Chachi Ne Padhaya Mujhe Prem Ka Path - 1

Views: 44 Category: Chachi Ki Chudai By sanchitgupt123 Published: February 02, 2026

सेक्सी चाची लव स्टोरी में मेरे पड़ोस में एक परिवार की युवा बहू छत पर कपड़े सुखाने आती थी. उसी वक्त मैं व्यायाम करने छत पर जाता था. उसकी खूबसूरती मैं अपनी नजरों से अपने दिल में समाता था.

रात के दो बज रहे थे.
मैं अपनी छत से अर्शिका चाची की छत बीच की दीवार लांघ करके पहुंच गया था.
मेरे दिल की धड़कन एकदम तेज बढ़ी हुई थी.

अर्शिका चाची की छत पर सभी लोग ऊपर गहरी नींद में सोए हुए थे.
मैं तत्काल उनके घर की नीचे जाती सीढ़ियों पर आ गया।

एक बार ऊपर देखा फिर छत और नीचे के कमरे को जोड़ने वाले दरवाजे को धीरे से बिना आवाज के बंद कर दिए.

अब एकदम निश्चिंत होकर धीरे से दबे पांव नीचे उतरा।

एक भयानक उत्तेजना से मेरा तन बदन रोमांचित हुआ जा रहा था.

कल ही पहली बार छत हमारी दोनों की मुलाकात में मुझे अर्शिका चाची की ओर से हल्का सा ग्रीन सिगनल मिला था.
जिस अंदाज से अर्शिका ने अपनी भाभी को बताया था- आज मैं नीचे ही सोऊंगी अकेली!
और ‘अकेली’ शब्द पर जोर देते हुए उन्होंने मेरी ओर देखा था और अपने सूखे होंठों पर जीभ फेरती हुई हल्का सा मुस्कुराई थी.
उससे यह स्पष्ट था कि आज हम दोनों अपने दोस्ती के रिश्ते में एक कदम आगे बढ़ने वाले थे।

अर्शिका चाची अपनी भाभी से बात कर रही थी और मैं वहीं सामने खड़ा दोनों की बातें सुन रहा था.

“अर्शिका, नीचे गर्मी बहुत है. लेकिन कूलर चालू कर लोगी तो शायद सो पाओ!”
“सो जाऊंगी भाभी, आज थोड़ी तबीयत ठीक नहीं है तो ऊपर ठंडी हवा में कहीं और ज्यादा तबीयत खराब न हो जाए!” अर्शिका ने सेहत का हवाला देते हुए भाभी को बोला.

“ठीक है फिर … नीचे ही सो जाओ आज!” तबीयत ठीक हो तो फिर ऊपर परसों से सोने लगना!”
“अच्छा चलो रसोई में काफी काम है अब!” कहती हुई भाभी रसोई में चली गई।

मैं वहीं सामने दरवाजे पर खड़ा अर्शिका चाची को देखता रहा।

भाभी के जाने के बाद अर्शिका चाची मेरी ओर देखकर मुस्कुराई और बोली- क्या बात है संचित भैया … आज सुबह सुबह ही इधर चले आए? रात कैसी कटी कल आपकी?
मुझे छेड़ती हुई अर्शिका चाची बदमाश मुस्कुराहट के साथ बोली.

साथ ही साथ अपनी साड़ी पल्लू भी पतला समेट कर अपनी पेटीकोट में खोंस लिया और मेरे देखते देखते पेटीकोट भी और भी ज्यादा नीचे सरका दिया था.

अब उनके दोनों मादक उभारों के बीचोंबीच होती हुई साड़ी पेट के बीचोंबीच हीरे सी जड़ी गोल, गहरी कामुक नाभि को हल्का सा ढकती हुए एकदम नीचे पेटीकोट के धंसी हुई थी.

उनके दोनों पर्वत जैसे तने मादक स्तन, पतली चिकनी खमदार कमर, लंबा गोरा चिकना पेट और उसके नीचे योनि के ऊपर से शुरू होने वाले सुनहरे रोयें तक साफ नजर आ रहे थे।

मेरा लंड पैंट के ऊपर से ही तंबू बनाता हुआ खड़ा हो गया.

चाची मेरी हालत देखकर मजा ले रही थी- आज रात अकेली सोऊंगी भैया नीचे!

अर्शिका चाची मेरे करीब आती हुई मेरे लंड को गहरी नजर से देखती हुई बोलीं- आपको वक्त हो तो आ जाना … रात भर फुरसत में सब कुछ सिखा दूंगी आपको!
कहती हुई चाची मेरे एकदम पास आ गई थी.
इतने पास क उनके स्तनों की चोटियां मेरे सीने में टच होने लगी थी.
उनकी मादक खुशबू मेरे नथुनों में समा गई थी.

मैं दीवाना हो उठा था अर्शिका चाची के अंदाज का!

फिर वे रसोई में चली गई और मैं भी अपने लंड को सहलाता, दिन में सपने देखता आगे बढ़ गया।

अर्शिका ने जिस तरह से मेरी ओर देखा था और उनके इशारे जैसे थे, साफ जाहिर हो रहा था कि आज रात अर्शिका ने मुझे साफ आमंत्रण दे दिया था कि वे आज घर पर रात में नीचे अकेले रहेंगी.

और अब गेंद मेरे पाले में थी.
मेरी बांछें खिल उठी थी … मेरे अंग अंग में उत्तेजना भरी लहर तैर गई थी.

आज रात अर्शिका चाची मेरी आगोश में होंगी और उनका जो हाहाकारी हुस्न मैं रोज चोरी चोरी दीदार किया करता था, वो आज पहली बार मेरे सामने बेपर्दा होगा।

मैं तत्काल वहाँ से निकल कर पास की ही गुमटी पर जाकर खड़ा हो गया.

मनसुख भाई से एक सिगरेट मांग कर सुलगाई और दिमाग को अगली प्लानिंग में लगा दिया कि कैसे आज की रात को एक यादगार रात बनाना है.

सिगरेट खत्म करते करते तक मेरी आखों के सामने वो बीते पल तैरने लगे जिनमे मेरी और अर्शिका सेक्सी चाची लव स्टोरी शुरू हुई थी.

तो आपको अब मैं अपना एक छोटा सा परिचय और अर्शिका चाची से मुलाकातों के सिलसिले की जानकारी दे दूं ताकि आगे रोचकता और क्रम बना रहे।

मैं गुजरात के भावनगर का रहने वाला हूं.
मेरा नाम संचित है और मैं एक बहुत बड़े कारोबारी परिवार का हिस्सा हूं.

हम जिस सोसायटी में रहते हैं, उसी सोसायटी में मेरे घर से लगे हुए घर में कौशल नाथ जी और उनकी पत्नी अर्शिका अपने दो बच्चों के साथ रहते हैं.
उनका मेडिकल का अच्छा खासा कारोबार है भावनगर में ही!

मैंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी और कॉम्पिटिशन एग्जाम्स की तैयारी में लगा हुआ था.

घर पर दिन भर व्यापार की बातें होते रहने से मेरी रुचि पारिवारिक व्यापार में पूरी तरह खत्म हो गई थी.
मैं किसी भी तरह अच्छी सरकारी नौकरी की तैयारी में जी जान से लगा हुआ था.

यूं तो मेरी कॉलेज में कुछ गर्लफ्रेंड्स थी.
लेकिन मेरे संकोची स्वभाव के चलते मैं इस जमाने में भी अब तक कुंवारा ही था.
जबकि मेरी गर्लफ्रेंड्स ने ही काफी कोशिश करी थी और मौके उपलब्ध कराये थे.
लेकिन तब भी मैं किसी भी दोस्त के साथ सहज नहीं हो पाया था.

तब मेरी फ्रेंड्स मुझे छोड़कर मेरे दोस्तों से घुलमिल गई थी और फिर दोस्त से ही मुझे पता चला कि वे दोनों लिव इन में रहने लगे थे और दिन रात एक दूसरे में समाए रहते थे।

तो इस तरह कॉलेज के सालों में से अब तक तीन साल और बीत चुके थे और मैं किसी स्त्री के साथ को तरस रहा था.
लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी.

अभी पिछले कुछ महीनों से मेरे और अर्शिका चाची के बीच में नैन मटक्का शुरू हुआ था क्योंकि हमारी दोनों की छत आपस में लगी हुई थी.

अर्शिका चाची रोज सुबह 8 बजे नहा कर छत पर कपड़े डालने आती और उसी वक्त मैं सोकर उठते ही छत पर ही चला आता फ्रेश हवा लेने और कुछ देर की रिफ्रेशिंग वॉक के लिए!

तो मेरा और अर्शिका चाची का अमाना सामने पहली बार छत पर ही हुआ था.

और शुरू में तो वे चुपचाप आती, कपड़े सूखने डालकर कुछ देर अपने बाल सुखाती और फिर नीचे चली जाती.

मैं भी चोरी चोरी उन्हें देख तो लिया ही करता था लेकिन बात करने की पहल मैंने भी नहीं की कभी।

लेकिन पहले दिन से ही न जाने क्यों मैं उन पर फिदा होता जा रहा था.

वे नाभि से नीचे साड़ी बांधती थीं और गजब के कामनीय शरीर की मालकिन थी.
उनकी पतली कमर और गहरी नाभि पर मेरी नजर चोरी से बार बार चली ही जाती थी.

लंबे कद की अर्शिका चाची इकहरे शरीर की मालकिन थी.
दुबला पतला शरीर … सुंदर रसीले होंठ, उन्नत सुडौल उभार, पतली चिकनी खमदार कमर, गोरा चिकना पेट और उनकी गोलाकार गहरी कामुक नाभिकूप देखकर मैं पहली बार में ही उनका दीवाना हो चुका था।

लेकिन उनसे बातें शुरू करने में मुझे हमेशा झिझक सी होती रही तो उन्हें ताड़ने का सिलसिला तो मैंने कभी भी बंद नहीं किया.
वे मुझे खुद पर नजरें घुमाने का भरपूर मौका देती थी।

उनके शरीर पर साड़ी और भी ज्यादा सिमटती जा रही थी और अब उनकी कमर, पेट, गहरी नाभि के अलावा उनके दोनों स्तनों की चोटियां भी ब्लाउज के ऊपर से साफ दिखाई देने लगी थी.

जब वे कपड़े डालती तो हाथों के ऊपर नीचे होने से उनकी पतली कमर पर जो खम बनते और उनकी नाभिकूप और गोरा चिकना लम्बा पेट और भी ज्यादा खुल जाते थे.
तो मैं उनकी नजरें बचाकर उन्हें भरपूर ताड़ लिया करता था।

और उनके गुम्बदों जैसे सुडौल स्तन तो मानो पूरी तरह पर्वत की मानिंद एकदम तन कर खड़े रहते।

मैं धीरे धीरे बेशर्म होता जा रहा था और अब तो उनके मेरी ओर देखते हुए भी मेरी नजरें उनके स्तनों और नाभि पार टिकी हुई होती।

न जाने अर्शिका चाची मेरी ये हरकतें समझ पाती थी या नहीं … लेकिन उन्होंने कभी मेरे सामने अपने खुले अंगों को कभी नहीं छिपाया।

इसी तरह तीन महीने बीतने चले थे और अभी तक हम लोगों की कोई बात नहीं होती थी.
लेकिन बाकी ताका झांकी पूरी तरह चालू थी।

मैंने छत पर अब कसरत करनी शुरू कर दी थी.
अब मैं सिर्फ शॉर्ट्स और बनियान में उनके सामने ही व्यायाम करने लगता.
तो वे भी मेरी नजरें बचाकर कर मेरी बलिष्ठ भुजाए और चौड़ी छाती देखती रहती।

यह सिलसिला करीब तीन महीने तक चला.
और एक दिन वो भी आया जब हमारी पहली बार बात शुरू हुई और जब शुरू हुई तो सिर्फ बातों तक न रुकी.
वो रविवार की एक सुहानी सुबह थी जब मैं नहाकर ऊपर गया तो अर्शिका चाची भी कपड़े सुखाने ऊपर आई थी.

मेरी भरपूर नजर उस दिन पहली बार अर्शिका चाची पर पड़ी.
नहा धोकर एकदम महकती हुई चाची जब मेरे एकदम पास ही छत के उस पार के तार पर कपड़ा डालने लगी तो उनके कपड़े डालने के क्रम में उनकी साड़ी उनके कंधे से नीचे गिर गई.

मैं उस वक्त उनकी ही ओर देख रहा था और कुछ ही पल में जो अर्शिका चाची का कयामतखेज हुस्न मेरी नजरों के सामने आया … उसी पल से वे मेरे नजरों में दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत बन चुकी थी.

उनके गुम्बद जैसे तने हुए ठोस उभार और कंटीली पतली चिकनी खमदार कमर और गोरे चिकने मुलायम पेट पर बीचोंबीच हीरे सी जड़ी गोल गहरी मोहक नाभि देखकर मैं उनका दीवाना हो उठा था.

एकदम से उनका दुपट्टा गिरने से अर्शिका चाची भी हड़बड़ा गई थी.
मेरी नजरों से बचने का प्रयास करते हुए चाची ने साड़ी समेट कर कंधे पर रखा.
लेकिन उनकी हड़बड़ाहट में साड़ी फिर कंधे से नीचे गिर पड़ी थी.

बेचारी की हालत देखकर मैं भी बड़े असमंजस में पड़ गया था.
वे चाहती थी कि मैं नजर फेर लूं पर वे इतनी ज्यादा सुंदर लग रही थी कि मेरी नजर उन पर से हट ही नहीं पा रही थी।

उनकी नजरों में मैंने हल्की नाराजगी देखी जो मैंने तत्काल महसूस की और उसी वक्त अपनी सफाई में मेरे होंठों से उनकी निर्दोष तारीफ निकल पड़ी- माफ कीजिए चाची … लेकिन आप इतनी ज्यादा सुंदर लग रही हैं आज कि आप पर से मेरी नज़र ही नहीं हट पा रही!

उनकी कामुक नाभि और पतली कमर के नाजुक खम पर दृष्टि जमाए हुए मेरे होंठों से ये अस्फुट से शब्द निकले।
मेरी सफाई सुनकर उनकी नाराजगी के भाव हल्की मुस्कुराहट में तबदील हुए.
तब तक वे दूसरी बार सफलता पूर्वक साड़ी कंधे पर रख चुकी थी।

मेरी नजर अब भी उनकी पतली कमर गोरे पेट और गहरी नाभि पर टिकी हुई थी.

वे समझ गई और तत्काल उन्होंने अपने पेट को साड़ी से छुपाया और कपड़े पुनः सुखाने लग गई.

तब जाकर मेरी तंद्रा भंग हुई.

“लगता है अभी तक आपने सिर्फ पढ़ाई ही की है भैया?” मेरी ओर देखती चाची मुस्कुराती हुई बोली.
“हाँ तो कालेज तो पढ़ाई ही करने जाते हैं चाची. और क्या होगा वहाँ पर?”

“जैसी तुम्हारी नज़र मुझ पर चिपकी हुई है, उससे लगता है कोई लड़की दोस्त नहीं बनाई आपने भैया?” चाची हल्की सा मुस्कुराती हुई मुझे छेड़ती हुई बोली.
“ओह … नहीं चाची, वो बात नहीं है!” मैं तनिक हड़बड़ाया.

मैं थोड़ा सकुचाते हुए अर्शिका चाची की आंखों में देखते हुए बोला- वो ऐसी बात नहीं है चाची! मगर आप हैं ही इतनी ज्यादा सुंदर कि आपके बदन से नजर नहीं हटती।

दो पल के लिए उनकी आँखें चमकी- चलो कोई बात नहीं … जितना देखना है देखो आप … देखने पर तो कोई रोक नहीं है आपको. मगर देखने के आगे कुछ और सोचने मत लग जाना भैया जी!” अर्शिका फिर मुझे छेड़ती हुई आंख दबाकर मुस्कुराती हुई बोली.
“कुछ और क्या? मैं समझा नहीं चाची?”
“अच्छा ये चाची तो आप मुझे मत ही बोला करो भैया!”

“आपकी और मेरी उम्र सेम ही है. आप तो सिर्फ नाम लो मेरा … या फिर भाभी बोल लिया करो. आप चाची बोलते हों तो मुझे अच्छा नहीं लगता!” अर्शिका अपने साड़ी का पल्लू खींचकर पेटीकोट में दबाती हुई बोली।

“ठीक है फिर मैं आपको भाभी भी नहीं … सिर्फ अर्शिका बोलूं तो चलेगा न?”
“बिल्कुल चलेगा मेरे हीरो … आज से हम दोनों दोस्त हुए।” अर्शिका मुझे ‘मेरे हीरो’ बोलते हुए आँखें दबाकर मुस्कुराती हुई मानो मुझे प्रेम आमंत्रण ही दे रही थी.

लेकिन मैंने इसे अपना वहम समझा और खुश होकर उनसे सहमति कर ली.

“तो दोस्त बनने की खुशी एक हग हो जाए अर्शिका!” मैं अर्शिका की ओर बाहें बढ़ाए आगे बढ़ा.
और बिना उनकी सहमति के उनको बाहों में भर लिया.

मेरे अचानक से इस कदम से अर्शिका भी हक्की बक्की रह गई.

अरे छोड़िए संचित भैया … ये क्या कर रहे हैं?” मेरी बाहों में कसमसाती अर्शिका छुटने की कोशिश करने लगी.
“नहीं अर्शिका … आज तो हमारी दोस्ती का पहला दिन है. मुंह मीठा तो करना बनता है न!”

“नहीं. कोई मुंह मीठा नहीं होगा अभी. आप तो एकदम से ही आगे बढ़े जा रहे हो भैया? इतना बेसब्र होना भी ठीक नहीं है।”

वे आगे बोली- आपको जो भी करना है, अपने कॉलेज में एक गर्लफ्रेंड बनाइए और उसके साथ जो मन हो वो करिए।

मैं बोला- वो तो ठीक है … लेकिन मुझे कुछ करना आता ही नहीं!
“कोई बात नहीं … वो मैं सिखा दूंगी आपको!” कहते कहते अचानक अर्शिका ने अपने दांतों तले जीभ दबा ली.

तीर कमान से निकल चुका था.
मैं प्रफुल्लित हो गया- सच्ची … मैं तो कब से इस बात का इंतजार कर रहा था. बताओ कब सिखाओगी आप?
फिर से मैं अर्शिका के करीब जाकर उनसे सटता हुआ बोला.

“अभी जाइए घर अपने आप … देखती हूं कि आपको कब सिखाना है. शाम तक बताऊंगी.” और मुझे धक्का देकर वे मुस्कुराती हुई सीढ़ियों से नीचे चली गई।

और अब मेरा मन उन्हें अपने ख्यालों में ही चूमने सहलाने लगा था.

अगले ही पल मैं अपने विचारों में अर्शिका के भीतर समाया हुआ था और पूरी तरह एकाकार होकर हम दोनों बिस्तर पर कलाबाजियां खा रहे थे.
मेरा लंड एकदम कठोर होकर मुझे परेशान करने लगा था।

तत्काल मैं अपने छत पर बने कमरे में गया और अर्शिका चाची को आँखें बंद कर कल्पना में प्यार करते हुए अपने लंड को शांत करने लगा.

मुठ मारकर मुझे एक असीम शांति महसूस हुई और अब मुझे अर्शिका चाची के संदेश का इंतजार था।

तो यह थी अर्शिका चाची और मेरी प्रेम कहानी की शुरूआती कड़ी।

कहानी के दो भाग और हैं.
अब तक की सेक्सी चाची लव स्टोरी पर आप अपने विचार कमेंट्स और मेल में लिख सकते हैं.
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