर।

उसने कहा — ऑफिस आ जा!
मैं उसके ऑफिस गया, रूम की चाबी ली और साइबर हब चला गया बाइक से।

वहाँ मेट्रो के नीचे दिव्या दी को देखा तो देखता रह गया।
टाइट जींस में एकदम चब्बी फिगर में मस्त लग रही थीं।

मैंने कंट्रोल किया, बाइक रोकी।
वो बाइक पर बैठ गईं और सीधे सेक्टर 29 में अपने दोस्त के घर चला गया।

रास्ते से मैंने मसाज ऑयल भी ले लिया और कुछ खाने को भी, क्योंकि लंच टाइम था।

फिर हम रूम के अंदर गए, फ्रेश होकर कुछ खाया।
मैं कुर्सी पर बैठा था और दिव्या दी बेड पर बैठी थीं।

थोड़ी देर बात करने के बाद मैंने हिम्मत करके पूछा- बात ही करनी है या मसाज भी?
वो हँसने लगीं और शरमाने भी लगीं।

मैं हिम्मत करके उनके पास चला गया और बेड पर उनकी टाँगों के पास बैठ गया।

फिर मैंने पूछा- क्या मैं आपको छू लूँ?
वो हँसने लगीं।

मैंने हिम्मत कर उनके पैरों को छूना शुरू किया और पैरों की उँगलियों को पकड़कर रब करने लगा।
दिव्या दी मेरी तरफ देखकर हँस रही थीं।

फिर मैंने उनके घुटनों को जींस के ऊपर से छूकर हल्का-हल्का मसाज देना शुरू किया।
उन्हें अच्छा फील हो रहा था।

दिव्या दी ने पूछा- कहाँ से सीखा?
मैंने कहा- यू ट्यूब से देखकर।”

फिर मैं ऐसे ही थोड़ी देर रब करता रहा।
दिव्या दी की आँखें बंद थीं, वो आनंद ले रही थीं।

फिर मैं धीरे-धीरे जींस के ऊपर से थाई पर हाथ फेरने लगा।

दिव्या दी ने आँखें खोलकर मेरी तरफ देखा लेकिन कुछ बोली नहीं।
मैं चुपचाप करता रहा — उनकी थाई को रब किया और धीरे-धीरे जींस के ऊपर से उनकी पेट तक हाथ ले गया।

फिर मैंने कहा- आप उल्टा लेट जाओ।
वो उल्टा हो गईं।
जैसे ही वो उल्टा हुईं, उनकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरा मुँह से सीत्कार निकल गई (जो मैंने कंट्रोल किया) और मेरा लंड टाइट हो गया था।

मैंने उनकी पैरों की तलवों को फिंगर्स से हल्का-हल्का दबाया, लेकिन मेरी नज़र उनकी गांड पर थी और मन कर रहा था कुछ करने का।
फिर मैंने उनकी टाँगें दबानी शुरू कीं।

5 मिनट दबाने के बाद उनकी जांघ दबाने लगा।
थोड़ी देर दबाने के बाद मैंने उनकी बड़ी गांड पर हाथ रख दिया।

दिव्या दी के मुँह से “आह…” की आवाज़ निकलने लगी।
फिर मैं उनकी गांड को दबाते हुए उनकी कमर को दबाने लगा।
और उनके टॉप के अंदर हाथ डाल दिया और कमर को रब करने लगा, हल्के-हल्के दबाने लगा।

फिर मैं उनकी कमर में बैठकर उनके पेट में मसाज देने लगा और जींस का बटन खोलने की कोशिश करने लगा लेकिन खुला नहीं।
दिव्या दी समझ गईं मेरे इशारे को। उन्होंने खुद ही अपना जींस का बटन खोल दिया।

मैंने देर ना करते हुए उनकी जींस नीचे करने लगा।
वो अपना पेट उठाने लगीं ताकि जींस आराम से उतर जाए।

जैसे ही मैंने उनकी जींस उतारी, दिव्या दी ने व्हाइट कलर की पैंटी पहनी हुई थी।
उसे देखकर मैं पागल हो गया।

उनकी गोरी गोरी आधी बाहर निकली हुई गांड और गोरी गोरी थाई देखकर मैं बेकाबू हो गया।

मैंने देर ना करते हुए पैंटी के ऊपर से उनकी गांड सूंघना शुरू किया, जोर से बाइट करने लगा।
दिव्या दी मदहोश होने लगीं।

मैंने पैंटी को उनके ऐस्स क्रैक में डालकर हिप्स को चाटने लगा।
एक हाथ से मैंने अपनी पैंट भी उतार दी, जल्दी से टी-शर्ट और बनियान भी उतार दी।

फिर से उनकी टाँगों को चूमने लगा और फिर उनकी पैंटी भी उतार दी।
दिव्या दी की बड़ी गांड देखकर मैं पागल की तरह चाटने लगा।

उनकी गांड को खोलकर गांड के छेद को देखने लगा।
साथ में उनकी चूत भी नज़र आने लगी, जो गीली हो चुकी थी।

चॉकलेट जैसे गांड के छेद को देखकर मैंने जीभ से चाटना शुरू किया।
दिव्या दी की आवाज़ आने लगी।

फिर मैंने उन्हें सीधा किया और उनके लेटे हुए बदन को देखने लगा।
उनकी मदहोश आँखों को देखा।

फिर मैंने उन्हें किस करना शुरू किया और हमारे होंठ मेल खाए।

दूसरे हाथ से मैंने उनके टॉप के अंदर हाथ डालकर पेट को मसलना शुरू किया और कभी-कभी चूत पर हाथ फेरने लगा।

फिर मैं थोड़ा सा उठा और उनके टॉप को उतार दिया।
नीचे दिव्या दी ने व्हाइट ब्रा पहनी थी जो उनके बड़े बूब्स को मुश्किल से कवर कर रही थी।

फिर मैंने ब्रा भी खोल दी।
अब दिव्या दी मेरे सामने पूरी नंगी थीं।

मैंने भी अपना अंडरवियर उतारकर फेंक दिया।
वापस उन्हें अपने साथ चिपकाकर किस करने लगा।
कभी उनकी कमर, कभी गांड के छेद में उंगली घुमाने लगा।

दिव्या दी आँखें बंद करके हल्की-हल्की मदहोश आवाज़ निकाल रही थीं और मेरा जोश बढ़ता जा रहा था।

फिर मैंने उन्हें सीधा लेटाया।
गले पर किस करते-करते उनके बूब्स को दोनों हाथों से पकड़ लिया और चूसने लगा।
सक करते-करते मैंने उनके पेट पर किस किया, नाभि पर जीभ डाली और जीभ से चाटते करते उनकी चूत के पास आ गया।

लेकिन चूत नहीं चाटी बल्कि गोरी गोरी थाई को चूसने लगा जिससे दी जोश में आ गईं।

फिर मैंने अपनी होंठ उनकी चूत के पास लगाए और चूत को चाटने लगा।
देर ना करते हुए चूत में जीभ डाल दी और जीभ से चोदने ने लगा।

अब उनकी चूत को मैं पूरा मुँह में भरकर चूसने लगा।
दिव्या दी ने मेरे सिर को पकड़कर जोर से चूत में दबा दिया।

चूत के साथ-साथ मैंने उनके गान्ड के छेद को भी चाटना शुरू किया।

10-15 मिनट चूसने के बाद मैं उठा।
तेल की बॉटल खोली और उनकी टाँगों, थाई, पेट और बूब्स पर थोड़ा-थोड़ा तेल गिराया।
फिर धीरे-धीरे मसाज करने लगा।

मेरे मसाज करने से दी जोश में आ गईं और अपने हाथों से चूत को मसलने लगीं।

ये देखकर मुझे जोश आ गया।
मैंने अपने बॉडी में भी तेल लगाया और दिव्या दी के ऊपर लेट गया और अपनी बॉडी को रगड़ने लगा।

क्या बताऊँ, क्या जोश! ऐसा लाइफ में कभी एक्सपीरियंस नहीं किया।
मेरा लंड उनके पेट से रगड़ खाने लगा।

फिर मैं उठा और उनके ऊपर बैठ गया, उनके बूब्स में लंड डालकर रगड़ने लगा।
थोड़ी देर ऐसे ही रगड़ने के बाद मेरे लंड से पानी निकलने वाला था।

मैंने बूब्स से लंड बाहर निकाला और सारा पानी उनके पेट पर छोड़ दिया।

फिर लंड से पानी को पूरे पेट में रगड़ने लगा।
फिर उनके ऊपर लेट गया और किस करने लगा।

थोड़ी देर ऐसे हम लिपटकर लेटे रहे और किस करते रहे।

मैं दिल्ली में रहता हूँ और सेक्स का मुझे बहुत शौक है।

मेरा एक दोस्त है जिसका नाम दिनेश है।
दिनेश की शादी 2015 में हुई थी।
मैं उसकी मैरिड बहन से मिला, जो 38 साल की हैं।

उनके दो बच्चे भी हैं और वो एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करती हैं।
उनका नाम दिव्या है।

शादी में बातचीत के दौरान वो मुझसे काफी इम्प्रेस हुईं और हमने नंबर एक्सचेंज कर लिए।

फिर हमारी बातचीत शुरू हो गई।
मैं उन्हें “दिव्या दी” कहकर बुलाता था।

शुरुआत में हमारी बीच नॉर्मल बातें होती थीं।

धीरे-धीरे वो अपनी पर्सनल प्रॉब्लम्स शेयर करने लगीं कि उनके पति ध्यान नहीं देते, सारे काम खुद करने पड़ते हैं।
मैंने उनसे कहा- कोई नहीं, कभी भी कोई काम हो तो आप मुझे बता देना।
उन्होंने थैंक यू कहा।

फिर धीरे-धीरे रोज़ बात होने लगी और एक दिन हमारी बीच दोस्ती हो गई।
फिर मैं उन्हें मिलने के लिए बोलने लगा लेकिन वो मिलने से डरती थीं।

बस ऐसे ही कुछ सालों से सिलसिला चलता रहा।

उन्होंने कहा- दिनेश को पता लग गया तो ठीक नहीं होगा।
मैंने कहा- उसे पता नहीं लगेगा।

फिर मैंने कहा- ठीक है, ओपन में नहीं मिलना तो घर आ जाओ किसी दिन। वहाँ कोई नहीं होगा, थोड़ा-थोड़ा ड्रिंक करके एंजॉय करेंगे।
उन्होंने कहा- देखते हैं।

फिर कुछ दिनों तक उनका फोन नहीं आया।

मैंने फोन किया तो उन्होंने बताया- मेरी घुटनों में बहुत दर्द रहता है।
मैंने कहा- दवाई लो और कहीं जाकर ऑयल मसाज करवाओ।

उन्होंने कहा- कौन करेगा?
मैंने कहा- हसबैंड से करवाओ।”

उन्होंने कहा- वो केयर ही नहीं करते, मसाज क्या करेंगे!

मैंने कहा- आप बोलो तो मैं कर दूँ?
कुछ देर सोचने के बाद उन्होंने कहा- चलो, देखते हैं।

फिर एक दिन उनका सुबह 11 बजे फोन आया- क्या हम आज मिल सकते हैं?

मैं उस टाइम ऑफिस में था।
पहले मना करने वाला था क्योंकि अचानक ऑफिस से छुट्टी कैसे मिलेगी?
लेकिन फिर सोचा — अगर मना कर दिया तो दोबारा मौका कब मिलेगा, पता नहीं।

मैंने कहा- ठीक है, 1 बजे तक मिलते हैं।
उन्होंने कहा- ठीक है, गुड़गाँव आ जाओ।

मैंने पूछा- जाएँगे कहाँ?

उन्होंने कहा- जहाँ आप ले जाओ। ऑयल मसाज तो आपने देनी है।

फिर मैंने अपने एक दोस्त को फोन किया कि मुझे अर्जेंट रूम चाहिए।
वो अकेला रहता है किराए पर।

उसने कहा — ऑफिस आ जा!
मैं उसके ऑफिस गया, रूम की चाबी ली और साइबर हब चला गया बाइक से।

वहाँ मेट्रो के नीचे दिव्या दी को देखा तो देखता रह गया।
टाइट जींस में एकदम चब्बी फिगर में मस्त लग रही थीं।

मैंने कंट्रोल किया, बाइक रोकी।
वो बाइक पर बैठ गईं और सीधे सेक्टर 29 में अपने दोस्त के घर चला गया।

रास्ते से मैंने मसाज ऑयल भी ले लिया और कुछ खाने को भी, क्योंकि लंच टाइम था।

फिर हम रूम के अंदर गए, फ्रेश होकर कुछ खाया।
मैं कुर्सी पर बैठा था और दिव्या दी बेड पर बैठी थीं।

थोड़ी देर बात करने के बाद मैंने हिम्मत करके पूछा- बात ही करनी है या मसाज भी?
वो हँसने लगीं और शरमाने भी लगीं।

मैं हिम्मत करके उनके पास चला गया और बेड पर उनकी टाँगों के पास बैठ गया।

फिर मैंने पूछा- क्या मैं आपको छू लूँ?
वो हँसने लगीं।

मैंने हिम्मत कर उनके पैरों को छूना शुरू किया और पैरों की उँगलियों को पकड़कर रब करने लगा।
दिव्या दी मेरी तरफ देखकर हँस रही थीं।

फिर मैंने उनके घुटनों को जींस के ऊपर से छूकर हल्का-हल्का मसाज देना शुरू किया।
उन्हें अच्छा फील हो रहा था।

दिव्या दी ने पूछा- कहाँ से सीखा?
मैंने कहा- यू ट्यूब से देखकर।

फिर मैं ऐसे ही थोड़ी देर रब करता रहा।
दिव्या दी की आँखें बंद थीं, वो आनंद ले रही थीं।

फिर मैं धीरे-धीरे जींस के ऊपर से थाई पर हाथ फेरने लगा।

दिव्या दी ने आँखें खोलकर मेरी तरफ देखा लेकिन कुछ बोली नहीं।
मैं चुपचाप करता रहा — उनकी थाई को रब किया और धीरे-धीरे जींस के ऊपर से उनकी पेट तक हाथ ले गया।

फिर मैंने कहा- आप उल्टा लेट जाओ।
वो उल्टा हो गईं।
जैसे ही वो उल्टा हुईं, उनकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरा मुँह से सीत्कार निकल गई (जो मैंने कंट्रोल किया) और मेरा लंड टाइट हो गया था।

मैंने उनकी पैरों की तलवों को फिंगर्स से हल्का-हल्का दबाया, लेकिन मेरी नज़र उनकी गांड पर थी और मन कर रहा था कुछ करने का।
फिर मैंने उनकी टाँगें दबानी शुरू कीं।

5 मिनट दबाने के बाद उनकी जांघ दबाने लगा।
थोड़ी देर दबाने के बाद मैंने उनकी बड़ी गांड पर हाथ रख दिया।

दिव्या दी के मुँह से “आह…” की आवाज़ निकलने लगी।
फिर मैं उनकी गांड को दबाते हुए उनकी कमर को दबाने लगा।
और उनके टॉप के अंदर हाथ डाल दिया और कमर को रब करने लगा, हल्के-हल्के दबाने लगा।

फिर मैं उनकी कमर में बैठकर उनके पेट में मसाज देने लगा और जींस का बटन खोलने की कोशिश करने लगा लेकिन खुला नहीं।
दिव्या दी समझ गईं मेरे इशारे को। उन्होंने खुद ही अपना जींस का बटन खोल दिया।

मैंने देर ना करते हुए उनकी जींस नीचे करने लगा।
वो अपना पेट उठाने लगीं ताकि जींस आराम से उतर जाए।

जैसे ही मैंने उनकी जींस उतारी, दिव्या दी ने व्हाइट कलर की पैंटी पहनी हुई थी।
उसे देखकर मैं पागल हो गया।

उनकी गोरी गोरी आधी बाहर निकली हुई गांड और गोरी गोरी थाई देखकर मैं बेकाबू हो गया।

मैंने देर ना करते हुए पैंटी के ऊपर से उनकी गांड सूंघना शुरू किया, जोर से बाइट करने लगा।
दिव्या दी मदहोश होने लगीं।

मैंने पैंटी को उनके ऐस्स क्रैक में डालकर हिप्स को चाटने लगा।
एक हाथ से मैंने अपनी पैंट भी उतार दी, जल्दी से टी-शर्ट और बनियान भी उतार दी।

फिर से उनकी टाँगों को चूमने लगा और फिर उनकी पैंटी भी उतार दी।
दिव्या दी की बड़ी गांड देखकर मैं पागल की तरह चाटने लगा।

उनकी गांड को खोलकर गांड के छेद को देखने लगा।
साथ में उनकी चूत भी नज़र आने लगी, जो गीली हो चुकी थी।

चॉकलेट जैसे गांड के छेद को देखकर मैंने जीभ से चाटना शुरू किया।
दिव्या दी की आवाज़ आने लगी।

फिर मैंने उन्हें सीधा किया और उनके लेटे हुए बदन को देखने लगा।
उनकी मदहोश आँखों को देखा।

फिर मैंने उन्हें किस करना शुरू किया और हमारे होंठ मेल खाए।

दूसरे हाथ से मैंने उनके टॉप के अंदर हाथ डालकर पेट को मसलना शुरू किया और कभी-कभी चूत पर हाथ फेरने लगा।

फिर मैं थोड़ा सा उठा और उनके टॉप को उतार दिया।
नीचे दिव्या दी ने व्हाइट ब्रा पहनी थी जो उनके बड़े बूब्स को मुश्किल से कवर कर रही थी।

फिर मैंने ब्रा भी खोल दी।
अब दिव्या दी मेरे सामने पूरी नंगी थीं।

मैंने भी अपना अंडरवियर उतारकर फेंक दिया।
वापस उन्हें अपने साथ चिपकाकर किस करने लगा।
कभी उनकी कमर, कभी गांड के छेद में उंगली घुमाने लगा।

दिव्या दी आँखें बंद करके हल्की-हल्की मदहोश आवाज़ निकाल रही थीं और मेरा जोश बढ़ता जा रहा था।

फिर मैंने उन्हें सीधा लेटाया।
गले पर किस करते-करते उनके बूब्स को दोनों हाथों से पकड़ लिया और चूसने लगा।
सक करते-करते मैंने उनके पेट पर किस किया, नाभि पर जीभ डाली और जीभ से चाटते करते उनकी चूत के पास आ गया।

लेकिन चूत नहीं चाटी बल्कि गोरी गोरी थाई को चूसने लगा जिससे दी जोश में आ गईं।

फिर मैंने अपनी होंठ उनकी चूत के पास लगाए और चूत को चाटने लगा।
देर ना करते हुए चूत में जीभ डाल दी और जीभ से चोदने ने लगा।

अब उनकी चूत को मैं पूरा मुँह में भरकर चूसने लगा।
दिव्या दी ने मेरे सिर को पकड़कर जोर से चूत में दबा दिया।

चूत के साथ-साथ मैंने उनके गान्ड के छेद को भी चाटना शुरू किया।

10-15 मिनट चूसने के बाद मैं उठा।
तेल की बॉटल खोली और उनकी टाँगों, थाई, पेट और बूब्स पर थोड़ा-थोड़ा तेल गिराया।
फिर धीरे-धीरे मसाज करने लगा।

मेरे मसाज करने से दी जोश में आ गईं और अपने हाथों से चूत को मसलने लगीं।

ये देखकर मुझे जोश आ गया।
मैंने अपने बॉडी में भी तेल लगाया और दिव्या दी के ऊपर लेट गया और अपनी बॉडी को रगड़ने लगा।

क्या बताऊँ, क्या जोश! ऐसा लाइफ में कभी एक्सपीरियंस नहीं किया।
मेरा लंड उनके पेट से रगड़ खाने लगा।

फिर मैं उठा और उनके ऊपर बैठ गया, उनके बूब्स में लंड डालकर रगड़ने लगा।
थोड़ी देर ऐसे ही रगड़ने के बाद मेरे लंड से पानी निकलने वाला था।

मैंने बूब्स से लंड बाहर निकाला और सारा पानी उनके पेट पर छोड़ दिया।

फिर लंड से पानी को पूरे पेट में रगड़ने लगा।
फिर उनके ऊपर लेट गया और किस करने लगा।

थोड़ी देर ऐसे हम लिपटकर लेटे रहे और किस करते रहे।

इसके बाद हम वॉशरूम में एक साथ गए।
दिव्या दी अभी भी थोड़ी शरमाई हुईं लग रही थीं लेकिन उनकी आँखों में वही मदहोश चमक थी।
शावर ऑन किया, गुनगुना पानी दोनों के ऊपर बहने लगा।

मैंने उनके पीछे खड़े होकर उन्हें अपनी बाहों में लिया।
उनकी पीठ मेरे सीने से सटी हुई थी।
मेरा लंड फिर से सख्त हो चुका था और उनके निचले हिस्से में दब रहा था।

मैंने बॉडीवॉश लिया और पहले उनकी कमर पर, फिर दोनों बूब्स पर लगा दिया।
फोम बनते ही मैंने दोनों हाथों से उनके बूब्स को अच्छे से मसलना शुरू कर दिया।

निप्पल्स पहले से ही खड़े हुए थे — मैंने उन्हें उँगलियों से हल्का-हल्का पकड़कर घुमाया।
दिव्या दी के मुँह से “हाय…” जैसी आवाज़ निकली।

फिर मैं नीचे झुका, उनके पेट पर, नाभि में फोम डाला और उँगली से खेलने लगा।
धीरे-धीरे हाथ उनकी चूत पर ले गया।

पानी और फोम के साथ मिलकर उनकी चूत बहुत स्लिपरी हो चुकी थी।

मैंने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।
दिव्या दी ने अपना एक हाथ पीछे करके मेरे लंड को पकड़ लिया।
उन्होंने उसे अच्छे से मसलना शुरू किया — ऊपर-नीचे, कभी सिर को हल्का दबाकर।

मुझे लगा अभी थोड़ा और जोर लगाऊँगा तो वहीं पानी छूट जाएगा।
मैंने उन्हें घुमाया, अब वो मेरे सामने थीं।

हमने एक गहरी किस की — जीभ अंदर डालकर, चूसते हुए।
पानी दोनों के चेहरे पर बह रहा था।
फिर मैंने उनकी एक टाँग को हल्का ऊपर उठाया और दीवार से सटाया।
मेरा लंड उनकी चूत के ठीक सामने था।

मैंने उनकी आँखों में देखा — वो बस हाँ में सिर हिला रही थीं।
धीरे से मैंने लंड का सुपारा उनकी चूत पर रगड़ा।
वो पहले से ही बहुत गीली थीं।
एक झटके में आधा लंड अंदर चला गया।

दिव्या दी ने “आह्ह्ह…” करके मेरी कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया।
मैं रुक गया, उन्हें एडजस्ट होने का मौका दिया।
फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर डाल दिया।

उनकी चूत बहुत टाइट थी — शायद लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुई थी।
मैंने धीमी गति से चोदना शुरू किया।
हर थ्रस्ट के साथ वो “उफ्फ… हाय… और जोर से…” जैसी आवाजें निकाल रही थीं।

पानी की आवाज, हमारे बदन के टकराने की आवाज और उनकी सिसकारियाँ — पूरा वॉशरूम गूँज रहा था।
कुछ देर ऐसे ही करने के बाद मैंने रफ्तार बढ़ाई।
अब जोर-जोर से धक्के मार रहा था।
उनकी गांड दीवार से टकरा रही थी।

मैंने एक हाथ से उनकी गांड पकड़ी और उसे दबाते हुए और जोर से चोदा।
दिव्या दी अब पूरी तरह खुल चुकी थीं।
उन्होंने कहा- जोर से… और जोर से चोदो… मैं बहुत दिन से तरस रही हूँ!

ये सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया।
मैंने उन्हें घुमाया — अब वो दीवार की तरफ मुँह करके खड़ी थीं।
पीछे से मैंने फिर से लंड डाला और जोर-जोर से पेलना शुरू कर दिया।

मैं एक हाथ से उनके बूब्स मसल रहा था, दूसरे से कमर पकड़कर खींच रहा था।
कुछ मिनट बाद मैंने महसूस किया कि वो झटके खा रही हैं — उनका ऑर्गेज्म आने वाला था।
उनकी चूत सिकुड़ने लगी, मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।

वो चिल्लाईं- आ गया… आ रहा है… मत रुकना!”
मैंने और तेज़ चोदना शुरू किया।
वो काँपते हुए झड़ गईं — उनकी चूत से पानी निकलने लगा।

मुझे भी अब रुकना मुश्किल हो रहा था।
मैंने पूछा- अंदर डाल दूँ?
उन्होंने हाँफते हुए कहा- हाँ… डाल दो… पूरा भर दो!

बस दो-तीन और जोरदार धक्के और मैंने पूरा पानी उनके अंदर छोड़ दिया।
बहुत सारा… गर्म-गर्म।

हम दोनों कुछ देर ऐसे ही खड़े रहे — मैं पीछे से चिपका हुआ, लंड अभी भी अंदर।
फिर धीरे-धीरे मैंने अपना लंड दीदी की चूत से बाहर निकाला।

हम दोनों ने एक-दूसरे को देखा और हँस पड़े।
फिर हम शावर के नीचे फिर से साफ हुए, साबुन लगाकर, एक-दूसरे को अच्छे से धोया।

वो मेरे लंड को हाथ में लेकर हल्के से साफ कर रही थीं प्यार से।

हिंदीXxx चुदाई करके बाहर आकर हमने कपड़े पहने।
दोनों थक चुके थे लेकिन चेहरों पर संतुष्टि थी।

मैंने कहा- दी… आज बहुत अच्छा लगा।
उन्होंने शरमाते हुए कहा- मुझे भी… लेकिन ये किसी को पता नहीं चलना चाहिए।
मैंने हामी भरी।

फिर हमने रूम छोड़ा, अलग-अलग निकले।
बाइक पर बैठकर घर जाते वक्त मेरा दिमाग अभी भी उसी में था।
पता नहीं अगली बार कब मिल पाएँगे… लेकिन ये शुरुआत थी।

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