थ्रीसम सेक्स कहानी में मैं, मेरे पति, मेरा देवर देवरानी मिल कर चुदाई करते थे. देवरजी काम से दूसरे शहर चले गए। वे जाते समय मुझे देवरानी की चूत का ख्याल रखने को कह गये.
दोस्तो, मैं वृत्ति चौधरी अपनी सेक्स कहानी के दूसरे भाग में आपका स्वागत करती हूं।
मैंने कहानी के पहले भाग
देवरानी को पति से चुदवाकर देवर से चुदी मैं
में बताया था कि कैसे देवर के यहां नहीं होने पर मैंने देवरानी को थ्रीसम चुदाई के लिए राजी किया था और अब थ्रीसम सेक्स कहानी के अगले भाग में पढ़ें कि कैसे देवरानी की, और मेरी एकसाथ चुदाई हुई।
जिस दिन देवरजी गए हम लोगों को शादी में जाना था।
हम दोनों सजकर गईं और फिर शाम को लौट आईें।
मै सीमा को अपने ही रूम में ले आई।
उसने गुलाबी ड्रेस पहनी थी और नाक में नथ थी।
सिर पर रखड़ी सेट, हाथों में मेंहदी आदि में बहुत ही ज्यादा सुंदर और सेक्सी लग रही थी।
हमारा राजस्थानी पहनावा ही ऐसा है।
फिर वो हमारे रूम में आ गई और पलंग पर बैठ गई।
इतने दिन से वो पति के साथ थी तो सहज रहती थी लेकिन आज उदास थी।
पराये मर्द के पास बेचैनी महसूस हो रही थी शायद उसे क्योंकि अभी आपस में चुदाई करते समय हमें ज्यादा समय नहीं बीता था।
दूसरी ओर वो अकेली होने से डरी हुई थी।
हालांकि अभी तक हमने कभी भी थ्रीसम सेक्स (खुलकर) नहीं किया था।
तो आज पहली बार दो चूतों और एक लन्ड का आमना-सामना होने वाला था।
फिर थोड़ी देर बातें करने के बाद मेरे पति ने देवरानी को धीरे-धीरे नंगी करना शुरू किया।
सबसे पहले उसे अपनी गोदी में बैठाया और उसके बूब्स मसलने लगे।
हालांकि अभी तक बूब्स ज्यादा बड़े नहीं हो पाए थे।
देवरानी का बदन अभी तक उतना तो भरा नहीं था जितना कि मेरा था।
लेकिन मेरे पति ने स्वैपिंग के दौरान उसके बूब्स बहुत ज्यादा ही मसले थे जो अब धीरे-धीरे बड़े हो रहे थे।
उस दिन देवरानी गहने पहने हुए थी क्योंकि उसी दिन ही हम दोनों शादी से आईं थीं।
सोने के पीले गहने उसकी सुंदरता पर चार चांद लगा रहे थे।
पति ऐसे आगे बढ़ रहे थे जैसे उनकी सुहागरात हो।
सुहागरात की तरह ही सबसे पहले उसका मंगल सूत्र उतारा।
चुदाई में उसके आड़े आने की संभावना थी और ऊपर बैठकर उछलते समय वो मर्द के मुंह पर भी लग सकता था इसलिए उसे उतारना जरूरी था।
मंगल सूत्र उतार कर उन्होंने फिर गले से सोहन कंठी उतार दी।
फिर बाद में आड़ भी उतार दी जो शुद्ध सोने की बनी हुई होती हैं। फिर रखड़ी सेट भी उतार दिया।
थोड़ी देर बाद सब गहने उतर चुके थे।
अब देवरानी सिर्फ गुलाबी ड्रेस में ही नजर आ रही थी।
अब मैं भी पास बैठी-बैठी क्या करती।
मैं भी देवरानी के जिस्म से खेलने लगी और पति की गोद में बैठ गई।
अब मेरे पति पलंग पर टांगें फैलाकर बैठे थे।
उनकी बाईं जांघ पर देवरानी बैठी थी जो उनके गले से लिपटी हुई थी।
दाहिनी जांघ पर मैं बैठी हुई थी।
वो एक बार उसके बूब्स मसलते और एक बार मेरे बूब्स मसलते।
फिर मैंने अपनी ड्रेस खुद ही उतार दी।
मैं उनकी गोदी में ब्रा-पैंटी में जाकर बैठ गई।
थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरी ब्रा-पैंटी उतार कर मुझे पूरी नंगी कर दिया और मेरे बूब्स चूसने लगे।
उधर देवरानी भी दूसरी जांघ पर बैठी हुई मेरे दूध चूस रही थी।
कुछ मिनट बाद उन दोनों ने मुझे पलंग पर लिटा दिया और दोनों पास लेट कर मेरे बूब्स चूसने लगे।
मेरा दायां बूब पति के पास था और बायां सीमा के पास था।
यह दृश्य देख कर मैं तो जैसे पागल हो गई।
मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया जिससे मैं थोड़ी सी शांत हो गई।
कुछ देर बाद मैं उठकर एक तरफ सरक ली।
अब पति ने सीमा को मेरी जगह पर लेटा दिया।
मैं पति के जिस्म को छेड़ने लगी और पति सीमा के जिस्म को छेड़ने लगे।
जब मेरा हाथ उसकी चूत पर पहुंचा तो उसे सिहरन सी हुई।
इधर मेरी चूत को पानी छोड़े हुए भी काफी समय हो चुका था जिससे मेरा हाथ भी पानी से भीग चुका था।
फिर सीमा ने भी अपने हाथ मेरी चूचियों पर रख दिए।
मेरी चूचियों में तनाव सा आने लगा।
पति सीमा के बूब्स मसल रहे थे।
मैं सीमा की चूत में उंगली कर रही थी।
सीमा मेरे बूब्स मसल रही थी जिससे बहुत मजा आ रहा था।
फिर हम दोनों (मैं और सीमा) ने मिलकर पति को बेड पर लिटा दिया।
हमने पति को कपडे़ उतार नंगा कर दिया।
अंडरवियर छोड़ दिया था और उसमें पति का लंड एकदम से टाइट हो कर तना हुआ था।
लंड किसी डंडे जैसा सख्त लग रहा था।
उसे देखकर लग रहा था जैसे वो सांड हमारी चूत के चिथड़े उड़ाने के लिए बेसब्र हो रहा हो।
पति के चहरे पर हम दोनों को चोदने की हवस साफ झलक रही थी।
लग रहा था जैसे हम मुर्गी हैं और वो हमें हलाल करने वाले हैं।
मैंने लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही हाथ में ले लिया।
सीमा से भी जैसे रहा न गया।
उसने पति के अंडरवियर को उतार दिया और एकदम से लंड को मुंह में भर लिया।
मुंह में जाते ही उसने पति के लंड को तेजी से चूसना शुरू कर दिया।
वो लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे उसके हाथ कोई लॉलीपोप लग गया हो।
ऐसा लग रहा था जैसे उसके मुंह में आइसक्रीम दे रखी हो और वो मजे से उसे खा रही हो।
मैं देखकर हैरान थी कि सीमा इतनी खुल गई थी।
अब पति ने सीमा को मेरे पास लिटा दिया, उसकी टांगें उठाकर गांड के नीचे तकिया लगा दिया।
इससे देवरानी की चूत का छेद एकदम से खुल गया।
अब उन्होंने उसकी चूत पर लंड का टोपा सेट कर दिया।
सीमा की चूत की फांकों में अब लंड टच होने से बेचैनी होने लगी।
ऐसा लगा जैसे चूत की फांकें अब खुद ही खुलने लगी हों।
उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
आखिर में वो बोल ही पड़ी- अंदर डाल दो, अब देर मत करो।
जब चूत खुद ये चाहने लगे कि लंड अंदर आ जाए तो किसी से भी बोले बिना नहीं रहा जाता है।
इतने में ही पति ने लंड को सीमा की चूत में धक्का देते हुए अंदर सरका दिया।
चूत गीली होने के कारण उसकी फांकें थोड़ी खुली हुई थीं।
अब उसके जेठ का लंड उसकी चूत में प्रवेश कर चुका था।
मोटा लंड उसकी चूत में आते ही चूत की बांछें खिल गईं और वो अपने जेठ जी से लिपट गई।
उसने खुद को जेठजी के हवाले कर दिया और उनका पूरा लंड उसकी चूत में उतर गया।
उसने अपनी दोनों टांगें उठाकर जेठ जी की गांड पर रख लीं और जेठजी चूत में धक्के मारने लगे।
मैं पास में बैठी-बैठी अपने पति की गांड पर हाथ फेरने के अलावा कुछ भी नहीं कर सकती थी और अपनी बारी का इंतजार करने लगी।
बीच बीच में पति मुझे भी चूमते रहे थे।
ऐसा लग रहा था जैसे महीनों बाद सुख की बारिश हो रही है और हम दोनों जमकर भीग रहीं हैं।
उसने मेरे पति के होंठों को चूसते हुए अपनी चूत अच्छी तरह से उनके लिए खोल दी।
उनके हर धक्के के साथ उसकी गांड तकिए से नीचे सरक रही थी और पूरे कमरे में चूत की चुदाई की आवाज आ रही थी- पच-पच … पच-पच … फच-फच!
सीमा भी चुदाई के पूरे मजे ले रही थी और हल्की-हल्की सिसकारी ले रही थी।
लगभग 10 मिनट तक लगातार चुदाई चलती रही।
बीच में एक बार मैंने चुदाई रुकवा कर तकिए को वापस सही किया।
दोबारा से धक्कम पेल चालू हो गई।
कमरे में पलंग की चरर्र-चरर्र … की आवाज हो रही थी।
फिर थोड़ी देर चोदने के बाद उन्होंने उसे पलटा लिया और घोड़ी बनाकर पीछे से उसकी चूत में लंड चढ़ा दिया।
अब मैं उन दोनों के नीचे लेट गई और बूब्स मसलने लगी।
उनके धक्के सीमा चूत की बखियां उधेड़ने लगे।
ऐसा लग रहा था जैसे वो सालों से प्यासे हों और आज जाकर चूत मारने को मिली हो।
इधर अब मेरी मेरी चूत की दीवारें तड़पने लगीं थीं।
मन कर रहा था मैं बस चुदाई करवा लूं। अब नहीं रुका जाएगा।
15 मिनट तक उन्होंने घोड़ी बनाकर देवरानी को पेला।
फिर वो सीमा की चूत में खाली होने लगे, धक्के मारते हुए धीमे पड़ गए और रुक कर हांफने लगे।
वो फिर बेड पर एक तरफ लेट गए।
सीमा भी बेहाल सी थी।
मेरे पति ने कुछ देर आराम किया।
थोड़ी देर बाद उनका लन्ड फिर से तैयार हो गया तो उन्होंने एक बार फिर से सीमा की दमदार चुदाई की।
दो बार चुदाई के बाद वो पूरी तरह से थक गए।
वो अब काफी देर आराम करते रहे।
मैं अपनी बारी का इंतजार करती रही कि अब मेरे पति मुझे चोदने वाले हैं।
मुझे उनके स्वागत की तैयारी करनी थी।
हालांकि सीमा की दमदार चुदाई के बाद भी वो एकदम तैयार थे।
उनका यह जोश बता रहा था कि उनमें चुदाई की हवस किस कदर भरी थी।
सुबह ही मैंने अपनी झांटें अच्छे तरीके से साफ की थीं क्योंकि पहली बार थ्रीसम हो रहा था।
तो मैं भी इसके लिए पूरी तैयारी कर रही थी।
आज मुझे मेरे पति का 2 हफ्ते बाद लन्ड मिलने वाला था क्योंकि इतने दिन स्वैपिंग में ज्यादातर वो सीमा को ही चोदते थे।
हालांकि वो मुझे बिल्कुल तो नहीं भूले थे।
आज इतना तो निश्चित था कि वो जी भर कर मुझे चोदेंगे।
आज रात मैं भी उनको निहाल करने वाली थी।
मैं और मेरी चूत भी चुदने के लिए बेकरार थीं।
काफी देर से सीमा को चुदते हुए देख कर मेरी चूत कई बार पानी छोड़ चुकी थी।
मेरे 34 इंची बूब्स, 30 इंच की कमर और मेरी 36 इंच की गांड, मेरा पूरा गदराया हुआ भरापूरा बदन आज पति जमकर भोगने वाले थे।
उन्होंने सबसे पहले मेरे मधु भरे होंठों पर अपने प्यासे होंठ रख दिए, जी भर कर मेरे होंठों का रस लिया।
उसके बाद मेरे दोनों अमृत कलश से खेला, मेरे दोनों स्तनों को खूब सहलाया, खूब मसला, खूब दबाया।
फिर उन्होंने मेरी किशमिश जैसी निप्पल, जो अभी वासना की आंच में तप कर अंगूर जैसी फूल गई थीं, उनको मुंह में लिया और जुबान से कस कसकर उनका रस चूसने लगे।
मेरी चूत रिस रही थी और मेरे शरीर में काम तरंगें उठने लगी थीं।
मैं बार-बार उनके लंड को सहला रही थी और नीचे की ओर दबा-दबाकर उसका तनाव बढ़ा रही थी।
अब पति ने मेरी रसीली चूत पर अपने प्यासे होंठ टिका दिये, मेरी चूत से काम रस की धारा छूटने लगी।
वो हमेशा कहते थे कि दुनिया में चूत रस से ज्यादा नशीला और स्वादिष्ट पेय कोई दूसरा नहीं बना है।
वो मेरी चूत के नशे में डूबे हुए थे।
अचानक मेरी चूत में में हलचल हुई, मुझे लगा कि सुसु आ रहा है।
यदि करके नहीं आई तो पति के मुंह में ही निकल सकता है।
तो मैंने कहा- यार 2 मिनट रुको, मैं सुसु करके आती हूं।
उसके बाद मैं सुसु करके आई और आकर चित लेट गई।
चुदने को एकदम तैयार, अब बस चुदने को बेकरार मेरी चिकनी चूत थी और उनका लन्ड था जो चोदने को बेताब था।
उन्होंने, जैसी कि आदत है, मेरे घुटनों को मोड़ा और अपना अच्छा खासा मोटा लंड मेरी चूत पर टिका कर एक झटके में पूरा अंदर कर दिया।
उसको जड़ तक दबाकर दो-तीन मिनट तक लंड के तनाव का और मेरी चिकनी चूत की नर्मी और गर्मी का मजा लेते रहे।
उसके बाद बोले- यार वृत्ति, आज तो ऐसा लग रहा है, जैसे सुहागरात के दिन पहली बार तेरी चूत में लंड घुसेड़ते समय लगा था। आज तेरी चूत पूरी टाइट लग रही है।
शायद देवरानी की चुदाई करने के बाद अब चूत बदल जाने से उनको ऐसा लग रहा था।
फिर उन्होंने दो-तीन लंबी-लंबी सांसें लीं और रुक रुककर मेरी चूत को रगड़ना शुरू किया।
पास में ही सो रही देवरानी अब धीरे-धीरे एक्टिव हो रही थी।
इतनी देर में वो काफी थक चुकी थी।
आज पति चोदने में इतना खोए थे कि मेरे बोबों पर ध्यान दिए बिना ही चूत में धक्के लगाए जा रहे थे।
मैं भी गांड सिकोड़ कर, कमर को हिला हिलाकर उनके हर धक्के का जवाब दे रही थी।
उनके हर धक्के में असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही थी।
उनेके मुंह से हमेशा की तरह तारीफ निकल रही थी- आज तो तेरी चुदाई करने में बहुत मजा आ रहा है!
तारीफ सुनकर मैं भी उसी गति से उछल उछलकर उनके हर करारे धक्के का जवाब दे रही थी।
चुदाई का ये दृश्य ऐसा था जैसे किन्हीं दो बराबर के तगड़े पहलवानों में कुश्ती हो रही हो।
कुछ ही देर में हम दोनों की सांसें भारी हो चली थीं।
हम दोनों के शरीर अकड़ गए, नसें खींच गईं।
और फिर स्खलन का वो जादुई पल आया जिसके लिए जगत का हर प्राणी तरसता है, जिसके लिए हर मर्द और हर औरत चुदाई में कड़ी मेहनत करके पसीने पसीने हो जाते हैं।
हम दोनों ने चरम सुख के इस पल का आनन्द लिया।
वो निढाल होकर मुझ पर गिर पड़े- यार कुछ तो बोल, मेरी गांड पसीने में भीग गई लेकिन समझ नहीं आ रहा कि तू आज इतनी चुप क्यों है?
मैं कुछ नहीं बोली।
उनके मेरे ऊपर से हटते ही सीमा उनसे लिपट गई।
वो फिर से लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी।
फिर दोनों ने एक दूसरे के होंठों को खूब चूसा।
हालांकि मेरे पति दो राउंड के बाद काफी थक चुके थे।
रोज-रोज चुदाई में एक राउंड ही सेक्स होता है लेकिन आज ज्यादा हो गया था।
तभी वो बोले- सीमा, मुझे तुम्हारी गांड मारनी है।
वैसे सीमा की गांड उनके दिल में बस चुकी थी।
पता नहीं कौन सा मजा आता था उनको देवरानी की गांड चुदाई में।
सीमा ने कहा- मार लेना … कहीं भागी नहीं जा रही हूं! मुझे तुम्हारा लंड इतना पसंद आया है कि अब तो तुम जब बोलोगे, मैं तुम्हारे लंड की सेवा में हाजिर हो जाऊंगी। लेकिन पहले मेरी चूत एक बार और अच्छे से चोद दो यार, बहुत भूखी है मेरी चूत लंड के रगड़ों के लिए!
उसके बाद पति, मैं और सीमा, तीनों उठे और अपनी चूत और लंड अच्छे से धो कर के वापस आए।
उसके बाद शुरू हुआ कामुकता का एक और, मस्ती तथा आनन्द का नशीला दौर।
पहले तो सीमा ने मेरे पति का लंड चूसना शुरू किया जो एकदम धुला हुआ तरोताजा नर्म पड़ा हुआ था।
एक पराई औरत यदि मर्द का लंड चूसे तो उसके लिए इससे ज्यादा आनन्द की कोई बात नहीं हो सकती।
धीरे-धीरे उनके लंड में जान आई।
वह सेमी इरेक्ट कंडीशन में आया।
इस कंडीशन में मुझे लंड चूसने में बहुत मजा आता है।
तो सीमा के मुंह से लन्ड मैंने अपने मुंह में ले लिया।
आज तो मेरे मुंह में, मुझे जन्नत की सैर कराने वाला मेरा मनपसंद, एक अपने मर्द का मांसल लंड था, इतने दिनों से देवर का होता था।
ऐसी इच्छा हो रही थी कि ये घड़ियां कभी खत्म ना हों।
फिर जब पति का लंड थोड़ा कड़क हो गया तो सीमा ने भी चाटना शुरू कर दिया था।
मैंने तय किया कि अब मुझे ही चुदना है, बाद में भले ही सीमा की गांड मारें क्योंकि गांड में जाने के बाद लंड गंदा हो जाता है तो चुदाई के बीच में मुंह में भी नहीं ले सकते हैं।
उसके बाद हम दोनों 69 की पोजीशन में आए।
पहले मैं उनके ऊपर आई, ऐसी स्थिति में लंड चूसना सबसे ज्यादा आरामदेह होता है।
फिर वे मेरे ऊपर आए, इस पोजीशन में उनके लंड को ज्यादा तनाव मिल रहा था।
हम दोनों ने 10-15 मिनट तक ओरल सेक्स का मजा लिया।
फिर जब मुझसे रहा नहीं गया, और मेरे शरीर में मर्द के शरीर के नीचे दबने की इच्छा उठने लगी, मेरी चूत पति के लंड के लिए मचलने लगी तो मैंने कहा- अब जरा कस कर चोद दो इस चूत को … जो तुम्हारे लंड के रगड़ों के लिए तड़प रही है।
पति का लंड तो तैयार था ही मेरी चूत में घुसने को!
इस बार उन्होंने पूरा वजन मेरे ऊपर डाल दिया और फिर पीछे से गांड उठाकर अपना कड़क लंड मेरी चूत के ऊपर टिका कर एक जोर का झटका दिया।
लंड और चूत हम दोनों की मुखलार से तरबतर चिकने थे इसलिए लंड फिसलता हुआ जड़ तक अंदर चला गया।
उसके बाद उन्होंने अपने आप को लंबी रेस के लिए तैयार किया और हौले-हौले धक्के लगाना शुरू किया।
ऐसे ही धक्के मेरी चाहत थी, ऐसे ही धक्कों में राहत थी।
हर धक्का मुझे जन्नत की सैर करा रहा था।
थोड़ी देर तक धीरे-धीरे चुदने के बाद मेरी चूत मुझसे कहने लगी कि अब मेरे को जोरों के रगड़े चाहिए, जोरों के रगड़े।
मैंने कहा- अब कस कर रगड़ दो मेरी चूत को मेरे जालिम राजा, कस कर रगड़ दो।
अब उन्होंने जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया था।
वो अब तक दो बार झड़ चुके थे इसलिए इस बार उन्हें पर्याप्त समय लगना था झड़ने में!
करीब 10 मिनट की लगातार भीषण चुदाई के बाद मेरी चूत में जैसे भूकंप सा आया, मेरी आंखें बंद हो गईं, सांसें फूल गई और चूत के फड़कने में इतना आनन्द मिल रहा था कि मैं सारी दुनिया भूल चुकी थी।
वो भी अपने लंड में उठ रहे मस्ती के ज्वार भाटे में सिर से पैर तक भीग चुके थे।
फिर मेरी चूत की आग उनके लंड से निकले वीर्य के कतरों से ठंडी होने लगी।
मेरा जिस्म निढाल होने लगा और वो भी पसीने में लथपथ होकर मेरे ऊपर गिर पड़े।
5 मिनट तक मैं उनके वजन का आनन्द लेती रही।
सच पूछो तो औरत के लिए किसी जवां मर्द के नीचे दबे रहने का सुख, बहुत बड़ा सुख है, मर्द के नीचे दब कर उसकी सारी थकान, सारी असुरक्षा की भावना, सारा तनाव, सब समाप्त हो जाता है।
उस समय उसे ऐसा एहसास होता है कि सुकून के ये पल कभी खत्म ना हों।
उसके बाद हम तीनों गहरी मीठी नींद में एक दूसरे से लिपट कर सो गए।
सीमा चुदवाना चाहती थी लेकिन पति थक चुके थे।
थ्रीसम सेक्स करके हम तीनों ही नंगे ही सो गए।
मगर सोने से पहले पति ने सीमा से कहा- सुबह उठते ही सबसे पहले तेरी गांड मारूंगा।
सुबह जब मेरी नींद खुली तो पति सीमा को घोड़ी बना कर चोद रहे थे।
लेकिन उन्होंने अभी उसकी गांड नहीं मारी थी।
फिर मैं सो गई।
सुबह चाय बनाने के बाद सीमा ने मुझे आवाज देकर जगाया और हम तीनों ही चाय पीने लगे।
फिर हमने अपने कपड़े पहन लिए।
थोड़ी देर बाद हम फ्रेश हुए।
उसके बाद मेरे पति ने उस रात उसकी चूत और गांड मारी।
लगभग 5 से 6 दिन तक लगातार हम दोनों को ही एकसाथ पति ने जमकर चोदा।
उसके बाद सीमा का भाई आया और उसे उसके पीहर ले गया।
10 से 12 दिन बाद वो फिर से वापस आई।
हमारी चुदाई इस तरह ही चलती रही।
होली तक उसे मेरे पति ने जमकर चोदा।
चूत और गांड के दोनों ही छेद बहुत ही ज्यादा बड़े कर दिए।
होली के आसपास देवर भी गुजरात से वापस लौट कर आ गए थे और इस दौरान भी उन्होंने भी हम दोनों को जमकर चोदा।
पति घर में नहीं होते थे तब वो ही हम दोनों को घोड़ियां बनाकर चोदता था।
इस तरह मुझे भी अब दो-दो लन्ड से चुदने का मौका मिलने लग गया था।
मार्च महीने में देवर ने एक बार हम दोनों को फसल से भरे हुए खेत में घोड़ियां बनाकर चोदा था।
हमने बहुत मना किया था लेकिन उनको आउटडोर सेक्स में मजा आता था।
उसके बाद देवरानी मार्च में ही देवर के साथ गुजरात चली गई और इस कारण हमारी चुदाई बंद हो गई।
लेकिन वहां जाने के महीने भर बाद पता चला कि वो प्रेग्नेंट भी हो चुकी है।
मगर प्रेग्नेंट होने के बावजूद भी देवर ने उनको 3 महीने तक जमकर चोदा।
फिर वो वापस आ गए।
फिर देवरानी की डिलीवरी तक अदला-बदली वाला खेल बंद हो चुका था।
अगली कहानी में मैं आपको बताऊंगी कि कैसे मेरी गांड चुदाई हुई।
और देवरानी के प्रेग्नेंट होने के बाद मेरी आगे की चुदाई का क्या सीन रहा था।
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मेरी ईमेल आईडी है- choudharyvartti@gmail.com