सैंडविच चुदाई कहानी में गैर मर्द से चुदने के बाद मुझे उसने और उसके चाचा ने आगे पीछे से मुझे सैंडविच बना कर चोदा. एकने मेरी चूत में, दूसरे ने मेरी गांड में लंड पेला.
दोस्तो, सनोबर की चुदाई की कहानी में आपका स्वागत है।
कहानी के तीसरे भाग
गैर मर्द के लंड से तसल्ली हुई
में आपने देखा कि कैसे नावेद ने पहले राउंड में मेरी चुदाई की।
फिर उसने चुपके से मेरी गांड में डिल्डो लगा दिया। मेरी गांड का छेद भी उसने डिल्डो से चोद चोदकर चौड़ा कर दिया।
मैं बुरी तरह से थक गई थी। मेरी नींद एक अनजान आवाज से टूटी जो नावेद की नहीं थी।
अब आगे की सैंडविच चुदाई कहानी:
फिर तभी मुझे नावेद की हंसी सुनाई दी।
मैं सहम सी गई और आंखें बंद करके लेटी रही।
नावेद बोला- मैं अभी चाय के लिए जगाता हूं इसको!
नावेद ने मुझे हिलाते हुए कहा- गुड मॉर्निंग, जान … उठ जाओ, चाय पी लो।
मैंने मुस्कराकर आंखें खोल दीं।
नावेद ने मेरे गालों को चूम लिया।
चादर लपेटे हुए मैं उठ बैठी।
मैंने चाय पी।
मैंने नावेद से कहा- मैं उठकर फ्रेश हो लेती हूं। फिर मुझे घर भी जाना है। 8 बजने वाले हैं।
नावेद- ठीक है सोना … आप तैयार हो जाओ। ब्रेकफास्ट भी रेडी है।
फिर मैं टॉवल लपेट कर बाथरूम में चली गई और नावेद बाहर चला गया।
मैंने ब्रश की और फ्रेश होकर बाहर आई।
अब मैं नहाने के लिए गई तो नावेद भी आकर साथ में घुस गया।
वो बोला- सोना … साथ में नहा लेते हैं।
मैंने कहा- धत्त! पागल हो आप?
नावेद- अपनी सोना को अपने हाथ से नहलाऊंगा।
कहते हुए उसने शॉवर ऑन कर दिया और मेरे साथ में चिपक गया।
वो मेरे बदन को चूमने लगा। मेरी गर्दन और कान की लौ को होंठों से बार-बार छू रहा था।
मैं भी जैसे उसकी दीवानी सी होकर उसका साथ देने लगी।
फिर उसने शॉवर बंद कर दिया और मेरे बदन पर एक तेल लगाने लगा।
मेरे जिस्म के हर अंग, हर कोने में उसने तेल लगाया।
उसके बाद दोबारा से शॉवर ऑन कर दिया और फिर साबुन लगाकर उस तेल को छुड़ा दिया।
फिर उसने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा फैला दिया।
मेरी चूत और गांड पर साबुन रगड़-रगड़कर धोया।
इसी बीच मेरी नजर नावेद के लंड पर गई।
उसका लंड एकदम से तना हुआ तैयार खड़ा था और उसमें झटके लग रहे थे।
फिर उसने मुझे हल्का सा झुका दिया और तेल मेरी गांड के छेद में डाला।
उसने अपने लंड पर भी ऑयल लगा लिया।
उसने लंड को मेरी गांड के छेद पर रख दिया।
उसने मेरी कमर को पकड़ा और लंड को मेरी गांड में ठेल दिया।
मोटा लंड घुसते ही मैं चीख पड़ी- आई ईईई … मर गईईई … ऊईई आआह् … निकालो इसे … मैं मर जाऊंगी।
मैं रोने लगी और आंखों से आंसू बहने लगे।
तभी बाहर से किसी की आवाज सुनाई दी- अरे नावेद … आराम से पेलो, बहुरानी को बहुत दर्द हो रहा है!
मुझे ध्यान आ गया, ये तो चाचाजान की आवाज थी!
अब मुझे पता चला कि सुबह जब उठी तो चाचाजान ने मुझे नंगी देख लिया था।
खैर, फिलहाल तो मेरी गांड में ऐसा दर्द उठा था जो मैं सहन नहीं कर पा रही थी।
नावेद का लंड मेरी गांड को चीर रहा था।
वो भी तब जब नावेद ने रात को दो-दो डिल्डो से मेरी गांड का छेद चौड़ा किया था।
मैं दर्द और शर्म से दोहरी हुई जा रही थी।
लग रहा था कोई मोटा-गर्म सरिया मेरी गांड में घुसा दिया गया हो।
ऊपर से मैं हिल भी नहीं पा रही थी क्योंकि नावेद की पकड़ बहुत ही ज्यादा मजबूत थी।
नावेद के लंड का एक चौथाई भाग मेरी गांड में घुस चुका था।
मैं उससे विनती कर रही थी कि लंड निकाल ले।
वो बोला- थोड़ी देर रहने दो जान … दर्द ठीक हो जाएगा।
लेकिन इतने में ही मुझे चक्कर आने लगा।
मेरी हालत देखकर नावेद ने एकदम से मेरी गांड में से लंड को बाहर खींच लिया।
तब जाकर मेरी जान में जान आई।
मैं बोली- इतना मोटा लंड गांड में नहीं लिया जाएगा मेरे से!
वो हंसते हुए बोला- तो इससे छोटो लोगी?
मैंने कहा- नहीं, मैं सिर्फ तुम्हारी हूं। किसी और का क्यों लूंगी?
ये सुनकर वो खुश हो गया और उसने मुझे सीने से लगा लिया।
बोला- लव यू जान!
फिर हम दोनों नहाकर बाहर आ गए।
मैंने टॉवल लपेटा हुआ था।
नावेद दूसरे रूम में था।
उसने आवाज दी- अभी साड़ी मत पहनना। तुम्हारे लिए एक और ड्रेस निकाल कर रखी है।
मैंने देखा तो पास में ही एक ब्लैक गाउन पलंग पर रखा हुआ था।
साथ में ब्रा-पैंटी भी थी।
मैंने वो पहनी और खुद को आइने में निहारने लगी।
तभी मेरा ध्यान गया तो पीछे चाचाजान खड़े दिखाई दिए।
उनका नाम समीर था।
मैंने झट से खुद को तौलिया से ढक लिया।
वो बोले- जल्दी से आ जाइए, मैं नाश्ता लगा रहा हूं।
समीर के जाने के बाद मैंने गाउन पहना।
बाल संवारकर मैं तैयार हो गई।
रात की चुदाई के बाद मेरी रंगत में निखार आ गया था।
मेरा गोरा चेहरा जैसे गुलाबी हो गया था।
मेरी बुर भी ठुकाई के कारण गुलाबी हुई पड़ी थी।
काजल-बिंदी और लिपस्टिक लगाकर मैं बाहर गई।
बाहर समीर टेबल पर मेरा इंतजार कर रहा था।
समीर की नजर मेरे बदन पर थी और वो काफी प्यासी निगाहों से मुझे देख रहा था।
नावेद के आने के बाद हम नाश्ता करने लगे।
खाने के दौरान समीर ने मेरे पैरों को अपने पैरों से सहला दिया।
मगर मैं कुछ नहीं बोली।
नाश्ता होने के बाद मैं उठी और बोली- अब चलना चाहिए नावेद, लेट हो रहे हैं।
वो बोला- ठीक है, बेडरूम में चलो, जूस लेकर आता हूं, हम जूस पीकर निकलते हैं।
मैं बेडरूम में चली गई और वो दो गिलास जूस लेकर आ गया।
उसने एक गिलास मुझे देते हुए कहा- लो जान, पी लो।
उस जूस का टेस्ट मुझे अजीब सा लग रहा था।
फिर वो बोला- फिर कब मिलोगी जान?
मैंने कहा- जल्द ही मिलेंगे।
वो मेरे पास आया और मुझे बांहों में भर लिया और बेड पर लेकर बैठ गया।
मैं अब उसकी गोद में थी।
मुझे महसूस हुआ कि उसका लंड खड़ा था।
मुझे लग रहा था कि बाथरूम से आने के बाद उसका लंड बैठा ही नहीं है क्योंकि मैंने अभी तक गांड नहीं मरवाई थी उसके लौड़े से।
नावेद मेरी संतरे जैसी चूचियों को गाउन के ऊपर से ही दबा रहा था।
मैं भी मस्त हुई जा रही थी।
फिर वो मेरे चेहरे को अपनी तरफ करके मेरे होंठों को चूमने लगा।
मैं भी उसके होंठों में खो गई।
उसने तभी एकदम से उठकर मेरी आंखों पर एक काली पट्टी बांध दी।
मैंने कहा- ये क्या कर रहे हो?
नावेद- जान, जब तक मैं ना कहूं … इसे खोलना नहीं।
मैं घर जाना चाहती थी लेकिन नावेद ने अचानक ये सब कर दिया।
मैं समझ नहीं पा रही थी।
फिर उसने मेरे गाउन उतार दिया।
मैं अब केवल ब्रा-पैंटी में बेड पर लेटी थी।
उसने मुझे पेट के बल लेटा दिया और मेरी गांड को चूमने लगा।
मैं जान गई थी कि ये बंदा बिना गांड मारे मानेगा नहीं।
तभी उसने मेरी ब्रा और पैंटी को उतार दिया।
मैं अब पूरी नंगी थी।
वो अब बेतहाशा मेरे बदन को चूमने लगा।
कभी मेरी गांड को दांतों में भींच लेता तो कभी चूची को मुंह में भरकर हाथों से दबाते हुए उसे पीने लगता।
मैं कुछ ही देर में चुदासी हो गई।
मेरे बदन से आग निकलने लगी।
फिर उसका मुंह एकदम से मेरी चूत पर आ गया।
मैंने पाया कि उसका लंड मेरे मुंह के पास था। मैंने भी उसके लंड को बिना देर किए मुंह में भर लिया और चूसने लगी।
हम दोनों 69 की पोजीशन में एक दूसरे को चूसने लगे।
वो अंदर तक मेरी बुर के अंदर अपनी जीभ को धकेल रहा था जिससे मुझे गजब का मजा आ रहा था।
रात की चुदाई के बाद चूत थोड़ी दुख रही थी जिसमें नावेद की जीभ अब मरहम का काम कर रही थी।
मुझे ऐसी सुहावनी गुदगुदी हो रही थी कि मैं मचली जा रही थी।
नावेद फिर सीधा हो गया और उसने मुझे अपने लंड पर बिठा लिया।
चूत पहले से ही चिकनी थी तो उसका लंड मेरी चूत की फांकों को सहलाने लगा जिससे मुझे मजा आ रहा था।
लंड एकदम से चूत में सरक गया और मैं धीरे-धीरे कमर उचकाकर लंड को अपनी बुर में पूरा समाने लगी।
तभी नावेद ने कोई क्रीम मेरी गांड के छेद में भीतर तक लगा दी।
मैंने झुक कर अपनी चूची नावेद के मुंह में ठेल दी।
नावेद मेरी चूचियों को चूसने लगा।
उधर नीचे से मेरी गांड के छेद पर कोई लंड जैसी चीज सहलाने लगी जिससे छेद खुल गया।
मैंने सोचा कि नावेद ने कोई डिल्डो हाथ में उठा रखा होगा जिससे वो मेरी गांड को सहला रहा है।
तभी नावेद ने मुझे अपनी बांहों में कस लिया।
अब मैं उसकी बांहों की गिरफ्त में उसके सीने से चिपकी हुई थी।
उसके होंठों ने मेरे होंठों को कस कर भींच लिया था।
तभी एक झटके के साथ मेरे गांड के छेद में लंड का टोपा घुसता हुआ मुझे महसूस हुआ।
लेकिन हैरानी ये थी कि नावेद का लंड मेरी चूत में था, तो फिर ये दूसरा लंड किसका था?
नावेद ने उसी वक्त चूत में धक्के लगाना शुरू कर दिया।
उधर गांड में भी लंड के धक्के लगना शुरू हो गए।
मैं समझ नहीं पा रही थी कि चल क्या रहा है।
अब मेरे दोनों छेद चुदने लगे और मेरे मुंह से दर्द भरी आहें निकलने लगीं।
नावेद ने मुझे कस कर पकड़ा हुआ था।
दो मिनट के बाद उसने पट्टी हटाई तो मैं दंग रह गई।
मेरी गांड में समीर का लंड था।
अब मैं समझी कि नावेद ने समीर को यहां पर क्यों बुलाया हुआ था।
खैर मुझे अब दो-दो लंड से चुदने में पूरा मजा आ रहा था और मैं इस पल का आनंद लेने में लग गई।
चाचाजान का लंड भी पूरी रफ्तार पकड़ चुका था।
नावेद ने पूछा- कैसा लग रहा है जान डबल चुदाई करवाकर?
मैं मुस्करा दी और बोली- लाजवाब!
नावेद ने समीर से कहा- चचाजान, अब आप नीचे आओ, और मैं सोना की गांड चोदूंगा।
चाचाजान ने अपना लंड मेरी गांड से निकाल लिया और आकर नीचे लेट गए।
मैंने देखा उनका लंड समीर के जितना मोटा तो नहीं लेकिन उससे लम्बा काफी था।
मैं उठी और चाचा के लंड पर जा बैठी।
उनका लंड गच् से मेरी चूत में उतर गया।
वो दोनों हाथों से मेरी चूचियों को दबाने लगे।
वे बोले- बहूरानी, दूध तो पिला दो!
मैंने झुक कर अपनी चूची उनके होंठों से लगा दी।
वो प्यार से मेरे निप्पलों को चूसने लगे।
इधर नावेद अपने लंड पर वैसलीन लगा रहा था।
वो मेरी गांड के छेद पर अपना लंड रगड़ने लगा।
चचाजान ने अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को फैलाया जिससे गांड का छेद नावेद के लंड के सामने खुल गया।
नावेद ने लंड गांड के छेद पर लगा लिया तो समीर ने मुझे कस कर बांहों में भींच लिया और होंठों को अपने होंठों में दबा लिया।
मुझे उसके मुंह से अजीब सी स्मैल आ रही थी।
तभी नावेद ने अपना लंड मेरी गांड में ठेल दिया।
दर्द से मैं कराह उठी।
मैं चिल्लाना चाहती थी लेकिन मेरी जुबान तो समीर के मुंह में कैद थी। मैं तड़प गई और समीर की बांहों में छटपटाने लगी।
मैं निकलना चाहती थी लेकिन चाचाजान ने मुझे पकड़ से छूटने न दिया।
धीरे-धीरे नावेद अब मेरी गांड में लंड को आगे-पीछे सरकाने लगा।
समीर ने भी धक्के तेज कर दिए।
मैं कराहते हुए दो-दो लंड के धक्कों का मजा ले रही थी।
समीर का लंबा लंड मेरी बुर को बुरी तरह चोद रहा था, वहीं नावेद का मोटा लंड मेरी गांड को आधा घुसा हुआ ही चोदे जा रहा था।
कुछ ही पल में मैं दर्द से उबर आई और मस्ती से भर गई।
अब मुझे वाकई में सैंडविच चुदाई में मजा आने लगा।
पहली बार दो-दो लंडों का अहसास मिला था।
कुछ ही देर में मैं स्खलन के करीब पहुंच गई।
मन कर रहा था बस चुदती चली जाऊं।
मेरे मुंह से लगातार सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह … आह्ह … आईई … आह्ह … उईईई ओह्ह!
इतने में ही समीर के मुंह आह … आह्ह की आवाज निकली और वो मेरी चूत में ही झड़ने लगा।
मैं भी सीत्कार उठी क्योंकि नावेद के लंड का गर्म लावा मेरी गांड में गिरने लगा।
इससे मेरी चूत ने भी सारा रस उड़ेल दिया और समीर का लंड पूरी तरह से भीग गया।
हम तीनों खाली हो गए।
तीनों जोर से हांफ रहे थे।
कुछ देर हम ऐसे ही पड़े रहे।
फिर नावेद उठा और मेरी गांड से लंड को निकाल दिया।
मैं भी उठ गई और समीर के लंड के चूत से निकलते ही रस उसकी जांघों पर गिरने लगा।
मेरी चूत बुरी तरह से टपक रही थी।
मिश्रित वीर्य की बूंदें फर्श पर गिराती हुई मैं वाशरूम में घुस गई।
फिर मैंने खुद को अच्छी तरह से साफ किया।
हम तीनों फ्रेश हुए और कपड़े पहने।
फिर कुछ देर हम वहीं बैठकर बातें करते रहे।
उसके बाद हमने थोड़ी देर आराम किया और फिर घर के लिए निकल गए।
दोस्तो, यह थी सनोबर की चुदाई की कहानी।
आपको यह कहानी कैसी लगी मुझे तक अपनी राय जरूर भेजें।
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