देवर के साथ पहली चुदाई रात

Views: 289 Category: Bhabhi Sex Story By anky25delhi Published: March 12, 2026

देवर सेक्स कहानी में मेरे पति से मुझे बेबी नहीं हुआ. एक दिन मुठ मारते हुए देवर का लंड देख लिया मैंने. मुझे अच्छा लगा. देवर ने भी मुझे प्रेग्नंट करके की ऑफर दी.

दोस्तो, मेरा नाम शालिनी है मेरी उम्र 26 साल है।
और मेरा फिगर एकदम सेक्सी माल की तरह है जो भी मुझे देखे, उसका लन्ड मुझे चोदने को फड़कने लगे.

मेरी देवर के साथ चुदाई पिछली साल की है.
मेरी शादी को 2 साल हो चुके थे,और मेरी अब 3 महीने की बेबी परी है।
जो मेरे देवर की वजह से ही आई है।

तो समय बर्बाद न करते हुए सीधे देवर सेक्स कहानी पर आते हैं।

मेरी शादी 2021 में हुई थी और मैं घर में सबसे बड़ी बहू हूं.
मेरे पति दिल्ली में एक कंपनी में मैंनेजर हैं.

मेरे पति के अलावा मेरे एक देवर है जिनका नाम मनीष है.
उनकी उम्र 25 साल है.
और मेरी एक ननद खुशी है जिसकी उम्र 21 साल है।

हमारी वैवाहिक जीवन सुखी था, मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते थे।

लेकिन 2 साल होने वाले थे, अभी तक मैं प्रेगनेंट नहीं हुई थी।
मेरे पति ने हर प्रयास करके हर तरीके से मुझे चोदा लेकिन मैं प्रेगनेंट नहीं हो पा रही थी।

मेरे पति मुझे चुदाई भरा बहुत प्यार करते हैं, उनका लन्ड 7 इंच का हैं जो मुझे और मेरी चूत को बहुत खुश रखता है।
लेकिन मुझे मां बनने का सुख नहीं मिल पा रहा था.

फिर एक दिन की बात है, मेरे पति ऑफिस गए हुए थे, ननद कॉलेज गई हुई थी और सास ससुर अपने कमरे में थे.
मेरा देवर मनीष अपने रूम में था।

दोपहर का समय था तो मैंने मनीष को खाना खाने के लिए कॉल की तो उसने मेरी कॉल कट कर दी और खाना लेने भी नहीं आए।
फिर मैं ही ऊपर उनको खाना देने गई.

तो मैंने देखा कि देवर जी लैपटॉप में पोर्न देखते हुए अपना करीब 7 इंच का लन्ड हिला रहे थे।

उनका मुंह दरवाजे की तरफ नहीं था इसलिए उन्होंने मुझे नहीं देखा था।

फिर मनीष को देखकर मेरे बदन में भी एक बिजली सी चमक गई, मेरी नज़र उसके लन्ड पर से हट ही नहीं रही थी।

पर मैंने खुद पर कंट्रोल किया और मनीष के सामने आकर खड़ी हो गई।
मुझे देखकर मनीष ने झट से लैपटॉप बंद किया और अपने लन्ड को छिपाने लगे, फिर बोलने लगे- भाभी आप यहां कैसे?
तो मैंने कहा- मैंने तो कॉल की थी. लेकिन देवर जी अपना मूड बनाने में व्यस्त हैं तो मैंने सोचा मैं ही दे आऊं।

फिर देवर जी बोले- सॉरी भाभी, वो तो बस ऐसे ही।
तो मैंने भी मजे लेते हुए बोला- लगता हैं देवर जी से अब कंट्रोल नहीं हो रहा, देवर जी के लिए देवरानी लानी पड़ेगी, फिर इसका यूज उनके साथ करना।

तो मनीष शरमाने लगा और अंडरवियर पहन कर लन्ड छिपाने लगा.
तब मैंने भी बोल दिया- अब क्या छिपा रहे हो, मैंने तो देख ही लिया, वैसे आपका वो मस्त हैं, देवरानी जी खुश रहेगी।

तो मनीष बोलने लगा- क्यों भाभी, आप खुश नहीं हो क्या?
मैं शरमाने लगी और बात काटने की कोशिश करने लगी।

तो देवर बोलने लगा- बता दीजिए भाभी, अगर खुश न हो तो मैं आपकी कुछ हेल्प करूं?
तभी मैंने कहा- नहीं, मैं ठीक हू और तुम्हारे भैया को पता लगा तो मार ही डालेंगे।

तो मनीष बोलने लगा- अरे भाभी, आप डरते बहुत हो.
मैं भी बोलने लगी- नहीं जी, मैं नहीं डरती।

मनीष बोलने लगा- अच्छा भाभी, एक काम तो कर दो देवर जी का?
तो मैंने कहा- हां बोलो?
तो वह बोला- आपकी देवरानी नहीं है तो तब तक आप ही इसको शांत कर दो।

मैं ये सुन के थोड़ा सहम सी गई लेकिन मैं घबराई नहीं और मैंने बोल दिया- आपकी अपनी गर्लफ्रेंड है न … उसको बोलो, वो शांत करेगी।
तो बोला- नहीं है भाभी।

तब मैं जाने लगी तो मनीष बोलने लगा- अच्छा भाभी, हिला तो दो.
मैंने फिर ‘ठीक है’ बोल के उसका लन्ड जैसे ही हाथ में लिया तो उसका लन्ड मेरे पति के लन्ड से काफी मोटा लग रहा था और मुंह में लेने का मन करने लगा।

मै उसका लन्ड हिलाने लगी तो मनीष पूछने लगा- भाभी, मेरा लन्ड कैसा है?
तो मैंने भी बोल दिया- बहुत ही मस्त, मेरी देवरानी खुश हो जाएंगी।

मनीष पूछने लगा- और भाभी, आप?
तो मैं चुप हो गई।

तब मनीष बोलने लगा कि आज रात आप आ जाना. फिर देखना अपने देवर का कमाल!
तो मैं बोलने लगी- तुम्हारे भैया रहते हैं तो कोई चांस नहीं है.

अभी मैं देवर जी का लंड हिला ही रही थी, तभी सासु मां आवाज देने लगी तो मैं जाने लगी.
तो मनीष आने मुझे पकड़ लिया और हिलाने को बोला.
पर मैं जाने लगी.
तो वो बोलने लगा- रात को आओगी तभी जाने दूंगा.
तो मैं ‘ठीक है’ बोलकर हाथ छुड़ा के चली गई।

फिर रात का खाना बनाया और सभी ने खाया.
तब देवर इशारा करके रात में आने का बोलने लगे।
फिर रात हो गई और मैंने अपने पति के साथ खाना खाया, और फिर हम सोने लगे।

पतिदेव थके हुए थे तो उस रात चोदा नहीं बस प्यार किया, किस की और मेरे से चिपक कर सो गए।
मुझे नींद नहीं आ रही थी और चूत में कुछ होने लगा था, समझ नहीं आ रहा था कि जाऊं या नहीं.

देखते देखते 1:30 बज गया.
लेकिन मुझे नींद ही नहीं आ रही थी.

तभी देवर का मैसेज आया- भाभी, मैं आपका इंतजार कर रहा हूँ. कितनी देर में आ रही हो? मेरा लन्ड आपका इंतजार कर रहा है.

देवर की बात से मेरा और मन करने लगा जाने का.

तभी एक और मैसेज आया- भाभी, आप आ रहे हो या नहीं?
तो मैं हां का मैसेज करके चली गई।

मैं जैसे ही मनीष के रूम में गई, तो एकदम से मनीष ने अपनी तरफ खींच लिया और वो सिर्फ कच्छे में मेरे सामने था।
देवर सेक्स के लिए उतावला था, उसने बिना पूछे मुझे बेड पर लिटाया और किस करने लगा।

जैसे ही उसने मेरी चूत में उंगली डाली तो मेरी बॉडी में एकदम सी झनझनाहट सी होने लगी और मैंने मनीष को पकड़ लिया.

उसने मेरे हाथ में लन्ड दिया और मुंह में लेने को बोला.
तो मैं भी झट से चूसने लगी।
उसका लन्ड में कुछ अलग सी बात ही थी.

फिर उसने मेरी चूत को चाटा, उसके चाटते ही मैं तो आउट ऑफ कंट्रोल होने लगी।
फिर मैंने भी बोल दिया- अब तड़पाओगे ही या प्यार भी करोगे?

मेरी आवाज सुनते ही जैसे ही मनीष ने अपना लन्ड मेरी चूत में डाला, तुरंत ही मैंने उसको जकड़ लिया।
उसका लन्ड मैं अपनी चूत में महसूस कर रही थी.
उसका लन्ड बाहर निकालने को मन नहीं कर रहा था.

फिर उसने धीरे धीरे से लन्ड को अंदर बाहर करना शुरू किया।
मेरी हवस और बढ़ती जा रही थी.

जैसे जैसे उसने धक्के लगाने शुरू किए, वैसे ही मुझे हल्का दर्द और चुदाई का मजा आने लगा।
फिर वह तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा, मेरे बूब्स टाइट से पकड़ कर दबाने लगा और तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा।

फिर 10 मिनट तक चोदा और फिर मुझे डॉगी स्टाइल में करके मेरी चूत में डाले तेज़ तेज़ चोदने लगा।
मैं देवर के प्यार में घुली जा रही थी।

फिर थोड़ी देर बाद मेरा ऊपर आने का मन हुआ तो मैंने मनीष को नीचे लेटाया और खुद ऊपर आकर लन्ड की सवारी करने लगी.
मैं उतनी स्पीड से नहीं कर पा रही थी तो देवर ने 3-4 मिनट बाद ही मुझे नीचे पटका और बिना लन्ड निकाले मुझे चोदने लगे।

तभी मुझसे पूछने लगे- भाभी, देवर का लन्ड कैसा लगा?
तो मेरे मुंह से निकल गया- तुम्हारे भैया से भी ज्यादा मस्त है.

तो वह बोलने लगा- जब तक आपकी देवरानी नहीं आती, तो भाभी को प्यार कर सकता हूँ क्या?
मैंने भी बोल दिया- जो करना है कर सकते हो।

यह सुनते ही वो और जोश में आ गया और तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा।
तब वो पूछने लगा- भाभी, पानी कहाँ निकालूं?
तो मैंने भी बोल दिया- जहाँ मन करे, निकाल दो।

तब वो बोलने लगा- अंदर निकाल दूँ?
तो मैंने बोल दिया- निकाल दो.

और तभी 10 सेकंड में वो मेरी चूत में ही झड़ गया, उसका माल मैं अपनी चूत में फील कर पा रही थी.
वो झड़ कर मेरे ऊपर लेटा रहा।

फिर 10 मिनट के बाद वो मेरे ऊपर से उठा और सॉरी बोलकर बोलने लगा कि अंदर निकल गया.
तो मैंने भी ‘कोई नहीं’ बोल दिया क्योंकि मैं चाह रही थी कि देवर जी का पानी ही मुझे प्रेगनेंट कर दे.

और उस रात की चुदाई ने मुझे बहुत मजा दिया और फिर मैं अगले 2 दिन पति से भी चुदी ताकि मनीष से प्रेगनेंट हो भी जाऊं तो मेरे पति को कोई शक न हो.

और भगवान की कृपा से 2 महीने बाद मैं प्रेगनेंट हो गई और मैंने मेरी बेटी को जन्म दिया।
जो मेरे देवर की वजह से मुमकिन हुआ।

अब मैं और मनीष जब भी मौका मिलता है, हम चुदाई करते हैं.
इस तरह से मेरी और देवर की पहली चुदाई पूरी हुई।

तो दोस्तो, आपको कैसी लगी मेरी देवर के साथ चुदाई वाली रात?
कमेंट्स में जरूर बताएं.

अगर आपको देवर सेक्स कहानी अच्छी लगी तो हमारी चूत चुदाई की एक और कहानी आपको सुनाऊंगी।
धन्यवाद.
anky25delhi@gmail.com

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